बुधवार, 3 दिसंबर 2025

पाठकों का पत्र - सरकार कर्ज को कड़ाई से वसूले

कर्ज आदमी, मजबूरी में लेता है। अब उसकी नैतिक जिम्मेदारी बन जाती है, वह लिया कर्ज वापस करें। आज तो कर्ज लेना जैसे उधार का घी पीना रह गया है। आज लोगों का यही नजरिया है-लिया गया विशेष रूप से सरकारी कर्ज कोई लौटाने की चीज है। जैसे महाराष्ट्र सरकार ने किसानों का जून 2026 तक कर्जा माफ करने को कहा है। जब लिया कर्जा माफ हो जाये, तो वह खुश होगा और भी लोग है जो सत्ता के करीब होने के नाते जिन्होंने कर्ज ले रखा है। सरकार भी उनसे वसूली के लिए हल्के मन से दवाब डालती है। उनका बकाया बट्टे खाते में डाल दिया जाता है। कर्ज लेकर न लौटाना पड़े। इससे लोगों में यही संदेश जायेगा कि सरकारी बकाया भी कोई देने की चीज है। ऐसे लोगों की आदत हो गई है रूपया मारने की। और वह बड़ी शान से कहते हैं-सरकार का मारा है। तुम्हारे पेट में क्यूं दर्द हो रहा है। ऐसे लोगों की आदत हो गई है रूपया मारने की। और वह बड़ी शान से कहते हैं- सरकार का मारा है। तुम्हारे पेट में क्यूं दर्द हो रहा है। इससे लोगों में गलत संदेश जाता है। वहीं इस देश में ईमानदार लोग भी है जो बिजली, पानी या कोई देनदारी बाकी नहीं रखते। वैसे, कर्ज एक उधार की सांसों की तरह है। जब-तब वह जलील भी होता रहता है। अच्छा है सरकार ऐसी रेबरी बांटने से बचे। कर्ज को कड़ाई से वसूले।

दिलीप गुप्ता, बरेली

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