बुधवार, 24 दिसंबर 2025

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दुष्परिणाम दिल्ली के लिए घातक: बलविंदर सिंह

संवाददाता

नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) ने अरावली पर्वत श्रृंखला से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है, जिसमें 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को अरावली की श्रेणी से बाहर करने की व्याख्या की जा रही है। पार्टी का मानना है कि इस फैसले के वर्तमान स्वरूप से अरावली के संरक्षण को भारी नुकसान पहुँचेगा और दिल्ली का प्रदूषण व जल संकट और गहराएगा।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष बलविंदर सिंह ने कहा कि हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन यह कहना ज़रूरी है कि इस फैसले की व्याख्या और उसके ज़मीनी प्रभाव अत्यंत खतरनाक हैं। 

बलविंदर सिंह ने कहा इस निर्णय के बाद अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा, जो 100 मीटर से कम ऊँचाई का है, संरक्षण से बाहर हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपलब्ध भौगोलिक और पर्यावरणीय तथ्यों के अनुसार अरावली की लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियाँ 100 मीटर से कम ऊँचाई की हैं, केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही 100 मीटर से अधिक ऊँचाई का है। ऐसे में इस फैसले का सीधा अर्थ यह निकाला जा रहा है कि अरावली का बड़ा हिस्सा अब अरावली ही नहीं माना जाएगा, और यही व्याख्या अवैध खनन, ब्लास्टिंग और कंक्रीटीकरण का रास्ता खोल देगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले के बाद अरावली क्षेत्र में अवैध माइनिंग को वैध बनाने की कोशिशें शुरू हो जाएंगी, भू-माफिया और बिल्डर इस निर्णय की आड़ में पहाड़ियों को खत्म करेंगे और इसका सीधा असर दिल्ली की हवा, पानी और तापमान पर पड़ेगा।

बलविंदर सिंह ने कहा कि अरावली की ऊँचाई नहीं, उसका पर्यावरणीय चरित्र महत्वपूर्ण है। 100 मीटर से कम ऊँचाई की पहाड़ियाँ भी उतनी ही जरूरी हैं जितनी ऊँची पहाड़ियाँ। उन्हें अरावली न मानना विज्ञान और पर्यावरण दोनों के खिलाफ है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की पर्यावरणीय पुनर्व्याख्या की जाए।अरावली की पहचान ऊँचाई के बजाय उसके पारिस्थितिक महत्व के आधार पर तय की जाए। इस फैसले की आड़ में किसी भी प्रकार की अवैध माइनिंग या निर्माण की अनुमति न दी जाए। केंद्र और दिल्ली सरकार तत्काल स्पष्ट करें कि वे अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को कैसे बचाएंगी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) स्पष्ट करती है कि यह लड़ाई किसी संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस, पानी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। पार्टी अरावली की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ता अपनाएगी। “अरावली बचेगी तभी दिल्ली बचेगी” –

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