मंगलवार, 4 नवंबर 2025

भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य में आजीवन योगदान देने वाले कलाकार को किया जाएगा सम्मानित

संवाददाता

नई दिल्ली। भारतीय विद्या भवन, दिल्ली केंद्र, भारत की अग्रणी सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संस्था, जिसकी स्थापना वर्ष 1938 में महात्मा गांधी की प्रेरणा से कुलपति के एम. मुंशी ने की थी, अपना 87वां स्थापना दिवस भव्य 17वें संगीत समारोह के रूप में मना रहा है। यह समारोह भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति को समर्पित है। आयोजन शुक्रवार, 7 नवम्बर 2025 को कमानी ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में सायं 6:00 बजे से प्रारंभ होगा।

इस अवसर पर भारतीय विद्या भवन द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान "भवन संगीत शिखर सम्मान" भी प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के क्षेत्र में विशिष्ट एवं आजीवन योगदान देने वाले कलाकार को समर्पित है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री बनवारीलाल पुरोहित, ट्रस्टी एवं उपाध्यक्ष, भारतीय विद्या भवन तथा अध्यक्ष, दिल्ली केंद्र करेंगे, जबकि न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांबरे, न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय, मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाएँगे।

इस वर्ष के संगीत समारोह में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को प्रस्तुत करने वाली दो विशेष नृत्य प्रस्तुतियाँ होंगी

विद्वषी मधुलिता मोहापात्रा अपनी सहकलाकार श्रीमती साहना आर. मैया और श्रीमती पारिधि जोशी के साथ ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगी, जिसका विषय है "भाव और भक्तिः श्रद्धा के पावन पदचिह्न।"

विदूषी विधा लाल कथक नृत्यकी प्रस्तुति देंगी। उनके साथ संगत में रहेंगे श्री शुहेब हसन (स्वर), श्री हिरेन चाटे (तबला), श्री आशीष गंगानी (पखावज) और श्री आमिर खान (सरंगी)।

दोनों कलाकार संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित हैं।

भारतीय विद्या भवन का यह वार्षिक समारोह संस्था की उस विरासत को आगे बढ़ाता है, जिसने आठ दशकों से अधिक समय से भारत की सांस्कृतिक चेतना, संगीत और नृत्य परंपरा के संरक्षण और प्रसार का कार्य किया है।

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