शनिवार, 15 नवंबर 2025
फिर हारे और बुरी तरह हारे
देश की जांच एजेंसियां दिल्ली बम धमाके की जांच कर रहीं हैं, शीघ्र ही अपराधी सलाखों के पीछे होंगे: इकबाल सिंह लालपुरा
संवाददाता
नई दिल्ली। नई दिल्ली के ग्रेटर केलाष पार्ट 2 में स्थित राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमेंन इकबाल सिंह लालपुरा के कार्यालय में दिल्ली बम धमाके के संबंध में शोक सभा का आयोजन हुआ जिसमें आयोग के पेनल एडवायज़र मो. रियाज व उनकी टीम सदस्य उपस्थित हुए। सभा में गत दिनों 10 नवम्बर को दिल्ली लाल किले के नज़दीक पार्किग में बम धमाका हुआ जिसमें करीब 13 लोगों की मृत्यु हुई और कई लोग घायल हुए।
इस घटना में मरने वालों की आत्मा की शांती के लिए 2 मिनट का मोन वृत रखकर श्रद्धांजलि दी और घायल होने वालों के बेहतर स्वास्थय के लिए प्रार्थना की इस अवसर पर इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा दिल्ली बम धमाका से हम सबको बहुत दुख हुआ है। दुख की इस घड़ी में हम सब मरने वाले लोगों के परिजनों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है ईश्वर उन सबको सब्र, हिम्मत और हौसला दे। देश की जांच एजेंसियां इस धमाके की जांच कर रही हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मरने वालों को श्रद्धांजलि दी और घायलों से मिलने अस्पताल गए।
इस घटना पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अपनी पूरी नज़र रखे हुए हैं बहुत जल्द अपराधी सलाखों के पीछे होंगे। मो. रियाज़ ने कहा देश के मुस्लिम समुदाय के लोग इस घटना की कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं। इस घटना के अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए इस्लाम दुश्मन ताक़तें मुसलमानों को बदनाम करने और इस्लाम के विरूद्ध काम कर रहीं हैं ताकि इस्लाम को बदनाम किया जा सके। हम बेगुनाहों को कत्ल करने वालों को बिल्कुल मुसलमान नहीं समझते और ना ही इस्लाम बेगुनाहों के कत्ल करने की आज्ञा देता है। दुख की इस घड़ी में हम सब देश के साथ हैं और सरकार से अनुरोध करते हैं इन अपराधियों को ऐसी सज़ा दी जाए जो मिसाल बने।
इसके अलावा डा. मो. एजाज, मजा़हिर रज़ा ने कहा देश की सुरक्षा और शांती के लिए इस समय आपसी भाई चारा होना बहुत ज़रूरी है। सभा में उपस्थित सदस्य जो इस प्रकार हैंः सरदार सुरेन्द्र सिंह, प्रधान कालीचरण, मो. मुजाहिद खान, हाफिज़ मो. आदिल सैफ़ी, तारिक प्रवेज़ व आबिद हुसैन आदि।
गुरुवार, 13 नवंबर 2025
एक अनुकरणीय व्यक्तित्व के धनी लाल कृष्ण आडवाणी
बसंत कुमार
पिछले सप्ताह 8 नवंबर को भाजपा को फर्श से अर्श
तक पहुंचाने वाले एक अनुकरणीय व्यक्तित्व के धनी लाल कृष्ण आडवाणी जी का 98वां जन्म दिन था। आज वे सक्रिय राजनीति
से संन्यास ले चुके हैं शायद ही कोई नेता अब उनसे मिलने जाते हो। यद्यपि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम को अपने व्यस्त समय से समय निकालकर उनको जन्मदिन की
शुभकामनाएं देने उनके घर गए पर मेरी राय में भाजपा द्वारा उनके जन्मदिन पर पार्टी
के केंद्रीय कार्यालय से लेकर स्थानीय कार्यालयों में उनका जन्मदिन भाजपा संगठन को
मजबूत करने और उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली उनकी संगठन क्षमता के सम्मानार्थ एक
त्यौहार के रूप में मनाया जाना चाहिए था। आज हम आडवाणी जी के व्यक्तित्व राम जन्म
भूमि आंदोलन के नायक के रूप में और पाकिस्तान में मोहम्मद अली जिन्ना की मजार पर
जाने वाले खलनायक के रूप में देखते हैं लेकिन उनके 60 साल के अधिक के बेदाग छवि वाले
सिद्धांतों की राजनीति करने वाले व्यक्तित्व की चर्चा नहीं करते।
कुछ लोग उन पर यह तंज कसते हैं कि वे देश के
प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं बन पाए। इसका उन्हें दुख तो है पर ऐसा सोचने वालों
को यह याद होना चाहिए कि जब राम मंदिर आंदोलन उफान पर था और लालकृष्ण आडवाणी उसके
अगुवा के रूप में उभर चुके थे और लोकप्रियता के शिखर पर थे, तब पार्टी में उनके कद को चुनौती देने वाला कोई व्यक्ति नहीं था। उस समय आने वाले
चुनावों में अटल बिहारी वाजपाई जी को पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का
उम्मीदवार घोषित करके अपने लिए पार्टी के संगठन को मजबूत करने का दायित्व चुना। वे कई बार कह चुके हैं
कि भाजपा एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक संस्कृति है और इसका सदस्य होना मेरे लिए
गर्व की बात है और पार्टी ने मुझे मेरी आकांक्षाओं से अधिक दिया। ऐसे वटवृक्ष के
व्यक्तित्व की हर छोटे बड़े कार्यकर्ता के सामने चर्चा होना जरूरी है। आज हम कुछ स्वार्थी
नेताओं के कारण हिंदू राष्ट्र बनाने की होड़ में अगड़ा-पिछड़े, सवर्ण-दलित की बहस में
पड़े हुए हैं पर आडवाणी जी नेतृत्व में चल रहे राम मंदिर आंदोलन में सभी जातियों
के लोग एक सैलाब की तरह उनके साथ थे और उन्होंने भाजपा को सवर्णों और व्यापारियों
की पार्टी की छवि से निकाल कर सर्व समाज की पार्टी बनाने में अभूतपूर्व सफलता पाई।
देश में 1993-94 के आस-पास हवाला कांड हुआ जिसमें जैन डायरी में कुछ
नेताओं का नाम होने के वजह से पूरा राजनैतिक माहौल खराब हो गया और कई नेताओं को
अपने अपने पदों से त्याग पत्र देना पड़ा। दिल्ली के सबसे लोकप्रिय नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री मदन लाल खुरान का नाम
उछलने से उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। यद्यपि बाद में वे बेदाग निकले पर उन्हें
दुबारा दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं मिली और दिल्ली का दुर्भाग्य रहा कि
मदन लाल खुराना के बाद दिल्ली को वैसा कर्मठ मुख्यमंत्री नहीं मिला। हवाला कांड
में लाल कृष्ण आडवाणी जी का भी नाम सामने आया और उन्होंने अपने पद से त्याग पत्र
दे दिया और सार्वजनिक जीवन में तभी लौटे जब वे पूरी तरह से बरी हो गए। यह है उनकी नैतिकता की
राजनीति जिसका उन्होंने जीवन पर्यंत पालन किया और पार्टी में इसका पालन करने पर
जोर दिया। वो लालकृष्ण आडवाणी जी ही थे जिनके कारण भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे
कर्नाटक के शक्तिशाली व कद्दावरों नेता येदुरप्पा को त्याग पत्र देना पड़ा, जब नितिन गडकरी जी को
दुबारा भाजपा का अध्यक्ष बनाने की बात आई। उसी समय उनके ऊपर उनकी कंपनियों को लेकर वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर कुछ खबरें
आई और आडवाणी जी के विरोध के कारण गडकरी जी भाजपा के दुबारा अध्यक्ष नहीं बन पाए। यह थी आडवाणी जी की
स्वच्छ राजनीति के प्रति आस्था और संकल्प, इसके लिए उन्हें कितनी बड़ी कीमत
चुकानी पड़ी उन्होंने उसकी परवाह नहीं की।
वर्ष 1989 में राजीव गांधी सरकार पर बोफोर्स तोप खरीद में दलाली के आरोपों लगे और यह
चुनाव इसी मुद्दे पर लड़े गए और चुनाव के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के
प्रधानमंत्री बने और भाजपा ने उन्हें बाहर से समर्थन दिया और देश में पहली बार
मुफ्ती मुहम्मद सईद के रूप में मुसलमान गृह मंत्री मिले पर कुछ ही माह में घाटी से
कश्मीरी पंडितों को आतंकी संगठनों की धमकी के बाद घर द्वार छोड़कर भागना पड़ा और
चार दशक बाद भी वह कश्मीर से बाहर शरणार्थियों की तरह जीने को मजबूर हैं। उसके बाद विश्वनाथ
प्रताप सिंह जी ने वर्षों से लंबित पड़ी मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर ओबीसी
वर्गों के लिए 27% आरक्षण का मार्ग प्रशस्त कर दिया और बोफोर्स दलालों के नाम समाने लाने के बजाय
मुस्लिम तुष्टिकरण और पिछड़ा वर्ग जाति की राजनीति शुरू कर दी। 27 सितंबर 1990 को आडवाणी जी ने
सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकालकर हिन्दू जागरण की नींव रखी और इसके लिए उन्हें
कट्टर हिंदू की उपाधि मिली और भाजपा 2 सीट से बढ़कर 188 सांसद वाली पार्टी बन गई। यह उनका ही परिश्रम रहा की आज भाजपा दुनिया की सबसे
बड़ी पार्टी बन गई है। उसके बाद वे 2006 में पाकिस्तान यात्रा पर गए और पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की
मजार पर गए और उनके एक भाषण के आधार पर उन्होंने जिन्ना को सेकुलर कह दिया और यह
उनका इतना बड़ा अपराध रहा कि उन्हें नेता विपक्ष पद से भी हाथ धोना पड़ा। अपने इस दर्द को
उन्होंने अपनी पुस्तक राष्ट्र सर्वोपरि के लोकार्पण पर सरसंघचालक मोहन भागवत जी की
उपस्थिति में ही प्रकट किया कि रथ यात्रा के समय मुझे कट्टर हिन्दू कहा गया और
जिन्ना की मजार पर जाने और उन्हें सेकुलर कहने पर हिंदू विरोधी मान लिया गया। लेकिन यह माना जाना
चाहिए कि वे ऐसे राजनेता हैं जिसके लिए राष्ट्रहित सदैव सर्वोपरि रहा है।
एक जमीनी कार्यकर्ताओं के रूप में अपनी राजनीतिक
यात्रा शुरूकर के देश के उप प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में
उनकी विशिष्ट उपलब्धियां रही हैं पर उनमें अहम का भाव लेशमात्र नहीं दिखाई देता।
वे छोटे से छोटे कार्यकर्ता का सम्मान करते रहे हैं और उसकी भावनाओं की कद्र करते
रहे हैं। बात 2013 की है मैं अपनी पुस्तक "राष्ट्रवादी कर्मयोगी (कलराज मिश्र) लिख रहा था। यह मेरी पहली पुस्तक
थी। मैं उनके संदेश के लिए
एक प्रार्थना पत्र लेकर उनके आवास पृथ्वीराज रोड पर गया और देकर अपने घर आ गया। पत्र देकर मैं अपने घर
पहुंचा ही था कि उनके आवास से टेलीफ़ोन आ गया कि आपका पत्र तैयार है आकर ले जाएं। वहां
मैं गया वे मिले और पुस्तक के सफल प्रकाशन का आशीर्वाद दिया और यही नहीं मेरे
पुस्तक के लोकार्पण में आए, जबकि आजकल के छूटभैये नेता पुस्तक में सन्देश देने के लिए कई चक्कर लगवा देते
हैं और लोकार्पण कार्यक्रम में समय देकर भी नहीं आते। आज के नेताओं को आडवाणी जी
के इस प्रकार के दृष्टिकोण और कार्यकर्ताओं के प्रति स्नेह की आदत से सीखना चाहिए।
आज कल देश में एक राष्ट्र एक चुनाव की चर्चा जोरों पर
है। पूर्व राष्ट्रपति राम
नाथ कोविन्द की अध्यक्षता में बनीं समिति अपनी रिपोर्ट दे चुकी हैं, पर उन्होंने पहली बार
इसकी मांग प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से अनौपचारिक मुलाकात में कही थी। इसका वर्णन उनकी
पुस्तक राष्ट्र सर्वोपरि में मिलता है और इससे प्रेरणा लेकर मैने 18-6-2014 में एक आर्टिकल लिखा
था जो दैनिक वीर अर्जुन में प्रकाशित हुआ था। पर कैसा दुर्भाग्य है कि जगह-जगह एक
देश एक चुनाव की चर्चा होती है पर इन परिचर्चाओं में लालकृष्ण आडवाणी जी का नाम
नहीं लिया जाता।
उनके इस सुझाव के पीछे यह तर्क था कि 1969 के बाद से लोक सभा और
विधानसभा चुनाव अलग-अलग होने लगे हैं और हर समय कहीं न कहीं विधानसभा के चुनाव
होते रहते हैं और इन चुनावों के अलग-अलग आयोजन से बहुत पैसा खर्च होता है। इसके
अलावा प्रदेश के चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री सहित मंत्री भी चुनावी में
प्रचार में लगे रहते हैं और परिणाम यह होता हैं कि प्रधानमंत्री और मंत्रियों की
मेज पर फाइल महीनों तक पड़ी रहती हैं और सरकार का काम अवरुद्ध होता है। आडवाणी जी
की यह आशंका आज के युग में शत-प्रतिशत सही साबित हो रही है, आडवाणी जी को सच्चा
सम्मान यही होगा कि देश में एक राष्ट्र एक चुनाव की प्रणाली को लागू किया जाए और
उनके समय में विभिन्न राजनैतिक दलों के बीच स्वस्थ संवाद की परंपरा पुनः शुरू की
जाए।
(लेखक भारत सरकार के पूर्व उप सचिव और एक पहल नमक एनजीओ
के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)
मंगलवार, 11 नवंबर 2025
ई-रिक्शा चालक जुम्मन की दर्दनाक मौत! परिवार ने की सरकार से मदद की गुहार
सोमवार, 10 नवंबर 2025
बैटरी रिक्शा चालक जुम्मन धमाके में लापता, तलाश में परिजन बेहाल
नई दिल्ली:
लाल किला के पास सोमवार शाम हुए धमाके के बाद से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल
है। इस हादसे में 20 लोगों के
घायल होने और 12 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है,
वहीं कई लोग अब भी लापता हैं। इन्हीं में एक हैं बुलंद मस्जिद,
शास्त्री पार्क निवासी 35 वर्ष के मोहम्मद जुम्मन,
जो ई-रिक्शा चलाते थे और सोमवार शाम से गायब है। जुम्मन की आखिरी
लोकेशन लाल किला के पास मिली थी। परिवार नम आंखों से उनकी तलाश कर रहा है।
जुम्मन की फोटो
जुम्मन के चाचा इदरीश ने बताया
कि भतीजा रोज की तरह सवारियों को छोड़ने चांदनी चौक गया था। रात से हम उसे ढूंढ
रहे हैं, पर कोई सुराग
नहीं मिला। ई-रिक्शा में जीपीएस लगा था, जिसकी आख़िरी लोकेशन
लाल किला के एक नंबर गेट के पास दिखी थी। लेकिन जब वहां पहुंचे तो गाड़ी की लोकेशन
ऑन दिख रही थी, बाद में लोकेशन बंद हो गई।
ई-रिक्शा
चालक जुम्मन धमाके में लापता: उन्होंने
बताया कि जब परिजन लोकेशन पर पहुंचे तो पुलिस ने अंदर जाने की इजाजत नहीं दी और
अस्पताल जाकर देखने की सलाह दी। हम एलएनजेपी अस्पताल पहुंचे, लेकिन अंदर जाने नहीं दिया गया। किसी ने कहा कि मोर्चरी में
जाकर देख लो। हमने देखा, पर कोई कंफर्मेशन नहीं मिला। इदरीश
ने बताया कि पुलिस बस यही कह रही है कि अस्पताल और मुर्दाघर में जाकर देखो। हमने
चांदनी चौक थाने में शिकायत दर्ज कराई है। अब उम्मीद है कि जल्द कुछ खबर मिले।
जुम्मन की तलाश में परिजन बेहाल: इदरीश ने बताया कि जुम्मन को इलाके के अन्य रिक्शा चालकों ने सोमवार शाम करीब 6 बजे के आसपास आख़िरी बार देखा था। जुम्मन की पत्नी और परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन लगातार पुलिस से मदद की गुहार लगा रहे थे, हर गुजरते घंटे के साथ यह उम्मीद थी कि जुम्मन सुरक्षित मिल जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
बता दें कि दिल्ली के ऐतिहासिक
लाल किले के पास सोमवार शाम हुए विस्फोट ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। शाम 6 बजकर 52 मिनट पर लालकिले के पास एक कार
में धमाका हुआ, जिसमें अबतक 12 लोगों
की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए। यह धमाका, लालकिला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के बाहर आई-20 कार में हुआ। इस धमाके ने न केवल आसपास के बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी
मचा दी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी खड़े कर
दिए हैं।
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