बसंत कुमार
एक दिन एक वीडियो वायरल हुई जिसमें एक गरीब ब्राह्मण का घर दिखाया गया और घर देखकर लग रहा था कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय थी अगर घर के मुखिया को मनरेगा के तहत रोजगार दे दिया गया होता तो उस घर में बच्चे अच्छे से पल जाते पर ऐसा नहीं हुआ। इस वीडियो के अंत में संचालक ने ब्राह्मण परिवार की इस दुर्दशा के कारण प्राकृतिक संसाधनों के असामान्य वितरण, गरीबी उन्मूलन और बेरोजगारी के लिए सरकारों की लापरवाही को जिम्मेदार न ठहराते हुए डॉ. आंबेडकर के संविधान और दलित और आदिवासियों के लिए आरक्षण को दोषी ठहरा दिया। ऐसा लगता है कि जब से देश आजाद हुआ और पूना पैक्ट के कारण देश में आरक्षण लागू हुआ तब से ही अनेक सवर्ण समाज के लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। मानो आरक्षण से पहले भारत सोने की चिड़िया था और यहां कोई गरीब नहीं था।
दलित और आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षण के विरोधी एक सुर से कहते है कि आरक्षण जाति के आधार पर न होकर आर्थिक आधार पर होना चाहिए। जबकि आरक्षण शदियों से शोषित घृणित उपेक्षित समाज को मुख्य धारा में ले आने के उद्देश्य से किया गया। पर बार बात उठती आर्थिक आधार पर उठ रही मांगो को ध्यान रखते हुए केंद्र सरकार ने सवर्ण समाज के गरीब लोगो के लिये सरकारी नौकरियों में 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण की व्यवस्था कर दी, पर हो यह रहा है कि ईडब्ल्यूएस की पात्रता की आय सीमा 8 लाख रुपये की सीमा को धता बताकर सवर्ण समाज के करोड़पति और अरबपति लोग इस कोटे को लूट रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विस परीक्षा 2025 के आधार पर एक खुलासा हुआ है कि कोठियों में रहने वाले 10-10 गाड़ियों के मालिकों के बच्चे जुगाड से ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवा ले रहे हैं और गरीब सवर्णों का हक मार रहे हैं।
कुछ वर्ष पूर्व एक फिल्म आई थी जिसका शीर्षक था इंग्लिश मीडियम। इस फिल्म में नायक ईडब्ल्यूएस सीट पर एक नामी स्कूल में एडमिशन दिलाने के लिए अपनी कोठी छोड़कर एक झोपड़ पट्टी में रहने को मजबूर होता है और वह झोपड़ पट्टी में रहने वाले गरीब का हक मारकर अपने बच्चे का एडमिशन कराने में सफल हो जाता है, यह कहानी फिल्मों में नहीं हकीकत में होती है, जब से सरकार ने हर पब्लिक स्कूल में 25% सीटें ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के बच्चों द्वारा भरा जाना आवश्यक कर दिया है तब से दिल्ली में यह देखने में आया है कि ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के बच्चों की आरक्षित सीटों पर ग्रेटर कैलाश, साउथ एक्सटेंशन, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी जैसे पॉश इलाकों में रहने वाले लोगों के बच्चों को प्रवेश मिल जाता है। देश का रेवेन्यू कार्यालय इतना भ्रष्ट हो चुका है कि लेखपाल और कानूनगो की मुट्ठी गरम कर देने से एक करोड़पति ईडब्ल्यूएस का सर्टिफिकेट प्राप्त कर लेता है, गरीबों को आरक्षण की बात करने में बहुत अच्छा लगता है पर देश के भ्रष्ट सिस्टम में अमीरों को तो गरीब होने का प्रमाण पत्र तो मिल जाता है पर जो वास्तव में गरीब है उन्हें यह प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता।
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विस परीक्षा 2025के बारे में एक रिपोर्ट आई की कैसे करोड़पतियों के बेटा बेटी ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में आरक्षण का लाभ उठाकर आईएएस, आईपीएस या अन्य सेवा में चयनित हो जाते हैं। इस रिपोर्ट में ईडब्ल्यूएस कोटे में चयनित 104 उम्मीदवारों में से कई संपन्न विशेषाधिकार प्राप्त पृष्ठभूमि में से है। इस रिपोर्ट में सभी सफल 104 उम्मीदवारों की आर्थिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण किया गया है।
- ईडब्ल्यूएस कोटे से चयनित 104 उम्मीदवारों में से 84 ने सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी के लिए औपचारिक कोचिंग की थी और 67 उम्मीदवारों ने दिल्ली के महंगे और जाने माने संस्थानों से पढ़ाई की।
- इनमें से 46 उम्मीदवार प्रतिष्ठित निजी स्कूलों से पढ़े थे जहां पर लाखों रुपए में फीस जाती है।
- 28 उम्मीदवारों के माता पिता का अपना अच्छा खासा बिजनेस था और 10 उम्मीदवार कॉर्पोरेट या मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर चुके हैं।
- लगभग 11 उम्मीदवार आईआईटी या एनआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों से ग्रैजुएट है।




