14 अप्रैल 2026 को देशभर में भारत रत्न बाबा साहब डॉ आंबेडकर जी की 136वीं जयंती पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। बाबा साहब भारत की सांसदी इतिहास के इकलौते महापुरुष हैं जिनके 125 में जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा वर्ष 2015 में संसद का विशेष अधिवेशन आयोजित किया गया था और इस अधिवेशन में प्रधानमंत्री सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने देश के निर्माण में बाबा साहब के योगदान की चर्चा की थी। बाबा साहब के विषय में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संरक्षण चालक श्री मोहन भागवत जी ने कहा था कि जब हम विश्व के प्रमुख अर्थशास्त्रियों की बात करते हैं तो उसे सूची में डॉ अंबेडकर को प्रमुखता से पाते हैं,जब हम प्रमुख कानून विद की बात करते हैं तो डॉक्टर अंबेडकर का नाम सामने आता है,जब हम देश के संविधान निर्माण की बात करते हैं तोड्राफ्टिंग कमिटी के चेयरमैन के रूप में डॉक्टर अंबेडकर की भूमिका प्रमुख रूप से नजर आती है। जब हम देश के वंचित समाज के उत्थान की बात करते हैं तो बाबा साहब आंबेडकर, ज्योतिबा फुले, पेरियार, साहू जी महाराज आदि समाज सुधारको की श्रेणी में पाए जाते हैं।
मात्र 23 वर्ष की उम्र में डॉक्टर अंबेडकर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और उसके पश्चात लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से डॉक्टर ऑफ साइंस (डी एस सी) की उपाधि प्राप्त की। जिस उपाधि को प्राप्त करने में लोगों को 8 वर्ष का समय लग जाता है डॉक्टर अंबेडकर ने उसे उपाधि को मध्य ढाई वर्ष के परिश्रम से प्राप्त प्राप्त कर लिया था। उनकी शोध "प्रॉब्लम आप रूपी" ने भारत में रिजर्व बैंक आफ इंडिया और फाइनेंस कमिशन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया! उनकी आर्थिक शोधों और विचारों से प्रेरणा लेकर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों और वंचितों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए स्टार्टअप, स्टैंड अप इंडिया,मेक इन इंडिया, जनधन योजना आत्म निर्भर भारत जैसी योजनाओं को मूर्ति रूप दियाऔर आज भारत विश्व की पांचवी अर्थ व्यवस्था के रूप में स्थापित हो चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शीघ्र ही भारत विश्व की आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर लेगा।
बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने ब्रिटिश काल में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के दौरान डिप्रेस्ड क्लास के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की अपनी मांग मां वाली वे चाहते तो वंचित वर्ग के समुदाय के लिए एक अलग देश की मांग कर सकते थे पर वह दिल से पक्के राष्ट्रवादी थे और गांधी जी के साथ 1932 में पुणे पैक समझौते के माध्यम से वंचित समुदाय के लिए प्रशासन में भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु आरक्षण का प्रावधान करवाया जिसके परिणाम स्वरूप वंचित समाज आज समाज के मुख्य धारा में सम्मिलित हो रहा है और संविधान निर्माण के समय उन्होंने आर्टिकल 3 40 को संविधान में सम्मिलित करवाया जो पिछले वर्गों की स्थित की जांच के लिए आयोग गठित करने का प्रावधान करता है उन्होंने वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के सामने पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण की वकालत की थी और मंडल आयोग की सिफारिश के लिए एक मजबूत आधार दिया था इसलिए कोई क्या नहीं कर सकता की बाबा साहब अंबेडकर मात्र दलितों के नेता थे बल्कि उन्होंने अति पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण के लिए भी मजबूत आधार दिया।
बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिभा का सम्मान करते हुए ब्रिटिश इंडिया काल में वायसराय काउंसिल के श्रम सदस्य (श्रम मंत्री) के रूप में उन्हें नियुक्त किया गया। वह इस पद पर 1946 42 से लेकर 1946 तक रहे और श्रमिकों का सुधार के लिए अनेक प्रावधान किया श्रमिकों कार्य की अवधि 12 घंटे से हटाकर 8 घंटे करवाई और काम करने वाली महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) का प्रावधान किया! देश की जल नीति के लिए 1942 में सेंट्रल वोल्टेज वॉटरवेज इरीगेशन और नेवीगेशन आयोग के चेयरमैन के रूप में सूखा मुक्त भारत की नींव रखी। नदियों को आपस में जोड़ने के उनके सुझाव का मध्य प्रदेश की केन और बेतवा नदी के को जोड़ने की परियोजना का वर्ष 2025 में उद्घाटन करके माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ आंबेडकर के सपनों को मूर्ति रूप देने का प्रयास किया।
देश के कानून मंत्री के रूप में डॉक्टर अंबेडकर ने 1931 में हिंदू कोड बिल पेश किया जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पैतृक संपत्ति में उनका उत्तराधिकार था। पर जब कुछ रूढ़िवादी लोगों के कारण लोकसभा में यह प्रस्ताव पारित न हो सका तो उन्होंने कानून मंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया। भारत के इतिहास में डॉक्टर अंबेडकर इकलौते महापुरुष थे जिन्होंने महिलाओं के अधिकार के लिए अपना पद त्याग कर दिया दूसरे शब्दों में महिलाओं के अधिकार के लिए और उनकी शिक्षा के लिए ज्योति बा फुले और साबित्री बाई फूले के मिशन को आगे बढ़ाने का काम किया।
आज हमारा देश संप्रदायवाद की समस्या से जूझ रहा है देश में SIR की आलोचना हो रही हैऔर विपक्षी दलों ने इसको चुनावी मुद्दा बना दिया है जब कि मोदी सरकार अवैध घुसपैठ से देश को मुक्त करना चाहती हैं,पर 1940 की दशक मेंबाबा साहब की पुस्तक "पाकिस्तान एंड पार्टीशन आफ इंडिया" में लिखित बाबा साहब अंबेडकर की बात मान ली गई होती कि देश का धार्मिक आधार विभाजन न होयदि यह विभाजन अवश्यंभावी ही है तो तो दोनों देशों में जनसंख्या का संपूर्ण स्थानांतरण अर्थात सारे हिंदू भारत में और सारे मुसलमान पाकिस्तान में चले गए होतेऔर यह हो जाता तो आज देश इस गंभीर स्थिति से नहीं गुजर रहा होता। इसके लिए देश के विभाजन की सूरत में जनसंख्या के स्थानांतरण के लिय एक विस्तृत योजना बना ली थी पर प नेहरूऔर जिन्ना ने इस पर अमल नहीं किया और 1947में दोनों ओर से भीषण नर संहार हुआ लेकिन विभाजन के पश्चातभी जो मुसलमान याअल्पसंख्यक भारत में रह गए उनके जीवनकी सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए बाबा साहब ने संविधान में प्रावधान किए। जिसके कारण भारत को अपना देश मानने वाले मुसलमान व अल्प संख्यक सम्मान के साथ रह रहे हैं।
संविधान में विवादित अनुच्छेद 370 के पक्ष में बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर नहीं थे संविधान निर्माता के रूप में कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए पंडित नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को डॉक्टर अंबेडकर के पास भेजो पर उनके डॉक्टर अंबेडकर ने शेख अब्दुल्ला को यह कह कर मना कर दिया कि आप चाहते हैं कि कश्मीर की रक्षा और देश की जनता की कल्याण का जिम्मा भारत उठाए और उन्हें विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए परंतु नेहरू जी ने डॉ आंबेडकर की असहमति को नजर अंदाज करते हुए इस विवादित अनुच्छेद को संविधान में जुड़वाया परंतु वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के गृहमंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प के कारण यह विवादित अनुच्छेद संविधान से हटाया गया और आज कश्मीर देश का हिस्सा बना हुआ है और आज कश्मीर की क्रिकेट टीम रणजी ट्रॉफी चैंपियन है और कश्मीर के अनेक युवा सिविल सर्विस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल होकर देश की मुख्य धारा में शामिल हो रहे है।
बाबा साहब के महानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी 125वीं जयंती परवर्ष 2015में आयोजित संसद के विदेश विशेष अधिवेशन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जब विपक्ष सरकार को घेरने के लिए कोई बात कहना चाहती है तो वह डॉक्टर अंबेडकर को कोट (उद्धरित)करती है और सरकार भी अपने समर्थन में कोई बात कहना चाहती है तो वह भी डॉ आंबेडकर की कहिए लिखी बातों को कोट करती है यानि डॉ आंबेडकर पक्ष विपक्ष दोनों को स्वीकार्य हैं और यही डॉ आंबेडकर की महानता और विद्वता का परिचायक है।
(लेखक भारत सरकार के पूर्व उप सचिव और एक पहल नमक एनजीओ के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)



