गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

चुनौतियों का जवाब देने वाला बजट

अवधेश कुमार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक महिला के रूप में और लगातार नौ बजट पेश करके रिकॉर्ड बनाया है। हमारे आपके  लिए महत्वपूर्ण यह है कि उनके द्वारा प्रस्तुत बजट भारत के सभी समूहों की आकांक्षाओं, आंतरिक और बाह्य चुनौतियों व आवश्यकताओं , राजनीतिक मांग एवं नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा देश के घोषित आर्थिक विकास लक्ष्यों की कसौटी पर खरा है या नहीं? पिछले कुछ समय से उत्पन्न वैश्विक उथल-पुथल में भारत को अपनी विकास गति बनाए रखने के साथ नए वैश्विक साझेदारी ,निर्यात बाजार आदि विकसित करने तथा घरेलू उत्पादकों को नीतियों और प्रोत्साहन से समर्थन देने तथा सबके साथ समाज के निचले तबके से लेकर हर समूह की चाहत के बीच सामंजस्य बिठाने की चुनौती है। आर्थिक सर्वेक्षण में साफ कहा गया था कि वैश्विक उथल-पुथल जल्दी समाप्त नहीं होने वाला इसलिए भारत को मैराथन एवं स्प्रिंट दोनों दौड़ लगाने की आवश्यकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 53.47 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट पेश कर यह संदेश दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार इन चुनौतियों और संकटों को अवसर में बदलने की दृष्टि से काम कर रही है। कोई  लोक लुभावन घोषणा नहीं पूरा फोकस इस बात पर कि इस उथल-पुथल और अनिश्चितताओं के दौर में देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित, मजबूत और स्थिर होने के साथ विस्तारित भी हो, विश्व व्यापार के अनुरूप पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हो, किशोर और युवा वर्ग को भारत राष्ट्र के लक्ष्य और रोजगार दिलाने के अनुरुप शिक्षा,  रोजगार के अवसर के साथ समाज के सभी समूह के लोगों का जीवन सुरक्षित हो सहज हो तथा आवश्यक सेवाएं सहायक उपलब्ध हों …।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में तीन कर्त्तव्य के नाम पर लक्ष्य और बजट की सैद्धांतिक आधारभूमि स्पष्ट कर दिया। पहला, उत्‍पादकता और प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने  तथा वैश्विक उथल-पुथल के परिदृश्‍य में लचीलापन लाकर आर्थिक विकास को तेज करना और उसकी गति बनाए रखना। दूसरा, भारत की समृद्धि के पथ में सशक्‍त साझेदार बनाने के लिए लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और उनकी क्षमता बढ़ाना। तथा तीसरा,  सरकार की सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुकूलयह सुनिश्चित करना कि सार्थक भागीदारी के लिए प्रत्‍येक परिवार, समुदाय और क्षेत्र की संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच उपलब्‍ध हो। प्रधानमंत्री ने स्वयं अपने भाषणों में व्यापक सुधारो का संकेत दिया था। वित्त मंत्री ने कहा कि हम 12 साल से आर्थिक विकास की दिशा में काम कर रहे हैं और आर्थिक सुधार की गाड़ी सही रास्ते पर है, 350 से अधिक सुधार किए हैं और अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए इसकी गति बनाए रखनी पड़ेगी। उन्होंने आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए सात क्षेत्रों में पहल शुरू करने का प्रस्ताव रखा- रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण को तेज करना। दो, विरासत के औद्योगिक क्षेत्रों का कायाकल्प करना। तीन, चैंपियन एमएसएमई का निर्माण करना। चार, आधारभूत संरचना को सशक्त प्रोत्साहन प्रदान करना। पांच, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करना। सात, शहरों में आर्थिक क्षेत्र विकसित करना…।  आप देखेंगे कि अपनी सैद्धांतिक आधारों और इन प्रक्रियाओं की दृष्टि से बजट में व्यवहारिक साहसिक और विजनरी घोषणायें हैं।

तमाम उथल-पुथल के बीच नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अपने राजकोषीय अनुशासन को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। घोषित लक्ष्यों के अनुरुप राजकोषीय घाटा 4.4% तक सीमित रखना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसीलिए इस वर्ष के लिए 4.3% का लक्ष्य घोषित किया गया है। कर राजस्व में थोड़ी कमी है लेकिन ऐसी नहीं जिससे योजनाओं की दृष्टि से आवंटन में समस्याएं आयें। पूंजीगत खर्च जो मुख्ता आधारभूत संरचना पर खर्च होता है के लिए 12 लाख 20 करोड़ का आवंटन सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। यह कुल बजट का लगभग 23% है। यूपीए सरकार में कभी भी पूंजीगत ब्याज 7 – 8% से ज्यादा नहीं गया। यहीं पर सरकार की विचारधारा नीति और दुर्गा में सोच स्पष्ट होता है कि आपका सबसे ज्यादा फोकस किस बात पर है। यानी भारत को हर क्षेत्र में कृषि से लेकर कुटीर उद्योग, ग्रामीण उद्योग, कपड़ा, हस्तकरघा, वाहन, यातायात, सूचना तकनीक…. सभी क्षेत्र की आधारसंरचना इतनी सशक्त और विकास के अनुकूल बना दिया जाए कि आने वाले वर्षों तक इन पर आर्थिक गतिविधियां खिलखिलाती मुस्कुराती तेज गति से बढ़ती रहे।

कुछ और पहलुओं पर नजर दौड़ायें । विनिर्माण, सेवा और कृषि हमारी अर्थव्यवस्था और विकास के मूलाधार हैं। कुशल और दक्ष युवा वर्ग तैयार करना भारत का बड़ा लक्ष्य है,क्योंकि जब हम यूरोपीय संघ और अन्य देशों से मोबिलिटी समझौता करते हैं तो काम करने वालों के क्षेत्र का भौगोलिक विस्तार हो जाता है। बजट में शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता के नाम से एक स्थायी उच्चाधिकार समिति का गठन होगा जो सेवा क्षेत्र को विकसित भारत का मुख्य चालाक बनने के लिए आवश्यक उपायों की अनुशंसा करेगा।  2047 तक भारत का सेवा क्षेत्र में वैश्विक हिस्सा 10 प्रतिशत तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निश्चित है। यह स्थायी समिति वृद्धि, रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को अधिकतम करने वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी। आप सोचिए दुनिया भर का जो सेवा क्षेत्र है उसमें हमारा योगदान कम से कम एक दही हो इसकी दृष्टि से ही नहीं भारत दूसरे छात्रों में भी भारत और विश्व की आवश्यकताओं के अनुकूल कुशल कार्यबल तैयार करने का एक स्थायी ढांचा तैयार किया जा रहा है ।उभरती तकनीकों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, का नौकरियों और स्किल पर प्रभाव आंकेगी और आवश्यक नीतिगत उपाय सुझाएगी। स्वास्थ्य पेशेवर बनाने वाले संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा जिसमें रेडियोलॉजी, एनेस्थीशिया जैसे क्षेत्रों पर फोकस होगा।  अगले पांच वर्ष में एक लाख एएचपी जोड़े जाएंगे तो 1.5 लाख केयर गिवर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा।

इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्‍नोलॉजी, मुम्‍बई को 15 हजार माध्‍यमिक विद्यालयों और पांच सौ महाविद्यालयों में ए.वी.जी.सी. कंटेंट क्रिएटर लैब (सी.सी.एल.) स्‍थापित करने में सहायता प्रदान किया जाएगा। आधुनिक समय में औरेंज इकोनामी दृष्टि से स्टोरी टेलिंग को क्रिएटिव आर्ट से मिलाने व गेमिंग, एनीमेशन आदि क्षेत्र का स्किल विकसित किया जाएगा। वैश्विक बायोफॉर्मा निर्माण केन्द्र के रूप में भारत को विकसित करने के लिए कुल 10,000 करोड़ रुपये से बायोफॉर्मा शक्ति की शुरुआत हो रही है जो बायोलॉजिक और बायोसिमिलरों के घरेलू उत्पादन के लिए अगले पांच वर्षों में इको-सिस्टम का निर्माण करेगी। इसकी रणनीति में तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) और सात वर्तमान संस्थानों के उन्नयन के साथ बायोफॉर्मा पर केन्द्रित नेटवर्क बनाया जाएगा। यह 1000 मान्यता प्राप्त भारत क्लिनिक जांच स्थलों के एक नेटवर्क का निर्माण करेगा। सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र में देर से आने के बावजूद अग्रणी देश बनने की दृष्टि से महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं। रेयर अर्थ मिनिरल्स अन्य दुर्लभ खनिज संसाधन की संपूर्ण दुनिया में मांग है और चीन 94% बाजार पर हिस्सा रखता है।‌हमें भी जब चाहता है तभी देता है । घरेलू कैपिटल-गुड्स क्षमताएं बनाने और एक स्वतंत्र आपूर्ति श्रृंखला खड़ा करने का लक्ष्य बनाया गया है। इसके लिए ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों में दुर्लभ पृथ्वी संसाधनों की खोज, खुदाई और संसाधन की श्रृंखला बनेगी।

विश्व को भारत के मुख्य निर्यात में कपड़े , वस्त्र,  चमड़े आदि के उत्पाद , आभूषण , इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि शामिल होते हैं। विश्व में प्रतिस्पर्धा के अनुरूप टिकाऊ वस्त्र और परिधानों को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से वस्त्र कौशल इको-सिस्टम के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए समर्थ 2.0 कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। इसमें श्रम प्रभावी वस्त्र क्षेत्र के लिए, पांच उपभागों के साथ एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानव निर्मित फाइबर और नए युग के फाइबरों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना है तो मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन ,परीक्षण एवं प्रमाणन केन्द्रों के लिए पूंजीगत सहायता के साथ पारम्परिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना। बुनकरों एवं कारीगरों की सहायता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम भी शुरू हो गया है। महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के जरिए खादी, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट पर केंद्रित करते हुए एक जिला-एक उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले युवाओं को बढ़ावा मिलेगा।  सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योगों का हमारे विकास व निर्यात में आज भी सर्वाधिक योगदान है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को 10 हजार करोड़ की विकास निधि का प्रस्ताव है जिससे ताकि भविष्य के चैम्पियनों का निर्माण किया जा सके और निर्धारित विशेषताओं के आधार पर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा सके। दर्शन मध्यम स्तर के उद्योग सुविधा खोने के दृष्टि से आगे नहीं बढ़ते और इसीलिए यह व्यवस्था की गई है ताकि वह आगे बढ़ें और उनको सुविधायें मिलती रहे।

कृषि के लिए चार आयामों में किसानों की आय बढ़ाना मुख्य है। पहली बार बहुभाषीय एआई टूल 'भारत विस्तार' बनाने का जबरदस्त योजना सामने आई है। इसके अलावा मत्‍स्‍य पालन, पांच सौ जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास, पशुपालन,  उच्‍च मूल्‍य वाली कृषि को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा। तटवर्ती इलाकों में नारियल, चंदन, कोको, काजू जैसे उच्‍च मूल्‍य वाली फसलों को प्रोत्साहन देने के लिए हर स्तर की सहायता प्रदान की जाएगी। 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में बदलने के के लिए समर्पित कार्यक्रम आया है। नारियल उत्‍पादन में प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना  बनी है। इससे तमिलनाडु, केरल, आंध्र , तेलंगाना के किसानों के लाभ होगा ।पूर्वोत्‍तर में अगर के पेड़ों और पर्वतीय क्षेत्रो में बादाम, अखरोट और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को प्रोत्‍साहन देने की भी समग्र योजना है। पशुपालन कृषि और डेयरी का मुख्य अंग है । इसके लिए घोषित कार्यक्रमों में  20 हजार से अधिक पशु डॉक्‍टरों की उपलब्‍धता योजना है। नि‍जी क्षेत्र में पशु रोग विशेषज्ञ और पैरा पशु शल्‍य महाविद्यालय, पशु अस्‍पताल, नैदानिक प्रयोगशालाओं और प्रजनन सुविधाओं के लिए ऋण संबद्ध पूंजी सब्सिडी सहायता योजना शुरू की गई है।

थल, जल और नभ यातायात में भारत वैसे ही दुनिया के अनेक देशों को पीछे छोड़ चुका है। एक बड़ा फोकस इस समय जल यातायात है। पर्यावरण रूप से टिकाऊ आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए  पूर्वी भारत में डानकूनी से पश्चिमी भारत के सूरत को जोड़ने के लिए नए समर्पित माल गलियारे, पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडब्ल्यू) का संचालन ,  जलमार्गों और तटीय पोत परिहवन की हिस्‍सेदारी 6 प्रतिशत से बढाकर वर्ष 2047 तक 12 प्रतिशत करने के लिए तटीय कार्गोनन, सात उच्च-गति रेल कॉरीडोर विकसित करना,  सी-प्‍लेन के स्‍वदेशी निर्माण के लिए प्रोत्‍साहन के लिए योजना आदि । इनके साकार होने के बाद कल्पना करिए कि भारत विश्व स्तरीय यातायात में कहां खड़ा होगा और यह हमारे आम जीवन से लेकर आंतरिक और विदेशी आर्थिक क्रियाकलापों के लिए कितनी बड़ी आधारभूमि होगी।

तो कुल मिलाकर 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य पाने और फिर उसके आगे सतत छलांग लगाते रहने की दृष्टि से वर्तमान एवं दूरगामी भविष्य के संभावित आवश्यकता है और चुनौतियों  की दृष्टि से बजट समग्र दृष्टिकोण और योजना प्रस्तुत करती है।

अवधेश कुमार, ई-30,गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली-110092, मोबाइल -9811027208

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

दिल्ली पुलिस VIPs के साथ-साथ सभी लोगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध

संवाददाता

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की माननीय मुख्यमंत्री को दिल्ली में Z+ कैटेगरी की सुरक्षा निर्धारित है। तय प्रोटोकॉल के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में उनकी सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की है और इस बारे में पश्चिम बंगाल पुलिस ने हमें पहले ही बता दिया था। इसके बाद, दिल्ली पुलिस ने चाणक्य पुरी और हेली रोड, दिल्ली स्थित बंग भवन में व्यापक सुरक्षा और कानून व्यवस्था के इंतज़ाम किए। दिल्ली पुलिस सामान्यतः साल भर अलग-अलग सुरक्षा और कानून व्यवस्था की ड्यूटी के लिए CAPF के कर्मियों की भी मदद लेती है और उन्हें भी इन कानून व्यवस्था/सुरक्षा इंतजामों के लिए तैनात किया गया था।

इस सिलसिले में, आज न तो कोई पुलिसकर्मी बंग भवन में घुसा है और न ही वहां रहने वालों की आवाजाही पर कोई रोक लगाई गई है। मिली जानकारी के अनुसार, बताया गया था कि एक राजनीतिक पार्टी के लगभग 150-200 समर्थक पश्थिम बंगाल से आए हैं और दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर रह रहे हैं, जिसमें साउथ दिल्ली, नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली इलाकों के गेस्ट हाउस होटल शामिल है। यह भी जानकारी मिली थी कि VVIP और वरिष्ठ नेता इन गेस्ट हाउस होटलों में जाएँगे। उसी के अनुसार इन जगहों पर पर्याप्त तैनाती की गई थी।

चूंकि संसद का बजट सत्र चल रहा है, इसलिए दिल्ली पुलिस संसद परिसर के अंदर और आसपास के साथ-साथ राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में भी पुख्ता सुरक्षा और कानून व्यवस्था के इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए उचित एहतियाती कदम उठा रही है। इसे हासिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग होटलों और गैस्ट हाउस के साथ-साथ व्यक्तियों की भी नियमित चेकिंग की जाती है। इसके अलावा, हम अलग-अलग स्तरों पर पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ लगातार संपर्क में हैं और हमे आधिकारिक या गैर-आधिकारिक तौर पर किसी भी अप्रिय घटना या सुरक्षा में चूक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

दिल्ली पुलिस VIPs के साथ-साथ दिल्ली में आने वाले सभी लोगों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उचित कानून व्यवस्था के इंतज़ाम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

चाणक्य वार्ता के बाल साहित्य विशेषांक का लोकार्पण, कांस्टीट्यूशन क्लब में हुआ भव्य समारोह

संवाददाता 

नई दिल्ली। समसामयिक विषयों की अंतरराष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका चाणक्य वार्ता के बाल साहित्य विशेषांक का विमोचन व परिचर्चा एवं सहस्त्र-चंद्र-दर्शन कर चुके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक लक्ष्मीनारायण भाला जी के जन्मदिवस पर दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आपको बता दे चाणक्य वार्ता ने अपने गौरवमय 10 वर्षों का सफर पूरा किया है। पत्रिका मौजूदा समय में भारत की लोकप्रिय पत्रिकाओं में एक मानी जाती है। इस कार्यक्रम में पत्रिका के बाल साहित्य विशेषांक का विमोचन किया गया। इस विशेषांक में 125 लेखकों ने बच्चों को केंद्र में बनाकर लेख, कहानियां, कविताओं के माध्यम से अपना योगदान दिया है। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू ने कहा कि चाणक्य वार्ता अपने आप में एक अद्भुत पत्रिका है। कोरोना काल के दौरान अनेक स्थापित पत्रिकाएं बंद हो गई मगर चाणक्य वार्ता इस कठिन समय में भी लगातार प्रकाशित होती रही। उन्होंने कहा कि इस पत्रिका ने कम संसाधनों में भी लंबा सफर तय किया है। यह दिखाता है कि जनहित से जुड़ी पत्रकारिता करने के लिए बहुत अधिक संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती है। श्री भाला के विषय में बोलते हुए श्याम जाजू ने कहा कि भाला जी 82 वर्ष की आयु में भी बहुत सक्रिय होकर कार्य कर रहें है।वें युवाओं के प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि भाला जी हमेशा लोगों की मदद करने के लिए आगे रहते हैं।

समारोह अध्यक्ष श्री ताई तागा, संरक्षक, विद्या भारती एवं पूर्व अध्यक्ष भाजपा, अरुणाचल प्रदेश ने इस मौके पर नॉर्थ ईस्ट के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाएं गए कदमों को लेकर कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने नॉर्थ ईस्ट को बाकी राज्यों के साथ सार्थक रूप से जोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन राज्यों के लोगों को एक नई पहचान देने का काम किया है। इसके अलावा मोदी सरकार के प्रयासों से नॉर्थ ईस्ट में विकास की गंगा बह रही है। समारोह को संबोधित करते हुए डाॅ. विनोद बब्बर, वरिष्ठ साहित्यकार ने चाणक्य वार्ता को 10 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं प्रदान की। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार एवं संविधान विशेषज्ञ लक्ष्मीनारायण भाला ने अपने संबोधन में कहा कि संघ की शाखा के माध्यम से उनको बच्चों से जुड़ने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि बच्चों से उन्होंने बहुत कुछ सिखा है वह कहते है कि उनको 10 से अधिक भाषाएं आती है यह सब उनको बच्चों के माध्यम से सीखने को मिली है। उन्होंने चाणक्य वार्ता को लेकर कहा कि वह इस पत्रिका के संरक्षक है और उनको गर्व है कि पत्रिका को देश के लाखों लोग अपना आशीर्वाद दे रहे है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह पत्रिका सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हो रही है। चाणक्य वार्ता आज जनसाधारण की आवाज बनकर सामने आई है। इस कार्यक्रम में डाॅ. बलराम अग्रवाल, बाल साहित्यकार, अलका सिन्हा, वरिष्ठ साहित्यकार ने भी अपने विचार साझा किए। वहीं इस कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत मृत्युंजय झा, मुख्य संयोजक द्वारा किया गया। स्वागत भाषण द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अजीत कुमार ने सभी का आभार जताया‌।कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अमित जैन, संपादक-चाणक्य वार्ता द्वारा किया गया।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को सकारात्मक दृष्टि से देखें

अवधेश कुमार

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तीन दिवसीय कार्यक्रमों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जैसी भी रही हो देश ने इससे सकारात्मक संदेश लिया है। कार्यक्रम के आकर्षक दृश्यों ने देश में अपने इतिहास -संस्कृति -सभ्यता -अध्यात्म को लेकर सुदृढ़ हो रही चेतना को और सामूहिक बल प्रदान किया है। स्पष्ट है पूरे कार्यक्रम की योजना अत्यंत गंभीर विवेचन के बाद बनी जिसमें अध्यात्म ,साधना व कर्मकांड सहित इतिहास और पराक्रम का समुच्चय उचित रूप में समाहित था। तीन दिनों के मंत्र जाप के कर्मकांडीय विधान के पीछे संपूर्ण वातावरण में सकारात्मक चेतना और ऊर्जा पैदा कर ब्रह्मांड के कल्याण में योगदान का भाव था तो 108 घोड़े के शास्त्रीय विधान के साथ शौर्य यात्रा न केवल सोमनाथ संघर्ष में बलिदान हुए लोगों को श्रद्धांजलि की ओर लक्षित था बल्कि आत्मविश्वास पैदा करने का भाव भी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। पूजा और अभिषेक के बाद उपस्थित जन समुदाय का संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिनने सोचा कि सोमनाथ मंदिर नष्ट हो गया वे कहीं समाप्त हो गए लेकिन आज भी सोमनाथ का यह पताखा लहराता हुआ बता रहा है कि हम पर चाहे जितने हमले हों हमें नष्ट नहीं कर सकते। अंत में उन्होंने कहा भी कि इसी विश्वास के साथ हमें भारत को आगे बढ़ाना है तथा दुनिया की ऐसी शक्ति बनानी है जो विश्व कल्याण में सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान दे सके।


2026 गुजरात के सोमनाथ मंदिर के लिए दो कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक, 1026 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर ध्वस्त कर दिया था, जिसके 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दूसरे, 11 मई, 1951 को स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष हो गए हैं। वर्तमान राजनीति एवं अन्य बौद्धिक क्षेत्र में इसे जैसे भी देखा जाए अगर स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल, विद्वान और नेता कन्हैयालाल मानणक लाल मुंशी सहित अनेक महापुरुषों ने इसके पुनर्निर्माण किया तो निश्चय ही इसके पीछे गंभीर विमर्श और चिंतन था। सोमनाथ का उल्लेख द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सबसे पहले आता है- "सौराष्ट्रे सोमनाथं च"।‌ इसका अर्थ है कि सोमनाथ को प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में सर्वोच्च स्थान दिया गया है। सोमनाथ पहला ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती के संगम पर स्थित है। इस त्रिवेणी संगम पर स्नान करने का अपना अलग महत्व है। मंदिर परिसर के बाणस्तंभ पर संस्कृत (आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिरमार्ग) और दूसरी तरफ इंग्लिश में एक अभिलेख है। इसमें लिखा है- इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक सीधी रेखा में कोई अवरोध नहीं है। यह वही स्थान माना जाता है जहां भगवान कृष्ण ने अपना शरीर त्याग कर वैकुंठ गमन किया था।


सोमनाथ: द श्राइन इटरनल पुस्तक में केएम मुंशी ने लिखा है कि गजनवी ने 18 अक्टूबर, 1025 को सोमनाथ की ओर बढ़ना शुरू किया और लगभग 80 दिन बाद, 6 जनवरी 1026 को किलेबंद मंदिर शहर पर हमला कर दिया।‌‌ सोमनाथ मंदिर में लूट और विध्वंस की घटना 8 जनवरी, 1026 की है। अनेक लोगों ने प्रश्न उठाया कि आखिर विध्वंस का उत्सव कैसे मनाया जा सकता है? प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से खड़ा हुआ। इतना धैर्य, संघर्ष और पुनर्निर्माण का उदाहरण दुनिया के इतिहास में दुर्लभ है। उनका यह वक्तव्य सबसे ज्यादा बहस का विषय बना है कि सोमनाथ को तोड़ने वाले आक्रांता आज इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं, लेकिन दुर्भाग्य से देश में आज भी ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण का विरोध करती रही हैं। इसे राजनीतिक वक्तव्य मान सकते हैं। किंतु सोमनाथ के इतिहास को बार-बार विकृत करने की कोशिश हुई। कुछ का मानना है कि सोमनाथ सात बार लूटा गया जबकि कुछ 17 आक्रमण की बात करते हैं। सबसे पहला आक्रमण मोहम्मद बिन कासिम के सूबेदार जुनैद ने किया था और अंतिम हमला औरंगजेब द्वारा। यानी 980 ई से लेकर 1702 तक सोमनाथ पर लगातार हमला होता रहा तो इसके पीछे केवल धन लूटना कारण नहीं हो सकता इस पर 1299 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति ने, 1394 में मुजफ़्फर खान ने और 1459 में ,महमूद बेगड़ा ने हमला किया था।‌ इसके बावजूद मंदिर रहा। वऔरंगजेब ने 1669 में इसे गिराने का आदेश दिया तथा 1702 में  इतना तोड़ दिया गया कि मरम्मत नहीं हो सकी और 1706 में इसे मस्जिद में बदल दिया गया। क्या इसे आप लूट का इतिहास कहेंगे ? नहीं तो इतिहासकारों ने सच्चाई का दमन क्यों किया?


रानी अहिल्याबाई होल्कर ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों में महत्वपूर्ण सोमनाथ की महत्ता को पहचानते हुए 1783 में पास में एक नया मंदिर बनवाया तथा विधिपूर्वक शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा कराई। उनकी सोच थी कि जब वास्तविक जगह पर मंदिर बनेगा तो बनेगा किंतु द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा में जाने वाले मस्जिद के पास से लौट जाएं यह अच्छा नहीं होगा, इसलिए वहां एक भव्य मंदिर होना चाहिए। स्वतंत्रता के बाद पिछले लगभग 1000 वर्ष के काल में ध्वस्त प्रेरणा, चेतना और भारत की अंत:शक्ति के केन्द्रों के पुनरुद्धार की बात उठी और इनमें सबसे पहला स्थान सोमनाथ का ही था।  सरदार पटेल 12 नवंबर, 1947 को जूनागढ़ गएऔर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया। मंदिर के निर्माण और धन की व्यवस्था के लिए सोमनाध ट्रस्ट की स्थापना की गई।‌ 15 दिसंबर ,1950 को सरदार पटेल का निधन हो गया तो मंदिर का दायित्व के एम मुंशी को दी गई। राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद यजमान बने, 1950 में आधारशिला रखी गई और 5 - 6 महीने में पहले चरण का काम पूरा हो गया। जनता द्वारा चंदे से लगभग 25 लाख रुपए इकट्ठे हुए थे। 11 मई, 1951 को राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने प्राण प्रतिष्ठा की। वैसे मंदिर संपूर्ण रूप में बनकर 1955 में तैयार हुआ। 


यहां इनमें विस्तार से जाना संभव नहीं है। किंतु पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल , केएम मुंशी, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद एवं अन्य नेताओं के बीच संबंधित पत्र व्यवहार देखेंगे तथा सार्वजनिक वक्तव्यों पर नजर दौड़ाएंगे तो पता चल जाएगा कि इसका कितना विरोध हुआ। पंडित नेहरू इसके पक्ष में नहीं थे लेकिन न वे सरदार पटेल को रोक सके न मुंशी को और न डॉ राजेंद्र प्रसाद को। इनके कारण अन्य नेता भी इसमें लगे। डॉ राजेंद्र प्रसाद तथा सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में भूमिका निभाकर परंपरा स्थापित किया था कि गुलामी के कालखंड में ऐसे ध्वस्त स्थानों का स्वतंत्रता के बाद पुनर्निर्माण होना चाहिए और उसमें सरकार का शीर्ष नेतृत्व भी भूमिका निभा सकता है।  हां, निर्माणों में सरकारी पैसा न लगे इसका ध्यान रखा गया। महात्मा गांधी ने भी सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से सहमति व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकारी खजाने से इसमें एक पैसा नहीं लगना चाहिए।


कहने का तात्पर्य कि सेक्यूलरवाद के नाम गलत सोच और व्यवहार तब से आज तक कायम है । इसीलिए समस्याएं आती हैं और ऐसे कार्यों को सांप्रदायिक, फासीवादी और न जाने क्या-क्या नाम दे दिया जाता है।


आखिर विदेशी आक्रमणकारियों से लेकर देश के अंदर मजहबी सोच वाले हमलावरों ने सोमनाथ और ऐसे दूसरे मंदिरों को निशाना क्यों बनाया?  मेहमूद गजनवी और उसकी फौज ने केवल संपत्ति लूटकर सोमनाथ मंदिर का विध्वंस नहीं किया था बल्कि उपस्थित व्यक्तियों को मार दिया या बंदी बनाकर अपने साथ ले गया । स्त्रियों को भी नहीं छोड़ा गया। बलात्कार हुए ,क्रूरता पूर्वक हत्याएं हुईं या बंदी बनाकर ले जाईं गईं  जिन्हें गुलामों के बाजार में बेचा गया।‌ मंदिर परिसर में 50 हजार  लोगों के उपस्थित होने की बात है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का कत्लेआम इतिहास के क्रूरतम अध्यायों में से एक है। मिन्हाज सिराज के अनुसार गजनवी ने मूर्ति के चार टुकडे किये थे, एक गजनी की जमी मस्जिद में, दूसरा उसे शाही महल की सीढियों पर, तीसरा मक्का और चौथा मदीना भेज दिया। महमूद ने मूर्तियों को गलियों और मस्जिद की सीढियों पर डलवा दिया। उसने कहा नमाज के लिए जाने वाले नमाजी इन बूतों को पैरों तले रौंदेंगे। अलबरूनी गजनवी के साथ ही आया था और उसने अनेक बातें इसके संदर्भ में लिखी है। तो स्वाभिमान पर्व से इतिहास के सारे  सच देश के सामने आए जिसमें मजहबी सोच से हमलों‌ और उसके प्रतिरोध तथा पुनर्निर्माण के प्रयास शामिल है । इससे यह विश्वास और गहरा हुआ है कि हमारी शाश्वत अंत:शक्ति को कोई नष्ट नहीं कर सकता। वास्तव में ऐसे पर्व हमारे लिए प्रेरणा और स्थायी आत्मविश्वास के कारण बनते हैं।

 

गुरुवार, 22 जनवरी 2026

गृह मंत्रालय नए कानूनों पर झांकी "दण्ड से न्याय की ओर"

संवाददाता

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत यह झांकी वर्ष 2023 में अधिनियमित एवं लागू किए गए तीन परिवर्तनकारी आपराधिक न्याय कानूनों-भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम-कोप्रदर्शित करती है, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुए। यह झांकी "दण्ड से न्याय की ओर" के सिद्धांत से प्रेरित होकर भारत की न्याय व्यवस्था में आए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को रेखांकित करती है।

झांकी का अग्र भागमें नए संसद भवन के ऊपर स्थापित तीन नई कानून पुस्तकों को दर्शाया गया है, जो भारत के संवैधानिक सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।

झांकी के मध्य भाग मेंवैज्ञानिक जांच पद्धतियों और डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग के माध्यम से प्रक्रियात्मक परिवर्तन को प्रदर्शित किया गया है। इसमें एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ को अपराध स्थल की जांच करते हुए तथा एक पुलिस अधिकारी को ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से साक्ष्य एकत्र करते हुए दर्शाया गया है। LED डिस्प्ले पैनल नए कानूनों में निहित प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है, जिसमें ई-साक्ष्य के माध्यम से डिजिटल साक्ष्य संग्रह, नाफिस (NAFIS) द्वारा डिजिटल फिंगरप्रिंट विश्लेषण तथा न्याय श्रुति के माध्यम से वर्चुअल सुनवाई जैसे आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न पहलू शामिल हैं। मोबाइल फॉरेंसिक वैन अपराध स्थल तक त्वरित पहुंच और फॉरेंसिक साक्ष्य संग्रह की गतिशीलता का प्रतीक है। ये सभी तत्व आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग द्वारा सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले नए कानूनों के सार को प्रदर्शित करते हैं।

झांकी के पीछे के भाग में एक महिला अधिकारी को एकीकृत नियंत्रण कक्ष प्रणाली संचालित करते हुए दर्शाया गया है, जो समयबद्ध न्याय, त्वरित प्रतिक्रिया, पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण तथा सीसीटीवी कैमरों जैसे डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग को प्रदर्शित करता है। झांकी का पिछला हिस्सा विभिन्न भाषाओं में पुस्तकों से सुसज्जित है, जो नए कानूनों की सभी नागरिकों तक पहुंच और उनमें निहित सामूहिक राष्ट्रीय भावना को दर्शाता है। झांकी के भूमि तत्व प्रशिक्षित पुलिस अधिकारियों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, विशेष कमांडो इकाइयों में अधिक महिला अधिकारियों और बीट पेट्रोलिंग के माध्यम से जनता-केंद्रित कानूनों के प्रति सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित करते हैं, जो समावेशिता, पेशेवर दक्षता, समर्पण और जन-केंद्रित दृष्टिकोण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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