बसंत कुमार
पिछले कुछ सप्ताह से नीट पेपर लीक मामले को लेकर युवाओं से समर्थित काकरोच जनता पार्टी का दिल्ली के जंतर मंतर पर भारी विरोध चल रहा था और इसको राजनीतिक रंग देने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत सभी विपक्षी नेता बारी बारी से जंतर मंतर में अपनी उपस्थिति से इसे एक आंदोलन का स्वरुप दे रहे थे और इस आन्दोलन के समर्थन में समाजसेवी सोनम वांग चुक की 26 दिन की भूख हड़ताल काफी प्रभावी रही और अंततः देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। प्रश्न यह उठता है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा इस समस्या का स्थाई समाधान है या सरकार पेपर लीक मामलो पर कोई समाधान निकले। इतिहास गवाह है कि स्वतंत्र भारत में कई छात्र आंदोलन हुए हैं और उनके आंदोलन को विपक्षी पार्टियों द्वारा राजनीतिक रंग देने के लिए समर्थन भी दिया गया और ये आंदोलन सरकार को सत्ता से हटाने में सफल भी हो गए पर क्या ये ये आन्दोलन अपने उद्देश्य जिसके लिए शुरू किए गए सफल हो पाए है।
वर्ष 1975में देश में आपातकाल लग गया और इसके विरोध में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी लोक नायक जय प्रकाश नारायन के नेतृत्व में युवाओ ने समग्र क्रांति का आन्दोलन प्रारंभ किया। इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य लोकतंत की बहाली और प्रेस की आजादी था, उस समय भी सभी विपक्षी नेताओं ने इसमें शामिल होकर लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अपनी एक जुटता दिखाई और जेल के अंदर ही जनता पार्टी का गठन हुआ। परिणाम यह हुआ कि दो तिहाई बहुमत वाली इंदिरागांधी की सरकार चुनाव हार गई पर क्या उसके बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना हुई और क्या प्रेस मीडिया की आजादी बहाल हो गई। जनता पार्टी के सत्ता में आते ही घटक दलों में आपस में खींचातानी हुई और जनता पार्टी दो ढाई साल में ही बिखर गई। और राष्ट्रवाद एवं हिंदुत्व के नाम पर अस्तित्व में आया जनसंघ भाजपा के रूप में अपने मुख्य मुद्दों पर समझौता करके सत्ता में आ गया और सत्ता में रहने के लिय पुराने कांग्रेसियों, समाजवादियों को अपने पक्ष में लाकर लगातार सत्ता में बनी हुई है और भाजपा का काग्रेस मुक्त भारत तो दूर कांग्रेस युक्त भाजपा हो गई है।
वर्ष 1990में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने दशकों से ठंडे बस्ते में पड़ी मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया, जिससे ओ बी सी को 27%आरक्षण शुरू हुआ, इस आरक्षण के विरोध में देश भर के युवाओं ने विरोध किया और कुछ युवाओं ने आत्म दाह कर लिया, इस विद्रोह के कारण विश्वनाथ प्रताप सिंह सत्ता से बाहर हो गए पर मंडल सिफारिशों के आधार पर ओ बी सी वर्ग को मिलने वाला आरक्षण समाप्त हुआ। इसके उलट देश की राजनीति मंडल और कमण्डल की राजनीति के इर्द गिर्द घूमने लगा। और देश की राजनीति में जाति पर आधारित राजनीतिक दलों जैसे समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और बहुजन समाज पार्टी जैसे दल अस्तित्व में आये जिनकी मुख्य राजनीति जाति पर आधारित थी। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राजनीति करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब हिंदू मुसलमान और अगड़ा पिछड़ा की राजनीति के बल पर सत्ता में बने रहने के लिए विवश है। अब तक देश की राजनीति में सबसे प्रतिष्ठित व सफल राजघराना सिंधिया का प्रमुख अब अपने आप को ओ बी सी कहने को मजबूर है। यहां तक की देश के प्रधानमंत्री वोटों के खातिर अपने आप को ओ बी सी कह रहे हैं।
वर्ष 2013 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केंद्र में सरकार थी और जहां दुनिया भर में आर्थिक मंदी का दौर था, डॉ मनमोहन सिंह ने आर्थिक सूझ बूझ से देश को आर्थिक मंदी के दौर से निकाला। पर उसी समय अन्ना हजारे के नेतृत्व में लोकपाल की स्थापना और डॉ मनमोहन सिंह की सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन शुरू हुआ, परिणाम स्वरुप केंद्र के साथ साथ दिल्ली राज्य में अब तक की सबसे सफल माने जाने वाले शिक्षा दीक्षित सरकार चुनाव हार गई। पर अन्ना हजारे आंदोलन के हीरो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में जो सरकार बनी वह भ्रष्टाचार समाप्त करना तो दूर खुद भ्रष्टाचार में लिप्त रही और भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहली बार हुआ कि प्रदेश का मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री समेत कई नेता जेल में बंद थे। अन्ना हजारे के आंदोलन के कंधे पर बैठकर केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, सजंय सिंह, किरण बेदी, जनरल वी के सिंह विभिन्न राजनीतिक पदों पर पहुंचे और सत्ता की मलाई खाने में सफल रहे।
अभी देश में नीट परीक्षा के पेपर लीक होने से गुस्साए युवकों ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन किया जिसमें समाज सेवी पर्यावरण विद सोनम वांग चुक ने लगभग 26दिन का अनशन किया और लगभग सभी विपक्षी पार्टियों का इस आंदोलन को भरपूर समर्थन मिला, इस आन्दोलन की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्याग पत्र था। कैसी विडंबना है कि नीट की परीक्षा से पहले उत्तर प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों में लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और रेलवे और पुलिस भर्ती परीक्षाओं में साल्वर जैसे टर्म आए अर्थात असली परीक्षार्थी की जगह किसी अन्य को परीक्षा में बिठाना। पर कभी किसी ने रेल मंत्री या राजू के मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं मांगा। अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं पर क्या यह सुनिश्चित किया जा सकता हैं कि भविष्य में नीट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो पाएंगी या इस आन्दोलन का भी हाल पिछले आंदोलनों कि तरह ही होगा यानि आगामी चुनावों में सत्ता धारी पार्ट को हराया जा सके और देश की राजनीति में दो एक नेता अपना वर्चस्व बना सके।
इस आन्दोलन की सफलता से कुछ अंध भक्त जो अपने आप को सनातन का रक्षक मानते हैं वे आरक्षण समाप्त करने, एस सी एस टी एक्ट और यू जी सी रोल बैक करने के लिए आंदोलन करने की बात कर रहे, इन बेचारों को ये नहीं पाता कि यह आन्दोलन छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले नीट पेपर लीक के विरोध में हुआ था और वे सरकार से भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए एश्योरेंस चाह रहे थे पर ये लोग भारत की संविधान सभा और संसद द्वारा बनाए गए प्रावधानों को समाप्त करवाने के लिय आन्दोलन करना चाहते हैं। मजे की बात यह है कि ये लोग EWS ओ बी सी आरक्षण को हटाने की मांग नहीं कर रहे इनका मुख्य निशाना हजारों वर्षों से शोषित पीड़ित दलित और आदिवासी समुदाय को मिलने वाला 22%एस सी -एस टी आरक्षण है इनमें कुछ युवा तो ऐसे है कि उनके पिता उनके लिए EWS आरक्षण का जुगाड़ करने के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं और बेटा सोशल मीडिया पर आरक्षण समाप्त करने के लिय व्याख्यान दे रहा होता है। समय की जरूरत यह है कि देश का युवा जातीय पूर्वाग्रह को छोड़कर देश और समाज के हित से संबंधित मामलों पर आंदोलन का रास्ता अपनाए।
यह सच है कि युवकों द्वारा किए गए आंदोलनों ने कही बार देश के अंदर और नेपाल और बंगला देश में सरकार बदल दी है पर विचारणीय प्रश्न यह है कि जिस उद्देश्य के लिये ये आंदोलन चलाए गए वे उद्देश्य पूरे हुए। किसी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिय कुछ राजनीतिक दलों या संगठनों द्वारा युवाओं को भ्रमित करके आंदोलन चलाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है और इससे परहेज किया जाना चाहिए।



