मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

21वीं सदी में शहरी विकास मंत्रालय की उपयोगिता

बसंत कुमार

पिछले सप्ताह शहरी विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री तोखन साहू से मिलने का अवसर मिला, बिल्कुल शांत, मृदु भाषी अपने पन से मिलने वाले एक मंत्री को देखकर आश्चर्य हो रहा था कि यह व्यक्ति केंद्र सरकार में मंत्री है तो जिज्ञासा हुई कि उनके मंत्रालय की उपयोगिता के बारे में कुछ पूछ लिया जाए, जैसा हम सभी जानते है कि युवाओं में रोजगार पाने के लिए शहरों की ओर पलायन बहुत अधिक हुआ है और गांव में ये कहा जाता है कि अब तो गांवों में छप्पर उठाने और मरे हुए लोगो की कंधा देने के लिए युवा नहीं बचे हैं। हाल ही में एक एक रिपोर्ट आई है कि शहरों में रहने वालों की संख्या 81% और गांव में रहने वालों की संख्या सिर्फ 19% रह गई है। ऐसे में शहरी विकास मंत्रालय का उत्तरदायित्व अधिक बढ़ जाता है क्योंकि 81% लोगों के लिए सारी सुविधाएं मुहैया करार शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी बनती है। इस मामले में शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू ने विस्तार से बताया कि  शहरी विकास मंत्रालय किस तरह से आने वाले चैनल को सुलझाने के लिए काम कर रहा है।

इस समय दिल्ली सहित अन्य महानगर प्रदूषण के चलते गैस चैंबर जैसे बने हुए हैं। शहरी विकास मंत्रालय का यह उत्तरदायित्व है कि शहरों में इस तरह से बढ़ते हुए प्रदूषण पर एक लंबी अवधि की योजना बनाकर कुछ ऐसी व्यवस्था करें कि जिससे हर साल सर्दियों आते ही राजधानी के लोग प्रदूषण से बीमार न हो, पर यहां कुछ वर्षों से प्रदूषण के चलते कुछ लोगों की मौत भी हो जाती है इसलिए यह ध्यान रखा जाना चाहिए की शहरी इलाकों में प्रदूषण इतना न बढ़े की यह रहने लायक ही ही न बचे, इस समय स्थिति यह है कि बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और उन्हें सांस लेने और अन्य बीमारियों से जूझना पड़ रहा है इसलिए शहरी इलाकों में जनसंख्या की बाढ़ को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने आवश्यक है।

शहरीकरण दुनिया के 21वीं के रुझानों में एक है अर्थात दुनिया की 80% से अधिक आबादी अब शहरों में रहने लगी है, विभिन्न वैश्विक लक्ष्य विशेष कर सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से होने वाले दबाव से निपटाना है।शहरी विकास मंत्रालय की उपयोगिता देश की तीव्र शहरीकरण की चुनौतियां और अवसरों के कुशल उपयोग में महत्वपूर्ण है जो स्मार्ट सिटी स्वच्छ भारत मिशन जैसी परियोजनाओं के माध्यम से जल, स्वच्छता, परिवहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी बुनियादी सेवाओं को विश्व स्तरीय बनाएं। डिजिटली करण को बढ़ावा देने और समावेशी व टिकाउ शहरों के निर्माण के लिए नीतियां बनाना व लागू करना है ताकि आर्थिक विकास को बल मिले और लोगों को बेहतर जीवन मिल सके इसका मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ते हुए शहरीकरण की चुनौतियां को अवसर के रूप में बदलना है।

यदि शहरी विकास मंत्रालय की उपयोगिता बारे में विश्लेषण करें तो निम्नलिखित बातें निकलकर सामने आती है -

1.      मंत्रालय शहरी नियोजन और वित्तीय प्रबंधन पर काम करता है और प्रधानमंत्री आवास योजना स्वच्छ भारत मिशन अमृत और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी योजनाओं को लागू करता है।

2.      मंत्रालय बुनियादी ढांचे का विकास करके जलापूर्ति सिवेश शहरी परिवहन मेट्रो रेल संचालन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण शहरी योजनाओं के बेंचमार्क तय करता है।

3.      मंत्रालय स्मार्ट सिटी मिशन के तहत प्रौद्योगिकी कीसहित टिकाऊ और नागरिक केंद्रित बनने पर जोर देता है जिससे हरित स्थान और बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

4.      शहरी विकास मंत्रालय को आर्थिक विकास का इंजन कहा जाता है और मंत्रालय शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से औद्योगिकरण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।

5.      शहरी विकास मंत्रालय का मुख्य काम नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारना है जल स्वच्छता, आवास और सार्वजनिक सेवाओं को सुधार करके शहरी जीवन की गुणवत्ता को बढ़ता है और सामाजिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाता है और सामाजिक बुनियादी ढांचे के विकास में मदद करता है।

6.      भूमि के उपयोग और निजी भागीदारी के माध्यम से संस्थाओं को जोड़ने के लिए नवीन मॉडल विकसित करता है जिससे साड़ी निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत किया जा सके।

स्वतंत्रता प्राप्त के समय भारत में शहरों में 17 % लोग ही रहते थे लेकिन वर्ष 2011 में या आंकड़ा 31% तक पहुंच गया पर अभी हाल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा 81% पहुंच गया है और तेजी से बढ़ता शहरीकरण के कारण एक बड़ी आबादी के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार एकीकृत विजन और मिशन के साथ कार्य कर रही है जिससे आने वाली चुनौतियां से पार पाया जा सके, शहर और कस्बों के समुचित विकास के उद्देश्य साथ शहरी विकास मंत्रालय आगे बढ़ रहा है, एक के बाद एक ऐसी योजनाएं और नीतियां बनाई जा रही हैं जो शहरो के कठिन जीवन को सुगम बना सकें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक क्रांतिकारी पहल करते हुए शहरों और कस्बों में संसाधनों के आवंटन के लिए मान दंडों को आधार बनाया गया, शहरों विकास परियोजनाओं को अलग-अलग समय पर लागू करने के तरीकों को समाप्त करके नई परियोजनाओं को तैयार करने और उनके कार्यान्वयन के लिए केंद्र और और राज्य सरकारों को सभी परियोजनाओं को एक साथ सम्मिलित करने का नियम बनाया है।

इन परिस्थितियों में भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने आज चारों में जनसंख्या के बढ़ते दबाव को झेलने में काफी तत्परता दिखाई है और यह सुनिश्चित किया है कि शहरों में बढ़ती जनसंख्या को मूलभूत सुविधाएं दी जानी चाहिए और यह मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में सरकार काफी हद तक कामयाब रही है उसके लिए शहरी विकास मंत्रालय के मंत्री मनोहर लाल खट्टर व तोखन साहू बधाई के पात्र हैं क्योंकि जिस तरह से प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान और डिजिटल इंडिया जैसे मुहिम को सारी मंत्रालय ने मूर्ति रूप देने का प्रयास किया है वह प्रशंसनीय है।

(लेखक भारत सरकार के पूर्व उप सचिव और एक पहल नमक एनजीओ के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

अटल जी @101 : सत्ता नहीं, संस्कार की राजनीति

विकास खितौलिया

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल सत्ता के शिखर तक पहुँचकर ही नहीं, बल्कि अपने विचार, आचरण और संवेदनशीलता से राष्ट्र की आत्मा में स्थायी स्थान बना लेते हैं। उनमें से थे महान व्यक्तित्व के धनी भारत रत्न अटल बिहारी वाजपाई, जिनका 25 दिसंबर 1924 को जन्म हुआ। वर्ष 2025 में हम उनके 101वें जन्मदिवस का स्मरण कर रहे हैं। यह अवसर केवल एक महान राजनेता के जन्मदिवस का नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में नैतिकता, सहमति, संवाद और राष्ट्रहित की परंपरा को नमन करने का अवसर है। अटल जी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और इस दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। वे प्रारंभ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और संघ के प्रचारक बन कर देशभक्ति की भावना उनके जीवन का आधार बनी। यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की नींव पड़ी। स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम चरण में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई और कई बार जेल भी गए। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने पत्रकारिता को माध्यम बनाकर राष्ट्रसेवा की दिशा में कार्य किया और कुछ समय पश्चात जनसंघ के माध्यम से संसदीय राजनीति में प्रवेश किया। वे "पांचजन्य", "वीर अर्जुन" और "राष्ट्रधर्म" जैसे पत्र-पत्रिकाओं के संपादन से जुड़े। उनके लेखन और विचारों में राष्ट्रवाद की भावना और सामाजिक सरोकार स्पष्ट झलकते थे। अटल जी भारतीय राजनीति के एक ऐसे युगपुरुष थे, जिन्होंने न केवल अपने विचारों, भाषणों और कार्यों से भारतीय जनमानस को प्रभावित किया, बल्कि देश को नई दिशा देने में भी अहम भूमिका निभाई। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वे न केवल एक सफल प्रधानमंत्री थे, बल्कि एक सच्चे लोकतंत्रवादी, संवेदनशील कवि और जनप्रिय नेता भी थे । उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है कि कैसे सिद्धांतों के साथ रहते हुए भी राष्ट्र के लिए बड़ा योगदान दिया जा सकता है। उनका राजनीतिक जीवन सादगी, सच्चाई और राष्ट्रभक्ति की मिसाल था। अटल जी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर ज़िले के शिंदे की छावनी में हुआ। उनके पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपाई एक अध्यापक और कवि-स्वभाव के व्यक्ति थे, जिनसे अटल जी को साहित्य, भाषा और संस्कारों की प्रेरणा मिली। माता श्रीमती कृष्णा देवी धार्मिक और सुसंस्कृत महिला थीं। वाजपाई जी की प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर में हुई। आगे चलकर उन्होंने विक्टोरिया कॉलेज (वर्तमान लक्ष्मीबाई कॉलेज) से स्नातक और डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उनमें वक्तृत्व, लेखन और नेतृत्व के गुण स्पष्ट दिखाई देने लगे थे।

वर्ष 1957 में वे पहली बार बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) से लोकसभा सांसद बने और संसद में अपने ओजस्वी भाषणों से शीघ्र ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली। अटल बिहारी वाजपाई को भारतीय राजनीति का सर्वश्रेष्ठ वक्ता कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनके भाषणों में विचारों की स्पष्टता, भाषा की गरिमा और विरोधियों के प्रति सम्मान झलकता था। यह विशेषता उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग करती थी कि वे कट्टर विरोध के बावजूद भी व्यक्तिगत मर्यादा नहीं तोड़ते थे। पंडित नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक, सभी ने उनके भाषण कौशल और बौद्धिक क्षमता की सराहना की। इंदिरा गांधी ने तो उन्हें “भविष्य का प्रधानमंत्री” तक कहा था। वे 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा के सदस्य रहे। उनका संसद में व्यवहार, भाषा की मर्यादा और विचारों की स्पष्टता उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती थी। जनसंघ के नेता के रूप में अटल जी ने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। आपातकाल (1975-77) के दौरान उन्होंने विरोध करते हुए जेल भी काटी। आपातकाल के बाद जनता पार्टी बनी और उसमें अटल जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, विचारधारात्मक मतभेदों के चलते 1980 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गठन हुआ, जिसमें अटल जी को पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। बीजेपी की स्थापना के बाद अटल जी ने उसे एक मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में खड़ा किया। उन्होंने पार्टी को केवल हिंदुत्व के आधार पर नहीं, बल्कि सुशासन, राष्ट्रवाद और विकास की नीति पर आगे बढ़ाया। अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने । पहली बार 16 मई 1996 से 1 जून 1996 (13 दिन की सरकार) इस अल्पकालिक सरकार ने बहुमत सिद्ध नहीं कर पाने के कारण इस्तीफा दे दिया। दूसरी बार वे अल्पकालीन में 19 मार्च 1998 से 13 अक्टूबर 1999 तक और तीसरी बार प्रधानमंत्री बने 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक। यह कार्यकाल पूर्ण अवधि का था और इस दौरान उन्होंने भारत के आर्थिक विकास, अवसंरचना निर्माण और विदेश नीति को एक नई दिशा दी। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था । 

1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षणों ने भारत को विश्व की परमाणु शक्तियों की पंक्ति में खड़ा कर दिया। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद उन्होंने राष्ट्रहित में साहसिक निर्णय लिया। वे शांति और संवाद में विश्वास रखते थे। पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए उन्होंने फरवरी, 1999 में दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू की थी, जो आज भी कूटनीतिक इतिहास में एक साहसिक पहल मानी जाती है। हालांकि इसके तुरंत बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने करगिल में भारतीय सीमा में घुसपैठ कर ली। इसके बाद पाकिस्तानी सैनिकों को भारतीय सेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया । इसके बाद एक बड़ी घटना वाजपेयी सरकार में कंधार हाइजैक हुई। 24 दिसंबर को पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन के लोगों ने आईसी-814 विमान का अपहरण कर लिया था।  काठमांडू से दिल्ली आ रहे इस विमान में 176 यात्री और चालक दल के 15 लोग सवार थे। अपहरणकर्ता इस विमान को अफ़ग़ानिस्तान के कंधार ले गए। विमान में सभी बंधकों को रिहा करने के बदले भारत सरकार से तीन चरमपंथी मुश्ताक अहमद जरगर, अहमद ओमार सईद शेख और मौलाना मसूद अजहर को रिहा किया। 13 दिसंबर, 2001 को पांच चरमपंथियों ने भारतीय संसद पर हमला कर दिया । ये भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है। इस हमले में भारत के किसी नेता को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था लेकिन पांचों चरमपंथी और कई सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। इसके बाद पाकिस्तान की कमान परवेज़ मुशर्रफ़ के हाथों में आ गई, वाजपेयी ने तब भी रिश्ते को सुधारने के लिए बातचीत को तरजीह दी, आगरा में दोनों नेताओं के बीच हाई प्रोफ़ाइल मुलाकात हुई भी हालांकि ये बातचीत नाकाम हो गई थी। 

अटल बिहारी वाजपाई केवल राजनेता नहीं थे, वे एक संवेदनशील कवि भी थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, मानवता, जीवन-दर्शन और पीड़ा की अभिव्यक्ति मिलती है। उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ।” आज भी युवाओं में ऊर्जा और आशा का संचार करती हैं। उनकी कविताएँ यह सिद्ध करती हैं कि सत्ता के शिखर पर बैठा व्यक्ति भी यदि संवेदनशील हो, तो राजनीति मानवीय बन सकती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, और आर्थिक उदारीकरण को गति देना उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं। शिक्षा और दूरसंचार सुधार में अटल जी ने सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत की, जिससे प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा मिला । उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में निजीकरण और उदारीकरण को प्रोत्साहित किया, जिससे मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ। 

वे "भारतीय राजनीति के अजातशत्रु" कहे जाते थे। अटल जी को उनके अतुलनीय योगदान के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 2015 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 1992 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण से नवाजा गया। कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें डॉक्टरेट की उपाधियाँ भी प्रदान कीं। उनकी विरासत केवल योजनाओं या नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसी राजनीति की है जहाँ संवाद, सहमति और संवेदनशीलता सर्वोपरि हों। वाजपेयी जी लंबे समय से अस्वस्थ थे। उनका निधन 16 अगस्त 2018 को AIIMS, नई दिल्ली में हुआ। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनकी कार्यशैली, उनका साहित्य, उनकी दूरदर्शिता और उनकी राष्ट्रभक्ति सदैव भारतवासियों के दिलों में जीवित रहेगी। अटल बिहारी वाजपाई जी का 101वाँ जन्मदिवस हमें यह स्मरण कराता है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि सेवा, संयम और सिद्धांतों का माध्यम हो सकती है। आज जब राजनीति में कटुता और विभाजन बढ़ रहा है, वाजपाई जी का जीवन हमें शालीनता, सहिष्णुता और राष्ट्रप्रेम का मार्ग दिखाता है।

(लेखक, शोधकर्ता एवं विचारक)

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