पिछले सप्ताह शहरी
विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री तोखन साहू से मिलने का अवसर मिला, बिल्कुल शांत, मृदु भाषी अपने पन से मिलने वाले
एक मंत्री को देखकर आश्चर्य हो रहा था कि यह व्यक्ति केंद्र सरकार में मंत्री है
तो जिज्ञासा हुई कि उनके मंत्रालय की उपयोगिता के बारे में कुछ पूछ लिया जाए, जैसा हम सभी जानते है कि युवाओं
में रोजगार पाने के लिए शहरों की ओर पलायन बहुत अधिक हुआ है और गांव में ये कहा
जाता है कि अब तो गांवों में छप्पर उठाने और मरे हुए लोगो की कंधा देने के लिए
युवा नहीं बचे हैं। हाल ही में एक एक रिपोर्ट आई है कि शहरों में रहने वालों की संख्या 81% और गांव में रहने वालों की संख्या
सिर्फ 19% रह गई है। ऐसे में शहरी विकास मंत्रालय का उत्तरदायित्व अधिक बढ़ जाता है
क्योंकि 81% लोगों के लिए सारी सुविधाएं मुहैया करार शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी
बनती है। इस मामले में शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू ने विस्तार से बताया कि शहरी विकास मंत्रालय किस तरह से आने वाले चैनल
को सुलझाने के लिए काम कर रहा है।
इस समय दिल्ली सहित
अन्य महानगर प्रदूषण के चलते गैस चैंबर जैसे बने हुए हैं। शहरी विकास मंत्रालय का यह
उत्तरदायित्व है कि शहरों में इस तरह से बढ़ते हुए प्रदूषण पर एक लंबी अवधि की
योजना बनाकर कुछ ऐसी व्यवस्था करें कि जिससे हर साल सर्दियों आते ही राजधानी के
लोग प्रदूषण से बीमार न हो, पर यहां कुछ वर्षों से प्रदूषण के
चलते कुछ लोगों की मौत भी हो जाती है इसलिए यह ध्यान रखा जाना चाहिए की शहरी
इलाकों में प्रदूषण इतना न बढ़े की यह रहने लायक ही ही न बचे, इस समय स्थिति यह है कि बच्चे
स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और उन्हें सांस लेने और अन्य बीमारियों से जूझना पड़ रहा
है इसलिए शहरी इलाकों में जनसंख्या की बाढ़ को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने
आवश्यक है।
शहरीकरण दुनिया के 21वीं के रुझानों में एक है अर्थात
दुनिया की 80% से अधिक आबादी अब शहरों में रहने लगी है, विभिन्न वैश्विक लक्ष्य विशेष कर
सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से होने वाले दबाव से निपटाना है।शहरी विकास
मंत्रालय की उपयोगिता देश की तीव्र शहरीकरण की चुनौतियां और अवसरों के कुशल उपयोग
में महत्वपूर्ण है जो स्मार्ट सिटी स्वच्छ भारत मिशन जैसी परियोजनाओं के माध्यम से
जल, स्वच्छता, परिवहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी बुनियादी सेवाओं को विश्व स्तरीय बनाएं।
डिजिटली करण को बढ़ावा देने और समावेशी व टिकाउ शहरों के निर्माण के लिए नीतियां
बनाना व लागू करना है ताकि आर्थिक विकास को बल मिले और लोगों को बेहतर जीवन मिल
सके इसका मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ते हुए शहरीकरण की चुनौतियां को अवसर के रूप
में बदलना है।
यदि शहरी विकास
मंत्रालय की उपयोगिता बारे में विश्लेषण करें तो निम्नलिखित बातें निकलकर सामने
आती है -
1. मंत्रालय शहरी नियोजन और वित्तीय
प्रबंधन पर काम करता है और प्रधानमंत्री आवास योजना स्वच्छ भारत मिशन अमृत और
स्मार्ट सिटी मिशन जैसी योजनाओं को लागू करता है।
2. मंत्रालय बुनियादी ढांचे का विकास
करके जलापूर्ति सिवेश शहरी परिवहन मेट्रो रेल संचालन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी
महत्वपूर्ण शहरी योजनाओं के बेंचमार्क तय करता है।
3. मंत्रालय स्मार्ट सिटी मिशन के तहत
प्रौद्योगिकी कीसहित टिकाऊ और नागरिक केंद्रित बनने पर जोर देता है जिससे हरित
स्थान और बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।
4. शहरी विकास मंत्रालय को आर्थिक
विकास का इंजन कहा जाता है और मंत्रालय शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम
से औद्योगिकरण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।
5. शहरी विकास मंत्रालय का मुख्य काम
नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारना है जल स्वच्छता, आवास और सार्वजनिक सेवाओं को सुधार
करके शहरी जीवन की गुणवत्ता को बढ़ता है और सामाजिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाता है
और सामाजिक बुनियादी ढांचे के विकास में मदद करता है।
6. भूमि के उपयोग और निजी भागीदारी के
माध्यम से संस्थाओं को जोड़ने के लिए नवीन मॉडल विकसित करता है जिससे साड़ी
निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत किया जा सके।
स्वतंत्रता प्राप्त के
समय भारत में शहरों में 17 % लोग ही रहते थे लेकिन वर्ष 2011 में या आंकड़ा 31% तक पहुंच गया पर अभी हाल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा 81% पहुंच गया है और तेजी से बढ़ता
शहरीकरण के कारण एक बड़ी आबादी के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए गंभीर चुनौती है।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार एकीकृत विजन और मिशन के साथ कार्य कर रही
है जिससे आने वाली चुनौतियां से पार पाया जा सके, शहर और कस्बों के समुचित विकास के
उद्देश्य साथ शहरी विकास मंत्रालय आगे बढ़ रहा है, एक के बाद एक ऐसी योजनाएं और
नीतियां बनाई जा रही हैं जो शहरो के कठिन जीवन को सुगम बना सकें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक
क्रांतिकारी पहल करते हुए शहरों और कस्बों में संसाधनों के आवंटन के लिए मान दंडों
को आधार बनाया गया, शहरों विकास परियोजनाओं को अलग-अलग समय पर लागू करने के तरीकों को समाप्त करके
नई परियोजनाओं को तैयार करने और उनके कार्यान्वयन के लिए केंद्र और और राज्य
सरकारों को सभी परियोजनाओं को एक साथ सम्मिलित करने का नियम बनाया है।
इन परिस्थितियों में
भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने आज चारों में जनसंख्या के बढ़ते दबाव को
झेलने में काफी तत्परता दिखाई है और यह सुनिश्चित किया है कि शहरों में बढ़ती
जनसंख्या को मूलभूत सुविधाएं दी जानी चाहिए और यह मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने
में सरकार काफी हद तक कामयाब रही है उसके लिए शहरी विकास मंत्रालय के मंत्री मनोहर
लाल खट्टर व तोखन साहू बधाई के पात्र हैं क्योंकि जिस तरह से प्रधानमंत्री के
स्वच्छ भारत अभियान और डिजिटल इंडिया जैसे मुहिम को सारी मंत्रालय ने मूर्ति रूप
देने का प्रयास किया है वह प्रशंसनीय है।
(लेखक
भारत सरकार के पूर्व उप सचिव और एक पहल नमक एनजीओ के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

