शुक्रवार, 20 मार्च 2026

सीवर सफाई के दौरान कब तक मरते रहेंगे सफाई कर्मी

बसंत कुमार

देश में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान सफाई कर्मियों की मौत को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है राज्यसभा में दिए गए एक सरकारी जवाब के अनुसार वर्ष 2021 से वर्ष 2025 के सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई करते समय कुल 315 सफाई कर्मियों की मौत हुई परंतु यह संख्या सिर्फ सरकारी आंकड़ों में दर्ज है और कितनी मौतें ऐसी हुई है जिनके बारे में सरकार को पता ही नहीं है। आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 53 मौतें दर्ज हुई जबकि दिल्ली में यह संख्या 26 से अधिक रही इसके अतिरिक्त हरियाणा में 43 तमिलनाडु में 38 उत्तर प्रदेश में 35, गुजरात में 25 और राजस्थान में 24 सफाई कर्मियों की सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय मौत हो गई।

यह बात भी सामने आई है कि कुल मौतों का सिर्फ 70% ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो पाता है, इन मामलों में हो रही मौतों की संख्या कही अधिक है, अब प्रश्न उठता है सरकार हर क्षेत्र में तकनीकी विकास की बात करती है रोबोट के माध्यम से बड़े-बड़े मेडिकल ऑपरेशन हो रहे हैं पर सीवर की सफाई और सेफ्टी टैंको की सफाई के दौरान मरने वाले सफाई कर्मियों की मौत पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है।

देश में हर दो-तीन दिन में कहीं न कहीं से सीवर की सफाई करने गए सफाई कर्मियों की मौत की खबरें आती रहतीहै,

इसको लेकर संसद के अंदर कई बार सवाल उठाते रहे हैं पर सरकार इसके लिए भी कदम नहीं उठा रही है और 21वीं सदी के भारत में आज भी सीवरों और सेप्टिक टैंकों की सफाई का काम मैन्युअली ही हो रहा है जिसके परिणाम स्वरूप इसका में इस काम में लगे मजदूरों की मृत्यु का समाचार आता रहता है। यद्यपि विदेशों में यह काम मशीनों से हो रहा है पर हमारे यहां सफाई कर्मी तौर सफाई करते समय सीवर या सेप्टिक टैंकों के मैंने होल में नीचे उतरते हैं और कई बार उसमें फंस जाने या गैस द्वारा दम घुटने से उनकी मौत हो जाती है इसे लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, हैरानगी की बात यह है कि हमारे देश में सीवर और सीवर सिस्टम अभी भी पूरी तरह से पुराने तौर तरीकों से चल रहा है न्यायालय के आदेशों के बावजूद इसका मशीनीकरण और ऑटोमेशन नहीं हो पा रहा हैं सुप्रीम कोर्ट औरअन्य अदालतें सीवर की मैन्युअल यानी मानव आधारित सफाई को गैरकानूनी ठहरा चुके हैं।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2023 में सीवर डेथ के मामले में एक बड़ा फैसला लिया उसने कहा कि अब सीवर की सफाई के दौरान किसी सफाई कर्मी की मृत्यु हो जाती है या दिव्यांग हो जाता है तो उनके आश्रितों को 30 लाख रुपए का मुआवजा देना पड़ेगा इससे पूर्व वर्ष 2014 में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सी वर डेथ के मामले में मृतकों को के परिवारों को 10 लख रुपए मुआवजा देने का आदेश पारित किया था पर दुर्भाग्य वश इस आदेश का पालन केवल आधे मामलों में ही किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि हाथ से मैला ढोने ने की प्रथा पूरी तरह से समाप्त होनी चाहिए और भारत में इंसान द्वारा नालो और सेप्टिक टैंकों की सफाई एक बहुत बड़ी समस्या है। इससे निजात पाना आवश्यक है।

भारत में 70% सीवेज लाइन की सफाई आमतौर पर होती ही नहीं। वर्ष 2015 में एक सर्वे से पता लगा कि 2015 तक हमारे देश में 810 सीवर ट्रीटमेंट प्लांट थे लेकिन इनमें से मात्र 522 की चालू हालत में थी बाकी सब बंद पड़े थे देश के सीवेज प्लांट्स की में हर तरह की गंदगी गिरती है इसमें सूखा गीला प्लास्टिक और मलवा सभी कुछ होता है जिससे जानलेवा जहरीली गैस बनने लगती है और जब कोई सफाई कर्मचारी सीवर या सेप्टिक टैंक में सफाई के लिए घुसता है तो दम घुटने की स्थिति बन जाती है अब समय आ गया है कि इसे मशीनों से लैस किया जाए भारत में कुछ वर्ष पहले सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक पद्म विभूषण डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक ने बाहर से आयात करके दिल्ली में एक सीवेज क्लीनिक मशीन पेश की थी जिसकी कीमत 43 लाख रुपए थी पर सरकार के उदासीन रवैये के कारण ऐसी मशीन है और नहीं आ पाई।

अमेरिका में सीवर की सफाई के लिए मशीन और उपकरणों का समुचित ढांचा है सीवेज टनल्स को हमेशा मशीनों के जरिए धोया और साफ किया जाता है, सीवर की सफाई में मानव का इस्तेमाल नहीं के बराबर होता है, यूरोप में भी यही सिस्टम लागू है वहां सीवर की सफाई पूरी तरह नई तकनीक पर आधारित मशीनों के जरिए होती है और नई तकनीक से इस प्रक्रिया को और भी बेहतर बनाया जा रहा है यूरोप और अमेरिका की बात तो छोड़ दें एशियाई देश मलेशिया जो वर्ष 1957 में आजाद हुआऔर उसके बाद से उन्होंने अपनी सीवर सफाई की व्यवस्था पर ध्यान देना शुरू किया पहले वहां भी सीवर की सफाई का काम आदमी करते थे लेकिन धीरे-धीरे इसे मशीन और फिर चरणबद्ध ऑटोमेटेड सिस्टम में रिप्लेस कर दिया गया अब यहां सीवर से जुड़ी सफाई का पूरा काम मशीनों से ही किया जाता है वहां की सरकार ने सीवर कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को सब्सिडाइज किया है और सरकार द्वारा सेप्टिक टैंक की सफाई रखने के लिए अवेयरनेस कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं पर दुर्भाग्य बस हमारे देश में इस बात पर कोई जोर नहीं दिया जा रहा है।

कैसी विडम्बना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जीवनी कोजन जन तक पहुंचाने वाले रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के वंशज आज के आधुनिक युग में भी सीवर की सफाई के दौरान हजारों की संख्या में मर रहे हैं इनके लिए बस दो ही चीजों पर विशेष अधिकार प्राप्त है। एक तो यह कि रामायण के रचयिता महर्षि बाल्मीकि जयंती का को मनाने का विकसित अधिकार इस विषय में आर एस एस के सर संघ चालक मोहन भागवत यह बात कह चुके है कि बाल्मीकि जयंती पूरा हिंदू समझ क्यों नहीं मनाता और दूसरा सफाई कर्मियों के रूप में होने वाली रिक्तियों में शत प्रतिशत आरक्षण, क्योंकि भारतीय समाज में आज भी लोगों में यह भावना व्याप्त है कि सरकारी दफ्तरों और प्राइवेट जगहों पर सफाई का काम सिर्फ वाल्मीकि परिवारों में पैदा होने वाले बच्चे ही करेंगे और होता भी यही है कि जो बच्चा इन परिवारों में पैदा होता है उसे अपने बाप की जगह सफाई कर्मी नौकरी पर रख लिया जाता है, इस विषय में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती बधाई की पात्र हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में सफाई कर्मियों की सेवाओं का एक कैडर बनाकरनियमित भर्ती की जिसमें सभी जातियां के लोग शामिल हुए और उन्होंने इस भ्रम को तोड़ने का प्रयास किया है कि सफाई कर्मी का काम सिर्फ वाल्मीकि समुदाय के लोग ही नहीं करेंगे।

टॉयलेट मैन के नाम से मशहूर पद्म विभूषण डॉ बिंदेश्वर पाठक ने देश को स्कैवेंजर फ्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के प्रेरणा स्रोत बने, यदि डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक थोड़े दिन और जिंदा रहते तो सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली महतो को रोकने के लिए कोई न कोई कदम अवश्य उठाते, अपनी मृत्यु से चंद मिनटों पहले 15 अगस्त 2023 के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह वादा किया था पर अकाल मृत्यु के कारण यह वादा पूरा न कर पाए डॉ बिंदेश्वर पाठक को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि सरकार सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान होने वाली मौतों को रोक लगाने के लिए कदम उठाए।

(लेखक भारत सरकार के पूर्व उप सचिव और एक पहल नमक एनजीओ के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

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