बसंत कुमार
कुछ दिन पर पूर्व बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का त्यागपत्र हुआ और उससे पहले उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण किया,यह घटनाक्रम कुछ वर्ष पूर्व उनके गुरु जॉर्ज फर्नांडिस के साथ हुए घटनाक्रम की याद दिलाता है।जब वे लोकसभा का चुनाव हारने के बाद अस्वस्थ होते हुए भी राज्यसभा के लिये नामित किए गए तो नीतीश कुमार ने इस घटना को अपने गुरु जारी फर्नांडिस के प्रति गुरु दक्षिणा की संज्ञा दी थी।कुछ कुछ इसी तरह की घटना नीतीश कुमार जी के साथ हो रही है लेकिन यह भी सत्य है कि श्री नीतीश कुमार ने एक राजनेता और प्रशासक के रूप में अटल बिहारी सरकार में कृषि मंत्री के रूप में रेल मंत्री के रूप में और लगभग 20वर्षों तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में जो उपलब्धियां हासिल की है उनको भुलाया नहीं जा सकता। इसलिए एक मुख्य एक मुख्यमंत्री के रूप में उनकी उपलब्धियां की व्याख्या करना अत्यंत आवश्यक है और यह देखना है कि उनके उत्तराधिकारी के रूप में उत्तराधिकार के रूप में सम्राट चौधरी क्या उन उपलब्धियां के आसपास भी पहुंच पाएंगे।
वर्ष 2002में हमे दरभंगा में एक क्रिकेट आयोजन में जाना पड़ा, इसका आयोजन वहां के तत्कालीन सांसद कीर्ति आजाद की पत्नी पूनम आजाद द्वारा संचालित एन जी ओ कर रही थी हमारे साथ दिल्ली से टेस्ट खिलाड़ी रहेअजय जडेजा, गुरु शरण सिंह और अंपायर एस के बंसल क्रिकेट कोच व ग्राउंड स्टाफ था, पटना से दरभंगा सड़क मार्ग के रास्ते जाते समय हमारी गाड़ी ऐसा लग रहा था सड़क पर नहीं गड्ढों में चल रही है वहां पहुंचते पहुंचते सब की हालत खराब हो गई थीं और कहने को हम दरभंगा के सबसे अच्छे होटल में रुके थे पर वह 24घंटे में से 12घंटे से ज्यादा बिजली गायब रहती थी और यह टूर्नामेंट गांव से आई हुई टीमों के बच्चों की जूनियर टीमें के लिए था पर बच्चों की आयु को लेकर कोई भी छूट भैया हमे धमका देता था और फ़ाइनल मैच में मुख्यअतिथि के रूप में लालू प्रसाद को की उपस्थिति में अंपायर के एक फैसले को लेकर इतना हंगामा हुआ कि पुलिस आई और जिले के एस पी के देख रेख में मैच सम्पन्न हुआ पर आज हम प्रायः बिहार जाते हैं और सड़क के साथ साथ कानून व्यवस्था सुधरी हुई है और इसका श्रेय नितीश जी के दो दशक के शासन को जाता है।
नीतीश कुमार ने वर्ष 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कानून व्यवस्था सुधारने, इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से राज्य को सुशासन की ओर मोड़ा। उनकी विशिष्ट उपलब्धियां में स्कूल जाने वाली छात्राओं को साइकिल योजना, शराब बंदी, जीविका दीदी, सात निश्चय के तहत हर घर को नल जल, बिजली, पंचायती राज, महिलाओं को 50% आरक्षण शामिल है। वर्ष 2005 में कानून का राज स्थापित करने और न्याय के साथ विकास के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर उन्होंने सुशासन पारदर्शिता एवं समावेशी विकास की सिद्धांतों पर शासन की नींव रखी उन्होंने पूरी ईमानदारी और लगन से सुशासन के कार्यक्रम पर आधारित नीतियों , कार्यक्रम एवं योजनाओं का कार्यन्वयन किया और उनकी उपलब्धियां संभावनाओं एवं चुनौतियां से भरपूर कार्यकाल को जनता का भरपूर समर्थन मिला।
कुछ वर्षों की अवधि में ही नितीश कुमार ने सार्वजनिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं का पुनर्निर्माण किया। इस सफर में जहां एकओर प्रभावी विधि व्यवस्था, कानून का राज स्थापित करने में सफलता प्राप्त की वहीं दूसरी ओर मानव संसाधन के साथ-साथ उत्तम आधार भूत संरचना के विकास में कई ऊंचाइयां हासिल की।लोगों के मन में सुरक्षा एवं निश्चय का माहौल बना जिसका प्रभाव राज्य के शहरों तथा गांव में आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों में दिखाई पड़ता है।समाज के कमजोरऔर साधन विहीन एवं विकास से वंचित वर्गों को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने बिहार के विकास की एक नई दिशा की परिकल्पना की। जिसकी तारीफ सत्ता पक्ष के साथ साथ विपक्षी भी करते है।
राज्य में विधि व्यवस्था बहाल कर कानून का राज्य स्थापित करना नीतीश कुमार की सर्वोच्च प्राथमिकता थी। बिना किसी भेदभाव के कानूनी प्रावधानों और वैदिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उन्होंने अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों को निष्प्रभावी करने के लिए ठोस व्यवस्था लागू की। संगठित अपराध पर अंकुश लगाया। न्यायालयों से समन्वय स्थापित कर त्वरित विचरण प्रणाली की व्यवस्था लागू की गई।संख्या के अनुपात में पुलिस बल की नियुक्ति सहित पुलिस के सभी आवश्यक संसाधनों के साथ-साथ उनके आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया। जिस बिहार में स्कूलों में शिक्षकों की अत्यधिक कमी थी वहां हजारों की संख्या में शिक्षकों की बहाली हुई। असामाजिक तत्वों द्वारा सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई तो उन्होंने त्वरित कार्यवाही करते हुए संवाद कायम कर इन घटनाओं को नियंत्रित किया इन प्रभावी कदमों से एक ओर नागरिकों के मन में सुरक्षा का भाव जागा वहीं दूसरी ओर अपराधियों में कानून का डर स्थापित हुआ और पूरे प्रदेश में लोग कभी भी और कहीं भी अपने घरों से निकाल कर जा सकते थे।
अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की निति के तहत भ्रष्टाचार के विरुद्ध नीतीश कुमार जी की मुहिम सदैव जारी रही। कानूनी एवं संस्थागत व्यवस्था कर भ्रष्ट लोक सेवकों के विरुद्ध प्रभावकारी कार्यवाही सुनिश्चित की गई। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो विशेष निगरानी इकाई और आर्थिक अपराध इकाई के द्वारा भ्रष्टाचार में संलिप्त, आय से अधिक संपत्ति रखने वाले, पद का दुरुपयोग करने वाले लोक सेवकों के विरुद्ध मामले दर्ज कर उन्हें सजा दिलवाई गई और उनके द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को जप्त करने की ठोस कार्रवाई की गई । देश में पहली बार जप्त अवैध सम्पत्ति के भवनों में गरीब और नि शक्त बच्चों के लिए विद्यालय खोले गए,यहां तक कि भ्रष्टाचार में नाम आने पर अपनी ही सरकार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का त्यागपत्र लेने पर अड़ गए और उनके द्वारा त्यागपत्र न दिए जाने पर राष्ट्रीय जनता दल से अपना एलायंस तोड़ लिया और तमाम आलोचनाओं की परवाह न करते हुए भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर एक स्थाई सरकार बनाई।
सामाजिक न्याय नितीश कुमार की प्राथमिकताओं में सर्वोच्च रही है। वह पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने अपने राज्य में महादलित को परिभाषा किया। उन्होंने अनुसूचित जातियों में दलित और महादलित की पहचान की। महादलित विशेषकर सदियों से उपेक्षित और तिरस्कृत मुसहर समाज को मुख्य धारा में लाने के लिए कई कानून बनाए और घुमंतू जीवन व्यतीत करने वाले मुसहरों को तीन डिसमिल जमीन देने का कानून बनाया, दुर्भाग्य वश मुसहर समाज के नेताओं और सरकारी अधिकारियों की लापरवाही से यह योजना पूर्ण रूप से पूरी नहीं हो पाई। मुसहरों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री पद त्याग कर मुसहर समाज से आने वाले अपने मंत्री जीतन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया।
शायद बिहार या पूरे देश में यह पहला अवसर था कि मुसहर जाति से संबंध रखने वाला कोई व्यक्ति एक राज्य का मुख्यमंत्री बना हो। जीतन राम मांझी अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में कितने सफल या असफल रहे यह विवाद का विषय हो सकता है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नीतीश कुमार ने एक मुसहर को अपनी जगह पर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया और बिहार का हर मुसहर इस बात पर गौरवान्वित महसूस कर सकता है। जब तक नितीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहे उनके मंत्रिमंडल में मुसहरों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जीतन राम मांझी, संतोष सुमन और रत्नेश सदा के रूप में सदैव रहा यह तथ्य नीतीश कुमार जी के मुसहर डोम आदि जातियों के विकास दृढ़ संकल्प की ओर इशारा करते हैं, अब देखना यह है कि उनके उत्तराधिकारी के रूप में सम्राट चौधरी कहां तक अपने आपको साबित कर पाते हैं।
यह बात अलग है की बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का व्यक्तित्व सुशासन बाबू और पलटू राम की छवि के बीच झूलता रहा है,पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन्होंने अपनी दूर दृष्टि,संकल्प शक्ति से बीमारू प्रदेश बिहार को विकास की राह पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
