शुक्रवार, 30 मई 2025

ऑल पत्रकार एसोसिएशन यमुनापार के हिन्दी पत्रकारिता दिवस के प्रोग्राम में कई बड़ी हस्तियों ने की शिरकत

संवाददाता

नई दिल्ली l दिल्ली के गालिब इंस्टिट्यूट (एवान ए ग़ालिब) में हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर ऑल पत्रकार एसोसिएशन यमुनापार दिल्ली ने पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया l सम्मान समारोह मे देश की कई बड़ी हस्तियाँ शामिल हुई l प्रोग्राम मे दिल्ली और कई कई राज्यों से पत्रकारों ने शिरकत लड़ अपनी समस्याओ क़ो रखा और सरकार से कई मांगे रखी l प्रोग्राम मे मुख्यातिथि के तौर पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित जितेंद्र कुमार शंटी व वरिष्ठ अतिथि के रूप मे हरियाणा सरकार के सचिवालय में कार्यरत आईएएस अधिकारी रानी नागर, जर्नलिस्ट टुडे अखबार के संपादक जावेद रहमानी, वेबवार्ता न्यूज़ एजेंसी के संपादक सईद अहमद, सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत व सीमा हैदर के वकील डॉ एपी सिंह, दिल्ली नगर निगम की स्थाई समिति के सदस्य आमिल मलिक, मुबीटेक पे के सीईओ जितेंद्र शर्मा, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर सफदरगंज हॉस्पिटल डॉ सय्यद अहमद खान शामिल हुएl अतिथि के तौर पर भाजपा नेता अनीस अंसारी, एमबी एंड डोफीन सिक्योरिटी के डायरेक्टर महावीर शर्मा, हाईकोर्ट से हीना परवीन, कड़कड्डूमा कोर्ट से रेनू शर्मा, भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार, भारतीय सम्पूर्ण क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह, एचएन सिंह एडवोकेट आदि शामिल हुएl
इस प्रोग्राम का आयोजन लोकतंत्र का पाया (मीडिया समूह) के संपादक शमशाद अली मसूदी, जन सेवा क्रांति फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहतरमा हुस्ना हाशमी, डोफीन मीडिया के प्रोडयूसर जावेद आलम, एमकेएस 24 न्यूज़ के सम्पादक नौशाद अंसारी ने मिलकर किया l प्रोग्राम क़ो सफल बनाने में विचार आप तक के सम्पादक आरिफ खान, पत्रकार रूबी न्यूटन, पत्रकार रानी खान, मीडिया काउंसिल से मौलाना अब्दुल रशीद, शाहिद खान तहसीनी, पत्रकार अरुण कुमार का अहम योगदान रहा है l
प्रोग्राम के मुख्य अतिथि जितेंद्र कुमार शंटी ने कहा कि देश कि आजादी में पत्रकारों का अहम योगदान रहा हैl उन्होंने कि आज भी मीडिया सरकार और विपक्ष क़ो जगाने का काम कर रही, गोदी मीडिया क़ो छोड़कर, इस मौके पर ऑल पत्रकार एसोसिएशन यमुनापार दिल्ली कि तारीफ करते हुए कि इस संस्था द्वारा किया गया कार्यक्रम सरहानीय हैl मैं पत्रकारों कि मांग क़ो सरकार के सामने रखने का काम करूंगाl 
ऑल पत्रकार एसोसिएशन यमुनापार दिल्ली के संयोजक शमशाद अली मसूदी ने कहा कि राज्य और भारत सरकार के बजट मे मीडिया का कोई बजट नहीं होता है पत्रकारों के लिए कोई सुविधा नहीं मिलती l दिल्ली मे बसों मे सीट रिजर्व नहीं है इसी तरह अस्पातलो और रेलवे स्टेशनो मे पत्रकारों के लिए अलग खिड़की नहीं है इसी तरह पेशन, इंश्योरेंस, हैल्थ और शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। इन पर हम सब क़ो काम करना होगाl आमिल मलिक ने कहा कि दिल्ली सरकार और भारत सरकार क़ो चिट्ठी लिखकर पत्रकारों की आवाज क़ो बुलंद करने का काम करूंगाl
जावेद रहमानी ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता दिबस क़ो इस तरह से मनाना, इस बात का सन्देश है कि गोदी मीडिया कि समाज कि जरूरत नहीं है आज मुझे लगा कि पत्रकारों क़ो अपने हक़ की आवाज अपने आप बुलंद करनी होंगी l
इस मौके पर तफ्तीश न्यूज से मो. राहत उर्फ राजू, मुसर्रत टाइम्स से मोहम्मद रियाज़, सलीम इदरीशी, गुलजार, जान मोहम्मद, नफीस सलमानी, इरशाद सैफी, बागपत से विपुल जैन, विवेक जैन, इमरान अंसारी, मो रफ़ी, इल्मा,इरशाद अली, मकसूद राही, फारुख मंसूरी, संजीव कुमार, शाहबुद्दीन, अनवार नूर, एस आई मो आलम, गायक रितु गुप्ता, मतलूब अंसारी, विभव किशोर, मो इस्तयाक, गुलफाम सैफी, इरफ़ान सैफी, साजिद जमाल, इशरक सागर, निशा खान, मो शाहनवाज, गुलनार परवीन, आयशा खातून, हाफिज मामून, युवा रत्न शायर आमिर मेरठी, सलमान थानवी, पत्रकार रजा मिर्जा, नईम खान, मो यूनुस सैफी, शमशाद सैफी, प्रदीप कुमार, मो फैसल  आदि शामिल हुए।













गुरुवार, 29 मई 2025

मुर्शिदाबाद के पीछे की सोच

अवधेश कुमार

 उच्च न्यायालय की तरफ से गठित तथ्य-खोजी समिति की मुर्शिदाबाद हिंसा संबंधी रिपोर्ट किसी को भी डराने के लिए पर्याप्त है। जिन लोगों ने मुर्शिदाबाद में हिंदुओं के विरुद्ध एकपक्षीय हिंसा पर काम किया है उनके लिए यह रिपोर्ट स्वाभाविक है। किंतु अभी तक कानूनी परिभाषा में इसे आरोप की परिधि में रखा गया था। इस रिपोर्ट के बाद सारे आरोपों की पूरी तरह पुष्टि हो गई है। ध्यान रखिए कि इस रिपोर्ट के पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी उच्च न्यायालय में 34 पृष्ठ की रिपोर्ट पेश की थी। दरअसल सरकार किस्सा पर कट्टरपंथी मुस्लिम तत्व ऑन की हिंदू विरोधी हिंसा और व्यवहारों को नजर अंदाज करने वाली पुलिस भी इस बार इनके हिंसा की शिकार हो गई थी। उसके बाद उसे लगा कि हम की पानी सर से ऊपर निकल गया है तो उसने भी अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया की भीड़ किस तरह और नियंत्रित होकर हिंसा कर रही थी। पुलिस रिपोर्ट की कुछ पंक्तियां देखिए-  लगभग 4.25 बजे अचानक भीड़ अनियंत्रित हो गई..पुलिसकर्मियों पर ईंट, पत्थर फेंकने लगी... पुलिस कर्मियों को मारने के इरादे से लाठी, हसुआ, लोहे की छड़ और घातक हथियारों आदि से हमला करना शुरू कर दिया। उपद्रवियों ने एसडीपीओ जंगीपुर की पिस्तौल छीन ली, जिसमें 10 राउंड गोली लोड था। भीड़ ने एसडीपीओ जंगीपुर के एक वाहन और एक हाईवे पेट्रोलिंग वाहन के साथ उमरपुर में सार्वजनिक संपत्तियों में आग लगा दी। आप कल्पना करिए स्थिति कैसी रही होगी! अगर पुलिस से पिस्तौल छीनी जा रही थी तो बंगाल की पुलिस किस अवस्था में रही होगी इसकी कल्पना करिए। सच है कि पुलिस ने रिपोर्ट में स्वयं के भयभीत होने की बात नहीं लिखी है किंतु कई जगह पुलिस जान बचाने के लिए भागती नजर आई। एक पुलिस अधिकारी का बयान है कि जिला प्रशासन ने बीएसएफ बुलाने का आग्रह किया और तब तक पुलिस को  छिपकर जान बचानी पड़ी। जिस बीएसएफ ने पुलिस की जान बचाई, जिसे पीड़ित अपनी रक्षक बता रही है उस पर ममता बनर्जी आरोप लगा रही थी। 

हालांकि रिपोर्ट में पुलिस को सबसे ज्यादा कठघरे में खड़ा किया गया है।

17 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक-एक सदस्य वाली तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। रिपोर्ट में कुछ बातें प्रमुख है। पहले, हिंसा केवल हिंदुओं के विरुद्ध थी और सुनियोजित थी। दूसरा,स्थानीय तृणमूल के मुस्लिम नेता और पार्षद ने हिंसा का नेतृत्व किया। तीसरा, लोगों ने पुलिस से मदद मांगी, पुलिस ने न हिंसा रोकने की कोशिश की और न पीड़ितों को सुरक्षा देने की ही।  यह रिपोर्ट ऐसी है जिसके बाद पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के होने का कोई कारण नहीं है। कल्पना करिए अगर आज से तीन दशक पूर्व ऐसी हिंसा होती जिसमें पूरे एक समुदाय के विरुद्ध हिंसा में कानून के शासन की धज्जियां उड़ जातीं तो वह सरकार निस्संदेह बर्खास्त होती। आज की स्थिति वैसी नहीं है। क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति शासन लागू होने और सरकार के बर्खास्त करने को संवैधानिक रूप से गलत ठहरा सकती है। राज्यपाल ने केन्द्र को भेजी रिपोर्ट में केंद्र सरकार सरकार से संवैधानिक विकल्पों’ पर विचार करनेका सुझाव तो दिया, हालात बिगड़ने पर अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) को विकल्प बताते हुए भी लिखा कि अभीजरूरत नहीं है।

 जरा सोचिए , इतनी भयानक हिंसा और पुरुषों को तो छोड़िए महिलाओं और बच्चों के दर्दनाक आपबीती के बावजूद ममता बनर्जी ने एक शब्द आरंभ में सहानुभूति का नहीं बोला। वह और उनकी सरकार के मंत्री, नेता सब इसको भाजपा का षड्यंत्र बताते हुए बीएसएफ पर ही आरोप लगा रहे थे कि बांग्लादेश से बुलाकर हिंसा करवा दिया है। कायदे से तो बीएसएफ की ओर से भी उच्च न्यायालय अपील दायर होनी चाहिए थी। आखिर किस आधार पर इतना संगीन आरोप मुख्यमंत्री ने लगा दिया जिन्होंने संविधान के तहत सफल शपथ लिया है?कम से कम उच्च न्यायालय की समिति की रिपोर्ट के बाद ममता से औपचारिक रूप से यह पूछा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के अनुसार 11 अप्रैल को नए वक्फ संशोधन कानून के विरुद्ध प्रदर्शन की आड़ में हिंदुओं कौन निशाना बनाया गया। बेतबोना गांव में 113 घर जला दिए गए। रिपोर्ट में कहा गया है, 'एक आदमी गांव में वापस आया और उसने देखा कि किन घरों पर हमला नहीं हुआ है और फिर बदमाशों ने आकर उन घरों में आग लगा दी।' यह कैसे संभव हुआ? यानी गांव जला दिए गए लेकिन पुलिस प्रशासन वहां अनुपस्थित रहा। सोचिए, पानी का कनेक्शन काटा गया ताकि आग बुझाए न जा सके। सबसे निकृष्ट काम महिलाओं का वस्त्र तक को जला देना था ताकि पहनने को कपड़े नहीं बचे। सबसे शर्मनाक भूमिका तो पुलिस की थी। रिपोर्ट में कहा गया है, 'पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया। बेतबोना के ग्रामीण ने शुक्रवार को शाम चार बजे और शनिवार को शाम चार बजे फोन किया, लेकिन पुलिस ने फोन नहीं उठाया।’ पुलिस ने मालदा में शरण लिए हुए पीड़ितों को ढाका से बेतबोना गांव में लौटने को विवश कर दिया। साफ है कि ऐसा यूं ही नहीं हुआ होगा। सरकार की ओर से पुलिस प्रशासन पर दबाव रहा होगा कि पलायन कर गए लोगों को बुलाया जाए क्योंकि इससे केवल भारत ही नहीं बाहर भी सरकार की थूथू हो रही है। रिपोर्ट ने जिस तरह पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है उससे पश्चिम बंगाल पुलिस सिर उठाने लायक भी नहीं रही। कहा गया है कि प्रशासन की तरफ से हिंसाग्रस्त इलाकों में किसी भी व्यक्ति की मदद नहीं की गई और न ही इस हिंसा में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।‌ 

रिपोर्ट की यह पंक्ति देखिए -जिस तरह हिंसा को अंजाम दिया गया, उससे यह साफ जाहिर होता है कि यह सुनियोजित था, जिसे पूरे व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में पार्षद और पुलिस दोनों के बारे में जो कहा गया उसे देखिए-, 'हमले स्थानीय पार्षद की तरफ से निर्देशित किए गए थे,' स्थानीय पुलिस पूरी तरह से "निष्क्रिय और अनुपस्थित" थी। घटना देखिए,शुक्रवार को नमाज के बाद भीड़ निकलती है और करीब 2:30 से हिंदुओं के विरुद्ध वही दृश्य खड़ा किया खड़ा हो गया जो हमने पिछले दिनों बांग्लादेश में देखा। इसमें कहा गया है, 'बदमाशों ने घर के सभी कपड़ों को मिट्टी के तेल से जला दिया और घर की महिला के पास तन ढकने के लिए कपड़े नहीं थे।’ तो इसमें कोई संदेह नहीं कि इसके पीछे पूरे क्षेत्र को हिंदूविहीन करने का षड्यंत्र था, जो जो स्वतंत्रता के पहले से चल रहा है। पहलगाम हमले में धर्म पूछ कर हिंदुओं को मारने वाले आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर जैसा युगांतकारी पराक्रम दिखाया। लेकिन बंगाल के हिंसक तत्वों, जिन्हें आतंकवादी कहने में भी समस्या नहीं होनी चाहिए, के विरुद्ध कैसा ऑपरेशन सिंदूर करना होगा? पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और तब थल सेना अध्यक्ष जनरल आसिफ मुनीर ने यही तो कहा था कि हिंदू और मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते हैं। दोनों दो कौमें हैं और यही विचार पाकिस्तान बनाने की नींव है। उन्होंने लोगों से अपील किया कि इस बात को अपनी बच्चों को बताते रहना ताकि कोई भूल न पाए। मुर्शिदाबाद में भी क्या यही विचार हिंदुओं के विरुद्ध भयानक हिंसा के पीछे नहीं था ? क्या पश्चिम बंगाल में इसके पहले हिंदू पर्व त्योहारों पर हमले नहीं हुए? चुनाव में तृणमूल के विरुद्ध वोट देने वाले हिंदुओं की क्या दशा हुई ? उन्हें किस हालत में पलायन करना पड़ा यह भी देश के सामने है।  हम पाकिस्तान के आसिफ मुनीर के विरुद्ध अपनी भृकुटियां तान सकते हैं लेकिन पश्चिम बंगाल और मुर्शिदाबाद में बैठे ऐसे आसिफ मुनीरों की पहचान कैसे होगी और उनके साथ क्या किया जाएगा? हम पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकवादियों को सरकार और आईएसआई द्वारा संरक्षण देने की बात करते हैं। उच्च न्यायालय की समिति के अनुसार यहां गैर मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा करने वालों को भी पुलिस का साथ मिलता है। बंगाल विशेषकर मुर्शिदाबाद में भी पुलिस ने घटना से आंखें मूंद कर इन उग्रवादी समूहों को एक प्रकार से काम करने की स्वतंत्रता ही दी। पाकिस्तान सरकार भी वहां गैर मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा या उनके धर्म परिवर्तन तथा भारत में आतंकवादी हमले को नकारते हुए भारत पर ही आरोप लगाती है। ममता बनर्जी की भूमिका भी ठीक वैसे ही है। उन्होंने पूरी घटना को आरएसएस बीजेपी की साजिश बता दिया। तो इसके बारे में क्या शब्द और विचार प्रकट करेंगे? 

रिपोर्ट में शमसेरगंज के जाफराबाद इलाके में हरगोबिंद दास और उनके बेटे चंदन दास की हत्या का जिक्र करते हुए कहा गया है, 'उन्होंने घर का मुख्य दरवाजा तोड़ दिया और उसके बेटे और उसके पति को ले गए और उनकी पीठ पर कुल्हाड़ी से वार किया। एक आदमी तब तक वहां इंतजार कर रहा था जब तक वे मर नहीं गए।' दोनों पिता पुत्र का दोष यह था कि वे हिंदू देवी - देवताओं की मूर्तियां बनाते थे। तो यह कैसी सोच है कि मूर्तियां बनाने वाला इनका दुश्मन हो गया? मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद वहां गए राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बंगाल को दोहरा खतरा है खासतौर पर बांग्लादेश से सटे मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में ज्यादा है क्योंकि यहां हिंदू आबादी अल्पसंख्यक है। इसी तरह उन्होंने नौर्थ दिनाजपुर को भी हिंदुओं के लिए खतरनाक बताया। 

रविवार, 25 मई 2025

लुधियाना उपचुनाव में AAP की जीत से क्या राज्यसभा का द्वार खुलेगा केजरीवाल के लिए

लुधियाना। भारतीय निर्वाचन आयोग ने रविवार को घोषणा की है कि पंजाब में लुधियाना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के लिए 19 जून को उपचुनाव होगा। इसके अलावा 4 अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी उपचुनाव होगा। इसमें गुजरात की दो, केरल और पश्चिम बंगाल में की एक-एक सीट भी शामिल हैं। इस सीट पर आम आदमी पार्टी की नजर ज्यादा है क्योंकि कयास हैं कि इस सीट पर अगर आप की जीत होगी तो पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के राज्यसभा जाने का रास्ता खुल सकता है।

लुधियाना पश्चिम सीट आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत बस्सी गोगी के निधन के बाद खाली हुई थी। राजनीतिक दलों ने उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही कर दी है और प्रचार अभियान भी काफी समय से चल रहा है। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सदस्य और उद्योगपति संजीव अरोड़ा को अपना उम्मीदवार बनाया है। लुधियाना के मूल निवासी अरोड़ा सोशल वर्कर और बिजनेसमैन हैं।

आप की अकाली दल और कांग्रेस से कड़ी टक्कर 

कांग्रेस ने पंजाब के पूर्व मंत्री और दो बार विधायक रह चुके भारत भूषण आशु को मैदान में उतारा है, जो वर्तमान में पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। शिरोमणि अकाली दल ने वरिष्ठ अधिवक्ता परुपकर सिंह घुम्मन को अपना उम्मीदवार बनाया है और उन्होंने सीट वापस पार्टी की झोली में लाने का वादा किया है।

चुनाव आयोग की घोषणा से क्षेत्र में प्रतिनिधित्व बहाल करने के लिए औपचारिक चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसने विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। अधिसूचना 26 मई को जारी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 2 जून है, उसके बाद 3 जून को जांच होगी और 5 जून तक उम्मीदवारी वापस ली जा सकेगी। वहीं वोटों की गिनती 23 जून को होनी है और पूरी चुनाव प्रक्रिया 25 जून तक समाप्त हो जाएगी।\

इन सीटों पर भी होंगे चुनाव --- गुजरात में कादी और विसावदर सीटें, केरल में नीलांबुर और पश्चिम बंगाल में कालीगंज अन्य चार विधानसभा सीटें हैं जिन पर 19 जून को उपचुनाव होने हैं। बता दें कि पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए, चुनाव आयोग 1 अप्रैल की योग्यता तिथि के आधार पर 5 मई को प्रकाशित अद्यतन मतदाता सूचियों का उपयोग करेगा।

नामांकन की अंतिम तिथि से दस दिन पहले तक निरंतर अद्यतनीकरण जारी रहेगा। सभी मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और मतदाता-सत्यापनीय पेपर ऑडिट ट्रेल्स लगे होंगे।

शनिवार, 24 मई 2025

ऐसे विवाद क्यों

अवधेश कुमार

पहलगाम आतंकवादी हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की अभूतपूर्व कार्रवाई ,उसके बाद 8 और 9 मई की रात्रि तक पाकिस्तान के साथ सीधे सैन्य टकराव और उसके बाद जिस तरह के वक्तव्य आये, प्रश्न उठाए गए हैं सामान्य तौर पर भी वे चिंतित करने वाले हैं। इसमें सबसे अंतिम विवाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के ऑपरेशन संबंधित पाकिस्तान को जानकारी देने के स्वाभाविक वक्तव्य का राहुल गांधी और कांग्रेस के द्वारा विवादास्पद बनाया जाना है। राहुल गांधी ने एक निजी न्यूज चैनल का वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर लिखा, ''हमारे हमले की शुरुआत में पाकिस्तान को सूचित करना एक अपराध था. विदेश मंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारत सरकार ने ऐसा किया।..  ''इसे किसने अधिकृत किया? इसके परिणामस्वरूप हमारी वायुसेना ने कितने विमान खो दिए?'' राहुल गांधी का पोस्ट था इसलिए हजारों की संख्या में शेयर हो गया और अपने देश के चरित्र के अनुरूप हंगामा भी।  इस कांग्रेस मीडिया एवं कम्यूनिकेशन के प्रमुख वरिष्ठ नेता जयराम रमेश पहले ही इससे आगे बढ़ कर विदेश मंत्री के इस्तीफे की मांग कर चुके थे। एक्स पर उनका पोस्ट था, ''विदेश मंत्री- अपने अमेरिकी समकक्ष की ओर से किए जा रहे दावों का जवाब तक नहीं देते हैं, उन्होंने एक असाधारण रहस्योद्घाटन किया है। वह अपने पद पर कैसे बने रह सकते हैं, ये समझ से परे है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून, 2020 को चीन को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट दे दी और हमारी बातचीत की स्थिति खत्म कर दी।  जिस शख्स को उन्होंने विदेश मंत्री के तौर पर नियुक्त किया, उसने इस बयान से भारत को धोखा दिया है। 

कांग्रेस पार्टी के समर्थक और भाजपा विरोधियों के साथ अनेक आम लोगों को भी इन बड़े नेताओं के वक्तव्य के बाद लगा होगा कि क्या वाकई हमने ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही पाकिस्तान को बता दिया? सामान्य दृष्टि से भी  इससे हास्यास्पद बात कुछ नहीं हो सकती कि जो सरकार आतंकवादी हमले के बाद सीमा पार स्थित महत्वपूर्ण आतंकवादी केन्द्रों को ध्वस्त करने की साहसिक कार्रवाई की गोपनीय तैयारी कर चुकी हो वह इसके पूर्व ही दुश्मन को बता देगा? लेकिन हमारा देश में  नेता, एक्टिविस्ट, मीडिया के कुछ साथी पत्रकार कुछ भी लिख और बोल सकते हैं। यह देश का दुर्भाग्य है और गहरी चिंता का विषय कि पूरे अभियान में , जिसने संपूर्ण दुनिया को विस्मित किया तथा पाकिस्तान को सकते में ला दिया उसे पर उत्सव मनाने की जगह अपने पय ही प्रश्न उठाकर देश का मनोबल कमजोर करने की भूमिका निभाई जा रही है। आखिर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा क्या था?  उन्होंने कहा था, “ऑपरेशन की शुरुआत में हमने पाकिस्तान को एक संदेश भेजा था कि हमारा निशाना आतंकवादी ढांचे पर है, न कि उनकी सेना पर। हमने उन्हें हस्तक्षेप न करने का विकल्प दिया था, लेकिन उन्होंने इसे मानने से इनकार कर दिया। “ उनके अनुसार, 7 मई की रात 1 से 1:30 बजे के बीच, भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने पाकिस्तान के डीजीएमओ मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला को फोन कर यह जानकारी दी थी। भारत ने केवल सावधानी से चुने गए आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाया है, न कि सेना के ठिकानों को। इसमें कहां है कि पूर्व में ही सूचित कर दिया? राहुल गांधी के वक्तव्य के बाद विदेश मंत्रालय ने इसका खंडन भी कर दिया कि पाकिस्तान को ऑपरेशन शुरू होने के बाद सूचना दी गई थी, न कि उससे पहले। इस बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। यह तथ्यों की तोड़-मरोड़ है।” 

बावजूद विवाद जारी है और रहने वाला है। सभी बड़े नेताओं को पता है कि सच क्या है। पहले की सरकारें ऐसा साहस नहीं कर सकी इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार जनता और दुनिया की नजर में ऐतिहासिक पराक्रमी न मान लिया जाए इसके भय से  अनेक ऐसे विवाद खड़े किए जा रहे हैं। इसका मतलब हुआ कि आगे भी ऐसे ही होता रहेगा।  तभी तो जिस ऑपरेशन पर अब अमेरिका व यूरोप के सामरिक विशेषज्ञ भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक सफलता ऐतिहासिक बताकर पाकिस्तान के झूठ को तथ्यों से उजागर कर चुके हैं वहां हमारे ही देश में दुश्मनों विशेषकर चीन, पाकिस्तान और अन्य के नैरेटिव को फैलाकर पूरी सफलता के स्वाद में मिट्टी तेल डालने का उपक्रम हो रहा है। भारत बहादुर देश है और जब हमने तैयारी से 1:05 बजे रात से 1:30 बजे तक यानी 25 मिनट के अंदर दो दर्जन से ज्यादा मिसाइलों के सटीक निशाने से महत्वपूर्ण आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करना शुरू किया तो पाकिस्तान को बता दिया कि कार्रवाई आतंकवाद के विरुद्ध है, पाकिस्तान पर हमला नहीं। पाकिस्तान नहीं कह रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर की सूचना पहले मिल गई और हमने किसी मिसाइल को मार गिराया।  वह सकते में आ गया कि इतनी बड़ी कार्रवाई की भनक कैसे नहीं लगी? 

दूसरे , यह हवाई बमबारी नहीं थी कि हमारे किसी वायुयान या पायलट को पाकिस्तान नुकसान पहुंचता। अगर नेताओं को इतनी समझ नहीं है  तो उनके बारे में देश तय करें कि हमें कैसा व्यवहार करना है। अंतरराष्ट्रीय मानक है कि हम किसी देश की सीमा में घुसकर किसी अपराध या आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई करते हैं तो उसे सूचना देते हैं। इसका रिकॉर्ड भी रखा जाता है ताकि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने हमले का झूठ न फैला सके। 10 मई को सैन्य टकराव रुकने के बाद डोनाल्ड राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला शुरू कर दिया यह जानते हुए कि नरेंद्र मोदी सरकार स्वयं अनेक बार कर चुकी है कि जम्मू कश्मीर के मामले में मध्यस्थता नहीं होगी। 10 मई की चार पत्रकार वार्ताओं मे सेना की दो महिला प्रवक्ताओं कर्नल सोफिया कुरेशी और‌ विंग कमांडर व्योमिका सिंह तथा विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ कर दिया। यह भी स्पष्ट किया गया कि आतंकवादी कार्रवाई को युद्ध की तरह लिया जाएगा। उसके बाद दो दिन सेना के तीनों अंगों के डीजीएमओ की पत्रकार वार्ताओं,अगले दिन प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन और उसके बाद आदमपुर वायु सेना अड्डा भाषण में साफ कर दिया कि पाकिस्तान आतंकवाद रोकने और सैन्य दुस्साहह से बचने की गारंटी पर खरा नहीं उतरा तो ऑपरेशन सिंदूर चारी है। प्रधानमंत्री नेकहा कि यज्ञ अखंड प्रतिज्ञा है। यानी अगर आतंकवादी कार्रवाई हुई तो केवल आतंकवादियों के विरुद्ध नहीं, पाकिस्तान सरकार का काम मानकर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इससे स्पष्ट घोषणा और कुछ हो नहीं सकती। 

देश के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में विश्व के लिए नए मानक जैसे प्रतिमान को देश की उपलब्धि मानने की जगह संकुचित राजनीतिक स्वार्थ तथा रुग्ण वैचारिकता के आलोक में छोटा करने का आत्मघाती व्यवहार किया जा रहा है। जब पाकिस्तान को आईएफ यानी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कर्ज दे दिया तो जयराम रमेश ने पोस्ट कर दिया कि भारत ने मतदान में विरोध नहीं किया। वे आर्थिक विषयों के पत्रकार रहे हैं और केंद्रीय मंत्री। उन्हें पता है कि विरोध में वोट करने का कोई प्रावधान नहीं और बहिर्गमन करन विरोध होता है जो भारत ने किया। इसी तरह बार-बार अमेरिकी दबाव में युद्ध विराम की बात हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और उनको कुछ बोलने से हम रोक नहीं सकते।  विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि अमेरिका से कब-कब बात हुई लेकिन भारत पर कोई दबाव हो इसे न अमेरिका बोला न कहीं से कोई संकेत। बावजूद ऐसा साबित करने की कोशिश हुई कि ट्रंप और अमेरिका के डर से युद्ध विराम कर दिया। प्रधानमंत्री के संबोधन के बावजूद पाकिस्तान और चीन के नैरेटिव को प्रमुखता दी जा रही है। अब ट्रंप ने भी कह दिया कि उसने कोई मध्यस्थता नहीं की। तब भी ये मानने को तैयार नहीं। भारत में कभी सीजफायर या युद्ध विराम शब्द का प्रयोग नहीं किया। हमने सैन्य कार्रवाई और गोलाबारी रुकने पर सहमति की बात की। यह समाचार उड़ा कि युद्दविराम केवल 18 मई तक है। अब पाकिस्तान के डीजीएमियों की ओर से आ गया कि इसकी कोई समय सीमा नहीं है। प्रश्न है कि क्या इसके बावजूद हमारे नेता, एक्टिविस्ट, बुद्धिजीवी, पत्रकारों का एक समूह अपने देश को छोटा करने से बाज आएंगे? कांग्रेस कहती है कि वह सेना के साथ है। क्या सेना के साथ होना देश पर अहसान करना है? ऐसा कौन कहेगा हम सेना के साथ नहीं है। सेना पहले भी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?  सेना  राजनीतिक नेतृत्व के आदेश का ही पालन कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने साहस दिखाया तो श्रेय उसको जाएगा। विरोधी चटपटा कर आत्महत्या कर लें तब भी इसमें श्रेय नहीं मिलने वाला। ये लोग देश के स्तर पर एकजुटता दिखाई तो श्रेय पूरे देश का होता। क्या यह बार-बार पूछना देश हित का कार्य है कि हमको क्या क्षति हुई बताया जाए? युद्ध में क्षति एकपक्षीय नहीं होती। दोनों पक्षों की होती है, किसी का कम किसी की ज्यादा। किंतु जब अभी भारत स्वयं को युद्ध या ऑपरेशन सिंदूर की अवस्था में मानता है तो जिम्मेवार भारतीय का राष्ट्रीय कर्तव्य ऐसे प्रश्नों से दूर रहना है। जो लोग अपना राष्ट्रीय कर्तव्य इसमें नहीं समझते उनके बारे में हम क्या शब्द प्रयोग करें या देश कैसा व्यवहार करें यह आप तय करिए। 


रविवार, 18 मई 2025

अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश का भव्य 13वां स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न

संवाददाता

नई दिल्ली। रविवार, 18 मई 2025 को अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष श्री देशबन्धु गुप्ता जी की अध्यक्षता में संगठन का 13वां स्थापना दिवस समारोह शाह ऑडिटोरियम, दिल्ली में अत्यंत भव्य एवं गरिमामय ढंग से सम्पन्न हुआ जिसमें समाज के वरिष्ठजनों, महिलाओं, युवाओं व बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मौजा ही मौजा एंटरटेनमेंट ग्रुप द्वारा सायं 5:00 बजे से किया गया सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के विशेष आकर्षण प्रस्तुतियों में चंद्रदेव क्यों हुए भगवान भोलेनाथ के मस्तक से अदृश्य, इस नाटिका ने पौराणिक भावनाओं को जीवंत कर दिया। माता अनुसूया द्वारा त्रिदेवों के समक्ष अपने पतिव्रत का प्रमाण, दर्शकों को भाव-विभोर कर गया। देशभक्ति की प्रस्तुति श्री राधाकृष्ण नृत्य ने सबका मन मोह लिया। भगवान शिव द्वारा बालकृष्ण के दर्शन इस भव्य नृत्य नाटिका ने मंच पर दिव्यता का आभास कराया। सायं 5 बजे से ही पूरा ऑडिटोरियम खचाखच भर गया।

कार्यक्रम के मुख्य उद्‌बोधनकर्ता अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुशील गुप्ता रहे जिन्होंने संगठन द्वारा किये गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश द्वारा सभी वर्गों के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है।

इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष श्री देशबन्धु गुप्ता जी ने सबका अभिनंदन करते हुए संगठन द्वारा किये जा रहे प्रत्येक कार्य की जानकारी दी। अध्यक्ष जी ने कहा कि सन् 2025 में 1000 बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा होने का लक्ष्य रखा है जिसमें योग शिक्षा, कंप्यूटर कोर्स, मेहंदी कोर्स, ब्यूटी पार्लर कोर्स कराया जाऐगा ताकि वे अपनी जीविका कमा सके और अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।

वीपी ग्रुप के चेयरमैन एवं संगठन के प्रेरणास्रोत श्री सत्यप्रकाश गुप्ता की भी विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्घाटन वीपी क्रिएशंस प्रा.लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री विपिन गुप्ता द्वारा किया गया, जबकि स्वागताध्यक्ष के रूप में बॉडीकेयर इंटरनेशनल लि. के चेयरमैन श्री सतीश गुप्ता उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि वर्ल्डफा ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रमोद गुप्ता, दीप प्रज्जवलन एसएस बिल्डटेक वेंचर के चेयरमैन श्री संजीव सिंगला ने गोल्डन स्पॉन्सर व अन्य अतिथियों के साथ मिलकर किया।

अतिविशिष्ट अतिथियों दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर श्री मनीष अग्रवाल, Sub Divisional Magistrates Delhi श्रीमती इति अग्रवाल, महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल पंजाबी बाग की अध्यक्षा श्रीमती मीना सुभाष गुप्ता, MAPSKO ग्रुप के चेयरमैन श्री कृष्ण सिंगला एवं क्राउन स्टील्स डेजिग्नैटिड के पार्टनर श्री सुशील सिंगला ने भी अपनी विशिष्ट उपस्थिति के साथ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम के सिल्वर स्पॉन्सर श्री जगदीश प्रसाद अग्रवाल चेयरमैन बंगाली स्वीट्स, श्री रविन्द्र मोहन गर्ग डायरेक्टर पार्कर बिल्डर, श्री रामकिशोर अग्रवाल मैनेजिंग पार्टनर आर. के. सीड फार्म्स, श्री सुशील कुमार ऐरन डायरेक्टर लक्ष्मी बर्तन भण्डार, डॉ. रामगोपाल गोयल चेयरमैन बृजगोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी, श्री ललित अग्रवाल सीइओ गोयल एंटरप्राइजेज, श्री सोहित जैन युवा समाजसेवी, श्री अनिल गुप्ता डायरेक्टर युवा रियलटेक एवं श्री बिहारी दास मंगला मैनेजिंग डायरेक्टर मयूर प्लास्टिक इंडस्ट्रीज ने महाराजा अग्रसेन के चित्र पर पुष्प अर्पित किये।

संगठन के मुख्य सलाहकार पवन सिंघल ने मंच संचालन करते हुए उपस्थित सभी गोल्डन स्पॉन्सर, सिल्वर स्पॉन्सर एवं अतिविशिष्ट अतिथियों का श्री देशबन्धु गुप्ता व कोरकमेटी द्वारा मंच पर स्मृति चिन्ह प्रदान कर पटका एवं मोतियों की माला पहनाकर सम्मानित किया गया।

दिल्ली प्रदेश की कोर कमेटी टीम में चेयरमैन श्री महावीर गोयल, अध्यक्ष श्री देशबन्धु गुप्ता, महामंत्री श्री सुभाषचंद गुप्ता, कोषाध्यक्ष श्री अशोक सातरोडिया, मुख्य सलाहकार श्री पवन सिंघल, सलाहकार सीए उमाशंकर गोयल, उपाध्यक्ष श्री अनिल टेकड़ीवाल, उपाध्यक्ष श्री विनय सिंघल, उपाध्यक्ष श्री अशोक बंसल, उपाध्यक्ष श्री ताराचंद तायल, महिला चेयरपर्सन श्रीमती मंजू सिंघल, युवा चेयरमैन श्री रविन्द्र गर्ग एवं महिला कार्यकारी महामंत्री श्रीमती आभा गुप्ता ने संगठन के समारोह में उल्लेखनीय योगदान दिया है साथ ही दिल्ली प्रदेश मेन टीम, महिला टीम, संरक्षक टीम व सभी वार्ड अध्यक्षों की उपस्थिति से कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा लक्की ड्रा, जिसमें श्री विपिन गुप्ता जी मैनेजिंग डायरेक्टर वीपी क्रिएशंस की ओर से 2100 रूपये के 10 लक्की विजेताओं को प्रदान किये गए। यह क्षण कार्यक्रम में उत्साह का संचार करने वाला रहा। साथ ही, कार्यक्रम में पहुंचने वाली पहली 100 महिलाओं को श्री प्रमोद गुप्ता जी मैनेजिंग डायरेक्टर वर्ल्डफा ग्रुप की ओर से स्टील के 6 गिलास का सेट उपहारस्वरूप प्रदान किया गया।

विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए विशेष सुविधा के अंतर्गत 4000 बायोडाटा वाली विवाह प्रस्ताव पुस्तक ने अभिभावकों को अत्यंत लाभान्वित किया।

कार्यक्रम से पूर्व जलपान व कार्यक्रम के अंत में सभी के लिए स्वादिष्ट भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई थी, जिसका सभी ने आनंद लिया।

संपूर्ण आयोजन सामाजिक एकता, पारस्परिक सहयोग और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा। आयोजन में पधारे सभी आगंतुकों ने संगठन के कार्यों की सराहना की और भविष्य में ऐसे आयोजनों की निरंतरता की कामना की।

अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश के महामंत्री श्री सुभाष गुप्ता ने इस सफल आयोजन के लिए सभी कार्यकर्ताओं, कलाकारों और सहयोगियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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