बुधवार, 30 अप्रैल 2025

भगवान विष्णु के छटवें अवतार भगवान परशुराम ने देश-विदेश के 56 स्थानों का भ्रमण कर धर्म की स्थापना के लिए सन्देश दिये और अपनी अमिट छाप छोड़ी।

भगवान शिव के सच्चे प्रतिनिधि ब्रहमस्वरूप एवं युग प्रवर्तक भगवान श्री परशुराम का अवतरण

महेश चन्द्र मौर्य

युग दृष्टा के रूप में भगवान परशुराम के दिग्दर्शन और निर्दिष्ट दिशा के अनुरूप युग बदलेगा और जरूर बदलेगा, फिर से सतयुग आयेगा व भगवान स्वयं अवतरित हो जगत का कल्याण करेंगे। उनकी प्रेरणा हमें बदलेगी और हम उन्हीं के अनुरूप युग को बदलेंगे। 

भारतीय दर्शन निरंतर चलने वाली समय परिवर्तन की घड़ी के चलते इस हजारों वर्षों के समय काल को चार कालों/युगों में विभक्त किया गया, जिन्हें क्रमशः सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग के नाम दिये गये। इन युगों के प्रारम्भ से ही परिवर्तन की प्रकिया सतत् चलायमान रही और हम मानवों को हमेंशा सीख और ज्ञान देती रही।

सतयुग ईश्वरीय युग था, जहाँ ईश्वर और ईश्वर तुल्य देवी, देवता, शुद्धि और सत्य के रास्ते पर चलते रहे। "सत्यं वद्, धर्मम चर” के सिद्धान्त पर जगत का कल्याण सुनिश्चित करते गये।

उसी सतयुग में जन्में दमयग्नि पिता और माँ रेणुका के पुत्र भगवान शिव के भक्त, महाशक्तिमान भगवान परशुराम अवतरित हुये। उस युग में उनसे बढ़कर और कोई शक्तशाली महर्षि नहीं हुआ।

उसके बाद त्रेता युग आया जिसमें ईश्वर के ही अवतरण, जग को जीवन देने वाले भगवान राम देश दुनिया के आदर्श बनें और जगत को मानवता का पाठ पढ़ाते हुये मानव को मर्यादित जीवन जीने की सीख दे गये। इसलिए वे "मर्यादा पुरुषोत्तम राम” कहलायें। जिस प्रकार सतयुग में भगवान शिव के भक्त भगवान परशुराम कहलायें, वहीं त्रेता युग में भगवान राम के भक्त महाबली हनुमान अग्रणी भक्त कहलायें। इसके बाद द्वापर युग में संसार को नीति और रीति का मार्ग बताते हुये भगवान श्री कृष्ण अवतरित हुए और उन्होंने मानव को जीवन का सार और आत्मा के स्वरूप के सिद्धांत को बताया। "सत्चिदानन्द स्वरूपाय" होते हुए भगवान श्री कृष्ण ने संसार को गीता का ज्ञान दिया, उससे जगत में ज्ञान और प्रकाश के अद्धभुत संगम का श्रृजन हुआ। उस युग में भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्त, पराक्रर्मी, सूरवीर और हर समय शक्ति प्रदर्शन और विध्वंशकारी विचारों से सने-लिपटे पड़े थे, वहीं अनेक कृष्ण भक्तों में कृष्ण भक्ति में सराबोर मीराबाई और नीतिगत विचारों को जानने वाले 'भीष्म पितामह' का नाम सदैव उनके साथ जुड़ा रहेगा, भले ही युद्ध के मैदान में सामने से कुछ ओर और अन्दर से कुछ ओर वाली स्थति थी उनकी, इसीलिए उन्होंने सरसैया पर लेटे भगवान श्री कृष्ण को याद कर दम तोड़ा और मुक्ति को प्राप्त हुए।

यद्यपि वर्तमान युग कलयुग है और सभी युगों का समन्वय काल है, जिसमें सतयुग के महादेव भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु, त्रेता युग के भगवान राम, माँ जानकी, महाबलि हनुमान और द्वापर युग के अभीष्ठ लीलाधर भगवान श्री कृष्ण, उनकी महिंमा, लीलाएँ, नीति, रीति और अनीति का नाश करने के लिए उनके द्वारा, महाभारत जैसे युद्ध का आगाज सभी को अपने आप में समाहित किये हुए हैं। युगों के इस अनुपम और आदर्श समय में भगवान परशुराम आज भी समीचीन हैं व महाशक्ति और युग परिवर्तन के प्रतीक हैं। वे भगवान शिव के प्रिय और धर्म रक्षक, वीर, वृतधारी और महाबली हैं। यह इस बात से सिद्ध होता है कि जब शिव जी का धनुष श्री राम ने तोड़ा तो श्री परशुराम ने यह जानते हुए भी कि भगवान शिव के धनुष को कोई भगवान ही क्षति पहुँचा सकता है और यह किसी साधारण मनुष्य के बसकी बात नहीं। फिर भी उन्होंने निर्भीक होकर श्रीराम और श्री लक्ष्मण को डांटते हुए नसीहत दे डाली "रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न संभार, धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार"।

इसलिए भगवान परशुराम आज भी प्रासंगिक हैं और सनातन के महानायक के रूप में युग परिवर्तन को सुनिश्चित करेगें- "बात से नही तो दण्ड से और दण्ड से नही तो डण्डा से" यह कैसा संयोग हैं कि भारतीय सस्कृति और सभ्यता को सदियों से सींचती, सँवारती और संजोती गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों (त्रिवेणी) के प्रयाग राज स्थित संगम तट पर 144 वर्षों के बाद महाकुम्भ आयोजित हुआ जिसमें 67 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम के पवित्र जल में डुबकी लगायी और अपने जीवन को धन्य किया। इन श्रद्धालुओं में भारत के कौने-कौने से ही नहीं, अपितु विश्व के अनेक देशों से भी लोगों ने आकर स्नान-ध्यान किया। इस अद्धभुत महाकुम्भ में चारों शंकराचार्यों, महामण्डलेश्वरो, साध-सन्तों, महन्तों, अखाड़ो के प्रमुख, नागा, औघड़, अधौरियों ने भी आस्था की डुबकी लगायी।

यूं तो भगवान परशुराम की चर्चा तो अनेकानेक लोग करते है लेकिन मेरी दृष्टि से भगवान परशुराम के सबसे बड़े भक्त पंडित सुनील भराला जी साबित हुए क्योंकि श्री परशुराम के व्यक्तित्व व कृतित्व से मन की गहराईयों से प्रभावित श्री भराला जी ने अपना विशाल हृद्य दिखलाते हुए प्रयागराज में सदी के सबसे बड़े महाकुम्भ में अपने तन-मन और धन को सच्ची श्रद्धा से अर्पित किया।

युग-युगों से चली आ रही हमारी सनातन परम्परा को धर्मप्रज्ञ, ओजस्वी, झुजारू और राजनेता पण्डित सुनील भराला, जिन्होंने राष्ट्रीय परशुराम परिषद का श्रजन किया और उसका कुशल नेतृत्व कर अपना विशाल हृद्य दिखलाते हुए इस प्रयागराज में 2 लाख वर्ग फुट भूमि पर भगवान परशुराम की 51 फीट उँची आकर्षक एवं सौम्यरूप दर्शाती अद्धितीय प्रतिमा स्थापित करायी और विशाल व भव्य सप्तऋषि पंडाल व शिविर आयोजित किया।

पंडित भराला जी के नेतृत्व में पूरे 45 दिन लगातार महायज्ञ आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 1 करोड़ 8 हजार आहुतियाँ दी गई, सनातन परम्परा के महत्व को कथा वाचकों, धर्माचार्यों, पीठाधीश्वरों ने अपने ज्ञान से लाखों लोगों को लाभान्वित कराया, साथ ही साथ भगवान परशुराम कथा, शिवपुराण, श्रीमद् भागवत् कथा, राम कथा का सुन्दर वाचन किया गया और भगवान परशुराम की आरती के साथ-साथ "परशुराम चालीसा" का प्रकाशन और वितरण भी किया गया। भगवान परशुराम की 1 लाख छोटी और आकृषक मूर्तियों को भक्तों को अपने घर के मन्दिर और गाड़ियों में स्थित करने के लिए वितरित किया गया। सम्मेलन में संगोष्ठियों और अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठियों का भी आयोजन किया गया और आगंतुका को भगवान परशुराम कें विराट व्यक्तित्व के विषय में बताया गया।

इस प्रकार हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की "वसुधैव कुटुम्बकम” की परिकल्पना को साकार करने में भगवान परशुराम शीर्ष संवाहक बने क्योंकि उनके चरण हमारी सांस्कृतिक धरोहरो, पर्वत मालाओं, नदी, सागर, सरोवर, भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगो के तीर्थ स्थानों, शक्तिपीठो की पावन भूमि और अनेक चमत्कारिक व धार्मिक महत्व के स्थानों, जिनमें अनेक देशों के भी पवित्र धार्मिक स्थान शामिल है पर पडे।

एक शोध के अनुसार जहाँ भगवान श्री परशुराम जी के चरण पड़े वे क्रमशः 21 स्थान इस प्रकार जाने जाते हैं:- १. कश्मीर, २. दरद, ३. कुन्तिभोज, ४. क्षुद्रक, ५. मालव, ६. शक, ७. चेदि, ८. काशिकरूष, ९. ऋषिक, १०. क्रथ, ११. कैशिक, १२. अङ्ग, १३. बङ्ग, १४. कलिङ्ग, १५. मागध, १६. काशी, १७. कोसल, १८. रात्रायण, १९. वीतिहोत्र, २०. किरात, व २१. मार्तिकावत।

उपर्युक्त प्राचीन नाम वर्तमान में 56 स्थानों में विभक्त है। भगवान परशुराम ने विभिन्न युद्धों में विजय प्राप्त कर महर्षि कश्यप को दान दिया और महान दानवी कहलायें। इन स्थानों को क्रमशः निम्नलिखित नामों से पहचाना जाता हैः

1. अङ्ग - वर्तमान बिहार और झारखंड का भाग 2. वङ्ग -वर्तमान बंगाल क्षेत्र (पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश) 3. कलिङ्ग -वर्तमान ओडिशा 4. कालिङ्ग- ओडिशा के समान क्षेत्र 5. केरल - वर्तमान केरल राज्य 6. सिद्धकेरल - केरल से संबंधित क्षेत्र 7. हंसकेरल - केरल का ऐतिहासिक संदर्भ 8. काश्मीर - वर्तमान जम्मू और कश्मीर 9. कामरूप - वर्तमान असम 10. महाराष्ट्र -वर्तमान महाराष्ट्र 11. आन्ध्र- वर्तमान आंध्र प्रदेश 12. सौराष्ट्र -वर्तमान गुजरात का काठियावाड़ क्षेत्र 13. तैलङ्ग – तेलंगाना 14. मलयाल - केरल क्षेत्र 15. कर्णाटक- वर्तमान कर्नाटक 16. अवन्ती - वर्तमान मध्य प्रदेश (उज्जैन क्षेत्र) 17. विदर्भ - महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र 18. मरुदेश - राजस्थान 19. आभीर - महाराष्ट्र और गुजरात का हिस्सा 20. मालव - राजस्थान और मध्य प्रदेश 21. चोल - तमिलनाडु का चोल साम्राज्य 22. पाञ्चाल - उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड क्षेत्र 23. काम्बोज- अफगानिस्तान और पंजाब का क्षेत्र 24. वैराट - राजस्थान का विराट नगर 25. पाण्ड्य -तमिलनाडु का पांड्य क्षेत्र 26. विदेह- बिहार और नेपाल का तराई क्षेत्र 27. बाह्वीक - पंजाब का हिस्सा 28. किरात - नेपाल और उत्तर-पूर्व भारत 29. बक्तान- अफगानिस्तान 30. खुरासन - ईरान का पूर्वी क्षेत्र 31. ऐराक - ईरान (इराक) 32. भोटान्त - तिब्बत का क्षेत्र 33. चीन - वर्तमान चीन 34. महाचीन- चीन और उससे आगे का क्षेत्र 35. नेपाल - वर्तमान नेपाल 36. शिलहट्ट - वर्तमान सिलहट (बांग्लादेश) 37. गौड- पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश 38. महाकोशल - छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश 39. मगध- बिहार 40. कीकट - बिहार 41. उत्कल- ओडिशा 42. श्रीकुन्तल - कर्नाटक का भाग 43. हूण - मध्य एशिया (हूण साम्राज्य) 44. कोङ्कण -महाराष्ट्र और गोवा का कोंकण क्षेत्र 45. कैकय- पंजाब और पाकिस्तान का क्षेत्र 46. शौरसेन- मथुरा और आसपास का क्षेत्र 47. कुरु - हरियाणा और दिल्ली का क्षेत्र 48. सिंहल – श्रीलंका 49. पुलिन्द - मध्य भारत (आदिवासी क्षेत्र) 50. कच्छ - गुजरात का कच्छ क्षेत्र 51. मत्स्य- राजस्थान का अलवर क्षेत्र 52. मद्र- पंजाब और हिमाचल प्रदेश 53. सौवीर- सिंध और पंजाब 54. लाट – गुजरात 55. बर्बर - अफ्रीका का बर्बर क्षेत्र 56. सैन्धव - सिंध (पाकिस्तान)

ये सभी धार्मिक स्थल अध्यात्मिक होते हुए हमारी "अखण्ड और एकीकृत" भारत की कल्पना को साकार करने के साथ-साथ समूचे विश्व को "वसुधैव कुटुम्बकम” के सूत्र में पिरोने का कार्य करेगें।

इस आलेख के माध्यम से मेरा सुझाव है कि इन सभी प्राचीन तौर पर जाने जाने वाले 21 प्राचीन स्थानों जिनको वर्तमान में 56 स्थानों में विभक्त किया गया है, में इन सभी स्थानों पर भगवान परशुराम की स्मृति को अक्षुण्य बनाने के लिए और नई पीढ़ी को उनके शौर्य और पराक्रम को दर्शाने के लिए संग्रहालय विकसित किये जाये क्योंकि वे हमारी महान विरासत के प्रमुख श्रोत्र होगें और साथ ही साथ नोजवानों में देश भक्ति का भाव पैदा करेगें।

मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि युग पुरुष भगवान परशुराम के आदर्श देश, समाज और धर्म को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान कर एकीकृत, समृद्ध और आध्यात्मिक भारत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाऐगें।

ऐसे भगवान परशुराम को समस्त हिन्दू व सनातन प्रेमियों का सत्-सत् नमन।

सोमवार, 28 अप्रैल 2025

शास्त्री पार्क थाने की पुलिस ने लूटे गए मोबाइल फ़ोन कुछ ही घंटों में किया बरामद, तीन गिरफ्तार


असलम अल्वी

उत्तर पूर्वी दिल्ली। उत्तर पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क थाने की पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए लूट के एक आरोपी को पीछा कर दबोचा और उसकी निशानदेही पर उसके  दो अन्य साथियों की गिरफ्तारी के साथ ही लूटा गया मोबाइल फ़ोन भी कुछ ही घंटों में बरामद कर लिया |

दिनांक 28.04.2025 को शाम करीब  06:00 PM  में  इंस्पेक्टर मंजीत तोमर, थानाध्यक्ष शास्त्री पार्क के नेतृत्व में एक टीम जिसमे एसआई रॉकी, हैड कांस्टेबल सुभाष, शिवराज , रोहित व कांस्टेबल ज्ञान शामिल थे शास्त्री पार्क इलाके में गश्त करते हुए मछली मार्किट पहुंचे तो एक व्यक्ति को बदहवास हालत में देखा, पूछने पर उसने बताया  की तीन लड़के मार पीट करने के बाद मेरा मोबाइल फ़ोन लूट कर ले गए हैं। टीम के सदस्यों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए व्यक्ति के बताये  हुए रस्ते पर आगे बढे तो एक कुछ दूर एक लड़का जाता हुआ दिखा, जिसको पीछा करके  टीम ने काबू किया तब तक पीड़ित व्यक्ति भी उनके पास पहुंच गया और शिनाख्त करते हुए बताया की इसी लड़के ने अपने 2 साथियों के साथ मिलकर लूट की है। पकडे गए लड़के की पहचान मोहम्मद इरशाद पुत्र मोहम्मद रफ़ीक निवासी बुलंद मस्जिद  शास्त्री  पार्क उम्र 22 वर्ष के तौर पर की गई। 

तदनुसार, पीड़ित सुनील कनोजिया निवासी ट्रोनिका सिटी उम्र 35 वर्ष के बयान पर थाना शास्त्री पार्क में भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(4)/317(2)/3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जाती है |

जांच के दौरान यह टीम श्री हरेश्वर वी. स्वामी, आईपीएस, डीसीपी/उत्तर-पूर्वी जिले के मार्गदर्शन में विभिन्न स्रोतों से साक्ष्य एकत्र करके आरोपी इरशाद की निशानदेही पर उसके दोनों साथियों उज्जवल पुत्र हितनारायण निवासी गली नंबर 4, शास्त्री पार्क उम्र 22 वर्ष व सोनू पुत्र मोहम्मद हारून निवासी बुलंद मस्जिद  शास्त्री  पार्क उम्र 22 वर्ष को भी गिरफ्तार कर लेती है। आगे की जांच में आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए अन्य मामलों में भी अपनी संलिप्तता के बारे में बताया। टीम ने आरोपी सोनू के पास से लूटा हुआ मोबाइल फ़ोन बरामद किया। गहन जांच के दौरान पकड़े गए आरोपी इरशाद व सोनू पहले भी हत्या के प्रयास के मामले में शामिल पाए गए। मामले में आगे की जांच जारी है।




रविवार, 27 अप्रैल 2025

थाना वेलकम की टीम ने आटो यात्री के साथ लूट का मामला सुलझाया, तीन आरोपियों काे किया गिरफ़्तार, शिकायतकर्ता का लूटा हुआ बैग व मोबाइल फोन बरामद

  • लोगों को ठगने में काम आने वाली असली नोटों जैसी दिखने वाली रद्दी कागज की 02 गड्डियां व वारदात में इस्तेमाल ऑटो DL-1RAB-4282 भी बरामद
  • तीनों आरोपी पहले भी अपराधिक मामलों में शामिल पाए गए

असलम अल्वी

उत्तर पूर्वी दिल्ली। दिनांक 27.04.2025 को थाना वेलकम में एक यात्री से लूट की सूचना प्राप्त हुई जिसमे शिकायतकर्ता शिवम पुत्र मंगलू सिंह निवासी बुलंदशहर, उम्र 17 वर्ष ने बतलाया की शाम करीब 03:45 पर वह  कश्मीरी गेट बस अड्डे से आनंद विहार बस अड्डे जाने की लिए ऑटो में बैठा था, उस ऑटो में ड्राईवर व 02 सवारी पहले से ही बैठी थी। जैसे ही ऑटो वेलकम मेट्रो स्टेशन पार करके झील पार्क पहुंचा तो उतरने के बहाने से ऑटो में पहले से यात्री सीट पर बैठे दोनों व्यक्तियों ने ऑटो को रुकवा लिया और उतरते वक्त उसका बैग जिसमें उसका मोबाइल फ़ोन, कागजात , कपड़े व 2000 रु. थे उसके हाथ से छीन कर भाग गए।

तद्नुसार, शिवम की शिकायत पर थाना वेलकम में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 304(2)/3 (5) के तहत मुकद्दमा दर्ज कर जांच शुरू की जाती है|

जांच के दौरान इंस्पेक्टर रुपेश कुमार खत्री, थानाध्यक्ष- वेलकम के नेतृत्व में एक टीम जिसमे इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र सिंह, एसआई योगेश कुमार, एएसआई रामबीर, संजय तेवतिया, हैड कांस्टेबल हरेंद्र, ललित, अरुण, कुलदीप और कांस्टेबल विनोद और हरवीर धामा शामिल थे का गठन किया गया। टीम ने एसीपी/भजनपुरा की देखरेख व श्री हरेश्वर वी. स्वामी, आईपीएस, डीसीपी/उत्तर-पूर्वी जिला के मार्गदर्शन में कार्य करते हुए विभिन्न स्रोतों से मामले में जानकारी इकठ्ठा कर वारदात में शामिल निम्न 03 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से पीड़ित शिवम का लूटा हुआ बैग, कपडे, कागजात व मोबाइल फ़ोन बरामद कर लिया। इसके अलावा लुटेरों के कब्जे से असली नोटों जैसी दिखने वाली रद्दी कागज की 02 गड्डियां व वारदात में इस्तेमाल ऑटो भी बरामद किया गया। पकडे गए व्यक्तियों की पहचान निम्न के तौर पर की गई :

  1. सलीम पुत्र रहीस निवासी ई-1281, जेजे कॉलोनी, बवाना, दिल्ली उम्र- 48 वर्ष 
  2. रुस्तम पुत्र कय्यूम निवासी ई-1176, जेजे कॉलोनी, बवाना, दिल्ली उम्र- 23 वर्ष 
  3. आकाश पुत्र वीरेंद्र निवासी ई-1512, जेजे कॉलोनी, बवाना, दिल्ली उम्र- 42 वर्ष 

मामले में आगे की गहन पूछताछ में तीनों व्यक्तियों ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बतलाया वो ज्यादातर बस अड्डे व भीड़भाड़ वाले स्थानों  के पास अपना ऑटो लेकर खड़े हो जाते हैं और यात्रिओं  को उनके गंतव्य स्थान पर पहुँचाने के लिए ऑटो में बैठा लेते हैं तथा रास्ते मे झांसा देकर असली नोटों जैसी दिखने वाली रद्दी कागज की  गड्डियां देकर यात्रियों से उनका सामान ले लेते हैं। यदि कोई व्यक्ति उनके झांसे में नहीं आता तो वे जबरदस्ती उसका सामान छीनकर उसे किसी सुनसान स्थान पर उतारकर भाग जाते हैं। इस मामले में भी उन्होंने पीड़ित शिवम को पहले उसके सामान, मोबाइल फोन व पैसों के बदले कागज के नोटो की गड्डियां देने की बात की मगर जब वो नहीं माना तो उन्होंने ऑटो से उतरने का बहना बनाकर पहले उसे ऑटो से नीचे उतार दिया तथा उसका बैग जिसमें शिवम के कपड़ व मोबाइल फोन थे लूटकर भाग गए। तत्पश्चात, वर्तमान मामले की धाराओं को 309(6)/3(5) बीएनएस के रूप में परिवर्तित किया गया। पकडे गए तीनों आरोपी पहले भी लूट व अन्य मामलों में शामिल पाए गए हैं। मामले में आगे जांच जारी है।



शनिवार, 26 अप्रैल 2025

पहलगाम के प्रतिशोध हेतु अपनाना होगा इजरायल माडल

भविष्य की आहट

डा. रवीन्द्र अरजरिया

आतंकवाद का दावानल समूची मानव जाति को निगलने के लिए आतुर हो रहा है। पहलगाम में धर्म पूछकर मुस्लिम आतंकियों ने हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया। हथियारों के सौदागरों के व्दारा मुहैया कराये जा रहे आधुनिक शस्त्र, पाकिस्तान में चलाये जा रहे आतंक प्रशिक्षण शिविरों और इस्लाम के नाम पर बनाये जा रहे संगठनों में मुसलमानों को बरगलाकर फिदाइनी बनने का सिलसिला निरंतर तेज होता जा रहा है। गैर मुसलमानों के खिलाफ जेहाद चलाने का फैशन चल निकला है। पहलगाम की घटना से पूरे देश में आक्रोश है। चारों ओर बदले की आवाजें गूंज रहीं हैं। ऐसे में राष्ट्रद्रोहियों का एक गिरोह अपने सीमापर बैठे आकाओं के इशारों पर आतंकियों के सरपरस्तों, संदेहास्पद सहयोगियों और कलुषित मानसिकता वाले लोगों को बचाने के लिए सोशल मीडिया के सहारे नागरिकों को बरगलाने में जुटा है। इस गिरोह के सदस्यों की फौज कश्मीर पहुंच गई है जहां से निरंतर मुसलमानों की सहृदयता, उनका भाईचारा और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रायोजित प्रचार कर रही है। 

सीमापार के आतंकी अड्डों, उनके आकाओं के ठिकानों और कट्टरपंथियों के मुख्यालयों सहित अन्य संदिग्ध स्थानों को नस्तनाबूद करने के साथ-साथ देश के मीर कासिमों की नस्लों को भी समाप्त करना होगा अन्यथा राष्ट्रद्रोहियों को संरक्षण देने वाली जमात पुनः मुसलमानों को बरगलाकर फिदायिनी बनाने से बाज नहीं आयेंगे। समूची दुनिया में इस्लाम के नाम पर आतंक का डंका बजाने वाले संगठनों को अनेक राष्ट्र से आर्थिक सहायता, अग्नेय शस्त्र और संरक्षण सहित प्रशिक्षण मिल रहा है। 

अब वक्त आ गया है जब धर्म के नाम पर कत्लेआम करने वाले आतंकी संगठनों से निपटने के लिए अपनाना होगा इजरायल माडल। गाजा में हमास के खिलाफ छेडी गई जंग एक उदाहरण बन गई है जहां पर इजरायली नागरिकों का अपहरण करके दबाव की राजनीति करने वालों के ठिकानों को ही नस्तनाबूत नहीं किया जा रहा है बल्कि उनके मददगारों तक को धूल में मिलाया जा रहा है। आश्चर्य है कि गाजा के आम नागरिकों के सामने उनके मासूम बच्चों, पत्नियों और परिवारजनों की लाशें बिछ रहीं है, दाने-दाने को तरस रहे हैं, आशियाने खण्डहर में तब्दील हो रहे हैं परन्तु वे हमास के विरुध्द एक भी शब्द जुबान पर नहीं ला रहे हैं। 

इस्लाम के नाम पर अंध विश्वास, जन्नत में 72 हूरों का सपना और काफिरों की मौत से मिलने वाले शबाब की कल्पना के तले जीती जागती जिंदगियों को तबाह करने में जुटे कट्टरपंथियों का एक बडा तबका आईएसआईएस, अबू सय्यफ ग्रुप, अलकायदा, अल शबाब, अंसार अल्लाह, बोको हरम, हमास,हयात तहरीर अल शाम, हिजबुल्लाह, हुर्रास अल दीन, इस्लामिक स्टेट, आईएस, जैस ए मोहम्मद, हूती, हरकत अल मुकाबामा अल इस्लामिया, आईएसएल, अब्दुल्ला अज्जाम ब्रिगेड्स, अबू निदाल, अल अक्सा शहीद ब्रिगेड, अल अश्तर ब्रिगेड, अल गमआ अल इस्लामिया, अंसार अल इस्लाम, अन्सार दीन, अंसारल्लाह, हक्कानी नेटवर्क, हरकत अल सबिरीन, इंडियन मुजाहिद्दीन, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर, जैश अल मुहाजिरिन वाल अंसार, लश्कर ए तैयबा,   फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद जैसे हजारों संगठनों को पाल पोसकर निरंतर बडा कर रहा है। 

गाजा में हमास ने जिस तरह से भूमिगत सुरंगों का जाल फैला रखा है। अस्पतालों, स्कूलों, मस्जिदों, मदरसों, यतीमखानों के नीचे अड्डे बना रखे हैं। मानवीयता से जुडी संस्थाओं के भवनों में दफ्तर खोल रखे हैं। यह सब चिन्ता का विषय है जिसे इजरायल व्दारा बहादुरी के साथ बरबाद किया जा रहा है। ऐसी ही कार्यवाही की आवश्यकता देश में भी है। पहलगाम का बदला लेने के लिए सीमापार पाकिस्तान में बनाये गये लांचिंग पैड, ट्रेनिंग कैम्प्स और फंडिंग सेन्टर्स को नस्तनाबूद करने के साथ-साथ आतंकियों के आकाओं, मददगारों और सरपरस्तों को भी तबाह करना होगा। वर्तमान में समूची दुनिया भारत के साथ खडी है। ऐसे में प्रधानमंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी जैसा विश्व प्रसिद्ध व्यक्तित्व का होना सोने में सुगन्ध का काम कर रहा है। समूचा देश उस क्षण का बेसब्री से इंतजार कर रहा है जब पहलगाम में हुए धर्म के नाम पर कत्लेआम का बदला लेने की पहल शुरू होगी। स्वाधीनता के बाद का पल एक बार फिर लौट आया है जब वर्चस्व की जंग मुंह खोले खडी थी। धर्म के नाम पर देश का विभाजन करने वालों की पीढियां आज फिर से मानवता का ढोंग रच रहीं हैं। देश के बाहर और देश के अंदर बैठे राष्ट्रघाती लोगों को चिन्हित करना होगा। 

देश के विभिन्न दलों, विभिन्न पदों और विभिन्न मजहबों के स्वयंभू ठेकेदारों में भी एक बडा तबका है जो राष्ट्रद्रोही ताकतों को अपने प्रभाव से निरंतर सहायता पहुंचा रहा है। ऐसे लोगों को सीमापार से निरंतर आर्थिक सहयोग मिल रहा है। धनलोलुपों की यह फौज अब चांदी के टुकडों पर अपनी मां का भी सौदा करने को आमादा हैं। ऐसे में पहलगाम की धरती पर यदि लम्बी चली आतंकी वारदात का वहां मौजूद दुकानदारों, घोडावानों, खोमचेवालों, होटलवालों, टैक्सीवालों सहित उपस्थित स्थानीय नागरिकों ने वीडियो नहीं बनाया, फोटो नहीं खींचे, लोगों की पहचान नहीं बताई तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। गाजा में क्या वहां का आम मुसलमान कभी हमास के सदस्य की पहचान बताता है? हिजबुल्लाह के बारे में ईरान का आम नागरिक बताता है क्या? केवल कश्मीर में ही आतंकियों के हजारों की संख्या में मददगार मौजूद हैं। 

वहां के सरकारी तबके से लेकर सार्वजनिक प्रतिष्ठानों तक में कट्टरपंथियों की जमात ने घुस पैठ बना ली है। देश के राजनैतिक हलकों में वोटबैंक की खातिर भितरघातियों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। सरकार को देश के बाहर और अंदर दौनों जगहों पर एक साथ मोर्चा खोलना पडेगा तभी सफलता का प्रतिशत बढ सकेगा अन्यथा देश में मौजूद मीर कासिमों की फौज फिर से कार्यवाही का सबूत, सेना के शौर्य की प्रमाण पत्र और मनगढन्त आरोपों पर सफाई मांगने से बाज नहीं आयेगी। देश के कोने-कोने में बैठे टुकडे-टुकडे गैंग के मैम्बर्स और स्वयंभू बुद्धिजीवियों के खोल में बैठी बामपंथियों की टुकडियां सफलता पर भी असफलता की कालिख पोतने हेतु बेशर्मी के साथ पुनः सामने आयेंगी। इस बार बस इतनी ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।

Dr. Ravindra Arjariya, Accredited Journalist, for cont. - dr.ravindra.arjariya@gmail.com, ravindra.arjariya@gmail.com, ravindra.arjariya@yahoo.com, +91 9425146253, +91 7017361649

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025

पहलगाम हमले से सन्न देश

अवधेश कुमार

निस्संदेह , पहलगाम के बायसरन घाटी हमले पर पूरा देश क्षुब्ध हैं। चुन-चुनकर 26 निहत्थे हिन्दू पर्यटकों की हत्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के अंदर जम्मू कश्मीर के स्पष्ट दिख रहे परिवर्तित हालात की दृष्टि से असामान्य और सन्न करने वाली घटना है। सन 2000 के बाद पहलगाम क्षेत्र का यह सबसे बड़ा हमला है जिसमें 30 लोग मारे गए थे। पहलगाम जम्मू कश्मीर का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है और वहां से लगभग 10 किलोमीटर दूर बायसरन घाटी में पर्यटक पिकनिक मनाने आनंद लेने जाते हैं। हरियाली और पूरा वातावरण गर्मी में जम्मू कश्मीर जाने वाले पर्यटकों को खींचता है। कहने वाले इसे स्विट्जरलैंड का प्रतिरूप भी बताते हैं। लोग घुड़सवारियों से लेकर अलग-अलग किस्म का आनंद लेते हैं।  ट्रैकिंग का एक कैंप साइड है जो तोलिया झील तक पर्यटकों को ले जाता है। पहलगाम से टट्टुओं के जरिए इस क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है और रास्ते में पहलगाम शहर और लीडर घाटी का मनोरम दृश्य है। वायसरन नमक घास का मैदान चारों ओर घने देवदार के जंगलों और पर्वतों से घिरा है। चूंकि जम्मू कश्मीर की स्थिति पिछले 5-6 वर्षों में काफी हद तक सामान्य हो गई है इसलिए भारी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ निर्भय होकर चारों ओर घूमते हैं। स्थानीय लोगों की दुकानें और अन्य कारोबार चल निकले हैं। यह घटना भी एक सामान्य चाय नाश्ते की दुकान पर हुई। इस तरह की दुकानें कश्मीर घाटी से नदारत हो गए थे। आतंकवादियों के लिए ऐसी जगह अंधाधुंध गोलीबारी कठिन नहीं है। घटना का विवरण और इसकी पृष्ठभूमि हमें कई बातों पर विचार करने के लिए बाध्य करता है। आखिर यह कौन सी सोच है जिसमें आतंकवादियों ने मजहब प्रमाणित करके लोगों को मारा?

प्रधानमंत्री मोदी ने घटना को इतनी गंभीरता से लिया कि सऊदी अरब की यात्रा बीच में रोक वापस लौटे, विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ बैठक की तथा गृहमंत्री अमित शाह सीधे कश्मीर पहुंचे। इसके साथ गृह मंत्री शाह का घटनास्थल तक जाना आतंकवाद के विरुद्ध ही नहीं जम्मू कश्मीर को हर दृष्टि से सामान्य, शांत और समृद्ध बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को प्रमाणित करता है। ऐसी भूमिका से लोगों को सुरक्षा का आश्वासन मिलता है तथा आतंकवादियों एवं उनको प्रायोजित करने वाली शक्तियों को सख्त संदेश। चूंकि यह घटना अमरनाथ यात्री निवास नुनवान बेस कैंप से महज 15 किमी. दूर हुआ और 3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है तो यह मानने में भी समस्या नहीं है कि पर्यटकों के साथ तीर्थयात्रियों के अंदर भय पैदा करने के लिए हमला हुआ। इसके साथ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की यात्रा तथा प्रधानमंत्री की सऊदी अरब जैसे प्रमुख मुस्लिम देश के दौरे से भी इसका संबंध जोड़ा जा सकता है।

आतंकवादी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। इसके बारे में जानकारी यही है कि जब पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को प्रतिबंधित करने और नियंत्रित करने का दबाव बढ़ा तो लश्कर ए तैयबा और अन्य संगठनों ने टीआरएफ नाम कर लिया। इसका प्रमुख शेख सज्जाद गुल पाकिस्तान में है। प्रधानमंत्री सऊदी अरब से लौटते समय पाकिस्तानी वायु मार्ग का इस्तेमाल नहीं करते तथा साढ़े पांच घंटे लगाकर भारत आते हैं तो इसके निहितार्थ भी स्पष्ट हैं। सरकार को पाकिस्तान की भूमिका की सटीक सूचना नहीं होती तो ऐसा नहीं होता। जो जानकारी है उसके अनुसार आतंकवादी पाकिस्तान से निर्देश ले रहे थे। आंतरिक संकटों से ग्रस्त पाकिस्तान और छवि सुधारने के लिए संघर्षरत सेना-आईएसआई के पास एकमात्र रास्ता जम्मू कश्मीर ही बचता है। जिस तरह सेना का उपहास उड़ाया जा रहा है, लोग सेना के विरुद्ध सड़कों पर उतरे हैं, उसके भ्रष्टाचार और विफलता के विवरण मीडिया, सोशल मीडिया में सामने आए हैं उनसे सेना की चिंताएं बढ़ीं हुईं हैं। सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर का घृणाजनक और मुस्लिमों को भड़काने वाला भाषण इसी कड़ी का अंग था। 

वस्तुत: जनरल मुनीर ने नए सिरे से इस्लामी जेहाद की बात की। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान साथ नहीं रह सकते क्योंकि हम दो अलग कौम हैं। हमने पाकिस्तान के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया है इसे मत भूलना। हालांकि सच यह है कि मुस्लिम लीग को पाकिस्तान निर्माण के लिए कोई आंदोलन नहीं करना पड़ा। उन्होंने जम्मू कश्मीर की चर्चा की। यह संकेत था कि सेना ने जम्मू कश्मीर में हिंसा करने की कुछ दीर्घकालीन तैयारियां की है। पाकिस्तान की आम जनता के विद्रोह से बचने के लिए यही एकमात्र रास्ता उनके पास बचा था। देश में जब भी आतंकवाद के संदर्भ में पाकिस्तान का नाम लिया जाता है कुछ लोग इसके विरुद्ध खड़े होते हैं और कहते हैं कि आर्थिक दृष्टि से विपन्न देश भारत के विरुद्ध हिंसा कैसे कर देगा। भूल जाते हैं कि हिंसा करने के लिए शक्तिशाली होना आवश्यक नहीं है। जम्मू कश्मीर में इस्लाम के नाम पर भड़काना और पहले से व्याप्त आतंकवादियों के इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल सक्रिय करना है। जनरल मुनीर ने यही किया है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कुछ दिनों पहले रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो भी शेयर हो रहा है, जिसमें एक आतंकवादी जनसभा में खुलेआम भारत को लहूलुहान करने की धमकी दे रहा है। 

इनकी सोच और रणनीति देखिये। घायल पुणे की आसाबरी जगदाले बता रहीं हैं कि आतंकवादी आए तो उनका परिवार डर से टेंट के अंदर छिपा था। उन्होंने उनके 54 वर्षीय पिता संतोष जगदाले से कहा कि वे बाहर आकर कलमा पढ़ें और जब वे ऐसा नहीं कर पाए, तो उन्हें तीन बार गोली मारी। उनके चाचा को भी गोली मारी। एक महिला बता रही है कि मैं और मेरे पति भेल खा रहे थे तभी आतंकी आये और बोले कि ये मुस्लिम नहीं लग रहे, इन्हें मार दो और मेरे पति को गोली मार दी। वे मुस्लिम हैं या हिंदू यह जानने के लिए लोगों को नंगा किया गया। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद एवं अलगाववाद के पीछे सोच इसे इस्लामी राज्य में बदलना रहा है। इस्लाम के नाम पर ही आतंकवादी वहां अपनी जान देकर हमले करते रहे हैं। जनरल आसिफ मुनीर ने केवल इसे सार्वजनिक रूप से अभिव्यक्त कर दिया। सेना प्रमुख के बयान का अर्थ है कि लंबे समय से इस पर काम किया जा रहा था। आतंकवादियों की योजना यही है कि वह कश्मीर के स्थानीय मुस्लिम निवासियों को संदेश दें कि हम मुसलमान होकर आपके हैं और गैर मुसलमान हमारे साझा दुश्मन हैं।

 हालांकि आतंकवादी संगठन, अलगाववादी तथा पाकिस्तान भूल रहा है कि भारत, जम्मू कश्मीर और वैश्विक अंतर्राष्ट्रीय स्थितियां भी बदली हुई है। जम्मू कश्मीर के स्थानीय लोगों को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद बदली स्थिति का लाभ मिला है। वे खुलकर हवा में सांस लेने लगे हैं, बच्चे पढ़ने लगे हैं, खेलकूद व सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं और सबसे बढ़कर विकास उनके घर तक पहुंच रहा है। पहले की तरह वहां आतंकवादियों से मुठभेड़ में सुरक्षा बलों के विरुद्ध प्रदर्शन, पत्थरबाजी और नारा नहीं लगता। यह तो नहीं कह सकते कि आतंकवादियों का स्थानीय समर्थन बिल्कुल खत्म हो गया है क्योंकि ऐसा होने के बाद उनका वहां रहना मुश्किल हो जाता। सारे अनुभव, लोगों की प्रतिक्रियायें एवं खुफिया जानकारियां बतातीं हैं कि स्थिति पहले की तरह तो नहीं है। पुराने मंदिर एवं अन्य गैर मुस्लिम धर्मस्थल धीरे-धीरे खुले हैं। कभी पाकिस्तान को अमेरिका या कुछ यूरोपीय देशों की अंतरराष्ट्रीय नीति के कारण शह मिल जाता था किंतु अब वह अकेला है। अफगानिस्तान तक उसके विरुद्ध खड़ा है तथा अंदर बलूचिस्तान , सिंध,  वजीरिस्तान आदि में विद्रोह का झंडा बुलंद है। ज्यादातर प्रमुख मुस्लिम देश भी पाकिस्तान का साथ देने को तैयार नहीं। भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछले 10 वर्षों में काफी बदली है और दो बार सीमा पार कार्रवाई करके प्रदर्शित भी किया गया है कि हम प्रायोजित आतंकवाद का मुंह तोड़ जवाब देने वाले देश बन चुके हैं। अमेरिका, रूस और यूरोपीय देश ही नहीं कई मुस्लिम देशों ने इस घटना में भारत के साथ होने का बयान दिया है। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी अगर दोषियों को बख्शे नहीं जाने की बात कर रहे हैं और अमित शाह मोर्चा संभाले हैं तो आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों के लिए अब तक का सबसे बुरा समय होगा। देश के अंदर भी मोदी सरकार को बार-बार इस्लाम विरोधी और मुसलमान विरोधी बताने वाले समझें कि वे क्या कर रहे हैं। आतंकवादियों ने पुरुषों को मारकर महिलाओं को छोड़ते हुए कहा कि जाओ मोदी को बता दो क्योंकि वह हमारे मजहब का दुश्मन है।

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स,  दिल्ली -110092, मोबाइल -981027208


http://mohdriyaz9540.blogspot.com/

http://nilimapalm.blogspot.com/

musarrat-times.blogspot.com

http://naipeedhi-naisoch.blogspot.com/

http://azadsochfoundationtrust.blogspot.com/