संवाददाता
गुरुवार, 15 अगस्त 2024
स्व. टी एन बाजपेयी स्मृति नवीनीकृत सभागार का उदघाटन
सेंट स्टीफंस कैम्ब्रिज स्कूल ने मनाया स्वतंत्रता दिवस
नई दिल्ली। सेंट स्टीफंस कैम्ब्रिज स्कूल में गुरुवार को बड़े उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में, स्कूल परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
स्वाधीनता दिवस को मनाने के लिए उत्साहित शिक्षक और छात्र स्कूल में सुबह ही एकत्र हो गए थे। स्कूल तिरंगे रंगों में बनी रंगोली, मालाओं और ताजी फूलों की खुशबू से सजा हुआ था।
उत्सव का आगाज़ मुख्य अतिथि ब्रदर सोलोमन जॉर्ज द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने से हुआ। इसके बाद सभी ने राष्ट्रगान गाय। ब्रदर सोलोमन जॉर्ज ने छात्रों मातृभूमि के प्रति प्रेम की सराहना की। उन्होंने छात्रों से अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का आग्रह किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि यह स्कूल पहला स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली ब्रदरहुड सोसाइटी, जिसने 1881 में राजधानी में सेंट स्टीफंस कॉलेज की स्थापना की थी, ने सोनीपत में दिल्ली-हरियाणा सीमा पर यह स्कूल शुरू किया है। इसमें दिल्ली और हरियाणा दोनों के बच्चे पढ़ते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत देशभक्ति गीत से हुई, इसके बाद मनमोहक नृत्य, भावपूर्ण देशभक्ति गीत, छात्रों के भाषण और मधुर वाद्य संगीत की एक श्रृंखला ने सभी में देशभक्ति की भावना जागृत की। यह कलाकारों और दर्शकों दोनों के लिए एक खुशी और रोमांचक अनुभव था।इस खास दिन की यादें हमेशा उन लोगों के दिलों और दिमाग में बनी रहेंगी, जिन्होंने इसे देखा।
बुधवार, 14 अगस्त 2024
सर्वोदय बाल विद्यालय, बुलन्द मस्जिद स्कूल में धूमधाम से मनाया गया 78वां स्वतंत्रता दिवस
संवाददाता
नई दिल्ली। सर्वोदय बाल विद्यालय, बुलन्द मस्जिद स्कूल के प्रांगण में आज 78वां स्वतंत्रता दिवस प्रधानाचार्य श्री चांद बाबू की अध्यक्षता में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद गांधी नगर के विधायक श्री अनिल वाजपेयी ने ध्वजारोहण किया और स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए और स्वतंत्रता दिवस के महत्व को समझाया गया। विधायक अनिल बाजपेयी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी को बधाई दी और देश के विकास में सहयोग करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
वक़्फ़ किया है..(वक़्फ़ बोर्ड )
लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी नीतिगत बदलाव बग़ैर व्यापक चर्चा और विमर्श के लागू नहीं करना चाहिए
डॉ. बंदिनी कुमारी
वक्फ बोर्ड को भारत में रेलवे और रक्षा विभाग के बाद तीसरा सबसे बड़ा भूमिधारक कहा जाता है। वर्तमान में 8 लाख एकड़ में फैली 8,72,292 पंजीकृत वक्फ संपत्तियाँ हैं। इन संपत्तियों से 200 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। एक बार जब किसी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया जाता है तो वह अहस्तांतरणीय हो जाती है और ईश्वर के प्रति एक धर्मार्थ कार्य के रूप में स्थायी रूप से सुरक्षित रहती है। वक़्फ़ एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ होता है ख़ुदा के नाम पर अर्पित वस्तु /संपत्ति; चाहे वह चल हो या अचल, मूर्त या अमूर्त, ख़ुदा को इस आधार पर दान करना ताकि अंतरण से जरूरतमंदों को लाभ हो सके। वक्फ से होने वाली आय आमतौर पर शैक्षणिक संस्थानों , कब्रिस्तानों, मस्जिदों और आश्रय गृहों को निधि देती है। भारत में वक्फ को वक्फ अधिनियम, 1995 द्वारा विनियमित किया जाता है। संसद वक्फ बोर्ड के कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करने के लिये वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश कर दिया है । ये संशोधन विधेयक वक्फ बोर्ड की अनियंत्रित शक्ति को कम करने के लिये वक्फ अधिनियम, 1995 के कुछ प्रावधानों को हटाने का प्रयास करता है, जो वर्तमान में उन्हें आवश्यक जाँच के बिना किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने की अनुमति देता है।
वक्फ बोर्ड एक कानूनी इकाई है जो संपत्ति अर्जित करने, उसे रखने और हस्तांतरित करने में सक्षम है। यह मुकदमा करने और न्यायालय में मुकदमा किये जाने दोनों में सक्षम है। यह वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करता है, खोई हुई संपत्तियों को वापस प्राप्त करता है और बिक्री, उपहार, बंधक ऋण या गिरवी कर्ज, विनिमय या पट्टे के माध्यम से अचल वक्फ संपत्तियों के हस्तांतरण को मंजूरी देता है, जिसमें बोर्ड के कम से कम दो-तिहाई सदस्य लेनदेन के पक्ष में मतदान करते हैं।
इस संशोधन विधेयक को पेश करने के संदर्भ में सरकार का दावा है कि इससे वक़्फ़ बोर्ड के प्रबंधन में सुधार होगा एवं इसके साथ ही इस विधेयक का उद्देश्य वक़्फ़ सम्पत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, इससे भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं पर नियंत्रण पाया । विधेयक के माध्यम से वक़्फ़ सम्पत्तियों के विकास और संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकता है एवं यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा सकता है कि वक़्फ़ सम्पत्तियों का उपयोग समुदाय के लाभ के लिए किया जाए। विधेयक के जरिए वक़्फ़ संपत्तियों से जुड़े कानूनी मामलों को सुलझाने और विवादों के निपटारे के लिए त्वरित और प्रभावी प्रावधान किए जा सकते हैं। इसके साथ ही इस विधेयक के क़ानून बनने से न्यायिक प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि वक़्फ़ बोर्ड की संरचना में सुधार के माध्यम से इसकी कार्यक्षमता और दक्षता को बढ़ाया जा सकेगा, जिससे वह अपने उद्देश्यों को और बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण इस विधेयक के क़ानून बनने से वक़्फ़ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकारी निगरानी और हस्तक्षेप को बढ़ाने का प्रावधान किया जा सकता है। इससे वक़्फ़ संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
एनडीए सरकार के उपर्युक्त दलीलों और दावों के बावजूद विपक्ष, मुस्लिम समाज के उलेमाओं एवं मुस्लिम सांसदों के द्वारा इस प्रस्तावित विधेयक का पुरज़ोर विरोध किया जा रहा है । इस विधेयक का विरोध करने वालों के अपने तर्क और आशंकाएँ है। विपक्ष का मानना है कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता और वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन में हस्तक्षेप करता है। वे इसे समुदाय के अधिकारों पर सरकार का हस्तक्षेप मानते हैं। विधेयक के तहत वक़्फ़ संपत्तियों का सरकारी नियंत्रण बढ़ने की संभावना होती है। विपक्ष इसे वक़्फ़ बोर्डों की स्वायत्तता और उनके अधिकारों में कटौती के रूप में देखता है। विपक्ष का यह भी तर्क है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की भावनाओं और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। कुछ विपक्षी दलों का कहना है कि विधेयक में कई प्रावधान अस्पष्ट हैं और इससे कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। विपक्ष का यह भी दावा है कि इस विधेयक को बिना पर्याप्त परामर्श और चर्चा के पारित किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
सरकार के बिल के समर्थन में प्रस्तुत तर्कों और विपक्ष के विरोध के अलावा अनेक हितधारक है जिनके हित इस विधेयक के माध्यम से प्रभावित होंगे। उलेमा वर्ग का मानना है कि यह विधेयक मुसलमानों को शक्तिहीन करने तथा चुनावी उद्देश्यों के लिए उन्हें ध्रुवीकरण एजेंट के रूप में इस्तेमाल करने के अपने एजेंडे पर कायम रहने की अभिव्यक्ति है जो की सीधे सीधे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है एवं संविधान द्वारा प्रद्दत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है।
इस्लामिक मामलों के जानकार और पसमांदा मुस्लिम अधिकार कार्यकर्ता डॉ. फैयाज अहमद फैजी का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों को क्रांतिकारी हैं, इससे वक्फ की संपत्तियों के पंजीकरण, सत्यापन, लेनदेन में पारदर्शिता आएगी और इससे गरीब मुसलमानों को वक्फ के विवादों से मुक्ति मिलेगी।
डॉ. फैयाज अहमद फैजी ने कहा कि अब तक मुसलमानों की हर संस्था पर अशराफ वर्ग यानी विदेशी मूल के मुसलमानों का एक छत्र कब्जा रहा है। लेकिन नए वक्फ बोर्ड बिल के प्रस्तावों में महिलाओं के साथ-साथ पसमांदा वर्ग के मुसलमानों के लिए प्रावधान किए गए हैं। इससे महिलाओं-पसमांदा वर्ग के लोगों की बेहतरी की राह खुलेगी।
वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास का कहना है कि सबसे बड़ी बात यह है कि इस सरकार की मंशा पर मुसलमानों को भरोसा नहीं है, इसलिए उसके द्वारा किए जा रहे बदलावों पर आम मुसलमान भरोसा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि 2013 के वक्फ बोर्ड के बदलावों को समाज के लोगों से बातचीत करने के बाद बनाया गया था, लेकिन इस सरकार ने मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था में बदलाव करने के पहले उन्हीं लोगों से बातचीत नहीं की। यही कारण है कि वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
कोई भी नया बदलाव परम्परावादियों को परेशान करता है और केवल इसलिए कि कुछ लोग विरोध कर रहे है सकारात्मक बदलाव को नहीं रोका जाना चाहिए लेकिन इसी क्रम में यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत बह-धार्मिक राष्ट्र है और इसमें हिंदू बहुसंख्यकों के साथ कई अल्पसंख्यक धार्मिक-सांस्कृतिक समूह भी रहते हैं। अल्पसंख्यक समुदायों में मुस्लिम अल्पसंख्यक वर्ग महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी नीतिगत बदलाव बग़ैर व्यापक चर्चा और विमर्श के लागू नहीं करना चाहिए यदि मुस्लिम समाज से यह आवाज़ आ रही है कि इस विधेयक को लाने से पहले उनके हितधारकों से ना तो चर्चा किया गया और ना ही इसकी निर्मायक अंगों में उसको शामिल किया गया तो यह स्वाभाविक है कि ऐसे बदलाव के ख़िलाफ़ असंतोष अवश्य उत्पन्न होगा। ऐसे में सरकार का यह नैतिक दायित्व है कि इस विधेयक से जुड़ी अस्पष्टता और आशंका को जल्द से जल्द दूर किया जाय और युक्तियुक्त संशोधन की ज़रूरत पड़े तो वो भी किया जाय।
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