बुधवार, 12 जून 2024

कितना संरक्षित है भारत में वन

एस एन वर्मा
हमारे देश में वन कितना संरक्षित है। यह प्रश्न मन में तब उठता है जब हम बदलते मौसम, जलवायु परिवर्तन से आहत हो जाते हैं। इस वर्ष हम भीषण गर्मी  झेल रहे हैं। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई अर्थात वनों को संरक्षित न किया जाना हमारे पर्यायवरण केा प्रभावित कर रहा है। पेड़ों और अन्य वनस्पतियों के नष्ट होने से जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण, बाढ़, वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।पर्यावरण प्रेमियांे ने कई दशक पहले ही चिपको आंदोलन द्वारा हमें चेता दिया था कि इस तरह वनों की कटाई होती रही तो जीवों को पृथ्वी पर जीना दूभर हो जाएगा।व्यावसायिक कटाई और वनों की कटाई पर सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए, 1970 के दशक में प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों को गले लगाने , पेड़ों के चारों ओर अपनी बाहें लपेटने का काम किया ताकि उन्हें काटा न जा सके।
वनों की कटाई संभवतः आग के उपयोग से शुरू हुई, और अनुमान है कि पृथ्वी के मूल वन क्षेत्र का लगभग 50 फीसदी हिस्सा नष्ट हो गया है। वनों की कटाई का प्रमुख कारण कृषि है, खराब नियोजित बुनियादी ढाँचा वैश्विक वनों की कटाई में एक और महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है। 2023 वन घोषणा आकलन के अनुसार, 2022 में, दुनिया ने 16 मिलियन एकड़ से अधिक जंगल खो दिया । लकड़ी और लकड़ी की बढ़ती मांग दुनिया के जंगलों के लिए भी एक बड़ा खतरा है। लेकिन उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय देशों में, वनों की कटाई का 73 फीसदी कारण कृषि का होना है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में वनों की कटाई (वनोन्मूलन) की उच्चतम दर वाले कुछ देशों में ब्राजील, इंडोनेशिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य शामिल हैं।
आइए , अब हम अपने देश के सरकारी आंकड़े केा जान लें जो हमें बताता है कि हम वन संरक्षण में अन्य देशों की तुलना में काफी अच्छे हैं। भारत ने इस वर्ष 6 मई से 10 मई  तक न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मुख्यालय में आयोजित वनों पर संयुक्त राष्ट्र फोरम (यूएनएफएफ) के 19वें सत्र में बताया कि हमारे यहां पिछले 15 वर्षों में वन क्षेत्र में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वैश्विक स्तर पर भारत साल 2010 और 2020 के बीच औसत वार्षिक वन क्षेत्र में शुद्ध वृद्धि के मामले में तीसरे स्थान पर रहा है। भारत ने जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण को उच्च प्राथमिकता दी है। इसके कारण संरक्षित क्षेत्रों का नेटवर्क 1,000 से अधिक वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, बाघ अभयारण्यों, बायोस्फीयर रिजर्व और अन्य वन्यजीव आवासों तक विस्तारित हुआ है।
इसके अलावा भारत ने ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम की शुरुआत को भी साझा किया, जिसे वृक्षारोपण और खराब वन भूमि की बहाली के लिए संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य जलवायु कार्रवाई पहल को और अधिक मजबूत करना है।
इससे पहले अक्टूबर, 2023 में भारत ने देहरादून में यूएनएफएफ के तहत देश के नेतृत्व वाली पहल की मेजबानी की थी। इसमें 40 देशों और 20 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और वन अग्नि प्रबंधन व वन प्रमाणन पर चर्चा की थी।
 भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 12.20 हिस्से में सघन वनावरण फैला हुआ है। वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत में कुल वन और वृक्षों का आवरण 80.9 मिलियन हेक्टेयर है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 24.62 प्रतिशत है। भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है और 80,20,88 वर्ग किमी क्षेत्र में वन फैले हुए है। भारत में वन क्षेत्र का सबसे बड़ा क्षेत्र वाला राज्य मध्य प्रदेश है। 2021 की अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश राज्य में देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश , छत्तीसगढ़ , ओडिशा , महाराष्ट्र का नंबर आता है।
(लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार और टिप्पणीकार हैं)


सोमवार, 10 जून 2024

एसडीपीआई मजबूती से लड़ेगी आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव, कार्यकर्ता सम्मलेन में लिया गया फैसला

संवाददाता 
नई दिल्ली l सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई ) ने दिल्ली के ग़ालिब इंस्टिट्यूट मे कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया l सम्मलेन की अध्यक्षता पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष डॉ आई ऐ खान व संचालन दिल्ली प्रदेश सचिव हाफिज हाशिम मलिक ने किया। कार्यकर्ता सम्मेलन मे बडी तादाद मे  कार्यकर्ता और पदाधिकारियों ने शिरकत की l सम्मेलन मे मुख्य अतिथि के रूप मे उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष अब्दुल मुईद हाशमी व अतिथि के रूप मे दिल्ली प्रदेश के कोड़िनेटर अब्दुल कादिर, उत्तर प्रदेश से मौलाना कमर मजाहिरी, कैराना लोकसभा से पूर्व प्रत्याशी मौलाना ज़ाहिद कासमी, कारी अजमाईन आदि शामिल हुए l आये हुए मेहमानों का दिल्ली के संगठन मंत्री इरफ़ान अहमद ने फूल मालाओ से जोरदार स्वागत किया। 
मुख्य अतिथि के रूप आये अब्दुल मुईद हाशमी ने सम्मेलन मे पार्टी गतिविधियों को विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए कार्यकर्त्ता ओ से आव्हान किया कि वो पार्टी की नीतियों और विचारधारा को जन जन तक पहुंचाने मे अहम रोल अदा करें।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पार्टी का संगठन मजबूत होगा तो पार्टी मजबूती से हर चुनाव को लड़ सकेगी। हम सब को हिम्मत और हौंसले के साथ भयमुक्त होकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम 14 राज्यों मे लोकसभा चुनाव लड़े है और एक सीट पर दूसरे न पर रहे है आने वाले समय मे एसडीपीआई के विधायक और सांसद भी होंगेl 
प्रदेश अध्यक्ष डॉ आई ऐ खान ने  कहा कि एसडीपीआई  का 21 जून को स्थापना दिवस  है इस बार पार्टी नए नारे  के साथ, यही है रास्ता, यही है सफलता के साथ स्थापना दिवस मनायेगी l इस दिन ये भी तय करेगी कि दिल्ली मे वक्फ बोर्ड की संपतियों और वक्फ बोर्ड के गठन को लेकर एक जन जागरण अभियान व आंदोलन कब से चलाएगी l डॉ आई ऐ खान ने कहा कि आने वाले दिल्ली विधान सभा चुनाव हम मजबूती से लड़ेंगे l   कार्यकर्ताओं से आम जनता के बीच जाकर काम करने का आव्हान किया l 
 कॉर्डिनेटर अब्दुल कादिर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली में पार्टी को मजबूत करने के लिए आम जनता के बीच जाकर कार्यकर्ताओं को काम करने कि जरूरत हैl कैराना लोकसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी मौलाना जहिद हुसैन ने कहा कि आज भारत मैं मुस्लिम कयादत लगभग खत्म कर दी गई है जरूरत है कि अपनी क्यादत को मजबूत करने के साथ साथ दलितों, पिछड़ों और वंचित समाज को अपने साथ लेकर चलें। पार्टी के सक्रिय नेता मोहम्मद अजमाईन ने कहा कि देश के हालात बद से बदतर हो गए हैं अपने आप को सेकुलर कहलाने वाली पार्टियों ने जानबूझकर हमारी कयादत को कमजोर किया है तथा मुस्लिम नुमाइंदगी को हाशिए पर खड़ा कर दिया है।o आज एनडीए की जो सरकार बनी है उस में एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं है और ना ही सत्तापक्ष में एक भी मुसलमान सांसद है। वूमेन इण्डिया मूवमेंट की अध्यक्षा आशिया सैफी ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह से औरतों और इस्लाम धर्म को लेकर एक फिल्म हम दो हमारे बारह बनाई गई है वह मुस्लिम समाज और औरतों की इज्जत पर हमला है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि उक्त फिल्म पर तुरन्त बैन लगाया जाए नहीं तो वूमेन इण्डिया मूवमेंट पूरे देश में इस को लेकर आंदोलन चलाएगी।  
इस मोके पर वेलफेयर पार्टी के दक्षिण -पूर्व  जिले के  अध्यक्ष सरफराज़ अनवर और महासचिव फैयाज़ उल हक़ ने वेलफेयर पार्टी को छोड़कर, एसडीपी आई का दामन थामा l दिल्ली कार्यकर्ता सम्मेलन में एसडीपीआई दिल्ली प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य फरीद अहमद, मोहम्मद आमिर, मोहम्मद अशफ़ाक , महबूब अल्वी,  पूर्वी दिल्ली जिलाध्यक्ष मोहम्मद फैजान, महासचिव रईस अंसारी, दक्षिण पूर्वी दिल्ली जिलाध्यक्ष मुसलेहु‌द्दीन फलाही, महासचिव कयामु‌द्दीन और दक्षिण दिल्ली जिलाध्यक्ष ऐनुल हक़, महासचिव मोहम्मद मोहसिन और उत्तर पश्चिम दिल्ली के जिला महासचिव मोहम्मद जफर, उत्तर पूर्वी दिल्ली के जिला महासचिव फैजान अंसारी, सभी जिलों के पदाधिकारी गण उपस्थित रहे। प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और उत्तर पूर्वी दिल्ली के जिलाध्यक्ष मास्टर महबूब ने कार्यकर्ता सम्मेलन में आए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अदा किया।

सावित्री ठाकुर: जिलाध्यक्ष से संसद तक का सफर... कैसे दिग्गजों को पछाड़कर मोदी कैबिनेट में मंत्री बनीं?

 

 

मध्य प्रदेश। नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर तीसरी बार शपथ ले ली हैं। इस बीच मोदी मंत्रिमंडल 3.0 में शामिल होने वाले मंत्रियों के नाम सामने आ गए हैं। जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश से 5 सांसदों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेंद्र खटीक, दुर्गादास उईके के साथ धार सांसद सावित्री ठाकुर को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. सावित्री ठाकुर मध्य प्रदेश से इकलौती महिला सांसद हैं, जिन्हें राज्य मंत्री बनाया गया है।

भाजपा ने धार लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद छतर सिंह दरबार का टिकट काटकर सावित्री ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारा था. सावित्री ठाकुर ने धार से बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिलाया और जीत हासिल की. ठाकुर ने इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राधेश्याम मुवेल को करारी शिकस्त दी. सावित्री ठाकुर ने यह चुनाव 218665 वोटों से जीता है. बंपर जीत के बाद सावित्री ठाकुर को अहम जिम्मेदारी गई है. आपको बता दें सावित्री ठाकुर को राज्यमंत्री के रूप में राष्ट्रपति ने शपथ दिलाई है।


जिलाध्यक्ष से मंत्री तक का सफर...

सावित्री ठाकुर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 2004 में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद से शुरू की थी. आपको बता दें कि सावित्री ठाकुर एक किसान और सामान्य परिवार से आती हैं. उन्होंने राजनीति में अपने दम पर पहचान हासिल की है. राजनीति में आने से पहले वह एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करती थीं, जिसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पहचान बनाई और आज पूरा धार उन्हें जानता है. अब वे मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है.

 

पति किसान हैं और पत्नी बन गई मंत्री

सावित्री ठाकुर के पति तुकाराम ठाकुर एक किसान हैं. उनसे पहले उनके परिवार का कोई सदस्य राजनीति में सक्रिय नहीं था. उनके परिवार में पति के अलावा उनके दो बेटे हैं. आपको बता दें 2014 के चुनाव में सावित्री ठाकुर ने वर्तमान मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को करारी शिकस्त दी थी, जिसके बाद पूरे प्रदेशभर में उनकी चर्चा हुई थी.  

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