सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 एक नजर में

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कुल 243 सीटों का फैसला 14 नवंबर को हो जाएगा। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, बिहार में 10 अक्टूबर से चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। 6 नवंबर और 11 नवंबर को दो फेज में वोटिंग होगी। बिहार में मुख्य रूप से एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबला होगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की मौजूदगी काफी चर्चा में है। बिहार के चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट पुनरीक्षण (SIR) का कार्य किया। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने बिहार के वोटरों की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है।


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की महत्वपूर्ण जानकारी

  • कुल सीटें: 243
  • SC रिजर्व सीट: 38
  • ST रिजर्व सीट: 2
  • कुल पंजीकृत मतदाता: 7,42,00,000
  • पुरुष मतदाता: लगभग 3,92,70,804
  • महिला मतदाता: लगभग 3,49,82,828
  • चुनाव की संभावित तिथि: अक्टूबर-नवंबर, 2025
  • 85 वर्ष से ऊपर के वोटर: 4,03,985
  • 18 से 19 साल के नए वोटर: 14,01,050
  • दिव्यांग मतदाताः 7,20,709
  • थर्ड डेंजर मतदाताः 17254
  • ड्राफ्ट रोल से बाहर: 65,64,075
  • फाइनल वोटर लिस्ट से बाहर: 3,66,742
  • दावा और आपत्ति के दौरान जुड़े नाम: 21,53,343
  • मुख्य राजनीतिक दल: JDU, BJP, RJD, कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां (CPI, CPIML), जन सुराज पार्टी, LJP (राम विलास- चिराग पासवान गुट), RLJP (पशुपति पारस गुट), AIMIM, RLJP, HAM, VIP

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्य मुद्दे

रोजगार, बिहार से होने वाला पलायन, अपराध, भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था, बिजली-सड़क-पानी, महिला आरक्षण, लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाएं

'फुर्र' का धमाकेदार मुहूर्त: पिछले शुक्रवार को आम आदमी के सपनों और पारिवारिक बंधनों की ये फिल्म दिल को छू लेगी! ओमकार नाथ बोले- 'ये स्टोरी बिल्कुल अलग है', प्रोड्यूसर का वादा- 'आंसू और तालियां दोनों मिलेंगी'

संवाददाता 

मुंबई। बॉलीवुड की दुनिया में एक नई हलचल मच गई है! मुंबई के एक लग्जरी वेन्यू पर पिछले शुक्रवार को फुर्र फिल्म का ग्रैंड मुहूर्त समारोह हुआ, जो देखने लायक था। दीयों की रोशनी, ढोल-नगाड़ों की थाप, और फैंस के जोरदार चीयर्स के बीच ये फैमिली ड्रामा ऑफिशियली स्टार्ट हो गया। चित्रगुप्त आर्ट्स के बैनर तले बनी ये फिल्म आम आदमी की जिंदगी के सपनों, संघर्षों और पारिवारिक रिश्तों को एकदम रॉ और रियल तरीके से दिखाएगी। दर्शकों को थिएटर्स में इमोशनल रोलरकोस्टर का वादा करते हुए, ये फिल्म न सिर्फ मनोरंजन करेगी बल्कि सोचने पर मजबूर भी कर देगी – खासकर आज के बदलते समय में सपनों की कीमत, जिम्मेदारियों का बोझ और नैतिक फैसलों की मार्मिकता पर।

समारोह की शुरुआत हुई पूजा-अर्चना से, जहां पूरी टीम ने पारंपरिक अंदाज में शुभकामनाएं लीं। मीडिया इवेंट में डायरेक्टर शैलेश श्रीवास्तव की आंखों में सपनों की चमक साफ झलक रही थी। उन्होंने माइक थामते हुए कहा, "मैं इस प्रोजेक्ट के लिए बेहद एक्साइटेड हूं। ये एक कॉमन मैन और उसके आइडियल लाइफ के ड्रीम्स की स्टोरी है। आज के दौर में हर इंसान के अंदर ये सपने छिपे हैं, और हमने इन्हें स्क्रीन पर उतारने की कोशिश की है।" उनके ये शब्द सुनकर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। श्रीवास्तव ने आगे बताया कि फिल्म का फोकस रियल लाइफ स्ट्रगल्स पर है, जो दर्शकों को अपनी जिंदगी से जोड़ देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि फुर्र माता-पिता और बच्चों के नाजुक रिश्तों की डोर को उकेरती है, जहां महत्वाकांक्षाओं की कीमत चुकानी पड़ती है और वे फैसले जो जिंदगी की दशा-दिशा तय करते हैं।

स्टेज पर चढ़ते ही लीड एक्टर ओमकार दास मणिकपुरी उर्फ नाथ ने सबका दिल जीत लिया। अपनी कैजुअल शर्ट और सहज स्माइल के साथ उन्होंने कहा, "इस फिल्म की स्टोरी व्हेरी व्हेरी डिफरेंट है – रॉ, रियल और एवरीडे स्ट्रगल्स से निकली। ये कॉमन मैन को डीपली टच करती है, और मुझे ऐसे रोल्स प्ले करना लव लगता है जो आपको अलाइव फील कराएं। नाथ का कैरेक्टर ऐसा है जो हर घर में मिल सकता है – सपने देखने वाला, लेकिन रियलिटी से जूझता हुआ।" नाथ का ये कन्फेशन सुनकर फैंस झूम उठे, और सोशल मीडिया पर तुरंत #FurrrMuhurat ट्रेंड करने लगा। ओमकार ने बताया कि उन्होंने इस रोल के लिए खासतौर पर यूपी की लोकल डायलेक्ट सीखी, ताकि कैरेक्टर और ऑथेंटिक लगे। उन्होंने फिल्म के कोर को जोड़ते हुए कहा कि ये कहानी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक एहसास है – वो कड़वी सच्चाई जो समाज में हर रोज दिखती है, और जो प्रेम, परिवार और रिश्तों की अहमियत पर सोचने को मजबूर कर देगी।

प्रोड्यूसर माधुप कुमार ने चित्रगुप्त आर्ट्स के बैनर तले ये फिल्म लॉन्च करते हुए एक दमदार मैसेज दिया। उन्होंने बोला, "फुर्र सिर्फ फिल्म नहीं, हमारे ड्रीम्स और डिलेmmas का मिरर है। ये लव से क्राफ्टेड है, ताकि ऑडियंस टीयर्स और अप्लॉज में डूब जाए। हमने हर सीन को सोच-समझकर शूट किया है, ताकि ये न सिर्फ एंटरटेन करे बल्कि सोशल मैसेज भी दे।" माधुप के विजनरी लीडरशिप में शैलेश श्रीवास्तव डायरेक्ट कर रहे हैं, जिन्होंने पहले भी कई इमोशनल प्रोजेक्ट्स हैंडल किए हैं। म्यूजिक डायरेक्टर अशोक शिवपुरी का योगदान भी कमाल का है – उनका कहना है कि साउंडट्रैक फिल्म की सोल है, जो दर्शकों को इमोशनली बांध लेगा। स्क्रिप्ट राइटर अखिलेश चौधरी ने एक ग्रिपिंग नैरेटिव तैयार किया है, जो ट्विस्ट्स से भरा है। प्रोड्यूसर ने फिल्म की यूनिक अप्रोच पर जोर देते हुए कहा कि इसका रियलिस्टिक ट्रीटमेंट, जिंदा अभिनय, सहज संवाद और दिल को छू लेने वाला संगीत इसे खास बनाता है – ये एक कहानी नहीं, बल्कि वो अनुभव है जो दर्शकों को भीतर तक झकझोर देगा।

संगीत का जादू और स्टार कास्ट का धमाल - फिल्म का म्यूजिक कार्ड एकदम हिट साबित होने वाला है! दिल छूने वाले मेलोडीज आने वाले हैं, जिनके लिरिक्स डॉ. रंजू सिन्हा, कुमार सोना, राकेश चंद्र श्रीवास्तव और मोबिन जैसे टैलेंटेड राइटर्स ने लिखे हैं। सिंगर्स की ड्रीम टीम में शामिल हैं राकेश चंद्र श्रीवास्तव, सतेंद्र आर्य, दिव्यांशी मौर्य, मनीषा श्रीवास्तव, शिवम सिंह और रूपेश मिश्रा। एक गाने का टीजर सुनाया गया, जो पहले ही वायरल हो चुका है – ये गाना फैमिली बॉन्ड्स पर है और सुनते ही आंखें नम हो जाती हैं। संगीत फिल्म की भावनाओं को और गहरा बनाएगा, खासकर उन सीनों में जहां सपनों और जिम्मेदारियों का टकराव होता है।

कास्ट की बात करें तो ये बॉलीवुड का परफेक्ट मिक्स है। ओमकार दास मणिकपुरी उर्फ नाथ लीड रोल में एवरीमैन हीरो बनकर सबको इम्प्रेस करेंगे। उनके साथ पावरहाउस परफॉर्मेंस देंगे सोनिया शरण, अदिति खत्री, भारत केशरवानी, राजेंद्र कर्ण, सीताकांत सहाय, डॉ. रणिल कुमार श्रीवास्तव, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, जफर खान, करण और कई न्यूकमर्स। हर एक्टर ने मुहूर्त पर अपने कैरेक्टर्स के बारे में हल्का-सा हिंट दिया, जो दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा गया। उदाहरण के तौर पर, सोनिया शरण ने कहा कि उनका रोल मां का है, जो फैमिली के लिए सब कुछ कुर्बान कर देती है। ये कास्ट फिल्म के पारिवारिक थीम को और मजबूत बनाएगी, जहां हर रिश्ता सपनों और हकीकत के बीच की जद्दोजहद को दर्शाएगा।

शूटिंग का प्लान: लखनऊ-रायबरेली में असली माहौल - नवंबर से फिल्म की मुख्य शूटिंग शुरू हो जाएगी। जगह चुनी गई है लखनऊ और रायबरेली की – ये दोनों जगहें फिल्म की कहानी से बिल्कुल मैच करती हैं। यहां की गलियां, बाजार और घर का माहौल कहानी को असली जिंदगी जैसा बना देंगे। प्रोडक्शन टीम ने कहा कि शूटिंग में लोकल संस्कृति को खूब दिखाया जाएगा, ताकि दर्शक खुद को कहानी का हिस्सा समझें। एक सीन के बारे में डायरेक्टर ने बताया, "ये सीन वहां होगा जहां सड़कें राज़ फुसफुसाती हैं और हवा अनकहे सपनों से गूंजती है – ये माहौल स्क्रीन पर जादू बिखेरेगा।" ये जगहें फिल्म के सच्चे अंदाज को मजबूत करेंगी, जहां संघर्ष और सपनों का जाल बुना जाएगा।

फुर्र कोई आम फिल्म नहीं है – ये आज की जिंदगी के मोड़ों पर भावुक सफर है, जहां मां-बाप और बच्चों के रिश्ते, सपनों की ऊंची कीमत और मुश्किल फैसले मुख्य हैं। फिल्म की खासियत है इसका खुला सच्चापन, ताकतवर अभिनय, आसान बातचीत और दिल को छूने वाले गाने। ये सिर्फ कहानी नहीं सुना रही, बल्कि वो भावनाएं जगाएगी जो हम सब जानते हैं – समाज की कठोर किनारों से लेकर छिपी उम्मीदों तक। फिल्म दर्शकों को प्यार, परिवार और रिश्तों की अहमियत पर सोचने पर मजबूर करेगी। प्लॉट बिगाड़े बिना इतना कह सकते हैं कि ये दिल को हिला देगी।

टीम ने कहानी को राज रखा है: "कहानी का स्पॉइलर नहीं देंगे – सिनेमा हॉल में मजा लो! लेकिन वादा है: ये तुम्हारी आत्मा को झकझोर देगी और सवाल छोड़ जाएगी जो क्रेडिट्स के बाद भी मन में घूमेंगे।" ये फिल्म प्यार, वफादारी और जिंदगी के 'क्या हो अगर' के तूफान में आपको बहा ले जाएगी, सिनेमाघरों को सिसकियों और तालियों से भर देगी।

चित्रगुप्त आर्ट्स की दूसरी बड़ी फिल्म की ओर - शैलेश श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित फुर्र चित्रगुप्त आर्ट्स की दूसरी शानदार फिल्म है। ये उनकी पहली सफल फिल्म पलक के ठीक बाद आ रही है। पलक एक अंधी लड़की के अटूट सपनों और परिवार के दबावों की भावुक कहानी थी। तुलिका बनर्जी, मुस्कान खान और शैलेंद्र कुमार जैसे मजबूत कलाकारों ने अपनी सच्ची भावनाओं से दर्शकों के दिल जीत लिए।

ये प्रोडक्शन हाउस सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्में बनाता है, जो सामाजिक मुद्दों को बढ़ावा देती हैं। ये गहरी कहानियां, मजबूत भावनाएं और रोचक कथानक मिलाकर समाज की सच्चाइयों को फिल्मी अनुभव में बदल देती हैं। प्रोडक्शन हाउस का लक्ष्य सच्ची कहानियों को बड़े पर्दे पर लाना है, जो दर्शकों को प्रेरित करें।

बॉलीवुड फैंस, तैयार हो जाओ! फुर्र परिवार की भावनाओं को नया रंग देगी। क्या ये अगली हिट बनेगी? खास जानकारी, क्लिप्स और ताजा अपडेट्स के लिए जुड़े रहो। आप इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हो? कमेंट्स में अपनी राय बताओ!

रविवार, 28 सितंबर 2025

समर्पण से समरसता तक: संघ की सौ साल की यात्रा

डॉ. नीलू तिवारी

जिस दौर में समाज असमानता, शिक्षा की कमी, बेरोजगारी और आपदाओं जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, वहाँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने सेवा-प्रकल्पों और निःस्वार्थ सहयोग के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य करता है। यह संगठन केवल परंपरागत विचारों तक सीमित नहीं, बल्कि युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की शिक्षा देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ता है। कोविड-19 महामारी, बाढ़, भूकंप और अन्य संकटों में स्वयंसेवकों का साहस और सेवा भाव यह दर्शाता है कि यह विचार केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक और जीवंत है। आज जब भारत वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, तो “समुत्कर्ष” और “परम वैभव” संघ का आदर्श हमें आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता की राह दिखाता है। यही कारण है कि यह विषय केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य दोनों की दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम भारतीय समाज में सदियों पुरानी सोच और आधुनिक राष्ट्र निर्माण की एक अनूठी मिसाल के रूप में लिया जाता है। बचपन में ब्रिटिश विरोध के कारण डॉ. हेडगेवार को दंड मिला इसी साहस के चलते आगे चलकर 1925 में नागपुर संघ की स्थापना हुई। संघ का उद्देश्य केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं रहा,बल्कि उसने समाज को नैतिक,सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से संगठित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य किया है। इस संदर्भ में संघ के चार स्तंभ समुत्कर्ष,सेवा,सहयोग और साहस विशेष महत्व रखते हैं।

समुत्कर्ष, केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है।इसका उद्देश्य समाज और राष्ट्र के समग्र उत्थान को सुनिश्चित करना है। आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में जहाँ न बिजली है न सड़क, आरएसएस ने “एकल विद्यालय” शुरू किए। आज डेढ़ लाख से अधिक गाँवों में यह अभियान चल रहा है। झारखंड की गुमला ज़िले की एक बच्ची,जो लकड़ी बीनने जाती थी, इन्हीं स्कूलों से पढ़कर आईएएस अधिकारी बनी। उसकी सफलता ने पूरे गाँव का जीवन बदल दिया। संघ से प्रेरित इस विद्या भारती संस्थान ने लाखों बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कार दिए। राजस्थान का एक विद्यार्थी, जिसने विद्या भारती में पढ़ाई की, आगे चलकर डॉक्टर बना और अपने ही गाँव में निःशुल्क स्वास्थ्य केंद्र खोला। समुत्कर्ष केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को ऊँचाई पर ले जाने का संकल्प है।

सेवा, संगठन की आत्मा है। प्राकृतिक आपदाओं, महामारी और सामाजिक संकटों में संघ के स्वयंसेवक सबसे पहले राहत कार्यों में जुटते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान जब लोग ऑक्सीजन और अस्पतालों के लिए भटक रहे थे, आरएसएस स्वयंसेवक घर-घर दवा और सिलेंडर पहुँचा रहे थे। दिल्ली का एक स्वयंसेवक अकेले 150 से अधिक सिलेंडर बाइक से ले गया और सैकड़ों लोगों की जान बचाई। संघ ने घर-घर राशन और दवाइयाँ पहुँचाने, स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने और मानवता की भावना को जीवित रखने का कार्य किया। सेवा का यह दृष्टिकोण केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं; यह समाज में भरोसा, एकता और मानवता की भावना को मजबूत करता है। केरल बाढ़ 2018 में नावों और राफ्ट से लोगों को बचाया गया,राहत शिविर चलाए गए और बच्चों के लिए अस्थायी स्कूल खोले गए। 2001 में गुजरात भूकंप जब कच्छ और भुज बर्बाद हो गए थे,आरएसएस स्वयंसेवक मलबे से लोगों को निकालने और पीड़ित परिवारों को भोजन देने में जुट गए। बाद में अनाथ बच्चों के लिए स्कूल और महिलाओं के लिए रोजगार केंद्र भी स्थापित किए गए। आरएसएस ने दिखाया कि सेवा का मतलब केवल राहत नहीं, बल्कि समाज को संकट से उबरने और पुनर्निर्माण की राह पर ले जाना भी है।

सहयोग आरएसएस की तीसरी पहचान है। समाज के हर वर्ग को जोड़ने और एकता की भावना को बढ़ावा देता है और राष्ट्र के निर्माण में योगदान करता है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद न केवल शिक्षा सुधार की आवाज़ उठाता है बल्कि छात्र-छात्राओं को सामाजिक जिम्मेदारी से भी जोड़ता है। 2020 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को मुफ्त पढ़ाई की व्यवस्था कराई। भारतीय किसान संघ ने किसानों के अधिकार और प्राकृतिक खेती के पक्ष में बड़ा आंदोलन खड़ा किया। महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में इसने सामूहिक जल-संरक्षण अभियान चलाया, जिससे 50 गाँवों में पानी की समस्या खत्म हो गई। सेवा भारती – झुग्गी बस्तियों और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा केंद्र और सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण से हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। सहयोग का यह दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि समाज के हर वर्ग को जोड़कर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक स्थिरता बनी रहे।

संघ का चौथा स्तंभ साहस है। संघ ने अपने इतिहास में अनेक कठिन परिस्थितियों और आलोचनाओं का सामना करते हुए अपने आदर्शों और मूल्यों की रक्षा की है। गांधीजी की हत्या के बाद लगे प्रतिबंध, आपातकाल में जब लोकतंत्र कुचला गया और हजारों कार्यकर्ता जेलों में डाल दिए गए, तब भी आरएसएस ने गुप्त पत्रक बाँटकर लोगों को जागरूक किया और लोकतंत्र की रक्षा की। संघ का साहस केवल संगठन की सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के हित में न्याय, मानवता और नैतिकता के लिए खड़े होने की क्षमता भी प्रदर्शित करता है। विभाजन के समय शरणार्थियों की मदद करना, सीमा पर सैनिकों के साथ सहयोग करना और प्राकृतिक आपदाओं में सबसे पहले राहत कार्य में जुटना इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

आज के आधुनिक भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह मॉडल और भी महत्वपूर्ण हो गया है जब संघ ने डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे आधुनिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपने चार स्तंभों समुत्कर्ष, सेवा, सहयोग और साहस को और मजबूत किया है। यही कारण है कि संघ न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आधुनिक भारत में स्थायी विकास और विश्वगुरु बनने की दिशा में भी प्रेरक संगठन के रूप में सामने आता है। आज जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी शक्ति, पहचान और नेतृत्व स्थापित कर रहा है, तब संघ की यह भूमिका और भी प्रासंगिक बन जाती है। संघ केवल इतिहास का संरक्षक नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा, नैतिक मार्गदर्शन और सामाजिक चेतना का स्रोत भी है।

डॉ. नीलू तिवारी, 302, वैशाली रिट्रीट, ए ब्लॉक, नेमी सागर कॉलोनी, शिविका मार्ग, वैशाली नगर, जयपुर, राजस्थान, भारत. पिन कोड: 302021 मोबाइल: +91 94139 07005

शनिवार, 27 सितंबर 2025

सत्यपाल मलिक जी का जीवन राजनीति में सच्चाई और ईमानदारी का प्रतीक था: बलविंदर सिंह


संवाददाता
नई दिल्ली। पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ राजनेता माननीय सत्यपाल मलिक जी को आज राजधानी दिल्ली के डॉ. बीआर अम्बेडकर भवन, रानी झांसी रोड, नई दिल्ली  में आयोजित एक भव्य श्रद्धांजलि सभा में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, किसान नेता, बुद्धिजीवी वर्ग और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए बलविंदर सिंह, उपाध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचन्द्र पवार) ने कहा कि सत्यपाल मलिक जी का जीवन राजनीति में सच्चाई और ईमानदारी का प्रतीक था। उन्होंने सत्ता के सामने कभी सिर नहीं झुकाया और हर मौके पर किसानों, मजदूरों और आम जनता की आवाज़ को ताक़त दी। उनका स्पष्टवादी और निर्भीक स्वभाव हमें हमेशा याद रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।”

बलविंदर सिंह ने आगे कहा कि सत्यपाल मलिक जी ने हमेशा जनहित को सर्वोपरि रखा। राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए भी उन्होंने किसानों के मुद्दों पर खुलकर बोलने का साहस दिखाया और यह संदेश दिया कि राजनीति का असली मक़सद जनता की सेवा होना चाहिए, न कि सत्ता का स्वार्थ।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने भाजपा की जनविरोधी नीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज किसानों से लेकर युवाओं तक हर वर्ग भाजपा सरकार की नीतियों से परेशान है। महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की बदहाली ने जनता को झकझोर कर रख दिया है।

इस अवसर पर बलविंदर सिंह ने अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम भाजपा की जनविरोधी राजनीति को समाप्त करें और देश को एक नई दिशा दें। सत्यपाल मलिक जी का सपना भी यही था कि किसानों और आम जनता के हक़ की राजनीति मज़बूत हो। इसलिए मैं दिल्ली और देश की जनता से अपील करता हूँ कि आने वाले चुनावों में भाजपा को हटाकर INDIA गठबंधन को वोट दें। यही मलिक जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

सभा के अंत में सभी उपस्थित जनों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि सत्यपाल मलिक जी के दिखाए रास्ते पर चलते हुए समाज में पारदर्शिता, ईमानदारी और जनता-केन्द्रित राजनीति को मज़बूत किया जाएगा।

पंजाब बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने पर इकबाल सिंह लालपुरा संस्था द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित


संवाददाता
नई दिल्ली अल्पसंख्यक विकास परिषद, नुसरत इस्लामिक स्कूल ऑफ़ एक्सिलेंस, जामिया इस्लामिया दिल्ली की तीनों संस्थाओं के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के पार्ट-3 में स्थित राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चैयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा के कार्यालय में मुलाकात करके पंजाब के हालात पर चर्चा की। पंजाब के बाढ़ पीड़ितों की सहायता में सराहनीय कार्य करने पर तीनों संस्थाओं के सौजन्य से इकबाल सिंह लालपुरा को प्रशस्ति पत्र देते हुए मो. रियाज़ ने कहा आप और आपके पुत्र अजयवीर सिंह लालपुरा ने अपनी संस्था हयूमिटी फ्रस्ट के सौजन्य से बाढ़ पीड़ितों की निरंतर सहायता कर रहे हैं जो प्रषंस्नीय है इस बाढ़ में पंजाब के 1400 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं जहां मानव जीवन दरहम बरहम हो गया है जो काफी दुखद है। दुख और संकट की घड़ी में हम लोग पंजाब की जनता के साथ हैं इसी प्रकार के विचार व्यक्त किये डा. मो. एजाज, मज़ाहिर रज़ा ने। 
अंत में इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा मैं प्रशस्ति पत्र देने पर आप लोगों का धन्यवाद करता हूं, इस समय पंजाब की जनता को इंसानी हमदर्दी की ज़रूरत है। संकट की इस घड़ी में मुस्लिम भाइयों ने पंजाब के लोगों का बहुत साथ दिया जो सराहनीय है। बाढ़ के कारण जो माली नुकसान हुआ है उसे पूरा होने मे समय लगेगा, किसानों की फसल तबाह हो गई, मवेषी मारे गए इन सबकी भरपाई के लिए हम बराबर जनता के संपर्क में हैं पंजाब की राज्य सरकार ने दुख की इस घड़ी में जनता को अकेला छोड़ दिया है केन्द्रीय सरकार ने पंजाब सरकार को 16000 करोड़ का सहायता पेकेज दिया है जिससे काफी हद तक पंजाब के हालात बेहतर होंगे। इस अवसर पर उपस्थिित लोग जो इस प्रकार हैं डा. एस. एम कामरान, मो. आदिल सैफ़ी आदि।
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