बुधवार, 5 मार्च 2025

कांशी राम की विरासत और मायावती की तर्ज़-ए-सियासत

निर्मल रानी 

1980 के दशक में बसपा प्रमुख कांशी राम पूरे देश में घूम घूम कर भारतीय समाज को 85 : 15 का जनसँख्या अनुपात समझाते थे और यह बताते थे कि 15 प्रतिशत कथित उच्च जाति के लोग शेष 85 प्रतिशत जातियों व समुदायों के लोगों पर राज कर रहे हैं। और तभी यह नारा प्रचलित हुआ था - वोट हमारा,राज तुम्हारा - नहीं चलेगा,नहीं चलेगा। 
जैसे जैसे कांशी राम के नेतृत्व में यह बहुजन आंदोलन आगे बढ़ता गया वैसे वैसे मनुवाद तथा सनातन व्यवस्था में उल्लिखित वर्ण व्यवस्था पर इनका आक्रमण और तेज़ होता गया। यहाँ तक कि 'तिलक,तराज़ू और तलवार जैसा 'अभद्र नारा भी उन्हीं दिनों में ख़ूब प्रचलित हुआ। यही वह आंदोलन था जिसमें दलित पिछड़े व अल्पसंख्यक वर्ग के लोग जुड़ते चले गये। यानी कांग्रेस का परम्परागत वोट बैंक धीरे धीरे खिसकना शुरू हो गया। इसी बीच कांशीराम ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी नामक एक नये राजनैतिक दल की स्थापना कर दी। उसी दौरान कांशी राम की भेंट मायावती से हुई जोकि उस समय वकालत व बीएड करने के बाद दिल्ली इंद्रपुरी स्थित जेजे कॉलोनी में एक अध्यापिका के रूप में कार्यरत थीं और साथ ही सिविल सर्विसेज़ परीक्षाओं की तैयारी भी कर रही थीं। तभी कांशी राम ने मायावती के तेज़ तर्रार व्यक्तित्व से प्रभावित होकर कहा था कि - "मैं तुम्हें एक दिन इतना बड़ा नेता बना सकता हूं कि एक नहीं बल्कि आईएएस अधिकारियों की पूरी क़तार तुम्हारे आदेशों का पालन करने के लिए लाइन में खड़ी हो जाएगी।" तभी से वे कांशी राम के सहयोगी के रूप में उनके साथ प्रायः देखी जाने लगीं तथा उनके 'क्रन्तिकारी ' व उत्तेजक भाषण भी लोगों को प्रभावित करने लगे।                             

कांशीराम का 9 अक्टूबर 2006 को 72 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। कांशीराम के जीवन के अंतिम दौर में उनकी विरासत को लेकर बसपा के भीतर तथा कांशीराम के परिजनों के द्वारा काफ़ी विवाद भी खड़ा किया गया। परन्तु तेज़ तर्रार मायावती तब तक कांशी राम पर व उनकी विरासत रुपी बसपा पर पूरा नियंत्रण कर चुकी थीं। यही वजह थी कि बौद्ध धर्म के अनुसार हुये कांशीराम के अंतिम संस्कार में उनके परिजनों ने नहीं बल्कि स्वयं मायावती ने ही उनकी चिता को अग्नि दी। अब पार्टी में उन्हें 'बहन जी ' के नाम से बुलाया जाने लगा। 
कांशीराम के नेतृत्व में ही बीएसपी ने 1999 के संसदीय चुनावों में 14 संसदीय सीटें जीतीं थीं। मायावती को चार बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर बैठने का भी सौभाग्य हासिल है। परन्तु यह कहना ग़लत नहीं होगा कि जिस बसपा को कांशीराम ने एक मिशन के रूप में स्थापित किया था और कांशी राम के जिस मिशन से बड़े सामाजिक परिवर्तन की आहट महसूस हो रही थी, पार्टी पर मायावती का वर्चस्व होने के बाद वही मिशन,वही पार्टी अब सत्ता,वैभव,आत्ममुग्धता और परिवारवाद का शिकार होती नज़र आने लगी। यहाँ तक कि केवल सत्ता हासिल करने के लिये बुनियादी विचारों से भी समझौता करने लगीं। जिस 'मनुवादी ' व्यवस्था के विरुद्ध बसपा का जन्म हुआ था, 2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में उसी ब्रह्मण समुदाय के समर्थन की ज़रुरत महसूस हुई तो तिलक,तराज़ू और तलवार जैसा नारा भी बदल गया। 2007 में बहुजन समाज पार्टी, सर्वजन समाज की बातें करने लगी।  और यह नया नारा लगा - हाथी नहीं, गणेश है, ब्रह्मा, विष्णु, महेश है। उस समय उत्तर प्रदेश में 37 प्रतिशत ब्राह्मणों ने पार्टी को वोट दिया था। 

परन्तु चार बार देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद अन्य सत्ताधीशों की ही तरह मायावती भी अहंकार के साथ साथ परिवारवाद का भी शिकार होती चली  गयीं।  कभी अपने को ज़िंदा देवी बतातीं तो कभी अपने भाई व भतीजे के मोह में डूबती नज़र आतीं। कभी अपनी हार का ठीकरा मुसलमानों पर फोड़तीं तो कभी उनपर पार्टी का टिकट बांटने में लोगों से करोड़ों रूपये वसूलने का आरोप लगा। हद तो यह कि अपने जीवनकाल में ही मायावती ने बाबा साहब आंबेडकर व कांशी राम के साथ ही अपनी भी प्रतिमायें लगवा डालीं। जिसतरह कांशी राम को अपने परिवार से अलग उत्तराधिकारी के रूप में मायावती नज़र आयी थीं उस तरह  मायावती को परिवार से बाहर अपनी पार्टी का कोई योग्य नेता नज़र ही नहीं आया। और आख़िरकार मायावती के इन्हीं स्वार्थपूर्ण फ़ैसलों के चलते उनकी पार्टी का जनाधार घटता चला गया।

पिछले लोकसभा चुनावों से पूर्व जब इण्डिया गठबंधन वजूद में आया तो मायावती उस विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनीं। उसी समय यह अंदाज़ा लगाया जाने लगा था कि मायावती भाजपा के प्रति नरम रुख़ अपना रही हैं। इसके पीछे के कारणों से भी अनेक राजनैतिक विश्लेषक बखूबी वाक़िफ़ हैं। पिछले दिनों दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान राहुल गांधी ने मायावती पर बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए स्पष्ट रूप से यह कह दिया था कि यदि बीएसपी 'इंडिया' गठबंधन में होती तो पिछले वर्ष हुये लोकसभा चुनावों में एनडीए की जीत नहीं होती। इस आरोप से तिलमिला कर मायावती ने कांग्रेस को ही बीजेपी की 'बी' टीम बता डाला। जबकि देश देख रहा है कि इस समय देश में सत्ता,भाजपा व संघ के विरुद्ध जितना राहुल गाँधी मुखर हैं उतना कोई नहीं जबकि मायावती के रवैये से तो पता ही नहीं चलता की वे विपक्ष में हैं या सत्ता के साथ ?

सच तो यह है कि मायावती के नेतृत्व में बसपा का न केवल समाज में प्रभाव कम होता जा रहा है बल्कि संगठन भी बिखराव के दौर से गुज़र रहा है। पिछले दिनों जिसतरह उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक समेत सभी मुख्य पदों से हटा दिया और दो दिन बाद ही उन्हें पार्टी से निष्कासित भी कर दिया उससे भी यही सन्देश गया कि मायावती को अपने परिवार के बाहर भी कोई उत्तराधिकारी नज़र नहीं आया और जिस भतीजे को अपना राजनैतिक उत्तराधिकारी बनाया भी उससे भी जल्द ही पीछा छुड़ा लिया ? इस तरह के ढुलमुल फ़ैसलों का प्रभाव निश्चित रूप से पार्टी पर ज़रूर पड़ेगा। सच तो यही है कि कांशी राम की विरासत के रूप में मिले व्यापक जनाधार वाले राजनैतिक दल को मायावती की तर्ज़-ए-सियासत के चलते काफ़ी नुक़सान हुआ है।

मंगलवार, 4 मार्च 2025

उपराज्यपाल महोदय के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के सदस्यों को उनके खराब व्यवहार और कार्यवाही में बाधा डालने के कारण मुझे उन्हें बाहर निकालना पड़ा: विजेंद्र गुप्ता

प्रेस को संबोधित करते हुए  विधानसभा अध्यक्ष, विजेन्द्र गुप्ता 


संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली में भाजपा की सरकार बन गई है और नई सरकार का गठन भी हो गया है। यह आठवीं विधानसभा है जिसका पहला सत्र समाप्त हो चुका है। सत्र के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष, विजेन्द्र गुप्ता ने  प्रेस  कांफ्रेंस का संबोधित करते हुए इस पूरे सत्र की संक्षिप्त जानकारी मुहैया करवाई जिसके विवरण नीचे दिया गया है।प्रेस को संबोधित करते हुए  विधानसभा अध्यक्ष, विजेन्द्र गुप्ता ने कहा प्रिय मित्रों, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में, अपनी इस पहली प्रेस कांफ्रेंस में आप सबका स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।

आठवीं विधानसभा का पहला सत्र 24 फरवरी, 2025 को शुरू हुआ और 03 मार्च, 2025 की सदन अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित हुआ। सदन की बैठकें 24, 25, 27, 28 फरवरी और 03 मार्च, 2025 को आयोजित की गई। इन पांच बैठकों के दौरान कुल 18 घंटे 18 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली। पांच दिनों तक विभिन्न अवसरों पर कुल 126 सदस्यों ने सदन में अपने विचार व्यक्त किये। विधान सभा के पहले ही सत्र में इतने सदस्यों को बोलने का अवसर मिलना किसी रिकॉर्ड से कम नहीं है।

इस उद्देश्य के लिए स्थापित परम्परा के अनुसार, सदस्यों ने पहले दिन 24 फरवरी, 2025 को शपथ ली। बरिष्ठ सदस्य श्री अरविंदर सिंह लवली को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया। दिनांक 25 फरवरी, 2025 को माननीय उपराज्यपाल महोदय ने सदन को सम्बोधित किया तथा उन मुद्दों के बारे में व्याख्या की, जिन पर सरकार दिप्ती के विकास तथा लोगों की भलाई के लिए कार्य करेगी। उपराज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव सदन में 28 फरवरी, 2025 को पारित किया गया। धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में 16 सदस्यों ने भाग लिया तथा माननीय मुख्यमंत्री ने चर्चा का उत्तर दिया।

मैंने 03 मार्च, 2025 को माननीय उपराज्यपाल महोदय से मुलाकात की तथा धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बारे में उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचना दी। उपराज्यपाल महोदय ने सदन को अपना संदेश भेजा, जिसे मैंने कल सदन की बैठक के दौरान पढ़कर सुनाया।

दुर्भाग्य से, 25 फरवरी, 2025 को उपराज्यपाल महोदय के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के सदस्यों को उनके खराब व्यवहार और कार्यवाही में बाधा डालने के कारण मुझे उन्हें बाहर निकालना पड़ा। उपराज्यपाल महोदय का अभिभाषण बहुत पवित्र और गंभीर अवसर होता है तथा माननीय उपराज्यपाल महोदय उस समय अपने संबैधानिक कर्त्तव्य का पालन कर रहे थे। विधानसभा के प्रक्रिया नियमों के अनुसार, माननीय उपराज्यपान के अभिभाषण के दौरान कोई भी बाधा नहीं डाली जा सकती। उपराज्यपाल महोदय के अभिभाषण में बाधा डालने के कारण, बाद में सदन ने विपक्ष के सदस्यों को तीन बैठकों के लिए निलम्बित कर दिया।

मुझे इस बात की भी पीड़ा है कि नेता प्रतिपक्ष और उनकी पार्टी के सदस्यों ने पहले ही दिन सदन की कार्यवाही को उस समय बाधित किया, जब उन्हें अध्यक्ष पद पर मेरे चुनाव के बाद बोलने के लिए कहा गया था। सदन में 27 फरवरी, 2025 को श्री मोहन सिंह विष्ट जी को उपाध्यक्ष चुना गया।

पहले सत्र का अन्य मुख्य बिंदु सीए‌जी की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करना रहा। जैसा कि आप सब जानते हैं, आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा सीएजी रिपोर्टों को सदन में प्रस्तुत करने में अनावश्यक देरी करने के बारे में मैंने भी मक्रियता से कार्यवाही की और इसके लिए हमें माननीय उच्च न्यायालय भी जाना पड़ा।

दिल्ली में शराब के विनियम और आपूर्ति पर सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट 25 फरवरी, 2025 को माननीय मुख्यमंत्री ने सदन में प्रस्तुत की। सदस्यों की मांग के बाद, इस पर सदन में दो दिन चर्चा भी की गई। इस चर्चा में 23 सदस्यों ने भाग लिया।

दिनांक 28 फरवरी, 2025 को माननीय मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन' पर सीएजी की रिपोर्ट प्रस्तुत की।

सदन में इस रिपोर्ट पर भी 28 फरवरी और 03 मार्च को चर्चा हुई। इस चर्चा में भी 23 सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किये। सदन की लोक लेखा समिति इन रिपोर्टो की जांच करेगी। मैंने यह निर्देश दिया है कि लोक लेखा समिति तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। संबंधित विभागों यानि आवकारी और स्वास्थ्य विभाग को एक महीने के अंदर अपने 'एक्शन टेकन नोट' भेजने का निर्देश दिया गया है।

इस सत्र के दौरान नियम-280 के तहत विशेष उल्लेख के कुल 109 नोटिस प्राप्त हुए और तीन दिनों में 42 मामलों को सदन में उठाया गया, जिन्हें संबंधित विभागों को उत्तर देने के लिए भेज दिया गया है।

दिनांक 27 फरवरी, 2025 को श्री सतीश उपाध्याय, माननीय सदस्य ने आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान शहीद भगत सिंह की मूर्ति का कथित अपमान तथा शहीदों की गंभीर उपेक्षा के संबंध में सदन का ध्यान आकर्षित किया। श्री मनजिंदर सिंह सिरसा, माननीय मंत्री ने चर्चा का उत्तर दिया।

दिनांक 27 फरवरी, 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर सदन ने श्रद्धांजलि दी। दिनांक 03 मार्च, 2025 को थी अरविंदर सिंह लवली, माननीय सदस्य की माता जी के निधन पर भी सदन ने श्रद्धांजलि दी।

पहले सत्र के दौरान सभी सूचीबद्ध कार्यों को पूरा किया गया। सोमवार, 03 मार्च को सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे से लेकर शाम को 06 बजे तक चली, जो इस बात का प्रमाण है कि जनहित से जुड़े ह्रास मुद्दों पर चर्चा के लिए मदन में समय की कोई सीमा नहीं है।

प्रिय मित्रों, मैं संविधान के प्रावधानों तथा सदन के प्रक्रिया नियमों के अनुसार सदन को निष्पक्ष और सकारात्मक ढंग से चलाना चाहता है। पिछले दस वर्षों के दौरान जो भी गन्नत परिपाटी बनी हैं, उन सबको दूर किया जाएगा। अब सदन का नियमानुसार सत्रावमान (प्रौरोगेशन) किया जाएगा, पहले की तरह एक ही सत्र को अलग अलग टुकड़ों में साल भर नहीं चलाया जाएगा। विशेष सत्र की गरिमा भी बहाल की जाएगी। आपातकालीन और विशेष परिस्थितियों में ही विशेष मत्र बुलाया जाएगा। विधान सभा सत्र की अपनी गरिमा और मांदा होती है, जिसका पालन किया जाएगा। बजट सत्र में प्रश्न काल भी शुरू होगा, जिसे पिछली सरकार के दौरान लगभग बंद ही कर दिया गया था।

सदन की कार्यवाही के दौरान पक्ष और विपक्ष को ममान महत्व दिया जायेगा लेकिन नियमों का उल्लंघन किये जाने पर समुचित कार्यवाही भी की जायेगी। सदन के समय का अधिकतम सदुपयोग मेरी प्राथमिकता रहेगी। सदन अब सहयोग, संतुलन, सदभाव और स्थापित नियमों से चलेगा।

जैसा कि आप सब जानते हैं. दिल्ली विधानसभा के भवन का हमारे स्वतंत्रता मंग्राम में बहुत बड़ा ऐतिहासिक महत्व रहा है। माननीय उपराज्यपाल ने भी अपने अभिभाषण में इसका उल्लेख किया था। हम इस मामले में विशेषज्ञों में परामर्श करेंगे और पुराने सचिवालय को राष्ट्रीय स्मारक और प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेंगे। विधानसभा को कागज रहित बनाने के लिए ई-विधान प्रोजेक्ट लगभग दस वर्षों से लंबित है। इस प्रोजेक्ट को लागू करने और दिल्ली विधानसभा को पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड करने के लिए इस दिशा में जल्दी से जल्दी आवश्यक कदम उठाये जायेंगे।

सदन की कार्यवाही को संतुलित, सकारात्मक तथा रचनात्मक ढंग से व्यापक रूप से प्रकाशित/प्रसारित करने के लिए मुझे आपका सहयोग चाहिए।

सोमवार, 3 मार्च 2025

मोटापे की राजधानी बनने की ओर बढ़ रही देश की राजधानी दिल्ली

  • मोटापा सिर्फ एक सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर मेडिकल कंडिशन

संवाददाता

नई दिल्ली। एक साइलेंट किलर दिल्ली के घरों में चुपचाप घुस रहा है-कभी फास्ट फूड के जरिए, कभी सुस्त जीवनशैली के सहारे, तो कभी मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के सामने बिताए गए घंटों के कारण। मोटापा, एक शारीरिक स्थिति जो हमें सोचने पर मजबूर कर रही है लेकिन नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है।

आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में करीब 81% लोग मोटापे या अधिक वजन से ग्रस्त हैं।

इस बढ़ती समस्या को ध्यान में रखते हुए मश हॉस्पिटल ने वर्ल्ड ओबेसिटी डे के अवसर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस कार्यक्रम में मश हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर और मिनिमल एक्सेस सर्जरी डायरेक्टर, डॉ. सचिन अंबेकर, और मश ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की संस्थापक एवं सीईओ, मानसी बंसल झुनझुनवाला ने मोटापे पर अपने विचार साझा किए।

मोटापा बढ़ा रहा है हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा - डॉ. सचिन अंबेकर ने कहा, "मोटापा सिर्फ सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि यह एक गंभीर मेडिकल कंडिशन है जो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और यहां तक कि विभिन्न प्रकार के कैंसर का भी कारण बन सकती है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, विशेष रूप से मिनिमल एक्सेस सर्जरी (मास), के माध्यम से इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है।"

उन्होंने बताया कि बलूनिंग, उडी लेप्रोस्कोपिक वर्टिकल स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी, 3डी मिनी गैस्ट्रिक बायपास और 3डी लेप्रोस्कोपिक रॉक्स एन वाय गैस्ट्रिक बायपास जैसी उन्नत वेट लॉस सर्जरी तकनीकें उपलब्ध हैं।

डॉ. अंबेकर के अनुसार, प्रोसेस्ड और हाई-कैलोरी फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैक्ड जूस में अधिक चीनी, बड़े पोर्शन साइज, जंक फूड और स्ट्रेस के कारण ओवरईटिंग मोटापे के प्रमुख कारण हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और एक्सरसाइज़ की कमी ने भी इसे बढ़ावा दिया है, जबकि मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के सामने बिताया गया अधिक समय निष्क्रिय जीवनशैली को बढ़ा रहा है।

मोटापा न केवल शरीर की बनावट को प्रभावित करता है, बल्कि यह हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, बांझपन और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके अलावा, स्तन, पेट, कोलन और किडनी कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

राइट टाइम, राइट ट्रीटमेंट -MASSH ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की संस्थापक एवं सीईओ, मानसी बंसल झुनझुनवाला ने कहा, "MASSH में हम P5 अप्रोच अपनाते हैं-Personalized, Participatory, Predictive, Preventive और Precision केयर-जो सही समय पर सही इलाज सुनिश्चित करता है। हमारा लक्ष्य सिर्फ बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि उसकी जड़ को खत्म करना है ताकि रोगिों के लिए बीमारी का प्रभाव न्यूनतम हो।"

दिल्ली में बढ़ता मोटापा और इसके आंकड़े - एक सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 80.7% लोग मोटापे से ग्रस्त हैं, लेकिन 78.5% लोग अब भी खुद को सामान्य वजन वाला मानते हैं। पंजाबी बाग, रोहिणी, ग्रेटर कैलाश-2, साउथ एक्सटेंशन और डीएलएफ में यह समस्या सबसे अधिक देखी गई है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में मोटापे की दर शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड और चंडीगढ़ में किए गए इस अध्ययन के अनुसार, जनरल ओबेसिटी (GO) की दर तमिलनाडु में 24.6%, महाराष्ट्र में 16.6%, झारखंड में 11.8% और चंडीगढ़ में 31.3% पाई गई। एब्डॉमिनल ओबेसिटी (AO) की दर तमिलनाडु में 26.6%, महाराष्ट्र में 18.7%, झारखंड में 16.9% और चंडीगढ़ में 36.1% पाई गई। महिलाओं, उच्च सामाजिक-आर्थिक वर्ग और डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त व्यक्तियों में मोटापे की संभावना अधिक पाई गई।

होली की भीड़ के मद्देनजर ध्यान में रखते हुए उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने अपने अधिकार क्षेत्र में 6 स्टेशनों पर मिनी कंट्रोल बनाया

उत्तर रेलवे द्वारा होली उत्सव की भीड़ का प्रबंधन

संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली मंडल ने अपने अधिकार क्षेत्र में 6 स्टेशनों पर मिनी कंट्रोल बनाया है। ये स्टेशन हैं नई दिल्ली, दिल्ली, निजामुद्दीन, आनंद विहार, गाजियाबाद और पानीपत।

ट्रेन संचालन और भीड़ नियंत्रण की निगरानी करने और मिनी कंट्रोल के साथ समन्वय करने के लिए मौजूदा उपकरणों के अलावा विशेष ड्यूटी अधिकारी (एसडीओ) तैनात किए गए हैं। नई दिल्ली और आनंद विहार में भीड़ बढ़ने पर सुरक्षा के लिए विशेष होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए होल्डिंग एरिया में टिकट बुकिंग काउंटर स्थानांतरित किए गए हैं। बिना टिकट यात्रियों को अब इन स्टेशनों के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। केवल उन्हीं यात्रियों को स्टेशन के अंदर जाने की अनुमति है जिनके पास वैध टिकट हैं। अधिक मांग को पूरा करने के लिए मोबाइल टिकटिंग और स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीनें पर्याप्त संख्या में तैनात की गई हैं।

वाणिज्यिक टिकट जाँच कर्मचारियों (टीटीई) को विशेष वर्दी प्रदान की गई है, ताकि उन्हें आसानी से पहचाना जा सके और निर्बाध टिकट जाँच में मदद मिल सके। मिनी कंट्रोल के साथ बेहतर समन्वय के लिए वाणिज्यिक और आरपीएफ कर्मचारियों को वॉकी टॉकी प्रदान की गई है। विशेष ट्रेनों में यात्रियों को चढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उदाहरण के लिए, होली स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए प्लेटफ़ॉर्म 16 को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा, अधिक व्यस्तता वाली कुछ ट्रेनों को एनडीएलएस के प्लेटफ़ॉर्म 16 पर स्थानांतरित कर दिया गया है। दिल्ली मंडल के सभी प्रमुख स्टेशनों से नियमित आरक्षित और अनारक्षित होली स्पेशल ट्रेनों की योजना बनाई गई है। 09.03.2025 तक, दिल्ली मंडल से कुल 14 होली स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं (नई दिल्ली से 5, आनंद विहार से 6, दिल्ली जं. से 2 और दिल्ली सराय रोहिल्ला से 1)। यात्रियों को ट्रेनों में निर्बाध रूप से चढ़ाने के लिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई अप्रिय घटना न हो, एक कतार विभाजक (सर्पेन्टाइन रूप) तैयार किया गया है।  यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं कि आरक्षित टिकट वाले यात्री आसानी से अपने कोच में चढ़ सकें और कोई भी वंचित या प्रतीक्षा सूची वाला यात्री आरक्षित कोच में प्रवेश न कर सके। इसके लिए नई दिल्ली और आनंद विहार स्टेशनों पर विशेष टिकट जांच दल तैनात किया गया है।

भीड़ के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए सभी एफओबी पर आरपीएफ की पर्याप्त तैनाती की गई है। होली की भीड़ को ध्यान में रखते हुए अजमेरी गेट साइड पर कुछ बदलाव किए गए हैं: प्लेटफॉर्म 1-15 पर प्रवेश एफओबी3 (गेट 8), एफओबी2 (गेट) और एफओबी1 के माध्यम से होता है। प्लेटफॉर्म 1-15 पर प्रवेश अब गेट 10 (प्लेटफॉर्म 16) के माध्यम से संभव नहीं है। प्लेटफॉर्म 16 के लिए जाने वाले आरक्षित यात्रियों को गेट 10 से प्रवेश करना होगा, जबकि पीएफ 16 के लिए जाने वाले अनारक्षित यात्रियों को गेट 12 से प्रवेश करना होगा।

बजट को लेकर दिल्ली सरकार की तैयारियों हुई तेज; दिल्ली सरकार 24 से 26 मार्च के बीच प्रस्तुत करेगी विकसित दिल्ली बजट: सीएम रेखा गुप्ता


बजट की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैबिनेट मंत्रियों के साथ दिल्ली विधानसभा में प्रेसवार्ता के दौरान सुझाव के लिए नंबर जारी करते हुए।

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