मंगलवार, 11 फ़रवरी 2025

जमीयत ने नया सदस्यता ऐप लॉन्च किया, 11,000 स्थानीय इकाइयों का लक्ष्य रखा

  • ऐप लॉन्च करते हुए जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और किसी भी समुदाय के वर्चस्व को खारिज किया

ऐप लॉन्च करते हुए जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी 


नई दिल्ली। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने आज संगठन की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता को और बढ़ाने के लिए मदनी हॉल, नई दिल्ली स्थित संगठन के मुख्यालय में एक नई ऐप-आधारित सदस्यता प्रणाली शुरू की। " JUH-Membership-Drive " नाम से प्ले स्टोर पर उपलब्ध इस ऐप को 2024-27 की सदस्यता अवधि के लिए पेश किया गया है ताकि पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सुलभ, सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सके।

इस अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी और सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी एडवोकेट सहित अन्य लोग भी शामिल हुए।

सभा को संबोधित करते हुए मौलाना महमूद मदनी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी समुदाय के लिए एक मजबूत संगठनात्मक संरचना महत्वपूर्ण है, चाहे वह बहुसंख्यक हो या अल्पसंख्यक। उन्होंने कहा कि किसी संगठन का प्राथमिक लक्ष्य केवल अपनी पहचान की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि भविष्य को आकार देना और अपने दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से लागू करना भी है। उन्होंने मौजूदा चुनौतियों का सामना करने के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद के नए दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

मौलाना मदनी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इतिहास ने हमेशा ऐसे सुव्यवस्थित समुदायों का पक्ष लिया है जो अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए व्यवस्थित रूप से काम करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनौतियाँ बनी रहती हैं, लेकिन समझदारी, दीर्घकालिक योजना और अथक प्रयासों से इन चुनौतियों पर विजय पाई जा सकती है।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि भारतीय संविधान की रक्षा करना और सभी समुदायों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने किसी विशेष समुदाय के वर्चस्व को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि न्याय और समानता ही लोकतंत्र का असली सार है।

उन्होंने आगे कहा कि आशंकाएं और अपेक्षाएं जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन लोगों को अपने मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि हमने जानबूझकर इस देश को अपनी मातृभूमि के रूप में चुना है - यह कोई गलती या दुर्घटना नहीं है। हम केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से समान व्यवहार की उम्मीद करते हैं, किसी एक समुदाय की श्रेष्ठता को बढ़ावा दिए बिना न्याय, समानता, सम्मान और पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। हम संविधान के किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेंगे, और इसकी सुरक्षा हर कीमत पर सुनिश्चित की जानी चाहिए," उन्होंने कहा।

मौलाना मदनी ने इस बात पर जोर दिया कि जमीयत उलमा-ए-हिंद सिर्फ उलमाओं का संगठन नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए एक समावेशी मंच है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अधिक विशेषज्ञता और पेशेवर कौशल की आवश्यकता को स्वीकार किया और संगठन में शिक्षित युवाओं और पेशेवरों को शामिल करने के प्रयासों को दोहराया।

नई सदस्यता प्रणाली के बारे में बताते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि पारंपरिक पद्धति तो बरकरार है, लेकिन कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक को भी इसमें शामिल किया गया है। ऑनलाइन प्रणाली पिछले कार्यकाल में भी शुरू की गई थी, लेकिन अब इसे और भी परिष्कृत और बेहतर बनाया गया है।

डेटा प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की 6,800 स्थानीय इकाइयाँ थीं, जबकि दो दशक पहले यह संख्या केवल 1,700 थी। सदस्यता में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है जो 1.5 मिलियन से बढ़कर 11 मिलियन से अधिक हो गई है। वर्तमान कार्यकाल के लिए, संगठन का लक्ष्य कम से कम 11,000 सक्रिय स्थानीय इकाइयाँ स्थापित करना है, जिसमें केवल संख्या बढ़ाने के बजाय शिक्षा, सामाजिक कल्याण और प्रशिक्षण पहलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

सोमवार, 10 फ़रवरी 2025

अब की बार केजरीवाल की हार

तहसीन मुनव्वर 

सन 90 के दशक में हम कश्मीर में दूरदर्शन से समाचार पढ़ने गए थे। वहां जब भी किसी काम के न होने की बात करते तो सरकारी बाबू का एक ही राग होता कि सर क्या करें हालात ख़राब हैं। हम सोचते कि क्या किसी को सड़क बनाने, सड़कें नालियां साफ़ करने, अस्पताल में डॉक्टर को काम करने से कोई रोकेगा? जो मानव जीवन से जुड़े मामले हैं उन पर हालात का रोना रोने का मतलब यही है कि आप को अपनी कमियां छुपाने के लिए यह एक बड़ा बहाना मिल गया है। बिल्कुल यही मामला दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार के साथ भी था। वह अपनी हर कमज़ोरी का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ते रहे। उनकी सारी ऊर्जा केंद्र सरकार से लड़ने में खर्च होती रही। यहां तक के उनके जो सरकारी अफ़सर भी थे वह भी इसी बहाने का सहारा लेकर काम टालने में लगे रहे। 

काम न कर पाने का एक ही रोना - अगर हम आम आदमी पार्टी की सरकार का कार्यकाल देखें तो जिस किसी को भी इस से कोई काम पड़ा हो और अगर वह काम न होना रहा हो तो उस ने यह बहाना ज़रूर सुना होगा। क्या करें जी मोदी जी काम ही नहीं करने देते। जनता के प्रतिनिधियों को काम निकालना आना चाहिए। वह पहले काम कर देते हैं फिर उसको सही ठहराने के रास्ते निकालते हैं। सरकार और सत्ता का अर्थ ही यही है कि आप काम करने आए हैं लड़ने के लिए नहीं। यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल की छवि जनता में एक ऐसे इंसान की बनती चली गई जो जनता के काम करवाने में सक्षम नहीं है और जिस के बस में कुछ नहीं है। 

शराब ने डुबाया - हमारे ज्योतिष में कहते हैं कि जिस का शनि खराब चल रहा हो या शनि की ढैया या साढ़े सती हो तो उसे मास मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। अब हम ने अरविंद केजरीवाल की कुंडली तो नहीं देखी है लेकिन शराब की मौहल्ला शॉप्स खोलने के बाद जिस तरह वह और उनकी पार्टी घेरे में आई उसे देखते हुए हम कह सकते हैं कि उनका शनि उसी समय से उनसे रूठ गया था जिस की हानि उन्हें उठानी पड़ी है। 
दरअसल जिस प्रकार थोक के भाव शराब की दुकानें बिना सोचे समझे पूरी दिल्ली में अलॉट की गईं उस ने भी उनका विश्वास कमज़ोर किया। जिस के कारण केंद्र सरकार को उन्हें घेरने का अवसर मिला और उन्हें और उनके साथियों को जेल की हवा भी खाना पड़ी। दंगों से नाराज़ मुस्लिम समाज को शराब का यह व्यापार खुश नहीं कर सका और कहीं न कहीं उनकी संवेदनाओं में चिपक के बैठ गया। जिन महिलाओं के लिए वह लुभावने काम कर रहे थे उन्हें भी शराब की दुकानें खुलना रास नहीं आया। 

मुफ़्त ने सुस्त किया - महिलाओं को डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा करवाने की योजना ने उन से बहुत बड़ा समर्थक ऑटो रिक्शा वाला छीन लिया। इस से पहले आप किसी ऑटो वाले से बात करो तो वह अरविंद केजरीवाल को भगत सिंह बनाने पर तुला रहता था लेकिन अब उन से बात करने पर पता चलता था कि अब पहले जैसा अरविंद केजरीवाल का जादू नहीं बचा है। मेट्रो चल जाने से अब लंबी दूरी की ऑटो में यात्रा कोई नहीं करता है। अब कुछ दूरी के लिए ही ऑटो लिया जाता है और महिलाएं अधिकतर ऑटो का उपयोग करती हैं। डीटीसी में यात्रा मुफ़्त होने से वह ऑटो वाला ख़ाली बैठ गया और उसे सवारी को तरसना पड़ा। जिस की हानि आम आदमी पार्टी को उठाना पड़ी। 
बिछड़े सभी बारी बारी - अरविंद केजरीवाल अधिक दिन तक अपने साथियों को रोक पाने में असफल रहे हैं। कपिल शर्मा के शो में सलमान ख़ान के पिताजी सलीम ख़ान साहब ने एक बात कही थी कि "अच्छा आदमी वो है जिसका दोस्त और नौकर पुराना हो"। अरविंद केजरीवाल सब कुछ अपने हाथ में रखने के चक्कर में मिल जुल के बनाई एक पार्टी पर क़ब्ज़ा करते चले गए और उनके साथी एक एक कर के उनसे दूर होते चले गए। उनकी सांसद और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रहीं स्वाति मालीवाल मामले में जो कुछ हुआ उस ने उनकी छवि को ज़रूर धूमिल किया। 

कुर्सी से चिपके रहना - जब अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो वह कुर्सी से चिपके रहे। जिस प्रकार की स्वस्छ राजनीति का दावा करते हुए वह सत्ता पर बैठे थे उसका उन्होंने बिल्कुल भी प्रदर्शन नहीं किया और कई शर्तों पर जेल से बाहर आने के बाद ही मजबूरी में उन्हों ने आतिशी को मुख्य मंत्री बनाया। एक महिला को मुख्य मंत्री बनाने का लाभ भी वह लेना चाहते थे मगर साथ ही वह और आम आदमी पार्टी के बड़े नेता यह भी कह रहे थे कि चुनाव के बाद अरविंद केजरीवाल ही मुख्य मंत्री होंगे। यह एक प्रकार से तत्कालीन मुख्य मंत्री के व्यक्तिव को कम करने जैसा था। अगर भाजपा ने कालकाजी से कोई और उम्मीदवार दे दिया होता तो आतिशी भी हार जातीं क्योंकि कालकाजी के लोग तुगलकाबाद क्षेत्र की भीड़ भाड़ से परेशान रहते हैं और वहां रमेश विधूड़ी की अधिक प्रभावी छवि नहीं है। फिर महिलाओं को लेकर उनके बयानों ने भी उनकी जीत को रोकने का काम किया लगता है। वैसे भी आम आदमी पार्टी में आतिशी किसी भी प्रकार के आरोप से मुक्त काम करने वाली नेता रही हैं और शायद इसी छवि ने भी उनकी जीत में आसानियां कर दीं। 

कांग्रेस का हरियाणा का बदला - आम आदमी पार्टी की दिल्ली में हार को लेकर हम कह सकते हैं कांग्रेस का कहीं न कहीं बड़ा योगदान रहा है। हालांकि कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली है लेकिन वह आम आदमी पार्टी के कई धुरंधरों को धूल चटाने में सहायक ज़रूर बनी है। कांग्रेस शुरू में मज़बूती से मैदान में उतरी थी लेकिन फिर उसे लगा कि इसका लाभ भाजपा को अधिक हो जाएगा इस लिए पीछे क़दम खींच लिए। लेकिन तब तक वह आम आदमी पार्टी को अच्छा ख़ासा नुक़सान पहुंचाने में सफ़ल हो चुकी थी। बाद में जब हम एक एक सीट का आंकलन करेंगे तो उस से साफ़ होगा कि कांग्रेस के उम्मीदवारों के कुछ हज़ार वोट आम आदमी पार्टी को कितने भारी पड़े हैं। अब कांग्रेसी खुल कर कह रहे हैं कि हम ने हरियाणा की हार का बदला ले लिया है। 

ओवैसी ने भी की ऐसी की तैसी - दिल्ली चुनाव में हैदराबाद के शेर कहे जाने वाले असद्दुदीन ओवैसी की एंट्री ने भी आम आदमी पार्टी की राह आसान कर दी। जिस प्रकार के धार्मिक नारे ओवैसी की रैली में लगाए गए उस से हमें मान कर चलना चाहिए कि हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण ज़रूर हुआ होगा। दंगों का आरोप झेल रहे दोनों उम्मीदवारों का जेल से बाहर आकर प्रचार करना भी कहीं न कहीं भाजपा के कट्टर हिंदू वोटों को एकजुट करने का काम कर गया। यह तो मुसलमान भी मानते हैं कि असद्दुदीन ओवैसी को भले ही मुस्लिम वोट न दें लेकिन उनका व्यक्तित्व, हाव भाव और उनका भाषण कट्टर हिंदू वोटों को बिखरने से रोक देता है। वह लड़ते तो कुछ एक सीट पर हैं लेकिन भाजपा को कई सीटों पर जिताने का काम ज़रूर कर देते हैं।

मुसलमानों का अरविंद केजरीवाल से मोहभंग - दिल्ली उर्दू अकादमी को लेकर जिस प्रकार का रवैया आम आदमी पार्टी का रहा है उस से उर्दू वाले कभी खुश नहीं रहे। उन्हों ने यहां तक किया कि एक उर्दू से अंजान व्यक्ति को उर्दू अकादमी की ज़िम्मेदारी सौंप दी। उनकी अवधि समाप्त हो जाने के बाद महीनों गवर्निंग कौंसिल नहीं बनाई और चुनाव से कुछ महीने पहले ही इसे बनाया। आम आदमी पार्टी का यह सोचना कि गली मुहल्ले में मुशायरे करवा कर हम अपने वोट बढ़ा लेंगे उस ने इस साहित्यिक मंच को बहुत हानि पहुंचाई जिस ने शीला दीक्षित के ज़माने में काफ़ी बड़े काम किए थे। 
उर्दू वाले नाराज़ तो थे ही वहीं दिल्ली दंगों में जिस प्रकार अरविंद केजरीवाल ने मुसलमानों से मुंह फेरा और गांधी समाधि पर जा बैठे उस ने भी उनकी साहसी नेता की छवि को धूमिल कर दिया। उनके जो मुस्लिम नेता जीते भी हैं वह आम आदमी पार्टी की वजह से नहीं बल्कि अपनी मेहनत और क्षेत्र में अपने प्रभाव के कारण ही जीत पाए हैं। 

भेड़िया आया भेड़िया आया - मुसलमानों को अब भाजपा का डर दिखा कर वोट पाने का दौर बीत चुका है। मुसलमानों ने नरेंद्र मोदी की केंद्र में सरकार देख ली है। शेष जगहों पर भी देख रहे हैं। उनकी समझ में भी आ रहा है कि हमारी हर दिन की ज़रूरतें एक जैसी हैं और अब सब के साथ ही चलना होगा। राजनीतिक दल उन्हें भाजपा से दूर कर के अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं जिस का नुक्सान उन्हें ही उठाना पड़ता है। वैसे भी जो भाजपा के मुद्दे हैं उस से रोज़ी रोटी की भागदौड़ में लगा आम मुसलमान इतना प्रभावित नहीं होता जितना वह मठाधीश होते हैं जिन से अधिकतर मुस्लिम भी तंग आ चुके हैं लेकिन उनके दबाव के कारण बोल नहीं पाते हैं। उन्हें लगता है कि अगर हम भाजपा को वोट देने लगें तो शायद भाजपा की सोच में बदलाव आए और दोनों तरफ़ का शक दूर हो जाए। यह अभी शुरुआती दौर का मामला है लेकिन दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की भारी हार केवल एक वर्ग के भाजपा को वोट मिलने से नहीं हुई है बल्कि यह सभी विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत में कहीं न कहीं मुस्लिम वोट भी भाजपा की झोली में भर भर कर गिरा है। अगर यह सच है तो फिर बिहार चुनाव में भाजपा को इसका लाभ होना तय है।

जो वादा किया वह निभाना पड़ेगा - हम कह सकते हैं आगे भी जो अरविंद केजरीवाल जैसी राजनीति करने की सोच रहे हों उनको यह ज़रूर समझना चाहिए कि आप बड़े बड़े दावे और वादे कर के सत्ता तो हासिल कर सकते हैं लेकिन सरकार चलाना अलग काम है। वह केवल दूरदृष्टि, कार्यक्षमता, रणनीति, सिस्टम की समझ और एक सकारात्मक कार्यशैली से ही संभव है जिस में जनता का हित सर्वप्रथम होना चाहित। अरविंद केजरीवाल केंद्र से टकराव के चलते यह समझने में चूक गए लगते हैं जिस के कारण वह खुद तो हारे ही उनकी पार्टी की लुटिया भी डूब गई है। अब उनके सामने सब से बड़ा चैलेंज आम आदमी पार्टी को एक रखना और पार्टी पर अपना वर्चस्व बरक़रार रखना होगा। देखना है वह इस में कितना सफ़ल हो पाते हैं। आम आदमी पार्टी का हार के बाद सब से बड़ा इम्तिहान पंजाब में होगा जहां उनकी सत्ता बची हुई है और अब सब की नज़र पंजाब सरकार पर टिक गई हैं। 
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रविवार, 9 फ़रवरी 2025

घर छोड़ के मत जाओ कही घर न मिलेगा

तनवीर जाफ़री
9896219228

अपने व अपने परिवार के लिये जीविकोपार्जन की तलाश में बाहर निकलना अथवा अप्रवासी बनना प्रकृति का बनाया एक ऐसा चक्र है जिससे पृथ्वी का शायद कोई भी प्राणी अछूता नहीं। रोज़ी रोटी की तलाश में सभी प्राणियों को अपने अपने घरों से निकलकर बाहर जाना ही होता है। चूँकि प्रकृति ने मानव को अतिरिक्त सोच बुद्धि व योग्यता से नवाज़ा है इसलिये वह अपने अप्रवासन का रास्ता अपनी आर्थिक हैसियत, अपनी भविष्य की मनोकमनायें,कमाई का स्तर सुविधाजनक राज्य,देश व ठिकाने आदि बहुत कुछ देखकर तय करता है। गत पांच दशकों से अमेरिका,कनाडा व ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के अप्रवासियों के लिये आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रोज़गार के अतिरिक्त भारतीय मुद्रा के मुक़ाबले डॉलर्स की कीमतों में भारी अंतर, सुरक्षित, साफ़ सुथरा, वातावरण, शुद्धता, ईमानदारी, भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण, सामाजिक सुरक्षा,बच्चों की शिक्षा व बुज़ुर्गों की सुरक्षा जैसी अनेक बातें भारतीयों को इन देशों में आने के लिये आकर्षित करती हैं। 

अप्रवासन करने वालों में एक वर्ग जो उच्च शिक्षा प्राप्त वैज्ञानिक, शोधार्थी, इंजीनियर्स, डॉक्टर्स, स्पेस वैज्ञानिक आदि जैसे क्षेत्रों से जुड़ा होता है। ऐसे प्रतिभाशाली लोगों के लिये तो लगभग पूरी दुनिया के दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं। दूसरा वर्ग शिक्षा हासिल करने की ग़रज़ से या शिक्षा हासिल करने के बहाने इन देशों में जाता है और वहीँ का होकर रह जाता है। और तीसरा वर्ग पैसों के बल पर इन देशों में जाना चाहता है और यही वर्ग आसानी से विदेश भेजने वाले एजेंटों के जाल में फंसकर कबूतरबाज़ी या डंकी रुट का शिकार हो जाता है। ऐसे कई लोग जहाँ संपन्न परिवारों के होते हैं वहीं अनेक ऐसे भी होते हैं जिन्होंने अपने घर का सोना,ज़मीन आदि बेचकर या गिरवी रखकर एजेंटों को मुंह मांगी रक़म दी होती है। यहां उस वर्ग का उल्लेख करना भी बेहद ज़रूरी है जो सत्ता में या तो शीर्ष पदों पर है या जिसके ऊँचे रसूख़ हैं या फिर उच्चाधिकारी वर्ग यहाँ तक कि वह वर्ग भी जोकि देश के युवाओं को "मेक इन इण्डिया" और रोज़गार मांगो मत बल्कि रोज़गार दो,यहाँ तक कि शिक्षित लोगों के पकोड़ा बेचने को भी रोज़गार मानता है ऐसे अनेक लोगों के बच्चे या तो विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं या फिर वहां बड़े व्यवसाय कर रहे हैं। कई 'राष्ट्रभक्त महामनवों ' की संतानें तो विदेशी नागरिकता तक लिये बैठी हैं।                

बहरहाल, अतिवाद की ओर तेज़ी से बढ़ते विश्व में अमेरिका ने एक बार फिर अतिविवादित व्यक्ति डोनाल्ड ट्रंप को अपना राष्ट्रपति चुन लिया है। उनके आलोचक ट्रम्प को एक नस्लवादी, कट्टरपंथी तथा एक स्त्री-द्वेषी और एक विदूषक के रूप में देखते हैं। सच पूछिये तो ऐसे व्यक्ति का पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनने का विचार ही शांतिप्रिय दुनिया के लिये चिंता पैदा करने तथा दुनिया की नींद हराम करने के लिए पर्याप्त है। ट्रंप जहाँ कई देशों को अपनी 'गिद्ध दृष्टि' से देख रहे हैं वहीं ट्रंप प्रशासन द्वारा ब्राज़ील, ग्वाटेमाला, पेरू और होंडुरास के लोगों को भी  'अवैध' बताकर अमेरिकी सैन्य विमान से ही उनके देश वापस भेजा गया है। भारत भी उन्हीं दुर्भाग्यशाली देशों में एक है जिसके 'अवैध' बताये जा रहे 104 अमेरिकी प्रवासी अमेरिकी मालवाहक सैन्य विमान में भरकर बड़ी ही अपमानजनक स्थिति में वापस भारत लाये जा चुके हैं। ख़बर यह भी है कि इसी तरह के 487 भारतीयों की एक और खेप अमेरिका किसी भी समय भारत वापस भेज सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस समय अमेरिका में लगभग 7.25 लाख लोग ऐसे रह रहे हैं जिनको 'अवैध प्रवासी' के रूप में चिन्हित किया जा चुका है। इस तरह के लगभग 1700 'अवैध प्रवासी' भारतीयों को अमेरिका में हिरासत में लेकर उन्हें डिटेंशन सेंटर में भी डाला जा चुका है। 

वीज़ा, इमिग्रेशन, नागरिकता आदि देने या इनसे सम्बंधित क़ानून बनाने का हर देश का अपना अधिकार है। परन्तु ट्रंप की वापसी के बाद जिस अपमानजनक तरीक़े से भारतीय युवाओं को निकला जा रहा है और सरकार द्वारा उसपर लीपा पोती की जा रही है और भारतीय युवाओं के अपमान को लेकर कोई शिकायत अमेरिका के समक्ष दर्ज नहीं कराई जा रही है उसे लेकर भारतीय युवाओं में निराशा ज़रूर है। ख़ासतौर से इस बात के मद्दे नज़र कि प्रधान मंत्री मोदी अपने को ट्रंप का दोस्त बताते हैं। यहाँ तक कि उनके पिछले चुनाव में अमेरिका जाकर 'अबकी बार ट्रंप सरकार ' का नारा भी लगवाते हैं? ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविक है कि आख़िर ट्रंप ने भी उस दोस्ती की लाज क्यों नहीं रखी? क्यों हमारे युवाओं के हाथों में हथकड़ी  पैरों में बेड़ियाँ व ज़ंजीरें मुंह पर मास्क आदि लगाकर सैन्य विमान में बिठाकर बड़ी ही कष्टदायक स्थिति में उन्हें भारत भेजा गया? क्या वजह थी कि जिस तरह रूस-यूक्रेन जंग के कारण यूक्रेन से वापस आने वाले युवाओं के लिये ऑपरेशन गंगा चलाया गया था और मंत्रियों द्वारा विमान में घुसकर उनका स्वागत किया गया था उसी तरह भारत अपने विमान भेजकर उन तथाकथित 'अवैध अप्रवासियों' को वापस क्यों नहीं बुलाता? ख़ासकर यह सवाल इसलिये और भी पूछा जा रहा है कि जब कोलंबिया के कथित अवैध प्रवासियों को अमेरिकी सैन्य विमान द्वारा कोलंबिया वापस भेजने की घोषणा की गई तो कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेड्रो द्वारा इसका सख़्त विरोध किया गया। उसी समय राष्ट्रपति पेड्रो ने कहा कि वो अपने नागरिकों की 'गरिमा' को बरक़रार रखना चाहते हैं। इसके फ़ौरन कोलंबिया वायु सेना के दो विमान अमेरिका गए और वो अपने नागरिकों को ससम्मान लेकर राजधानी बोगोटा वापस पहुंचे। क्या भारत अपने नागरिकों के सम्मान के लिये ऐसा नहीं कर सकता था?

आज जब अमेरिकी डॉलर का मूल्य 87.79 ,कनाडा डॉलर का मूल्य 61.31 एवं ऑस्ट्रेलिया डॉलर का 54.97 रुपये है ऐसे में इन देशों में काम की तलाश में कौन जाना नहीं चाहेगा ? वैसे भी जब भारत सरकार स्वयं यह कह कर अपनी पीठ थपथपाये  कि हम भारत के 80 करोड़ लोगों को मुफ़्त राशन दे रहे हैं इसी से साफ़ हो जाता है कि इस सरकार ने आम लोगों को किस स्थिति में पहुंचा दिया है। यहाँ तक कि 'रेवड़ी आवंटन' तो अब भारत के मुख्य चुनावी एजेंडे में शामिल हो चुका है। ऐसे में प्रतिभाओं का पालयन तो हो ही रहा है साथ ही आम आदमी भी चाहे अपनी ज़मीन,सोना,मकान आदि गिरवी रखकर या बेचकर इन देशों में जाना चाहते हैं। उन्हें विश्वास होता है कि उनका व उनके परिवार का भविष्य भारत में सुरक्षित नहीं। देश में आर्थिक अनिश्चितता का जो वातावरण है उससे वे वाक़िफ़ हैं तभी विदेशी एजेंटों के झांसे में आकर विदेश यात्रा हेतु कई ग़लत व ग़ैर क़ानूनी क़दम उठा लेते हैं। इनमें कई लोगों को तो अवैध तरीक़े से सीमा पार करने हेतु जंगलों व ख़तरनाक समुद्री रास्तों से गुज़रना होता है। कई युवा तो अपनी जान भी गँवा बैठते हैं। लिहाज़ा जहाँ भारत को विश्व की महाशक्ति बनने का सपना दिखाने वालों की यह ज़िम्मेदारी है कि वह अपने देश में ही अधिक से अधिक ऐसे अवसर उपलब्ध करायें ताकि पलायन पर नियंत्रण किया जा सके और इसतरह के अपमान से युवाओं को बचाया जा सके। दूसरी तरफ़ युवाओं को भी भारत में ही रहकर हर सरकारों पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध करने का दबाव बनाना चाहिये। साथ ही संतोष व मान सम्मान का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिये। डॉ बशीर बद्र साहब ने ठीक ही कहा है कि-'भीगी हुई आँखों का ये मनज़र न मिलेगा'। घर छोड़ के मत जाओ कहीं घर न मिलेगा।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2025

दिल्ली की 70 सीटों पर किसको मिली कहां से जीत, देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली। आज दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों के परिणाम आ चुके हैं। देखें सीटों पर कौन कहां से जीत

1 आदर्श नगर राज कुमार भाटिया BJP
2 अंबेडकर नगर डॉ. अजय दत्त AAP
3 बाबरपुर गोपाल राय AAP
4 बदरपुर राम सिंह नेताजी AAP
5 बादली अहिर दीपक चौधरी BJP
6 बल्लीमारान इमरान हुसैन AAP
7 बवाना (एससी) रवींद्र इंद्र सिंह BJP
8 बिजवासन कैलाश गहलौत BJP
9 बुराड़ी संजीव झा AAP
10 चांदनी चौक पुरदीप सिंह AAP
11 छतरपुर करतार सिंह तंवर BJP
12 दिल्ली कैंट वीरेंद्र सिंह कादियान AAP
13 देवली (एससी) प्रेम चौहान AAP
14 द्वारका प्रद्युम्न सिंह राजपूत BJP
15 गांधीनगर अरविंदर सिंह लवली BJP
16 घोंडा अजय महावर BJP
17 गोकुलपुर (एससी) सुरेंद्र कुमार AAP
18 ग्रेटर कैलाश शिखा रॉय BJP
19 हरि नगर श्याम शर्मा BJP
20 जनकपुरी आशीष सूद BJP
21 जंगपुरा तारविंदर सिंह मारवाह BJP
22 कालकाजी आतिशी मार्लेना AAP
23 करावल नगर कपिल मिश्रा BJP
24 करोलबाग (एससी) विशेष रवि AAP
25 कस्तूरबा नगर नीरज भसोया BJP
26 किरारी अनिल झा AAP
27 कोंडली (एससी) कुलदीप कुमार AAP
28 कृष्णा नगर डॉ. अनिल गोयल BJP
29 लक्ष्मी नगर अभय वर्मा BJP
30 मादीपुर (एससी) कैलाश गंगवाल BJP
31 मालवीय नगर सतीश उपाध्याय BJP
32 मंगोलपुरी (एससी) राज कुमार चौहान BJP
33 मटिया महल अली मो. इकबाल AAP
34 मटियाला संदीप सेहरावत BJP
35 महरौली गजेंद्र सिंह यादव BJP
36 मॉडल टाउन अशोक गोयल BJP
37 मोती नगर हरीश खुराना BJP
38 मुंडका गजेंद्र द्राल BJP
39 मुस्तफाबाद मोहन सिंह बिष्ट BJP
40 नजफगढ़ नीलम पहलवान BJP
41 नांगलोई जाट मनोज कुमार शौकीन BJP
42 नरेला राज करण खतरी BJP
43 नई दिल्ली प्रवेश वर्मा BJP
44 ओखला अमानतुल्ला खान AAP
45 पालम कुलदीप सोलंकी BJP
46 पटेल नगर (एससी) प्रवेश रत्न AAP
47 पटपड़गंज रवींद्र सिंह नेगी BJP
48 आरके पुरम अनिल कुमार शर्मा BJP
49 राजिंदर नगर उमंग बजाज BJP
50 राजौरी गार्डन मनजिंदर सिंह सिरसा BJP
51 रिठाला कुलवंत राणा BJP
52 रोहिणी वीजेंदर गुप्ता BJP
53 रोहतास नगर जीतेंद्र महाजन BJP
54 सदर बाजार सोम दत्त AAP
55 संगम विहार चंदन कुमार चौधरी BJP
56 सीलमपुर चौधरी जुबैर अहमद AAP
57 सीमापुरी (एससी) वीर सिंह ढिंगन AAP
58 शाहदरा संजय गोयल BJP
59 शकूर बस्ती करनाल सिंह BJP
60 शालीमार बाग रेखा गुप्ता BJP
61 सुल्तानपुर माजरा (एससी) मुकेश कुमार अहलावत AAP
62 तिलक नगर जरनैल सिंह AAP
63 तिमारपुर सुरिंदर पाल सिंह AAP
64 त्रिनगर तिलक राम गुप्ता BJP
65 त्रिलोकपुरी (एससी) रवि कांत BJP
66 तुगलकाबाद सही राम AAP
67 उत्तम नगर पवन शर्मा BJP
68 विकासपुरी पंकज कुमार सिंह BJP
69 विश्वास नगर ओम प्रकाश शर्मा BJP
70 वजीरपुर पूनम शर्मा BJP

भाजपा दिल्ली विधानसभा चुनाव मे जीत पर बदायूं में अरशद अल्वी ने मिठाई बांटी

असलम अल्वी

बदायूं। दिल्ली विधानसभा चुनाव व मिल्कीपुर उप चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत होने पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश मंत्री अरशद अल्वी के आवास पर पार्टी के पदाधिकारियों के साथ मिष्ठान वितरण कर जीत का जश्न मनाया गया। प्रदेश मंत्री अरशद अल्वी ने कहा यह प्रचंड जीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति दिल्ली की जनता के अटूट विश्वास, गृह मंत्री अमित शाह की मजबूत रणनीति एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सांगठनिक कौशल के साथ हमारे कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत का परिणाम है। दिल्लीवासियों ने केजरीवाल के झूठ, भ्रष्टाचार और कुशासन को नकारकर सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास व सबका प्रयास के संकल्प को चुना है। दिल्ली अब विकास और सुशासन की नई दिशा में आगे बढ़ेगी। इस पर मोहम्मद सिराज अल्वी ने जीत की बधाई देते हुए कहा इस जीत से दिल्ली में विकास की नई रणनीति सामने आएगी और विकास करो में तेजी आएगी  इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद शीराज आलम, मंडल अध्यक्ष नसीम खान, अजमत पीर, साहिल, मुजीब, शानू, रिजवान, विजय मौर्य, शरीफ अंसारी आदि उपस्थित रहे।

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