सोमवार, 1 मई 2023

बेहटा हाजीपुर वार्ड से सभासद पद से आप के प्रत्याशी हैं अकील अहमद

मो. अनीस

बेहटा हाजीपुर। उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव अपने पूरे शबाब पर है और इसके पहले चरण की वोटिंग 4 मई को होगी वहीं दूसरे चरण की वोटिंग 11 मई को होगी। इस बार दिल्ली व पंजाब पर बढ़त बनाने, गुजरात व गोवा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतार 2024 की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसके लिए पार्टी ने थीम सॉन्ग लॉन्च किया है और इसके जरिए भी पीएम मोदी और सीएम योगी पर निशाना साधा है। इसके साथ ही भाजपा को धोखेबाज बताया है।
आप ने उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के लिए नया नारा भी गढ़ लिया है। इसके तहत कार्यकर्ता ‘यूपी निकाय में भी केजरीवाल’ का नारा लगा रहे हैं। थीम सॉन्ग में आप संयोजक और दिल्ली सीएम केजरीवाल की भी फोटो लगाई गई है।
वहीं जिला गाजियाबाद के तहसील लोनी के मौलाना आजाद कॉलोनी के बेहटा हाजीपुर वार्ड नंबर 8 से सभासद पद के लिए आम आदमी पार्टी की ओर से अकील अहमद को प्रत्याशी हैं। अकील अहमद भी पूरे जोर-शोर से अपना प्रचार कर रहे हैं। इनके समर्थन में भी काफी भीड़ नजर आ रही है। इनके मुख्य मुद्दे लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाना, 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने के लिए समय-समय पर बिजली के ट्रांसफार्मर ठीक करवाना या लगवाना, वृद्धों व विधवाओं को पेंशन दिलवाना, आरसीसी रोड बनवाना, जर्जर तारों को सही करवाना, डिस्पेंसरी बनवाना, वार्ड में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना आदि।

रविवार, 30 अप्रैल 2023

अपराधियों का महिमामण्डन - रुग्ण समाज की निशानी

तनवीर जाफ़री
गैंगस्टर एवं नेता ब्रदर्स अतीक़ व अशरफ़ अहमद की इलाहाबाद के एक अस्पताल परिसर में गत 15 अप्रैल की रात पुलिस हिरासत में मीडिया से बातचीत के दौरान तीन हमलावरों ने नज़दीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकाण्ड के बाद उनके महिमामण्डन की कई ख़बरें सामने आई हैं। अतीक़-अशरफ़ की हत्या जिन परिस्थितियों में की गयी उसकी आलोचना सर्वत्र की जा रही है। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ इस घटनाक्रम पर तुरंत सक्रिय हुये व पुलिस की लापरवाही पर उनकी नाराज़गी की ख़बरें भी आयीं। परन्तु उन दोनों भाइयों की हत्या तथा इससे दो दिन पहले ही अतीक़ के एक बेटे असद की पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ के बाद जिसतरह कुछ ख़बरें इन गैंगस्टर्स के महिमामण्डन को लेकर सुनाई दीं वह चौंकाने वाली थीं। ख़ासतौर पर  धर्म के आधार पर अपराधियों का महिमामण्डन किया जाना तो किसी भी क़ीमत पर मुनासिब नहीं कहा जा सकता। अतीक़ मुसलमानों का कितना बड़ा हितैषी था इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस पर पर दर्ज हुये 20 सबसे संगीन अपराधों में दायर 13 मामले पीड़ित मुसलमानों द्वारा ही दर्ज कराए गये थे। वैसे भी प्रायः गैंगस्टर्स का धर्म जाति से कोई वास्ता नहीं होता। इनके गैंग में सभी धर्मों और जातियों के लोग शामिल होते हैं और इनसे पीड़ित लोग भी किसी भी धर्म जाति के हो सकते हैं। 
इन वास्तविकताओं के बावजूद अतीक़-अशरफ़ की हत्या के बाद उनका महिमामण्डन करने,उन्हें मुसलमानों के हीरो के रूप में पेश करने यहाँ तक कि शहीद बताने तक की ख़बरें कई जगहों से प्राप्त हुईं। एक मौलवी तो बाक़ायदा नमाज़ के बाद दुआओं में अतीक़ ब्रदर्स को शहीद बताता नज़र आया और उसने उन्हें जन्नत भेजने की दुआएं भी दे डालीं।  प्राप्त समाचारों के अनुसार पटना में जामा मस्जिद के बाहर अलविदा की नमाज़ के बाद अतीक़ ब्रदर्स  के समर्थन में नारेबाज़ी की गई और 'अतीक़ अहमद अमर रहें' के नारे लगाए । देश में और भी कई जगह से अतीक़ के समर्थन व उसे महिमामंडित करने के समाचार प्राप्त हुए। विदेशी मीडिया ने तो अतीक़ को रोबिन हुड के रूप में पेश करने की कोशिश की। बेशक उनकी हत्या के तरीक़ों,पुलिस की लापरवाही,सुरक्षा में चूक पर ऊँगली उठना या इनकी आलोचना अपनी जगह पर सही है परन्तु उन्हें महिमामंडित करना क़तई उचित नहीं इसलिये कि किसी अपराधी को महिमामंडित करने का दूसरा अर्थ है उसके द्वारा किये गए अपराधों को नज़र अंदाज़ करना। 
अतीक़ को महिमामंडित करने के विरोध में कई पेशेवर अति उत्साही लेखकों ने तो कई आलेख लिख डाले। बिहार के भाजपा विधायक विधायक हरी भूषण ठाकुर को तो यहां तक कहने का अवसर मिल गया कि -'अतीक़ के समर्थन में नारेबाज़ी करने वालों का एनकाउंटर कर देना चाहिये।' साम्प्रदायिकता को हवा देकर तमाम लोग सरकार से 'रेवड़ी ' हासिल करने की फ़िराक़ में न जाने क्या क्या लिखते रहते हैं। परन्तु इनसे यह सवाल तो ज़रूर पूछा जाना चाहिये कि इन्होंने उस समय क्या प्रतिक्रिया दी थी जब शंभु रैगर नामक एक युवक द्वारा 6 दिसंबर 2017 को राजस्थान में एक बंगाली मज़दूर अफ़राज़ुल शेख़ की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गयी थी और उसे जला दिया गया था।  इतना ही नहीं बल्कि इस जघन्य हत्याकाण्ड का वीडियो भी स्वयं हत्यारे ही द्वारा फ़ेसबुक पर लाइव टेलीकास्ट किया गया था । वही हत्यारा जेल गया तो जेल से भी वीडियो बनाकर डालता रहा। और जब वह ज़मानत पर बाहर आया तो उसके समर्थन में हज़ारों लोगों ने  जुलूस निकाला था। उसके समर्थन में नारे लगाये गये। यहाँ तक कि उत्पाती साम्प्रदायिक भीड़ द्वारा अदालत की छत पर चढ़ कर भगवा झंडा लहरा दिया गया था ? और धार्मिक जुलूस में उसके नाम की चौकी सजा कर निकाली गयी थी । क्या किसी बेगुनाह व्यक्ति को कुल्हाड़ियों से काटकर उसे जलाये जाने जैसा घृणित अपराध करने वाले का महिमामण्डन करना सही है ?
जघन्य अपराधियों,बलात्कारियों,हत्यारों को महिमामंडित करने उन्हें हीरो बनाने जैसा घृणित कार्य तो गोया अब परंपरा का रूप लेता जा रहा है। किसी घटना को साम्प्रदायिक या जातिवादी मोड़ दे दिये जाने पर तो गोया अपराधियों का महिमामण्डन अनिवार्य सा हो गया है। देश में ऐसी दर्जनों मिसालें मौजूद हैं। हाथरस बलात्कार काण्ड में बलात्कारियों के पक्ष में पंचायत बुलाई गयी। 2018 में जम्मू के कठुवा में एक ग़रीब मज़दूर की 8 वर्षीय बेटी असिफ़ा का अपहरण कर उसके साथ गैंग रेप किया गया व उसकी निर्मम हत्या कर उसकी लाश जंगल में फेंकने जैसी वारदात अंजाम दी गयी। और उसके बाद बलात्कारियों व हत्यारों के पक्ष में राज्य के भाजपा मंत्रियों व विधायकों का खड़ा होना व उन्हें बचाने के लिये जुलूस प्रदर्शन धरना  करना क्या देश कभी भूल सकेगा ? बिल्क़ीस के बलात्कारियों,दंगाइयों की सुगम रिहाई और बाद में राजनैतिक मंच पर उस अपराधी का महिमामण्डन,क्या अपराधियों के हौसले नहीं बढ़ाता ? 2019 में शाहजहांपुर के स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय जिसे स्वामी चिन्मयानंद का ट्रस्ट चलाता है यहां पढ़ने वाली एलएलएम की एक छात्रा ने स्वामी चिन्मयानंद पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्हें एम पी एम एल ए अदालत बा इज़्ज़त बरी कर देती है। जामिया में धरने पर बैठे लोगों की तरफ़ जो अनजान युवक तमंचे से गोलियां चलाता है वह आज महिमामंडित होकर साम्प्रदायिकतावादियों का आइकॉन बन चुका है। भाजपा नेता जयंत सिन्हा झारखण्ड में मॉब लिंचिंग के हत्यारे दोषियों को जेल से छूटने के बाद माला पहनाते व उनके साथ फ़ोटो सेशन करते देखे जाते हैं। 2015 में नोएडा के निकट दादरी में अख़लाक़ नमक 50 वर्षीय व्यक्ति की भीड़ ने पीट पीट कर हत्या कर दी थी। अख़लाक़ का बेटा भारतीय वायुसेना में अधिकारी है। उस समय भी तत्कालीन सांसद योगी आदित्य नाथ सहित तमाम बड़े भाजपा नेता मंत्री सांसद व विधायक हत्यारों की हौसला अफ़ज़ाई करते उन्हें बचाते व उनके पक्ष में पंचायतें करते दिखाई दिए थे। 
लगभग वही सिलसिला अतीक़ व अशरफ़ की हत्या के बाद भी नज़र आया। हत्यारों,बलात्कारियों या किसी भी अपराध में संलिप्त लोगों को धर्म या जाति के आधार पर समर्थन देना एक ख़तरनाक सिलसिले को बढ़ावा देना है। कहना ग़लत नहीं होगा कि अपराधियों का महिमामण्डन न केवल न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश है बल्कि यह रुग्ण समाज की भी निशानी है।
098962-19228

शनिवार, 29 अप्रैल 2023

गांधीनगर के विधायक अनिल बाजपेई ने आजाद नगर वार्ड के वेस्ट कांतिनगर की जनता को दिया नई सीवर लाइन का तोहफ़ा

आज गांधीनगर के विधायक अनिल कुमार बाजपेई ने वेस्ट कांति नगर निवासियों के लिए लगभग 17 लाख रुपए की लागत से नई सीवर लाइन का उदघाटन स्वास्थ्य कमेटी की पूर्व चेयरमैन व पूर्व निगम पार्षद कंचन माहेश्वरी के हाथों कराया।

ज्ञात हो कि वेस्ट कांति नगर आरडब्लूए और प्रबुद्घ लोगों के एक शिष्टमंडल ने विधायक अनिल कुमार बाजपेई जी से उनके कार्यालय में आकर सीवर जाम  की शिकायत की थी जिसको विधायक जी ने  तुरंत दिल्ली जल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियो से बात कर इस काम की शीघ्रता से शुरुआत कराई।

विधायक श्री अनिल बाजपेई जी ने बताया कि ये सीवर लाइन कांतिनगर पॉलोक्लिनिक से शुरू होकर भूतेश्वर मंदिर कांतिनगर तक डाली जाएगी जिससे यहां के सभी निवासियों को सीवर जाम से आ रही समस्या से काफी राहत मिलेगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य कमेटी की पूर्व चेयरमैन व पूर्व निगम पार्षद कंचन माहेश्वरी, डॉक्टर वीरपाल कश्यप, आरडब्लूए अध्यक्ष अमित कश्यप, पूर्व प्रत्याशी वंदना रानी, सुश्री इंदू सेन, सुनील तिवारी, दीपक जैन, अरूण मिश्रा, देवदत्त शर्मा, हरीश चंद्र शर्मा, संजय गुप्ता, दीपक गुप्ता, गौरव जैन, नितिन जैन समेत काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

शुक्रवार, 28 अप्रैल 2023

ब्रिटेन में आई रिपोर्ट ने हिंदूफोबिया की भयावह स्थिति को उजागर किया

अवधेश कुमार

दुनिया के अलग-अलग स्थानों से हिंदूफोबिया यानी हिंदू विरोधी नफरत एवं हिंसा की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय है। हम कई देशों में हिंदुओं, हिंदू प्रतीकों, हिंदू धर्मस्थलों आदि पर हमले के साथ-साथ हिंदू धर्म के विरुद्ध प्रचार अभियानों को देख रहे हैं। ब्रिटेन की द हेनरी जैक्सन सोसाइटी द्वारा जारी अध्ययन रिपोर्ट ने इस बात को फिर से साबित किया है कि हिंदू समाज के लिए यह कठिन चुनौती का समय है। रिपोर्ट का शीर्षक है, एंटी हिंदू हेट इन स्कूल्स। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि ब्रिटेन के स्कूलों में हिंदू विरोधी घृणा चरम पर है और हिंदू बच्चों को अनेक देवी - देवताओं के पूजन, गाय को पवित्र मानने, जाति व्यवस्था आदि के आधार पर चिढ़ाया जाता है, अपमानित किया जाता है और उन्हें मुस्लिम बच्चे काफिर पुकारते हैं।  

•इसमें 998 हिंदू अभिभावकों से बातचीत की गई है। 51% अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों ने हिंदू विरोधी घृणा का सामना किया है। केवल 19% अभिभावकों ने कहा कि शिक्षण संस्थान इसकी पहचान कर ठीक करेगा। 

•यह ब्रिटेन में अपने किस्म की हिंदू विरोधी घृणा पर पहली अध्ययन रिपोर्ट है जो पिछले साल हुए लीसेस्टर में हिंदू विरोधी दंगों की रिपोर्ट के बाद आई है। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि हिंसा का एक प्रमुख कारण हिंदू विरोधी दुष्प्रचार ही था। 

रिपोर्ट के कुछ अंश देखिए 

•निरामिष होने का मजाक उड़ाते हुए एक बच्ची पर गाय का मांस फेंका गया और कहा गया कि तू इस्लाम ग्रहण कर लो तो हम परेशान करना बंद कर देंगे।

 •  एक छात्र को कहा गया कि हिंदू धर्म की पढ़ाई करना मूर्खता है क्योंकि यह 33 करोड़ देवताओं के साथ हाथी, बंदर और मूर्ति की पूजा करते हैं। 

• एक ईसाई ने हिंदू बच्चे को कहा कि हमारा यीशु तुम्हारे सारे देवताओं को नर्क में भेजेगा ।  

•हिंदू धर्म में स्वास्तिक जैसे प्रतीक को हिटलर के प्रतीक से तुलना कर उसी तरह हिंदू बच्चों को निशाना बनाने की घटनाएं हुई जैसे एक समय यहूदियों के साथ होता था। 

रिपोर्ट में हिंदू बच्चों द्वारा इस्लाम या ईसाइयत के विरुद्ध टिप्पणी करने की बात नहीं है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि मुस्लिम या ईसाई छात्र और शिक्षक आदि प्रतिक्रिया में ऐसा कर रहे हैं।


 वास्तव में यूरोप अमेरिका सहित अनेक देशों में चल रहे हिंदूफोबिया यानी हिंदुओं के विरुद्ध अभियान और हिंसा का छोटा अंश इस रिपोर्ट में आया है। धर्मों व नस्लों के विरुद्ध घृणा पर शोध करने वाली अमेरिकी संस्था नेटवर्क कंटैजियन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अध्ययन में बताया है कि पिछले कुछ समय में हिंदू विरोधी टिप्पणियों में 1000 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। व्हाइट सुपरमेसिस्ट (नस्लभेदी श्वेत समुदाय) और मुसलमानों को हिंदू विरोधी दुष्प्रचार और हिंसा में सबसे आगे बताया गया है। अध्ययन के अनुसार हिंदुओं और भारतीयों के विरुद्ध घृणा फैलाने में पाकिस्तान की भूमिका भी बहुत बड़ी है। पाकिस्तान से हर दिन हिंदुओं के विरुद्ध हजारों नफरत फैलाने वाले ट्वीट किए जाते हैं। अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का एक समूह इसे अभियान के रूप में चलाता दिखा है तो ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नेताओं में भी ऐसे लोगों की संख्या है जो अपनी तथाकथित वामपंथी प्रोग्रेसिव सोच तथा कट्टरपंथी मुस्लिमों के प्रभाव में हिंदू धर्म, और रीति-रिवाजों का उपहास उड़ाने को  कर्तव्य मानते हैं।


दूसरे देशों की समस्या यह है कि वे अपने रिलीजन या मजहब के दृष्टिकोण से हिंदू धर्म और समाज की व्याख्या करते हैं। ब्रिटिश अध्ययन में छात्र - छात्राओं के अभिभावकों ने बताया कि पाठ्यपुस्तकों में हिंदू धर्म का उल्लेख वस्तुतः उसका मजाक उड़ाने वाला है। इसलिए इसका अध्ययन छात्र-छात्राओं के अंदर हिंदू धर्म और हिंदुओं के बारे में गलत धारणा पैदा करता है। अब्राह्मिक रिलिजन के आईने में हिंदू धर्म की व्याख्या हो ही नहीं सकती।  पर समस्या इतनी भर होती तो हिंदू संगठन, अलग-अलग पंथ, संप्रदाय से लेकर योग, अध्यात्म, दर्शन आदि पर काम करने वाली संस्थाएं बड़े पैमाने पर अनेक देशों में सक्रिय है उनमें रुचि लेकर समझने की कोशिश की जाती। जहां तक ईसाइयों के व्यवहार का प्रश्न है तो भारत सहित एशिया, अफ्रीका पर शासन करने वाले अंग्रेजों ने ह्वाइटूसमेन बर्डेन सिद्धांत दिया जिसका अर्थ था कि इन देशों के लोगों को सभ्य बनाने की जिम्मेवारी हमारी है और इसी कारण हम शासन कर रहे हैं। श्रेष्ठतर सभ्यता-संस्कृति का यह भाव खत्म नहीं हुआ है। इस कारण इन देशों  में भी हम धार्मिक -सांस्कृतिक श्रेष्ठतावाद समूह और ईसाई उग्रवाद देख रहे हैं। मुस्लिमों के रवैये की व्याख्या इनसे नहीं हो सकती। मुस्लिम कट्टरवाद ऐसा मजहबी श्रेष्ठतावाद है जो मानता है कि एकमात्र इस्लाम ही मजहब है और अन्य मजहब का अस्तित्व इस्लाम विरोधी है। इसलिए हर मजहब उनके निशाने पर हैं । भारत के बाहर के हिंदू उन्हें अपना शिकार लगते हैं क्योंकि अन्य कोई देश हिंदू बहुमत वाला नहीं है। 

हालांकि यह स्थिति पहले से थी लेकिन हिंदुओं के विरुद्ध दुष्प्रचार, नफरत एवं हिंसा में वृद्धि हाल के कुछ वर्षों में हुई है। तो क्यों?

  हिंदू संगठनों द्वारा व्यापक पैमाने पर दुनिया भर में काम करना है। इनके कारण हिंदू जहां भी है अनेक सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, बौद्धिक रचनात्मक गतिविधियां चला रहे हैं। इनका प्रभाव भी बढा है । दुनिया भर में भारतवंशियों की संख्या करीब 3.5 करोड़ है जिनमें हिंदू सबसे ज्यादा हैं। ये अनेक देशों में शीर्ष पदों पर ही नहीं कारोबार, विज्ञान,संस्कृति, अकादमी मीडिया आदि में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद छोटे देशों में भी भारतवंशियों को संबोधित कर उनके अंदर अपनी संस्कृति व सभ्यता के प्रति गर्व का भाव तथा भारत के प्रति भावनात्मक लगाव पैदा करने की कोशिश की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अनेक संगठन लंबे समय से काम कर रहे हैं, इसलिए उन सभाओं का व्यापक असर हुआ। हमारे उत्सव और धार्मिक दिवसों से लेकर भारत के स्वतंत्रता दिवस आदि अलग-अलग देशों में भी धूमधाम से मनाए जाते हैं। भारतीय एवं भारतवंशी हिंदू संकोच और हिचक त्याग कर अपनी संस्कृति, सभ्यता और अध्यात्म को लेकर मुखर हुए हैं। भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के कारण उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।

 कोई भी समुदाय इस तरह उठकर खड़ा होगा तो स्वयं को श्रेष्ठ मानने वालों को समस्यायें पैदा होगी।  हालांकि हिंदू प्रतिक्रिया में गुस्से में आ सकता है, किसी मजहब, पंथ या समुदाय से घृणा या उसके विरुद्ध हिंसा हिंदुओं के स्वभाव में नहीं। किंतु पाकिस्तान और उससे प्रभावित मुसलमानों के समूह ने हिंदूफोबिया को यह कहते हुए बढ़ाया है कि संघ तथा नरेंद्र मोदी सरकार की विचारधारा दूसरे मजहब को कुचलने वाली है, मुस्लिमों पर जुल्म हो रहे हैं ,उनकी मजहबी गतिविधियां बाधित की जा रही हैं। इंग्लैंड के मस्जिदों से ऐसी तकरीरें सामने आती हैं। यही स्थिति अमेरिका एवं अन्य देशों की भी हैं। प्रश्न है कि इसका सामना कैसे किया जाए? भारत ने पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ में इस विषय को दो बार उठाया । इससे संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य देशों तक विषय पहुंचा है तथा भारत की कोशिश है कि विश्व संस्था अपने विमर्श और प्रस्ताव में इसे शामिल करे। सरकार से परे हिंदूफोबिया के हकीकत बनने के बाद सतर्क हिंदू और हिंदू संगठनों ने भी समानांतर सकारात्मक अभियान चलाया है। इसका परिणाम पिछले महीने अमेरिका के जॉर्जिया में हिंदूफोबिया के विरुद्ध पारित प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव में न केवल हिंदू धर्म, सभ्यता व संस्कृति की सच्चाई प्रकट की गई बल्कि अमेरिका में हिंदुओं का योगदान स्वीकार करते हुए हिंदूफोबिया फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की भी बात की गई है । हिंदू संगठन हिंदू धर्म और हिंदू समुदाय की सच्चाई से अवगत कराने के लिए लगातार कार्यक्रम कर रहे हैं जिनका असर हुआ है। 

तो निष्कर्ष यह कि विपरीत परिस्थितियों को अवसर मानकर सतर्क सक्रिय हिंदू समुदाय और संगठन अपनी धर्म संस्कृति, भारतीय राष्ट्रवाद की अवधारणा आदि को लेकर व्यापक प्रचार प्रसार करें, दुनियाभर में हिंदुओं के अंदर आत्मविश्वास पैदा हो तो इस सांस्कृतिक एवं भौतिक हमले का न केवल मुकाबला किया जा सकता है बल्कि हिंदू धर्म, सभ्यता और संस्कृति की स्वीकार्यता भी बढ़ाई जा सकती है। हिंदू धर्म का टकराव किसी अन्य रिलीजन, मजहब या पंथ से हो ही नहीं सकता क्योंकि  सर्वधर्म समभाव इसका मूल है।  इस्लामी चरमपंथ ने अपनी भूमिका से संपूर्ण विश्व को डराया है। ब्रिटेन में ही काफी संख्या में ईसाई लोगों ने जेलों में इस्लामिक हमलों से ईसाइयों की सुरक्षा के विरुद्ध कानूनी लड़ाई आरंभ किया है। यह स्थिति अनेक देशों में है। इसमें हिंदू समुदाय अपने धर्म, संस्कृति के आधार पर ऐसी भूमिका निभा सकता है जिससे संपूर्ण विश्व समुदाय के अंदर हिंदूधर्म के सर्वधर्म समभाव जैसे मूल व्यवहार अपनाने की संभावना बलवती होगी।

मंगलवार, 25 अप्रैल 2023

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