शनिवार, 14 जनवरी 2023

कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति तक सरकारी योजना पहुंचाना हमारा कर्तव्य और उस व्यक्ति का अधिकार: प्रांजल पाटिल

नई दिल्ली। शाहदरा जिला अधिकारी श्रीमती प्रांजल पाटिल द्वारा सीलमपुर विधानसभा के जीनत महल स्कूल में एक जन जागरण अभियान (मेगा कैंप) के रूप में आयोजित किया गया जिसमें शासन आपके आंगन तथा कागज बनवाओ अभियान के तहत नागरिकों के अधिकतर सरकारी दस्तावेज बनवाने तथा सरकारी योजनाओं की पूर्ण जानकारी देने का कार्य किया गया शाहदरा जिला अधिकारी प्रांजल पाटिल ने मेगा कैंप में तमाम नागरिकों का अभिनंदन किया उनको आश्वासन दिलाया कि हमारे जिले में आज पहला कैंप का अयोजन किया है और इसको भविष्य में बार-बार लगाया जाएगा क्योंकि हमें 2000 लोगों के आने का अनुमान था परंतु जिस प्रकार से शाहदरा जिला के पदाधिकारियों, कर्मचारियों, स्थानीय आरडब्ल्यू जाफराबाद, शमां एजुकेशनल एंड पॉलिटेक्निक सोसाइटी तथा स्कूल विभाग ने जिस प्रकार से जन जागरण अभियान को आम जन जन तक पहुंचाया है उसी के चलते आज यहां इतनी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए जितना काम हम आज यहां करा पाए हैं वो संतोष जनक रहा बाकी भविष्य में इसको हम समय-समय पर शाहदरा जिला के अलग-अलग स्थानों पर आयोजित करते रहेंगे।

एसडीएम शाहदरा सतीश कुमार मिश्र ने जिला अधिकारी शाहदरा प्रांजल पाटिल के नेतृत्व में हुए इस मेगा कैंप में सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं जानकारियां तथा योजनाओं के पूर्ण रूप से परिलक्षित करने के लिए धन्यवाद प्रकट किया और जिन लोगों ने आज मेगा कैंप से लाभ उठाया है उनका धन्यवाद किया तथा जितने नागरिक समय के अभाव के कारण रह गए थे उन्हें भविष्य में यह सभी सुविधाएं योजनाएं जानकारियां प्रदान करने के लिए विश्वास भी दिलाया, एसडीएम सीमापुरी, एसडीएम हेड क्वार्टर, शिक्षा निदेशक, शिक्षा अधिकारी, दिल्ली पुलिस एसीपी उदयवीर सिंह, पूर्व पार्षद आसमा रहमान आदि ने भी अपने अपने विचार रखें और नागरिकों को विश्वास दिलाया कि शासन आपके आंगन आया है और यह सिलसिला इसी प्रकार आगे भी जारी रहेगा, हम पूर्ण रूप से प्रयास करते रहेंगे कि सरकार की हर योजना सरकार का की हर सुविधा आम नागरिक तक अवश्य पहुंचे।

सीलमपुर विधायक अब्दुल रहमान ने जिला अधिकारी प्रांजल पाटिल,एसडीएम शाहदरा सतीश कुमार, सभी अधिकारियों तथा शमां एजुकेशनल एंड पॉलिटेक्निक सोसायटी, जाफराबाद आरडब्लूए के सभी पदाधिकारियों का धन्यवाद किया और यह विश्वास दिलाया कि सरकार की हर योजना को जनता तक लाने में वो हमेशा प्रयास करते रहेंगे इसी कड़ी में विधायक अब्दुल रहमान ने आने वाले रविवार को अपने नए कार्यालय के उद्घाटन के लिए भी नागरिकों को अधिकारियों को और संस्थाओं को आमंत्रित किया और यह विश्वास दिलाया कि उनकी सरकार और वह सदैव जनता के साथ हैं जनता के लिए हैं और जनता के कारण है। शमां एजुकेशन एंड पॉलिटेक्निक सोसायटी के महासचिव डाक्टर फ़हीम बेग ने जिला अधिकारी, एसडीएम शाहदरा, एसडीएम सीमापुरी, एसडीएम हेडक्वार्टर, एसीपी भजनपुरा, विधायक सीलमपुर और तमाम 28 विभागों का धन्यवाद किया।

डॉ. के अनुसार आज इस मेगा कैंप में एमसीडी डिपार्टमेंट, जल बोर्ड, बीएसईएस, मध्यस्तता केंद, महिला आयोग, सिविल डिफेंस, आधार कार्ड, पहचान पत्र, राशन कार्ड, इनकम सर्टिफिकेट, ओबीसी सर्टिफिकेट, लेबर डिपार्टमेंट, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट सभी व अन्य सभी विभाग मोजूद रहे जिन्होंने 2000 से अधिक लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया। मेगा कैंप में बच्चों द्वारा शिक्षा के प्रति जागरूकता तथा सफाई के प्रति जागरूकता के लिए नाटक का मंचन भी किया इसी के साथ साथ बच्चों ने कला प्रतियोगिता में भाग लेकर देश भक्ति, पानी बचाओ, प्रदूषण हटाओ, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ आदि जैसे विषय पर बड़ी सुंदर कला का प्रस्तुतीकरण किया। जिला अधिकारी प्रांजल पाटिल ने भाग लेने वाले सभी बच्चों को अपने हाथ से प्रमाण पत्र तथा ट्रॉफी देकर सम्मानित किया और उनकी भूरी भूरी प्रशंसा भी की। 

इस मेगा कैंप को सफल बनाने में शाहदरा जिला के कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों ने अपनी पूर्ण शक्ति का प्रदर्शन किया मुख्यता मोतीलाल जितेश, रंजन कुमार, राहुल, दीपक, पुनीत, रेखा देवी, एडमिन एस ओ, मिर्ज़ा शाहिद चंगेजी, हाजी शफीक, अकरम बेग, डॉ एहतेशाम, सैयद डॉ लाइक, डॉ. नासिर, डॉ. खुर्शीद, मोहम्मद साबिर, फाजिल खान, आसिफ अंसारी, सलीम मलिक, लोकेश पांचाल, मुकेश टांक, मुकेश गौड़, शमसुद्दीन, मोहम्मद शाहिद, जावेद मिर्जा, फैजान खान, सैफुररहमान, मोहम्मद अनीस, कारी यूसुफ अंसारी, जय किशन गुप्ता, नरेंद्र शर्मा, दानिश अंसारी, आसिफ इदरीसी, फुरकान मलिक, अदीब अंसारी, यशपाल शर्मा, आर्यन, जगदीश चौधरी, दीपक शर्मा, साहिल खान, शीबा खान, शिफा मिर्जा, आनिया, मेहविश, शिरीन मिर्जा, फाज़ खान, मोहम्मद खान, हाजी खान, एग्जाम, फातमा आदि ने भी इस मेगा कैंप को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग।












 


VAG प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी का भव्य उद्घाटन हुआ, मिलेगी इंटरनेशनल मेकअप किट व मेकअप आर्टिस्ट बनाने की सुविधा


नई दिल्ली। कॉलेज पार्टी हो, किटी पार्टी या शादी समारोह हो। युवतियों के लिए मेकअप ​के बिना यह सब अधूरा सा लगता है। क्योंकि अच्छा और गुणवत्तापूर्ण मेकअप खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। लेकिन कई बार लड़कियां उस मेकअप को मिस करती हैं जो टेलीविजन या इंटरनेशनल शो में किसी सेलीब्रेटी में देखने को मिलता है। हालांकि अब से ऐसा नहीं होगा, दरअसल दिल्ली में वेग प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी में उच्चस्तरीय मेकअप की सुविधा मिलने जा रही है जिसका उद्घाटन मशहूर फायर हेयर कट आर्टिस्ट नाजिम अली ने किया। वेग प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी में दिल्ली की एक मात्र ऐसी एकेडमी होगी जहां इंटरनेशल मेकअप किट की सुविधा तो मिलेगी ही साथ ही यहां छोटे छोटे सैलून चलाने वालों को कोर्स करने के बाद जॉब मिलेगी या जितने फीस भरेंगे उतने का काम दिलवाया जाएगा।
इस मौके पर वेग प्रोफेशनल मेकअप की असम ब्रान्ड एम्बेसडर सुनीता जेन, खुशी खान (सर्टिफाइड लंदन कॉलेज ऑफ मेकअप), राखी पोद्दार (मेकअप आर्टिस्ट), डिंपल राय (मेकअप आर्टिस्ट), कामिल सलमानी (हेयर आर्टिस्ट), इजहार सलमानी, चांदनी, निशा, संस्कृति, ज्योति आदि मौजूद थे।

वेग प्रोफेशनल मेकअप की असम ब्रान्ड एम्बेसडर सुनीता जेन ने बताया कि वेग प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी एक मात्र ऐसी एकेडमी है जहां इंटरनेशल मेकअप किट की सुविधा तो मिलती ही है साथ ही यहां छोटे छोटे सैलून चलाने वालों को कोर्स करने के बाद जॉब मिलेगी या जितने फीस भरेंगे उतने का काम दिलवाया जाएगा। मैं वेग प्रोफेशनल मेकअप की असम ब्रान्ड एम्बेसडर हूं। मैं खुद भी वेग के प्रोडेक्ट इस्तेमाल करती हूं और लोगों को भी इसे इस्तेमाल करने की सलाह देती हूं।

वेग प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी के चेयरमैन विनय गर्ग ने बताया कि हमारा अपना ब्रान्ड है वेग प्रोफेशनल मेकअप। इसी नाम से यह एकेडमी भी है जिसमें हम स्टूडेंट्स से जितने पैसे फीस के तौर पर लेते हैं उतने पैसे का सामान कोर्स खत्म होने के बाद उन्हें काम करने के लिए देते हैं और उनकी जॉब भी लगवाने की जिम्मेदारी लेते हैं। जो लोग जॉब नहीं करना चाहते उनको उतने का काम दिलवाते हैं।
उन्होंने बताया कि मेरा एक सपना है, मैं एक फ्री कैंसर हॉस्पिटल खोलना चाहता हूँ और वेग प्रोफेशनल मेकअप से होने वाली आय का 95 प्रतिशत हिस्सा इस हॉस्पिटल पर खर्च करूंगा। इस एकेडमी में स्टूडेंट्स को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी। हमने ऐसे कोर्स बनाए हैं जो गरीब परिवार से आने वाले भी आसानी से कर सकते हैं। हमारी पूरे हिंदुस्तान में कई एकेडमी खुल चुकी हैं और खुल रही हैं।
 
मुख्य अतिथि मशहूर फायर हेयर कट आर्टिस्ट नाजिम अली ने बताया कि वेग प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी में बहुत कुछ सीखने के लिए है जैसे स्किन केयर ट्रीटमेंट, ब्राइडल मेकअप, हेयर केयर, स्पा, नेलआर्ट आदि। अब स्टूडेंट्स के ऊपर निर्भर करता है कि वह कौन सा कोर्स कर रहा है और उसके सीखने की कितनी क्षमता है। मैं वेग प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी के सभी स्टूडेंट्स के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।

यहां मिलेंगी ये सुविधाएं-VAG प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी में स्किन केयर ट्रीटमेंट से लेकर ब्राइडल मेकअप, हेयर केयर, स्पा और नेलआर्ट जैसी अन्य सुविधाएं भी दी जाएगी। इसके अलावा यहां ज्वेलरी और लहंगे भी उपलब्ध होंगे। 
आपको बता दें कि VAG प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी ने चार फ्लोर ले रखें हैं जिसमें फ़र्स्ट फ्लोर पर वेग का अपने प्रोडक्ट वाला शोरूम है। सेकेंड फ्लोर पर 150 स्टूडेंट्स एक साथ बैठकर क्लास ले सकेंगे। थर्ड फ्लोर पर मेकअप की बारीकियों से अवगत करवाया जाएगा। फोर्थ फ्लोर पर बाहर से आने वाले 50 स्टूडेंट्स के रहने की सुविधा वाला हॉस्टल है। VAG प्रोफेशनल मेकअप शोरूम व एकेडमी 313 ककरोला हाउसिंग कॉम्प्लेक्स, द्वारका मोड़ मेट्रो स्टेशन, मेट्रो पिलर नं. 789, नई दिल्ली-75 में स्थित है।







































बुधवार, 11 जनवरी 2023

कैसी है मोदी विरोधी विपक्षी मोर्चाबंदी की तस्वीर

अवधेश कुमार

 लोकसभा चुनाव नजदीक आने के पूर्व विपक्षी दलों द्वारा सत्तारूढ़ पार्टी के विरुद्ध एकजुट होने और सत्ता में पहुंचने की कवायद नई नहीं है। बावजूद इसमें देश के रुचि बनी रहती है। इस समय देश के दो मुख्यमंत्रियों बिहार के नीतीश कुमार तथा तेलंगाना के के• चंद्रशेखर राव नरेंद्र मोदी और भाजपा विरोधी मोर्चा के लिए सबसे ज्यादा कवायद करते देखे जा रहे हैं। नीतीश ने अपनी पार्टी की बैठक में साफ कहा कि हम एकजुट हो गए तो ये लोग सत्ता से चले जाएंगे। पिछले दिनों जद यू की बैठक में उनकी पार्टी के अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि हम बिहार की सभी 40 लोकसभा सीट जीतेंगे। बैठक में बाहर से दिखता पूरा माहौल नितीश को राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी विरोधी मोर्चे के नेतृत्व करने के उत्साही वातावरण से भरा था। विपक्ष और सत्ता पक्ष की राजनीति का लंबा अनुभव रखने वाले जदयू के महासचिव केसी त्यागी ने उसी बैठक में कहा कि नीतीश कुमार को 6 महीना के लिए आप लोग दिल्ली भेज दो फिर देखो कैसे पूरा माहौल बदल जाता है। चंद्रशेखर राव ने नई दिल्ली में अपनी पार्टी कार्यालय की शुरुआत की जिसमें अखिलेश यादव शामिल हुए। अखिलेश यादव ने नीतीश कुमार का भी समर्थन किया। चंद्रशेखर राव अपनी पार्टी का नाम तेलंगाना राष्ट्र समिति से बदलकर भारत राष्ट्र समिति यानी बीआरआर कर चुके हैं और चुनाव आयोग ने उसे स्वीकार भी किया है। वे इसके पहले कई राज्यों की राजधानियों का दौरा कर नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। लोकसभा चुनाव में अब सवा साल से भी कम समय बचा है। प्रश्न है कि इन गतिविधियों के आधार पर नरेंद्र मोदी और भाजपा विरोधी राजनीति की क्या तस्वीर खींची जा सकती है?

नीतीश कुमार ने भाजपा से अलग होने की घोषणा के साथ ही इस दिशा में बयान आरंभ कर दिया था। वो बाद में दिल्ली आए और कई नेताओं से मिले। लालू प्रसाद यादव के साथ सोनिया गांधी से भी उनकी मुलाकात हुई। 2013 में भाजपा से अलग होने के बाद नीतीश ने इस तरह विपक्षी गोलबंदी की कोशिश नहीं की थी।  केवल बिहार में मोदी विरोधी आक्रामक अभियान चलाया था। 2014 के चुनाव में क्या हुआ यह सामने है। हालांकि तब उनके साथ राजद, कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टियां आदि नहीं थी। इस बार वे इन सब दलों के गठबंधन के नेता है। उस समय उनकी पार्टी के लोग बताते थे कि अगर हमने लोकसभा में 28 से 30 सीटें जीत लिया तो नीतीश प्रधानमंत्री के दावेदार होंगे। उन्हें यह भी लगता था कि भाजपा को बहुमत मिलेगा नहीं और पार्टी में भाजपा मोदी विरोधी उस स्थिति में नीतीश को नेता स्वीकार कर सकते हैं। अगर गैर भाजपा सरकार की नौबत आई तो विपक्ष उन्हें स्वीकार करने से गुरेज नहीं करेगा क्योंकि उनकी छवि सुशासन बाबू की बन गई है। इस बार भी उनकी पार्टी के नेता यही कह रहे हैं कि अगर हमने बिहार से भाजपा की सीटें कम कर दी, इसका असर दूसरे राज्यों में  हुआ तो ये सत्ता से बाहर होंगे, विपक्ष की सरकार बनेगी और नीतीश कुमार प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे। हालांकि सार्वजनिक तौर पर नीतीश कहते हैं कि वे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं हैं। यही नहीं वे बिहार में भी घोषित कर चुके हैं कि आगे तेजस्वी जी को ही नेतृत्व करना है। कई कार्यक्रम में उन्होंने यह घोषित किया और कहा कि 2025 का चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। जाहिर है, इसके द्वारा उन्होंने संदेश दिया कि वो केंद्रीय राजनीति में अभिरुचि रखते हैं तथा उनका लक्ष्य मोदी सरकार को सत्ता से हटाना है और राज्य का नेतृत्व तेजस्वी करें। इससे गठबंधन की एकता बनी रहेगी तथा दूसरी ओर उन्हें लगता है कि देश भर के विपक्ष का विश्वास उनकी ओर बढ़ेगा कि वो इस विषय को लेकर गंभीर हैं।

हालांकि अभी तक इसका ऐसा असर अन्य दलों पर नहीं देखा गया जिसकी उम्मीद शायद जनता दल यू में नीतीश कुमार और उनके समर्थक कर रहे होंगे। नीतीश कुमार की इस राजनीति का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि अभी तक विपक्ष के किसी बड़े नेता ने स्वयं आकर उनसे विपक्षी एकता पर बातचीत तक नहीं की है। उद्धव ठाकरे के सुपुत्र आदित्य ठाकरे अवश्य वहां गए थे लेकिन उन्होंने पहली मुलाकात तेजस्वी यादव से की और बाद में उनके साथ नीतीश से मिलने गए। के. चंद्रशेखर राव जब पटना पहुंचे तो बीच पत्रकार वार्ता में ही नीतीश खड़े हो गए और चंद्रशेखर राव बार-बार कहते रहे कि बैठिये,बैठिये। बड़ा अजीबोगरीब दृश्य था। स्वयं बिहार की राजनीति में भी इस समय कुछ दूसरे प्रकार के संकेत मिलने लगे हैं। पिछले वर्ष बोचहां विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की उम्मीदवार बुरी तरह पराजित हुई थी। यह  बिहार के सामाजिक समीकरण में कुछ जातियों का राजग के विरुद्ध विद्रोह था क्योंकि उन्हें लगता था कि लंबे समय से हम भाजपा को और उसके कारण नीतीश को समर्थन दे रहे हैं लेकिन राजनीति में उन्हें महत्त्व नहीं मिलता। इसके आधार पर जदयू के नेताओं ने मान लिया कि राज्य में भाजपा विरोधी वातावरण है जबकि सच यह नहीं था। बाद में हुए तीन उपचुनावों परिणाम में से दो भाजपा जीत गई। हाल में कुढनी विधानसभा उपचुनाव का परिणाम सत्तारूढ़ जदयू राजद गठबंधन को चौंकाने वाला था। भाजपा अकेले इस गठबंधन के विरुद्ध चुनाव जीत सकती है इसकी उन्हें कल्पना ही नहीं थी जबकि मतदाताओं ने संदेश दे दिया है। इससे भाजपा का उत्साह बढ़ा है एवं वह सत्तारूढ़ गठबंधन के विरुद्ध आक्रामक है। जहरीली शराब से हुई मौत के मामले में उसका तेवर देखने लायक है। कम से कम इन उप चुनाव परिणामों के आधार पर यह मानना कठिन है कि लोकसभा चुनाव में जदयू राजद आदि की आकांक्षाएं उसी रूप में साकार होंगी जैसी हुए कल्पना कर रहे हैं।

हां, तेलंगाना के उपचुनाव में चंद्रशेखर राव की बीआरआर को अवश्य सफलता मिल रही है लेकिन भाजपा वहां मुख्य विपक्ष के रूप में उभर चुकी है। भाजपा अगले लोकसभा चुनाव में तेलांगना,बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब आदि राज्यों पर ज्यादा फोकस कर रही है। ठाकुर राजा सिंह की गिरफ्तारी और केंद्रीय भाजपा के उस पर चुप्पी से कार्यकर्ताओं में थोड़ी निराशा अवश्य है किंतु चंद्रशेखर राव के विरुद्ध उनका असंतोष खत्म नहीं होगा। दूसरे, नितेश अगर कांग्रेस को साथ लेकर चलना चाहते हैं तो चंद्रशेखर राव इसके विरुद्ध हैं। तीसरी ओर आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा बढी हैं और वह विपक्षी कावायदों से अपने को दूर रखता है। चंद्रशेखर राव द्वारा पंजाब और हरियाणा में अपनी पार्टी की ईकाई गठित करने के कारण भी आप का विरोध है। चन्द्रशेखर राव ने किसान आंदोलन के नेता गुरनाम सिंह चढुनी को हरियाणा किसान मंच का अध्यक्ष घोषित कर संदेश दिया कि वह बाहर के राज्यों में भी उन नेताओं को महत्व देने वाले हैं जो मोदी विरोधी अभियान में किसी न किसी तरह शामिल रहे हैं। किंतु अभी तक उनके ऑफर को स्वीकार करने वाला किसी पार्टी का कोई आसान नेता सामने नहीं आया जिसका जनाधार हो।

कांग्रेस इन मामलों पर अभी खामोश है तथा राहुल गांधी की भारत यात्रा पर फोकस कर रही है। उसे लगता है कि राहुल गांधी की छवि निखारने के बाद वे भाजपा और नरेंद्र मोदी विरोध के सबसे बड़े चेहरा होंगे। राहुल गांधी अपनी यात्रा में कह भी रहे हैं कि हम सीधे भाजपा और मोदी सरकार से लोहा ले रहे हैं। अभी तक तमिलनाडु में डीएमके तथा महाराष्ट्र में उनके साथी राकांपा और उद्धव के शिवसेना को छोड़कर किसी दल ने भारत जोड़ो यात्रा में सक्रिय सहभागिता नहीं दिखाई है। राकांपा और उद्धव शिवसेना ने भी अभी तक लोकसभा चुनाव की दृष्टि से किसी के नेतृत्व मोर्चे के संदर्भ में कोई बात नहीं की है। शरद पवार ने कुछ महीने पूर्व अवश्य कहा था कि वे किसी मोर्चे का नेता नहीं बनेंगे। ममता बनर्जी की स्वयं महत्वाकांक्षायें हैं। हां, अब उनका पूर्व का आक्रामक तेवर गायब है। इसलिए उनकी भावी राजनीति का अनुमान लगाना थोड़ा कठिन हो गया है।

इस तरह देखा जाए तो नीतीश कुमार और चंद्रशेखर राव की अनवरत कोशिशों के बावजूद मोदी विरोधी विपक्षी एकता के राष्ट्रीय स्तर पर साकार प्रतिध्वनि हमें सुनाई नहीं पड़ रही।

अवधेश कुमार, ई- 30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -1100 92, मोबाइल 98110 27208

सोमवार, 9 जनवरी 2023

गुरुवार, 5 जनवरी 2023

चुनौतियों से भरा होगा वर्ष 2023

अवधेश कुमार 

हर नया वर्ष पुराने वर्ष का ही विस्तार होता है । ईसा संवत 2023 भी इसका अपवाद नहीं है। वर्ष 2022  के आरंभ और अंत तक घटी घटनाएं तथा अनेक घटनाओं की तैयार होती आधारभूमि से ही 2023 का ताना-बाना खड़ा होगा। इस वर्ष का सूर्योदय ऐसे समय हुआ जब पूरी दुनिया में कोरोना फिर भय पैदा कर रहा है। पिछले तीन वर्षों में कोरोना ने पूरी दुनिया को हलकान किया है। इसका प्रकोप कैसा होगा, कितना होगा, होगा कि नहीं होगा यह सब भविष्य के गर्त में है लेकिन हमारे पास सुरक्षा के हरसंभव उपाय करने तथा आक्रमण से बचाव की तैयारी के अलावा कोई चारा नहीं है। कोरोना केवल एक बीमारी नहीं है। यह अपने साथ आर्थिक- सामाजिक- सांस्कृतिक समस्याएं लेकर आता है। निश्चित रूप से आम लोग ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि फिर कोरोना की त्रासदी हमारे देश में न आए। पिछली लहर को आधार बनाकर गलत आंकड़े, गलत तथ्य प्रस्तुत करने के साथ यह भय भी पैदा किया जा रहा है कि अस्पतालों में व्यवस्थाएं आने वाले खतरों के समक्ष नाकाफी हैं। अगर कोरोना का रूप विकराल हुआ तो पहलै की तरह दुनिया भर में भारत को एक विफल देश के रूप में प्रस्तुत किए जाने का सामना करने को तैयार रहिए।

इस वर्ष अग्निवीर योजना को लेकर देश के कई भागों में हिंसा हुई। वाराणसी ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के न्यायालयी आदेश के विरुद्ध हिंसा और और दंगे का दृश्य भी सामने रहा। 2023 में भी हमें इसके विस्तार के लिए तैयार रहना होगा। साबित हो गया कि इनके पीछे ऐसे संगठनों की भूमिका है जो देश को हिंसा और अराजकता में झोंकने के लिए सक्रिय है। न्यायालय ने मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद में भी सर्वे का आदेश दे दिया है। इस वर्ष ज्ञानवापी और मथुरा श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद में संभव है कोई फैसला भी आए। फैसला नहीं भी आए तो सुनवाई और न्यायालयों की टिप्पणियों तथा वादी - प्रतिवादी पक्षों की गतिविधियों से माहौल गर्म रहेगा। भारत विरोधी तथा देश के अंदर सक्रिय जेहादी आतंकवादी कट्टरपंथी शक्तियां इसका लाभ उठाकर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश करेंगी। नूपुर शर्मा मामले में सिर तन से जुदा करने के लगते नारे तथा उसके आधार पर उदयपुर से अमरावती तक हुई सिर तन से जुदा की घटनाओं के आरोप पत्र में है कि हत्यारे और उनको सहयोग करने वाले समूह कट्टरपंथी समूहों से जुड़े थे और उनका मानस बदला जा चुका था। उदयपुर के हत्यारे पाकिस्तान स्थित दावत-ए-इस्लामी संगठन से जुड़े थे तो अमरावती के तब्लीगी जमात से।

इस तरह की मानसिकता इन गिरफ्तार हुए कुछ ही लोगों तक सीमित नहीं होगी। इसका विस्तार हुआ होगा और ज्यादा मजहबी कट्टरपंथी हिंसक मॉड्यूल तैयार हुए होंगे। वे दूसरे बहाने कुछ बड़ी घटनाएं करने की कोशिश करेंगे। जम्मू कश्मीर में साल के अंत में हमने देखा कि पाकिस्तान से प्रवेश कर गए चार आतंकवादी भारी हथियार लेकर बड़े हमले करने जा रहे थे। 4 घंटे से ज्यादा मुठभेड़ के बाद उन पर काबू पाया जा सका। सरकार जम्मू कश्मीर में चुनाव आयोजित कराने की तैयारी कर रही है, इसलिए ये शक्तियां वहां ज्यादा आक्रामक होकर हिंसा का षड्यंत्र रचेंगी।

जब भी भारत जैसा देश अपनी समस्त संभावनाओं को पहचान कर विश्व की पहली पंक्ति के देशों के समक्ष होने की कोशिश करता है तो उसे बाहरी एवं आंतरिक अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत कई वर्षों से इसी दौर से गुजर रहा है। जाहिर है, 2023 इससे बिल्कुल अलग नहीं हो सकता। चीन ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में सैनिक घुसपैठ करने की कोशिश ही इसलिए की ताकि भारत को दबाव में रखा जाए। जून, 2020 में गलवान में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ करने का दुस्साहस किया था और उसके परिणामस्वरूप कोरोना प्रकोप से जूझते हुए भी भारत को सीमा सुरक्षा की दृष्टि से हर वह कदम उठाना पड़ा था जो कोई देश आसन्न युद्ध को देखते हुए उठाता है। चीन के कारण भारत को भारी खर्च उठाते हुए ऐसी स्थिति में लंबे समय तक रहना पड़ेगा। रूस यूक्रेन युद्ध के कारण विश्व में तेल के दाम और खाद्यान्नों की वैश्विक समस्या भारत को भी प्रभावित कर रही है। 2022 में प्रमुख देशों ने भारत एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसा व्यक्तित्व मान लिया जो व्लादिमीर पुतिन से बात कर युद्ध रुकवाने में भूमिका निभा सकते हैं। 

भारत व्यापक हितों का ध्यान रखते हुए युद्ध में कोई पक्ष बनने से स्वयं को बचाया  है। इस कारण अमेरिका और यूरोप सहित नाटो के देश नाखुश भी हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इनको सही जवाब दिया और कहा कि जब चीन हमारी सीमाओं पर अतिक्रमण कर रहा था, तो आप सुझाव दे रहे थे कि उनके साथ व्यापार बढ़ाएं। 2023 में भारत की विदेश नीति इसी तरह प्रखर रहेगी जिनकी चुनौतियां भी होंगी। संयुक्त राष्ट्रसंघ तनाव को दूर करने में पहले की ही भांति लाचार साबित हुआ है। भारत की नीति 2022 में भी संयुक्त राष्ट्र को महत्त्व देने और उसके सानिध्य में तनाव को सुलझाने की रही। इसमें सफलता नहीं मिली। चीन द्वारा ताइवान की सैनिक घेरेबंदी भी भारत की चिंता का कारण है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के विरुद्ध किसी तरह की कार्रवाई की तो भारत के लिए निरपेक्ष रहना कठिन होगा। जी 20 का अध्यक्ष होने के कारण भारत मेजबानी की तैयारी में 2022 से ही लग गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम ने जी-20 के लिए नया थीम दिया है और उसके अनुरूप प्रमुख देशों की बैठक में विश्व को दिशा देने की कोशिश होगी।

वर्तमान भारत की प्रमुख चुनौती विदेश एवं रक्षा नीति पर भी राजनीतिक एकता का न होना है। जिस तरह चीन के मुद्दे पर कांग्रेस सहित विपक्ष ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की उसकी प्रतिध्वनि इस वर्ष भी गुंजित होती रहेगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जैसे दो बड़े नेता मोदी विरोधी राष्ट्रव्यापी गठबन्धन की कवायद कर रहे हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा उत्तर प्रदेश और  पंजाब से जम्मू कश्मीर तक जाएगी। राजस्थान में प्रवेश करने के साथ भारत जोड़ो यात्रा पर भाजपा ने जो स्टैंड लिया है उसको आधार बनाएं तो कह सकते हैं कि जम्मू कश्मीर जाते-जाते भी विवाद बना रहेगा।  यात्रा में सम्मिलित भाजपा, संघ और मोदी विरोधी एनजीओ सहित अन्य समूहों ने आपसी एकता बनाने की कोशिश की है। संभव है सरकार के विरुद्ध कोई बड़ा आंदोलन और संघर्ष आरंभ करने की कोशिश हो। शाहीनबाग से लेकर कृषि कानून विरोधी आंदोलनों को आधार बनाएं तो यह केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ सकती है। कृषि कानून विरोधी आंदोलन का लाभ उठाकर विदेश में बैठी खालिस्तान समर्थक शक्तियों ने किस ढंग से भारत को बदनाम करने और पंजाब में नए सिरे से विरोध पैदा करने की कोशिश की यह सामने है। पंजाब में 2022 में खालिस्तान समर्थक जुलूस निकले, पूरे वर्ष हथियारों के जखीरे और आतंकवादी पकड़े गए हैं , कुछ विस्फोट भी हुए हैं। पंजाब 2023 में एक बड़ी चुनौती के रूप में उपस्थित रहेगा।

2024 लोकसभा चुनाव की दृष्टि से 2023 महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों का वर्ष है।   दिल्ली एमसीडी में विजय से आम आदमी पार्टी का उत्साह बढ़ा है। गुजरात में भी उसने कांग्रेस के वोट में अच्छी सेंध लगाई है। इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों मे शायद कर्नाटक में वह हाथ आजमाये। पंजाब से वह कांग्रेस को सत्ताच्युत कर चुकी है।  कांग्रेस के लिए आम आदमी पार्टी 2023 में भी राजनीतिक चुनौती बनी रहेगी। कांग्रेस के लिए भाजपा से ज्यादा विपक्षी दल ही चुनौती हैं। त्रिपुरा चुनाव में अगर तृणमूल कांग्रेस ने ताल ठोंका तो कांग्रेस के लिए समस्याएं खड़ी होंगी। भाजपा एवं कांग्रेस के लिए कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश त्रिपुरा आदि के चुनाव काफी महत्वपूर्ण है। त्रिपुरा वाम मोर्चा विशेषकर माकपा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें सरकारों के लिए बड़ी चुनौती विकास की उचित और कठोर नीति को बनाए रखना होगा। चुनावों के कारण सरकारें लोकप्रियतावादी नीतियों की ओर बढ़ती हैं और इससे वास्तविक विकास एवं अन्य आवश्यक कार्य हाशिये में चले जाते हैं। हिमाचल चुनाव में कांग्रेस ने पुरानी पेंशन बहाली का वादा किया था जिसका भाजपा ने अलोकप्रियता का जोखिम उठाते हुए भी विरोध किया। उम्मीद करनी चाहिए कि केंद्र और भाजपा की प्रदेश सरकारें तथा दूसरी पार्टियों की सरकारें देश की अर्थव्यवस्था को जोखिम पहुंचाने वाले कदम नहीं उठाएगी।

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