मंगलवार, 15 नवंबर 2022

शमां एजुकेशनल एंड पॉलिटेक्निक सोसाइटी के तत्वाधान में मुफ्त आंखों की जांच और मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप का आयोजन हुआ


पूर्वी दिल्ली। उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद क्षेत्र में गली नंबर 39/4 अबरार सैफी के निवास स्थान पर शमां एजुकेशनल एंड पॉलीटिकल सोसायटी, जाफराबाद रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से शशिकांत आइस एंड लेजर सेंटर के साथ भागीदारी करके  मुफ्त निशुल्क आंखों की जांच व मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए शिविर का आयोजन किया गया ।संस्था के महासचिव डॉक्टर के अनुसार आज इस कैंप में काफी संख्या में आंखों के मरीजों का चेकअप किया गया चश्मे का नंबर दिया गया दवाइयां लिखकर दी गई और साथ ही जो मोतियाबिंद के मरीज थे उनके ऑपरेशन का रजिस्ट्रेशन किया गया , उन्होने ने बताया कि इस प्रकार के कैंप हम वर्षों से समय-समय पर लगा रहे हैं स्वास्थ्य,  बाल व महिला स्वास्थ्य कैम्प ,हड्डियों हेपिटाइटिस वैक्सीन, COVID 19 टीकाकरण कैम्प,उसी कड़ी में आज यह कैंप लगाया गया और इसके माध्यम से आम नागरिकों को अपने आंखों का ख्याल रखने के हिदायतें दी गई जैसे मोबाइ, लैपटॉप,कंप्यूटर, टीवी आदि का कम से कम उपयोग किया जाए साथ ही साथ 7 घंटे की गहरी नींद ली जाए, रात को जल्दी सोया जाए सुबह प्रातः जल्दी उठा जाए। दिल्ली में फैले हुए प्रदूषण से बचने के लिए जब बाहर निकले तो  अपनी आंखों की सुरक्षा जरूर रखें  ठंडे पानी से दिन में तीन बार आंखें जरूर धोएं और गैजेट उपयोग करते हुए किरणों से बचाने वाले चश्मे का इस्तेमाल जरूर करें ।जांच कर रहे आर्यन बाजपाई ने जानकारी देते हुए बताया कि आज शुगर बीपी के रोगियों की आंखों को देखा गया तो काफी समस्याएं पाई गई साथ ही बुजुर्ग लोगों को मोतियाबिंद रोगियों को  उन्हें मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए आज पंजीकृत किया गया और आने वाले सप्ताह में उन सब के मोतियाबिंद के ऑपरेशन मुफ्त किए जाएंगे। कैम्प  इंचार्ज भोला प्रसाद ने बताया कि आज कैंप  में 55 रोगियों को देखा गया और 15 मोतियाबिंद के रोगियों का पंजीकरण किया गया और जो  बड़ी समस्या वाले योगियों थे उन्हें हमने हॉस्पिटल में रेफर किया इस कैंप के माध्यम से वहां उनको मुफ्त इलाज मिलेगा और साथ ही साथ जो सुविधाएं हैं प्राप्त कर पाएंगे। कैंप सफल बनाने में अबरार सैफी, लियाकत सैफी, शाहनवाज सैफी, साबिर, नौशाद खान,शीबा, फातमा,साहिल, सैफ, यूसुफ बेग आदि ने रोगियों की सेवा की।

सोमवार, 14 नवंबर 2022

शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

पंजाब में हिंदू नेता की हत्या आतंकवादी कार्रवाई

अवधेश कुमार

पंजाब के अमृतसर में हिंदू नेता की दिनदहाड़े सुरक्षाकर्मियों और उनके समर्थकों के समक्ष हत्या से पूरे देश में छो पैदा हुआ है। हिंदू नेता व शिवसेना टकसाली के अध्यक्ष सुधीर सुरी के शरीर में दनादन गोलियां उस समय उतारी गई जब वे मजीठा रोड के कश्मीर एवेन्यू स्थित गोपाल मंदिर के बाहर खंडित मूर्तियां पाए जाने के विरोध में धरना दे रहे थे। स्वाभाविक ही धरना में उनके साथ और भी लोग थे। सुधीर सूरी को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। उनके सुरक्षा में 15 सुरक्षाकर्मी तथा एक पायलट जिप्सी था। इनमें से 12 उनके साथ से। धरनास्थल पर भी पुलिसकर्मी तैनात थे क्योंकि वहां की सुरक्षा की व्यवस्था स्थानीय पुलिस की थी। इन सबके बावजूद हत्यारा संदीप सिंह सन्नी कार से  पहुंच कर पिस्टल से 5 गोलियां चलाने में सफल हो गया। निस्संदेह,  यह आतंकवादी घटना है । वह गिरफ्तार हो चुका है लेकिन यह  पुलिस के लिए कीर्तिमान नहीं है। वह सरेआम सुरक्षाकर्मियों और लोगों के सामने गोली मारने आया था तो उसे अहसास रहा होगा कि मारा भी जा सकता है और अगर नहीं मारा गया तो गिरफ्तार होना ही है। जो व्यक्ति मरने या गिरफ्तार होने की मानसिकता से हत्या करने आया हो उसकी गिरफ्तारी पुलिस की सफलता नहीं मानी जा सकती। आतंकवादी इसी मानसिकता में वारदात करते हैं। अलगाववादी तत्व पंजाब में भय का ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं जिससे कोई खालिस्तान के विचारों का विरोध करने का साहस न करे।   पंजाब में भगवंत मान सरकार आने के बाद सरेआम खालिस्तान समर्थकों ने सड़कों पर खालिस्तान के पक्ष में नारे लगाए हैं और उनके जुलूसों को पुलिस की सुरक्षा मिली है। सुधीर सूरी के विचारों से असहमति रखना अलग बात है लेकिन इसके लिए किसी की हत्या हो जाए और वह भी जानते हुए कि उनकी जान को खतरा है तो यह पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह है। सुधीर सूरी ने खालिस्तान समर्थकों का विरोध करते हुए 6 वर्ष पहले यह बोल दिया था कि अगर वे एक हिंदू को मारेंगे तो वह उनके 10 गिराएंगे। वे गिरफ्तार भी हुए थे और जमानत पर छूट कर बाहर निकले। हत्यारा स्थानीय दुकानदार है। जरा सोचिए ,पुलिस के सामने गोली चलाने का साहस करना पंजाब की कानून और व्यवस्था को लेकर कितना बड़ा प्रमाण पत्र है? यह इस बात का भी प्रमाण है कि खालिस्तानी तत्वों ने किस तरह दुस्साहस वाले आतंकवादी पैदा कर दिए हैं। संदीप की कार पर खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की तस्वीर लगी हुई है।  अमृतपाल जरनैल सिंह भिंडरावाले और खालिस्तान समर्थक है। कार से एक सूची बरामद हुई है जिसमें कुछ नाम लिखे हैं। कुछ कागजों पर हिंदू नेताओं, पादरियों की तस्वीरें भी है। इनमें से कुछ हिंदू नेताओं की तस्वीरों पर क्रॉस लगा था।  मिली तस्वीरों में टीवी कलाकार भारती सिंह, मनीषा गुलाटी,  मनजिंदर सिंह बिट्टा, राम रहीम और कुछ बंदी सिंहों की तस्वीरें हैं। कुल मिलाकर संदीप के आतंकवादी होने के ये पुख्ता प्रमाण हैं।

सुधीर सूरी के जीवन पर खतरे को लेकर पंजाब सुरक्षा के शीर्ष स्तर पर शायद ही किसी को संदेह रहा हो।  वे आक्रामक होकर खालिस्तानी आतंकियों आईएसआई आदि के खिलाफ बोलते थे। उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलती रहती थी। पिछले ही महीने दिवाली से पहले अमृतसर के कटरा अहलूवालिया में पंजाब एवं दिल्ली पुलिस ने कनाडा के आतंकवादी लखबीर सिंह लांडा के चार सहयोगियों को एक होटल से गिरफ्तार किया था। इन चारों ने बताया था कि उनके निशाने पर सुधीर सूरी थे। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार भी पकड़े गए थे। हाल में केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की ओर से भी पंजाब पुलिस को उनकी हत्या की आशंका संबंधी अलर्ट भेजा गया था। उसके बाद उनकी सुरक्षा की ज्यादा चिंता की जानी चाहिए थी। पंजाब पुलिस को इस बात का उत्तर देना होगा कि आखिर उसने इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किया था? यह प्रश्न इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में पंजाब के अलग-अलग जगहों से खालिस्तानी आतंकवादियों की धरपकड़ हुई है तथा हथियार भी बरामद हुए हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से लेकर विदेशी एजेंसियों तक ने आतंकवादियों द्वारा देश के अंदर और बाहर से हिंसा की रची जा रही साजिशों के बारे में भी संकेत दिया था।

लंडा पाकिस्तान में आतंकवादी हरमिंदर सिंह उर्फ रिंदा के साथ मिलकर आतंकवादी गतिविधियां चला रहा है। लांडा ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली है। अपने फेसबुक अकाउंट लंडा हरिके से पोस्ट कर कहा है कि सिख धर्म या किसी भी अन्य धर्म के बारे में बुरा बोलते हैं वो सभी तैयार रहें। सभी की बारी आएगी। सुरक्षा लेकर यह न समझें कि बच जाएंगे। अभी तो शुरुआत हुई है, हक लेना बाकी है।  यानी जिसके द्वारा हत्या की साजिश रचने की सूचना है वह हत्या करवा देता है और दावा भी करता है। पंजाब में बढ़ते आतंकवादी खतरे और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता का इससे बड़ा समान कुछ नहीं हो सकता। मोहाली में पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग के मुख्यालय पर हुए हमले में भी लखबीर सिंह का नाम आया था। कुछ ही दिन पहले तरनतारन में कपड़ा व्यापारी की हत्या हुई थी उसमें भी उसी का नाम सामने आया। वह तरनतारन का ही रहने वाला था जो कनाडा में बस गया है। पाकिस्तान से खालिस्तानी आतंकवादी गोपाल सिंह चावला ने भी वीडियो जारी किया है। इसमें उसने सुधीर सूरी के हत्यारे को शाबाशी देते हुए कहा है कि जिस सिख युवक ने हत्या की है उसके लिए हमारी जान भी कुर्बान है। वह भी कह रहा है कि इसी तरह पंजाब के कई हिंदू नेता निशाने पर हैं और उनका भी नंबर आने वाला है। गोपाल खुलकर कई हिंदू व सिख नेताओं का नाम ले रहा है। नवंबर 2018 में अमृतसर में हुए ग्रेनेड हमले में जांच के दौरान गोपाल सिंह चावला की संलिप्तता सामने आई थी। वह पाकिस्तान में बैठकर आईएसआई के साथ पंजाब में खालिस्तानी आतंकवादी गतिविधियां बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। चावला इस तरह का वीडियो जारी करता रहा है।

पंजाब में फिर अलगाववादी खालिस्तानी विद्रोह को तेज करने तथा हिंसा फैलाने की साजिशों के प्रमाण लगातार मिलते रहे हैं। 2021 में केवल सीमा सुरक्षा बल ने 3322 गोला-बारूद और 485 किलोग्राम हेरोइन सहित 34 हथियार बरामद किए थे। जनवरी 2021 में पंजाब पुलिस ने एक अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर 3.79 किलोग्राम आरडीएक्स और 5 किलोग्राम आईईडी बरामद किया था। इसके अलावा गिराए गए बरामद किए गए हथियारों की कुल संख्या के बारे में आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। अमेरिका स्थित सिख फॉर जस्टिस ने जनमत संग्रह की आवाज उठाई और उसे भी समर्थन देने वाले निकले। यह बात अलग है कि इसमें वे सफल नहीं हुए। कनाडा में वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन का केंद्र है जिसकी कई देशों में इकाइयां है। ब्रिटेन में नेशनल सिख यूथ फेडरेशन सक्रिय है। अमेरिका में ही खालिस्तान परिषद है। हालांकि घोषित आतंकवादी संगठनों का समूह अब पाकिस्तान में केंद्रित है। इनमें बब्बर खालसा इंटरनेशनल, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स, खालिस्तान कमांडो फोर्स और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स मुख्य है। इनके सदस्य दुनिया के दूसरे देशों में होंगे लेकिन पंजाब में भी कुछ हैं।

जाहिर है ,सुधीर सूरी की हत्या ने नए सिरे से खालिस्तानी आतंकवाद के सक्रिय होने का प्रमाण दिया है। यह भी कोई छिपी बात नहीं है कि पंजाब में हिंदुओं और सिखों के बीच संघर्ष पैदा करने की साजिशें हो रही हैं। पहले भी संघ सहित कई हिंदू नेताओं की हत्यायें हुईं है। आगे कई निशाने पर हैं। चिंता की बात है कि वर्तमान आम आदमी पार्टी की सरकार खतरे को उस रुप में नहीं ले रही। खालिस्तानी तत्व इसका लाभ उठा रहे हैं। न केवल हिंदू नेताओं बल्कि पूरे पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा कर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि आतंकवाद, हिंसा एवं अस्थिरता में पंजाब को झोंकने का षड्यंत्र करने वाली  शक्तियां सफल न हो पाए। पंजाब की बिगड़ती स्थिति और हत्या पर गुस्सा स्वभाविक है। खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई एवं सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने का दबाव निश्चित रूप से बनाया जाना चाहिए लेकिन इसे किसी तरह तनाव और हिंसा का कारण नहीं बनने देना होगा। भारत की एकता अखंडता सर्वोच्च प्राथमिकता है और पंजाब सीमा पर होने के कारण हमारा प्रहरी है। दुश्मन किसी तरह इसका लाभ न उठा पाए यह ध्यान रखा जाना जरूरी है।

अवधेश कुमार, ई-30,गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092,मोबाइल- 98910 27208

सोमवार, 7 नवंबर 2022

हर जरूरतमंद के साथ खड़े रहते हैं नियाज अहमद

-किसी को भी अपने यहां से खाली नहीं जाने देते नियाज अहमद

-हर किसी का साथ देने के लिए हमेशा तैयार रहते है नियाज अहमद

मो. रियाज
चुनावी मौसम में हर कोई राजनीति के बुखार में तपा जा रहा है l जिसे देखो चुनावी मैदान में ताल ठोक रहा है मगर कुछ ऐसे समाजसेवी भी हैं जो जनता के कहने पर राजनीति में आ रहे हैं। ऐसा ही एक नाम है नियाज़ अहमद मंसूरी उर्फ पप्पू मंसूरी। अन्ना आंदोलन की आग में तपे नियाज़ अहमद मंसूरी उर्फ पप्पू मंसूरी गांधी नगर विधानसभा के शास्त्री पार्क वार्ड नंबर 213 में रहते हैं। यह शास्त्री पार्क वार्ड नंबर 213 से जनता की आवाज़ और निर्देश पर आगामी दिल्ली नगर निगम चुनाव 2022 में आम आदमी पार्टी से टिकट लेकर भारी मतों से चुनाव जीत कर दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल की तरह समाज सेवा और विकास कार्य करने को व्याकुल है। 
नियाज़ अहमद ने कोरोना काल में ज़रूरतमन्द लोगों को एसडीएम की अनुमति लेकर समाज से अनाज राशन इकट्ठाकर उसे पकाकर शास्त्री पार्क समुदाय भवन में लगातार 78 दिन तक बांटा। नगर निगम के अधिकारियों से मधुर संबंध बनाकर वार्ड में साफ़ सफाई दुरुस्त करवाने की व्यवस्था करवाना और समय पर कूड़ा उठवाना इनकी दिनचर्या रही है। नियाज़ अहमद वार्ड में समय समय पर जागरूकता के कार्यक्रम करते रहते हैं जैसे जल बोर्ड के कैम्प, बीएसईएस के कैम्प, हेल्थ केम्प, वोटर आईडी कैम्प, आधार कैम्प, एकाउंट खुलवाने के कैम्प आदि। क्षेत्र में बढ़ते क्राइम के निवारण के लिए पुलिस अधिकारियों  के समक्ष अपनी बात रख पीसीआर वैन से वार्ड में गश्त बढ़वाया।
यह वार्ड की स्ट्रीट लाइट को बिना किसी देरी के ठीक  करवा देते हैं, इन्होंने सरकारी स्कूल में बच्चों के अधिक से अधिक दाखिले करवाना, वार्ड के सरकारी स्कूल सीलमपुर की स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) में छात्रों व पेरेंट्स की शिकायत को हमेशा प्रमुखता से उठाया और उसका निवारण करवाया। वार्ड के फॉरेस्ट एरिये की चार दी री करवाई।  ऐसे ही कार्यों के लिए समाज मे अपनी अलग पहचान रखते हैं।


शुक्रवार, 4 नवंबर 2022

मोरबी त्रासदी से सबक ले देश

अवधेश कुमार

गुजरात के मोरबी पुल की त्रासदी ने पूरे देश को हिला दिया है। इस घटना की कल्पना से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मच्छु नदी पर बनाया सस्पेंशन ब्रिज यानी झूलने वाला  पुल पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा कारण था। लेकिन कौन जानता था वहां पहुंचे लोगों में बड़ी संख्या के लिए अंतिम दिन होगा। पुल टूटा और नीचे नदी में 15 फीट के आसपास पानी था, जिसमें लोग  डूबते चले गए। किसी भी त्रासदी में दो सौ लोगों का अंत हो जाना सामान्य घटना नहीं होती। गुजरात जैसे प्रदेश में जहां बचाव और राहत की मजबूत टीमें है वहां इतनी संख्या में लोगों की मृत्यु बताती है की घटना कितनी विकराल थी। वहां एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ तैराकों, दमकलों व वायु सेना के कमांडो ,रेस्क्यू नावेंआदि सब कुछ होने के बावजूद दूसरे दिन भी लापता लोगों का पता नहीं लग सका और इस कारण मृतकों की संख्या बताना कठिन हो गया। रात्रि में बचाव ऑपरेशन करना लगभग मुश्किल था। राजकोट के भाजपा सांसद मोहन कुंदरिया के परिवार के 12 लोगों की जान इसमें चली गई । पता नहीं और ऐसे कितने परिवार होंगे जिनके लिए यह संपूर्ण जीवन भर के लिए त्रासदी साबित होगी।

 ध्यान रखिए कि यह प्राकृतिक आपदा नहीं है। न बाढ आया न तूफान और निरपराध लोग जान गंवा बैठे। पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी वाले ओरेवा ग्रूप पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो गया है। जांच के लिए समिति भी बना दी गई है। कहा जा सकता है कि अंतिम निष्कर्ष के लिए समिति की रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जानी चाहिए। निस्संदेह, इस समय आप किसी भी कारण को खारिज नहीं कर सकते। देश विरोधी ताकतें जिस तरह हिंसा और दुर्घटना पैदा करने के लिए षड्यंत्र कर रहे हैं उसमें चुनाव वाले गुजरात जैसे संवेदनशील प्रदेश में शंका की उंगली उठना बिलकुल स्वाभाविक है। आखिर ये शक्तियां भीड़भाड़ वाले जगहों पर अपने तरीके से ऐसी कोशिश करती हैं जिनमें ज्यादा से ज्यादा लोग हताहत हो। हालांकि अभी तक ऐसा कोई पहलू नहीं दिखा जिससे षड्यंत्र नजर आए। अभी तक की जानकारी इतनी है कि फुल कमजोर था। दुर्घटना के पहले के वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग उसके केबल के कमजोर होने का मजाक उड़ा रहे हैं। कुछ उसको हाथ पैरों से मार रहे हैं। कोई कह रहा है कि देखो यह कितना कमजोर है जो कभी भी टूट सकता है। करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना पुल कमजोर और जोखिम भरा था तभी मरम्मत के लिए 6 महीना पहले बंद कर दिया गया था। ओरोवो ग्रुप ने इसकी मरम्मत की तथा 26 अक्टूबर को आम लोगों के लिए खोला गया। यानी 4 दिन पहले खुला और पांचवें दिन 30 अक्टूबर को शाम को पुल टूट गया। यह कैसे संभव है कि एक मान्य कंपनी पुल की मरम्मत में इतनी कोताही बरते कि वह 4 दिन भी न चल पाए? वहां के नगर निगम का कहना है कि उस पुल की क्षमता 100 लोगों की है लेकिन 500 से 1000 के आसपास लोग उस पर इकट्ठे थे। 765 फीट लंबा यह पुल केवल 4.5 फीट चौड़ा है। जाहिर है, यह जिस काल में बनाया गया उस समय के लिए उपयुक्त हो सकता है। बावजूद इतने लंबे पुल के लिए केवल 100 लोगों की क्षमता और वह भी आज की स्थिति में जब तबसे जनसंख्या वृद्धि कई गुनी हो चुकी है बताता है कि संख्या की दृष्टि से वह जो कौन था। आम हालांकि लोगों का कहना है कि बंद होने के पहले भी पुल पर काफी संख्या में लोग रहते थे ,बहुत दिनों के बाद पुल खुला था इस कारण भी संख्या ज्यादा थी। साथ ही छठ पूजा होने के कारण भी लोग चले आए थे। तो पहला कारण यही नजर आता है कि संख्या से ज्यादा लोगों के खड़े होने के कारण फूल वजन नहीं सह सका और टूट गया। तो निर्धारित संख्या से ज्यादा लोग आए क्यों? चश्मदीद बता रहे हैं कि कुछ लोग को हिला रहे थे और उसकी शिकायत कर्मचारियों से की गई लेकिन वे टिकट काटने में व्यस्त रहे। वास्तव में अगर कारण वही है जो अभी दिख रहा है तो कहा जा सकता है कि निर्धारित संख्या तक ही टिकट काटा जाता तथा समय सीमा तय कर लोगों को बाहर निकाल कर फिर नए लोगों को प्रवेश कराया जाता तो यह हादसा नहीं होता। इतने पुराने पुल पर तय संख्या से ज्यादा टिकट काटकर लोगों को जाने दिया गया। यह तो दुर्घटना को निमंत्रण देने जैसा व्यवहार था।

हादसे के बाद का वीडियो दिखा रहा है कि पुल टूटने के बाद लोग उस भाग में भी बचने के लिए छटपटा रहे हैं जो पानी में जा रहा है। लोग पुल पर फंसे हुए हैं लेकिन उनके तात्कालिक बचाव के लिए कोई उपाय नहीं है। जाहिर है , इस तरह का कोई हादसा हो सकता है इसकी कल्पना न किए जाने के कारण तात्कालिक बचाव और राहत के पूर्वोपाय नहीं किए गए थे। नगर निगम और ओरोवा कंपनी दोनों को इसका जवाब देना चाहिए। नगर निगम का तर्क है कि फिटनेस सर्टिफिकेट लिए बिना ही रुको कंपनी ने चालू कर दिया। यह हैरत की बात है कि नगर निगम की सहमति के बगैर केवल  कंपनी ने पुल को खोल दिया होगा। स्पष्ट है कि मोरबी के अधिकारी सच नहीं बोल रहे। मेंटेनेंस करने वाली कंपनी को यह अधिकार नहीं होता कि वह जब चाहे पुल बंद कर दे और जब चाहे खोल दे। कंपनी प्रशासन को रिपोर्ट दे सकती है और फैसला प्रशासन का ही होता है। अगर इसके पीछे कोई षड्यंत्र नहीं है तो कंपनी के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन व नगर निगम को भी इसके लिए उत्तरदायी मानना होगा। आखिर इतने लोगों की जान चली जाए, सैकड़ों परिवार तबाह हो जाएं, अनेक बच्चे अनाथ तथा महिलाएं विधवा व पुरुष विधुर हो जाएं और उसके लिए केवल मेंटेनेंस करने वाली कंपनी को जिम्मेवार मानना एकपक्षीय फैसला होगा।

इस घटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में भी देखने की आवश्यकता है। यह पुल 20 फरवरी 1879 को जनता के लिए खोला गया था। तब मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेंपल ने इसका उद्घाटन किया था। यह सामान यातायात का मुख्य फूल नहीं था। लेकिन हमारे देश में सामान्य यातायात वाले प्राचीन पुलों की संख्या बहुत ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि किसी की मरम्मत नहीं होती। समय-समय पर अनेक पुलों की मरम्मत होती रहती हैं। बावजूद आप देखेंगे कि ऐसे पुलों की संख्या हजारों में है जिनको देखने से ही लगता है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हम आप जान जोखिम में डालकर उस पर चलते हैं। गाड़ियां चलती हैं। यही नहीं उसके बाद के और हमारे आपके समय के बने हुए भी हजारों पुलों, फुटओवर ब्रिजों, फ्लाई ओवरों, सब पर नजर दौड़ाई जाए तो अनेक हादसे की स्थिति में जाते हुए दिखेंगे। राजधानी दिल्ली में ऐसे कई फुट ओवरब्रिज हैं, जो कभी भी बड़े हादसे के कारण बन सकते हैं। वास्तव में पुलों, फुटओवरब्रिजों, पैदल पार पथों आदि को लेकर संबंधित विभाग को जितना सतर्क और चुस्त होना चाहिए वह प्रायः नहीं दिखता। जब  बड़ी घटनाएं होती हैं तो हाय तोबा मचता है लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति।कोई उससे सबक लेकर अपने यहां के पुलों की समीक्षा नहीं करता।

जाहिर है, मोरबी त्रासदी पूरे देश के लिए चेतावनी होनी चाहिए। हर श्रेणी के पुलों तथा फ्लाई ओवरों की गहन समीक्षा होनी चाहिए। सभी राज्य इसके लिए आदेश जारी कर एक निश्चित समय सीमा के अंदर समीक्षा रिपोर्ट मंगवाए और उसके अनुसार जहां जैसी मरम्मत या बदलाव की जरूरत हो वो किया जाए। समीक्षा हो तो ऐसी अनेक पहलें निकलेंगे जिन्हें तत्काल बंद करने का ही विकल्प दिखाई देगा। कुछ ऐसे पुल हैं जिन्हें तोड़कर नए सिरे से बनाना होगा। समस्या को टालने से वह और विकराल होता है। जो समस्या सामने है उनका समाधान भविष्य का ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। मोरबी त्रासदी ने हम सबको झकझोरा है लेकिन अगर देश ने इसे सबक नहीं लिया तो ऐसी त्रासदी बार-बार होती रहेंगी। स्वयं मोरबी और राजकोट प्रशासन को आगे यह निर्णय करना होगा कि पुल को रखा जाए या नहीं और नहीं रखा जाए तो इसका विकल्प क्या हो सकता है। 

अवधेश कुमार, ई -30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल- 98910 27208

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