शनिवार, 8 मार्च 2025
प्रो. (डॉ.) पवन कुमार शर्मा ने अध्यक्ष एवं श्री सतीश कुमार ने किया उपाध्यक्ष के पद पर शिक्षा बोर्ड में कार्यग्रहण
कार्यक्रम के 41वें दिन ग्राम इकनौरा में लोगो से मिलकर लखन प्रताप ने की पीडीए चर्चा
इस दौरान उनके द्वारा बताया गया कि समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव के निर्देशानुसार उनके द्वारा ददरौल क्षेत्र की कमान संभालते हुए बाबा साहब का पीडीए पर्चा घर घर पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
इस दौरान मेरे साथ मौजूद रहे सत्येंद्र यादव (जिला उपाध्यक्ष) असलम खान (महानगर उपाध्यक्ष ) शाहजहांपुर समाजवादी पार्टी, नीरज मिश्रा, मुस्तकीम अली (जिला उपाध्यक्ष), आफताब मेंबरम शरूम खां अब्दुल्ला रहीम, साजिद अली, पुत्तन बेग, तैयब खा भाई, इमरान, राजा खां, सलमान अली, शाहरुख खान, अमर कुमार, राजकुमार, रामपाल, रामपाल, लियाकत अली, शरद शर्मा, हैदर खान मौजूद रहे।
शुक्रवार, 7 मार्च 2025
यूक्रेन, यूरोप एवं ट्रंप
यूक्रेन मोर्चे पर अंतिम समाचार यह है कि ब्रिटेन फ्रांस और यूक्रेन ने मिलकर एक युद्धविराम योजना बनाई है जिसे अमेरिका के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टोर्मर की बात मानें तो इस पर लगभग सहमति बन गई है । युद्ध समाप्त करने पर चर्चा के लिए यूरोपीय नेताओं के साथ 2 मार्च को शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस शिखर सम्मेलन में फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, स्पेन, कनाडा, फिनलैंड, स्वीडन, चेक गणराज और रोमानिया के नेता के अलावा तुर्किये के विदेश मंत्री, नाटो महासचिव तथा यूरोपीय आयोग और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष ने भाग लिया। विश्व की दृष्टि से यह यूरोप का संपूर्ण सशक्त शिखर सम्मेलन था। विश्व ने देखा कि किस तरह यूरोपीय नेताओं ने वोलिदिमीर जेलेंस्की की आवभगत की तथा उन्हें महत्व दिया। ओवल ऑफिस यानी अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय से निकलने के बाद जेलेंस्की सीधे ब्रिटेन आए और प्रधानमंत्री स्टोर्मर ने उन्हें गले लगाया और कहा कि उन्हें उनके देश का अटूट समर्थन प्राप्त है तो इसके पीछे तत्काल ट्रंप एवं दुनिया को एक संदेश देने की रणनीति है। वास्तव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस ढंग से यूक्रेन पर अपने तेवर दिखाए और पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रो के साथ उनकी बहस हुई तथा यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलिंस्की को व्हाइट हाउस से बाहर किया गया वह दुनिया में सबसे बड़ी हलचल मचाने वाली घटना बन गई। अमेरिकी इतिहास की यह पहली घटना थी जब व्हाइट हाउस में दो नेताओं के बीच इस तरह बहस हुई, दोनों उंगली उठाते दिखे तथा किसी विदेशी मेहमान को वहां से बाहर निकालना पड़ा। प्रश्न है की अभी आगे होगा क्या?
ऐसा दिख रहा है कि यूरोप के ज्यादातर नेता इस समय जेलेंस्की के साथ है।। हालांकि वर्तमान यूरोपीय नेता अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उथल-पुथल के परिणाम से आशंकित हैं और वे संतुलित आचरण की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने सधे हुए वक्तव्य में कहा कि अब हम इस बात पर सहमत हो गए हैं कि ब्रिटेन, फ्रांस और संभवतः एक या दो अन्य देशों के साथ मिलकर यूक्रेन के साथ लड़ाई रोकने की योजना पर काम किया जाएगा और फिर उस पर अमेरिका के साथ चर्चा करेंगे। स्टार्मर ने कहा कि उन्हें व्लादिमीर पुतिन पर विश्वास नहीं है लेकिन डोनाल्ड ट्रंप पर विश्वास है और वह जब कहते हैं कि उन्हें शांति चाहिए तो हम मांग कर चलते हैं कि वह यही चाहते हैं। इसमें दो मत नहीं कि कोई समझौता स्थाई शांति की गारंटी होनी चाहिए। इसलिए स्टार्मर अगर कह रहे हैं कि हम अस्थाई युद्ध विराम का जोखिम नहीं ले सकते तो सामान्य तौर पर इसे असहमत होना कठिन है।उनका यह कहना कि युद्ध समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं आकर्षित तो करता है किंतु स्वयं इस समय की अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में देश की भूमिका ही इसके मार्ग की बड़ी बाधा है। एक बड़े समूह को डोनाल्ड ट्रंप का व्यवहार अटपटा और एकपक्षीय लग सकता है। धीरे-धीरे विश्व में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है जो मानते हैं कि उनका व्यवहार गलत नहीं है। एक समय यूक्रेन के प्रति विश्व की सहानुभूति थी और यह सच है कि अमेरिका और यूरोप की मदद के कारण पुतिन की युद्ध योजना पर तुषारापात हुआ। यूक्रेन जैसे छोटे देश को घुटनों पर लाना उनके लिए कठिन हो गया। किंतु पूरे काला सागर सहित क्रीमिया के क्षेत्र को देखें तो वहां लंबे समय से यूरोप की भूमिका के कारण ही स्थिति इतनी जटिल है कि उनका स्थाई निपटारा संभव नहीं। सोवियत संघ जिन राज्यों को मिलकर बना उनमें ज्यादातर आज स्वतंत्र हैं , पर उनकी भौगोलिक सीमाएं खासकर समुद्र में और आसपास इतनी स्पष्ट नहीं है।
न भूलिए कि प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय युद्ध विश्व युद्ध के पीछे उसे क्षेत्र की भौगोलिक जटिलताएं और राजनीतिक व्यवहार की बड़ी भूमिका थी। द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बावजूद अमेरिका के समक्ष सोवियत संघ के दूसरी महाशक्ति के रूप में खड़ा होने के कारण थोड़ा संतुलन रहा तथा यूरोप के प्रमुख देशों ने आपस में भौगोलिक जटिलताएं खत्म कीं, राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाई। बावजूद न संपूर्ण यूरोप के लिए और न विश्व के लिए अस्थाई सुरक्षा और शांति सुनिश्चित हुई। सोवियत संघ के विघटन के बाद अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो और उसकी सेना कायम रही। अगर अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाने की ओर कदम आगे नहीं बढ़ते तथा उसे शास्त्रास्त्र नहीं देते तो पुतिन के लिए इस तरह आक्रमण करने का आधार नहीं बनता। इन देशों ने पोलैंड के साथ भी यही किया। शेष विषयों को छोड़ दें तो यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेस्की यह घोषणा कर देते कि वह नाटो का सदस्य नहीं बनेंगे तो भी शायद स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं।
सच यह है कि यूक्रेन रूस युद्ध विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार कर चुका है। नहीं रुका तो दुनिया कई प्रकार के संघर्षों में उलझ जाएगी। कई बार आपको शांति के लिए दबाव और अन्य बाध्यकारी दबावकारी कड़े भी कदम उठाने पड़ते हैं। ऐसा लग रहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए ढी ट्रंप ने इस स्तर कड़ा रुख अपनाया है। अगर ट्रंप तेवर करार नहीं किया होता तथा अपने चरित्र के अनुसार छोड़ना से खरी-खरी नहीं बोलते नहीं होते तो न यूरोपीय देश बैठते और न नए सिरे से विचार होता। जेलेंस्की को भी अमेरिका के महत्व का पता है और उन्होंने कहा है कि वह खनिज पर समझौते के लिए फिर से व्हाइट हाउस जाने को तैयार हैं। लेकिन उन्हें सुरक्षा की गारंटी चाहिए। जेलेंस्की विश्व इतिहास को ठीक से देखें। कोई देश किसी की सुरक्षा की स्थाई गारंटी नहीं दे सकता। इस समय उन्हें गारंटी दी जा सकती है। बस, वे स्वयं को भी बड़ी सैन्य शक्ति बनने या ऐसी अन्य महत्वाकांक्षाओं से अलग रखें। यूरोपीय देशों को भी समझना होगा कि पहले की तरह यूक्रेन की सैन्य और कूटनीतिक मदद जारी रखकर वे कुछ समय तक आर्थिक लाभ पा सकते हैं, रुस और उसे भी दबाव में रह सकता है लेकिन यह विश्व को बड़े संकट में फंसाने वाला भी साबित होगा। ट्रंप के रुख और रणनीति से ऐसा लगता नहीं कि वे आसानी से शांत होंगे। वैसे वर्तमान विश्व में अमेरिका का राष्ट्रपति युद्ध रोकने की बात करते हुए इसी तरह का कड़ा तेवर बनाए रखेगा तभी इसका कोई समाधान निकलेगा। इस दृष्टि से देखें तो ट्रंप का रवैया कम से कम तत्काल विश्व युद्ध रोकने वाला भी दिखेगा।
वर्तमान विश्व में कोई एक देश आदर्शवादी या राष्ट्रीय स्वार्थ से परे होकर व्यवहार करने की स्थिति में है ही नहीं। तो हम अमेरिका से ही इसकी अपेक्षा क्यों रखें? ऐसा नहीं है कि यूरोप को यह बात समझ में नहीं आ रही हों। स्वयं जेलेंस्की नए सिरे से अपनी नीति पर पुनर्विचार नहीं कर रहे हो यह भी नहीं माना जा सकता। कस्टमर का यह वक्तव्य कि हमारे पास यूक्रेन में न्यायपूर्ण और स्थाई शांति सुनिश्चित करने के लिए एक साथ आने का अवसर है जो उनकी संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करगा ट्रंप के रवैया के कारण ही आया है। स्थिति ऐसी है जिसमें कोई अचानक स्वयं को दोषी मानकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं होग। यूरोपीय देशों में तत्काल सबसे ज्यादा सक्रिय ब्रिटेन और फ्रांस को भी अपनी शक्ति की सीमाओं का आभास होगा। अमेरिका के साथ यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था इतनी आबद्ध है कि वह इससे बिल्कुल अलग हटकर एकाएक नई सशक्त सुरक्षा प्रणाली उत्पन्न नहीं कर सकते। ब्रिटेन का तो नाभिकीय ढांचों तक अमेरिका के साथ अविच्छिन्न जुड़ाव है। उनको पूरी तरह अलग कर अमेरिका के विरुद्ध जाना इस समय असंभव लगता है। इसलिए उनके अंदर भी नए सिरे से मंथन चल रहा है। यद्यपि मैक्रो ने ट्रंप की बातों को अपनी दृष्टि से काटा तथा कहा कि वे यूक्रेन को शस्त्र देकर कीमत नहीं ले रहे हैं जैसा वह कह रहे हैं किंतु वह भी एकपक्षीय बात ही थी। ट्रंप के नीति का एक पहलू शायद यही है कि एक बार सभी के समक्ष इतना कर आक्रामक व्यवहार करो तथा ऐसे तेवर दिखाओ जिसकी उन्हें कल्पना नहीं हो ताकि सभी दबाव में आकर युद्ध रोकने के लिए तैयार हो। ट्रंप अड़े रहते हैं तो भविष्य में एक सहमतिकारक समझौता संभव है। कम से कम तत्काल विश्व के हित में होगा और आगे इस पर शांति की कोशिश हो सकती है।
अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल-9811027208
सुव्यवस्थित संचालित हुई सीनियर सैकेण्डरी एवं डी.एल.एड. की परीक्षाएं
- 31 अनुचित साधन प्रयोग के केस दर्ज
संवाददाता
भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ० मुनीश नागपाल, ह.प्र.से. ने बताया कि आज सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) एवं डी.एल.एड.(रि-अपीयर) की विषय की परीक्षा में प्रदेशभर में कुल 31 अनुचित साधन प्रयोग के केस दर्ज किए गए, जिसमें 06 प्रतिरूपण के मामले शामिल है। आज संचालित हुई सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) हिन्दी विषय की परीक्षा में 2,84,809 परीक्षार्थी तथा डी.एल.एड.(रि-अपीयर) की Pedagogy of Hindi Language विषय की परीक्षा में 442 छात्र-अध्यापक प्रविष्ट हुए।
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गुरुवार, 6 मार्च 2025
मुनव्वर राना के लिखे वो 20 शेर जो ज़ुबान पर चढ़ गए
1. इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए
आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिए
2. ज़िंदगी तू कब तलक दर-दर फिराएगी हमें
टूटा-फूटा ही सही घर-बार होना चाहिए
3. बरसों से इस मकान में रहते हैं चंद लोग
इक दूसरे के साथ वफ़ा के बग़ैर भी
4. एक क़िस्से की तरह वो तो मुझे भूल गया
इक कहानी की तरह वो है मगर याद मुझे
5. भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है
मोहब्बत करने वाला इस लिए बरबाद रहता है
6. ताज़ा ग़ज़ल ज़रूरी है महफ़िल के वास्ते
सुनता नहीं है कोई दोबारा सुनी हुई
7. हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं
जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं
8. अँधेरे और उजाले की कहानी सिर्फ़ इतनी है
जहाँ महबूब रहता है वहीं महताब रहता है
9. कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ़ नहीं देखा
तुम्हारे बाद किसी की तरफ़ नहीं देखा
10. किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई
11. मैं इस से पहले कि बिखरूँ इधर उधर हो जाऊँ
मुझे सँभाल ले मुमकिन है दर-ब-दर हो जाऊँ
12. मसर्रतों के ख़ज़ाने ही कम निकलते हैं
किसी भी सीने को खोलो तो ग़म निकलते हैं
13. मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकता
अब इस से ज़यादा मैं तेरा हो नहीं सकता
14. मुख़्तसर होते हुए भी ज़िंदगी बढ़ जाएगी
माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी
15. वो बिछड़ कर भी कहाँ मुझ से जुदा होता है
रेत पर ओस से इक नाम लिखा होता है
16. मैं भुलाना भी नहीं चाहता इस को लेकिन
मुस्तक़िल ज़ख़्म का रहना भी बुरा होता है
17. तेरे एहसास की ईंटें लगी हैं इस इमारत में
हमारा घर तेरे घर से कभी ऊँचा नहीं होगा
18. ये हिज्र का रस्ता है ढलानें नहीं होतीं
सहरा में चराग़ों की दुकानें नहीं होतीं
19. ये सर-बुलंद होते ही शाने से कट गया
मैं मोहतरम हुआ तो ज़माने से कट गया
20. उस पेड़ से किसी को शिकायत न थी मगर
ये पेड़ सिर्फ़ बीच में आने से कट गया।
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musarrat-times.blogspot.com
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