बुधवार, 21 फ़रवरी 2024

बिहार की जनता के बारे में कौन सोच रहा है

अभिषेक गुप्ता
बिहार मे नितिश कुमार ने एक बार फिर बहुमत हासिल कर लिया। पाला बदलने के बाद भी उनका मुख्यमंत्री का पद बच गया। उनकी घरवापसी हो गई और भाजपा के साथ मिलकर फिर से उन्होंने बिहार में सरकार बना ली। महागठबंधन से नितिश कुमार के अलग होने के कारण क्या रहे यह समय बताएगा। यह सवाल उनसे कोई पूछता भी नहीं। इससे पहले नितिश कुमार एनडीए से क्यों अलग हुए इसका भी ठोस कारण आजतक नहीं पता चला। एनडीए से पहले दो बार अलग होने के कारण क्या है, इस पर तमाम चर्चाएं होती रही, लेकिन खुलकर कुछ नहीं पता चला। बिहार में पिछले तीस सालों में तमाम राजनीतिक उठापटक होते रहे है। इन तमाम उठापटक के बीच बिहार में एक सवाल यही उठता रहा है कि आखिर बिहार की जनता इस उठापटक में कहां है। राजनीतिक दल और सरकार उनके बारे में कितना सोच रहे है। तमाम राजनीतिक उठापटक और सरकार के गिरने बचाने के खेल के बीच जनता तो गायब है। जनता के मुद्दे गायब है। बिहार के तमाम मुद्दे वहीं के वहीं है। गरीबी बढी है, बेरोजगारी बढी है, देश भर में मजदूरों की आपूर्ति का बड़ा केंद्र आज भी बिहार ही है।
निशिचत तौर पर इस उठापटक के बीच नितिश कुमार ने अपना जनसमर्थन खोया है और उनके व्यक्तिव पर सवाल उठा है। आम जनता भी बार-बार पाला बदलने के उनके इस रवैये से नाराज है। ग्रामीण इलाकों में नितिश कुमार ने जनसमर्थन खोया है। जो नितिश कुमार किसी जमाने में सुशासन बाबू जाने जाते थे उन्होंने अपनी सरकार बचाने के लिए बाहुबालियों का सहारा लिया। उन्होंने अपनी सरकार बचाने के लिए अनंत सिंह, आनंद मोहन और प्रहलाद यादव का सहारा लिया। ये बाहुबाली किसी जमाने में नितिश कुमार को फूटी आंख नहीं सुहाते थे। अनंत सिंह जेल में है। उनकी पत्नी नीलम देवी विधायक है। उन्होंने राजद का पाला बदल सता का दामन थामा। नितिश कुमार की सरकार बचायी। आनंद मोहन जेल से छूटे है। उनके बेटे चेतन आनंद विधायक है। आनंद मोहन के बाहुबल को नितिश हमेशा चुनौती देते रहे। लेकिन उन्होंने आखिर अपनी सरकार बचाने के लिए आनंद मोहन का सहारा लिया, उनके बेटे का वोट उन्हें मिला। चेतन आनंद जो राजद के विधायक थे वे सरकार के साथ चले गए।
निश्चित तौर पर इस सारे घटनाक्रम के दौरान सबसे ज्यादा मजबूत होकर राजद के नेता तेजस्वी यादव उभरे है। नितिश कुमार के साथ गठबंधन के दौरान उन्होंने अच्छा काम किया और लालू यादव के जंगल राज की परछाई से निकलने की कोशिश की। उनका ए टू जेड की राजनीति अब बिहार में प्रभाव दिखा रही है। विधानसभा मे नितिश कुमार के विश्वास मत के दौरान तेजस्वी यादव ने काफी शानदार भाषण दिया और इसकी सराहना उनके विरोधी भी कर रहे है। उन्होने अपने भाषण के दौरान कोई उग्रता नहीं दिखायी। उन्होंने काफी शालीनता से सता पक्ष को जवाब दिया और यही जवाब सता पक्ष को निरुतर कर गया। तेजस्वी ने कहा कि क्रेडिट लेने पर सवाल उठाया जा रहा है। तेजस्वी ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने जो क्रेडिट लिया वो जायज था। बिहार में गठबंधन की सरकार ने जो काम किया उसका क्रेडिट सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं ले सकते है। क्योकि जिन विभागों ने काम किया था वो उनका विभाग था, मंत्री उनके थे। तेजस्वी ने अपने भाषण के दौरान तंज कसा कि क्या मोदीजी गारंटी लेंगे कि यह सरकार फिर से पलटी नहीं मारेगी।
हालांकि तमाम उठापठक के बीच अहम चिंता यह है कि राजनेता सत्ता प्राप्त करने के लिए लड़ाई ल़ड़ रहे है। लेकिन राज्य आज भी देश के गरीब राज्यों में गिना जाता है। किसी जमाने में बंगाल का हिस्सा रहा यह राज्य आज भी बदहाली की स्थिति में है। ब्रिटिश राज के दौरान बिहार अलग राज्य न होकर बंगाल का हिस्सा था और लंबी मांग के बाद ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम ने 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार में बिहार (आज के ओडिशा और झारखंड) को बंगाल से विभाजित कर एक राज्य बनाने की घोषणा की थी। 22 मार्च 1912 को बिहार को बंगाल से अलग कर एक नया प्रांत बनाया गया था और बाद में 1935 में ओडिशा (उस वक़्त उड़ीसा) को बिहार से अलग एक नए प्रांत का दर्ज़ा दिया गया। इसके बाद फिर 15 नवंबर 2000 को बिहार के दक्षिण हिस्से को अलग कर झारखंड के तौर पर एक नया राज्य बनाया गया, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उड़ीसा और झारखंड जैसे राज्य बिहार से आगे निकलने की कोशिश में है, लेकिन बिहार को लेकर गंभीर चिंता यहां के राजनेताओं ने नही की। 
आज 21 वीं सदी में भी बिहार की हालत बदहाल है। राज्य में लगभग 1 करोड़ खेती से जुड़े है जो राज्य के लगभग 8 प्रतिशत है। वहीं 2 करोड़ के करीब लोग श्रमिक है। राज्य के 63.74 फीसदी यानी करीब 29.7 लाख परिवार रोजाना 333 रुपये से कम यानी 10,000 रुपये मासिक से कम पर गुजारा करते हैं। वहीं 34.13 फीसदी या एक तिहाई से अधिक लोग रोजाना 200 रुपये या उससे कम पर गुजर बसर करते हैं। ये आंकड़े बताते है कि राज्य के नेताओं और शासनतंत्र ने राज्य के विकास के लिए कोई खास काम नहीं किया। दिलचस्प बात यह है कि इन आंकड़ों के बाद भ  राज्य के तमाम नेता बड़े बड़े दावे करते है। बिहार की इस बदहाली के लिए तमाम राजनीतिक दल और इसके नेता जिम्मेवार है। हाल ही मे विश्वासमत के दौरान यह दिखा किस तरह से विधायकों को तोड़ने की कोशिश हुई, पैसे के लेनदेने के आरोप लगे और अब तो इस मामले में गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ये तमाम घटनाएं यह दिखाती है को बिहार का एक तबका खासा अमीर हो गया, जबकि एक बड़ा तबका खासा गरीब है। इसके लिए राज्य के तमाम नेताओं को आत्ममंथन कर राज्य के विकास के लिए काम करना होगा।
(राजनीतिक विश्लेषक एवं स्तंभकार)

उत्तरखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किया राइजिंग इंडिया डेवलपमेंट एक्सपो का उद्घाटन

नई दिल्ली। मंत्री ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए मण्डया/बाजरा अपनाने पर जोर दिया तथा आजादी के 100वें वर्ष मानी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। यह दृष्टिकोण नार्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, पर्यावरणीय स्थिरता और सुशासन सहित विकास के विभित्र पहलुओं को शामिल करता है। आज माननीय मंत्री जी ने इंडिया एक्सपी सेंटर एवं मार्ट ग्रेटर नोएडा दिल्ली एनसीआर में राइजिंग इंडिया डेवलपमेंट एक्सपो का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी 22 में 24 फरवरी 2024 तक प्रदर्शित रहेगी। अपने उद्घाटन भाषण में मंत्री ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए बाजरा अपनाने की सलाह दी, वह प्रदर्शनी में प्रदर्शित मशीनरी और उपकरणों ने बहुत प्रभावित हुए।

उपरोक्त एक्सपो का आयोजन पिक्सी एक्सपो मीडिया एवं ग्लोबल मिडिया ग्रुप द्वारा इंडिया एक्सपो सेंटर एवं मार्ट, ग्रेटर नोएडा में किया जा रहा है। सी में जधिक संगठन जपने उत्पादों, भविष्य की रणनीति जऔर परिवर्तनकारी पहल के साथ भाग ले रहे हैं जो हमारे राष्ट्र की प्रगति को आगे बड़ा रहे हैं क्योंकि हम अगले कुछ वर्षों में एक विकसित अर्थव्यवस्था की ओर यात्रा कर रहे हैं। यह एक्सपो प्रभावशाली सरकारी योजनाओं को प्रदर्शित करने और भारत के भविष्य को आकार देने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करता है। इस मेगा इवेंट में लगभग 30 एमएसएमई, 15 राज्य सरकार के बागवानी बोर्ड और अन्य उद्योगों के 60 मे अधिक निजी प्रमुख कम्पनीयां भाग ले रहे हैं। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद सीएसआईआर कई नबीन उत्पाद प्रदर्शित करेगा जो किसानों के निए उपयोगी होंगे बऔर खेती की प्रक्रिया की आगान बनाएंगे।

पृथ्वी विज्ञान हमारे रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, मौसम विज्ञानी मौसम का अध्ययन करते हैं और खतरनाक तुफानों पर नजर रखते हैं। जलविज्ञानी पानी का अध्ययन करते हैं और बाड़ की चेतावनी देते हैं। भूकंपविज्ञानी भूकंपों का अध्ययन करते हैं और यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि वे कहाँ टकराएँगे। यह भविष्यवाणी जब किसानों को कई तरह में मदद कर रही है।
बाजरा, उपभोक्ताओं, किमानों और पर्यावरण को लाभ पहुंचाता है। वे स्वस्थ आहार का एक अच्छा स्रोत हैं एवं वे कृषकों और जलवायु को लाभ पहुँचाते हैं कम पानी वाले होते हैं और नियमित रूप से खेती करने में सक्षम होते हैं।

सरकार की योजना देश-विदेश में कई कार्यक्रम आयोजित करने की है बाजरा और अन्य पोषक अनाजों को लोकप्रिय बनाने के लिए। इसके अलावा, सभी राज्य सहित भारत सरकार के मंत्रालय/विभाग सरकारों के समन्वय से पोषक अनाजों को बढ़ावा देंगे। संयुक्त राष्ट्र के जादेश पर भारत में 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष पोपित किया। भारत सरकार की पहन गहन बाजरा संवर्धन के माध्यम से पोषण सुरक्षा के लिए सरकार में बाजरा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं जैसे कि घरेलू और वैश्विक मांग पैदा करना और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना। बाजरा के पोषण मूल्य को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने बाजरा को भी पोषक तत्व के रूप में अधिसूचित किया है।

बाजरा मूल्य श्रृंखला में हजारों स्टार्टअप काम कर रहे हैं भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान ने 250 स्टार्टअप शुरू किए हैं। बाजरा के महत्व पर जोर देते हुए नाथों साधनहीन किसानों के लिए भोजन और पाउडर की आपूर्ति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बाजरा पारंपरिक भोजन है एशिया और अफ्रीका में 59 करोड लोग। बाजरा ही एकमात्र ऐसी फसल है जो भविष्य में भोजन, चारा, ईंधन, कुपोषण, जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का गमाधान करेगी। बाजरा विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, कैल्जियम, से भरपूर होता है नौह पोटेमियम, मैग्रीशियम, जस्ता और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले बाजरा होते हैं गेहूं से एलर्जीध्क्षसहिष्णु बच्चों के लिए उपयुक्त हैं। बाजरा उगाने के कई फायदे हैं: न्यूनतम वर्षा आधारित फसल होना उर्वरकों का उपयोगय कोई कीटनाशक नहीं क्योंकि वे कीटों के हमले के प्रति कम संवेदनशील होते हैंप बाजरे के बीजों को वर्षों तक भंडारित किया जा सकता है, जिससे सुखे में भी फायदा होता है।

माननीय मंत्री जी ने सुझाब दिया कि किसानों को आमन्दनी बड़ानें के लिए पारम्परिक खेती से जैविक खेती एवं बागवानी की तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिये। इस सम्बन्ध में सरकार के विभिन्न स्किमों को किसानों तक पहुचानें के लिए इस तरह के आयोजन लगातार होते रेहने चाहिए इस सम्बन्ध में आयोजकों के सफल प्रयास के लिए मंत्री जी ने ग्लोबल मिडिया के मी.ई.ओ श्री चालिन्द्र कुमार जी एवं उनकी पुरी टिम को धन्यवाद दिया।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2024

सांसद प्रज्ञा ठाकुर के नफरत भरे बयानों की कड़ी भर्त्सना

भोपाल । राष्ट्रीय सेक्युलर मंच ने भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के हिजाब के मुद्दे पर नफरत भरे बयानों की कड़ी भर्त्सना की है ।
राष्ट्रीय सेक्युलर मंच के संयोजक लज्जा शंकर हरदेनिया और सदस्य भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कॉमरेड शैलेन्द्र शैली ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने हिजाब के मुद्दे पर मुसलमानों को अपमानित करने वाले नफरत भरे सांप्रदायिक उन्माद के बेतुके बयान विगत दिनों दिए वे अक्षम्य और अनुचित है। इस तरह के बयान उनके सांसद पद और तथाकथित साध्वी होने की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं ।सांसद  प्रज्ञा ठाकुर को इस तरह के अनुचित बयानों के लिए माफी मांगनी चाहिए ।उनके अनुचित बयानों से अमन पसंद , सहिष्णु ,धर्म निरपेक्ष जनता की भावनाएं भी आहत हुई हैं ।राष्ट्रीय सेक्युलर मंच ने प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष से प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है ।राष्ट्रीय सेक्युलर मंच ने आम जनता से अपील की है कि नफरत की राजनीति से सतर्क रहें और देश हित में अमन और भाईचारा कायम रखें ।


शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2024

निगम पार्षद हाजी समीर की लापरवाही का हर्जाना भर रहे हैं बुलंद मस्जिद, शास्त्री पार्क निवासी

असलम अल्वी

गांधी नगर विधानसभा के शास्त्री पार्क वार्ड नंबर 213 जिसके निगम पार्षद कांग्रेस पार्टी के हाजी समीर मंसूरी हैं। यहां की जनता ने भाजपा व आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों को अपना निगम पार्षद नहीं चुना बल्कि कांग्रेस के प्रत्याशी हाजी समीर को निगम पार्षद चुना ताकि यह शास्त्री पार्क वार्ड के ही निवासी हैं तो यह शास्त्री पार्क की ओर ज्यादा ध्यान देंगे पर उन्हें क्या बता था कि जिसे वह निगम पार्षद बना रहे हैं वह ही उनके साथ सौतेला व्यवहार करेंगे।
इन्हें सबसे ज्यादा वोट बुलंद मस्जिद कॉलोनी के निवासियों ने दिया था ताकि मुस्लिम बहुल इलाका होने की वजह से यह मुस्लिम प्रत्याशी इनकी परेशानी को कम करने में मील का पत्थर बनेंगे पर उन्हें क्या पता था कि जो वह सोच रहे हैं उसके उल्ट वह उनके लिए ही नुकसानदायक साबित होंगे।

हाजी समीर से पहले यहां से भाजपा से निगम पार्षद रोमेश गुप्ता थे जिन्हें यहां से मात्र 351 वोट मिले थे पर उन्होंने बुलंद मस्जिद कॉलोनी को कभी अकेला नहीं छोड़ा। उनके कार्यकाल में सफाई व्यवस्था कभी खराब नहीं हुई। मगर अब यहां चारों ओर आप गंदगी का ढेर देखें और उनके बीच जीवन गुजरते लोगों को। यहां की सफाई व्यवस्था से यहां के निगम पार्षद को कोई लेना देना नहीं। उनसे यहां के लोग कई बार सफाई व्यवस्था दुरूस्त करवाने के लिए कह चुके हैं पर वह निगम में आम आदमी पार्टी की सरकार को ही दोषी ठहरा देते हैं, वह कहते हैं कि हमारे पास फंड नहीं तो हम काम कैसे करवाएं। सफाई कर्मचारी बढ़ाएं नहीं जा रहे हैं तो मैं क्या करूं।

जब तक हाजी समीर को वोट चाहिए था तो उन्होंने यहां की सफाई व्यवस्था और भाजपा व आप को ही निशाना बना रखा था कि यह लोग काम नहीं कर रहे हैं। आप लोग मुझे जीताकर लाओ मैं आपकी कॉलोनी को चमन बना दूंगा पर अब हाल यह है कि डी-ब्लॉक में सरकारी स्कूल, कब्रिस्तान, बाबा जलालुद्दीन की दरगाह, डीडीए पार्क व गौसिया मस्जिद है पर यहां पर आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है क्योंकि जब नाला ओवरफलो होता तो सारा पानी रोड पर आ जाता है जिसकी वजह से यहां आना जाना मुश्किल हो जाता है।

जब यहां के लोगों से बात करने की कोशिश की लोगों ने कैमरे पर बात करने से मना कर दिया मगर दबी जुबान में निगम पार्षद व निगम कर्मचारियों को वह बुरा-भला ही कहते नजर आए। उन्होंने ने कहा आप हमसे यहां की सफाई व्यवस्था के बारे में सवाल करोगे उसके बाद निगम के कर्मचारी या निगम पार्षद के लोग आकर हमें परेशान करेंगे।

इसी बीच हमें यहां कांग्रेस के कार्यकर्ता मिले उन्होंने भी कैमरे पर कुछ बोलने से मनाकर दिया मगर कांग्रेस कार्यकर्ता व समाजसेवी इजहार सलमानी ने हमसे बात की और यहां की परेशानी के बारे बताया।








 




गुरुवार, 15 फ़रवरी 2024

क्यों बिखर रही है कांग्रेस और इंडिया गठबंधन

बसंत कुमार

अभी महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य मंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक चवहा न को कांग्रेस से त्याग पत्र देकर भाजपा जॉइन किये कुछ ही घंटे नही बीते की कांग्रेस के सचिव और पूर्व प्रधान मन्त्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र विभाकर शास्त्री कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा मे शामिल हो गए, भाजपा जॉइन करने के तुरंत बाद अशोक चवहान को महाराष्ट से राज्य सभा का टिकट भी मिलगया और हो सकता है विभाकर शास्त्री को उत्तर प्रदेश से लोकसभा का टिकट भी मिल जाये। वर्ष 2024 के आम चुनावो मे नरेंद्र मोदीजी को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस ने कई दर्जन दलों के साथ मिलकर इंडिया  गठबंधन तैयार किया और उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस इस महा गठ बंधन के साथ सत्ता पार्टी को मजबूत चुनौती देगी, पर ऐसा नहीं हुआ महागठबंधन के प्रधानमंत्री पद के दावेदर नितीश कुमार रातोरात पलटी मारते हुए एन डी ए मे शामिल होकर सरकार बना ली। टी एम सी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बंगाल में कांग्रेस और महागठबंधन के साथियों के लिए कोई भी सीट छोड़ने के बजाय अकेले ही लड़ने का फैसला किया है और ऐसा ही फैसला उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ सीट बटवारे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कर लिया है और रही सही कसर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब और दिल्ली में सभी सीटो पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार खड़ी करने की घोषणा कर के पूरी कर दी है अर्थात इंडिया गठबंधन बनने से पहले ही टूटता नजर आ रहा है। पर कांग्रेस के लिए महा गठबंधन को बचाने से पहले अपनी पार्टी को बचाना ज्यादा महत्व पूर्ण है क्योकि हर रोज उनके एक न एक कद्दावर नेता पार्टी छोड़कर भाग रहे है। 

लोक सभा चुनाव में जुटी कांग्रेस को रोजाना एक न एक झटका लग रहा है यह पता ही नहीं चल पाता कि कौन नेता कब पार्टी का साथ छोड़ दे, क्या महाराष्ट्र, क्या मध्य प्रदेश, क्या कर्नाटक सहित सभी राज्यो मे कांग्रेस नेताओ का पार्टी छोड़ने का सिल सिला जारी है 10-12 वर्ष पहले तक कांग्रेस के किसी बड़े समारोह में राहुल गाँधी के पहुँचते ही उन्हे ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवडा, आर पी एन सिंह, जितिन प्रसाद समेत नेता उन्हे घेर लेते थे पर आज ये सभी नेता कांग्रेस और राहुल गाँधी दोनों का साथ छोड़ चुके हैं। अभी यह स्थिति है कि राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के तीन नेताओ ने पार्टी छोड़ दी है। कांग्रेस पार्टी के अंदर जो हल चल चल रही है वह नई नही है यह अंतरकलह कई सालों से चल रही है जिसको सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और मल्लिकारजून खड़गे तक रोकने मे असफल दिखाई दे रहे है।

सोनिया गाँधी के करीबी माने जाने वाले गुलाम नबी आजाद, कैपटन अमरिंदर सिंह, रीता बहुगुणा जोशी आदि कांग्रेस छोड़कर या तो अपनी पार्टी बना चुके है या भाजपा का दामन पकड़ चुके है। इतना ही नहीं राहुल गाँधी के करीबी माने जाने वाले उनके सिपहसलार सुश्मिता देव, प्रियंका चतुर्वेदी, जितिन प्रसाद, अशोक तंवर, हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर, अशोक चौधरी, हेमंत विश्व शर्मा, सुनील झाखड, अश्वनी कुमार जैसे बड़े नेता पार्टी को अलविदा कह चुके है। इससे पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता जो चार दशको से पार्टी के थिंक टैंक का हिस्सा रहे कपिल सिब्बल  कांग्रेस छोड़कर, सपा के टिकट पर राज्य सभा सांसद बने। यदि देखा जाए तो लालू प्रसाद यादव की आर जे डी और सिब्बु सोरेन की झार खण्ड मुक्ति मोर्चा ही कांग्रेस के विष्वशनिय साथी के रूप में बचे है और इंडिया गठबंधन के अन्य साथी मौके की नजाकत के अनुसार कांग्रेस के साथ व दूर खड़े रहते है।

जहां तक भाजपा का प्रश्न है तो उनके पास नरेंद्र मोदीजी जैसा नेतृत्व है जिसने अपनी कड़ी मेहनत और दूर दर्शिता से अपने 9 वर्षो के कार्यकाल में देश को विश्व की 5वीं आर्थिक महाशक्ति के रूप में खड़ा कर दिया है और निकट भविष्य में देश के किसी भी दल मे उनके नेतृत्व को टक्कर देने वाला कोई नजर नही आ रहा और भाजपा बगैर अपना कुनबा बढ़ाये वर्ष 2024 के चुनावो मे पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने वाली है फिर अशोक चव्हाण जैसे नेता जिन्हे आदर्श घोटाले के आरोप के चलते मुख्यमन्त्री के पद से त्याग पत्र देना पड़ा था को पार्टी मे इतनी गर्मजोशी से लेकर राज्य सभा का टिकट क्यो दे दिया गया, ऐसे विवादित लोगो को पार्टी मे लेने से भाजपा की पार्टी विथ ए डिफ्रेंस वाली छवि पर धक्का लगेगा, जो लोग विगत कुछ वर्षो मे कांग्रेस छोड़कर भाजपा की शरण मे आये है उनमे से अधिकांश कांग्रेस मे लंबे समय तक रहे है और कांग्रेस शासन में पद और प्रतिष्ठा पाते रहे है।

आज जो नेता कांग्रेस को डूबता हुआ जहाज मानकर पार्टी को छोड़कर भाग रहे है और भाजपा की शरण में आ रहे है क्या भरोषा है कि भविष्य मे दुर्भाग्य से भाजपा सत्ता से हटने लगे तो ये पुन: भाग खड़े हो क्योकि इनमे से अधिकांश चुनाव के समय भाजपा मे टिकट मिलने और सांसद बनने के लोभ मे आ रहे है और पार्टी भी दशकों से परत के लिए काम कर रहे कार्य कर रहे कर्मठ कार्यकर्ताओं को नजर अंदाज कर के इन भगोड़े अवसर वादियों को उपकृत कर रही है। इससे पार्टी के लिए काम कर रहे समर्पित कैडर कार्य कर्ताओ का वह वर्ग जो पार्टी की रीतियों और नीतियों के लिए मर मिटता है समाप्त हो जायेगा। इस तथ्य पर पार्टी नेतृत्व को सोचना होगा।

स्वतंत्र भारत के 7 दशक के राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस एक बार नही तीन तीन बार सत्ता से बाहर हुई है और हर बार पार्टी नेतृत्व ने अपनी संगठन क्षमता के बल पर शानदार वापसी की है और कभी भी इतने बड़े पैमाने पर कांग्रेस के बड़े बड़े नेता पार्टी छोड़कर नही भागे है। इस समय कांग्रेस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अपने गठबंधन इंडिया और कांग्रेस को बिखरने से रोकना है, इसके लिए कांग्रेस नेताओ को आत्मावलोकन करना होगा कि क्या कारण है कि डेढ़ सौ वर्ष पुरानी पार्टी इस प्रकार बिखर रही है अगर यह रोका नही गया तो नरेंद्र मोदी जैसे कुशल और मेहनती नेता के नेतृत्व मे भाजपा को तीसरी बार सत्ता मे आने से रोकना विपक्ष के लिए असंभव होगा।

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