मंगलवार, 28 मार्च 2023

गुरुवार, 23 मार्च 2023

पंजाब के चिंताजनक हालात पर अधिक सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता

अवधेश कुमार

पंजाब में अमृतपाल एवं उसके साथियों के विरुद्ध कार्रवाई से पूरे देश ने राहत महसूस किया है। अमृतपाल के चाचा सहित उसके प्रमुख साथियों को मिलाकर डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है । इसे पूरी तरह दुरुस्त आयद न कहें  देर आयद कह सकते हैं । पिछले करीब 6 महीने से अमृतपाल की गतिविधियों ने पूरे पंजाब और वहां नजर रखने वाले सभी को भयभीत कर दिया था। अमृतपाल की हरकतों को पहले ही सख्ती से रोक दिया जाता तो नौबत यहां तक नहीं आती। उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए लगाकर लुकआउट सर्कुलर जारी करना पड़ा है। हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियां मुख्यमंत्री भगवंत मान सहित पंजाब सरकार एवं आम आदमी पार्टी को भले नागवार गुजर रही हो किंतु सच्चाई तो यही है। न्यायालय ने पूछा है कि आखिर 80 बजार पुलिस क्या कर रही थी? वास्तव में 23 फरवरी को अमृतसर जिले के अजनाला थाने का पूरा दृश्य आतंकित करने वाला था। हजारों लोग जिस तरह थाने को बंधक बनाकर पुलिस वालों पर ईंट पत्थर बरसा रहे थे उस पर पहली नजर में यकीन करना कठिन था। ऐसा नहीं है कि अमृतपाल के साथियों के भारी संख्या में पहुंचने और उधम मचाने की सूचना खुफिया एजेंसियों को नहीं थी।  पंजाब सरकार ने खतरे को देखते हुए भी कार्रवाई से बचने की खतरनाक आत्मघाती प्रवृत्ति अपनाई थी। पूरे देश को आश्चर्य हुआ जब थाने पर हमले के बाद पुलिस ने तूफान सिंह को रिहा करने की घोषणा कर दी जिस पर अपहरण कर मारपीट करने का आरोप था। हालांकि बाद में वह न्यायालय के आदेश से ही रिहा हुआ पर पुलिस ने उसकी जमानत का विरोध नहीं किया। स्थानीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का बयान था कि अमृतपाल ने जो जानकारी दी उसके अनुसार तूफान सिंह घटनास्थल पर था ही नहीं। यानी पुलिस के लिए अमृतपाल के साक्ष्य मान्य हो गए थे।

ध्यान रखिए वर्तमान कार्रवाई मुख्यमंत्री भगवान सिंह मान की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद हो रही है। इसका अर्थ बताने की आवश्यकता नहीं । पुलिस की वर्तमान चुस्ती और सख्ती बताती है कि पहले भी ऐसा हो सकता था।

जम्मू कश्मीर के बाद पंजाब ऐसा सीमावर्ती राज्य है जहां हिंसा व अलगाववाद ने पूरे देश को लंबे समय तक दहलाया है। आतंकवाद ने वहां 70 हजार  से ज्यादा लोगों की जानें ली है। सीमा पार पाकिस्तान से हो रहे षड्यंत्रों एवं अमेरिका यूरोप सहित अन्य देशों से अलगाववादियों मिल रहे सहयोग का ध्यान रखते हुए भगवंत मान सरकार की पहली प्राथमिकता सुरक्षा व्यवस्था ही होनी चाहिए थी। सरकार के व्यवहार से ऐसा कभी झलका नहीं। पूरे देश ने देखा जब खालिस्तानी झंडा लिए लोग सड़कों पर नारे लगा रहे हैं और पुलिस उन्हें सुरक्षा दे रही है। इससे अलगाववादियों - आतंकवादियों सहित पूरी दुनिया में भारत विरोधियों का हौसला बढ़ा होगा। अमृतपाल पिछले वर्ष सितंबर में दुबई से आया और धीरे-धीरे वह इतनी बड़ी हैसियत प्राप्त कर गया तो क्यों? पंजाब के आम लोगों को तो पता था कि वहां स्थिति बिगड़ रही है। क्या सरकार को इसका आभास नहीं था?दमदमी टकसाल में जब अमृतपाल को भिंडरावाले की गद्दी दी जा रही थी तो उसकी सूचना निश्चय ही सरकार के पास पहुंची होगी। वहां का पूरा दृश्य डरावना था। भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारों से गूंजता कार्यक्रम हस्तक्षेप की मांग कर रहा था। इसलिए यह प्रश्न तो उठेगा कि सरकार आंखें मुद्दे क्यों रही?

यह संभव नहीं कि प्रदेश और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों ने आप सरकार के मुखिया और शिर्ष पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को पंजाब के अंदर और बाहर की गतिविधियों से सूचित नहीं किया होगा। विचार करने वाली बात है कि एक ट्रक ड्राइवर अमृतपाल अचानक दुबई से पंजाब लौटता है और धीरे-धीरे हीरो बन जाता है। उसके बोलने का अंदाज, उसकी तर्क शैली आदि स्पष्ट बता रहा था कि उसे पूरी तरह तैयार करके पंजाब भेजा गया। कहा जा रहा है कि वह आनंदपुर टास्क फोर्स बना रहा था। पंजाब पर काम करने वाले जानते हैं कि 1973 में आनंदपुर साहिब प्रस्ताव से ही वर्तमान खालिस्तान आंदोलन को हवा मिली थी। इसमें पंजाब को स्वायत्त प्रदेश बनाने की मांग की गई थी। इसमें रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा को छोड़कर सारी शक्तियां राज्य को देने की मांग की गई थी। 24 जुलाई 1985 को पंजाब में उदारवादी लोकप्रिय संत हरचरण सिंह लोंगोवाल एवं राजीव गांधी के बीच समझौता हुआ जिसमें पंजाब की स्वच्छता की बात नहीं थी। उग्रवादियों ने संत लोगोंवाल की एक गुरुद्वारे में ही हत्या कर दी। अमृतपाल के पीछे की शक्तियों ने पंजाब को उसी तरह के आग में झोंकने के षड्यंत्र के तहत ही उसे दुबई से भेजा होगा। उसने योजनाबद्ध तरीके से पंजाब में नशे के विरुद्ध समाज की सोच पर फोकस किया और जगह-जगह नशा मुक्ति केंद्र खोला। इसमें युवाओं को साथ जोड़कर उसने अलग-अलग तरह के कार्यक्रम कराए। युवा उसकी ओर आते गए। नशा विरोधी अभियान के साथ बारिश द पंजाब के संगठन पर उसका नियंत्रण बहुत कुछ कह रहा था। उसके साथ आए युवाओं ने ऐसी हरकतें करनी शुरू की जो कानून के राज में सहन नहीं किया जाना चाहिए। वे सिगरेट पीने से लेकर तंबाकू सेवन करने वाले को सरेआम मारते पीटते थे। अमृतसर में निहंगों ने एक युवक को पीट-पीटकर मार डाला। नशा मुक्ति केंद्र अमृतपाल के लिए निजी सेना तैयार करने का स्थान बन गया। अमृतपाल के कार्यक्रम जगह-जगह लोगों में डर पैदा कर रहे थे क्योंकि उनके साथी हिंसा , तोड़फोड़ और हंगामे के पर्याय बन बन गए थे। इसी महीने आनंदपुर में कनाडा से निहंग बनने आए एक युवक को निहंगों द्वारा मार डालने की खबर आई क्योंकि वह उन्हें हुल्लड़बाजी से रोकने की कोशिश कर रहा था। एक समय था जब किसी निहंग को देख कर लोग अपनी सुरक्षा को लेकर निश्चिंत हो जाते थे। अब स्थिति बदल चुकी है।

वास्तव में पंजाब की स्थिति बिल्कुल चिंताजनक है। अमृतपाल का पकड़ा जाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि उससे पता चलेगा कि देश और विदेश की कौन शक्तियां उसके पीछे हैं। किंतु पंजाब की स्थिति संभालने के लिए इसके साथ काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है। आखिर भगवंत सिंह मान के द्वारा खाली की गई संगरूर लोकसभा सीट से खालिस्तान समर्थक सिमरनजीत सिंह मान की जीत क्यों हुई? वह पंजाब के अंदर उभर रहे खतरनाक मनोवृति की ही परिणति थी। कृषि कानून विरोधी आंदोलन के दौरान खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियां दिल्ली से लेकर पंजाब एवं देश के बाहर अमेरिका, कनाडा , ब्रिटेन आदि में साफ दिखाई पड़ रही थी। संगरूर चुनाव प्रचार के बीच आ रहे समाचारों से साफ लग रहा था कि मान को जिताने की पूरी कोशिश हो रही है। आम विश्लेषण यही है कि पंजाब को में नए सिरे से अलगाववाद व हिंसा चाहने वालों ने माना कि सिमरनजीत सिंह मान उम्र के इस पड़ाव पर नेतृत्व देने में सक्षम नहीं हो सकते। इसी से अमृतपाल सिंह की हैसियत बड़ी। जरनैल सिंह भिंडरावाले को भी उभरने में समय लगा था जबकि अमृतपाल दुबई से आने के दो - ढाई महीने के अंदर ही इस धारा का जाना - पहचाना और प्रभावी चेहरा बन गया। यह सब यूं ही तो नहीं हो सकता। अमृतपाल को पहले रोक देते तो उसके साथ युवाओं की इतनी बड़ी फौज नहीं खड़ी होती। हजारों युवक और आम लोग अगर उसके विचारों से प्रभावित हो चुके हैं तो उन सबको मुख्यधारा में कैसे लाया जाएगा यह बड़ा प्रश्न पंजाब के समक्ष खड़ा है। भगवंत मान सरकार अभी तक स्थिर पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति नहीं कर पायी है। अभी तक तदर्थ नियुक्ति से काम चलाया जा रहा है। यह स्थिति बदलनी चाहिए। जब तक प्रौपर नियुक्त पुलिस महानिदेशक नहीं होगा पुलिस को सही नेतृत्व नहीं मिल सकता।

अमृतपाल के उभार एवं वर्तमान स्थिति से सीख लेकर न केवल भयानक भूल सुधारने बल्कि भविष्य की दृष्टि से पूर्वोपाय करने की आवश्यकता है। वैसे अजनाला में अमृतपाल के लोगों ने जिस तरह पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को ढाल बनाकर प्रवेश किया उससे पंजाब के अंदर नाराजगी भी है। इस नाराजगी का लाभ सरकार और पंजाब की शांति के लिए कार्यरत सामाजिक - धार्मिक - सांस्कृतिक संगठनों को मिलेगा। पंजाब के बहुसंख्यक लोग न कभी अलगाववाद के साथ थे न हो सकते हैं। किसी भी सरकार के लिए यह बहुत बड़ी ताकत है। किंतु इस ताकत का लाभ तभी मिलेगा जब अलगाववादी,हिंसक, लंपट और हुड़दंग  समूहों के प्रति प्रशासन का बर्ताव हमेशा कठोर रहे। तात्कालिक रूप से अमृतपाल और उसके साथियों के विरुद्ध कार्रवाई का असर होगा पर राजनीतिक नेतृत्व की सोच और दिशा बदलने के बाद ही पुलिस प्रशासन पंजाब की दृष्टि से अनुकूल भूमिका निभा सकेगा।

अवधेश कुमार  ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल 98110 27208

मंगलवार, 21 मार्च 2023

शुक्रवार, 17 मार्च 2023

संघ के प्रतिनिधि सभा का संदेश - विरोध से आप प्रभावित रह कर एजेंडे के अनुसार आगे बढ़ते रहना

अवधेश कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ज्यादातर कार्यक्रम अब देश की अभिरुचि के केंद्र बनते हैं। हरियाणा के समालखा में आयोजित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक की ओर स्वभाविक ही संपूर्ण देश का ध्यान था। प्रतिनिधि सभा संघ की शीर्ष निर्णयकारी इकाई है । इस कारण भी राजनीति से लेकर गैर राजनीतिक सार्वजनिक जीवन के लोगों सहित मीडिया की इस मायने में उत्कंठा थी कि वहां से क्या निर्णय लिए जाते हैं। हाल ही में लंदन में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने संघ को मुस्लिम ब्रदरहुड की तरह का संगठन बता दिया था। इसमें यह संभावना व्यक्त की जा रही थी कि संघ इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा। इसी तरह की अपेक्षाएं देश के सामान्य राजनीतिक घटनाक्रमों के संदर्भ में भी थी। हालांकि बरसों से संघ पर दृष्टि रखने वाले जानते हैं कि बैठकों से इस तरह की प्रतिध्वनि कभी नहीं निकलती। बावजूद अनुमान और अटकलें हमेशा लगतीं है। तीन दिवसीय बैठक की समाप्ति के बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने पत्रकार वार्ता में अपनी ओर से इन पर कोई टिप्पणी नहीं की। पत्रकारों ने जब राहुल गांधी के वक्तव्य संबंधी प्रश्न पूछा तो उन्होंने इतना ही कहा कि हमें इस बारे में टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। राहुल अपने राजनीतिक एजेंडा से चलते हैं। हमारी उनकी कोई प्रतिबद्धता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी के पूर्वजों ने भी संघ के बारे में काफी टिप्पणी की है और संघ के बारे में सभी लोग जानते हैं। हां, एक राजनीतिक पार्टी के प्रमुख नेता के नाते राहुल को और ज्यादा जिम्मेदार होना चाहिए।

यह उत्तर ऐसा नहीं था जिस पर देश में आक्रामक बहस हो सके। हालांकि उन्होंने आपातकाल की याद दिलाते हुए बताया कि वह भारत में लोकतंत्र को खतरे में बताते हैं जबकि कांग्रेस के शासनकाल में ही आपातकाल लगा और हजारों लोग कारागार में डाले गए । यदि आप गहराई से संघ की कार्यपद्धति और उनके नेताओं के विचार और व्यवहार का मूल्यांकन करेंगे तो आपको आश्चर्य नहीं होगा। संघ अपनी ओर से आकर न उन पर प्रतिक्रियाएं देता है न खंडन करता है। दत्तात्रेय के पूरे वक्तव्य का निहितार्थ यही था कि संघ राष्ट्र के उत्थान की दृष्टि से अपने लक्ष्य के अनुरूप ही सक्रिय रहता है और ऐसी टिप्पणियों के खंडन - मंडन में अपना समय नष्ट नहीं करता। यह सच है कि संघ के बारे में अगर समाज में भी वैसे ही धारणाएं होती जैसी विरोधी दुष्प्रचार करते हैं तो अपने 98 वर्ष के जीवन काल में स्वयं उसके और उससे निकले अनेक संगठनों के साथ इतना व्यापक विस्तार नहीं होता। आप देखिए वहां जो प्रस्ताव पारित हुए उनमें स्वामी दयानंद सरस्वती की 200 वी जयंती वर्ष, महावीर स्वामी की 2250 वां जयंती वर्ष तथा शिवाजी छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक का 350 वां वर्ष मनाने का निश्चय है।

भारत का कौन सा संगठन अपनी शीर्ष निर्णयकारी इकाई में इन महापुरुषों की जयंती वर्ष मनाने का निर्णय करता है? साफ है कि संघ को समझने के लिए उसके दृष्टिकोण से देखने समझने की आवश्यकता पहले भी थी और आज भी है। प्रतिनिधि सभा में संघ ने सामाजिक परिवर्तन की दृष्टि से पहले से सक्रिय पांच आयामों पर आगे भी कार्य करने का निश्चय किया। इनमें सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। भारत के लिए हमेशा सामाजिक विभेद बड़ी चुनौती रही है। इसके विरुद्ध बातें तो बहुत हुई पर काम न के बराबर हुआ। जैसा दत्तात्रेय ने बताया कि समाज में विभेद के विरुद्ध विमर्श खड़ा करना तथा समरसता के लिए निरंतर प्रयास करना इन पांच आयामों पर कार्य करने का लक्ष्य है। भारत की उन्नति की कामना करने वाला कौन इन पंच आयामों से अंतर्मन से असहमत हो सकता है? कोई भी देश तभी सशक्त होगा जब अपने वैविध्य के रहते हुए भी समरस होकर परस्पर सहयोग पर आश्रित बने। परिवार व्यवस्था किसी भी समाज के सशक्त होने का आधार है। टूटते परिवार हमारे देश में अनेक सामाजिक -आर्थिक -सांस्कृतिक समस्याओं के कारण बने हैं। इनमें परिवार प्रबोधन का महत्व बढ़ जाता है। प्रतिनिधि सभा में यह भी घोषणा हुई कि हर 3 महीने पर गृहस्थ कार्यकर्ताओं की शाखाएं लगेंगी जिनमें परिवार शामिल होंगे। इसी तरह स्वदेशी आचरण और एक नागरिक के नाते हमारा कर्तव्य मायने रखता है। अधिकारों की बात सभी करते हैं लेकिन वे दायित्वों के साथ आबद्ध हैथ इसकी चिंता नहीं होती। नागरिकों में दायित्व बोध पैदा हो तो न केवल अनेक समस्याओं से अपने आप मुक्ति मिलेगी बल्कि भविष्य में उभरने वाली समस्याओं से भी आराम से निपटा जा सकता है।

इस दृष्टि से विचार करें तो संघ ने अपने प्रतिनिधि सभा से संपूर्ण देश के लिए कुछ संदेश दिए हैं। जनसंख्या असंतुलन और विवाह आदि पर संघ का मत देश जानना चाहता है। संघ द्वारा समलैंगिक विवाह को नकारना बिलकुल स्वाभाविक है। दत्तात्रेय ने कहा कि भारतीय हिंदू दर्शन में विवाह संस्कार है। यह कोई कंट्रैक्ट या दो निजी लोगों के आनंद की चीज नहीं है, न अनुबंध है। विवाह सिर्फ अपने लिए नहीं परिवार व समाज के लिए है और यह दो विपरीत लिंग के बीच ही होता है। हाल में उच्चतम न्यायालय ने भी समलैंगिक विवाह के बारे में मोटा - मोटी ऐसी ही टिप्पणी की है। हालांकि जनसंख्या असंतुलन पर इस बार प्रस्ताव पारित नहीं हुआ क्योंकि पिछली बार हो गया था। प्रश्न पूछे जाने पर स्पष्ट किया गया कि जनसंख्या असंतुलन देश के विकास के लिए खतरा है और इसका निदान होना चाहिए।

सन 2025 में संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। स्वाभाविक ही देश जानना चाहता है कि अपने शताब्दी वर्ष में संघ क्या करेगा। संघ के चरित्र को देखें तो अन्य संगठनों की तरह शताब्दी वर्ष उसके लिए अतिविशिष्ट नहीं हो सकता है।  संघ साहित्य बताता है कि वह समाज में नहीं समाज का संगठन है और जब तक समाज है तब तक है। इसलिए उसके जीवन में अनेक शताब्दियां आएंगी। बावजूद शताब्दी वर्ष का लक्ष्य तो कुछ होना ही चाहिए । इस संदर्भ में सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य ने पत्रकार वार्ता में यही कहा कि अगले एक वर्ष तक  एक लाख स्थानों तक पहुंचना संघ का लक्ष्य है। शताब्दी वर्ष में संघ कार्य को बढ़ाने के लिए नियमित प्रचारकों, विस्तारकों के अतिरिक्त 13 सौ कार्यकर्ता दो वर्ष के लिए शताब्दी विस्तारक निकले हैं। अभी संघ 71,355 स्थानों पर प्रत्यक्ष तौर पर कार्य कर समाज परिवर्तन के महत्वपूर्ण कार्य में भूमिका निभा रहा है। संघ की दृष्टि से देश को 911 जिलों में विभाजित किया गया है जिनमें से 901 जिलों में प्रत्यक्ष कार्य है। इस तरह देखें तो शताब्दी वर्ष को केंद्र बनाकर संघ पहले से जारी अपने सभी आयामों पर काम करते हुए ज्यादा से ज्यादा स्थानों तक अपनी सक्रिय उपस्थिति बढ़ाने पर फोकस करेगा।

यह बात सही है कि संघ को लेकर आम समाज की अभिरुचि बढी है। 2017 से 2022 तक ज्वाइन आरएसएस के माध्यम से संघ के पास 7 लाख 25 हजार निवेदन है। इनमें से अधिकतर 20 वर्ष से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवक हैं। स्वाभाविक ही अगर संघ ने लक्ष्य बनाया है तो उसका विस्तार होगा। इसका अर्थ यही हुआ कि संघ को लेकर विरोध करने वालों की टिप्पणियों से आम भारतीय अप्रभावित हैं क्योंकि वह जमीन पर उस तरह की तस्वीर नहीं देखते जैसा विरोधी आमतौर पर बनाते हैं। संघ के विरोधियों और समर्थकों दोनों के लिए प्रतिनिधि सभा से साफ संदेश हैं जिन्हें वे उसी रूप में लें तो सच्चाई समझ में आएगी और यही देश के हित में होगा। विरोध करने के लिए भी सच्चाई जानना और समझना आवश्यक है। जो है नहीं उसके आधार पर विरोध करेंगे तो जनता उसे स्वीकार नहीं करेगी। भारत के हित और प्रगति का लक्ष्य बनाकर जब आप लगातार काम करते हैं तो आपको सही समस्याएं और उसके निदान भी अनुभव के अनुसार समझ आने लगते हैं। यह सामान्य बात नहीं है कि 1925 की स्थापना से लेकर आज तक हजारों लोगों ने संघ कार्य के लिए अपना घर द्वार त्याग कर जीवन लगा दिया और यह प्रक्रिया आज तक चल रही है। ऐसी स्थिति दूसरे किसी संगठन की नहीं। यही कारण है कि विरोधियों के विरोध से उसकी गतिविधियां दुष्प्रभावित नहीं होती। प्रतिनिधि सभा से भी यही संदेश निकला कि किसी विरोधी टिप्पणी या अन्य राजनीतिक घटनाओं से अप्रभावित रहते हुए सतत् अपने लक्ष्य की दृष्टि से ही कार्ययोजनाएं बनाकर काम करते रहना है। 

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल -98110 27208

मंगलवार, 14 मार्च 2023

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