मंगलवार, 7 फ़रवरी 2023

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2023

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ग्राम पंचायत का फिटनेस सेंटर

दिलीप यादव

सरायरंजन/समस्तीपुर:ये है सरायरंजन प्रखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत राज गंगसारा स्थित उच्च विद्यालय में बना फिटनेस सेंटर यूं तो यह फिटनेस सेंटर बना था पंचायत के लोगों को स्वस्थ बनाने के लिए लेकिन पंचायत के लोगों का तो फिटनेस नहीं बन पाया बस पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधि लोगों का फिटनेस जरूर बना। फिलहाल फिटनेस सेंटर का ही सेहत दुरुस्त नहीं है। अब तो इसे भ्रष्टाचार कहना बेवकूफी होगी क्योंकि अब यह शिष्टाचार बन गई है। लोग तो व्यर्थ ही भ्रष्टाचार कहकर बदनाम करते हैं अब तो ये लोगों की आदत सी बन गई है,लोगों का व्यवहार सा बन गया है। लाखों की लागत से बना यह फिटनेस सेंटर अपनी बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रही है लेकिन कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि इस योजना की खैरियत भी पूछने नहीं जा रहे हैं,ऐसे में खुद फिटनेस सेंटर अपना दुःख दर्द बयां कर रही है। “मैंअपने गांव का फिटनेस सेंटर हूं,मेरा जन्म यही कोई चार पांच महीना पहले भ्रष्टाचार की गली में हुई है। मेरी माता का नाम कल्याण है और पिता का नाम श्री विकास योजना है। मेरे परम हितैसी भ्रष्टाचार चाचा के सामने में मैने जन्म लिया,हमारे नर्स पदाधिकारी बहन तथा जनप्रतिनिधि कंपाउंडर ने मुझे इसी हालत में छोड़कर चले गए। मेरा जन्म पंचायत रूपी अस्पताल में हुआ है।" हे पार्थ तुम कहां हो बेजुबान बोल रहा है और बोलने वाले मुंह पर नोट साटकर बैठे हैं। कुछ तो शर्म कीजिए आपलोग। बहरहाल मैं ज्यादा बातें नहीं बनाते हुए मुद्दे की बात बतला दूं की चार पांच महीने पहले ग्राम पंचायत के योजना से प्रत्येक पंचायत में फिटनेस सेंटर लगाई गई जिसमें लाखों रुपए खर्च किए गए जो अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। पदाधिकारी भी सो चुके हैं और जनप्रतिनिधि लोग तो घोड़ा बेचकर सो गए हैं।

 










बुधवार, 1 फ़रवरी 2023

बीबीसी डॉक्युमेंट्री की मंशा को समझें

अवधेश कुमार


बीबीसी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को देखने और दिखाने पर उतारू लोग क्या पाना चाहते हैं समझ से परे है। वैसे इसके दिखाने के लिए जिद पर सामने आने वालों की संख्या अत्यंत कम है। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या इंडिया :द मोदी क्वेश्चन की विषयवस्तु को लाने के पीछे कोई अच्छा उद्देश्य हो सकता है? बीबीसी ने कहा है कि इसमें नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय संघ स्वयंसेवक संघ  से लेकर भाजपा में आने, मुख्यमंत्री बनने और प्रधानमंत्री तक की सफर का विवरण है। सच यह है कि सबसे ज्यादा चर्चा गुजरात दंगों की है। गुजरात दंगों के 20 वर्ष हो गए। भारत का आम आदमी उससे बाहर निकल निकल चुका है। बावजूद इस रूप में फिल्माने का क्या उद्देश्य हो सकता है?

•बीबीसी का कहना है कि ब्रिटिश विदेश मंत्रालय से उन्हें एक रिपोर्ट मिली जिसको आधार बनाकर इसका निर्माण किया है।

•डॉक्यूमेंट्री का एकमात्र थीम यही है कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात में हिंसा के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार थे। डॉक्यूमेंट्री  नरेंद्र मोदी को हिंसा का प्रायोजक व संरक्षक दोनों बताता है।

• इस तरह डॉक्यूमेंट्री का प्रत्यक्ष उद्देश्य यह साबित करना है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार, भाजपा आदि ने योजनाबद्ध तरीके से मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा कराई और की।

क्या किसी डॉक्यूमेंट्री का ऐसा स्वर पहली बार है? क्या इसे स्वीकार किया जा सकता है?

• प्रतिबंधित होने के कारण मैंने डॉक्यूमेंट्री नहीं देखी है। विदेश में देखने वाले जिन लोगों ने जानकारी दी उसके आधार पर कहा जा सकता है कि इसमें नया कुछ भी नहीं है।

• पहले स्वयं बीबीसी, अनेक विदेशी और यहां तक कि भारतीय मीडिया संस्थानों ने ऐसी रिपोर्ट और डॉक्यूमेंट्री न जाने कितनी बार दिखाई। सबमें मिलाजुला कर यही बातें थीं।

• डॉक्यूमेंट्री की थीम को पुष्ट करने के लिए जिन लोगों के वक्तव्य लिए गए हैं वे सब संघ ,भाजपा, मोदी के विरुद्ध पहले से झंडा उठाए हुए हैं।

जहां तक इसे स्वीकार करने की बात है तो …

•एक, पिछले वर्ष जून में उच्चतम न्यायालय ने गुजरात दंगों पर अपने अंतिम फैसले में स्पष्ट लिखा है कि हिंसा के पीछे सरकार की सुनियोजित साजिश या भागीदारी का रंच मात्र सबूत नहीं मिलता।

• दो, दंगों की छानबीन के लिए उच्चतम न्यायालय की मॉनिटरिंग में गठित विशेष जांच दल या सिट ने 8 फरवरी, 2012 की अपनी अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी या सरकार की साजिश या हिंसा में सुनियोजित भूमिका के किंचित भी प्रमाण नहीं मिले हैं।

• तीन, उच्चतम न्यायालय में इसी के विरुद्ध याचिका दायर हुई थी। न्यायालय ने सिट की भूमिका को सराहा और कहा कि इसको अस्वीकार करने का कोई आधार नहीं है।

इस तरह यह डॉक्यूमेंट्री उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरुद्ध है। इस कारण यह शीर्ष न्यायालय की विश्वसनीयता और साख को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश है। प्रश्न है कि सिट और उच्चतम न्यायालय से परे बीबीसी को ऐसे तथ्य कहां से मिल गए जिनसे उसे हिंसा तत्कालीन गुजरात सरकार द्वारा नियोजित व संरक्षित लगता है? जब भी ऐसी डॉक्यूमेंट्री, रिपोर्ट आदि को भारत विरोधी और देश की एकता अखंडता को प्रभावित करने वाला कहा जाता है तो पूछा जाता है कि आखिर मोदी, संघ और भाजपा का विरोध भारत विरोध कैसे हो गया?

•एक,पिछले दो दशक में भारत में हुए आतंकवादी हमलों में पकड़े गए आतंकवादियों में से अनेक ने यही कहा कि उन्हें गुजरात दंगों के जो वीडियो दिखाए गए उनसे गुस्सा पैदा हुआ कि यहां मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है और वे हिंसा के लिए तैयार हुए।

• दो,ऐसी अनेक रिपोर्ट हैं जिनमें भारत सहित विश्व भर में अतिवादी जिहादी तत्वों के बीच गुजरात दंगों की एकपक्षीय तस्वीरें पेश कर उन्हें भारत विरोधी बनाया गया।

• तीन,यह डॉक्यूमेंट्री भी ऐसे समूहों के बीच पहुंचा होगा जो वर्तमान भारत सरकार को इस्लाम और मुसलमानों का दुश्मन बना कर प्रचारित करेंगे। वैश्विक जिहादी आतंकवाद को देखते हुए अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत के लिए पहले से व्याप्त खतरे में कितनी वृद्धि होगी।

• चार, स्वयं भारत में अतिवादी तत्व ऐसा दुष्प्रचार कर रहे हैं जिस कारण तन से जुदा के नारे लगे और जुदा हुए।

अगर डॉक्यूमेंट्री के तथ्यों और आरोपों में सच्चाई होती तब भी इसे प्रचारित करने से पूर्व सौ बार सोचने की आवश्यकता थी, जबकि यह सच्चाई से परे है। डॉक्युमेंट्री में रिपोर्ट लिखने वाले एक कूटनीतिक कह रहे हैं कि हमारी जांच के निष्कर्ष सही हैं। हिंसा में 2000 लोग मारे गए थे और मोदी उसके लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार थे।

•यह रिपोर्ट तत्कालीन ब्रिटिश विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ के आदेश का हिस्सा थी।

•कहा गया है कि हिंसा का विस्तार मीडिया में आई रिपोर्टों से कहीं अधिक था और दंगों का लक्ष्य मुसलमानों को खदेड़ कर बाहर करना था।

• जैक स्ट्रा कह रहे हैं कि यह बहुत ही हैरान करने वाली रिपोर्ट थी। यह बहुत ही गंभीर दावा था कि मुख्यमंत्री मोदी ने पुलिस को पीछे रख कर और हिंदू चरमपंथियों को शह देकर एक सक्रिय भूमिका निभाई थी।

बीबीसी का वक्तव्य है कि इस डॉक्यूमेंट्री के लिए उच्चतम संपादकीय मानकों का पालन करते हुए गहन रिसर्च किया गया है। प्रश्न है कि क्या गुजरात में भारतीय जांच एजेंसियों न्यायालयों आदि से ज्यादा पहुंच ब्रिटिश तंत्र की थी? इस डॉक्यूमेंट्री के आरंभ के कुछ मिनट में ही गोधरा रेल दहन के बारे में कहा गया है कि इसकी पीछे किसकी भूमिका थी यह अभी भी विवादित है और मुसलमानों पर इसका आरोप लगाया गया।  न्यायालय ने उनके दोषियों को सजा तक दे दी और सारा मामला कानूनी दृष्टि से भारत में बिल्कुल साफ हो गया। फिर ऐसी टिप्पणी का क्या अर्थ है? दूसरे दंगों में 2000 नहीं बल्कि कुल 1040 लोग मारे गए थे जिनमें मुसलमानों की संख्या 750 के आसपास थी। शेष हिंदू और पुलिस वाले थे। दंगा सरकार द्वारा प्रायोजित थी तो इतनी संख्या में हिंदू और पुलिस के लोग कैसे मारे गए? उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में दंगों में सरकार और मोदी की भूमिका साबित करने के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ने वालों के विरुद्ध जांच करने की अनुशंसा यूं ही नहीं की है।

गुजरात दंगा या ऐसे दूसरे दंगे हम पर शर्मनाक धब्बा हैं, पर पिछले किंतु पिछले 20 वर्षों से इस तरह प्रचारित किया गया मानो इसके पहले और बाद में भारत और दुनिया में दंगे हुए ही नहीं हो। ब्रिटेन ही कई दंगों की मार झेल चुका है। भारत के मीडिया ने कभी वहां की सरकार को इसके लिए खलनायक नहीं बनाया।

यह प्रश्न भी उठता है कि उस समय की रिपोर्ट जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया वह अचानक बाहर कैसे आ गई? जैक स्ट्रा और ऐसे दूसरे अनेक ब्रिटिश राजनीतिक मानवाधिकारों से लेकर हिंदू-मुस्लिम संबंधों यहां तक कि भारत में सिखों को लेकर भी दुष्प्रचार अभियान में हमेशा शामिल रहे हैं।

इसलिए यह न मानने का कोई कारण नहीं है कि इस रिपोर्ट को बहुआयामी नकारात्मक उद्देश्यों की दृष्टि से बीबीसी को लीक कर डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इनमें भारत के अंदर सांप्रदायिक शांति बिगाड़ने ,9 राज्यों के विधानसभा चुनाव तथा अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ भारत के विदेशी संबंधों को प्रभावित करने की मंशा हो सकती है। ब्रिटेन और भारत सहित दुनिया भर में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो संघ, भाजपा और तत्काल नरेंद्र मोदी को लांछित करने, उनके विरुद्ध जनता के अंदर आक्रोश पैदा करने तथा विश्व भर में उनकी छवि को कलंकित करने के लिए किसी सीमा तक जा सकते हैं।  हालांकि इनकी समस्या यह है कि उन मुद्दों पर दुष्प्रचार करते हैं जिनका लाभ भाजपा और तत्काल मोदी को मिलता है। क्योंकि यह झूठ एवं एकपक्षीय होता है इसलिए देश का बहुमत कभी इसे स्वीकार नहीं करता। जो विचारधारा किसी मजहब के विरुद्ध नफरत और हिंसा पर आधारित होगी उसे इतने लंबे समय तक जनता का समर्थन नहीं मिल सकता। 2002 से 2014 तक लगातार गुजरात दंगों को लेकर सघन अभियान चले और इसका लाभ भाजपा एवं मोदी को मिला। इसलिए ज्यादा संभावना इसी बात की है कि वर्तमान डॉक्यूमेंट्री चुनावों में भाजपा को क्षति की बजाय लाभ पहुंचा सकते हैं । चुनावी लाभ हानि से परे यह प्रश्न बड़ा है कि आखिर कौन शक्तियां है जो भारत में शांति, स्थिरता और सामाजिक सद्भाव तथा विश्व में भारत का बढ़ता कब सहन नहीं कर पा रही?

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -1100 92, मोबाइल -98110 27208



सोमवार, 30 जनवरी 2023

31-01-2023 To 06-02-2023(15.38)









 

डेसू मजदूर संघ की पहाड़गंज डिवीजन ने स्वागत सम्मान समारोह आयोजित किया

मो. रियाज

नई दिल्ली। बीवाईपीएल व बीआरपीएल बिजली कम्पनी में कई हजार बिजली कर्मचारी हैं जो किसी न किसी रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। डेसू मजदूर संघ बीवाईपीएल व बीआरपीएल में कार्य करने वाले मजदूरों के हक की आवाज उठाने के लिए कार्य करती है चाहे वह कर्मचारी आउटसोर्स पर ही काम क्यों नहीं करता हो। आऊटसोर्स कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो उसके लिए डेसू मजदूर संघ ने आऊटसोर्स के कर्मचारियों में से ही योग्य व्यक्तियों की एक टीम प्रत्येक डिवीजन में बनाई है। प्रत्येक डिवीजन में चुने हुए पदाधिकारी आउटसोर्सिंग स्टाफ की परेशानी को दूर करने में हरसंभव मदद करते हैं।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर डेसू मजदूर संघ की पहाड़ गंज डिवीजन में भव्य स्वागत सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस भव्य स्वागत सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव थे। इस अवसर पर पहाड़गंज डिवीजन की ओर से डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव का फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया गया। इनके अलावा आउटसोर्स अध्यक्ष, अशोक कुमार, आउटसोर्स महामंत्री ऋषिपाल, आउटसोर्स संगठन मंत्री सैनतुल त्यागी, आउटसोर्स सर्कल चेयरमैन दिनेश कुमार, आउटसोर्स ज्वाइंट सेक्रेट्री अब्दुल रज्जाक खान, वीर सिंह राणा, युवराज, शोएब खान इत्यादि का भी फूलमालाओं से स्वागत किया गया।
इस अवसर पर डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी को एक दूसरे की मदद के लिए हमेशा खड़ा रहना चाहिए ताकि किसी भी साथी को ऐसा न लगे कि वह अकेला है। हम सभी एक-दूसरे की परेशानी में साथ हैं और जिन लोगों को यहां जिम्मेदारी मिली हुई वह अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि आप लोग ऐसे ही काम करते रहेंगे।
यह स्वागत समारोह डेसू मजदूर संघ पहाड़गंज डिवीजन के बाबू लाल (सर्किल चेयरमैन), पप्पू झा (डिस्ट्रिक सेकेट्री, पहाड़गंज), शास्त्री यादव (चेयरमैन, पहाड़गंज), अरूण झा (जोनल सेकेट्री, पहाड़गंज), देवेन्द्र कुमार (जोनल सेकेट्री, पहाड़गंज), बिश्मबर झा (जोनल सेकेट्री, पहाड़गंज), श्याम कुमार (जोनल सेकेट्री, पहाड़गंज), दुर्वेश शर्मा (जोनल सेकेट्री, पहाड़गंज), डिस्ट्रीक यूनियन मेम्बर- श्रवण मंडल, लखन साह, सुधीर कुमार, शिन्टू कुमार,  संतोष कुमार, धर्मेन्द्र झा, मनीष झा आदि की देखरेख में किया गया।























 
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