शुक्रवार, 4 नवंबर 2022

मोरबी त्रासदी से सबक ले देश

अवधेश कुमार

गुजरात के मोरबी पुल की त्रासदी ने पूरे देश को हिला दिया है। इस घटना की कल्पना से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मच्छु नदी पर बनाया सस्पेंशन ब्रिज यानी झूलने वाला  पुल पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा कारण था। लेकिन कौन जानता था वहां पहुंचे लोगों में बड़ी संख्या के लिए अंतिम दिन होगा। पुल टूटा और नीचे नदी में 15 फीट के आसपास पानी था, जिसमें लोग  डूबते चले गए। किसी भी त्रासदी में दो सौ लोगों का अंत हो जाना सामान्य घटना नहीं होती। गुजरात जैसे प्रदेश में जहां बचाव और राहत की मजबूत टीमें है वहां इतनी संख्या में लोगों की मृत्यु बताती है की घटना कितनी विकराल थी। वहां एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ तैराकों, दमकलों व वायु सेना के कमांडो ,रेस्क्यू नावेंआदि सब कुछ होने के बावजूद दूसरे दिन भी लापता लोगों का पता नहीं लग सका और इस कारण मृतकों की संख्या बताना कठिन हो गया। रात्रि में बचाव ऑपरेशन करना लगभग मुश्किल था। राजकोट के भाजपा सांसद मोहन कुंदरिया के परिवार के 12 लोगों की जान इसमें चली गई । पता नहीं और ऐसे कितने परिवार होंगे जिनके लिए यह संपूर्ण जीवन भर के लिए त्रासदी साबित होगी।

 ध्यान रखिए कि यह प्राकृतिक आपदा नहीं है। न बाढ आया न तूफान और निरपराध लोग जान गंवा बैठे। पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी वाले ओरेवा ग्रूप पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो गया है। जांच के लिए समिति भी बना दी गई है। कहा जा सकता है कि अंतिम निष्कर्ष के लिए समिति की रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जानी चाहिए। निस्संदेह, इस समय आप किसी भी कारण को खारिज नहीं कर सकते। देश विरोधी ताकतें जिस तरह हिंसा और दुर्घटना पैदा करने के लिए षड्यंत्र कर रहे हैं उसमें चुनाव वाले गुजरात जैसे संवेदनशील प्रदेश में शंका की उंगली उठना बिलकुल स्वाभाविक है। आखिर ये शक्तियां भीड़भाड़ वाले जगहों पर अपने तरीके से ऐसी कोशिश करती हैं जिनमें ज्यादा से ज्यादा लोग हताहत हो। हालांकि अभी तक ऐसा कोई पहलू नहीं दिखा जिससे षड्यंत्र नजर आए। अभी तक की जानकारी इतनी है कि फुल कमजोर था। दुर्घटना के पहले के वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग उसके केबल के कमजोर होने का मजाक उड़ा रहे हैं। कुछ उसको हाथ पैरों से मार रहे हैं। कोई कह रहा है कि देखो यह कितना कमजोर है जो कभी भी टूट सकता है। करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना पुल कमजोर और जोखिम भरा था तभी मरम्मत के लिए 6 महीना पहले बंद कर दिया गया था। ओरोवो ग्रुप ने इसकी मरम्मत की तथा 26 अक्टूबर को आम लोगों के लिए खोला गया। यानी 4 दिन पहले खुला और पांचवें दिन 30 अक्टूबर को शाम को पुल टूट गया। यह कैसे संभव है कि एक मान्य कंपनी पुल की मरम्मत में इतनी कोताही बरते कि वह 4 दिन भी न चल पाए? वहां के नगर निगम का कहना है कि उस पुल की क्षमता 100 लोगों की है लेकिन 500 से 1000 के आसपास लोग उस पर इकट्ठे थे। 765 फीट लंबा यह पुल केवल 4.5 फीट चौड़ा है। जाहिर है, यह जिस काल में बनाया गया उस समय के लिए उपयुक्त हो सकता है। बावजूद इतने लंबे पुल के लिए केवल 100 लोगों की क्षमता और वह भी आज की स्थिति में जब तबसे जनसंख्या वृद्धि कई गुनी हो चुकी है बताता है कि संख्या की दृष्टि से वह जो कौन था। आम हालांकि लोगों का कहना है कि बंद होने के पहले भी पुल पर काफी संख्या में लोग रहते थे ,बहुत दिनों के बाद पुल खुला था इस कारण भी संख्या ज्यादा थी। साथ ही छठ पूजा होने के कारण भी लोग चले आए थे। तो पहला कारण यही नजर आता है कि संख्या से ज्यादा लोगों के खड़े होने के कारण फूल वजन नहीं सह सका और टूट गया। तो निर्धारित संख्या से ज्यादा लोग आए क्यों? चश्मदीद बता रहे हैं कि कुछ लोग को हिला रहे थे और उसकी शिकायत कर्मचारियों से की गई लेकिन वे टिकट काटने में व्यस्त रहे। वास्तव में अगर कारण वही है जो अभी दिख रहा है तो कहा जा सकता है कि निर्धारित संख्या तक ही टिकट काटा जाता तथा समय सीमा तय कर लोगों को बाहर निकाल कर फिर नए लोगों को प्रवेश कराया जाता तो यह हादसा नहीं होता। इतने पुराने पुल पर तय संख्या से ज्यादा टिकट काटकर लोगों को जाने दिया गया। यह तो दुर्घटना को निमंत्रण देने जैसा व्यवहार था।

हादसे के बाद का वीडियो दिखा रहा है कि पुल टूटने के बाद लोग उस भाग में भी बचने के लिए छटपटा रहे हैं जो पानी में जा रहा है। लोग पुल पर फंसे हुए हैं लेकिन उनके तात्कालिक बचाव के लिए कोई उपाय नहीं है। जाहिर है , इस तरह का कोई हादसा हो सकता है इसकी कल्पना न किए जाने के कारण तात्कालिक बचाव और राहत के पूर्वोपाय नहीं किए गए थे। नगर निगम और ओरोवा कंपनी दोनों को इसका जवाब देना चाहिए। नगर निगम का तर्क है कि फिटनेस सर्टिफिकेट लिए बिना ही रुको कंपनी ने चालू कर दिया। यह हैरत की बात है कि नगर निगम की सहमति के बगैर केवल  कंपनी ने पुल को खोल दिया होगा। स्पष्ट है कि मोरबी के अधिकारी सच नहीं बोल रहे। मेंटेनेंस करने वाली कंपनी को यह अधिकार नहीं होता कि वह जब चाहे पुल बंद कर दे और जब चाहे खोल दे। कंपनी प्रशासन को रिपोर्ट दे सकती है और फैसला प्रशासन का ही होता है। अगर इसके पीछे कोई षड्यंत्र नहीं है तो कंपनी के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन व नगर निगम को भी इसके लिए उत्तरदायी मानना होगा। आखिर इतने लोगों की जान चली जाए, सैकड़ों परिवार तबाह हो जाएं, अनेक बच्चे अनाथ तथा महिलाएं विधवा व पुरुष विधुर हो जाएं और उसके लिए केवल मेंटेनेंस करने वाली कंपनी को जिम्मेवार मानना एकपक्षीय फैसला होगा।

इस घटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में भी देखने की आवश्यकता है। यह पुल 20 फरवरी 1879 को जनता के लिए खोला गया था। तब मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेंपल ने इसका उद्घाटन किया था। यह सामान यातायात का मुख्य फूल नहीं था। लेकिन हमारे देश में सामान्य यातायात वाले प्राचीन पुलों की संख्या बहुत ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि किसी की मरम्मत नहीं होती। समय-समय पर अनेक पुलों की मरम्मत होती रहती हैं। बावजूद आप देखेंगे कि ऐसे पुलों की संख्या हजारों में है जिनको देखने से ही लगता है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हम आप जान जोखिम में डालकर उस पर चलते हैं। गाड़ियां चलती हैं। यही नहीं उसके बाद के और हमारे आपके समय के बने हुए भी हजारों पुलों, फुटओवर ब्रिजों, फ्लाई ओवरों, सब पर नजर दौड़ाई जाए तो अनेक हादसे की स्थिति में जाते हुए दिखेंगे। राजधानी दिल्ली में ऐसे कई फुट ओवरब्रिज हैं, जो कभी भी बड़े हादसे के कारण बन सकते हैं। वास्तव में पुलों, फुटओवरब्रिजों, पैदल पार पथों आदि को लेकर संबंधित विभाग को जितना सतर्क और चुस्त होना चाहिए वह प्रायः नहीं दिखता। जब  बड़ी घटनाएं होती हैं तो हाय तोबा मचता है लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति।कोई उससे सबक लेकर अपने यहां के पुलों की समीक्षा नहीं करता।

जाहिर है, मोरबी त्रासदी पूरे देश के लिए चेतावनी होनी चाहिए। हर श्रेणी के पुलों तथा फ्लाई ओवरों की गहन समीक्षा होनी चाहिए। सभी राज्य इसके लिए आदेश जारी कर एक निश्चित समय सीमा के अंदर समीक्षा रिपोर्ट मंगवाए और उसके अनुसार जहां जैसी मरम्मत या बदलाव की जरूरत हो वो किया जाए। समीक्षा हो तो ऐसी अनेक पहलें निकलेंगे जिन्हें तत्काल बंद करने का ही विकल्प दिखाई देगा। कुछ ऐसे पुल हैं जिन्हें तोड़कर नए सिरे से बनाना होगा। समस्या को टालने से वह और विकराल होता है। जो समस्या सामने है उनका समाधान भविष्य का ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। मोरबी त्रासदी ने हम सबको झकझोरा है लेकिन अगर देश ने इसे सबक नहीं लिया तो ऐसी त्रासदी बार-बार होती रहेंगी। स्वयं मोरबी और राजकोट प्रशासन को आगे यह निर्णय करना होगा कि पुल को रखा जाए या नहीं और नहीं रखा जाए तो इसका विकल्प क्या हो सकता है। 

अवधेश कुमार, ई -30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल- 98910 27208

मंगलवार, 1 नवंबर 2022

साईं दाता रहबर ने जीवों का उद्धार किया, कर रहे हैं और करते ही रहेंगे: पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां

 - आनलाइन गुरुकुल माध्यम से पूज्य गुरु जी ने छुड़वाया लाखों का नशा और बुराईयां

- पूज्य गुरु जी ने डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक शाह मस्ताना जी महाराज के अवतार माह की दी बधाई

- विश्वभर में करोड़ों डेरा श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन किये पूज्य गुरु जी के नूरानी दर्शन

- साईं जी ने ऐसा राम-नाम का बाजा बजाया कि वो सारे नशे भाग गए और घरों के घर बन गए स्वर्ग: पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां

- रूहानी सत्संग में पूज्य गुरु जी ने बताई सच्चे दान की परिभाषा

- पूज्य गुरु जी ने हिंदु, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी धर्मो के नुमाइंदों को मिलकर नशे रूपी दैत्य को भगाने का किया आह्वान

संवाददाता

सिरसा/बरनावा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा से आनलाइन गुरुकुल के माध्यम से जुड़ी देश-विदेश की साध-संगत को बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन अवतार महीने की बधाई दी। पूज्य गुरु जी ने रूहानी सत्संग के दौरान सच्चा सौदा क्या है और साईं जी ने इसे किस बनाया है, के बारे में खुलकर बताया। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने पंजाब के जिला फिरोजपुर स्थित सैदे के मोहन नामचर्चा घर सहित अन्य स्थानों पर हजारों लोगों का नशा व सामाजिक बुराईयां छुड़ाकर उन्हें गुरुमंत्र प्रदान किया गया। वहीं सोमवार रात्रि यानी एक नंवबर को भी पूज्य गुरु जी बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के जन्म महीने के आगमन पर ऑनलाइन गुरुकुल पर लाइव हुए और समस्त साध-संगत को अवतार माह की बधाई दी। पूज्य गुरु जी ने साध-संगत को पूज्य बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन अवतार माह की बधाई देते हुए फरमाया कि आज वो महीना चढ़ा है, जिसकी वजह से सच्चा सौदा बना है। साईं दाता रहबर शाह मस्ताना जी महाराज ने इस महीने में अवतार लिया और जीवों का उद्धार किया, कर रहे हैं और करते ही रहेंगे। पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि साईं जी ने ऐसे-ऐसे घर जो नरक बन गए थे, जहां नशा बर्बादी का आलम था, जहां शराब की बोतले, तरह तरह के नशे बबार्दी की ओर ले जा रहे थे, घरों को बर्बाद कर रहे थे, उन्होंने (शाह मस्ताना जी महाराज) ऐसा राम-नाम की युक्ति बताई, उन्होंने ऐसा राम-नाम का बाजा बजाया कि वो सारे नशे भाग गए और वो घर फिर से स्वर्ग बन गए। तो ऐसे सच्चे साईं का जन्म महीना शाह मस्ताना जी दाता का आज शुरू हुआ है, तो सबको बहुत-बहुत हो, बहुत-बहुत आशीर्वाद। पूज्य गुरु जी ने कहा कि आप सब साईं जी के बताए गए वचनों को फॉलो करें। उन्होंने ने ही वचन किए थे, किए हैं और करते ही रहेंगे। क्योंकि करण करावन हार वो दाता रहबर शाह सतनाम, शाह मस्तान हैं। तो आप अमल किजिये, यकीन मानिए खुशियों का आलम जरूर आपके घरों में, आपके जिस्म में महसूस ही नहीं होगा बल्कि वो समाज का भला करेगा।

बरनावा- ऑनलाइन जुड़ी साध-संगत को संबोधित करते पूज्य गुरु जी व शाह मस्ताना जी महाराज के पावन अवतार महीने के आगाज पर केक काटते पूज्य गुरु जी। 

सच्चे दाता के उपकारों का ऋण चुकाया नहीं जा सकता - पूज्य गुरु जी ने कहा कि सच्चे दाता के रहमोकरम, सच्चे दाता के गुणों का बखान किया नहीं जा सकता और किए हुए पर उपकारों का ऋण नहीं चुकाया जा सकता। पूज्य गुरु जी ने कहा कि आप सोच के देखिए राक्षस बुद्धि को देव बुद्धि से भी आगे ले जाना इतना बड़ा चेंज और वो भी थोड़े से शब्द देकर करना, अपने आप में बेमिसाल, बेमिसाल है। दाता जी ने रहमोकर्म के मालिक ने जो समझाया, जो बताया उसी की चर्चा हम हमेशा करते रहते है और वो ही करवा रहे हैं, वो ही करवाते थे और वो ही करवाते रहेंगे।

सच्चे सौदे में छुड़ाया जाता है नशा - रूहानी सत्संग में पूज्य गुरु जी ने सच्चा सौदा क्या और इसका क्या मकसद क्या है? के बारे में बताते हुए फरमाया कि सच्चा ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम है। वो सच था, सच है और सच रहेगा, वो ना बदला था, ना बदला है और ना कभी बदलेगा। जिसे ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड कहा जाता है। इसलिए सच्चा का अर्थ हो गया परमात्मा और सौदा यानी बिजनेस, व्यापार। पूज्य गुरु जी ने कहा कि कौन सा सौदा? सौदे से लगता है सौदेबाजी चलती है। जी हां यहां कौन-सी सौदेबाजी चलती चलती है? के बारे में स्पष्ट करते हुए फरमाया कि सच्चा सौदा में आप अपने बुरे कर्म ले आओ, आप नशा रूपी जितनी बुराइयां करते हो, बुरी आदतें ले आओ, अरे अपने पाप गुनाह ले आओ और ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु की कृपा से शाह सतनाम, शाह मस्ताना की कृपा से यहां दे जाओ और बदले में अनमोल राम का नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड का नाम ले जाओ। घर में बैठकर उसका जितना आप जाप करते रहोंगे, उसे जितना लगाते रहोगे दिलो-दिमाग रूह पे, उतना ही चेहरे पर नूर आएगा। घर में बरकते आएगी। साथ में बिजनेस, व्यापार जो भी काम धंधा आप करते हो उनमें आपको और तरक्की हासिल होंगी। यानी ये सच्चा सौदा का सौदा है।

सच्चा संत दूसरों का भला करने के लिए करते हैं प्रेरित - पूज्य गुरु जी ने सच्चे दान के बारे में फरमाते हुए बताया कि सच्चा सौदा में और कोई चढ़ावा नहीं चढ़ाया जाता। क्या कोई यहां (सच्चा सौदा) पैसे की बात नहीं होती, जी जरूर होती है। जिसमें प्रेरित किया जाता है कि सच्चा दान कौन सा है। सच्चा सौदा यानी सच से ही शुरू करते है सच्चा दान कौन सा है। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हमारे सभी धर्मो में दान निकालने की पर्था है। हमारे संत, पीर, पैगंबर, गुरु, साहिबान और महापुरुषों ने समय के मुताबिक दान के रूप में कोई तीसरा, कोई सातवां, कोई दसवां, कोई पन्द्रवां हिस्सा निकालने की चर्चा करते हैं। उन्होंने सही और सच कहा है। हां समय के अनुसार इनका रेसों कम ज्यादा होता रहता है। लेकिन वो सच है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि आप जितना दान निकालते हैं उसे या तो अपने घर में रखों यहां फिर जो संत-सतगुरु पूर्ण हो और वो कहे कि फ्लां जगह लगाओ। वहीं पूज्य गुरु जी ने बताया कि जो संत पूर्ण होते हैं वो दान बेसहारों का आसरा बनाने में, दीन-दुखियों का इलाज कराने में, दुनियावीं ज्ञान के साथ राम-नाम से जोडऩे पर, नशेडिय़ों का नशा छुड़वाने पर या फिर ऐसी जगह बनाने पर खर्च कराते हैं जहां आकर बैठकर लोग राम-नाम गा सके।

इंसानियत की सच्ची सेवा करना सिखाते हैं डेरा सच्चा सौदा के 143 मानवता कार्य - पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि ठेके खुलते हैं और वहां कोई चर्चा ही नहीं होती, इसलिए ऐसी जगह खोलों जहां पर बैठकर राम-नाम का नशा हर कोई ले सकें। अल्लाह, वाहेगुरु के नाम का नशा ले सके, ऐसी जगह बनाओ। दूसरे शब्दों में पैसे को अपने घर में रखों या फिर संत-पीर फकीर ऐसा कहें या आप खुद देखों आपके इर्द-गिर्द कोई दुखी, परेशान, दर्द से तडफ़ता हुआ पशु, पक्षी, परिंदा या इन्सान मिल जाए पहले तौर पर जाकर उसका इलाज कराओ। दूसरा कोई बेटी है, आज के समाज के एकोर्डिंग, बड़ा अजीबो-गरीब समय आ रहा है। किसी के पास इतना पैसा नहीं है, मजबूर है कि बेटी की शादी नहीं कर पा रहा, जाओ उसकी मदद करके बेटी की शादी कराओ, कोई मजबूर है, अपने बच्चों को पढ़ाना चाहता है, लेकिन पैसा नहीं है, जाओ किताबे देकर,उसकी फीस भरके उसकी शिक्षा पूर्ण कराओ ताकि वो बच्चा अपने पैरों पर खड़ा हो और अपने घर का फैसला खुद करेगा। यानी वो पूरे घर को स्वर्ग बना देगा, वो पूरे घर को पार उतारा कराएंगा। पूरे घर का एक स्तंभ बन जाएगा। जिसके चलते उनको रोटी के लाले नहीं पड़ेंगे। इसलिए आपने एक को नहीं बल्कि पूरे घर को ही बदल के रख दिया थोड़ से दान से। इस तरह तो हमने 134 कार्य शुरू किए थे वो आज बढ़कर 143 हो चुके हैं। ये सारे कार्य उसी लिए बनाए गए है। वो सारे धर्मों से ताल्लुक रखते हैं। ताकि आपका फायदा हो।

सही जगह पर किया गया दान, आपके घर में लाता है सुख-समृद्धि  - पूज्य गुरु जी ने दूसरों का भला करने से इन्सान का खुद का कैसे फायदा होगा, के बारे में समझाते हुए फरमाया कि सही जगह पर अगर दान कर दिया जाए, तो वो पैसा कई गुणा बढ़के सुख, समृद्धि बनके घर में आता है, दया मेहर राम की लेकर आता है। पूज्य गुरु जी ने इसी पर उदारण देते हुए कहा कि अगर आपकी औलाद को कोई गाड़ी के नीचे आने से बचा ले और अगर आप एक अच्छे इन्सान हो तो उसे कहेंगे कि तूने मेरे बेटे को बचाया मैं पूरी उम्र तेरा कर्जदार हो गया। उसी प्रकार आपके बच्चे को जिसने बचाया उसके लिए इतनी भावना आ गई, अगर आप भगवान की औलाद को कोई न कोई सहयोग करोंगे, उसको बचाओगे तो क्या भगवान आदमी से कमजोर है। वो भी कोई कमी नहीं छोडेगा और खुशियों के ढेर लगा देगा। ये है सच्चा दान अगर कर सको।

आज सच बोलना अपने आप में बहुत बड़ा चेलेंज - पूज्य गुरु जी ने फरमाते हुए कहा कि सच बोलो, सच पे चलो और सच की पेरवाई करो। हालांकि सच बोलना आसान बात नहीं है। बच्चों के आगे इन्सान झूठ बोलता रहता हैं, मियां-बीवी एक-दूसरे के आगे झूठ बोलते रहते है। मां-बाप के सामने झूठ, मां-बाप बच्चों के आगे झूठ, कई तो इतना ठोकते हैं कि उन्हें यह नहीं पता चलता कि सच कौन-सा है। आज के दौर में सच बोलना अपने आप में एक बहुत बड़ा चेलेंज है। उसे कोई मालिक का प्यारा ही मंजूर कर सकता है, मालिक का प्यारा ही निभा सकता है। सच्चे सौदे में जिदंगी जीने का सही रास्ता सिखाया जाता है। इसके अलावा सच्चे सौदे में जीव हत्या नहीं करना, नशे नहीं करना सिखाया जाता है। साथ में बचपन में आप मालिक के नाम से जुड़ सकते है, सच्चे सौदे में यह सिखाया जाता है। ताकि वो एक ऐसा वट वृक्ष बन जाए। जिसकी खुशबू से पूरा समाज महक उठे।  

बचपन और जवानी में जो राम-नाम से जुड़ जाते है वो अव्वल दर्जे के भक्त कहलाते हैं -  पूज्य गुरू जी ने सच्ची जवानी क्या होती है, सच्चा बचपन क्या होता है के बारे में बताते हुए कहा कि बचपन में जो राम-नाम से जुड़ जाते हैं, जवानी में भी जो राम-नाम से जुड़ जाते है वो अपने आप में अव्वल दर्जे के भगत कहलाते हैं। वो समय बताता है,वो चाहे ध्रुव हो या प्रहलाद हो, जिनका नाम आज भी अमर है और अमर ही रहेगा। तो बचपन व जवानी की भक्ति सर्वोत्तम मानी जाती है। क्योंकि उस आयु में फिसलने का डर ज्यादा रहता है। हालांकि अब कलियुग आ गया है जिसमें तजुबेर्दार ज्यादा फिसल रहे हैं।

पूज्य गुरु जी बोले, हमें भारतीय होने पर गर्व - पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हम सभी को गर्व करना चाहिए कि हम भारतीय है, क्योंकि हमारा जैसा कल्चर जो हमारे सारे धर्मों और वेदों ने बताया, ऐसी सभ्यता, ऐसा कल्चर पूरी दुनिया में कहीं भी नही है। तो हमें गर्व होना चाहिए। पूज्य गुरु जी ने कहा कि हमें बेइंतहा गर्व है कि हम उस देश में जन्म लिया जिसकी संस्कृति नंबर वन पर है। हमने उस देश में जन्म लिया जिसमें पाक-पवित्र वेद पढ़े जाते है, सिखाए जाते हंै और जहां सारे धर्मो के पवित्र ग्रंथों की रचना हुई है। जो हमारे धर्मो को एक नई दिशा देने के लिए प्रहरी का काम ही नहीं एक महापुरुष का काम कर रहे है। गुरु,पीर, पैगंबर का काम कर रहे है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि लेकिन उन पवित्र वेद व धर्मों को कोई पढ़ नहीं रहा, उनपर कोई अमल नहीं कर रहा, इसलिए पीर-फकीर आते है और गुरु, पीरों, महापुरुषों की बात सुनाते है और सिखाते है कि हमारा धर्म क्या कह रहा है।

सच्चे सौदा में सिखाई जाती हैं, सच्ची बातें - पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि किसी भी धर्म में नहीं लिखा कि शराब पीयो, तंबाकू खाओ, ड्रग, चिट्टा-काला नीला, पीला जो भी आ गया है। सब नशे बर्बादी का घर हैं। ये सच्ची बात सच्चे सौदा में सिखाई जाती है। सच्ची बाते हैं, राम की बाते है, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड की बाते है और इसलिए ये कड़बी उन्हीं को लगती है जो नशे के व्यापारी है, जो ढोंग ढकोसला करता है,जो बुरे कर्म करता है, उसको लगता है कि मेरी सारी दुकानें बंद हो जाएगाी। सारे इसपे अमल करने लग गए, अगर सारे लोग अपने-अपने धर्मो को मानने लग गए तो फिर नशे की तो कोई जगह ही नही हैं। पूज्य गुरु जी ने कहा कि नशे को छुड़ाना ऐम है सच्चे सौदे का। क्यूं है ये ऐम, के बारे में बताते हुए कहा कि जो मालिक की औलाद है, वो सच्चे सौदे के संत-पीर फकीर की भी औलाद होती है। वैसे हर संत की औलाद होती है। क्योंकि भगवान को सबकुछ मानता है, उसकी जितनी भी औलाद है, सृष्टि में जितने भी आदमी, इन्सान, पशु, पक्षी यानी जितने भी लोग है, जितने भी जीव-जंतु है सारे भगवान की औलाद है। इसलिए नैचुरली संत की औलाद हो गए। हमे बहुत दर्द होता है कि हमारी औलाद राम-नाम का नशा छोड़कर गंदगी खा रही है। जब हमारे बच्चे नशा छोड़कर जाते है तब हमें खुशी मिलती है। इसलिए सच्चा सौदा में सच्चा नशा राम-नाम का दिया जाता है और गंदे नशे को छुड़ाया जाता है।

सभी धर्म दया, दीनता, नम्रता और दया करके क्षमा करना सिखाते हैं - पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि हम हिंदु, मुस्लिम, सिख, इसाई यानी सभी धर्म के नुमाइंदों से आह्वान करते हैं कि हम सभी मिलकर चलते हैं कि पहले समाज को तो गंदगी रूपी नश से साफ कर लें, बाकी की बातें बाद में कर लेंगे। एक बार हम नशा छुड़ाए, एक बार हम निंदा-चुगली छुड़ाए, एक बार हम मांसाहार छुड़ाए, जो बुरा है। जिसका धर्मों में कहीं जिक्र नहीं है। सारे मिलकर चलिए। हम सारे धर्मों का बेहद सत्कार करते हैं और धर्मों को मानने वालों को हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे हैं। पूज्य गुरु जी ने कहा कि हम किसी धर्म वाले को हुक्म नहीं दे रहें, बल्कि प्रार्थना कर रहे हैं। मगर हमारे धर्म हमें हुक्म कर रहे हैं, हमारे गुरु, पीर पैगंबर हुक्म दे रहे हैं। क्योंकि कई जगह तो उनके (गुरु साहिबानों) पालतु जीव जंतुओं ने भी नशे की तरफ मुंह तक नहीं किया था। गुरु साहिबानों और महापुरुषों के जो भी भगत है, संत, पीर पैंगबर के जो भी भक्त हैं हम हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं कि चलिए, उठिए हम सब मिलकर इस नशे रूपी दैत्य को भगा दें। ताकि अपना समाज स्वस्थ हो जाए और अपना धर्म पवित्र हो जाए। तथा हर कोई धर्म के गीत गाए। ना की घर-घर नशे की चर्चा हो। पूज्य गुरु जी ने कहा कि घर-घर राम-नाम की चर्चा हो, घर-घर अल्लाह, गॉड की चर्चा हो। हमारा काम प्रार्थना करना है। ना कि किसी को हुक्म देना है। हुक्म तो हम उस परम पिता परमात्मा का मानते हैं।

सतगुरु शाह सतनाम, शाह मस्ताना दाता जो जैसे चला रहे हैं। आपके सब के लिए चाहे वो छोटा हो या बड़ा हो हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि हम सब इस राक्षस को जो दैत्य है नशे के रूप में और पूरे समाज में फैलता जा रहा है, हमारी जवानियों को, हमारे बच्चों को, छोटे-छोटे नन्हें-नन्हें बचपन है उनको खत्म करता जा रहा है। तो चलिए, उठिए जागिए और इसको रोकिए। यहीं आप से प्रार्थना है और साईं जी का यही सच्चा सौदा है। यहां पर दया, दीनता, नम्रता, दया करके क्षमा करना यह सिखाया जाता है। यहां कभी किसी को किसी का बुरा करने की प्रेरणा तो दूर कल्पना करना भी नहीं सिखाया जाता। ये है साईं शाह सतनाम, शाह मस्तान जी का सच्चा सौदा।

शनिवार, 29 अक्टूबर 2022

हंगर इंडेक्स त्रुटिपूर्ण

अवधेश कुमार

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) रिपोर्ट स्वीकार कर लें तो मानना पड़ेगा एक देश के नाते हम स्वयं को भले भविष्य की महाशक्ति घोषित करें पोषण के मामले में हमारी स्थिति उन देशों से भी खराब है जिनकी संसार में कोई हैसियत नहीं। इस रिपोर्ट में भारत को कुल 121 देशों में 107वें क्रम पर रखा गया है। लेकिन क्या यह रिपोर्ट वास्तविकता को दर्शाने वाली है? ध्यान रखिए भारत को उत्तर कोरिया, इथियोपिया, सूडान, रवांडा, नाइजीरिया और कॉन्गो जैसे देशों से भी पीछे रखा गया है। आप नरेंद्र मोदी सरकार या राज्यों की भाजपा सरकारों के चाहे जितने बड़े आलोचक हो क्या इसे स्वीकार कर लेंगे कि हमारा देश इन देशों से भूख सूचकांक के मामलों में पीछे हैं? निश्चित रूप से इस रिपोर्ट से भारत की छवि धूमिल हुई है। हमारे देश की समस्या है कि गहराई से तथ्यों और आंकड़ों के छानबीन की जगह आनन-फानन में राजनीतिक सोच के अनुसार प्रतिक्रियाएं दे दी जाती है। अगर आप पूरी रिपोर्ट को ठीक से पढ़ें और उसमें देखें कि इनके आंकड़ों का स्रोत क्या है ,इन्होंने गणना कैसे की है और देशों का क्रम कैसे निर्धारित हुआ है तो आप इस रिपोर्ट को अस्वीकार करने के लिए सहज ही तैयार हो जाएंगे।

जीएचआई रिपोर्ट दो एनजीओ आयरलैंड की कन्सर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी की वेल्थुंगरहिल्फे मिलकर तैयार करते हैं । यह तो नहीं कह सकते कि ये दोनों अप्रामाणिक हैं और इनका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। किंतु इसके पहले इनके कई कार्यों पर प्रश्न खड़े हुए हैं। इन्होंने जानबूझकर भारत को नीचा दिखाने के लिए ऐसा किया है या नहीं इस पर निश्चित रूप से दो राय हो सकती है। 60 पृष्ठों के पीडीएफ दस्तावेज की तस्वीरें, रंग आदि इतने आकर्षक हैं कि कोई भी इस पर मुग्ध हो जाए। किंतु क्या इतनी ही आकर्षक इसकी रिपोर्ट के तथ्य और रैंकिंग भी हैं? इस सूचकांक को बनाने के लिए इन्होंने 3 डायमेंशन के 4 पैमानों को आधार बनाया है । अंडरनरिशमेंट यानी एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर के लिए जरूरी कैलोरी नहीं मिलना। इसे हम कुपोषितों की संख्या कह सकते हैं। बाल मृत्यु दर यानी एक हजार जन्म पर 5 वर्ष की उम्र के भीतर मृत्यु के को प्राप्त होने वाले बच्चों की संख्या। चाइल्ड अंडरन्यूट्रिशन यानी पांच वर्ष के ऐसे बच्चे जिन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। चाइल्ड अंडरन्यूट्रिशन में दो श्रेणी हैं- चाइल्ड वेस्टिंग और चाइल्ड स्टंटिंग। चाइल्ड वेस्टिंग यानी 5 वर्ष के बच्चे का अपनी उम्र और कद के हिसाब से बहुत दुबला या कमजोर होना। दर्शाता है कि उन बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिला इस वजह से वे कमजोर हो गए। चाइल्ड स्टंटिंग का मतलब ऐसे बच्चे जिनका कद उनकी उम्र के लिहाज से कम हो। कद का संबंध पोषण से माना गया है। इन तीनों आयामों को बराबर अंश के अनुसार 100 पॉइंट का स्टैंडर्ड स्कोर दिया जाता है।  स्कोर स्केल पर 0 सबसे अच्छा स्कोर होता है और 100 सबसे खराब। भारत का स्कोर 29.1 है। इसे गंभीर स्थिति कहा गया है। पाकिस्तान का स्कोर 26.1 है और वह भी 'गंभीर' स्थिति में है। बांग्लादेश का स्कोर 19.6, नेपाल का 19.1 और श्रीलंका का 13.6 है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत की 16.3% आबादी अत्याधिक कुपोषित है। 19.3% से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनके कद के हिसाब से कम है। 35.5% बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से काम कद के हैं।

इनके चार मानकों में से तीन तो बच्चों से जुड़े हुए हैं। तो इसे संपूर्ण आबादी के संदर्भ की रिपोर्ट कैसे मान लिया जाए? इनमें भी जिसे चाइल्ड स्टंटिंग रेट कहां गया है उसका आधार आसानी से गले नहीं उतरता । स्टंटिंग क्या है? जैसा ऊपर बताया गया पांच साल के किसी बच्चे के लिए निर्धारित ऊंचाई से दो स्टैंडर्ड-डेविएशन पॉइंट कम वाले बच्चों का प्रतिशत। वहीं चाइल्ड वेस्टिंग रेट यानी पांच साल के किसी बच्चे के लिए निर्धारित वजन से दो स्टैंडर्ड-डेविएशन पॉइंट कम वाले बच्चों का प्रतिशत। अब बच्चों के निर्धारित ऊंचाई के मायने क्या है? विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों की उम्र के अनुसार एक ऊंचाई निर्धारित की है और उसके आधार पर तय कर दिया गया है कि यह बच्चा कुपोषित है या नहीं। यानी बच्चे का कद निर्धारित नहीं है और वजन भी अपर्याप्त है तो यह राष्ट्रीय भूख का द्योतक मान लिया गया है। इसी को आधार बनाकर कहा गया है कि भारत की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। हालांकि इसमें भारत का भी कुछ दोष है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स बनाने के लिए इनने भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-2021 यानी एनएचएस-5 के आंकड़ों का भी इस्तेमाल किया है। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का तैयार किया हुआ है। इसमें छः लाख घरों से नमूने एकत्रित करने की बात है। इसमें ही लिखा है कि भारत के 36% बच्चे स्टंटेड और 19% बच्चे वेस्टेड हैं। जीएचआई पर हम हाय तौबा मचाएं और अपने रिपोर्ट को स्वीकार करें यह कैसा आचरण है? जाहिर है, हमें हमारे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के रिपोर्ट को कटघरे में खड़ा करना चाहिए था। कारण, इसने भी डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित बच्चों के कद के मानक को स्वीकार कर अपनी रिपोर्ट बना दी। डब्ल्यूएचओ एक चार्ट बनाता है जिसमें बताता है कि किस उम्र के बच्चों की कितनी ऊंचाई और वजन होना चाहिए। इसी में वह स्टैंडर्ड-डेविएशन कट-ऑफ के दो पॉइंट भी देता है। उदाहरण के लिए डब्ल्यूएचओ पांच साल के बच्चे का कद 110.3 सेंटीमीटर बताता है। दो स्टैंडर्ड-डेविएशन पॉइंट काटने के बाद यह  101.6 सेंटीमीटर हो जाता है। स्पष्ट है कि इससे किसी बच्चे का कद यदि कम है तो  स्टंटेड माना जाएगा। तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह एक विचित्र मानक है। यह सामान्य समझ की बात है कि ऊंचाई या कद के निर्धारण में भौगोलिक परिस्थितियां, नस्ल, जाति,अनुवांशिकी आदि की प्रमुख भूमिका होती है।

वास्तव में अंतरराष्ट्रीय मानक एकरूप नहीं हो सकता। अलग-अलग क्षेत्रों, नस्लों,जातियों आदि के हिसाब से इनका निर्धारण किया जाना चाहिए। स्वयं भारत के राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण में इसका ध्यान नहीं रखा गया । जीएचआई पर स्वाभाविक प्रश्न उठाने और इसका विरोध करने के साथ भारत को डब्ल्यूएचओ के मानकों को भी नकारना चाहिए। डब्ल्यूएचओ के मानक नए सिरे से निर्धारित हों तो भूख सूचकांक बनाने वालों के लिए भी उसे स्वीकार करने की विवशता हो जाएगी।

इसके अलावा भी कई ऐसी बातें हैं जो इस रिपोर्ट को खारिज करने के योग्य बनाती है। आप पूरी दुनिया के लिए एक दृष्टिकोण अपना लीजिए और उसके अनुसार मन मुताबिक रिपोर्ट बनाकर उसे पेश कर दीजिए तो यह वैश्विक रिपोर्ट नहीं हो सकती। हम नहीं कहते कि भारत के समक्ष स्वास्थ्यकर आहार यानी पोषण की समस्या नहीं है और हमने संतोषजनक अवस्था प्राप्त कर लिया है। पोषण के मामले में भारत को काफी कुछ करना है। किंतु भूखमरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने के पहले स्वयं को संपूर्ण विश्व के एक-एक कोने के बारे में जानकारी होने का दावा करने वालों को रुक कर सोचने की आवश्यकता है। किसी भी पैमाने यह कहना कि भारत भूखों का देश है गले नहीं उतर सकता। हमारे यहां राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तरों पर गर्भवती महिलाओं से लेकर बच्चा जनने वाली मां , बच्चे आदि के पोषण के लिए कई कार्यक्रम चल रहे हैं। विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था है। इससे संबंधित जितने कार्यक्रम भारत में हैं उतने कम ही देशों में होंगे । पिछले वर्ष यानी 2021 में 116 देशों की रैंकिंग में भारत का नंबर 101वां तथा 2020 में भारत का स्थान 94वें नंबर पर था। कहने का तात्पर्य कि लगातार यह रिपोर्ट भारत को भूखों का देश बताता रहा है।  एशिया में सिर्फ अफगानिस्तान ही है, जो भारत से पीछे है। वह 109वें पायदान पर है।  पाकिस्तान 99वें, बांग्लादेश 84वें और नेपाल 81वें नंबर पर है। आर्थिक संकट से गुजर रहे श्रीलंका को इसमें 64वें नंबर पर रखा गया है। अब अपने आपसे प्रश्न करिए कि क्या वाकई हम इतने गए गुजरे हैं कि इनसे भी पीछे हैं? आपको उत्तर मिल जाएगा। इसलिए यह प्रश्न उठाना ही पड़ेगा कि आखिर कौन लोग हैं जो इस तरह भारत को नीचा दिखाने वाली रिपोर्ट हलाते हैं?

अवधेश कुमार, गणेश नगर पांडव नगर कंपलेक्स कामा दिल्ली 110092 क्रोमा मोबाइल 98110 27208

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2022

सर्वोदय बाल/कन्या विद्यालय, बुलंद मस्जिद में काफी समय से पीने का पानी सही नहीं आ रहा है







 

'साडी नित दिवाली' के यूट्यूब पर हुए 10 मिलियन से अधिक व्यूज

 - साध-संगत ने पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को दी कांग्रेचुलेशन एमएसजी कहकर दी बधाई

- भजन का मैसेज जितना दूर तक जाएगा, उतना ही हमारे समाज में बुराईयों और नशे का नाश होगा: पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां

- खत्म होते रिश्ते-नातों पर जताई चिंता, बोले स्वार्थ से दूर नहीं दुनियावी रिश्ता

संवाददाता

सिरसा/ बरनावा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने वीरवार को वीडियो भजन 'साडी नित दिवाली' के यूट्यूब पर एक करोड़ यानी 10 मिलियन व्यूज होने पर ऑनलाइन गुरुकुल के माध्यम से जुड़ी देश-विदेश की साध-संगत को बधाई दी। वहीं शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा उत्तर प्रदेश से ऑनलाइन गुरुकुल के माध्यम से पूज्य गुरु जी के साथ जुड़ी साध-संगत ने भी साडी नित दिवाली 10 मिलियन व्यूज कांग्रेचुलेशन, कांग्रेचुलेशन एमएसजी, कांग्रेचुलेशन गुरु जी बैनर पर लिखकर बधाई दी। वहीं भजन 'साडी नित दिवाली' के यूट्यूब पर एक करोड़ यानी 10 मिलियन व्यूज होने पर केक काटकर भी खुशियां मनाई गई। पूज्य गुरु जी ने भजन साडी नित दिवाली के 10 मिलियन व्यूज होने पर सभी को मुबारकबाद देते हुए कहा कि भजन का मैसेज जितना दूर तक जाएगा, उतना ही हमारे समाज में बुराईयों का नाश हो और नशे का नाश हो, ये भगवान से प्रार्थना करते हैं। सत्संग के दौरान पंजाबी भजन तेरे प्यार बिना कोई शब्द नहीं आउंदा, तेरे इश्क बिना कोई शब्द नहीं आउंदा पर व्याख्या करते हुए पूज्य गुरु जी ने खत्म होते रिश्ते-नातों पर चिंता जाहिर की। पूज्य गुरु जी ने मालिक के प्यार में और दुनियावी प्यार में अंतर बताते हुए कहा कि दुनियावी रिश्ता शायद ही कोई ऐसा हो, जो स्वार्थ के बिना हो और दुनियावी प्यार में मालिक से प्यार नहीं करते कभी भी और मालिक के प्यार में कभी भी नेगेटिविटी नहीं पालते अपने दिलो-दिमाग के अंदर और जो दुनियावी प्यार है उसमें पता नहीं कब तकरार हो जाए तथा कब से क्या हो जाए। पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि हमने अनुभव किया, महसूस किया है कि आज का युग तेजी से बदल रहा है। पहले कहते थे कि माता कुमाता नहीं हो सकती, वो भी अब होने लग गया है। कई जगहों पर ऐसी-ऐसी बच्चियां देखी, जिन्होंने अपने पूरे परिवार को खत्म कर दिया। बड़ा दर्द हुआ सुनके कि उन्होंने अपने छोटे-छोटे बच्चों को खत्म किया, अपने बहन-भाईयों को खत्म किया, अपने मां-बाप को खत्म किया बड़ा दर्द हुआ ऐसा सुनके। इसी तरह से लड़कों का भी सुना हमने। रिश्ते-नातों का प्यार बेहद स्वार्थी होता चला जा रहा है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि कभी बिना स्वार्थ के प्यार के किसे-कहानियां हम सुना करते थे। सूफियत में क्यू हीर-रांझा का जिक्र आता है, के बारे में बताते हुए पूज्य गुरु जी ने कहा कि उनका शारीरिक नहीं आत्मिक प्यार ज्यादा था, उसे रूहानी प्यार कह देते है, वो ज्यादा था। इसलिए उनका जिक्र कहीं न कहीं आ जाता है रूहानियत और सूफियत में। पूज्य गुरु जी ने कहा कि उनको जो लिखने वाले है, उन्होंने भी कई जगह सूफियत की बात शामिल की हुई है।

पूज्य गुरु जी ने कहा कि ऐसा प्यार होना असंभव तो नहीं है, लेकिन इस युग में बड़ा मुशिकल है। दुनिया में हर किसी को गर्ज है, हर रिश्ते के लिए गर्ज निश्चित है। भाई-बहन में रिश्ता है, मां-बेटे में रिश्ता है, बाप-बेटे में रिश्ता है, कहीं न कहीं यार-दोस्त है या दुनियादारी से जो आप मिलते हैं वो रिश्ते हैं, उनमें कहीं-न-कहीं गर्ज तो छुपी ही रहती है। कहते है कि ये बड़ा आदमी है, इससे मैं ये काम ले लूंगा, इसलिए हाथ मिला लेना चाहिए और छोटा आदमी है तो कहते है कि कन्नी कतरा लेनी चाहिए। यानी पहले गर्ज रिश्ता बाद में है। अगर मां-बाप अच्छा खिलाता- पिलाता है तो उसके गीत गाते हैं। अगर लगा कि अब मां-बाप के पास कुछ नहीं है तो इन्सान उनसे कन्नी कतरा जाता है। रिश्ते पल-पल बदलते जा रहे है और आज तो रिश्ते-नातों को बुरा हाल है।

पूज्य गुरु जी ने कहा कि हमने जो 800 शब्द लिखे है उनमें एक शब्द में लिखा है कि रिश्ते जल गए बिन शमशान। शमशानों में मुर्दे जलते है, पर आज हमारे कल्चर के,  हमारी सभ्यता के, हमारी संस्कृति के जो रिश्ते बने हुए थे, वो बिना शमशान के जलते जा रहे है और बुरा हाल होता जा रहा है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि आज पुरुष चाहते हैं उनके लिए कल्चर फोरन यानी विदेश का होना चाहिए, ताकि उन्हें कोई रोके-टोके ना। लेकिन जब उनके मां-बहन बेटी पर बात आती है तो कहते है हमारा (इंडिया) कल्चर होना चाहिए। कहते है कि इंडिया का कल्चर अच्छा है। पुरुष चाहता है मैं खुला खेलूं और महिलाओं की तरफ कहता है, जिनमें उनकी पत्नी हो, बेटी हो, बहन हो, मां हो दोगली नीति अपनाते है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि जब इन्सान दूसरों का बुरा ताकते हैं तो वह क्यंू भूल जाते है कि उन्हें जन्म देने वाली मां भी एक औरत है, क्यूं भूल जाते हैं कि तेरे घर में भी एक बहन है। उसको यानी अपनी बहन,बेटी को कोई गलत बोलता है तो उसे गलत लगता है और पुरुष खुद दूसरे को गलत नजर से देखता है तो उसे ये गलत नहीं लगता। ये कौन सा कल्चर है?। इंडियन कल्चर, हमारी संस्कृति को पुरुष अपनाना नहीं चाहते और विदेशी संस्कृति यहां फिट नहीं बैठ रही। क्योंकि पुरुष चाहते हैं कि उनके लिए विदेशी संस्कृति हो और औरतों के लिए चाहते हैं कि इंडियन कल्चर हो। अब बीच में लटके हुए है। इस कारण हमारी संस्कृति, हमारे कल्चर का सत्यानाश करने पर तुले हुए हैं ऐसे बच्चे।

पूज्य गुरु जी ने कहा कि बुरा ना मानना बच्चो, हमारे मुंह से सच ही निकलेगा, झूठ कभी नहीं निकलेगा, ये हकीकत है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि हम विदेशी कल्चर को बुरा नहीं कह रहे, वो उनका अपना कल्चर है। लेकिन हम तो अपनी सभ्यता का पहरा देने वाले एक पहरेदार है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि कई सोचते है कि हम हिंदु धर्म का नाम पहले क्यंू लेते है, तो बता दें कि सबसे पहले पाक-पवित्र ग्रंथ इस धरती पर उतरे तो वो थे वेद। पवित्र वेदों का यहां पर सबसे पहले अवतरण हुआ या प्रगट हुए या यूं कह लिजिएगा कि उन्हें लिखा गया। इसलिए हमने जब पवित्र ग्रंथों को पढ़ा तो सभी एक-दूसरे से लगभग मिलते-जुलते है। इसलिए उसका जिक्र करते है। हिंदु धर्म में जो हमारी संस्कृति है, सभ्यता है वो गजब है। पहले उस समय में (पुराने) हर कोई सौ साल को होता था, जो हमने ग्रंथों में पढ़ा। हमे गुरु जी ने बोला था कि विज्ञान के नजरिये से धर्मो को पढऩा, इसलिए हम कई दिनों से खुलकर बता रहे हैं कि हम विज्ञान के नजरिये से धर्म को पढ़ रहे है। धर्मों में आयु को चार वर्गों में बांटा हुआ था। 

25 साल को ब्रह्मचर्य आश्रम का समय बताया गया था। 25 से 50 को गृहस्थ आश्रम और फिर वानप्रस्थ और फिर संन्यास आश्रम आते थे। ये चार आश्रम इन्सान को छोटी सी बात लगते हैं। लेकिन हमने इन चार आश्रमों को वैज्ञानिक तौर पर प्ररूव किया और देखा। जब उन बच्चों को उस वातावरण में भेजा जाता था, उन्हें गुरुकुल कहा जाता था यानी वहां जो कुछ सिखाया जाता था उसमें कुल यानी सबकुछ उन्हें गुरु सिखाता था। वहां स्वच्छ वातावरण होता था। पूज्य गुरु जी ने कहा कि जहां बहुत सारा कचरा पड़ा हो, गंदगी पड़ी हो, वहां पॉजिटिविटी नहीं आती। गुरुकुल में कर्मों के अनुसार विद्यार्थी का चयन किया जाता था। जो क्षत्रिय है तथा सहने के लायक है, उन्हें आर्मी में भेजा जाता था। इसी प्रकार जो हिसाब-किताब में अच्छे है वो दुकानदारी। जो ज्ञान-विद्वान, ज्ञान को पकड़ते है वो ज्ञानी विद्ववान कहलाए गए। जो कमजोर होते थे या जो ध्यान नहीं रखते थे, उनका एक अलग वर्ण बना दिया जाता था। पूज्य गुरु जी ने कहा कि हमने धर्मों को पढ़ा और उन्हें अपने स्कूलों में शुरू किया। जब हम स्कूल कॉलेज में ऑफसीजन खेल कैंप में जाते थे और बच्चों को भगाकर व एक्टीविटी कराकर देखते थे कि किस बच्चे का इंटरेस्ट किस खेल में है। फिर उनको उनकी इंटरेस्ट का गेम उन्हें देते थे। 

पूज्य गुरु जी ने कहा कि देश में एक बार ऐसी स्थिति आ गई थी कि एशिया में जितने मेडल आते थे, उनका 10 प्रतिशत मेडल हमारे स्कूलों वाले ही ले आते थे इंडिया के लिए। हमने अपने स्कूल कॉलेजों में बच्चों को गुरुकुल की शिक्षा दी हुई है। पूज्य गुरु जी ने कहा कि हमारे वशंज इसी दुनिया में जीते थे। लेकिन अब हम उस संस्कृति को छोड़ते जा रहे है। दुनिया की जो नंबर वन संस्कृति है हमारी उसे हम क्यूं छोड़ते जा रहे है। आज हम अपनी संस्कृति से बहुत दूर हो चुके है। आम कहावत है कि दो घोड़ों पर सवार गिरता ही गिरता है। आज हमारा समाज दो घोड़ों पर सवार है। एक हमारी संस्कृति और एक विदेशी संस्कृति। हमारी संस्कृति पूरे वल्र्ड में नंबर वन है। बाकी संस्कृति के बारे में हम कभी बुरा नहीं बोलते। लेकिन इतना जरूर कह सकते है हमारी संस्कृति महान थी, महान है और महान ही रहेगी। उसका कोई मुकाबला नहीं। ब्रह्मचर्य का मतलब होता है आपके विचारों, ख्यालों का शुद्धिकरण करना।

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