गुरुवार, 22 सितंबर 2022

दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों को रोकने के लिए दिल्ली नगर निगम और जाफराबाद आरडब्ल्यूए की विशेष बैठक हुई

दिल्ली नगर निगम शाहदरा उत्तरी जोन के अधिकारियों, कर्मचारियों, मेट्रो वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और जाफराबाद आरडब्लूए के सदस्यों की एक विशेष बैठक जाफराबाद गली नंबर 39/4 में अबरार सैफी के निवास पर हुई जिसकी अध्यक्षता सरवर सिद्दीकी ने  की। इस बैठक में मेट्रो वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शालू त्रिपाठी ने गीला कूड़ा और सूखा कूड़ा किस तरह से निपटाया जाए उसकी जानकारी दी।  उन्होंने बताया कि आज हमारी पूरी दिल्ली में कूड़े के तीन पहाड़ बन चुके हैं। यह कूड़े के पहाड़ भलस्वा डेरी, गाजीपुर और ओखला में हैं जो लगभग कुतुब मीनार के बराबर बन चुके हैं।

वर्ष 1984 से इन पहाड़ों को बनाने का सिलसिला शुरू हुआ जो आज अपनी सीमा पार कर चुके हैं। इन कूड़े के पहाड़ों के कारण पूरी दिल्ली में बीमारियां, बदबू और गंदगी  के अंबार लगे हुए हैं। इसलिए आज हम आपके पास आए हैं कि आप सभी लोग अपने ही घरों में कूड़े को अलग-अलग से रखना शुरू कर लें। गीला कूड़ा जैसे बचा हुआ खाना, सड़े हुए फल व सब्ज़ी, बासी फूल, पौधों के मुरझाए हुए पत्ते आदि को हरे डिब्बे में रखें। सूखा कूड़ा जैसे पुराना प्लास्टिक, लोहा, कागज़, बिस्कुट, नमकीन, दूध आदि की पन्नियां नीले डिब्बे में रखें और घरों व कारखानों से निकलने वाला  खतरनाक कूड़ा जैसे स्क्रैप, हॉस्पिटल का कचरा, खराब दवाइयां, ड्रेसिंग आदि काले डब्बे में ही रखें  ताकि यह कूड़े के पहाड़ जितनी तेजी से बढ़ रहे हैं उनको रोका जा सके।

नगर निगम के इंस्पेक्टर अतुल बंसल ने आम लोगों से निवेदन करते हुए कहा के इस बढ़ती हुई कूड़े की बीमारी को आप और हम सब मिलकर रोक सकते हैं इसलिए समय-समय पर हम आपसे बैठक करते हैं और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हैं। आरडब्लूए जाफराबाद के महासचिव डाक्टर फहीम बेग ने कहा कि मेरा कूड़ा मेरी जिम्मेदारी जब तक हम नहीं मानेंगे तब तक हम अपने भविष्य को खतरनाक तरीके से बर्बाद करते रहेंगे। आज जाफराबाद आरडब्ल्यूए ने विशेष तौर से शाहदरा जोन के उपायुक्त अमित शर्मा से निवेदन किया था कि हम अपने क्षेत्र में गंदगी को दूर करने के लिए सफाई अभियान हर घर पर दस्तक देकर चलाना चाहते हैं तो आज निगम की टीम और मेट्रो कंपनी की टीम हमारे बीच में आई है। इसलिए हम उनके समक्ष निम्न समस्याएं जैसे कूड़ा उठाने वाले टिप्पर कमी, टिप्पर का सायरन नहीं बजाया जाता, हेल्पर घरों से कूड़ा लेने से आना कानी करते हैं, समय से कूड़ा नहीं उठाया जाता, उद्यान विभाग और मेंटिनेंस विभाग का धरातल पर नगण्य होना आदि रख रहे हैं। 
आपसे आशा करते हैं कि इन समस्याओं का निवारण शीघ्र होगा बाकी जनता की भागीदारी को लेकर हम आश्वासन दिलाते हैं कि हम अपने क्षेत्र में गंदगी को दूर करने के लिए प्रयास करेंगे क्योंकि जिस प्रकार से दिल्ली में कूड़े के पहाड़ तेजी के साथ बढ़ रहे हैं यह हमारे आने वाली नस्लों के लिए नुकसानदेह हैं, गंदगी के पहाड़ों से  मच्छर फ़ैल रहे हैं, मिट्टी व वायु प्रदूषित हो रहे हैं और समाज में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही है आज हम यह निर्णय लेते हैं कि जाफराबाद की गली नंबर 39/4 को हम एक मॉडल गली बनाएंगे इसे स्वच्छ, सुंदर और सभी क्षेत्र के लिए एक मिसाल बनाएंगे जिसमें हमें उपायुक्त महोदय और निगम के सभी अधिकारियों कर्मचारी का साथ चाहिए ताकि हम यह मिशन पूरा कर सकें। इस मौके पर सादिक अली, हाजी शफीक सैफी, अबरार सैफी आदि ने भी अपनी अपनी बात रखें। श्रीमती निशा ने भी गंदगी से लड़ने के लिए अपने सुझाव रखे । इस बैठक में सादिक अली, हाजी शफीक सैफी,साबिर अली ,मोहम्मद नफीस, मोहम्मद अनीस,, असलम, काशिफ अंसारी, आफाक, नगर निगम के एएसआई अतुल बंसल, सुपरवाइजर नईमुद्दीन, मोहम्मद अयूब,विकास, राजकुमार मेट्रो कंपनी की शालू त्रिपाठी,जसविंदर कौर,शारदा चौहान, अमीनुद्दीन आदि उपस्थित रहे।

 




 

सोमवार, 19 सितंबर 2022

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

सेंट्रल विस्टा को प्रखर राष्ट्रवाद का प्रतीक बनाने के मायने

अवधेश कुमार


जिन व्यक्तियों और समूहों ने सेंट्रल विस्टा परियोजना को अनर्थकारी बताते हुए विरोध किया था इसके पहले चरण के उद्घाटन के बाद उनकी मानसिकता बदली होगी या नहीं कहना कठिन है।  हालांकि तीन वर्ष पहले इसकी योजना सामने आने से निर्माण प्रारंभ होने तक के विरोध के स्वर कर्तव्य पथ के उद्घाटन के अवसर पर गायब दिखे। पूरी परियोजना को पर्यावरण से लेकर कानूनी पचड़े तक में उलझाने की कोशिश की गई। भूमिपूजन और शिलान्यास कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि और संकल्पबद्धता के कारण ही यह साकार हुआ। आने वाले समय में भारतीय दृष्टि से अनुकूल, सुविधाजनक एवं आकर्षक संसद भवन तथा केंद्रीय सचिवालय देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर जो बातें कहे उनमें चार प्रमुख है।

एक, गुलामी का प्रतीक चिन्ह यानी राजपथ इतिहास हो गया है और कर्तव्य पथ के रूप में नए इतिहास का सृजन हुआ है।

दो, राजपथ का आर्किटेक्चर और भावना गुलामी के प्रतीक थे। अब इसका आर्किटेक्चर भी और आत्मा भी बदली है।

तीन,देश के सांसद, अधिकारी, मंत्री जब यहां से गुजरेंगे तो उन्हें देश के प्रति कर्तव्यों का बोध होगा।

चार, कर्तव्य पथ पर नेताजी की प्रतिमा देश को नई ऊर्जा देगी। देश की नीति और निर्णय में उनकी इच्छा की प्रेरणा यह प्रतिमा देगी।

इस तरह उन्होंने पूरी परियोजना को गुलामी के अवशेषों को खत्म कर उसकी जगह अतीत, वर्तमान एवं भविष्य के भारत का जीवंत और प्रेरणादायी निर्माण साबित किया। कहा जा सकता है कि जानबूझकर उन्होंने अपनी विचारधारा के अनुरूप राष्ट्रवाद का भावनात्मक चरित्र देने की रणनीति अपनाई । प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से जिन पांच प्रणों की घोषणा की थी उनमें गुलामी की छोटी से छोटी चीज से भी मुक्ति पाने की बात शामिल थी। संसद भवन सहित समूची सेंट्रल विस्टा परियोजना उनकी इसी सोच का साकार रूप कहा जा सकता है।  गहराई से देखें तो कुछ बातें बिल्कुल स्पष्ट होती हैं।

एक, गुलामी की चीजों को मिटाने की सोच केवल नकारात्मक नहीं है। हम केवल इसलिए नहीं मिटाते कि उन्हें औपनिवेशिक शासकों ने बनाया बल्कि उन्होंने अपनी सोच के अनुरूप बनाया जो हमारे अनुकूल नहीं है।

इसी के साथ दूसरा विंदू यह है कि हम अपने अतीत, वर्तमान एवं भविष्य का ध्यान रखते हुए उसकी जगह नया निर्माण करते हैं जो वर्षों प्रेरणा का कारक बना रहता है।

तीन, यह निर्माण कराने वालों पर निर्भर है कि किस तरह का प्रतीक बनाएं।

इस दृष्टि से देखें तो प्रधानमंत्री ने इसे प्रेरणादायी बनाने की शुरुआत भी कर दी। लोगों से वहां आने और सेल्फी लेकर हैसटैग कर्तव्य पथ के साथ सोशल मीडिया पर डालने की अपील से एक अभियान आरंभ हो गया है। भारी संख्या में लोग आ रहे हैं, तस्वीरें ले रहे हैं। यह ऐसी स्थिति है जिसकी कल्पना मोदी विरोधियों ने नहीं की होगी । इस अवसर का उपयोग करते हुए मोदी ने सरकार के ऐसे कुछ कदमों का सिलसिलेवार ब्यौरा देकर यही साबित किया कि भारत में पहली बार उनकी सरकार ने ही गुलामी से जुड़े अवशेषों को भारतीय दृष्टि और आवश्यकता के अनुरूप परिणत किया है।

निश्चित रूप से इसके राजनीतिक निहितार्थ ढूंढे जाएंगे। मोदी प्रधानमंत्री के साथ एक पार्टी के नेता हैं और उन्हें आगामी समय में कई विधानसभाओं के साथ 2024 में लोकसभा चुनाव का सामना करना है। प्रखर राष्ट्रवाद का सामूहिक भाव भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी होगा। विरोधियों के लिए पुनर्निर्मित सेंट्रल विस्टा की दृष्टि और उसकी उपादेयता पर भाजपा को होने वाले संभावित राजनीतिक लाभ की चिंता हाबी हो गई होगी। प्रधानमंत्री ने इस विषय को जिस तरह उठाया है उस संदर्भ में भी कुछ बिंदुओं का उल्लेख जरूरी है।

एक, लोग निश्चित रूप से प्रश्न उठाएंगे कि पहले की सरकारों ने किंग्सवे को राजपथ क्यों बनाया?

दो, आजादी मिलने के बाद 21 वर्षों तक कैनोपी में जार्ज पंचम पंचम की मूर्ति क्यों लगी रही?

तीन,इंडिया गेट पर ब्रिटिश शासन के लिए  युद्धों में लड़ने वाले सैनिकों के ही नाम क्यों खुदे ही रहे?

चार,अंग्रेजों द्वारा बनाए गए संसद को स्वतंत्र भारत का संसद भवन तथा वायसराय भवन को राष्ट्रपति भवन के रूप में क्यों स्वीकार किया गया? किसी ने भी इनकी जगह नव निर्माण करने का साहस क्यों नहीं दिखाया?  मोदी ने पूरी बहस को यहीं तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इस संदर्भ में तीन प्रमुख बातें और कहीं। एक, आजादी के बाद अगर भारत सुभाष बाबू की राह पर चला होता तो देश ज्यादा ऊंचाइयों पर होता। न केवल इस महानायक को भुला दिया गया बल्कि उनके विचारों प्रतीकों तक को नजरअंदाज कर दिया गया। दो, कर्तव्य पथ पर नेताजी की प्रतिमा देश की नीति और निर्णयों में उनकी छाप रखने की प्रेरणा देगी। और तीन, राजपथ का अस्तित्व समाप्त होकर कर्तव्य पथ बना है, जॉर्ज पंचम की जगह पर नेताजी की प्रतिमा लगी है तो यह गुलामी की मानसिकता से आजादी की न शुरुआत है न अंत है, यह निरंतर चलने वाली यात्रा है। इसके मायने क्या है? मोदी ने अब तक की सरकारों नेता जी के विचारों का बहुत ही बनाकर कटघरे में खड़ा कर दिया। दूसरे उन्होंने यह संदेश दिया कि  जो कुछ अभी हमने किया वह पहले से कर रहा हूं और आगे भी करेंगे। जो भी भारतीय इंडिया गेट पर एक साथ वार मेमोरियल, नेताजी की प्रतिमा, कर्तव्य पथ को देखेगा और आगे संसद भवन में सचिवालय आदि देखेगा उसके अंदर क्या भाव पैदा होगा? पूरे क्षेत्र में लोगों का ध्यान रखते हुए सौंदर्यीकरण, लाइटें, फव्वारे से लेकर बैठने, खाने-पीने, टहलने, नौका विहार की संपूर्ण अनुकूल व्यवस्थाएं की गई है। जब आपको आपके अनुकूल व्यवस्थाएं मिलती है तो प्रसन्नता में आपके अंदर सकारात्मक भाव आते हैं। साफ है कि एक ओर यह सब अगर लोगों में भारत के संदर्भ में आत्मगौरव व कर्तव्य बोध कराएगा तो दूसरी ओर उन्हें प्रधानमंत्री और सरकार के प्रति कृतज्ञता भाव भी पैदा करेगा। इस तरह इसका राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना ज्यादा बढ़ गई है।

निश्चित रूप से आगे संसद भवन से लेकर केंद्रीय सचिवालय तक के उद्घाटन का कार्यक्रम इससे ज्यादा भव्य,आकर्षक एवं प्रभावी होगा। कहा गया है कि जो साहस और संकल्प दिखाएगा विजय उसे ही प्राप्त होगा। ऐसा नहीं है कि संसद भवन से लेकर केंद्रीय सचिवालय और यहां तक कि इंडिया गेट के पूरे क्षेत्र में परिवर्तन का विचार और योजनाएं पहले नहीं आई। संसद भवन की योजना तो पिछली यूपीए सरकार में भी आई थी। किसी ने न उसे इतना व्यापक दृष्टिकोण न दिया और न साकार करने का साहस दिखाया।राजनीतिक पार्टियों ने इस परियोजना का तीखा विरोध करके अपनी नकारात्मक छवि निर्मित की। पूरी परियोजना साकार होते - होते प्रधानमंत्री मोदी से लेकर उनके साथी अवश्य ही उन सारे वक्तव्यों और विचारों को जनता के समक्ष रखेंगे। वे जनता के सामने प्रश्न उठायेंगे कि गुलामी के अवशेषों से मुक्ति तथा वर्तमान समय के अनुकूल नव निर्माण का विरोध करने वाले के साथ आप कैसा व्यवहार करेंगे तो आमजन का उत्तर क्या होगा यह बताने की आवश्यकता नहीं।  बदलाव के समर्थकों द्वारा भी यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि केवल सड़कों का नाम बदलने या कुछ प्रतीक खड़ा कर देने भर से गुलामी के अवशेष नहीं खत्म जाएंगे? गुलामी मानसिकता में होती है और जब तक पूरी व्यवस्था भारतीयता नहीं हो हम गुलामी से मुक्ति का दावा नहीं कर सकते मोदी ने बिना यह प्रश्न उठाए नई शिक्षा नीति की चर्चा की । वास्तव में नई शिक्षा नीति गुलामी की सोच को तोड़ने और भारतीय दृष्टि पैदा करने का बड़ा आधार साबित होगा। न्यायालयों की भाषा, नौकरशाही की औपनिवेशिक संरचना आदि में बदलाव आवश्यक है। न्यायालयों की भाषा का प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में उल्लेख किया है। काफी संख्या में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानून बदले हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्निर्माण आदि को इससे अलग करके नहीं देख सकते। इन सबको एक साथ मिलाकर देखेंगे तो निष्कर्ष यही आएगा कि आजाद भारत में गुलामी के अवशेषों से मुक्ति और भारतीय राष्ट्रीयता की आत्मा के अनुरूप बदलाव और निर्माण के निरंतरता में इतने कदम उठाने की कभी कल्पना तक नहीं की गई।

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092,मोबाइल 98110 27208



मंगलवार, 13 सितंबर 2022

भारत में चीता से पुनः परिचय करवाने के लिए जागरूकता अभियान की शुरुआत

मो. रियाज

नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय व पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय द्वारा भारत में चीता को पुनः बसाने के महत्वपूर्ण विषय पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। संग्रहालय की वरिष्ठ शिक्षक सहायक सुशीला कुमारी यादव के द्वारा दिल्ली के मंगोलपुरी एवं रोहिणी क्षेत्रों में विभिन्न स्कूलों के छात्रों को चीता के प्रति व्यापक स्तर पर लेक्चर, प्रेजेंटेशन एवं फिल्म दिखाकर जागरूक किया जा रहा है। चीता 1947 से पहले भारतीय जंगल में मौजूद एक मांसाहारी प्रजाति थी जिन्हें 1952 में अधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। 

उन्होंने बताया कि एक पारिस्थितिक तंत्र में शिकार प्रजातियों की आबादी को नियंत्रित करने और बनाए रखने के लिए शीर्ष मांसाहारी प्रजाति महत्वपूर्ण है। शीर्ष  मांसाहारी का नुकसान केवल पारिस्थितिक तंत्र में खाद्य श्रृंखला के निचले स्तर को असंतुलित करता है। इस प्रकार पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन को बनाए रखने के लिए शीर्ष मांसाहारी का अस्तित्व महत्वपूर्ण है। 

भारत में चीता एकमात्र शीर्ष शिकारी था जो बड़े पैमाने पर शिकार के कारण विलुप्त हो गया था। अब देश में घास के मैदान में पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बहाल करने के लिए चीतों को पुनः बसाने की भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जिसके अंतर्गत आगामी दिनों में अफ्रीका के नामीबिया से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को लाया जाएगा।
 

 

13-09-2022 To 19-09-2022 (15.18)

 
 
 
 







 


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