सोमवार, 4 अप्रैल 2022

आम आदमी पार्टी, वैशाली ने चलाया सदस्यता अभियान

 

आज दिनांक 04 अप्रैल को महनार विधानसभा प्रभारी डॉ. विपिन कुमार के मार्गदर्शन एवं महनार छात्र संघ प्रखंड प्रभारी अभय कुमार साह की अध्यक्षता में लावापुर नारायण (महनार) में आम आदमी पार्टी के सदस्यता अभियान चलाया गया, जिसमें काफी लोगों ने पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। लोगों को पार्टी की टोपी पहनाकर पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।

इस कार्यक्रम में बबी कुमार, पंकज कुमार पासवान, अंकित राज, विद्यम कुमार, ललन कुमार, अभिनाश कुमार, राहुल कुमार, रोहित कुमार, रंजीत कुमार, निखिल कुमार, राजा कुमार, ज्ञानतोष कुमार, विकाश कुमार, अशोक कुमार राय इत्यादि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

रविवार, 3 अप्रैल 2022

थियेटर का आरंभ सभ्यता के आरंभ के साथ ही हो गया था: पद्मश्री डीपी सिन्हा

 - वरिष्ठ पत्रकार अमित कुमार को मिला बेस्ट क्रिटिक अवार्ड

- कृति जैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से किया गया सम्मानित

नई दिल्ली। थियेटर का आरंभ सभ्यता के आरंभ के साथ ही हो गया था। जब बच्चा आंख खोलता है उसी के साथ अभिनय करना शुरू कर देता है। इसलिए यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि थियेटर का जन्म सभ्यता के जन्म के साथ ही हुआ है। यह बात साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा  (डीपी सिन्हा) ने दिल्ली के मुक्तधार सभागार में आयोजित '14वे नटसम्राट थियेटर अवार्ड' वितरण समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित विभूतियों को सम्मानित करते वक्त कही। इस मौके पर हिंदी दैनिक 'राष्ट्रीय सहारा' के वरिष्ठ संवाददाता अमित कुमार को वर्ष 2022 के लिये बेस्ट क्रिटिक अवार्ड से नवाजा गया तो दूसरी ओर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की पूर्व निदेशक कृति जैन आदि को सम्मानित किया गया। इस मौके पर जयवर्धन (जेपी सिंह) द्वारा रचित हिंदी राजनीतिक व्यंग्य नाटक 'खैरातीलाल का कुर्सी तंत्र' का विमोचन भी किया गया।
इस मौके पर कृति जैन ने नटसम्राट के निदेशक श्याम कुमार को पिछले 19 वर्षों से लगातार अपने बल बूते थियेटर करने के लिए बधाई दी तो दूसरी ओर वैसे लोगों को सम्मानित करने के लिए भी बधाई दी जो पर्दे के पीछे रहते हुए लगातार रंगमंच को समृद्ध कर रहे हैं। अमित कुमार ने कहा कि यह हर किसी को अपना काम लगन और ईमानदारी से करते रहना चाहिए एक न एक दिन उसका फल जरूर मिलता है। यह नही सोचना चाहिए कि कोई आपके काम का आंकलन नही कर रहा है। कही न कही कोई न कोई आपके काम का आंकलन करता है और उसका प्रतिफल इस तरह के पुरस्कार का मिलना है। वैक स्टेज संगीत के लिए पुरस्कार पाने वाले जमील खान ने कहा ने बताया कि उनकी पांच पीढियां 'नक्कारे' बजाने का काम करती आ रही है। पहले नौटंकी में बजाते थे तो वहां बंदिशें नही थी लेकिन थियेटर में आने के बाद पता चला कि यहां आपको एक सीमा में ही काम करना है और इसे मैने एक छात्र की तरह सीखता रहा। 
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के प्रमुख और सहायक प्राध्यापक शान्तनु बोस को इस साल का सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सम्मान मिला है। श्री बोस ने सम्मान ग्रहण करने के बाद इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसू इस लिये निकल गए कि वर्षो से रंगमंच करते आने के बाद भी आज तक बंगाली थियेटर से कोई पुरस्कार नही मिला। पुरस्कार के लायक हिंदी थियेटर वालों ने समझा और सम्मान दिया। इस मौके पर सर्वश्रेष्ठ लेखक का सम्मान अनीस आजमी को, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए मनीष मनोजा, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए दक्षा शर्मा को तथा डॉ. जीतराम भट्ट को थियेटर प्रमोटर के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप प्रत्येक को शॉल, प्रतीक चिन्ह और बुके भेंट किया गया।

शनिवार, 2 अप्रैल 2022

आशीर्वचनम चाइल्ड केयर फाउंडेशन का निशुल्क शिक्षा केंद्र ज्वाला नगर शाहदरा में खोला गया


आज दिनांक 2 अप्रैल 2022 को नवरात्रि एवं नव वर्ष के शुभ अवसर पर आशीर्वचनम चाइल्ड केयर फाउंडेशन द्वारा निशुल्क शिक्षा केंद्र ज्वाला नगर शाहदरा में खोला गया जिसमें फ्री बेसिक कंप्यूटर, फ्री बेसिक इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स, फ्री स्किल डेवलपमेंट एवं फ्री ट्यूशन को पढ़ाया जाएगा। 
संस्था के संस्थापक अमन कुमार जी ने बताया कि वह भविष्य में भी ऐसे कई शिक्षा केंद्र बच्चों की शिक्षा के लिए फ्री शिक्षा केंद्र समर्पित करेंगे जिससे कि बच्चों को उचित शिक्षा मिल सके और एक सुदृढ़ समाज का निर्माण हो सके आज शिक्षा केंद्र का शुभारंभ आदरणीय पूनम अम्मा जी एवं जयप्रकाश शर्मा जी के कर कमलों द्वारा किया गया जिसमें कई बच्चे उपस्थित रहे और उनको संस्था द्वारा कॉपी पेन पेंसिल स्टेशनरी का सामान बाटा गया कार्यक्रम में मुख्य रूप से रितेश शर्मा, सचिन दूबे, उज्जवल बंसल, लोकेश गर्ग, तरुण गुप्ता, अंकित पाठक, संतोष कुमार, धर्मराज चौधरी अशफाक, शिवम, शोएब, अभिषेक, अरविंद आदि प्रमुख कार्यकर्ता गण उपस्थित थे

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

बाबर पुर ब्लॉक कांग्रेस क़ो मिला युवा व ऊर्जावान अध्यक्ष

दिल्ली में जहां निगम चुनाव की तिथि का अभी कोई पता नही है वही कांग्रेस ने इस महोल में  नए ब्लॉक अध्यक्ष बना कर नयी शक्ति का संचार किया है बाबरपुर में संजय गौड़ advocate क़ो अध्यक्ष बना कर पार्टी ने यहाँ के युवाओं में नया जोश भर दिया है संजय गौड़ छात्र राजनीति में Nsui के जिलाद्यक्ष, प्रदेश उपाध्यक्ष युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव भी रह चुके है अभी वर्तमान में ये विश्वास नगर कांग्रेस के प्रभारी भी थे ! बाबरपुर निगम चुनाव में भी जो जोश संजय गौड़ ने दिखाया उससे भी यह के कांग्रेस में जान आ गयी थीं ! संजय गौड़ ने कहा की मुझे अध्यक्ष बनाने के लिए अनिल चौधरी जी , जय प्रकाश अग्रवाल ज़ी, संदीप दीक्षित , मतिन अहमद जी, मुदित अग्रवाल जी , चौधरी जुबेर अहमद , कैलाश जैन, अब्दुल अलाम तवर , मंगल गौड़ व अन्य शीर्ष नेतृत्व का दिल से आभार हैं पार्टी को मैं विश्वास दिलाता हूँ कीं आने वाले समय बाबरपुर में पूरा ब्लॉक कोंग्रेस मय होगा ! सभी को मान सम्मान देते हुआ साथ ले कर चलना होगा ! इस मोके पर मैं महेश गौड़, दीपक शर्मा मनोज यादव, सूरिंदर शर्मा, संजीव किसान , विकी पंडित , होरी लाल शर्मा, श्याम लाल भारद्वाज, कुंवर पाल राकेश कुमार जैन, नैन सिंह , क्षितिज शर्मा , सोनू पाल, अनिल जैन, रितिक जैन, विजेंदर गुप्ता, प्रमोद, सचिन जैन,  आशीष तोमर, सतीश शर्मा, अज्जु चोधरी, आमिर ,ज़फ़र, संजय कपूर, शंकर शर्मा , दीपांशु सागर, अमित जस्टिन, वेद शर्मा, पंकज शर्मा, शुभम दीक्षित , कृष्णा शर्मा, जलालूदिन, आरिफ़, अक्षित गौड़, वैभव शर्मा , भव्य शर्मा,  कुणाल शर्मा , कुणाल कैन, सभी का धन्यवाद करता हूँ !

भव्य समारोह से भाजपा ने कई लक्ष्य साथे

अवधेश कुमार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह को जैसी असाधारण भव्यता प्रदान की गई वह यूं ही नहीं थी। पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग पार्टियां शपथ ग्रहण समारोह को भव्य स्वरूप प्रदान करने की कोशिश करती हैं। प्रभावी संख्या में जनता की उपस्थिति भी हम लोग देखते रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह इसका प्रमाण है। अरविंद केजरीवाल स्वयं कार्यक्रम और मंच प्रबंधन के माहिर नेता हैं । भगत सिंह के पैतृक गांव में आयोजित समारोह को उत्सव का रूप दिया गया और दिल्ली का पूरा मंत्रिमंडल, सारे विधायकों एवं अन्य नेताओं के साथ प्रदेश भर के कार्यकर्ता समर्थक भारी संख्या में उपस्थित रहे। लेकिन योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह की व्यापकता, भव्यता और प्रभाविता के समक्ष यह कहीं नहीं ठहरता। वास्तव में अभी तक हुए मुख्यमंत्रियों के सारे शपथ ग्रहण समारोहों को याद करें तो लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेई स्टेडियम का कार्यक्रम सबको काफी पीछे छोड़ गया। यह प्रश्न उठाया जा सकता है कि आखिर किसी मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह को  इतना बड़ा स्वरूप प्रदान करने की आवश्यकता क्यों हुई? इसे फिजूलखर्ची मानने वालों की भी संख्या होगी। लेकिन भाजपा नेतृत्व ने ऐसा किया तो इसके इसके पीछे निश्चित कारण होंगे। तो क्या हो सकते हैं वे कारण?

ध्यान रखिए,  विभिन्न क्षेत्रों के वे लोग, जिनके चेहरे जाने पहचाने हैं या जो जनता को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते या कर सकते हैं, जिनके नाम, समुदाय या वर्ग से कुछ निश्चित संदेश निकलते हों उनमें से काफी लोग वहां उपस्थित थे। अभिनेता, गायक, संगीतकार, खिलाड़ी, एक्टिविस्ट, संस्कृतिकर्मी आदि तो थे ही, पहली बार इतनी संख्या में उद्योगपति कारोबारी तथा साधु-संत उपस्थित थे। कह सकते हैं कि साधु-संत भाजपा की पहचान रहे हैं लेकिन इतने ज्यादा लोगों को इसके पहले किसी शपथ ग्रहण समारोह में नहीं बुलाया गया था। उद्योगपतियों एवं कारोबारियों में तो वे ही शपथ ग्रहण में बुलाए जाते रहे जिनके व्यक्तिगत संबंध हो। इस मायने में योगी आदित्यनाथ का शपथ ग्रहण समारोह बिल्कुल अलग माना जाएगा। जाहिर है, संख्या के साथ व्यक्तित्व एवं उनके कार्यों ,पेशे और विधाओं से भी स्पष्ट संदेश देने की रणनीति अपनाई गई।

वास्तव में पिछले वर्ष पश्चिम बंगाल में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद से विरोधियों ने ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की मानो अब भाजपा के सत्ता में रहने के दिन पूरे हो गए। ममता बनर्जी की तरह दूसरी पार्टियों ने भी अगर ठीक रणनीति बनाकर आप पर आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ा तो भाजपा को पराजित किया जा सकता है। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता एवं प्रशासन द्वारा संघ भाजपा कार्यकर्ताओं  और समर्थकों के विरुद्ध हिंसा से पार्टी के मनोविज्ञान पर नकारात्मक असर हुआ। साफ दिख रहा था कि भाजपा आक्रामक तरीके से उसका जवाब देने में सक्षम नहीं हो रही है। दूसरी ओर विरोधियों ने अगला लक्ष्य उत्तर प्रदेश को बनाया था। संपूर्ण भाजपा विरोधी मतों का समाजवादी पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण की रणनीति अपनाई गई। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को प्रमुख चुनौती देने का दावा करने वाली ममता बनर्जी तक भी 2 दिनोंके लिए वहां पहुंच गई। ऐसी कोई विर नहीं जिन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा के पराजय की भविष्यवाणी न की। आरंभ में चुनाव में आगे दिख रही पार्टी के बारे में मीडिया से आ रही खबरें बता रही थी कि धीरे-धीरे चुनाव कठिन संघर्ष में परिणत होता जा रहा था। पूरे देश के विरोधी किसी न किसी तरह भाजपा के पराजित होने की भविष्यवाणी करते रहे। इसी दौरान विपक्षी एकता की भी कवायदें हुईं। चुनाव अभियान के बीच ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव विपक्षी एकता की धुरी बनने के लिए अलग-अलग जगह जाने लगे। सबकी नजर उत्तर प्रदेश पर थी। भाजपा को इसी वर्ष गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य के चुनाव का सामना करना है तथा अगले वर्ष मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे प्रदेशों के चुनाव है। कोरोना के प्रभाव ने भाजपा को कोई बड़ा आयोजन लंबे समय से करने नहीं दिया। कृषि कानून विरोधी आंदोलन को आधार बनाकर बनाए गए माहौल का भी भाजपा करारा प्रति उत्तर नहीं दे सकी थी। कोरोना काल के टूल किट को भी मिला दें तो कहना होगा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा के अंदर अपने चरित्र के अनुरूप इन सबके सम्मिलित प्रत्युत्तर न देने की कथा लंबे समय से कायम थी। पूरे माहौल में ऐसा कुछ नहीं था जिससे भाजपा के समर्थक और कार्यकर्ताओं के अंदर उत्साह का संवेग पैदा हो सके। 

उत्तर प्रदेश चुनाव परिणाम ने यह अवसर प्रदान किया जिससे वह एकबारगी शक्तिशाली तरीके से प्रतियोगिता दे सके तथा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के अंदर उत्साह का संचार करने के साथ आम जनता की नजर में विरोधियों को कमजोर दिखा सके। 

कहने की आवश्यकता नहीं कि इसमें भाजपा को व्यापक सफलता मिली है। महा विजय जैसे उत्सव के स्वरूप ,भाजपा एवं सहयोगियों द्वारा शासित सभी प्रदेश के मुख्यमंत्रियों, हर वर्ग, पेशे ,समुदाय के लोगों की भारी संख्या में उपस्थिति के माध्यम से उसने संदेश दिया है कि इस समय भारत में भाजपा ही एकमात्र दल है जो सर्वाधिक शक्तिशाली होने के साथ देश के सबसे ज्यादा क्षेत्रों तक विस्तारित है तथा सभी क्षेत्र के लोगों का इसके साथ जुड़ाव है। दूसरे शब्दों में दूर-दूर तक आमने सामने कोई ऐसा दल है ही नहीं जो भारत के जनसांख्यिकीय, भौगोलिक, पेशावर, सांस्कृतिक सभी प्रकार की विविधताओं का प्रतिनिधित्व कर सकें।उद्योगपतियों एवं कारोबारियों के अंदर भी है भाव गहरा हुआ होगा कि उन्हें कोई पार्टी अगर खुलकर अपने बीच बुलाती है और महत्व देती है तो भाजपा ही है। यह सब किसी पार्टी को कितना सहयोग दे सकते हैं यह बताने की आवश्यकता नहीं। 

इनके अलावा योगी आदित्यनाथ संदर्भ में भी इसके मायने महत्वपूर्ण है । भाजपा और संघ उन्हें एक बड़े राष्ट्रीय व्यक्तित्व के रूप में उभारने के कोशिश करती रही है। भगवाधारी होने के साथ उनकी प्रशासनिक क्षमता तथा कानून और व्यवस्था को लेकर दृढ़ संकल्पित चरित्र को लगातार प्रचारित किया गया है। कुछ हलकों से यह प्रचारित किया जा रहा था कि योगी को भाजपा चाहे जितना बड़ा बना दे, हिंदुत्व पर उनकी आक्रामकता के कारण उद्योग, व्यापार , अभिनय, संस्कृति, शिक्षा, साहित्य, विज्ञान ,खेल आदि क्षेत्रों का बड़ा समूह उन्हें पसंद नहीं करता। शपथ ग्रहण से बड़ा अवसर इसे गलत साबित करने का नहीं हो सकता।   इन सभी क्षेत्रों से ऐसे लोगों की उपस्थिति से भाजपा ने संदेश दे दिया है कि योगी सर्व स्वीकृत नेता बन चुके हैं। अगर संत महात्माओं का उन्हें समर्थन है तो उद्योगपतियों, कारोबारियों, फिल्मी कलाकारों और खिलाड़ियों का भी। पार्टी एवं संघ परिवार के अंदर तो उन्हें व्यापक समर्थन है ही। भाजपा के संदर्भ में इसके मायने कहीं ज्यादा गहरे हैं। वास्तव में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा तथा मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ किस दिशा में आगे बढ़ रहा है योगी आदित्यनाथ को उसका समुच्चय प्रतीक के रूप में खड़ा किया गया है। देश में हिंदुत्व एवं राष्ट्रवाद को लेकर इस समय जैसा मुखर माहौल है वैसा लंबे समय से नहीं देखा गया। भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को इतना महत्व देकर इस व्यापक समूह को बताया है कि वह उनकी  सोच के अनुसार ही आगे बढ़ रही है।उस तरह के रंग-बिरंगे कार्यक्रम और भव्य तस्वीरों से जनता रोमांचित होती है। यह सच भी है कि आज भाजपा के अलावा किसी दल में ऐसे आयोजन की क्षमता नहीं बची है। ज्यादातर दलों की हैसियत नहीं कि इस तरह अनेक क्षेत्रों के प्रमुख लोगों को वे इतने कम समय में अपने समारोह में बुला सकें तथा इतना इतनी भारी संख्या के बावजूद वैसा व्यवस्थित और प्रभावी आयोजन कर सकें। ऐसे माहौल का चुनाव पर निश्चित रूप से असर होता है।

हां,राजनीति के दूसरे दलों के प्रमुख चेहरों की उपस्थिति नगण्य अवश्य थी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का भाग होने के कारण वहां पहुंचे थे। राजनेताओं के बड़े चेहरों की अनुपस्थिति के भी अपने मायने हैं। भाजपा ने ही मीडिया को खबर दी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं अखिलेश यादव, मायावती, मुलायम सिंह आदि विपक्षी नेताओं को आने का निमंत्रण दिया था। वे नहीं आए। भाजपा की ओर से राज्य के बाहर के भी अलग-अलग दलों के कुछ नेताओं को निमंत्रण भेजा गया था। उन सबकी अनुपस्थिति से भाजपा को अपने अनुकूल यह संदेश देने में सफलता मिली कि उसके विरुद्ध सारे एकजुट हैं और उनकी विजय को पचा नहीं पा रहे। चूंकी उनकी क्षमता चुनाव में मुकाबला कर विजय पाने की है नहीं तो उन्होंने अघोषित रूप से कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। हो सकता है भाजपा गाहे-बगाहे इसकी चर्चा करे। हम जानते हैं कि इस तरह की रणनीति भी बेअसर नहीं रह सकती।

इस तरह एक कार्यक्रम से भाजपा ने हमें लक्ष्य प्राप्त करने की कहानी कोशिश की । अपनी चुनावी संभावनाओं को सशक्त किया तो  विचारधारा के पायदान पर भी उठाए जाने वाली आशंकाओं को ध्वस्त करने में काफी हद तक सफलता प्राप्त की है। योगी को सर्वाधिक महत्व मिलना अपने आप में इन दोनों लक्ष्यों पर स्पष्ट संदेश देना ही है।

अवधेश कुमार, ई- 30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली 110092, मोबाइल - 9811027208



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