रविवार, 13 जून 2021

मंसूरी फैडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए मेहंदी हसन मंसूरी

मो. रियाज़

नई दिल्ली। मंसूरी समाज के सैंकड़ों सभ्य लोगों द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में देशभर के मंसूरी समाज के लोग मौजूद थे और जो लोग किसी कारणवश इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए वह लोग वर्चुअल (ऑनलाइन) के माध्यम से जुड़े। इस बैठक में 10 राज्यों के लोगों ने शिरकत की।
इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. अय्यूब मंसूरी द्वारा की गई। इस बैठक में मंसूरी फैडरेशन ऑफ इंडिया का गठन किया गया जिसमें विधिवत रूप से 11 सदस्यों की चुनावी कमेटी बनाकर चुनाव किया गया। 
इस बैठक में जो लोग वहां मौजूद थे उन सभी की मौजूदगी में बैठक की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अय्यूब मंसूरी (हापुड़) व हाजी साबिर (दिल्ली) ने मंसूरी फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए मेहंदी हसन मंसूरी वहीं नियाज़ अहमद उर्फ पप्पू मंसूरी को राष्ट्रीय महासचिव के नाम का प्रस्ताव किया जिसका समर्थन सभी मौजूद लोगों ने हाथ उठाकर किया और वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से जुड़े लोगों ने भी इस पर अपनी सहमति जताई वहीं कार्यकारिणी का शेष विस्तार अगली बैठक में किया जाएगा।
इस बैठक में मौजूद मंसूरी समाज के वरिष्ठ लोगों ने अपने विचार रखे और कुछ मुद्दों पर सलाह भी दी जिससे समाज में फैली बुराइयों व कमियों को दूर किया जा सके। 
नवनिर्वाचित अध्यक्ष मेहंदी हसन मंसूरी ने कहा हम लोगों को मिलकर समाज में फैली बुराइयों व कुरीतियों को रोकना होगा, आगे बढ़ने का एक मात्र रास्ता तालीम है, हमारे संगठन का खास मकसद समाज के आखरी पायदान पर खड़े मंसूरी को तालीम से जोड़ना है, ताकि आने वाले समय में हमारी नई पीढ़ी समाज व देश की सेवा कर सके।
इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अय्यूब मंसूरी ने कहा है कि हमें उम्मीद है कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष मेहंदी हसन मंसूरी जी संगठन को मजबूत करें व समाज के लिए बेहतरी के लिए काम करें।
राष्ट्रीय महासचिव नियाज़ अहमद उर्फ पप्पू मंसूरी ने कहा कि मंसूरी फेडरेशन ऑफ इंडिया का जो आज गठन किया गया है और मुझे जो संगठन की  जो नई जिम्मेदारी दी गई है मैं उसे पूरी ईमानदारी से निभाउंगा और पूरे देश का दौरा कर संगठन को और मजबूत बनाउंगा।
इस बैठक में हाजी सरकार आलम, नियाज़ अहमद उर्फ पप्पू मंसूरी, हुसैन बक्श मंसूरी, रशीद अहमद, वाहिद मंसूरी, डॉ. जावेद, खुर्शीद मंसूरी, हाजी शरीफ, अनवर मंसूरी, आज़ाद मंसूरी, जैनुद्दीन मंसूरी, हाजी कल्लन मंसूरी, हाजी इरफान, ज़मीर अहमद, हाजी अमज़द, हाजी समीर, हाजी शमीम, अब्दुल रहमान, शाहिद मंसूरी, यूसुफ मंसूरी, इनाम मंसूरी, रियासत मंसूरी, रियाजुद्दीन मंसूरी, जब्बार मंसूरी, शफीक मंसूरी, ज़ाकिर मंसूरी, रफ़ीक़ मंसूरी, नदीम मंसूरी, शोएब मंसूरी, सलीम मंसूरी, ज़ुबैर मंसूरी, तैयब मंसूरी, सत्तर हुसैन, राजा मंसूरी, नौशाद मंसूरी, फिरदौस मंसूरी आदि मौजूद रहे।


 

शुक्रवार, 11 जून 2021

समय आ रहा है जब दुष्प्रचारों का जवाब मिलेगा

अवधेश कुमार

देश के परिश्रम और जिजीविषा से कोरोना का आतंकित करने वाला झंझावात फिर एक बार ढलान पर आ गया है। हममें से अनेक लोगों ने अपनों को खोया या अपने लोगों को परिजनों को खोते देखा है। ऐसी विकट परिस्थितियों में शत्रु और विरोधी ज्यादा तीखा प्रहार करते हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि इस माहौल में उनकी बातों को समर्थन मिलेगा। इसमें सच और झूठ को अलग करने का सामूहिक विवेक कमजोर पड़ता है। जब कोरोना प्रकोप चरम पर था तो विदेशी मीडिया में भारत विरोधी दुष्प्रचार सहनशीलता की सीमा पार कर गया। टाइम पत्रिका ने लिखा कि पहली बार भारत में पाया गया कोरोना वायरस के बी 1.617 वैरीअंट से विश्वभर को खतरा पैदा हो गया है। यह 44 देशों में पाया जा चुका है। ब्रिटेन के चीफ मेडिकल ऑफिसर क्रिस व्हिटी का बयान था कि भारत में मिला वैरीअंट ज्यादा संक्रामक है। वैरीअंट के लगातार मिलने के बाद इस बात का खतरा ज्यादा है कि मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।

 वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की हेल्थ मैट्रिक्स इवेलुएशन इंस्टीट्यूट कह रहा थाउकि भारत में हर दिन आठ लाख व्यक्ति संक्रमित हो रहे होंगे। उनका आकलन था कि मृतकों की सही संख्या ढाई लाख नहीं (तब संख्या इतनी ही थी) साढ़े सात लाख होगी। इसके विशेषज्ञ शोधकर्ताओं ने कहा कि भारत में कोरोनावायरस के प्रकोप की सही तस्वीर का पता लगाना असंभव है। यानि भारत झूठा है। इन्होंने अगस्त तक मृतकों की संख्या 15 लाख होने का अनुमान भी जता दिया ।

आप सोचिए किस तरह संगठित तरीके से भारत की छवि तार-तार करने का अभियान चल रहा था। विश्व स्वास्थ संगठन ने सबसे पहले कहा कि नया वैरिअंट भारत में ही पाया गया और 44 देशों में पहुंचा है। विश्व स्वास्थ संगठन ने कोरोना प्रकोप के दौरान ऐसा एक कदम नहीं उठाया जिससे विश्व को इससे लड़ने में मदद मिले। उसने बार-बार केवल डर और भय पैदा किया है। कोविड-19 का जो वायरस दिसंबर 2019 में पाया गया उसका स्रोत वैज्ञानिकों के अनुसार चीन का वुहान प्रांत था। विश्व स्वास्थ संगठन चीन को कुछ कहने का साहस आज तक नहीं दिखा सका। उसने भारत में कोरोना की दूसरे लहर के बारे में भी कोई भविष्यवाणी नहीं की। हां, उसे नया वेरिएंट का स्रोत भारत में अवश्य दिख गया। अगर यह 44 देशों में पाया गया जिनमें अमेरिका के साथ यूरोप के देश भी शामिल हैं तो क्यों न माने कि वैरीअंट इन्हीं में कहीं से निकला होगा?

 गहराई से देखेंगे तो आपको भारत विरोधी दुष्प्रचार का एक अंतरराष्ट्रीय पैटर्न दिखाई देगा। लांसेट जैसी विज्ञान की पत्रिका ने जिस तरह राजनीतिक लेख लिखकर वास्तविकता से दूर भारत की बिल्कुल भयावह विकृत तस्वीर पेश की और भारत सरकार को इस तरह लांछित किया मानो जानबूझकर मानवीय त्रासदी की स्थिति तैयार की गई। साफ था कि शत्रु चारों ओर सक्रिय थे। इनमें कोई रचनात्मक सुझाव नहीं, तथ्यात्मक विश्लेषण नहीं। भारत के टीके को कमतर बताने का अभियान भी विश्व स्तर पर चल रहा है। कोरोना की पहली लहर में जब भारत ने अपने देश से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवाइयां विश्व भर को आपूर्ति करनी शुरू कर दी तब भी इसी तरह का दुष्प्रचार किया गया। मेडिकल भाषाओं में तथाकथित रिपोर्टो को उल्लिखित कर कहा गया कि यह कोरोना में प्रभावी ही नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस पर मुहर लगा दी। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन जैसी सस्ती दवा के समानांतर दुनिया भर की बड़ी कंपनियों ने अनेक महंगी दवाइयां, इंजेक्शन कोरोना के नाम पर बाजार में झोंकी, उन्हें प्रभावी बताया और खूब मुनाफा कमाया। बाद में साबित हुआ कि वो दवाइयां अनुपयोगी और हानिकारक थीं।

लेकिन जब अपने ही देश में दुष्प्रचार की बड़ी-बड़ी मशीनें नकारात्मक तथ्यों और आरोपों का छिड़काव कर रहीं हों तो विदेशियों का मुंह कैसे बंद किया जाएगा। वैसी विकट स्थिति में केंद्र व राज्य सरकारों, जिम्मेवार राजनीतिक दलों, विवेकशील पत्रकारों - बुद्धिजीवियों - एक्टिविस्टों के सामने एक ही रास्ता होता है, प्रत्युत्तर देने में उलझने की बजाय मिलजुल कर पहले अमानवीय और क्रूर दौर का अंत करें।

अब जब भारत ने कोरोना को नियंत्रित कर लिया है तो क्या इनका दायित्व नहीं बनता कि इसे भी स्थान दें। हालाँकि उस दौर में भी विश्व के स्तर पर ही इनको प्रत्युत्तर मिलना आरंभ हो गया था। उदाहरण के लिए यूरोपीय संघ के मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स की प्रतिष्ठित वेबसाइट ईयूरिपोर्टर ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत विरोधी रिपोर्ट और लेखों का विश्लेषण कर सबको कटघरे में खड़ा किया था। इसने लिखा कि न सही तथ्य देखे गए, न तथ्यों का विश्लेषण किया गया बल्कि बड़ी दवा कंपनियों के प्रभाव में आकर भारत के बारे में नकारात्मक रिपोर्ट और लेख लिखे गए। ऐसे समय जब भारत के साथ खड़ा होना चाहिए मीडिया के इस समूह ने निहायत ही गैर जिम्मेदार भूमिका निभाई है। लांसेट की आलोचना करते हुए बताया गया कि उसकी एशिया संपादक एक चीनी मूल की महिला हैं जिन्होंने भारत विरोधी लेख लिखा था।

अमेरिका की ही जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी ने दुनिया के कई देशों के कोरोना संक्रमण और उससे होने वाली मौतों के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा कि भारत कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में अभी सबसे सुरक्षित देशों में से एक है। यूनिवर्सिटी ने भारत को फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, अमेरिका, स्वीडन, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, ब्राजील जैसे देशों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित बताया। विश्व में सबसे बेहतर स्वास्थ ढांचा का दावा करने वाले देश अमेरिका विश्व में कोविड-19 वाली मौतों में लगमग छह लाख के साथ सबसे ऊपर है। अमेरिकी मीडिया को यह दिखाई नहीं दिया कि भारत जैसे 130 करोड़ वाले देश का आंकड़ा इससे आधा पर है?

अच्छा है कि भारत ने अपना धैर्य बनाए रखा है। भारत विरोधी दुष्प्रचार में शामिल सबको उत्तर दिया जाना चाहिए लेकिन समय पर। हमारे देश ने अपना एक स्वतंत्र टीका विकसित किया तथा एक संयुक्त स्तर पर। डीआरडीओ ने जो 2डीजी औषधि बनाई वह विश्व में अपने किस्म की अकेली कोरोना औषधि है। ये बड़ी उपलब्धियां हैं। अमेरिका में मीडिया से लेकर सरकार अपने टीके को विश्व में सबसे ज्यादा 95% प्रभावी होने का प्रचार करती है। टीका बनाने वाले दूसरे देश भी अपना प्रचार कर रहे हैं। भारत में अपने ही टीके की पहले खिल्ली उड़ाई गई, उसके बारे में नकारात्मक धारणा फैलाई गई, मीडिया में नकारात्मक बहस हुए, लेख लिखे गए। विदेश में बैठे दुष्प्रचारकों को भी भारत से ही तो आधार मिलता है। अगर राहुल गांधी के ट्वीट का स्वर यह हो कि भारत के लोगों को दूसरे देशों में घुसने नहीं देंगे तो इसे विश्व स्तर पर सुर्खियां दी जाएंगी। अभी तक किसी देश ने भारत के बारे में इस तरह की टिप्पणी नहीं की। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब प्रतिदिन टीवी पर आकर ऑक्सीजन की कमी और उसके कारण मरीजों की मौत और अस्पतालों में व्यवस्था न होने की विकृत राजनीति करेंगे तो यह विश्व मीडिया में भी जाएगा।

झूठ की आयु ज्यादा दिन नहीं होती। भारत के लिए विकट समय था। दूसरी लहर के आकलन में चुकें हुई , पहली लहर से अनुभव लेकर जन चेतना को जागरूक करने के लिए जो होना चाहिए था नहीं हुआ, स्वास्थ्य व्यवस्था में जो सुधार चाहिए था ठीक प्रकार से नहीं किया गया, समाज के स्तर पर भी लापरवाही ज्यादा बरती गई, कुछ नेताओं ने भी कोरोना कहां है… टीके  नहीं लगाएंगे जैसे बयानों से गलतफहमी पैदा की। भारत ने इन सबका घातक दुष्परिणाम झेला है।जब झंझावात पूरी तरह थमेगा शोधकर्ता, विश्लेषक अनेक बातों को फिर से समझने की कोशिश करेंगे।  विश्व स्तर पर दुष्प्रचार को तो उत्तर मिलेगा, यह भी देखा जाएगा कि कोरोना से घोषित मौतों में केवल कोरोना के कारण कितनी मौतें हुईं क्योंकि कोरोना से हुई मौतों में बड़ी संख्या उनकी है जिनको कई प्रकार की गंभीर बीमारियां थी और उसी में वे संक्रमित भी हुए। दूसरे,  निजी अस्पतालों ने मौत के आंकड़े बढ़ाने और तस्वीर को भयावह करने में कितनी बड़ी भूमिका निभाई? सच्चाई आज न कल उनसे पूछी जाएगी और छानबीन भी होगी। पूछा जाएगा कि आपने अपने महंगे आईसीयू के लिए औक्सीजन की व्यवस्था क्यों नहीं रखी?

अवधेश कुमार, ई:30, गणेश नगर, पांडव नगर कौम्प्लेक्स, दिल्ली :110092,मोबाइल :9811027208, 8178547992

सोमवार, 7 जून 2021

अगर ऑक्सीजन की कमी नहीं चाहते तो कम से कम एक पौधा अपने जीवन में जरूर लगाएं : नियाज़ अहमद

मो. रियाज़

नई दिल्ली। पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए जरूरी है कि आस-पास हरे-भरे पेड़ पौधे हों। लेकिन आज के समय में बढ़ते औद्योगिकीकरण की वजह से लाखों पेड़-पौधों को काटा जा रहा है। ऐसे में पर्यावरण पर इसका साफ-साफ असर देखा जा सकता है। हालांकि, पर्यावरण को शुद्ध रखने और हवा की गुणवत्ता को बरकरार रखने को लेकर सरकारें पौधा रोपण अभियान चलाती रहती हैं।

अब इसी कड़ी में गांधी नगर विधानसभा के शास्त्री पार्क वार्ड 25ई में युवा एकता समाज सेवा संस्था द्वारा शास्त्री पार्क में पौधा रोपण किया गया। इस पौधा रोपण में लगभग 100 पौधे लगाए गए। इस मौके पर मुख्य अतिथि दिल्ली स्टेट उर्स कमेटी के चेयरमैन एफ आई इस्माइलीयुवा एकता समाज सेवा संस्था के वाइस प्रेजिडेंट नियाज़ अहमद उर्फ पप्पू मंसूरी व उनकी पूरी टीम, समाजसेवी रिज़वान अहमद मन्सूरी, वाहिद मन्सूरी, आशीष तिवारी, राजू मिश्रा, नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद रियाज़सुभाष गौड़, कमरू खान, सलीम खान, जैनुद्दीन मंसूरी, दीपक हिंदुस्तानी आदि के साथ
 
कई आरडब्ल्यूए व एनजीओ के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे।

इस मौके पर युवा एकता समाज सेवा संस्था के वाइस प्रेजिडेंट नियाज़ अहमद उर्फ पप्पू मंसूरी ने बताया कि उजड़ते जंगलों और बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण अभी हमने ऐसी समस्या को देखा व झेला है जिसमें सैकड़ों लोगों ने

ऑक्सीजन की कमी की वजह से अपनी जान गंवा दी। इसी उत्पन्न हुई समस्याओं को देखते हुए हमें अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने की जरूरत है। इसके लिए दिल्ली वन विभाग के सहयोग से हमारी संस्था ने पिछले साल भी पौधरोपण किया था और इस साल भी हमने कई तरह के औषधीय पौधे लगाए हैं। 

उन्होंने कहा कि अगर ऑक्सीजन की कमी नहीं चाहते तो कम से कम एक पौधा अपने जीवन मे जरूर लगाएं ताकि वह पौधा पेड़ बनकर आपकी ऑक्सीजन देकर सेवा करे।

दिल्ली स्टेट उर्स कमेटी के चेयरमैन एफ आई इस्माइली ने बताया कि देश में ऑक्सीजन की कमी के चलते हजारों नागरिकों ने अपना जीवन गंवाया है। हजारों बच्चों ने अपने माता-पिता या अभिभावकों को खोया है । उन्होंने बताया कि पेड़ पौधे ऑक्सीजन का भंडार हैं यह हमें अन्य बीमारियों से बचाते हैं इसलिए सभी को अपने जीवन में एक पौधा लगाने का संकल्प जरूर लें।
नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद रियाज़ ने कहा कि हरे पेड़-पौधे से ही प्रकृति है,
पौधे जीवन के आधार हैं। यह समाप्त होंगे तो
जीव-जंतु यहां तक की प्रकृति ही समाप्त हो जाएगी। इतना ही नहीं पेड़ों से हमें फल, फूल, भोजन व औषधियां प्राप्त होती हैं। यह रहेंगे तो ही जीवन रहेगा क्योंकि वृक्ष कार्बन डाईऑक्साइड के अलावा कई विषैली गैसों को भी अपने अंदर समाहित कर हम सब को सुरक्षित करते हैं। इसलिए हम सभी को पौधे लगाना चाहिए ताकि आगे आक्सीजन की कमी नहीं हो।

समाजसेवी रिजवान मंसूरी ने बताया कि सरकार भी हर साल पौधरोपण करने के लिए लोगों को प्रेरित करती है इसके बाद भी एक बड़ी आबादी इसे लेकर उदासीन बनी हुई है। ऐसे लोग न पौधरोपण में दिलचस्पी लेते हैं और न ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर उन्हें कोई सरोकार रहता है। हालांकि काफी ऐसे पर्यावरण प्रेमी और प्रहरी भी हैं, जो पौधरोपण अभियान को गति देने में जुटे हैं। ऐसे लोग खुद पौधरोपण करने के साथ-साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हुए इस अभियान से जोड़ते हैं।



रविवार, 6 जून 2021

शास्त्री पार्क आरडब्ल्यूए ने किया गौरव सम्मान देकर कोरोना योद्धाओं को सम्मानित

मो. रियाज़
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के वैश्विक संकट-काल में समाज और देश को बचाने के लिए समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मियों, दिल्ली सिविल डिफेंस के वालंटियर्स, बिजली विभाग के कर्मचारियों, समाजसेवियों आदि की सेवा-निष्ठा के लिए शास्त्री पार्क आरडब्ल्यूए (रजि.) ने कोरोना योद्धाओं को गौरव सम्मान देकर सम्मानित कर रही है।

यह संस्था अब तक कोरोना महामारी के दौरान अलग-अलग क्षेत्र में अपनी सेवा दे रहे 200 कोरोना योद्धाओं को सम्मान पत्र देकर सम्मानित कर चुकी। आज भी अपने कार्यालय पर शास्त्री पार्क आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष संजीव जैन, समाजसेवी नियाज़ अहमद उर्फ पप्पू मंसूरी, नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद रियाज़, नफीस चौधरी, आशीष तिवारी, दिल्ली सिविल डिफेंस के डिवीजन वार्डन आर.बी. यादव ने 100 से अधिक कोरोना योद्धाओं को गौरव सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। इस सम्मान को पाने वाले दिल्ली पुलिस के जवान, दिल्ली सिविल डिफेंस के वालिंटियर, दिल्ली होम गार्ड के वॉलिंटियर, क्षेत्रीय डॉक्टर, मीडिया कर्मी, बिजली विभाग के कर्मचारी, समाजसेवी संस्थाओं के सदस्य व पदाधिकारी, सोशल वर्कर आदि थे।

विदित हो दिल्ली, कोरोना के खिलाफ अपनी सबसे मुश्किल जंग कोरोना योद्धाओं के मजबूत इरादे की वजह से ही लड़ रही है। दिल्ली के हीरो अपने परिवार की चिंता ना करते हुए दिन-रात बस दिल्ली को सुरक्षित बनाने में जुटे हुए हैं। लेकिन कोरोना वायरस महामारी के संकटकाल में कोरोना योद्धाओं को भी कोरोना के संक्रमण का शिकार होना पड़ा है फिर भी कोरोना इनके हौसलों को पस्त नहीं कर पाया है। अपने योद्धाओं का जोश, जुनून और लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी के समर्पण का तहे दिल से शुक्रिया और सम्मान देने के लिए ही शास्त्री पार्क आरडब्ल्यूए (रजि.) ने कोरोना योद्धाओं को गौरव सम्मान पत्र देने की शुरुआत की।

इस मौके पर शास्त्री पार्क आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष संजीव जैन ने कहा कि हमने सिर्फ एक शुरुआत की है ताकि कोरोना योद्धाओं को एक छोटा सा सम्मान दे सकें जिससे यह योद्धा इस कोरोना महामारी की लड़ाई में अपने आप को अकेला न महसूस करें। यह सम्मान उन्हें नई ऊर्जा देगा।

हमारी आरडब्ल्यूए आगे भी ऐसे कोरोना योद्धाओं को सम्मानित करती रहेगी जिन्होंने इस वैश्विक संकट-काल में समाज और देश को बचाने के लिए अपने जीवन की भी परवाह नहीं की और लोगों की सेवा की।

हमें जैसे-जैसे कोरोना वायरस महामारी के संकटकाल में सेवा करने वाले कोरोना योद्धाओं का पता चल रहा है। वैसे-वैसे हम उन्हें संस्था की ओर से सम्मान पत्र देकर सम्मानित कर रहे हैं जिससे उनके हौंसलों में कोई कमी न आ सके। 

नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के उपाध्यक्ष मोहम्मद रियाज़ ने कहा कि

कोरोना काल में लोग रिश्तों को भी भूल गए थे। मदद के लिए दूसरे लोगों का सहारा लेना पड़ रहा था। लेकिन ऐसी परिस्थिति में जब अपनों से साथ छोड़ा तो कारोना योद्धा मदद के लिए आगे आए। आज अगर कोरोना से राहत मिली है तो उसमें सरकार के साथ-साथ कोरोना योद्धाओं का काफी सहयोग रहा है। इनलोगों ने अपने जान की परवाह नहीं करते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई। यह इनके जज्बे को दिखाता है। इनका हर सम्मान इनके लिए कम है। जहां हमलोग घर में बैठे थे वहीं स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, मीडिया व कुछ स्वयंसेवी संगठनों के लोग अपने कर्तव्य को निभा रहे थे।

दिल्ली सिविल डिफेंस के डिवीजन वार्डन आर.बी. यादव ने कहा कि यह सम्मान सिविल डिफेंस के वालिंटियर को एक नई ऊर्जा देगा और वह और अच्छा करने की कोशिश करेंगे। यह कुछ लोगों के लिए कागज का एक टुकड़ा हो सकता है पर यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा सम्मान है। मैं व मेरी पूरी टीम शास्त्री पार्क आरडब्ल्यूए का धन्यवाद करती है जिन्होंने हमें सम्मान देकर एक नई ऊर्जा दी है।







 
 
 
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