शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

खोया तो चीन ने है हमने नहीं

अवधेश कुमार

चीनी सैनिकों का पूर्वी लद्दाख के इलाके में अपने पूर्व निर्धारित एवं मान्य स्थानों की ओर लौटने की सूचना निस्संदेह, तत्काल राहत देने वाली है। पिछले साल जून में गलवान घाटी में भारत के 20 जवानों की शहादत को कौन भारतीय भूल सकता है? उसके बाद पूरे देश में चीन के विरुद्ध आक्रोश का बना माहौल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यह ऐसी टीस है जो लंबे समय तक सालेगी और इसके गंभीर मायने हैं। हालांकि धोखे से किए गए बर्बर हमलों का भारतीय जवानों ने भी  मुंहतोड़ जवाब दिया था और सूचना यही है कि उनकी क्षति ज्यादा हुई। यह बात अलग है कि चीन जैसे बंद देश से वहां के मरने वालों जवानों के बारे में कोई खबर बाहर नहीं आ पाई। तनाव इतना बढ़ गया था कि अगस्त-सितंबर में 45 साल बाद भारत-चीन सीमा पर गोलियां चलीं। हालांकि इसकी पहली सूचना 10 फरबरी को चीन की ओर से ही आई। वहां के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म होने तथा सेना वापसी की औपचारिक जानकारी दी। किंतु भारत के लोगों के लिए इस पर विश्वास करना कठिन था क्योंकि इसके पहले कई बार सहमति होने के बावजूद चीन ने उसका पालन नहीं किया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में सेनाओं के झड़प से पूर्व की स्थिति में जाने के समझौता होने की पुष्टि कर दी। 

बहरहाल, रक्षा मंत्री का यह कहना सही है कि इस समझौते से भारत ने कुछ नहीं खोया है। हालांकि भारत में अब रक्षा-सीमा सुरक्षा सहित विदेश नीति को लेकर भी राजनीतिक दल अपने बयानों और प्रतिक्रियाओं में संयम नहीं बरतते। यही कारण है कि रक्षा मंत्री द्वारा संसद में यह कहने के बावजूद कि हम किसी भी देश को अपनी एक इंच जमीन नहीं लेने देंगे सरकार के इरादे पर प्रश्न उठाया जा रहा है। समझौता के बाद दोनों देशों की जो टुकड़ियां एक-दूसरे के एकदम करीब तैनात थीं वहां से पीछे हटते हुए पूर्व स्थिति में जाएंगी। पैंगोग झील इलाके में चीन अपनी सेना की टुकड़ियों को उत्तरी किनारे में फिंगर 8 के पूरब की दिशा की तरफ रखेगा। मई के पूर्व वर्षों से यही स्थिति थी। भारतीय सेना फिंगर 3 के पास स्थित स्थायी धन सिंह थापा पोस्ट पर आ जाएगी। पेंगोंग झील के दक्षिण किनारे से भी दोनों सेनाएं इसी तरह की कार्रवाई करेंगी। हां, इसके समय का खुलासा अभी नहीं हुआ है। इसी तरह चीन ने 2020 में दक्षिण किनारे पर जो भी निर्माण किए हैं उन्हें हटाया जाएगा और पुरानी स्थिति कायम की जाएगी। दोनों देश पेंगोंग के उत्तरी इलाके पर पेट्रोलिंग को फिलहाल रोक देंगे। पेट्रोलिंग जैसी सैन्य गतिविधियां तभी शुरू होंगी जब राजनीतिक स्तर समझौता हो जाएगा। सीमा की गहरी समझ तथा चीन एवं भारत की सेनाओं की तैनात स्थिति को समझने वाले जानते हैं कि तत्काल इससे बेहरत समझौता नहीं हो सकता। 

ठीक है कि चीन ने समझौते में जो कहा वह करेगा ही यह निश्चयात्मकता के साथ कोई नहीं कह सकता। राजनाथ सिंह ने भी यही कहा कि उम्मीद है कि गतिरोध से पहले वाली स्थिति बहाल हो जाएगी। कोई नहीं कहता कि चीन के साथ सीमा तो छोड़िए वास्तविक नियंत्रण रेखा या एलएसी विवाद खत्म हो गया है। उस दिशा में यह पहला कदम है। रक्षा मंत्री ने भी अपने बयान में कहा कि एलएसी पर कुछ पुराने मसले बचे हुए हैं। आगे इस पर बात होगी। लेकिन अभी तो पूरा फोकस पूर्वी लद्दाख में चीन की धृष्टतापूर्ण कार्रवाइयों को खत्म कराने पर था और वही हुआ है। अगर चीनी सैनिक झील के उत्तरी तट पर फिंगर 8 के पूरब की तरफ लौट जाएंगे तथा अप्रैल 2020 के बाद झील के उत्तरी और दक्षिणी तटों पर बनाए गए किसी भी संरचना को नष्ट कर देगा तो फिर इसमें बचा क्या है? सच तो यह है कि चीन ने उत्तरी तट पर जो अग्रिम स्थिति यानी ऐडवांस पोजिशन हासिल किया था उसे छोड़ेगा। तो फिर खोया किसने इसका उत्तर आप आसानी से दे सकते हैं। वास्तव में गलवान की झड़प के बाद चीन ने बड़ी तादाद में इन इलाकों में जवानों को तैनात कर दिया था।  जवाब में हमने भी जबरदस्त तैनाती की और उसी का परिणाम है कि चीन को अपनी पूरी योजना बदलनी पड़ी है। सच तो यही है कि चीन कसमसाकर पीछे हटने को मजबूर हुआ है। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों की पहचान कर हमारी सेनाएं तैनात हैं और इसी कारण भारत की बढ़त है।   

3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा अधिकतर जगह जमीन से गुजरती है, मगर पूर्वी लद्दाख में आने वाली करीब 826 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा के लगभग बीच में पैंगोंग झील पड़ती है। यह एक लंबी, गहरी और लैंडलॉक्ड (जमीन से घिरी हुई) झील है। 14 हजार 270 फीट की ऊंचाई पर स्थित 134 किलोमीटर पेंगोंग झील लद्दाख से लेकर तिब्बत तक फैला हुआ है। 604 किलोमीटर क्षेत्र में फैली यह झील कहीं-कहीं 6 किलोमीटर तक चौड़ी भी है। इसमें सम्पूर्ण रेखांकन संभव नहीं नहीं। झील के दो-तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है और शेष भारत के हिस्से आता है।  यहां दोनों देश नावों से पेट्रोलिंग करते हैं। यह एक वीरान दुर्गम पहाड़ियों वाला इलाका है जिनके स्कंध निकले हुए हैं। इन्हें ही फिंगर एरिया कहा जाता है। ऐसे 8 फिंगर एरिया हैं, जहां भारत-चीन सेना की तैनाती है। भारत की नियंत्रण रेखा फिंगर 8 तक है लेकिन नियंत्रण फिंगर 4 तक ही रहा है। भारत की एक स्थायी चौकी फिंगर 3 के पास है। चीन की सीमा चौकी फिंगर 8 पर हैं लेकिन नियंत्रण रेखा के फिंगर 2 तक उनका दावा है। फिंगर 4 में एक समय उसने स्थायी सरंचना बनाने की कोशिश की थी जिसे जिसे भारत की कड़ी आपत्ति के बाद हटा लिया गया। भारत फिंगर 8 तक पैट्रोलिंग करता रहा है मगर यह पैट्रोलिंग पैदल होती है। पिछले साल मई में फिंगर 5 एरिया में दोनों सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। चीन ने अप्रैल-मई से ही फिंगर 4 तक अपनी सेना को तैनात कर रखा था। कहने की आवश्यकता नहीं कि चीन के जवाब में भारत ने भी चोटियों पर भारी संख्या में जवान तैनात कर दिए। 

जिस तरह के प्रश्न भारत में उठ रहे हैं वैसा चीन में नहीं उठ सकता। मूल बात है अपने देश की क्षमता को पहचानना और विश्वास करना। प्रमुख देशों ने भी पूर्वी लद्दाख से लगी नियंत्रण रेखा पर चीन से निपटने में भारत की दृढ़ता का लोहा माना है। चीन ने भी कल्पना नहीं की थी कि काफी विचार-विमर्श, योजना और सैन्य तैयारी से दिए गए धोखे के खिलाफ  भारत इस तरह डटकर मरने-मारने की अंतिम सीमा तक चला जाएगा। भारत ने जिस तरह सेना के सभी अंगों को सक्रिय किया, आकाश से लेकर धरती और पानी में जैसी जबरदस्त मोर्चाबंदी की उसकी उम्मीद दुनिया में किसी देश को नहीं थी। आज चीन की पूरी योजना जिसे हम साजिश मानते हैं, विफल हो चुकी है। भारत तो जवाब देने के लिए मजबूर था। उनको सबक देने के लिए जवाबी कार्रवाई में अपनी तैनाती की। वे हट जाएं तो हमें वापस पूर्व स्थिति में जाना ही है। वे बात चाहते थे लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि पूर्व स्थिति बहाल होने के 48 घंटे के अंदर फिर बातचीत शुरु होगी और उन्हें मानना पड़ा। बतचीत में भी भारत ने स्पष्ट किया कि समस्याओं का समाधान तीन आधारों पर हो सकता है।  एक, दोनों देश नियंत्रण रेखा को मानें और उसका आदर करें। यानी गलवान का अपराध और विश्वासघात दोबारा न हो। दो, कोई भी देश वर्तमान स्थिति बदलने की एकतरफा कोशिश न करे। तथा तीन, दोनों देश सभी समझौतों को पूरी तरह मानें और पालन करें। 

वास्तव में भारत ने चीन के साथ सीमा व्यवहार में डोकलाम के समय से गलवान तक जिस तरह का कूटनीतिक, सैन्य और राजनीतिक आत्मविश्वासपूर्ण व्यवहार किया है उसने विश्व के बड़े-बड़े रक्षा विश्लेषकों को हैरत में डाल दिया। चीन को भी भारत के साथ सीमा और सैन्य व्यवहार पर अपनी पूरी रणनीति नए सिरे से बनाने को विवश होना पड़ रहा है। वर्तमान समझौता उसी की परिणति है। इसमें खोने के लिए केवल चीन के पास ही कुछ था। चीन के साथ सीमा विवाद इतिहास की भूलों की देन है। चीन जैसा दुष्ट राष्ट्र कभी इसे सुलझाना नहीं चाहता, क्योंकि वह लाभ की स्थिति में है। 1962 के युद्ध का एकतरफा अंत उसने अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद कर दी। उसका राष्ट्रीय लक्ष्य हर मायने में विश्व का सर्वशक्तिमान और सर्वाधिक प्रभाव विस्तार वाला देश बनना है। वह जो कुछ कर रहा है उसी लक्ष्य के अनुरुप। भारत के लिए आवश्यक है कि हम राजनीतिक मतभेद को परे रखकर उसके लक्ष्य को समझते हुए अपनी रक्षानीति के साथ कूटनीति की जवाबी तैयारियों और कार्रवाइयों के प्रति एकजुटता दिखाएं। 

अवधेश कुमार, ईः30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, मोबाइल-9811027208, 8178547992


बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

भविष्य में याद किया जाएगा इस बजट को

अवधेश कुमार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 का बजट प्रस्तुत करते हुए गुरु रविंद्र नाथ टैगोर की यह पंक्ति सुनाई- उम्मीद ऐसी चिड़िया है जो अंधेरे में भी चहचहाती है। पूरे वर्ष में कोरोना के संकट ने जिस ढंग से दुनिया सहित भारत की अर्थव्यवस्था को धक्का पहुंचाया उसके कारण समाज के हर तबके के मनोविज्ञान में चिंता और निराशा सघन हुई। इन परिस्थितियों में बजट ऐसा चाहिए था जो लोगों के अंदर उनके और संपूर्ण देश के बेहतर भविष्य की उम्मीद पैदा करे, देश के समक्ष समस्याएं और चुनौतियां जितनी गहरी है उनका वास्तविक मूल्यांकन कर उनसे निपटने और सामना करने के लिए साहसपूर्ण व्यावहारिक प्रभावी कदम उठाने का जोखिम ले...। क्या मोदी 2 सरकार के इस दूसरे बजट को हम इस कसौटी पर खरा पा सकते है? तीन दिनों पूर्व संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने बजट की दिशा का संकेत दे दिया था। साफ था गरीबों,किसानों के कल्याण, आम आदमी के जेब में खरीद के लिए धन आने, विकास के पथ पर सरपट दौड़ने का रास्ता तैयार करने और साहस के साथ जोखिम भरे सुधार सरकार के मूल लक्ष्य होंगे। 

इस समय कृषि कानून के विरोध में राजधानी में किसान संगठनों का एक आंदोलन चल रहा है। बड़े वर्ग का ध्यान इस ओर रहा होगा कि कृषि और किसानों से संबंधित क्या घोषणाएं होती हैं। विस्तार से समस्त प्रावधानों का यहां उल्लेख संभव नहीं है, लेकिन कृषि और ग्रामीण आधारभूत संरचना,कृषि के लिए कर्ज की राशि, फसलों के न्यूनतम मूल्य, कृषि से संबंधित उद्योगों को प्रोत्साहित करने, नष्ट होने वाले 22 फसलों को ऑपरेश ग्रीन में शामिल करने आदि बातें निश्चय ही आकर्षक हैं। यह पहली बार है जब कृषि आधारभूत संरचना के धन का उपयोग कृषि उत्पाद बाजार समिति यानी एपीएमसी के लिए भी किया जा सकेगा। जो लोग मंडियों को खत्म किए जाने की साजिश का आरोप लगा रहे थे उनको कम से कम तत्काल तो उत्तर मिल गया होगा। वैसे गांव कृषि और किसान को हम संपूर्ण व्यवस्था से अलग करके नहीं देख सकते। इसी तरह समाज और अर्थव्यवस्था के सम्पूर्ण हिस्सों को गांव, गरीब, किसानों से अलग नहीं कर करते। संतुलित बजट वही माना जाएगा जब समाज, अर्थ और व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं को आवश्यकता, उपादेयता, अनुपात के अनुसार स्थान दिया जाए। राजनीति को अलग करके विचार करें तो यह स्वीकार करना होगा कि सीतारमण का बजट इन मायनों में संतुलित  है। 

यह पहले से साफ था कि स्वास्थ्य को पूरी तरह भारतीय परंपराओं को भी सशक्त करते हुए विश्वस्तरीय बना देने के लिए सारे पहलुओं को समेटे हुए व्यापक योजना और प्रावधान होंगे। स्वास्थ्य का कुल बजट 2 लाख 23000 करोड़ है। यानी आवंटन रिकॉर्ड 137 प्रतिशत बढ़ा है। इसमें 64,180 करोड़ रुपए के बजट के साथ प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना शुरू होगी। इस कार्यक्रम के अर्थ से ही स्पष्ट है कि इसका लक्ष्य क्या है। 70 हजार गांवों के वेलनेस सेंटर्स को इससे मदद मिलेगी। 602 जिलों में क्रिटिकल केयर अस्पताल शुरू होंगे। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल या राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र को मजबूत किया जाएगा। इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन पोर्टल शुरू किया जाएगा ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं या पब्लिक हेल्थ लैब्स को कनेक्ट कर सकें। 15 हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर्स शुरू किए जाएंगे, नौ बायो सेफ्टी लेवल लैब शुरू होंगी। बजट में गांव से शहर तक स्वास्थ्य ढांचे को ऐसा बना देने का लक्ष्य है जिसमें सबको उचित इलाज और स्वस्थ रहने का आधार उपलब्ध हो सके। इस नाते भी यह बजट ऐतिहासिक है। 

 विकसित देशों की कतार में खड़े होने के लिए भारत हर क्षेत्र से जुड़े आधारभूत ढांचा को वैश्विक स्तर पर लाना अपरिहार्य है। इस पर पहले भी फोकस हुआ है। मोदी सरकार ने आरंभ से ही इसकी पूरी कोशिश की है। पिछले बजट में 110 लाख करोड़ रुपये पांच वर्षों में खर्च की घोषणा हुई थी। कोरोना आघात से बाहर निकलने का संकेत देते हुए इस बजट में ऐसे प्रावधान हैं जिनसे 2020 की भी भरपाई हो जाए। 1.10 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड आवंटन तो केवल रेलवे के लिए हैं। भारतमाला परियोजना के लिए 3.3 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान है। रेलवे ने राष्ट्रीय रेल योजना 2030 बनाया है ताकि भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार रेल प्रणाली बनाई जा सके। मार्ग आधारभूत संरचना के लिए आर्थिक गलियारे बनाए जाएंगे। सड़क परियोजनाओं को चुनावी राजनीति का तोहफा बताना आसान है। लेकिन क्या इसकी आवश्यकता नहीं थी? बंगाल में 25 हजार करोड़ रुपए से हाईवे का निर्माण , 34 हजार करोड़ रुपए असम में नेशनल हाईवेज पर, 65 हजार करोड़ रुपए से केरल में 1100 किमी नेशनल हाईवे  का निर्माण आदि को चुनावी जनरिए से देखा जा सकता है। किंतु तमिलनाडु में तो भाजपा बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर रही होगी। वहां भी 3500 किमी नेशनल हाईवेज परियोजना के तहत 1.03 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा है। इसे देश की आवश्यक आधारभूत संरचना को वर्तमान एवं भविष्य के अनुरुप सशक्त करने की दृष्टि से देखना उचित होगा। आधारभूत ढांच के क्षेत्र में केवल निर्माण और विस्तारों की ही घोषणाएं नहीं है। डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट यानी विकास वित्तीय संस्थान की जरूरत बताते हुए एक विधेयक लाने की घोषणा है। सार्वजनिक आधारभूत ढांचा के मुद्रीकरण पर ध्यान देने की घोषण है। इसके लिए नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन शुरू होगी। इसका एक डैशबोर्ड बनेगा ताकि इस मामले में हो रही तरक्की को देखा जा सके। 

निस्संदेह, कोई भी बजट सबको संतुष्ट नहीं कर सकता। पर जरा दूसरे नजरिए से देखिए। ऐेसे संकट के काल में 34.83 लाख करोड़ का बजट असाधारण साहस का परिचय देने वाला है। आप कोरोना काल में वित्त मंत्री द्वारा घोषित तीन पैकेजों, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना तथा रिजर्व बैंक की योजना को मिला दीजिए तो 20 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि सरकार पहले ही दे चुकी है। इनको साथ मिलाकर देखिए और राजनीतिक नजरिए से परे होकर विचार करिए। चीन ने सीमा पर और उसके परे भारत के अंतरराष्ट्ीय-क्षेत्रीय रक्षा हितों के समक्ष जो चुनौतियां पेश कर दीं हैं उसमें भारत के पास रक्षा व्यवस्था को किसी स्थिति से निपटने के लिए कमर कसने के अलावा कोई चारा नहीं था। 4 लाख 78 हजार करोड़ की राशि का आवंटन करना पड़ा है। अगर सबके सिर से बोझ कम कर दिया जाए तो धन आएगा कहां से? विदेशी निवेश के लिए भी आपको पूरा ढांचा उपलब्ध कराना ही होगा और इसकी पूरी कोशिश बजट में है। हम न भूलें कि किसी के सिर पर करों का बोझ बढ़ाया नहीं गया है।

 कई लोग अलग-अलग विषय उठाकर बजट की हमेशा आलोचना करते हैं। बजट को समग्रता में देखने से ही आप सही निष्कर्ष तक पहुंच सकते हैं, खंड-खंड में विचार करने से नहीं। उदाहरण के लिए जो पूछ रहे हैं कि इसमें रोजगार के लिए क्या किया गया है उनको ध्यान रखना चाहिए कि आधारभूत संरचना के जितनी परियोजनाएं हैं , ग्रामीण आधारभूत संरंचना या शहरी, स्वच्छ जल मिशन, मिशन पोषण कार्यक्रम, शिक्षा क्षेत्र के कदम... सबमें बिना घोषणा के करोड़ों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।स्वास्थ्य मूल राज्यों का विषय है लेकिन पूरी योजना साकार हुई तो स्वास्थ्य क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदल जाएगी। देश का कौन सा वर्ग और क्षेत्र इसमें समाहित नहीं होगा? इसमें कितने लोगों को रोजगार मिलेगा जरा इसकी कल्पना करें। आर्थिक विकास में इसका सतत स्थायी योगदान होगा। अर्थव्यवस्था आम मनुष्य के जीवन से अलग हटके नहीं हो सकती । व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र बनता है। इसलिए राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण का आधार और उसकी दिशा भी बजट में दिखाई देनी चाहिए। आप ध्यान देंगे तो 100 सैनिक विद्यालय खोलने की ऐतिहासिक घोषणा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाली पीढ़ी को अनुशासित, मानसिक रूप से संतुलित व देश के लिए समर्पित संस्कारों से ओतप्रोत करने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। आज इसका महत्व समझ में नहीं आए लेकिन भविष्य में जब इसके योगदान का मूल्यांकन होगा तो निश्चित रूप से 2021-22 के बजट को याद किया जाएगा। इसी तरह राष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद की योजना है। अन्य भाषाओं की पुस्तकों का हिंदी में, हिंदी की पुस्तकों का अन्य भाषाओं में, अन्य भाषाओं की पुस्तकों का भी दूसरी अन्य भाषाओं में होने से संपूर्ण देश में पढ़ने लिखने वाले लोगएक दूसरे की सभ्यता संस्कृति से परिचित होंगे। इससे सांस्कृतिक विविधता वाले देश में एकता का पुनर्जागरण होगा । यह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की एक आधार भूमि बन सकती है। इसी तरह उच्च शिक्षा के लिए आयोग, केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना, हजारों विद्यालयों का उन्नतिकरण, आदिवासियों के लिए और एकलव्य विद्यालयों की स्थापना एवं उन्नतिकरण, आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति का नए सिरे से रचना, अनुसंधान एवं अन्वेषण के लिए मोटी राशि और व्यवस्थाएं आदि भविष्य में महाशक्ति की भूमिका निभाने के लिए भारतीय प्रतिभा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। 

इस तरह कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि कोरोना संकट के काल में आघात पहुंची अर्थव्यवस्था को, निराश-उदास-हताश भारतीय मानस को तथा भारत को लेकर दुनिया की धारणा को फिर से उम्मीद, विश्वास और सकारात्मक लक्ष्यों की पटरी पर दौड़ाने की दृष्टि से यह बजट याद किया जाएगा। 

सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

अखिल भारतीय जेटीवीएस संघ ने मुंबई में लोकल ट्रेन शुरू करने पर रेल मंत्री पीयूष गोयल का धन्यवाद किया

 मो. रियाज़

नई दिल्ली। अखिल भारतीय जेटीवीएस संघ के संयोजक जमील अहमद ने मुंबई में लोकल ट्रेन शुरू करने पर रेल मंत्री पीयूष गोयल का धन्यवाद किया। जमील अहमद ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि महानगर मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली मुंबई लोकल ट्रेन सेवा को 1 फरवरी से जनता के लिए शुरू किया गया है जिससे मुंबई के निवासियों को बहुत लाभ पहुंचेगा। मुंबई लोकल में हर रोज लगभग 80 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं। मुंबई लोकल ट्रेन सेवा शुरू होने से मुंबई की जनता काफी खुश है।
उन्होंने आगे कहा जनता व हमारी अखिल भारतीय जेटीवीएस संघ राज्य के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे जी व माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी का व अखिल भारतीय जेटीबीएस संघ के मुंबई अध्यक्ष श्री नंद कुमार देशमुख का भी धन्यवाद करती है जिन्होंने समय-समय पर अपनी आवाज माननीय रेल मंत्री को पहुंचाई। उन्होंने मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली मुंबई लोकल ट्रेन सेवा को पुन: शुरू करके लोगों को काफी राहत दी है।
उन्होंने आगे कहा कि माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी से अखिल भारतीय जेटीवीएस संघ आशा करती है कि मुबंई की तरह दिल्ली, कोलकाता और पूरे देश में जल्द से जल्द लोकल और सुपरफास्ट ट्रेनें शुरू की जाएंगी। मुंबई लोकल ट्रेन सेवा बहाल करने के लिए एक बार फिर माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी का हम धन्यवाद करते हैं।

रविवार, 31 जनवरी 2021

नई पीढ़ी-नई सोच संस्था ने 170 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई

 

संवाददाता

नई दिल्ली । नई पीढ़ी-नई सोच संस्था की ओर से 170 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई गई। संस्था की ओर से हर बार की तरह इस बार भी पल्स पोलियो टीकाकरण कैम्प लगाया गया जिसमें 170 बच्चों ने पोलियो की दवा पी। 
यह कैम्प संस्था के कोषाध्यक्ष डॉ. आर. अंसारी की जनता क्लीनिक बुलंद मस्जिद, शास्त्री पार्क में लगाया गया। कैम्प में बच्चों को पोलियो की ड्राप्स सुबह 9 बजे से ही पिलाई जाने लगी थी और शाम 4 बजे तक 170 बच्चों को पोलियो की ड्राप्स पिलाई गई।
संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों ने घर-घर जाकर लोगों को पोलियो ड्राप्स पिलाने के लिए प्राोरित किया और पोलियो की ड्राप्स न पिलाने के नुकसान बताए।
संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष साबिर हुसैन ने कहा कि संस्था हमेशा हर तरह के राष्ट्रीय प्रोग्राम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती है और बीच-बीच में जनता को भी इन प्रोग्रामों के प्रति जागरूक करती है। संस्था के सदस्यों ने आज पूरी दिन लोगों के घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो केंद्र पर 0-5 वर्ष के बच्चों को पोलियो की ड्राप्स पिलाने के लिए कहा।
संस्था के उपाध्यक्ष मो. रियाज ने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही मुहिम को हम जनता तक पहुंचा रहे हैं। आज पोलियो जड़ से खात्मे की ओर जा चुका है दूसरी बीमारियों पर भी सरकार जल्द कामयाबी हासिल कर लेगी और कुछ बीमारियों पर कामयाबी हासिल कर चुकी है।
संस्था के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. आर. अंसारी ने कहा कि हमारी पूरी कोशिश रहती है कि हम लोगों की मदद करते रहें क्योंकि दूसरों की मदद करने में जो सुकून मिलता है वह और किसी दूसरे काम में नहीं मिलता। 
समाजसेवी अब्दुल खालिक ने कहा कि लोगों को अपने बच्चों को हमेशा सरकार के कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए चाहे वह कोई भी हो और यह तो बच्चों के जीवन से जुड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि लोग आज भी बच्चों को पोलियो की दवा नहीं पिलाते हैं जो कि गलत है।
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष साबिर हुसैन, संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौ. रियाज, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. आर. अंसारी, सदरे आलम, आजाद, मौ. सज्जाद, शान बाबू, इरफान आलम, यामीन, मो. मुन्ना अंसारी, अब्दुल रज्जाक, मो. सलीम आदि मौजूद थे।










डेसू मजदूर संघ का डिवीजन पहाड़ गंज ने किया स्वागत, कई को दी गई जिम्मेदारी

मो. रियाज़

नई दिल्ली। डेसू मजदूर संघ ने गत दिनों बीएसईएस यमुना पावर में आऊटसोर्स के कर्मचारियों को पद देकर उन्हें पदाधिकारी घोषित किया है। यह सभी पदाधिकारी आउटसोर्सिंग स्टाफ की परेशानी को दूर करने में मदद करेंगे। उसी कड़ी में डिवीजन जीटीआर कंप्लेंट सेंटर न्यू जाफराबाद में एक स्वागत समारोह का आयोजन किया गया जिसमें डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव व आऊटसोर्स के ईस्ट दिल्ली के ज्वाइंट सेक्रेट्री अब्दुल रज्जाक का डिवीजन जीटीआर कंप्लेंट सेंटर न्यू जाफराबाद की पूरी टीम के साथ ऋषि पाल, दिनेश, सैन्तुल त्यागी, अशोक कुमार आदि ने जोरदार स्वागत किया गया।

डेसू मजदूर संघ की इकाई डिवीजन पहाड़ गंज में भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस भव्य स्वागत समारोह के मुख्य अतिथि थे डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव। इस अवसर पर डिवीजन पहाड़ गंज की ओर से डेसू मजदूर संघ की मुख्य टीम का फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया गया।

भव्य स्वागत समारोह में अध्यक्ष किशन यादव ने डिवीजन पहाड़ गंज एएमसी में कुछ लोगों को नई जिम्मेदारी दी। इसमें शास्त्री यादव को बीजी रोड शिकायत केंद्र का जोनल अध्यक्ष, पप्पू झा को राम नगर शिकायत केंद्र का जोनल अध्यक्ष, बिस्मबर झा को पी पी क्वाटर शिकायत केंद्र का जोनल अध्यक्ष, दुबेश शर्मा को आराम बाग का जोनल अध्यक्ष बनाया गया। इन चारों को डिवीजन पहाड़ गंज में काम करने वाले कर्मचारियों की समस्या का निवारण करने की जिम्मेदारी दी गई है।

वैसे आपको बता दें डेसू मजदूर संघ बीएसईएस यमुना पावर व राजधानी में काम करने वाले मजदूरों के हक के लिए काम करती है चाहे वह कर्मचारी आउटसोर्स पर ही काम क्यों नहीं करता हो।

इस अवसर पर डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी को एक दूसरे की मदद के लिए हमेशा खड़े रहना चाहिए ताकि किसी भी साथी को ऐसा न लगे कि वह अकेला है। हम सभी एक दूसरे की परेशानी में साथ हैं और जिन लोगों को आज जिम्मेदारी दी गई है वह भी अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।

स्वागत समारोह में डेसू मजदूर संघ आउटसोर्स के अध्यक्ष अशोक, आउटसोर्स के उपाध्याय प्रमोद वर्मा, आउटसोर्स के महामंत्री ऋषि पाल, आउटसोर्स के सर्कल चेयरमैन दिनेश कुमार, आउटसोर्स के संगठन मंत्री सैन्तुल त्यागी, आउटसोर्स के जाॅइंट सेक्रेटरी नोर्थ ईस्ट अब्दुल रज्जाक खान, सहयोगी मेंबर्स संजय शर्मा, उमेश कुमार इत्यादि भी मौजूद थे।

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