बुधवार, 10 जून 2020

आजमगढ़ में दलित प्रवासी मजदूर की नींबू के पेड़ पर लटकती लाश पर रिहाई मंच ने उठाए सवाल

  • लाॅक डाउन में रवीना ने दिल्ली में बच्चा खोया और आजमगढ़ में पति
  •  रातभर बेटे को खोजा नहीं मिला सुबह मिली उसकी लाश
  •  आजमगढ़ में दलित प्रवासी मजदूर की नींबू के पेड़ पर लटकती लाश पर रिहाई मंच ने उठाए सवाल
  •  परिवार ने कहा आत्महत्या नहीं हत्या दर्ज हो मुकदमा

लखनऊ/आजमगढ़ 10 जून 2020। रिहाई मंच ने आजमगढ़ के धड़नी ताजनपुर गांव में दलित प्रवासी मजदूर की आत्महत्या की सूचना के बाद मृतक के परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव, बांकेलाल, विनोद यादव, अवधेश यादव और धरमेन्द्र शामिल थे। मंच ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय, मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय, इलाहाबाद, राज्यपाल उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग, राज्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, गृह मंत्रालय, उत्तर प्रदेश, राज्य मानवाधिकार आयोग, उत्तर प्रदेश, आयुक्त आजमगढ़ मंडल आजमगढ़, उप पुलिस महानिरीक्षिक आजमगढ़ परिक्षेत्र आजमगढ़, जिलाधिकारी आजमगढ़, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, नई दिल्ली, श्रम एवं सेवायोजन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की।

 रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि दिल्ली से आजमगढ़ लौटे दलित प्रवासी मजदूर अंगद राम की मौत के कारणों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। यह मानवाधिकार का गंभीर मसला है क्योंकि कोरोना महामारी के दौर में प्रवासी मजदूर बहुत मुश्किल से अपने घरों को पहुंचे हैं और वहां पर अगर उनकी हत्या कर आत्महत्या कहा जा रहा है तो ऐसे में यह आने वाले दिनों में यह गंभीर संकट खड़ा कर देगा। इस मामले में अब तक न परिजनों से किसी प्रकार का पुलिस ने बयान लिया और न ही उनके आरोपों के आधार पर शिकायत दर्ज की। ऐसे में गावों के दबंगों का मनोबल बढ़ेगा जिससे प्रवासी मजदूर के परिवारों को डर-भय के साए में जीना होगा। क्योंकि प्रवासी मजदूर का गांवों में वो सामाजिक आधार नहीं जो इस प्रकार के दबंगों का है।

अंगद राम की पेड़़ पर टंगे फोटो को लेकर बहुत से सवाल हैं जो परिस्थितजन्य साक्ष्य हैं जिनको अनदेखा नहीं किया जा सकता। क्योंकि व्यक्ति झूठ बोल सकता है परन्तु परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं। इस मामले के ऐसे साक्ष्यों के बारे में परिवार बताता है कि पहली नजर में ही लग जाता है कि उन्हें मारकर पेड़ पर टांग दिया गया। क्योंकि फोटो में साफ देखा जा सकता है कि अंगद के पैरों में जो चप्पल थी वो सामान्य स्थिति में पैरों में ही मौजूद थी। जो नहीं हो सकता। क्योंकि कोई व्यक्ति अगर फांसी लगाएगा तो तड़पेगा और छटपटाएगा ऐसे में चप्पल उसके पैर में नहीं टिक सकती। पेड़ पर चढ़ने के गीली मिट्टी के जो निशान हैं वो पैरों के बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह कैसे हो सकता है क्योंकि उसके पैरों में चप्पल मौजूद थी। क्या ऐसा हुआ होगा कि वो चप्पल निकालकर पेड़ पर चढ़ा होगा और फिर फांसी लगाते वक्त चप्पल पहना होगा। वहीं जिस नीबू के पेड़ पर उसको टंगा हुआ बताया जा रहा उसमें उसका पैर वहां मौजूद पुलिस के कमर के करीब दिख रहा है जो जमीन से लगभग तीन फुट के करीब है। नीचे ऐसे कोई निशान नहीं हैं जिससे यह कहा जाए कि वह किसी सहारे पर खड़ा होकर फांसी लगाया होगा। नीबू का वह पेड़ झंखाड़ युक्त है जिसकी डालें पतली-पतली और काफी सघन हैं। ऐसे में उस पर चढ़ना और फिर उसपर से फांसी लगाना संभव प्रतीत नहीं होता। वहीं उसकी शारीरिक स्थिति भी परिजनों की आशंका को और पुष्ट करती है। परिजनों का फंदे में लटकी उसके गर्दन की स्थिति और हाथों की स्थिति पर भी सवाल है।
प्रतिनिधिमंडल के बांकेलाल, विनोद यादव, अवधेश यादव और धरमेन्द्र शामिल को मृतक पच्चीस वर्षीय अंगद राम की पत्नी रवीना ने बताया कि उनके पति नई दिल्ली में जीटीबी अस्पताल की कैंटीन में नौकरी करते थे। पहले वे ताहिरपुर गांव दिल्ली में रहते थे पर कमरे का किराया काफी ज्यादा था तो वे गाजियाबाद के डिस्टेंस कालोनी भोपरा में रहने लगे और अंगद वहां से नौकरी पर जाने लगे। लाॅक डाउन में काम बंद हो गया था। रवीना गर्भवती थी 10 अप्रैल  को बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ। वहां न खाने के कोई व्यवस्था थी न चिकित्सा की। अल्ट्रासाउंड में ग्यारह-ग्यारह सौ रुपए लग जाते थे। पैसे खत्म होने के बाद रवीना अपनी मां के यहां से पैसे मंगाए और दिल्ली से आजमगढ़ ट्रेन द्वारा पति के साथ आईं।
रवीना पति की आत्महत्या की पूरी कहानी को न सिर्फ नकारती हैं बल्कि कहती हैं कि उनकी हत्या हुई है। कोई आदमी आत्महत्या करेगा क्या उसके पैर में चप्पल रहेगा वह सवाल करती हैं। वे बताती हैं कि उनके पति राजेसुल्तानपुर अपने मौसी के घर गए हुए थे और 5 जून की शाम 6 बजे के करीब घर से लौटकर आए। लेकिन उन्होंने चाय तक नहीं पी और कहा कि प्रधान जी बुला रहे हैं मैं मिलकर आता हूं। 

रात आठ बजे के करीब उनकी माता विमलौता पता करने प्रधान के घर गईं तो प्रधान घर पर नहीं थे। अंधेरा होने के बाद भी जब वह नहीं लौटकर आए तो घर वाले चिंतित होकर ढूंढने निकले। अगले दिन 6 जून की सुबह घर के लोग खेते में काम कर रहे थे कि सुबह के तकरीबन नौ बजे गांव के एक लड़के ने सूचना दी कि अंगद की लाश नीबू के पेड़ पर लटक रही है। जिसके बाद पूरा परिवार दौड़ते हुए वहां पहुंचा तो पहले से मौजूद प्रधान ने उन्हें घटना स्थल तक जाने नहीं दिया।
उनकी मां विमलौता बताती हैं पुलिस से उन्होंने कहा कि आप लोग हमसे क्यों नहीं मिलने दे रहे हैं। उनका बड़ा बेटा राजेश आजमगढ़ शहर में काम करता है उसको तो आ जाने दीजिए। पर पुलिस आनन-फानन में लाश को लेकर आजमगढ़ चली गई।
मीडिया में आई खबर कि एक माह पूर्व विषाक्त पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या के प्रयास को उनकी पत्नी रवीना ने झूठा करार देते हुए बताया कि वो लोग 19 मई को गाजियाबाद से श्रमिक  ट्रेन द्वारा चले और 20 मई को आजमगढ़ के सरायमीर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। उसके बाद बस द्वारा सठियांव कोरेनटाइन सेंटर में रात गुजारी और अगले दिन घर आए और 13 दिन तक घर के सामने की मड़ई में रहे। अचानक हुई बारिश के बाद उन्हें घर के अंदर दाखिल होना पड़ा। साथ ही साथ वह कहती हैं कि जो मीडिया में आ रहा है कि एक महीने पहले वह जहर खाए थे यह कैसे हो सकता है क्योंकि उस वक्त तो हम थे ही नहीं। हम दिल्ली में थे। उनके और उनके पति में किसी भी तरह की नाराजगी नहीं थी और न ही घर में कोई कलह।
अंगद की मां बताती हैं कि उनके बेटे-बहू दिल्ली से आए तो वे खुश थे। हों भी क्यों न इस महामारी में हर आदमी अपने परिवार में रहना चाहता है। मीडिया में आई बातों को परिजनों ने प्रधान की मनगढ़ंत कहानी बताया। उनकी मां बताती हैं उनके पड़ोसी से जमीन विवाद के चलते कई बार उन्होंने मेरे बेटों को जान से मारने की धमकी दी थी। वो बताती हैं कि उनके ज्येष्ठ तुरंती हमारे यहां रहते थे और उनकी देखभाल वो लोग किया करते थे। अचानक उनकी मृत्यु हो गई। जिसके बाद उनकी बेटी धरमनी की देवारान रेनू जमीन को लेकर विवाद करती थीं। वो प्रधान के रवैए पर भी सवाल उठाती हैं और कहती हैं कि मेरे बेटे की जहर खाने की झूठी बात प्रधान ने फैलाई। सुबह लाश की खबर मिलने के बाद जब वे गए तो प्रधान घटना स्थल पर मौजूद थे।
आखिर प्रधान ने उनको यह सूचना क्यों नहीं दी जबकि मैं रात में उनके घर गई थी। उनका बेटा प्रधान के बुलावे पर गया था और उसके बाद गायब हो गया और जब मिला तो उसकी लाश मिली। साथ ही वो कहती हैं कि प्रधान कह रहे हैं कि उनके बेटे ने सुबह के आठ बजे फांसी लगाई यह उन्हें कैसे मालूम है। क्या वो घटना स्थल पर मौजूद थे। अगर उन्हें मालूम था तो बचाया क्यों नहीं। हमको उसकी मौत की खबर नौ बजे के करीब मिली जबकि घटना स्थल से उनके घर की दूरी पांच मिनट की भी नहीं है।

सोमवार, 8 जून 2020

इंडस्ट्रीज एंड ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन दिल्ली प्रदेश (रजि.) ने कोरोना योद्धाओं को सम्मानित किया

संवाददाता
नई दिल्ली। कोरोना वायरस के वैश्विक संकट-काल में समाज और देश को बचाने के लिए समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मियों, बिजली विभाग के कर्मचारियों, समाजसेवियों आदि की सेवा-निष्ठा के लिए इंडस्ट्रीज एंड ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन दिल्ली प्रदेश (रजि.) ने कोरोना योद्धा सम्मान देने की शुरुआत की।
यह संस्था अब तक कोरोना महामारी के दौरान अलग-अलग क्षेत्र में अपनी सेवा दे रहे 200 कोरोना योद्धाओं को सम्मान पत्र देकर सम्मानित कर चुकी। आज भी अपने कार्यालय पर संस्था के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राम निवास गुप्ता, उपाध्यक्ष आर.बी. यादव, कोषाध्यक्ष अमित जैन ने 50 कोरोना योद्धाओं को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। इस सम्मान को पाने वाले दिल्ली पुलिस के जवान, दिल्ली सिविल डिफेंस के वालिंटियर, दिल्ली होम गार्ड के वॉलिंटियर, क्षेत्रीय डॉक्टर, मीडिया कर्मी, बिजली विभाग के कर्मचारी, समाजसेवी संस्थाओं के सदस्य व पदाधिकारी, सोशल वर्कर आदि थे।
विदित हो दिल्ली, कोरोना के खिलाफ अपनी सबसे मुश्किल जंग कोरोना योद्धाओं के मजबूत इरादे की वजह से ही लड़ रही है। दिल्ली के हीरो अपने परिवार की चिंता ना करते हुए दिन-रात बस दिल्ली को सुरक्षित बनाने में जुटे हुए हैं। लेकिन कोरोना वायरस महामारी के संकटकाल में कोरोना योद्धाओं को भी कोरोना के संक्रमण का शिकार होना पड़ा है फिर भी कोरोना इनके हौसलों को पस्त नहीं कर पाया है। अपने योद्धाओं का जोश, जुनून और लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी के समर्पण का तहे दिले से शुक्रिया और सम्मान देने के लिए ही इंडस्ट्रीज एंड ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन दिल्ली प्रदेश (रजि.) ने कोरोना योद्धा सम्मान देने की शुरुआत की।
इस मौके पर संस्था के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राम निवास गुप्ता ने कहा कि हमने सिर्फ एक शुरुआत की है ताकि कोरोना योद्धाओं को एक छोटा सा सम्मान दे सकें जिससे यह योद्धा इस कोरोना महामारी की लड़ाई में अपने आप को अकेला न महसूस करें। यह सम्मान उन्हें नई ऊर्जा देगा।
संस्था के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष आर.बी. यादव ने कहा कि हमारी संस्था आगे भी ऐसे कोरोना योद्धाओं को सम्मानित करती रहेगी जिन्होंने इस वैश्विक संकट-काल में समाज और देश को बचाने के लिए अपने जीवन की भी परवाह नहीं की और लोगों की सेवा की।
संस्था के कोषाध्यक्ष अमित जैन ने कहा कि हमें जैसे-जैसे कोरोना वायरस महामारी के संकटकाल में सेवा करने वाले कोरोना योद्धाओं का पता चल रहा है। वैसे-वैसे हम उन्हें संस्था की ओर से सम्मान पत्र देकर सम्मानित कर रहे हैं जिससे उनके हौंसलों में कोई कमी न आ सके।

बुधवार, 3 जून 2020

डेसू मजदूर संघ ने कर्मचारियों को दिलाया बकाया

संवाददाता

नई दिल्ली। डेसू मजदूर संघ के अथक प्रयासों से एमआर/बीडी, रिकवरी व फील्ड कर्मचारियों को पिछले दो महीने से मोबाइल व कनवेन्स का 1800 बकाया मिल गया।
ज्ञात हो बीवाईपीएल व बीएसईएस बिजली कम्पनी में हजारों आउटसोर्स बिजली कर्मचारी हैं जो किसी न किसी रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। इसके लिए कर्मचारियों को मेहनताना के साथ कुछ कर्मचारियों को कन्वेंश भी मिलता है।
24 मार्च से लॉकडाउन लगा हुआ था पर बीवाईपीएल व बीएसईएस बिजली कम्पनी में हजारों आउटसोर्स बिजली कर्मचारी बहादुर योद्धा की तरह लगे रहे। पर अप्रैल महीने का सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियों ने बीवाईपीएल के बहादुर योद्धा मीटर रीडर और बिल डिस्ट्रिब्यूटर कर्मचारियों को कनवेंस का पैसा नहीं दिया।
जब डेसू मजदूर संघ यूनियन के महामंत्री सुभाष चन्द और अध्यक्ष किशन यादव एवं आउटसोर्स के महामंत्री रिषि पाल सिंह को इस घटनाक्रम की जानकारी मिली तो डेसू मजदूर संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के सहयोग से मैसर्स बीएसईएस यमुना पावर लि. के उच्चस्तरीय प्रबंधकों से बातचीत करके सभी आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों का अप्रैल, 2020 महीने का 1800 रुपए कन्वेंस का पैसा सैलरी की साथ 02/06/2020 को आ गया है।
 इसके लिए सभी आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों ने डेसू मजदूर संघ महामंत्री सुभाष चन्द और अध्यक्ष किशन यादव, शक्ति सिंह, दिनेश कुमार, अशोक कुमार, सैंतुल त्यागी, अब्दुल रज्जाक, मोहम्मद नासिर  मियां, सुुुभाष पाल(बीवाईपीएल), विजय कुमार (एस.ओ.), विनोद  कुमार आदि का धन्यवाद दिया।

रविवार, 31 मई 2020

रिषिपाल को डेसू मजदूर संघ का आउटसोर्स का महामंत्री बनाया

संवाददाता
नई दिल्ली। डेसू मजदूर संघ की एक बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता डेसू मजदूर संघ अध्यक्ष किशन यादव ने की व इस बैठक में कोई कर्मचारी शामिल हुए। इस बैठक में मजदूरों से संबंधित कई समस्याओं को रखा गया जिसे जल्द से जल्द निपटने की बात कही गई।
इस बैठक में कई लोगों को नई जिम्मेदारी भी सौंपी गई। डेसू मजदूर संघ अध्यक्ष किशन यादव ने रिषिपाल को आउटसोर्सिंग का महामंत्री बनाया जिस पर संघ के महामंत्री सुभाष चंद, अब्दुल रज्जाक, अशोक, शक्ति, दिनेश, सभाजीत, सैन्तुल त्यागी आउटसोर्सिग कर्मचारियों आदि ने अपना समर्थन दिया।
डेसू मजदूर संघ अध्यक्ष किशन यादव ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि रिषिपाल जी का इन लोगों ने समर्थन किया है तो रिषिपाल जी सभी कर्मचारियों को एक समान देखेंगे और उनकी समस्या को जल्द से जल्द निपटाने में उनकी मदद करेंगे।
रिषिपाल ने महामंत्री बनने पर आभार प्रकट करते हुए कहा कि मैं डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव जी, महामंत्री सुभाष चंद जी और जिन लोगों ने मुझ पर भरोसा जताया और मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है। मैं उनके भरोसे को टूटने नहीं दूंगा। मैं सभी
कर्मचारी भाइयों के दुख-सुख में हर समय उनके साथ खड़ा मिलूँगा और सभी भाइयों क़ा मुझे आपका बहुत प्यार मिला और में सभी भाइयों को तहेदिल से धन्यवाद करता हूं।


66 दिन तक चले निःशुल्क भोजन वितरण का समापन

संवाददाता

नई दिल्ली। 24 मार्च, 2020 से चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन में कई समाजसेवी संस्थाओं ने देशभर में अपने स्तर पर देश की जनता को अलग-अलग सुविधा दी। किसी ने लोगों को मुफ्त राशन दिया तो किसी ने खाना तो किसी ने पानी। इस तरह पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में भी युवा एकता समाज सेवा संस्था और युवा दर्पण एनजीओ के साथ ज़िंदगी लाइफ एनजीओ ने 27 मार्च से 31 मई, 2020 तक शास्त्री पार्क के समुदाय भवन में रोजाना 800 से अधिक लोगों को सुबह और शाम दोनों समय लोगों बिना भेदभाव किये भोजन दिया।
कंटेनमेंट  ज़ोन (अनलॉक-1) के बाहर सभी गतिविधियों के गृह मंत्रालय द्वारा चरणबद्ध तरीके से खोलने के मद्देनजर युवा एकता समाज सेवा संस्था और युवा दर्पण एनजीओ के साथ ज़िंदगी लाइफ एनजीओ द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान जरूरतमंद लोगों को ईडीएमसी कम्यूनिटी हॉल, शास्त्री पार्क, दिल्ली में 27 मार्च से 31 मई, 2020 (66 दिन) तक चले निःशुल्क भोजन वितरण का समापन किया।
इस मौके पर युवा दर्पण एनजीओ के अध्यक्ष कमल अरोड़ा ने सभी सहयोगियों को धन्यवाद दिया और कहा कि हमने लोगों की मदद नहीं की बल्कि ऊपर वाले ने हमें एक जरिया बनाया है। मैं अपने सभी सहयोगियों के एक बार फिर धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मेरा इस नेक काम में सहयोग दिया।
वहीं युवा एकता समाज सेवा संस्था  के उपाध्यक्ष नियाज़ मंसूरी ने भी इस नेक काम के लिए सभी सहयोगियों को धन्यवाद किया और कहा कि हम आगे भी समाज में ऐसे ही लोगों की मदद करते रहेंगे।





 
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