शनिवार, 7 मार्च 2020

जेएनयू देशद्रोह मामले में राजनीति

 

अवधेश कुमार

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा देशद्रोह के चार साल पुराने मामले में मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली पुलिस को मंजूरी दिए जाने के साथ जो विवाद पैदा हुआ है उसे बिल्कुल स्वाभाविक माना जाना चाहिए। जेएनयू में देशद्रोही नारे के साथ हुई कानूनी कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों ने जैसा हंगामा किया था, जेएनयू में इन नारा लगाने वाले छात्रों के समर्थन में जैसी सभाएं हुईं उसे याद करिए तो वर्तमान विवाद कुछ नहीं है। जब गैर भाजपा दलों के ज्यादातर नेताओं ने नारा लगाने वालों के पक्ष में एकजुटता दिखाई, सरकार को फासीवादी से लेकर आपातकाल लगाने और न जाने क्या क्या कहा तो वे इन पर मुकदमा चलाने की अनुमति का समर्थन कैसे कर सकते हैं? पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम की प्रतिक्रिया सबसे पहले आई। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली सरकार की समझ भी राजद्रोह कानून को लेकर केंद्र सरकार से कम नहीं है। कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड सहिंता (आईपीसी) की धारा 124ए और 120बी के तहत राजद्रोह का केस चलाने की मंजूरी देने का कड़ा विरोध करता हूं। दूसरी पार्टियां कह रहीं हैं कि भाजपा और आप एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब तक केजरीवाल सरकार फाइल पर पंजा डाले चुपचाप बैठी थी तब तक वो सही थी लेकिन जैसे ही उसने अनुमति दी वह खलनायक हो गई। क्या मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने वाली फाइल पर कोई निर्णय होना ही नहीं चाहिए था?

चिदंबरम लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष थे जिसमें देशद्रोह कानून खत्म करने का वायदा किया गया था। अगर आप एक वर्ष में न्यायिक कार्रवाई को देखें तो न्यायालय ने बार-बार पूछा कि अनुमति क्यों नहीं मिल रही है? न्यायालय ने कई बार टिप्पणियां की कि सरकार स्थायी रुप से फाइल को दबाकर नहीं रख सकती। जिन लोगों को न्यायालय पर विश्वास है उनको तो मांग करनी चाहिए थी कि दिल्ली सरकार मुकदमा चलाने वाली फाइल को क्लियर करे। आखिर न्यायालय बिना तथ्यों के किसी को सजा तो दे नहीं सकता। नियमों के मुताबिक जांच एजेंसियों को राजद्रोह के मामलों में आरोपपत्र दाखिल करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होती है। दिल्ली सरकार के रवैये को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने 14 जनवरी 2019 को पटियाला हाउस की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अगली तारीख पर न्यायालय ने दस दिनों में मंजूरी लाने का समय दिया था। कायदे से 24 जनवरी को इसकी अनुमति मिल जानी चाहिए थी। 20 जनवरी 2019 को न्यायालय ने दिल्ली के विधि विभाग से बिना अनुमति लिए बगैर आरोप पत्र दाखिल करने दिल्ली पुलिस से सवाल भी किए थे। पुलिस ने अदालत से कहा था कि वह 10 दिनों में विधि विभाग व अन्य संबंधित विभागों से मंजूरी ले लेगा। 6 फरबरी 2019 को न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे अनिश्चितकाल तक फाइल को लेकर बैठ नहीं सकते। इसके बाद यह बताने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए कि किस तरह दिल्ली सरकार ने एक औपचारिकता पूरी करने के नाम पर न्यायिक प्रक्रिया को बाधित रखा। 

 14 जनवरी  2019 को दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ जो आरोपपत्र दाखिल किया था उस पर नजर डालना आवश्यक है। जेएनयू परिसर में 9 फरवरी 2016 को जिस तरह के नारे लगे उसे देश हजारों बार सुन चुका है। यह कार्यक्रम संसद हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु को फांसी दिए जाने की बरसी पर आयोजित किया गया था। 1200 पृष्ठों के आरोप पत्र में कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य, शेहला रशीद, अकीब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रेयेया रसूल, बशीर भट और बसरत के नाम शामिल हैं। 36 अन्य के नाम आरोपपत्र की कॉलम संख्या-12 में हैं जिनके खिलाफ सबूतों केा अपर्याप्त बताया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह), 323 (किसी को चोट पहुंचाने के लिए सजा), 465 (जालसाजी के लिए सजा), 471 (फर्जी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को वास्तविक के तौर पर इस्तेमाल करना), 143 (गैरकानूनी तरीके से एकत्र समूह का सदस्य होने के लिए सजा), 149 (गैरकानूनी तरीके से एकत्र समूह का सदस्य होना), 147 (दंगा फैलाने के लिए सजा) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इन धाराओं को लेकर यकीनन दो मत हो सकते हैं। किंतु पुलिस ने इसमें काफी प्रमाण और तथ्य पेश किए हैं। आरोपपत्र में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन के फुटेज,फोरेंसिक और फेसबुक डेटा के साथ दस्तावेजी प्रमाण हैं। वीडियो व फोन की लोकेशन भी सबूत के तौर है। 50 पृष्ठों में साक्ष्य व दस्तावेजों की सूची है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों की पहचान फेसबुक डेटा का विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए की गई। आरोपियों के फेसबुक प्रोफाइल में कई सबूत हाथ लगे। एक आरोपी ने नारेबाजी की वीडियो अपने फेसबुक पर डाल रखी थी। इन आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा छात्रों को लेकर आने के लिए कहा गया था। जो वीडियो मिले, उन सबकी फोरेंसिक जांच कराई गई और सही साबित होने के बाद आरोप पत्र में शामिल किया गया। 90 गवाहों के नाम है। भीड़ द्वारा भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह, इंशाअल्लाह.... नारेबाजी के विडियो पर फरेंसिक साक्ष्य भी पेश किए हैं। 

पुलिस के साक्ष्य एवं गवाह कहां तक ठहरते हैं इस बारे में कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है। आरोप पत्र में कहा गया है कि 9 फरवरी 2016 की गतिविधि के लिए अनुमति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई थी। प्रदर्शनकारियों को रोका गया और बताया गया कि कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं है। कन्हैया कुमार आगे आए और सुरक्षा अधिकारी के साथ बहस करने लगे और भीड़ में मौजूद लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि कन्हैया कुमार ने स्वयं नारे लगाए या नहीं या जिन लोगों ने नारे लगाए उनको इनका समर्थन था या नहीं इनको साबित करना आसान नहीं होगा। इस तरह मामले की न्यायिक परिणति के बारे में कुछ भी कहना कठिन है। फैसला जो भी हो, लेकिन जो नारे लगे उसे देश विरोधी मानने में किसी को संकोच नहीं हो सकता। नारों पर ध्यान दीजिए- ‘तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा’, ‘ तुम कितने मकबूल मारोगे हर घर से मकबूल निकलेगा’, ‘अफजल के अरमानों को हम मंजिल तक पहुंचाएंगे’, ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’, ‘ हम क्या चाहें आजादी, हक हमारा आजादी’, ‘कहकर लेंगे आजादी,कश्मीर मांगे आजादी’, ‘कश्मीर की आजादी तक, जंग रहेगी जंग रहेगी, भारत की बर्बादी तक, जंग रहेगी जंग रहेगी’.........। इन नारों से पूरे देश का खून खौल गया था। अफजल को 9 फरवरी, 2013 और मकबूल भट को 11 फरवरी, 1984 को फांसी दी गई थी। जेएनयू में ‘द कंट्री विदाउट ए पोस्ट ऑफिस’ के नाम से कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके पोस्टर पर छोटे अक्षरों में लिखा था- , ‘लोकतांत्रिक अधिकार- आत्मनिर्णय के समर्थन के लिए कश्मीरी लोगों के संघर्ष के साथ एकजुटता में।.....अफजल और मकबूल की ज्यूडिशियल किलिंग यानी न्यायिक हत्या के खिलाफ। पोस्टर की ये पंक्तियां भी देश विरोधी थीं। 

न्यायालय इन्हें देशद्रोह का मामला मानेगा या नहीं यह कानूनी पेचीदगियों का मामला हो सकता है, पर ये विचार भारत विरोधी हैं इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती। कोई भारत की बर्बादी का नारा लगाए, भारत को तोड़ने का नारा लगाए, जिन्हें हमारे उच्चतम न्यायालय ने फांसी की सजा दी और राष्ट्रपति ने उस पर अपनी मुहर लगाई हो उसे न्यायिक हत्या कहे, पाकिस्तान जिन्दाबाद बोले....... उसे भारत विरोधी नहीं तो और क्या कहा जा सकता है? अफजल और मकबूल के अरमानों को पूरा करने के संकल्प का अर्थ क्या है? क्या ये उसी तरह बनना चाहते हैं? यह तो देश का दुर्भाग्य है कि ऐसा मामला भी राजनीतिक विकृति का शिकार हो गया, अन्यथा इसके दोषियों को चिन्हित कर अब तक सजा मिल जानी चाहिए थी तथा पूरे देश का एक स्वर में इसका समर्थन मिलना चाहिए था। वैसे उमर खालिद ने 10 जुलाई 2016 को अपने फेसबुक पोस्ट पर हिजबुल आतंकवादी बुरहान मुजफ्फर वानी की तुलना अर्जेंटीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे ग्वेरा से कर डाली। उसने लिखा वानी आजाद जिया आजाद मरा...-  ‘चे ग्वेरा ने कहा था कि अगर मैं मारा भी जाऊं तो मुझे तब तक फर्क नहीं पड़ता, जब तक कोई और मेरी बंदूक उठाकर गोलियां चलाता रहेगा। शायद यही शब्द बुरहान वानी के भी रहे होंगे। - उमर ने लिखा, कश्मीर पर कब्जे का खात्मा हो। भारत, तुम उन लोगों को कैसे हराओगे जिन्होंने अपने डर को हरा दिया है। हमेशा ताकतवर रहो बुरहान। एक आतंकवादी का इस तरह महिमामंडित कर उसका समर्थन करना देश विरोधी गतिविधि ही तो मारना जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की औपचारिकता में इतनी देरी दिल दहलाने वाली है। 

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, दूर-01122483408, 09811027208  


बुधवार, 4 मार्च 2020

गंगोत्री विहार ब्राह्मण समाज ने दिया सद्भावना का संदेश

संवाददाता

दिल्ली। उत्तर पूर्वी दिल्ली की घोण्डा विधानसभा के गंगोत्री विहार में पिछले कई वर्षों से होली के उपलक्ष्य में होली मंगल मिलन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जो इस वर्ष 6, मार्च 2020 शुक्रवार को होना था। परन्तु उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में क्षेत्र के कई लोगों की जान एवं माल की हानि हुई है। जिससे ब्राह्मण समाज बहुत दुःखी है।

क्षेत्र की निगम पार्षदा श्री मती दुर्गेश तिवारी जी ने कार्यक्रम संयोजक श्री रामानन्द शर्मा,श्री राम निवास शुक्ला,शर्मेश उपाध्याय एवं उमाकांत समाधिया जी एवं उनके सभी सदस्यों के साथ बैठक की जिसमें क्षेत्र में हुई दर्दनाक घटनाओं की बजह से कार्यक्रम ना करने का निर्णय लिया गया।

रामानन्द शर्मा जी ने बताया कि ब्राह्मण समाज हमेशा ही समाज एवं देश में सौहार्द बनाने का पक्षधर रहा है। कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जिस तरह उत्तर पूर्वी दिल्ली में घटनाओं को अंजाम दिया गया वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। हम सभी लोग लगातार पीडित परिवारों से सम्पर्क करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे उन्हें इस दुःख की घड़ी में सांत्वना देने का हर सम्भव प्रयास हो सके।

ब्राह्मण समाज द्वारा होली मंगल मिलन के कार्यक्रम जो धनराशि खर्च  होनी थी उसमें से बची हुई राशि से अब पीड़ित परिवार वालों को कुछ आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया।

अतः इस बार "होली मंगल मिलन" का कार्यक्रम ना करने का फैसला लिया गया है। वहाँ उपस्थित सभी सदस्यों ने अपनी सहमति व्यक्त की।

मंगलवार, 3 मार्च 2020

(12.43) 03-03-2020 To 09-03-2020





इस अंक में क्या है?

-बागों में बहार है, एक्शन में सरकार है, कांग्रेस भी लाचार है, फंसा कन्हैया कुमार है
-क्या दिल्ली दिलवालों की नहीं दंगे वालों की है?
-भारत की छवि खराब करने की सुनियोजित साजिश थी दिल्ली में हिंसा
-जलती दिल्ली को मोदी के दबंग ने संभाल लिया
-आईबी अफसर अंकित के परिवार को दिल्ली सरकार देगी एक करोड़ की राशि
-दिल्ली पुलिस प्रमुख की लोगों से अपील, अफवाह ना फैलाएं, शांति भंग ना करें
-दान में मिले दिलों से एम्स ने दी 1000 मरीजों को नई जिंदगी
-दिल्ली हिंसा में कई लोगों के कागजात जलकर खाक, मुआवजा मिलने को लेकर असमंजस की स्थिति
-गंगोत्री विहार ब्राह्मण समाज ने दिया सद्भावना का संदेश
-तिहाड़ जेल में पवन जल्लाद ने पुतले के साथ की फांसी देने की प्रैक्टिस
-पीके का नीतीश पर तंज, पूछा- डेढ घंटे के भाषण में दिल्ली हिंसा का जिक्र क्यों नहीं किया?
-क्या सिद्धू आप में होंगे शामिल?
-भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर की नई पार्टी मायावती के लिए बन सकती है चुनौती
-केंद्र सरकार के मंत्रालय व विभाग अब प्रकाशित नहीं कर सकेंगे कैलेंडर और डायरी
-पुलिस अगर आपको कर रही हो गिरफ्तार तो ये हैं आपके कानूनी अधिकार
-ओसामा बिन लादेन के डॉक्टर ने की पाकिस्तान की जेल में भूख हड़ताल
-कौन है पेटे बुटीगेग, जो पहले गेय अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की दौड़ से हुए बाहर
-इंटरनेट की दिग्गज कंपनियों ने पाकिस्तान में सेवाएं नहीं देने की चेतावनी दी
-चीन की इकोनॉमी को कोरोना वायरस ने दिया झटका
-इथियोपिया में कनाडा के धर्मार्थ कार्यकर्ताओं के समूह को हिरासत में लिया
-मुझे हमेशा विश्वास था कि मैं मुक्त हो जाऊंगीः आसिया बीबी
-होलाष्टक लगते ही रूक जाते हैं सभी मांगलिक कार्य
-मूड ही नहीं, स्किन और बालों को भी खूबसूरत बनाती है कॉफी
-इन केप्स को अपने वार्डरोब में शामिल करके दिखें स्टाइलिश
-होममेड मलाई फेसपैक से पाएं मुलायम, दमकती त्वचा
-न्यूजीलैंड के पत्रकारों के सवालों पर भड़के विराट कोहली, कही ये बात
-कोरोना वायरस के कारण साइप्रस में होने वाले निशानेबाजी विश्व कप से हटा भारत
-पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह खुल्लर का पंजाब में दिल का दौरा पड़ने से निधन
-अक्षय कुमार ने ट्रांसजेंडर्स को मकान बनाने के लिए 1.5 करोड़ रु. दान दिया
-पाकिस्तानी मुसलमान हूं लेकिन खुद को भारत में सुरक्षित महसूस करता हूंः अदनान सामी
-लंबे समय बाद करिश्मा कपूर का कमबैक
-जानें कब रिलीज हो रही है मिर्जापुर 2 सहित ये वेब सीरीज
-होली से पहले आम्रपाली ने ठुमकों से हिलाया बिहार, ‘‘लगा के वैसलीन’’ गाना रिलीज


शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

ट्रंप की यात्रा से भारत अमेरिका संबंधों को नया आयाम

 

अवधेश कुमार

अगर दिल्ली की भयानक हिंसा नहीं होती तो कुछ समय तक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दो दिवसीय यात्रा इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में होती। यह अत्यंत ही महत्वपूर्ण दौरा था जिसे अमेरिका की तरह विदेशी मीडिया में पूरा कवरेज मिला। भारत से लौटकर अमेरिका की धरती पर कदम रखते ही ट्रंप ने ट्वीट किया कि उनकी यात्रा बेहद सफल रही। भारत एक महान देश है। वास्तव में यह केवल ट्रंप की दृष्टि से ही नहीं भारत की दृष्टि से भी शत-प्रतिशत सफल यात्रा रही। इसके आलोचक कह सकते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो हथियार बेचने आए थे तथा तीन अरब डॉलर से ज्यादा यानी करीब 21.5 हजार करोड़ रुपए का रक्षा सौदा करके तथा भविष्य के सौदों की नींच डालकर चले गए। इस तरह के एकपक्षीय आकलन पर टिप्पणी करने की आश्यकता नहीं। जो लोग भारत अमेरिका संबंधों पर नजर रख रहे हैं वे जानते हैं कि अमेरिका से सी-हॉक हेलिकॉप्टरों को खरीदने की चर्चा लंबे समय से जारी थी। इन सौदे में अमेरिका से 2.6 अरब डॉलर की 24 एमएच 60 रोमियो हेलिकॉप्टर तथा 80 करोड़ डॉलर का छह एएच 64 ई अपाचे हेलिकॉप्टर शामिल है। यदि ट्रपं भारत नहीं आते तब भी यह सौदा होना ही था। यह भी न भूलें कि अमेरिका भारत को मिसाइल डिफेंस शील्ड भी बेचने की कोशिश कर रहा है, ताकि वह रूस की एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली को भारत में आने से रोक सके। भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया है। भारत रुस से खरीदे जाने के निर्णय पर कायम है। 

वास्तव में ट्रंप की यात्रा में अमेरिका भारत रक्षा साझेदारी महत्वपूर्ण पहलू जरुर था, लेकिन इसका आयाम काफी विस्तृत था। आप साझा घोषणा पत्र तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी साझा पत्रकार वार्ता तथा उसके बाद मौर्या होटल में ट्रंप की अकेली पत्रकार वार्ता को याद करिए, आपको आभास हो जाएगा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते कितने विश्वसनीय और सहज धरातल पर आ गए हैं। उनकी उपस्थिति में दिल्ली हिंसा आरंभ हो चुकी थी। पत्रकार वार्ता में उनसे यह सवाल भी पूछा गया लेकिन उन्होंने बिना हिचक इसे भारत का आंतरिक मामला बता दिया। नागरिकता संशोधन कानून पर भी उनसे सवाल किए गए। उन्होंने उसका जवाब भी यही दिया और कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रधानमंत्री से हमारी बात हुई है। भारत में 20 करोड़ मुसलमान रहते हैं जिनको पूरी धार्मिक स्वतंत्रता है। मोदी स्वयं धार्मिक व्यक्ति हैं और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता है। ट्रंप ने कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी मजबूती से काम कर रहे हैं। अगर आप पीछे मुड़कर देखें तो भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता के लिए कड़ी मेहनत की है। उनके भारत आने के पूर्व जिस तरह की टिप्पणियां आ रहीं थीं उनसे यह निष्कर्ष निकाला जाने लगा था कि वे नागरिकता कानून से लेकर उसके विरोध में हो रहे धरने तथा धार्मिक स्वतंत्रता पर मोदी से खरी-खरी बात करेंगे। ऐसी अपेक्षा करने वाले भारत निंदकों को ट्रपं ने पूरा निराश किया। तभी तो डेमोक्रेट की ओर से राष्ट्रपति के उम्मीदवार बर्नी सेंडर्स सहित कई सीनेटरें ने ट्रंप की आलोचना की है। आखिर वहां भी भारत सरकार विरोधी लौबी काम कर रही है। 

सबसे निराशा तो पाकिस्तान को हुई होगी जो नजर लगाए हुए था कि जम्मू कश्मीर पर ट्रंप कुछ बोल दें। जैसा विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बताया ट्रंप-मोदी वार्ता के दौरान जम्मू कश्मीर को लेकर चर्चा इस क्षेत्र के सकारात्मक घटनाक्रमों पर केंद्रीत रही। हमने बताया कि वहां चीजें सही दिशा की ओर बढ़ रही हैं। हाल ही में, राजनयिकों के दो समूह जम्मू और कश्मीर की स्थिति देखने के लिए पहुंचे, इनमें भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर भी शामिल थे। ट्रम्प ने अपनी पत्रकार वार्ता में स्पष्ट किया कि मैंने कश्मीर मामले पर मध्यस्थता को लेकर कुछ नहीं कहा। कश्मीर निश्चित ही भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा मसला है। वे इस पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। ट्रपं ने सीमा पार आतंकवाद पर भारत की भावना को समझने की बात की। हालांकि उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ वैसा कड़ा वक्तव्य नहीं दिया जो आम भारतीय चाहते थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से भी उनके अच्छे संबंध हैं और वे सकारात्मक तरीके से आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए कोशिश कर रहे हैं। आतंकवाद पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे भारत के साथ हैं। बेशक, अमेरिका तालिबान समझौता में पाकिस्तान का साथ अमेरिका को मिल रहा है, इसलिए ट्रंप उसके खिलाफ ज्यादा कड़ा वक्तवय नहीं दे सकते थे। यह समझौता तथा अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी हमारे लिए चिंताजनक है और यह मुद्दा बातचीत में उठा। हमने अपनी चिंता से ट्रंप को अवगत कराया है और आने वाले समय में पता चलेगा कि उसका परिणाम क्या आया।  

जैसा विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बताया वार्ता के दौरान मूलतः पांच मुद्दों सुरक्षा, रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और दोनों देशों की जनता के स्तर पर संपर्क पर बातचीत हुई। इसमे वैश्विक परिप्रेक्ष्य और खास कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संपर्क का विषय भी सामने आया और पाकिस्तान की भी चर्चा हुई। भारत-अमेरिका ने नारकोटिक्स पर कार्य समूह बनाने का फैसला किया। एच1बी वीजा का मुद्दा उठाया गया। भारत की दृष्टि से ऐसा कोई मुद्दा नहीे था जो बातचीत में सामने नहीं आया। प्रधानमंत्री मोदी ने पत्रकार वार्ता में कहा भी कि हम दोनों देश कनेक्टिविटी इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर सहमत हैं। यह एक-दूसरे के ही नहीं, बल्कि दुनिया के हित में है। रक्षा, तकनीक, ग्लोबल कनेक्टिविटी, ट्रेड और पीपुल टू पीपुल टाईअप पर दोनों देशों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई। होमलैंड में हुए समझौते से इसे बल मिलेगा। हमने आतंकवाद के खिलाफ प्रयासों को और बढ़ाने का भी फैसला किया है। तेल और गैस के लिए भारत के लिए अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। फ्यूल हो या न्यूक्लियर एनर्जी, हमें नई ऊर्जा मिल रही है। भारत-अमेरिका के बीच हुए 6 समझौतों में भारत-अमेरिका के बीच नाभिकीय रिएक्टर से जुड़ा समझौता भी अहम है। इसके तहत अमेरिका भारत को 6 रिएक्टरों की आपूर्ति करेगा। अमेरिका की शिकायत रही है कि नाभिकीय सहयोग समझौता करके उसने भारत को बंदिशों से बाहर निकाला और इसका ज्यादा लाभ दूसरे देश उठा रहे हैं। इसके बाद उसकी शिकायत कम होगी।  

साझा बयान में अमेरिका की ओर से स्पष्ट कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वह भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करेगा। न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में भी भारत के बिना देरी प्रवेश के लिए अमेरिका सहयोग करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साझा बयान में यह कहना काफी महत्वपूर्ण है कि मैंने और राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने यह फैसला किया है कि साझेदारी को समग्र वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में तब्दील किया जाएगा। इस तरह भारत अमेरिका की रणनीति साझेदारी अब वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी में परिणत हो गई। यह यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धी है। भारत के साथ व्यापार का मामला वाकई पेचीदा हैअमेरिका के साथ व्यापार में भारत 25 अरब से ज्यादा डॉलर का लाभ है। ट्रंप उन सारे देशों के साथ नए सिरे से व्यापार समझौता करना चाहते है जिनसे उनको घाटा हो रहा है। भारत उन्हें समझाने की कोशिश कर रहा है कि हम जो रक्षा सामग्री आपसे खरीद रहे हैं, नाभिकीय रिएक्टर ले रहे हैं, तेल और गैस ले रहे हैं उन सबको मिलाकर तथा हमारी रणनीतिक साझेदारी का ध्यान रखते हुए द्विपक्षीय व्यापार को देखा जाए। उम्मीद करनी चाहिए कि रास्ता निकलेगा। वैसे भी भारत अमेरिका के संबंध काफी आगे निकल गए हैं। नाटो देश के समान दर्जा हमंें हासिल है, रक्षा व्यापार एवं तकनीकी सहयोग के साथ अब संवेदनशील तकनीकों के हस्तांतरण तथा भारत के निजी क्षेत्र के साथ रक्षा उत्पादन का रास्ता प्रशस्त करने तक मामला बढ़ चुका है। 

ट्रंप ने भारत को कितना महत्व दिया इसका पता इसी से चलता है कि वे अपनी पत्नी के अलावा अपनी बेटी और दामाद के साथ यहां आए जो उनके सलाहकार हैं। ऐसी यात्रा उन्होेंने इसके पहले कहीं की नहीं की। नमस्ते कार्यक्रम द्वारा नरेन्द्र मोदी ने भारत की संास्कृति विविधता का प्रदर्शन कराते हुए अहमदाबाद हवाई अड्डे से जो रोड शो कराया तथा मोटेरा स्टेडियम में सवा लाख लोगों के बीच उनका भाषण हुआ उसका मनोवैज्ञानिक असर व्यापक है। वैसे ही स्वागत आगरा यात्रा के दौरान भी हुआ। इस तरह की कूटनीति का प्रयोग पहले ज्यादा नहीं हुआ है। इसका असर ट्रंप एवं उनके प्रशासन पर हुआ है। ट्रंप ने कहा भी कि भारत की यह यात्रा एवं इस दौरान हुए स्वागत को वे कभी नहीं भूल पाएंगे। कम से कम इस स्वागत के बाद ट्रंप एवं उनका प्रशासन भारत के खिलाफ आक्रामक होने से बचेगा। ट्रम्प ने कहा कि भारतीयों की मेहमानवाजी याद रहेगी। किसी अमेरिका राष्ट्रपति को अपने जीवन में कहीं भी ऐसा स्वागत तथा इतने लोगों के बीच सीधे भाषण करने का मौका इसके पहले नहीं मिला था। तो ऐसे कार्यक्रम का असर तो होगा ही। इस तरह ट्रंप की यात्रा से भारत अमेरिका संबंधों में कई नए आयाम जुड़े हैं जिनको हम आने वाले समय में सम्पूर्ण रुप से फलीभूत होते हुए देखेंगे। 

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