आज राष्ट्रीय जन क्रांति मंच के तत्वाधान में एक मीटिंग का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सरदार बलविंदर सिंह अध्यक्ष राष्ट्रीय जन क्रांति मंच ने की। इस मीटिंग में बहुजन अधिकार आन्दोलन की प्रमुख माँग पर चर्चा हुई। भारत में सामान शिक्षा का अधिकार दिया जाये। देश में बदहाल शिक्षा निति पर चिंता जताते हुए संगठन के सभी पदाधिकारियों चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जिस प्रकार हमारे सरकारी स्कूलों में शिक्षा आज का शिक्षा का जो स्तर है उससे आज देश के मध्यम परिवार ही नहीं बल्कि देश का भविष्य भी खतरे में है क्योंकि इतिहास गवाह है की जिस देश की शिक्षा प्रणाली कमजोर होती है वह देश कभी भी तरक्की नहीं कर सकता और आज भारत में प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा देने की जगह बच्चों को मिडडेमील में ही बाँध दिया गया है सरकारी व गैरसरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में जमीन आसमान का अंतर है पूंजीपति तो अपने बच्चो को महंगी फीस देकर गैरसरकारी स्कूलों में में अच्छी शिक्षा दिलवा देते है लेकिन मध्यम वर्ग इतना सक्षम नहीं है की अपने बच्चो की महंगी फीस देकर उच्च स्तर की शिक्षा दिलवा सके और जब तक तक देश में सामान शिक्षा नही होगी तब तक देश का सही मायनो में भविष्य का निर्माण नहीं हो सकता इसिलिय देश में शिक्षा का राष्ट्रीयाकरण किया जाये। भारत सरकार यदि सही मायनो में गरीबों की सरकार है तो उन्हें सभी को सामान शिक्षा का अधिकार देना होगा। इस मीटिंग में मुख्य भूमिका प्रवीन राव, इन्दर सिंह, फिलिप क्रिस्टी, शीला बेंजमिन, उपेन्द्र भारती, जेम्स एडवर्ड, अंकुर, वीरेंदर कुमार, अभय कुमार, एस.पी सिंह, आशा जी ने निभा।
शनिवार, 15 अक्टूबर 2016
शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016
सीमा सील करने का विचार कितना व्यावहारिक
अवधेश कुमार
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा यह कहने के बाद कि वर्ष 2018 तक भारत-पाकिस्तान की सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा इस पर बहस छिड़ गई है। एक पक्ष का मानना है कि यह कहना जितना आसान है करना उतना ही कठिन। उनके अनुसार पाकिस्तान से लगे सीमा क्षेत्रों की भौगोलिक स्थितियां ऐसी हैं कि यह पूरी तरह सील हो ही नहीं सकतीं। दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जो मानते हैं कि ऐसा हो सकता है। ये इजरायल का उदाहरण देते हैं जिसने यह करके दिखा दिया है। राजनाथ सिंह ने यह बात राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित पाकिस्तान सीमा से लगने वाले राज्यों की ताजा सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा बैठक के बाद कही। ध्यान रखिए उन्होंने यह भी कहा कि सीमा को सील करने का कार्य तय वक्त में काम पूरा कर लिया जाएगा। उनके पूरे कथन का भाव यह था कि सीमा सील करने की बात केवल कल्पना नहीं है, उसकी योजना बन चुकी है और काम आरंभ हो चुका है। उनके अनुसार सीमा को सील करने के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा की निगरानी के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड स्थापित किया जाएगा, जिसमें पाकिस्तान की सीमा से लगे चारों राज्यों का सहयोग लिया जाएगा। ये राज्य इस ग्रिड को अपने इनपुट देंगे, जिसके हिसाब से जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
राजनाथ सिंह के कथन को केन्द्र सरकार की सीमा संबंधी एप्रोच के साथ मिलाकर देखा जाए तो वे एक समग्र सीमा प्रबंधन की बात कर रहे हैं, जो न केवल अभेद्य दीवारों से घिरा होगा बल्कि उसमें ऐसे तकनीक होंगे, मानव प्रंबंधन इतना कुशल होगा कि सामन्य उल्लंघन की क्रिया पर भी पूरी प्रणाली सक्रिय हो जाएगी। यानी हर हाल में सीमा पार से घुसपैठ रोक दिया जाएगा। भारत पाकिस्तान की सीमा नियंत्रण रेखा को मिलाकर कुल 3323 किलोमीटर है जिसमें चार राज्य पंजाब, राजस्थान, जम्मू कश्मीर और गुजरात आते हैं। सरकार की योजना में सीमा पर कंक्रीट, लेजर बीम, रडार और उपग्रह सेंसर की दीवार खड़ी करने की बात है। इसकी जिम्मेदारी बॉर्डर मैनेजमेंट डिविजन को दे दी गई है। चारों राज्यों की अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक सुरक्षा दीवार बनाए जाने पर काम चल रहा है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर पक्की दीवार तो गुजरात के रण और सर क्रीक में लेजर वॉल और लेजर बीम से सीमा सील होगी। कैमरे, रडार और उपग्रह से नियंत्रित होने वाले सेंसर लगाए जाएंगे। इससे छोटी से छोटी हरकत की जानकारी भी कुछ सेकंड में मिल जाएगी। सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में पक्की दीवार बनेगी। यह 10 फीट ऊंची होगी। सैटेलाइट सेंसर कोहरे में भी सीमा पर पैनी नजर रखेंगे। जम्मू-कश्मीर में सेंसर और लेजर से युक्त 6.9 किमी लंबी दीवार बनाने का प्रयोग सफल रहा है। सीमा सुरक्षा बल इस समय पंजाब में 45 स्थानों पर प्रायोगिक तौर पर लेजर वॉल से सुरक्षा कर रहा है।
आइए एक-एक राज्य की चुनौतियां, वर्तमान सीमा सुरक्षा व्यवस्था पर नजर दौड़ाएं। सबसे पहले जम्मू कश्मीर, क्योंकि आतंकवाद सहित ज्यादा सुरक्षा चुनौतियां यहीं हैं। नियंत्रण रेखा सहित जम्मू कश्मीर की सीमा लंबाई 1225 किमी है। इनमें 210 कि. मी. सीमा ऐसी है जिसमें पहाड़ों की 18,000 फीट तक ऊंची दुर्गम चोटियां हैं। यहां पारा शून्य से 50 डिग्री नीचे तक जाता है। यहां दोहरी तारबंदी, गश्ती के वाहन, सामान ढोने के लिए खच्चर आदि का प्रयोग किया जाता है। गुजरात से 508 कि. मी. सीमा लगती है। यहां दलदल और नमक के सफेद रण हैं। 262 किमी के दलदल में तारबंदी भी नहीं है। यहां जीरो लाइन पिलर भी नहीं दिखते। सफेद रण में तो दिशा तक का पता नहीं चलता। सर क्रीक में पानी के कारण बॉर्डर का पता ही नहीं चलता। जो उपाया सीमा सुरक्षा के किए गए हैं वो हैं, पानी, जमीन और दलदल में लड़ने में दक्ष क्रोकोडाइल कमांडो की तैनाती। इसके अलावा तैरती बोओपी, होवरक्राफ्ट, कोबरा वायर (करंट वाली तारबंदी) आदि का उपयोग भी होता है। राजस्थान में 1037 किमी है सीमा है। यहां 50 डिग्री सेल्सियस तक तापमान चला जाता है। रेत के 80-90 फीट ऊंचे शिफ्टिंग वाले टीले है। इसमें कोई भी भटक सकता है। तारबंदी रेत में दब जाती है और सीमा का पता नहीं चलता। अभी यहां पैदल, ऊंटों से गश्त, तारबंदी पर घंटियां बांधने जैसे प्रयोग हुए हैं। साथ ही फ्लड लाइट, सैंड स्कूटर, हाइटेक कम्पास, 90 फीट ऊंचे टावर लगे हैं। पंजाब में कुल सीमा 553 किमी है। यहां नदी-नालों की रचना ऐसी जटिल है कि सीमा प्रबंधन बड़ी चुनौती बन जाती है। उदाहरण के लिए रावी नदी 11 बार तथा सतुलज 9 बार सीमा के अंदर और बाहर होती है। घुसपैठ का खतरा यहीं से होता है। सर्दियों में इतना घना कोहरा होता है कि अपना हाथ तक न दिखाई दे। यहां आतंकी घुसपैठ के साथ हथियारों और ड्रग्स की तस्करी रोकना सबसे बड़ी चुनौती। यहां पैदल, घोड़ों, बाइक, जिप्सी व बोट से गश्त की जाती हैं, नावों पर नाके बने हैं.. कहीं-कहीं कैमरे, फ्लड लाइट आदि भी लगे हैं।
जाहिर है, इसे देखने के बाद सरकार की सीमा को अभेद बनाने की चुनौतियां का आभास हो जाता है। किंतु हमारे पास चारा क्या है। मरता क्या न करता। जब इजरायल ऐसा कर सकता है तो हम क्यों नहीं कर सकते। आतंकवादी घुसपैठ की समस्या से निपटने का सबसे कारगर रास्ता यही है कि सीमा ही अभेद हो जाए कि कोई प्रवेश न करे। इजरायल में 1994 में सीमा घेरने का काम शुरू हुआ था। इसने कर दिखाया और उसके बाद आतंकवादी हमलों में 90 प्रतिशत तक कमी आ गई। वैसे इजरायल की सीमा केवल 1068 किमी लंबी है। यानी हमारी पाकिस्तान से लगने वाली सीमा ही इससे तीन गुणा ज्यादा है। किंतु न भूलिए कि इजरायल की सीमा चार देशों मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और फलस्तीन से लगा हुआ है। मिस्र और सीरिया सीमा पर 16 फीट ऊंची फेंसिंग, लेबनान सीमा पर रेजर फेंसिंग, गाजा पट्टी पर कंक्रीट की दीवार और फेंसिंग है। दीवारों को जमीन से 8 फीट नीचे से बनाया गया है। राजनाथ सिंह के इजरायल दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य उनकी सीमा प्रबंधन को समझना था। उनके साथ गए अधिकारियों ने इसे समझा एवं इस पर काफी समय पहले से काम आरंभ हो चुका है।
कह सकते हैं कि भारत की सीमा केवल पाकिस्तान से ही नहीं लगती। यह चीन, म्यान्मार, बंगलादेश, भूटान और नेपाल से तथा समुद्री सीमा श्रीलंका और मालदीव से भी लगती है। हर क्षेत्र की अलग समस्याएं हैं, पर मुख्य समस्या पाकिस्तान ही है। वैसे चीन के साथ बाड़ नहीं लग सकता, क्योंकि पूरी सीमा चिन्हित नहीं है। सीमा सुरक्षा को सशक्त किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी तथा वायुसेना एवं थल सेना के डिविजन बढ़ाए गए हैं जिन पर चीन से चिंता भी प्रकट की जा रही है। सीमा को लेकर मोदी सरकार आरंभ से ही नए दृष्टिकोण से विचार करती रही है। गृह मंत्रालय ने देश की पूर्वी सीमा पर सुरक्षा को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए एक समिति का गठन किया। उसके बाद भारत और बांग्लादेश सीमा भी एक समिति का गठन किया गया। एक अन्य समिति पश्चिम सीमा के लिए बनाई गई थी। इन सारी समितियों की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है। केंद्र ने सभी सीमाओं के मूल्यांकन के लिए एक वर्ष का समय निर्धारित किया था। इस दौरान भारत नेपाल से लेकर देश की समुद्री सीमाओं तक सभी का मूल्यांकन किया गया। जून 2015 में ही भारत-बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा योजना के तहत फ्लोटिंग एल्यूमीनियम बाड़ लगाने का निर्णय हुआ। हल्के और कम वजन वाले इस बाड़ को लगाने का जिम्मा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को सौंपा गया है। इस परियोजना की शुरुआत नदी वाले भारत-बांग्लादेश की सीमा पर गोजाडांगा क्षेत्र से हुई है। इन बाड़ों को नदी वाले सीमा क्षेत्र में कंक्रीट और सीमेंट पर धातु के डंडों के सहारे लगाया जा रहा है। गृह मंत्री ने स्वयं कहा था कि लगभग 1751 किलोमीटर भारत नेपाल की सीमा और 699 किलोमीटर भारत-भूटान सीमा पर चौकसी रखना चुनौती भरा कार्य है। कारण, यहां खुली सीमा है और दोनों देशों के लोगों का आना जाना लगा रहता है। तो यहां जवानों की मुश्तैदी पर सबसे ज्यादा बल दिया गया है। भारत म्यान्मार सीमा को लेकर भी पूर्वोत्तर वाली समिति ने अपने सुझाव दिए थे जिस पर काम हो रहा है। भारत-म्यांमार सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में 240 गांवों में दो लाख से अधिक आबादी रहती है। यहां की समस्या उग्रवाद तथा हथियार और मादक पदार्थो की तस्करी की है। इसमें सीमा पर अधिक से अधिक पुलिस थाने खोलने की योजना है।
अवधेश कुमार, ई.ः30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, दूर.ः01122483408, 09811027208
गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016
धर्मपुरा वार्ड के शास्त्री पार्क में समुदाय भवन का उद्घाटन करते अरविंदर सिंह लवली, पूर्व विधायक गांधी नगर व साथ में धर्मपुरा वार्ड 233 की निगम पार्षद तुलसी गांधी

धर्मपुरा वार्ड 233 की निगम पार्षद तुलसी गाँधी के प्रयासों द्वारा गरीब लोगों का ध्यान रखते हुए शास्त्री पार्क बाल्मीकि मार्ग पर डी.डी.ए फ्लैट के सामने ई.डी.एम.सी ने एक नया मिनी समुदाय भवन बनाया है, जिसका उद्घाटन 14/10/2016 को पूर्व दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष एवं मंत्री दिल्ली सरकार श्री अरविंदर सिंह लवली जी के करकमलों द्धारा गया। मिनी समुदाय भवन के उद्घाटन पर क्षेत्र के लोगो ने निगम पार्षद श्रीमती तुलसी गाँधी और श्री अरविंदर सिंह लवली जी स्वागत किया और नए समुदाय भवन के लिए धन्यवाद किया। इस मिनी समुदाय भवन के बनने से क्षेत्र के उन लोगो में ख़ुशी का माहोल है जो छोटे कार्यक्रम जैसे शादी-विवाह, जन्मदिन, खतना और कुआँ पूजन करने के लिए भी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते थे। अब इस नए समुदाय भवन में लोगो को ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे क्योंकि इस मिनी समुदाय भवन की बुकिंग सिर्फ रु० 700/- में होगी।

रविवार, 9 अक्टूबर 2016
शुक्रवार, 23 सितंबर 2016
आतंकवाद का प्रायोजक आतंकवाद के खात्मे पर प्रवचन दे तो कैसा लगेगा, यही नवाज के भाषण के साथ हुआ
अवधेश कुमार
यह उम्मीद तो थी कि देश के अंदर अपनी आंतरिक परेशानियों से ग्रस्त नवाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र मंे कश्मीर मामले को उठाएंगे लेकिन अपने भाषण को ही वे भारत विरोध पर केन्द्रित कर देंगे इसकी संभावना किसी ने भी व्यक्त नहीं की थी। अपने 19 मिनट से थोड़ा ज्यादा के भाषण में उन्होंने दो तिहाई समय भारत को आरोपित करने में लगाया। संयुक्त राष्ट्र संघ के पुराने रिकॉर्ड खंगालने होंगे कि शीतयुद्ध काल में पाकिस्तान के किस नेता ने इतना ज्यादा समय भारत को आरोपित करने में लगाया। क्या-क्या नहीं कहा नवाज ने। अपने देश के आतंकवाद को विदेश द्वारा समर्थित, प्रयोजित और वित्तपोषित कहा। साफ है कि इशारा भारत की ओर था। उनकी नजर में भारत आतंकवाद का प्रायोजक, हथियारों का विस्तारक, दक्षिण एशिया में हथियार होड़ के लिए उत्तरदायी, कश्मीर में निर्दोष नागरिकों का हत्यारा, आजादी की वाजिब मांग को सेना की गोलियों से जवाब देने वाला, बातचीत से भागने के लिए अस्वीकार्य शर्तें लगाने वाला.....आदि आदि है। यानी उनके यहां जो समस्याएं हैं या दक्षिण एशिया में जो समस्याएं हैं उन सबके लिए कोई दोषी है तो वह भारत है। सवाल है कि नवाज शरीफ के इस भाषण को दुनिया के कितने देशों ने गंभीरता से लिया होगा?
हम आगे बढ़ें इसके पहले यह ध्यान दिलाना आवश्यक है कि नवाज से पांच भाषण पहले अफगानिस्तान के उप राष्ट्रपति सरवर दानिश का भाषण हुआ था। उन्होंने आतंकवाद के मामले पर पाकिस्तान को नंगा कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में रची गई साजिशों से उसकी सरजमीं पर आतंकवादी संगठन बेरहमी से निर्दोष नागरिकों पर हमले कर रहे हैं। हमने बार-बार पाकिस्तान से आतंकवादियों को मिलने वाले सुरक्षित पनाहगाह को ध्वस्त करने के लिए कहा लेकिन कोई अंतर नहीं आया। दानिश ने साफ कहा कि पाकिस्तान मंे तालिबान, हक्कानी नेटवर्क को प्रशिक्षण के साथ हथियार और धन तक मुहैया कराया जा रहा है। पाकिस्तान का आतंकवाद पर रवैया दोहरा है। जरा सोचिए, दुनिया के जो नेता या राजनयिक वहां बैठे थे या बाहर टेलीविजन पर सुन रहे थे वे किसकी बातों पर विश्वास करेंगे? पाकिस्तान पर या अफगानिस्तान पर? खैर, भारत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। भारत ने कहा है कि उसकी पाकिस्तान के साथ एक ही शर्त है कि आतंकवाद खत्म हो।
आतंकवाद पर नवाज के प्रवचन को कौन देश सुनेगा। अमेरिका में मैनहट्टन का जो धमाका हुआ उसका आरोपी अहमद खान रहामी ने क्वेटा में प्रशिक्षण लिया था। सैन बर्नाडिनो हमले में शामिल तशफीन मलिक पाकिस्तान मूल की निकली। पेरिस हमले का एक आरेापी लश्कर ए तैयबा का था। बेल्जियम हमले में शामिल छः पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी पकड़े गए। जहां आतंकवादी हमला उसका कोई न कोई सूत्र पाकिस्तान से जुड़ता है। उड़ी आतंकवादी हमले पर दुनिया भर से जो प्रतिक्रियाएं आईं हैं पता नहीं पाकिस्तान के रणनीतिकारों ने उनका भी ठीक से अध्ययन किया या नहीं। आप आतंकवाद के खिलाफ 21 सितंबर को भाषण दे रहे हैं और एक बार भी 17 सितंबर को हुए उड़ी हमले का जिक्र नहीं किया जिसमें 19 सैनिक शहीद हो चुके हैं। क्या इसका असर नहीं होगा? फिर जिस बुरहान वानी को दुनिया हिज्बुल मुजाहिद्दीन का आतंकवादी मान चुकी है उसे आप अपने भाषण में आजादी के जंग का नेता तथा शहीद बता रहे हैं। इसे कहते हैं अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना। सच कहें तो इसके द्वारा पाकिस्तान ने अंग्रेजी में जिस सेल्फ गोल कहते हैं वही किया।
जो सूचना है भाषण के ठीक पहले नवाज शरीफ ने अपने सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ से बातचीत की थी। कम से कम भारत के प्रधानमंत्री या किसी नेता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भाषण देने के पहले ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है। जाहिर है, नवाज जो कह रहे थे उसमें पाकिस्तानी सेना की सोच शामिल थी। ऐसा नहीं है कि इसे संयुक्त राष्ट्र के महासचिव सहित दूसरे राजनयिक या दुनिया के प्रमुख देशों ने नोट नहीं किया होगा। आतंकवाद पर पाकिस्तान का सच पूरी दुनिया को पता है। लेकिन जरा सोचिए, जो विश्व का सबसे बड़ा नाभिकीय प्रसारक है वह नाभिकीय निरस्त्रीकरण पर प्रवचन कर रहा था। नवाज ने भारत के साथ द्विपक्षीय नाभिकीय परीक्षण प्रतिबंध संधि का प्रस्ताव रखा। वे लगातार नाभिकीय अस्त्र बढ़ा रहे हैं। आज इजरायल एवं उ. कोरिया से ज्यादा नाभिकीय अस्त्र उनके पास है। क्या इसकी जानकारी संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के प्रमुख देशों को नहीं है? उ. कोरिया के बाद पाकिस्तान दूसरा देश है जो नाभिकीय अस्त्र की धमकी देता है। हाल ही में भारत की ओर इशारा करते हुए पाक के रक्षा मंत्री ने कहा कि हम टैक्टिकल नाभिकीय अस्त्र के प्रयोग से नहीं हिचकेंगे। नाभिकीय अस्त्र को लेकर एक दिन पहले ही अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने मुलाकात मंे नवाज को झाड़ लगाई थी। उन्होंने कहा था कि आप नाभिकीय अस्त्र विस्तार पर विराम लगाएं। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तो खैर उनसे मुलाकात ही रद्द कर दी।
अब आइए कश्मीर पर। पिछले दो सालों में कश्मीर में हस्तक्षेप का पाकिस्तान की आधा दर्जन औपचारिक अपील संयुक्त राष्ट्रसंघ ठुकरा चुका है। संयुक्त राष्ट्र ने अंततः 2010 मेें कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय विवादों की सूची से बाहर कर दिया। क्या वह इसे दोबारा वापस लाएगा? वे जिस आत्मनिर्णय संबंधी प्रस्ताव को लागू करने की अपील कर रहे थे उसमें पाकिस्तान स्वयं कठघरे में खड़ा होता है। उसमें पहले पाकिस्तान को ही अधिकृत क्षेत्र खाली करना था, उसे सेना हटानी थी जो आज तक उसने नहीं किया। जम्मू कश्मीर में हमारे 14 हजार से ज्यादा निर्दोष नागरिक आतंकवादियों के हमलों मेें मारे गए हैं यह तथ्य दुनिया के सामने रखा जा चुका है। वे कह रहे थे कि कश्मीरियों की हत्याओं की स्वतंत्र जांच कराएं। वे भूल गए कि फिर उसके तार पाकिस्तान तक भी पहुंचेंगे। हालांकि संयुक्त राष्ट्र इसमें किसी तरह हाथ डालने ही वाला नहीं है। बड़े देश पहले ही इसे द्विपक्षीय मुद्दा मान चुके हैं। इसलिए नवाज की इस कवायद का व्यर्थ जाना पहले से ही निश्चित था। ऐसा नहीं है कि नवाज इसे नहीं जानते। किंतु पाकिस्तान की जो अंदरुनी स्थिति है। पनामा लीक में े परिवार के सदस्यों के नाम आने के बाद उनके खिलाफ जो वातावरण है उसमें अपनी रक्षा के लिए उनके पास यही एक चारा था जिससे वे परंपरागत भारत विरोधी मानसिकता वालों के सामने हीरो बन सकते थे तथा सेना की नजर में सुर्खरु कहला सकते थे।
किंतु इसमें वे गलतियां करते चले गए। नवाज का भाषण ऐसा था मानो वहां जो बैठे हैं वो अशिक्षित हैं या अखबार नहीं पढ़ते, उनके बारे में जानते नहीं। उनकी बॉडी लैंग्वेज भी देखने लायक थी। चेहरे पर थकान का भाव, एकदम लयहीन भाषण, आवाज मंे दम नहीं.....। ऐसा तभी होता है जब आपको पता होता है कि जो कुछ आप बोल रहे हैं उसमें सच का अभाव है तथा जिसकी आप अपील कर रहे हैं उसे स्वीकारना तो छोड़िए, कोई सुनने वाला नहीं है।
अवधेश कुमार, ई.ः30,गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्पलेक्स, दिल्लीः110092, दूर.ः01122483408, 09811027208
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