शनिवार, 12 अप्रैल 2014

अनुचित अहितकर बहस

अवधेश कुमार

राजनीति में प्रतिस्पर्धियों की आलोचना, उनकी कमजोरियों पर हमला, उनके गलत आचरण को उजागर करना......आदि सामान्य स्थितियां हैं। अगर विपक्षियों की आलोचना निंदा न हो तो फिर राजनीति में दलीय भेद तो खत्म होगा ही, जनता को भी सही गलत का फैसला करने में कठिनाइयां आएंगी.....यानी कुल मिलाकर सही जनमत निर्माण नहीं हो सकेगा। लेकिन राजनीति की एक मर्यादा भी है। हम आलोचना या आचरण के किन पहलुओं को निशाना बनाएं। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के वैवाहिक जीवन को जिस तरह राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनाया गया है, विरोधियों ने उसकी जिस तरह निंदा की है ....और चुनावी मुददा बनाने की कोशिश की है ...उसे किसी दृष्टि से राजनीति की मर्यादा के अंदर नहीं माना जा सकता है। मोदी ने पहली बार अपने नामांकन पत्र में पत्नी का नाम लिखा है। यह प्रश्न उठाया गया है कि आखिर विधानसभा चुनावों में उनने इसका जिक्र क्यों नहीं किया? हालांकि हर चुनाव में मोदी के विवाह को लेकर प्रश्न उठाया जाता रहा है और मोदी ने कभी इसका जवाब नहीं दिया, पर पूरे देश को मीडिया के माध्यम से यह सच पता चल चुका था कि उनके माता पिता ने कम उम्र में शादी कर दी, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया और फिर संघ के प्रचारक बन गए। उसके बाद से उनका पत्नी से कोई संबंध नहीं रहा। 

इस आधार पर कहा जा सकता है कि भले मोदी ने औपचारिक तौर पर पहली बार इसे स्वीकार किया है लेकिन यह कोई रहस्योद्घाटन नहीं है। विपक्षियों का यह तर्क कि, जो एक पत्नी की जिम्मेवारी नहीं उठा सकता वह देश की जिम्मेवारी क्या उठाएगा अनर्गल प्रलाप के अलावा कुछ नहीं है। मोदी की क्षमता पर प्रश्न उठाना, उनकी नीतियों को कठघरे में खड़ा करना ......उनकी विचारधारा का विरोध करना एक बात है लेकिन वैवाहिक जीवन से दूर हो जाने को अक्षमता का आधार बनाना तो हमारी राजनीति के गिरते मानसिक स्तर को ही प्रमाणित करता है। उनके भाई ने यह बयान जारी कर दिया है कि हमारे माता-पिता अनपढ़ और गरीब थे, जिनने बचपन में ही मोदी का विवाह कर दिया। मोदी के अंदर देशभक्ति की भावना वे समझ नहीं सके....। जो जानकारी हमार पास है उसके अनुसार 6 वर्ष की उम्र में उनका लग्न हुआ और उनकी शादी तब हुई जब बड़े भाई की शादी हो रही थी। उनके पिता कहते थे कि यह संन्यासी बन जाएगा, इसलिए शादी करके सामाजिक बंधन में डालने की कोशिश की। मोदी की पत्नी कहतीं हैं कि उनने मुझे समझाया कि वे पारिवारिक जीवन में नहीं पड़ सकते, देश का काम करना है, तुम भी पढ़ो और कुछ करो। संघ की विचारधारा से असहमति हो सकती है, लेकिन वहां भी जो प्रचारक बनते हैं वे देशभक्ति की भावना से ही। उस भावना की उत्पेरणा में न जाने कितने लोनों ने अपने पारिवारिक जीवन का परित्याग कर दिया। दूसरे विचारधारा और संगठनों में भी ऐसे लोगों की कम संख्या नहीं है जो कि देश और समाज की सेवा की भावना पर अपने निजी पारिवारिक जीवन की बलि चढ़ा देते हैं। इनमें ऐसे लोग हैं जो कानूनी तलाक नहीं देते....लेकिन उनका संबंध शत-प्रतिशत विलगाव की ही होता है। इसके पीछे कई बार परिवार से विद्रोह की भावना होती है। यानी परिवार ने आपकी इच्छा के विरुद्ध शादी कर दी, जिसे उस समय आपने मजबूरी में मान लिया लेकिन कुछ समय बाद आप उनसे नकार देते हैं। 

मोदी या कोई और यदि उसके बाद बिना तलाक लिए दूसरी शादी करके पारिवारिक जीवन जिए या बिना शादी के किसी महिला के साथ अंतरंग संबंध बनाए तो उसकी जितनी निंदा हो सकती है की जानी चाहिए। हालांकि आजकल वैसे लोगों को भी समाज स्वीकार रहा है। मोदी के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता। वे प्रचारक रहे और फिर उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि यह सवाल एक दिन उनके सामने इतना बड़ा विवाद बनकर खड़ा हो जाएगा। वास्तव में विवाद से तथा विरोधियों द्वारा नामांकन को कानूनी प्रक्रिया में घसीटने से बचने के लिए ही मोदी ने ऐसा लिखा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी यह विवाद उच्चतम न्यायालय में गया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मामला चुनाव आयोग का है, इसलिए उसके पास ही ले जाया जाए। आयोग ने तब एक आदेश दिया कि उम्मीदवार कोई भी काॅलम खाली नहीं छोड़ सकता। इसके बाद ऐसा करना मोदी की मजबूरी हो गई। 

हालांकि जो लोग इसे मुद्दा बना रहे हैं उनमें से कोई यशोदा बेन से मिलकर उनकी भावना जानने की भी कोशिश नहीं की। बिना उनकी भावना जाने उनके अधिकारों के प्रति इनकी प्रदर्शित संवेदना राजनीति के अलावा और कुछ नहीं। अभी तक कुछ पत्रकारों ने यशोदा बेन से मुलाकात की जो पहले शिक्षिका थीं और अब सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उनने कभी मोदी से नाराजगी की बात नहीं कही, कभी यह नहीं कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ, बल्कि हमेशा उनके लिए शुभकामनाएं दीं। हां, यह अवश्य स्वीकार किया कि उनका पिछले करीब 50 वर्षों से कोई संपर्क नहीं है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में ऐसे असंख्या वाकये हैं। आज तो इसे शहरी भारतीय समाज में सहज मान लिया गया है कि अगर पति पत्नी के संबंध सामान्य नहीं रह सकते तो फिर अलग हो जाना चाहिए। तलाक की संख्या भारत में लगातार बढ़ रहीं है। जब मोदी की शादी हुई उस समय तलाक के बारे में आम समाज को पता भी नहीं था। बहुत सारे लोग पत्नियों को छोड़कर दूसरी शादी भी कर लेते थे और मामला न्यायालय तक नहीं जाता था। महिला पूरा जीवन कष्ट में गुजारती थी। ऐसे अन्याय के प्रति समाज भी केवल सहानुभूति प्रकट करता था या मध्यस्थता करके रास्ता निकालने की कोशिश करता था। आज भी ऐसी स्थिति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। 

हम सब जानते हैं कि मोदी का मामला इन सबसे अलग है। इसे वैसे ही कहना चाहिए कि जबसे भाजपा का उभार हुआ हर चुनाव के पूर्व अटलबिहारी वाजपेयी पर यह आरोप लगता था कि उनने अंग्रेजों की मुखबिरी की और स्वतंत्रता सेनानियों को पकड़वाया तथा चुनाव संपन्न होते ही आरोप खत्म हो जाता था। उसका असर कभी वाजपेयी समर्थकों या मतदाताओं पर पड़ा हो, इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। इस पृष्ठभूमि में विचार करें तो यह मानना कठिन है कि विरोधियों को इसका चुनाव लाभ मिलेगा या मोदी या भाजपा की चुनावी संभावना इससे प्रभावित होगी। जाहिर है, जो लोग इसे उठा रहे हैं वे अपना समय नष्ट कर रहे हैं। यह राजनीति में चरित्र हनन भी माना जाएगा। आश्चर्य की बात देखिए कि इसमें ऐसे लोग भी हैं जो यह तर्क देते हैं कि किसी की निजी जिन्दगी में तांक झांक नहीं करनी चाहिए। स्वयं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, जो इस मामले पर मुखर रहे हैं, वे भी न जाने कितनी बार कह चुके हैं कि निजी जीवन को हम मुद्दा नहीं बनाते। इस मामले में उनका और ऐसे लोगों का सिद्धांत कहां गया?

वस्तुतः हमारी राजनीति के लिए और सम्पूर्ण सार्वजनिक जीवन के लिए यही उचित होगा कि ऐसे मामले को कतई तूल न दिया जाए। लोगों के निजी जीवन में ऐसे अनेक प्रसंग होते हैं, जिनके पीछे कई प्रकार की विवशताएं, भावनाएं होतीं हैं उनको मुद्दा बनाने से असली मुद्दे नेपथ्य में चले जाते हैं और माहौल अशोभनीय अश्लील बनने लगता है। जिनने दुष्टता से पत्नी का त्याग किया, उसे उत्पीड़ित किया उनके खिलाफ अवश्य आवाज उठे। इसके लिए महिलाओं की सुरक्षा में कानूनांे के भी सख्त हथियार खड़े कर दिए गए हैं। वैसे महिलाओं द्वारा भी पुरुषों के साथ अन्याय व उत्पीड़न के सच्चे मामले काफी हैं किंतु यह अलग से विचार का विषय है। कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य यह कि राजनीति मंे ऐसे लोगों के आने का रास्ता खुला रहना चाहिए जिन्होंने सेवा की भावना से परिवार का परित्याग किया हो। इनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। मोदी के वैवाहिक जीवन को लेकर उठाया गया विवाद इन सभी दृष्टियों से अनुचित और अहितकर है। 

अवधेश कुमार, ई.ः30, गणेश नगर, पांडव नगर काॅम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, दूर.ः01122483408, 09811027208 


शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

कम मतदान के लिए चुनाव आयोग भी जिम्मेदार: साबिर हुसैन

  • कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई गांधी नगर की मतदाता सूची ठीक
  • चुनाव आयोग द्वारा बांटने के लिए दी गई पर्ची नहीं मिलने से लोगों में काफी रोष देखने को मिला
  • यदि समय से पहले पड़ताल कर ली जाती तो लोग ज्यादा से ज्यादा मतदान कर सकते थे
  • सही पोलिंग बूथ की जानकारी के लिए एस.एम.एस. बना हाथियार

संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली में हर एक मतदाता अपना वोट डालने के लिए पूरे जोश में दिख रहा था। इसमें वह मतदाता सबसे ज्यादा जोश में दिखे जिन्होंने अपने मत का पहली बार प्रयोग किया। मतदाता जोश में क्यों न हो क्योंकि यह जोश तो चुनाव आयोग द्वारा हर जिले में जागरुकता कैम्प लगाकर जो लोग को जागरुक किया गया। इनका पूर्ण साथ दिया दिल्ली की कईं सारी संस्थाओं ने।

हर मतदान केन्द्र पर सुबह से ही भीड़ दिखनी शुरू हो गईं थी उसी के साथ देर शाम तक वोटिंग होती रही परंतु गांधी नगर विधानसभा के मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए सुबह से शाम तक इधर से उधर चक्कर लगते रहे क्योंकि बुलन्द मस्जिद कालोनी में सभी मतदान केन्द्र की मतदाता सूची सही नहीं के कारण काफी परेशानी हुई। चुनाव आयोग द्वारा जो पर्ची बीएलओ को बांटने के लिए दी गई थी वह उन्होंने कालोनी के नेताओं को दे दी जो कि वहां बांटी ही नहीं गईं जिससे लोगों में काफी रोष भी देखने को मिला।

नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने कहा कि इसकी शिकायत चुनाव आयोग सहित सभी संबंधित अधिकारियों से कई बार की गईं थी कि गांधी नगर विधानसभा की मतदाता सूची ठीक कर दी जाए नहीं तो मतदान वाले दिन मतदान कम होने की आशंका है और वही हुआ। लोग वोट तो डालना चाहते थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनको वोट किस पोलिंग बूथ में डालना है। कुछ लोगों का कहना था कि हमारे घर के वुछ वोट किसी पोलिंग बूथ में थे कुछ किसी में। यदि समय रहते इसकी सही से पड़ताल कर ली जाती तो लोग ज्यादा से ज्यादा मतदान कर सकते थे।

संस्था के उपाध्यक्ष मो. रियाज ने बताया कि हमारा पोलिंग बूथ नं. 17 (बुलंद मस्जिद) है परंतु हमारे कुछ वोट पोलिंग बूथ नं. 85 (गांधी नगर) में कर दिए गए। दोनों पोलिंग बूथ की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। ऐसे ही कुछ और वोट थे जो अन्य पोलिंग बूथ में थे, वहां पर लोग वोट डालने नहीं जा पाए क्योंकि पोलिंग बूथ दूर था और उसकी उन्हें जानकारी नहीं थी।

इसके अलावा कुछ लोगों को अपना मतदाता पहचान पत्र भी नहीं मिला जिस कारण भी वोट कम हुए और इसके लिए कहीं न कहीं चुनाव आयोग व मतदाता पहचान पत्र केंद्र भी जिम्मेदार हैं। यदि सभी अपनी जिम्मेदारी के साथ काम करते तो मतदान और अधिक होता।

संस्था के कोषाध्यक्ष डाॅ. आर अंसारी ने बताया कि हम लोगों ने पूरे दिन लोगों को उनके सही पोलिंग बूथ की जानकारी एसएमएस से दिलवाते रहे जिससे काफी परेशानी को हमने कम किया। लोगों का कहना था कि चुनाव आयोग बड़े-बड़े दावे तो करता है परंतु जो जरूरी काम है वह नहीं करता।

साबिर हुसैन ने कहा कि हमारी संस्था के सभी पदाधिकारी व सदस्य सुबह से ही लोगों के घरों पर जा-जाकर वोट डालने के लिए कहते रहे। उन्हें उनके सही पोलिंग बूथ की जानकारी देते रहे जिससे पोलिंग ज्यादा से ज्यादा हो परंतु यह कोशिश पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकी। यदि मतदाता सूची सही होती तो पोलिंग 85-90 प्रतिशत तक जा सकती थी जो 60-65 के बीच में फंसकर रहे गई और यह चुनाव आयोग की कमी के कारण हुआ है।

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

मोदी जी की जीत में भारत तिब्बत सहयोग मंच का हर सदस्य प्रयासरत : रामानन्द शर्मा

संवाददाता

नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की ओर से दिनांक 08-04-14 को यमुना विहार विभाग दिल्ली प्रांत के कार्यकर्ताओं ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के भाजपा के प्रत्याशी श्री मनोज तिवारी का भव्य स्वागत किया। तिवारी जी के रोड शो के दौरान विभाग अध्यक्ष श्री रामानन्द शर्मा ने भजनपुरा में फूलमाला द्वारा मनोज तिवारी जी का अभिवादन किया तथा उन्हें जीत का आश्वाशन दिलाया। शर्मा जी ने क्षेत्र के लोगों से श्री मनोज तिवारी जी को जिताने का निवेदन किया। कार्यक्रम में उपस्थित अनिल गुप्ता एवं राजकु‌मार गजवानी और क्षेत्र के कई कार्यकर्ताओं द्वारा श्री नरेन्द्र मोदी जी को भारत की प्रधानमन्त्री बनाने का भरसक प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता घर घर जाकर वोटरों से वोट डालने की अपील भी करेंगे।


कम मतदान के लिए चुनाव आयोग भी जिम्मेदार

-कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई गांधी नगर की मतदाता सूची ठीक

-चुनाव आयोग द्वारा बांटने के लिए दी गई पर्ची नहीं मिलने से लोगों में काफी रोष देखने को मिला

-यदि समय से पहले पड़ताल कर ली जाती तो लोग ज्यादा से ज्यादा मतदान कर सकते थे

-सही पोलिंग बूथ की जानकारी के लिए एस.एम.एस. बना हाथियार

 

मो. रियाज

नई दिल्ली। दिल्ली में हर एक मतदाता अपना वोट डालने के लिए पूरे जोश में दिख रहा था। इसमें वह मतदाता सबसे ज्यादा जोश में दिखे जिन्होंने अपने मत का पहली बार प्रयोग किया। मतदाता जोश में क्यों न हो क्योंकि यह जोश तो चुनाव आयोग द्वारा हर जिले में जागरुकता कैम्प लगाकर जो लोग को जागरुक किया गया। इनका पूर्ण साथ दिया दिल्ली की कईं सारी संस्थाओं ने।

हर मतदान केन्द्र पर सुबह से ही भीड़ दिखनी शुरू हो गईं थी उसी के साथ देर शाम तक वोटिंग होती रही परंतु गांधी नगर विधानसभा के मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए सुबह से शाम तक इधर से उधर चक्कर लगते रहे क्योंकि बुलन्द मस्जिद कालोनी में सभी मतदान केन्द्र की मतदाता सूची सही नहीं के कारण काफी परेशानी हुई। चुनाव आयोग द्वारा जो पर्ची बीएलओ को बांटने के लिए दी गई थी वह उन्होंने कालोनी के नेताओं को दे दी जो कि वहां बांटी ही नहीं गईं जिससे लोगों में काफी रोष भी देखने को मिला।

नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने कहा कि इसकी शिकायत चुनाव आयोग सहित सभी संबंधित अधिकारियों से कई बार की गईं थी कि गांधी नगर विधानसभा की मतदाता सूची ठीक कर दी जाए नहीं तो मतदान वाले दिन मतदान कम होने की आशंका है और वही हुआ। लोग वोट तो डालना चाहते थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनको वोट किस पोलिंग बूथ में डालना है। कुछ लोगों का कहना था कि हमारे घर के वुछ वोट किसी पोलिंग बूथ में थे कुछ किसी में। यदि समय रहते इसकी सही से पड़ताल कर ली जाती तो लोग ज्यादा से ज्यादा मतदान कर सकते थे।

संस्था के उपाध्यक्ष मो. रियाज ने बताया कि हमारा पोलिंग बूथ नं. 17 (बुलंद मस्जिद) है परंतु हमारे कुछ वोट पोलिंग बूथ नं. 85 (गांधी नगर) में कर दिए गए। दोनों पोलिंग बूथ की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। ऐसे ही कुछ और वोट थे जो अन्य पोलिंग बूथ में थे, वहां पर लोग वोट डालने नहीं जा पाए क्योंकि पोलिंग बूथ दूर था और उसकी उन्हें जानकारी नहीं थी।

इसके अलावा कुछ लोगों को अपना मतदाता पहचान पत्र भी नहीं मिला जिस कारण भी वोट कम हुए और इसके लिए कहीं न कहीं चुनाव आयोग व मतदाता पहचान पत्र केंद्र भी जिम्मेदार हैं। यदि सभी अपनी जिम्मेदारी के साथ काम करते तो मतदान और अधिक होता।

संस्था के कोषाध्यक्ष डाॅ. आर अंसारी ने बताया कि हम लोगों ने पूरे दिन लोगों को उनके सही पोलिंग बूथ की जानकारी एसएमएस से दिलवाते रहे जिससे काफी परेशानी को हमने कम किया। लोगों का कहना था कि चुनाव आयोग बड़े-बड़े दावे तो करता है परंतु जो जरूरी काम है वह नहीं करता।

साबिर हुसैन ने कहा कि हमारी संस्था के सभी पदाधिकारी व सदस्य सुबह से ही लोगों के घरों पर जा-जाकर वोट डालने के लिए कहते रहे। उन्हें उनके सही पोलिंग बूथ की जानकारी देते रहे जिससे पोलिंग ज्यादा से ज्यादा हो परंतु यह कोशिश पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकी। यदि मतदाता सूची सही होती तो पोलिंग 85-90 प्रतिशत तक जा सकती थी जो 60-65 के बीच में फंसकर रहे गई और यह चुनाव आयोग की कमी के कारण हुआ है।

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

जनसभा कर मतदाताओं को मतदान के लिए जागरुक किया

 मो. रियाज

नई दिल्ली। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख करीब आ रही है। हर कोई मतदाताओं को अपनी ओर खिंचने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं परंतु कोई भी मतदाताओं को उनके अधिकारों से अवगत नहीं करवा रहा है। पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर विधानसभा में स्थित बुलंद मस्जिद, शास्त्री पार्क में नई पीढ़ी-नई सोच (पंजी) संस्था ने मतदाताओं को जनसभा कर उन्हें उनके अधिकारों से अवगत कराया। इस के मौके पर संस्था ने मतदाताओं को जागरुक करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस जनसभा में लोगों मतदान करने व सही उम्मीदवार चुनने के लिए प्रेरित किया गया जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इस जनसभा में आम आदमी पार्टी के गांधी नगर के पूर्व प्रत्याशी श्री अनिल कुमार वाजपेयी व आम आदमी पार्टी के कृष्णा नगर के पूर्व प्रत्याशी श्री इसरत अंसारी मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार समाज के श्री अब्दुल खालिक ने की। उन्होंने अपने विचार रखे कि आज के समय में सभी को मतदान का पूरा अधिकार है व सही उम्मीदवार चुनने की भी जिम्मेदारी हमारी है और किसी की नहीं। यदि हम गलत उम्मीदवार को चुनकर संसद में भेजते हैं तो उसके लिए हम ही जिम्मेदार है।
संस्था के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी संस्था का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को जागरुक कर मतदान प्रतिशत बढ़ाना है जिससे कि मतदान के दिन मतदाता घर पर छुट्टी का आनंद लेने के बजाय अपने अधिकारों का प्रयोग कर सही उम्मीदवार चुन सके नहीं तो 5 वर्ष तक हमें अपनी भूल का एहसास होता रहेगा कि हमने मतदान क्यों नहीं किया, क्योंकि सही उम्मीदवार चुनने में भाग नहीं लिया तो गलत लोग संसद में पहुंच जाएंगे और यही मतदान प्रतिशत कम होने का कारण भी है जबकि दिल्ली में यह 100 प्रतिशत मतदान होना चाहिए।
श्री अनिल कुमार वाजपेयी ने कहा मैं यहां आम आदमी पार्टी के लिए वोट मांगने नहीं आया हूं बल्कि सही व ईमानदार को चुने। यह हम सभी की जिम्मेदारी है।
श्री इसरत अंसारी ने कहा की सही मतदान से हम सही उम्मीदवार को चुन सकते हैं नहीं तो हम 5 साल तक अपनी भूल का एहसास करते रहते है कि सही समय पर अगर हमने जांच आदि की होती तो यह दिन देखने को नहीं मिलता। यह बात सभी पर लागू होती है। यदि हम वोट डालने नहीं जाते हैं तो गलत व्यक्ति चुनकर आ जाता है। जब गलत व्यक्ति चुनकर आ जाता है तो हम कहते हैं कि यह व्यक्ति गलत है। हमें उसे गलत कहना का अधिकार नहीं क्योंकि अगर हमने अपने मत का प्रयोग सही से किया होता तो सही व्यक्ति चुनकर आ सकता था।

संस्था के कोषाध्यक्ष श्री डॉ. अंसारी ने कहा कि युवा आगे आकर सही मतदान की जानकारी हासिल करें व इससे होने वाले नुकसान से अपने आपको बचाएं व दूसरों को भी बचाने की कोशिश करें। उन्होंने आगे कहा कि हमें सही व ईमानदार को अपना मत देकर संसद भेजना चाहिए ताकि वह हमारी बातों को संसद में रख सके।
संस्था के उपाध्यक्ष श्री मो. रियाज ने कहा कि एक दिन की मुसीबत से बचने के लिए 5 साल की मुसीबत मत पालो, अपनी बात मनवानी है तो वोट जरूर डालो। 
प्रोग्राम के अंत में सभी से मतदान करने की शपथ दिलवाई कि मैं, 10 अपै्रल 2014 दिन सभी काम को छोड़कर  मतदान करने जरुर जाउंगा व अपने साथ औरों को भी मतदान केंद्र लेकर जाउंगा तथा सभी को कार्यक्रम में भाग लेने व समय देने के लिए धन्यवाद दिया तथा कार्यक्रम में सहयोग देने वाले श्री अब्दुल खालिक, श्री जुबैर उर्फ कल्लू, सालिम, नईम, लियाकत, मो. इलियास, मौलाना हुसैन साहब, हाजी जाबिर हुसैन, मो. शुएब, मो. उमर व संस्था के पदाधिकारी-सदस्यों व अन्य जनों का रहा है।






 

 

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