रविवार, 21 सितंबर 2025

‘स्वार्थ प्रथम’ के सिद्धान्त पर दस्तक देता राष्ट्रद्रोह का दावानल

भविष्य की  आहट

डा. रवीन्द्र अरजरिया

देश के आन्तरिक हालातों को बिगाडने की कोशिशें तेज होती जा रहीं हैं। ‘डीप स्टेट’ से जुडे लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। प्रमाणों की फेरिश्त विदेशी रिपोर्ट्स में उजागर हो रहीं हैं। आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और अध्यात्मिक पक्षों को प्रभावित करने हेतु सात समुन्दर पार से धनराशि की खेपें निरंतर पहुंचाई जा रही हैं। चरणबद्ध षडयंत्र के तहत पहले देश के निवासियों में से ऐसे मीरजाफरों को खोजा जाता है जो पैसा, प्रतिष्ठा और पारिवारिक गरिमा को शीर्ष तक ले जाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार होते हैं, फिर उनके सहयोग से समाज सेवा, सामाजिक प्रशिक्षण, सामाजिक सरोकार, सामाजिक प्रबंधन, आधुनिक शिक्षा आदि के नाम पर एनजीओ का गठन करवाया जाता है। इन एनजीओ में समाज सेवा के नाम पर भारी भरकम फंड पहुंचाकर मीरजाफरों को अपने खास सिपाहसालारों की फौज तैयार करने का हुक्म दिया जाता है ताकि असामाजिक तत्वों की भीड को एनजीओ कार्यकर्ताओं के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। 
इन मीरजाफरों में राजनैतिक दलों, उद्योगपतियों, कथित बुद्धिजीवियों, असामाजिक तत्वों, अतिमहात्वाकांक्षी व्यक्तियों, अपरिपक्व किशोरों, नासमझ छात्रों, बेरोजगार युवाओं, स्वतंत्र विचारों वाली युवतियों आदि को विलासतापूर्ण भविष्य के सब्जबाग दिखाकर शामिल किया जाता है। ऐसे ज्यादातर एनजीओ की बागडोर विदेशों से शिक्षा प्राप्त करके स्वदेश लौटने वाले स्वार्थी लोगों के हाथों में सौंपी जाती है जिनमें राजनैतिक चेहरों सहित अनेक प्रतिष्ठित लोगों को शामिल किया जाता है ताकि संवैधानिक अंकुश लगने पर हंगामा खडा किया जा सके। 
हाल ही में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान घर जैसा लगता है। इनके विवादास्पद बयानों ने हमेशा ही देश के वातावरण में जहर घोलने की काम किया है। सैम के एनजीओ ग्लोबल नालेज इनिशिएटिव को अमेरिकी विदेश विभाग, यूएसएआईडी तथा राक फेलर फाउण्डेशन से निरंतर धन की प्राप्ति हो रही है।
 सैम तो राकफेलर के वर्तमान उपाध्यक्ष तथा अमेरिकी सरकार के पूर्व सलाहकार भी हैं। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के पूंजीपति जार्ज सोरोस को लम्बे समय से भारत विरोधी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। सोरोन को रिसर्च फार सोशल हैल्थ ने अपने बुलेटिन में ‘डीप स्टेट’ के साथ जोडते हुए नकारात्मक व्यक्ति की उपाधि से विभूषित किया है। आश्चर्य होता है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मुख्य सलाहकार एवं गांधी परिवार के निजी एनजीओ राजीव गांधी फाउंडेशन के सीईओ विजय महाजन केवल सोरोस के ही पार्टनर नहीं हैं बल्कि उनकी सीआईए से संबद्ध फोर्ड फाउंडेशन के साथ भी साझेदारी बताई जाती है।
मालूम हो कि सन् 1982 में फोर्ड फाउंडेशन के अधिकारी दीप जोशी ने सह-संस्थापक विजय महाजन के साथ मिलकर ‘प्रदान’ नामक एक प्रशिक्षण एनजीओ की स्थापना की थी जिसे पिछले 12 वर्षों में 596 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी फंडिंग प्राप्त हुई है। आश्चर्य तो तब हुआ जब बंग्लादेश में ‘डीप स्टेट’ के इशारे पर तख्ता पलट हुआ तब फोर्ड फाउण्डेशन से जुडे मोहम्मद यूनुस को सत्ता पर स्थापित करवाने में सहयोग हेतु फोर्डियन विजय महाजन को दायित्व सौंपा गया। उस कठिन दौर में ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी नारायण मूर्ति ने भी सहयोगात्मकत कार्य किया था। 
मालूम हो कि अप्रैल 2010 में कांग्रेस के नेतृत्व हेतु विजय महाजन तथा इन्फोसिस के प्रथम अध्यक्ष डा. जी. के. जयराम ने जवाहरलाल नेहरू लीडरशिप इंस्टीट्यूट अर्थात जेएनएलआई के नाम से एक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया था। यही संस्थान जुबैर से लेकर आरफा तक, द कारवां से लेकर आर्टिकल 14 तक को फंड करता है। इस हेतु इंफोसिस के मालिक सहित उनके अन्य मित्र वित्तीय व्यवस्था करते है। इस संस्थान के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल रुक्मिणी बनर्जी का नाम विजय महाजन के फोर्ड वित्त पोषित एनजीओ की उपाध्यक्ष के रूप में भी शामिल है। कहा जाता है कि सीआईए ने फोर्ड फाउण्डेशन को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मनोवैज्ञानिक युद्ध करने के लिए युवा शक्ति तैयार करने का काम सौंपा है। 
ज्ञातव्य हो कि सीआरपीएफ के वीवीआईपी सिक्यूरिटी हेड सुनील जून ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि राहुल गांधी अपनी सुरक्षा को गम्भीरता से नहीं ले रहे हैं। क्यों कि वह ज्यादातर विदेश यात्रा पर बिना किसी को बताये जा रहे हैं। पत्र में राहुल गांधी की 30 दिसम्बर से 9 जनवरी तक इटली, 12 मार्च से 17 मार्च तक वियतनाम, 17 अप्रैल से 23 अप्रैल तक दुबई,  11 जून से 18 जून तक कतर, 25 जून से 6 जुलाई तक मलेशिया जैसी यात्राओं का हवाला दिया गया है। 
पूर्व में भी प्रोटोकाल तोडने की अनेक शिकायतें दर्ज की जा चुकीं हैं। इस संबंध में सीआरपीएफ ने बताया है कि सन् 2020 से अब तक 113 बार उन्होंने सुरक्षा दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है जिसमें पार्टी की भारत जोडो यात्रा का दिल्ली फेस भी शामिल है। आखिर क्यों सुरक्षा चक्र तोडकर राहुल गांधी विदेश दौरे पर चुपचाप निकल जाते हैं। इस प्रश्न का उत्तर जानने का अधिकार राष्ट्र को है। फ्रांसीसी मीडिया ने उजागर किया है कि ‘डीप स्टेट’ अपने नियंत्रणकारी संस्थाओं के माध्यम से व्यवसायिक, व्यापारिक, आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, पोषण आदि की रिपोर्ट प्रकाशित करवाने के बाद उसे प्रभावशाली ढंग से विपक्ष द्वारा उठवाने, आम नागरिकों को गुमराह करवाने और सरकारों को दबाव में लेकर अपने हितों की पूर्ति हेतु कठपुतली बनाने में जी जान से लगी हुई है।
ऐसी ही खोजपरक जानकारियां अन्य देशों से भी निरंतर प्राप्त हो रहीं हैं। ऐसे में विदेशी रिपोर्ट्स पर देश के सदन में होने वाले हंगामों का राज स्वतः ही खुल जाता है। स्वार्थ प्रथम के सिद्धान्त पर दस्तक देता राष्ट्रद्रोह का दावानल अब घातक से अतिघातक होता जा रहा है। ‘डीप स्टेट’ के साथ गलबहियां करने वालों को समय रहते चिन्हित करना होगा तभी देशवासियों को अपनत्व भरे वातावरण में किलकारियां भरने का अवसर मिलता रहेगा। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।

परिवर्तन एवं महिला शक्ति संगठन ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने वाले सहयोगियों को किया सम्मानित


संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली में हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद करने वाले सहयोगियों का सम्मान परिवर्तन एवं महिला शक्ति संगठन (रजि.) ने एक विशेष कार्यक्रम में किया। समाजसेवियों को उनके योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि बलविंदर सिंह, उपाध्यक्ष दिल्ली प्रदेश, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और कहा कि आपदा के समय मदद करने वाले साथी ही असली समाजसेवी हैं। यह सम्मान केवल एक काग़ज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके सेवा भाव की पहचान है। मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं और समाज की असली ताक़त भाईचारा है।

बलविंदर सिंह ने आगे कहा कि आज देश गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है— महँगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है, नौजवान बेरोज़गारी से जूझ रहे हैं, किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पाने के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है।

ऐसे समय में केवल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ही एक ऐसा विकल्प है जो आम जनता की आवाज़ को उठाती है।

उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी नफरत की नहीं, बल्कि विकास और न्याय की राजनीति करती है। हम संविधान की रक्षा, लोकतंत्र की मजबूती और हर नागरिक को समान अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। यही कारण है कि आज देश को हमारी पार्टी की सख़्त ज़रूरत है।”

संस्था की भूमिका और पदाधिकारी - इस कार्यक्रम का संचालन संस्था की पूरी टीम ने मिलकर किया।

चेयरमैन: मीनाक्षी, उपाध्यक्ष: मुमताज बानो, महासचिव: ममता, सचिव: सावित्री, कोषाध्यक्ष: वंदना, साथ ही संस्था के ट्रस्टी सदस्य – राज कुमार, योगेश, सुशील सैनी, उमेश, करण, मोहम्मद ईशा, ललित चौधरी, अरुण यादव, भारती, ललित, मोहम्मद रियाज आदि भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर समाजहित में कार्य करते रहने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में बलविंदर सिंह ने सभी कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों से आह्वान किया कि आइए, हम सब मिलकर देश में बदलाव की लड़ाई को मज़बूत करें। यही समय है एकजुट होकर गरीब, किसान, मज़दूर, नौजवान और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करने का। हमारी ताक़त जनता है, और जनता के भरोसे ही देश को नई दिशा दी जा सकती है।



गुरुवार, 18 सितंबर 2025

ब्रह्म सत्यं जगत् सत्यं जगत् ब्रह्मौव नापर:

शिव शंकर द्विवेदी

नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः।
उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः।।2.16।।
अर्थ: असत् की स्थिति नहीं होती है अर्थात् असत् की सत्ता नहीं होती और सत् का अभाव नहीं होता है अर्थात् सत् की सत्ता या सत् का अस्तित्व होता है। तत्त्व दर्शियों द्वारा इस प्रकार असत् और सत् के विषय में मत स्थिर किया जाता है।
श्रीकृष्ण के द्वारा इस प्रकार संसार को देखने और समझने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। इनके अनुसार परमात्मा सत् समझे गये हैं इस कारण उनकी सत्ता पर कोई संदेह नहीं है।वह अस्तित्ववान् हैं क्यों कि वह सत् के रूप में समझे गये हैं। अस्तित्ववान् न होते तो सत् के रूप में न समझे गये होते।
हम दृश्यमान जगत् का अनुभव करते हैं अर्थात् इसकी सत्ता का अनुभव करते हैं इसलिए अनुभव में आ रहा जगत् भी सत् है।
जब हम स्वप्न देख रहे होते हैं उस समय हमें जो कुछ भी अनुभव हो रहा होता है उनमें यह अनुभव नहीं हो रहा होता है कि यह अनुभव बदल जायेगा ।उस समय यह नहीं अनुभव हो रहा होता है यह सब नहीं रहने वाले हैं। जगने के उपरान्त ज्ञात होता है तत् समय अर्थात् स्वप्न अवस्था में जो था इस समय नहीं है।
स्पष्ट है कि स्वप्न और जाग्रत अवस्था में समय और स्थान का भेद हो जाता है।इसका अर्थ है कि हम कोई भी अनुभव समय और स्थान निरपेक्ष होकर नहीं प्राप्त कर सकते हैं।यही कारण है कि हम जो अनुभव करते हैं वह देश और काल के सापेक्ष होने के कारण असत् नहीं समझा जा सकता है। अर्थात् हम जिस काल और स्थान पर जो अनुभव करते हैं वह उस काल और स्थान पर सत् होता है क्योंकि हम सत् का ही अनुभव कर सकते हैं अस्तित्व सत् का ही होता है जिसका अस्तित्व नहीं होता है उसका अनुभव हम नहीं कर पाते हैं।जब इस दृश्यमान जगत् का अनुभव इस समय कर हैं तो यह इस समय सत् है अस्तित्व में है।यह तब तक सत् है जब तक यह हमारे लिए वर्तमान के रूप में अस्तित्व में है। हम इसके भूत को भी असत् नहीं कह सकते हैं क्योंकि भूतकाल में यह जिस रूप में था जिनके अनुभव में था उनके लिए यह तत्समय सत् था क्योंकि वे इसके अस्तित्व का अनुभव कर रहे थे।भले ही भविष्य में इसका स्वरूप बदल जाय। यदि स्वरूप बदलता है तो इसका अर्थ यह नहीं रह जाता है कि वर्तमान में जो अनुभव हो रहा है वह असत् है क्योंकि वर्तमान में जो अनुभव हो रहा है वह भविष्य में बदलेगा भी?यह वर्तमान में रहते हुए नहीं समझा जा सकता है केवल कल्पना ही की जा सकती है और इस कल्पना का आधार भी भूतकाल के अनुभव ही होंगे।
अत एव वर्तमान में जो अनुभव हो रहा है उसे इस आधार पर असत् नहीं समझा जा सकता है कि भविष्य में इसका स्वरूप बदल जायेगा। किसी भी वर्तमान अनुभव के बाधक अनुभव का अनुभव वर्तमान में नहीं होता है जैसे जब हम स्वप्न देख रहे होते हैं तब यह अनुभव नहीं हो रहा होता है कि एक समय ऐसा भी आयेगा जब यह अनुभव नहीं रह पायेगा।
अत एव भविष्य सत् की कल्पना में वर्तमान को असत् समझते हुए वर्तमान के दायित्वों से पलायन श्रीकृष्ण के विचारों से असहमति ही है। ऐसे में समझना चाहिए कि श्रीकृष्ण वर्तमान जीवन या प्रतीति को असत् या मिथ्या के रूप न समझ कर जीवन्त समझते थे।यही उनके चिन्तन की विशेषता है जो उन्हें प्राचीन भारतीय चिन्तकों से नितान्त भिन्न रूप में प्रस्तुत करती है।वह स्वतन्त्र विचारों के धनी थे केवल परम्पराओं को आंख मूंद कर ढोने वाले विचारकों में नहीं थे।ऐसे में दृश्यमान जगत् को असत् या मिथ्या समझते हुए श्रीकृष्ण और उनके उपदेशों को नहीं समझा जा सकता है।

(लेखक अ-मोक्ष साधना केंद्र राजनिकेतन वृन्दावन योजना लखनऊ है।)

बुधवार, 17 सितंबर 2025

जैन युवा क्लब के भव्य मेले का समापन


संवाददाता

पूर्वी दिल्ली। कड़कड़डूमा स्थित सीबीडी ग्राउंड में जैन युवा क्लब की ओर से भव्य मेले का आयोजन 12 सितम्बर से 16 सितम्बर 2025 तक किया गया। इस मेले में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी लोग पहुंचे और उत्साह का माहौल बना रहा। मेले का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया, जिसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आकर्षक कार्यक्रमों की श्रृंखला ने दर्शकों का मन मोह लिया।

मेले में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए कुछ न कुछ खास देखने को मिला। बच्चों के लिए झूले, गेम्स और रंग-बिरंगे स्टॉल लगाए गए थे, वहीं महिलाओं के लिए विभिन्न तरह की खानपान की चीजें और हस्तशिल्प के सामानों की दुकानें आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। खासतौर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों और हस्तनिर्मित सामानों ने लोगों का ध्यान खींचा। जैन युवा क्लब के संयोजक गौरव जैन व मेला मंत्री दीपक जैन ने बताया कि इस मेले का उद्देश्य समाज के बीच आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना और युवाओं को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना है। क्लब के सदस्यों का कहना था 
कि आज के दौर में जहां लोग भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे हैं, 
ऐसे आयोजनों से लोगों को एक-दूसरे से मिलने और सामाजिक संबंध मजबूत करने का अवसर मिलता है।

खानपान के स्टॉलों पर उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय और जैन व्यंजनों की विविधता देखने को मिली। स्वादिष्ट पकवानों का आनंद उठाने के लिए लोगों में खासा उत्साह देखा गया। बच्चों ने झूलों और खिलौनों का भरपूर लुत्फ उठाया तो वहीं बुजुर्ग पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में खोए नजर आए।

मेले में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे। स्थानीय पुलिस और स्वयंसेवकों की टीम लगातार सक्रिय रही जिससे भीड़भाड़ के बावजूद पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के समापन पर जैन युवा क्लब की ओर से सभी आगंतुकों और सहयोगियों का धन्यवाद किया गया। क्लब ने आश्वासन दिया कि आगे भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे जिससे समाज में सकारात्मकता और उत्साह का वातावरण बना रहे।

कुल मिलाकर, कड़कड़डूमा के सीबीडी ग्राउंड में आयोजित यह मेला केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को जोड़ने और सामूहिक एकता का संदेश भी दिया। लोगों की भारी भागीदारी और उत्साह ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

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आने वाले साल फिर से मेले का धमाल होगा : गौरव जैन

'जैन युवा क्लब' की ओर से कड़कड़डूमा स्थित सीबीडी ग्राउंड में आयोजित भव्य मेले की सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब समाज और सहयोगी एकजुट होकर किसी कार्य में लग जाते हैं, तो परिणाम हमेशा उत्कृष्ट होते हैं। इस आयोजन के संयोजक के रूप में मेरे लिए यह अवसर गर्व और प्रसन्नता से भरा हुआ है।

सबसे पहले मैं अपने सभी सहयोगियों, स्वयंसेवकों और पदाधिकारियों का हृदय से धन्यवाद करना चाहता हूँ, जिन्होंने इस मेले को सफल बनाने में दिन-रात मेहनत की। यह केवल मेरा नहीं, बल्कि हम सभी का संयुक्त प्रयास था, जिसने इस आयोजन को यादगार बना दिया। मेले की योजना बनाना, विभिन्न कार्यक्रमों का चयन करना, स्टॉलों की व्यवस्था से लेकर सुरक्षा प्रबंधन तक झ्र हर छोटे-बड़े कार्य में आप सबकी लगन और जिम्मेदारी साफ दिखाई दी।

मेले में स्थानीय निवासियों की भारी भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि हमारे समाज में ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और महत्व दोनों हैं। बच्चों के लिए मनोरंजन, महिलाओं के लिए खरीदारी और खानपान, युवाओं के लिए सांस्कृतिक गतिविधियाँ और बुजुर्गों के लिए सामाजिक संवाद झ्र हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ विशेष शामिल किया गया। इस संतुलन ने मेले को और भी खास बना दिया।

हमारे क्लब का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं था, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और एकता की भावना को मजबूत करना भी था। मुझे गर्व है कि हम इस लक्ष्य को पाने में पूरी तरह सफल रहे। मेले के दौरान लोगों के चेहरों पर जो खुशी और संतोष था, वही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

मैं विशेष रूप से उन साथियों का आभार प्रकट करता हूँ जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया। चाहे वह स्टॉल सजाना हो, मेहमानों का स्वागत करना हो, सुरक्षा की व्यवस्था हो या मंच संचालन - हर जगह हमारी टीम की प्रतिबद्धता झलक रही थी।

इस मेले ने न केवल हमें समाज से जोड़ा बल्कि हमारी टीम भावना को भी मजबूत किया। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में भी हम ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करेंगे और समाज को सकारात्मक ऊर्जा देने का कार्य करते रहेंगे।

शनिवार, 13 सितंबर 2025

पाकिस्तान के साथ खेल, कला और व्यापार जैसी गतिविधियों को जारी रखना शहीदों के बलिदान का अपमान है: बलविंदर सिंह

संवाददाता

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप क्रिकेट मैच ने एक बार फिर से पूरे देश का ध्यान खींचा है। बलविंदर सिंह, उपाध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) ने कहा कि जब सीमा पर हर रोज हमारे जवान शहादत दे रहे हों, जब आतंकवादी हमलों में निर्दोष भारतीय नागरिक अपनी जान गँवा रहे हों, तब पाकिस्तान के साथ खेल, कला और व्यापार जैसी सामान्य गतिविधियों को जारी रखना शहीदों के बलिदान का अपमान है।

बलविंदर सिंह ने कहा कि भारत-पाकिस्तान मैच का आयोजन गलत संदेश देता है। खेल को हम भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक मानते हैं, लेकिन पाकिस्तान के साथ खेलना तब तक उचित नहीं है जब तक वह आतंकवाद को समर्थन देता रहेगा। यह केवल एक मैच नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

भाजपा का रवैया हमेशा से ही विरोधाभासी रहा है। एक ओर भाजपा के नेता मंचों से कहते हैं “खून और पानी साथ नहीं बह सकते”। दूसरी ओर उन्हीं की सरकार पाकिस्तान के साथ व्यापार जारी रखती है।जनता के सामने वे कड़े तेवर दिखाते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे क्रिकेट मैचों और अन्य संबंधों को अनुमति देते हैं। यही भाजपा का असली चेहरा है—जनता के लिए भाषण, और सत्ता के लिए समझौता।

बलविंदर सिंह ने भाजपा से सवाल किए - 1. यदि पाकिस्तान वाकई दुश्मन देश है, तो उसके साथ क्रिकेट और व्यापारिक संबंध क्यों जारी हैं?
2. भाजपा सरकार के राज में ही बार-बार भारत-पाकिस्तान मैच क्यों आयोजित किए जाते हैं?
3. क्या "खून और पानी" जैसे बयान केवल चुनावी भीड़ को भड़काने और वोट बटोरने के लिए दिए जाते हैं?

बलविंदर सिंह का स्पष्ट मत है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तब तक उससे किसी भी तरह का खेल या व्यापारिक रिश्ता बंद होना चाहिए।

यदि भाजपा वास्तव में राष्ट्रवाद की राजनीति करती है, तो उसे दोहरा रवैया छोड़कर देश के सामने ईमानदार नीति रखनी चाहिए।

शहीदों के परिवारों की भावनाओं से खिलवाड़ कर वोट की राजनीति करना सबसे बड़ा पाप है।

 भाजपा जनता को गुमराह करना बंद करे।
देश को झूठे राष्ट्रवाद की नहीं, बल्कि स्पष्ट, ठोस और सच्ची नीति की जरूरत है।
शहीदों के खून का सम्मान किया जाए, और जब तक पाकिस्तान अपनी नीतियां नहीं बदलता, तब तक उसके साथ हर तरह का संबंध—खेल और व्यापार सहित—तुरंत रोका जाए।
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