शनिवार, 24 मई 2025

ऐसे विवाद क्यों

अवधेश कुमार

पहलगाम आतंकवादी हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की अभूतपूर्व कार्रवाई ,उसके बाद 8 और 9 मई की रात्रि तक पाकिस्तान के साथ सीधे सैन्य टकराव और उसके बाद जिस तरह के वक्तव्य आये, प्रश्न उठाए गए हैं सामान्य तौर पर भी वे चिंतित करने वाले हैं। इसमें सबसे अंतिम विवाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के ऑपरेशन संबंधित पाकिस्तान को जानकारी देने के स्वाभाविक वक्तव्य का राहुल गांधी और कांग्रेस के द्वारा विवादास्पद बनाया जाना है। राहुल गांधी ने एक निजी न्यूज चैनल का वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर लिखा, ''हमारे हमले की शुरुआत में पाकिस्तान को सूचित करना एक अपराध था. विदेश मंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारत सरकार ने ऐसा किया।..  ''इसे किसने अधिकृत किया? इसके परिणामस्वरूप हमारी वायुसेना ने कितने विमान खो दिए?'' राहुल गांधी का पोस्ट था इसलिए हजारों की संख्या में शेयर हो गया और अपने देश के चरित्र के अनुरूप हंगामा भी।  इस कांग्रेस मीडिया एवं कम्यूनिकेशन के प्रमुख वरिष्ठ नेता जयराम रमेश पहले ही इससे आगे बढ़ कर विदेश मंत्री के इस्तीफे की मांग कर चुके थे। एक्स पर उनका पोस्ट था, ''विदेश मंत्री- अपने अमेरिकी समकक्ष की ओर से किए जा रहे दावों का जवाब तक नहीं देते हैं, उन्होंने एक असाधारण रहस्योद्घाटन किया है। वह अपने पद पर कैसे बने रह सकते हैं, ये समझ से परे है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून, 2020 को चीन को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट दे दी और हमारी बातचीत की स्थिति खत्म कर दी।  जिस शख्स को उन्होंने विदेश मंत्री के तौर पर नियुक्त किया, उसने इस बयान से भारत को धोखा दिया है। 

कांग्रेस पार्टी के समर्थक और भाजपा विरोधियों के साथ अनेक आम लोगों को भी इन बड़े नेताओं के वक्तव्य के बाद लगा होगा कि क्या वाकई हमने ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही पाकिस्तान को बता दिया? सामान्य दृष्टि से भी  इससे हास्यास्पद बात कुछ नहीं हो सकती कि जो सरकार आतंकवादी हमले के बाद सीमा पार स्थित महत्वपूर्ण आतंकवादी केन्द्रों को ध्वस्त करने की साहसिक कार्रवाई की गोपनीय तैयारी कर चुकी हो वह इसके पूर्व ही दुश्मन को बता देगा? लेकिन हमारा देश में  नेता, एक्टिविस्ट, मीडिया के कुछ साथी पत्रकार कुछ भी लिख और बोल सकते हैं। यह देश का दुर्भाग्य है और गहरी चिंता का विषय कि पूरे अभियान में , जिसने संपूर्ण दुनिया को विस्मित किया तथा पाकिस्तान को सकते में ला दिया उसे पर उत्सव मनाने की जगह अपने पय ही प्रश्न उठाकर देश का मनोबल कमजोर करने की भूमिका निभाई जा रही है। आखिर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा क्या था?  उन्होंने कहा था, “ऑपरेशन की शुरुआत में हमने पाकिस्तान को एक संदेश भेजा था कि हमारा निशाना आतंकवादी ढांचे पर है, न कि उनकी सेना पर। हमने उन्हें हस्तक्षेप न करने का विकल्प दिया था, लेकिन उन्होंने इसे मानने से इनकार कर दिया। “ उनके अनुसार, 7 मई की रात 1 से 1:30 बजे के बीच, भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने पाकिस्तान के डीजीएमओ मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला को फोन कर यह जानकारी दी थी। भारत ने केवल सावधानी से चुने गए आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाया है, न कि सेना के ठिकानों को। इसमें कहां है कि पूर्व में ही सूचित कर दिया? राहुल गांधी के वक्तव्य के बाद विदेश मंत्रालय ने इसका खंडन भी कर दिया कि पाकिस्तान को ऑपरेशन शुरू होने के बाद सूचना दी गई थी, न कि उससे पहले। इस बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। यह तथ्यों की तोड़-मरोड़ है।” 

बावजूद विवाद जारी है और रहने वाला है। सभी बड़े नेताओं को पता है कि सच क्या है। पहले की सरकारें ऐसा साहस नहीं कर सकी इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार जनता और दुनिया की नजर में ऐतिहासिक पराक्रमी न मान लिया जाए इसके भय से  अनेक ऐसे विवाद खड़े किए जा रहे हैं। इसका मतलब हुआ कि आगे भी ऐसे ही होता रहेगा।  तभी तो जिस ऑपरेशन पर अब अमेरिका व यूरोप के सामरिक विशेषज्ञ भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक सफलता ऐतिहासिक बताकर पाकिस्तान के झूठ को तथ्यों से उजागर कर चुके हैं वहां हमारे ही देश में दुश्मनों विशेषकर चीन, पाकिस्तान और अन्य के नैरेटिव को फैलाकर पूरी सफलता के स्वाद में मिट्टी तेल डालने का उपक्रम हो रहा है। भारत बहादुर देश है और जब हमने तैयारी से 1:05 बजे रात से 1:30 बजे तक यानी 25 मिनट के अंदर दो दर्जन से ज्यादा मिसाइलों के सटीक निशाने से महत्वपूर्ण आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करना शुरू किया तो पाकिस्तान को बता दिया कि कार्रवाई आतंकवाद के विरुद्ध है, पाकिस्तान पर हमला नहीं। पाकिस्तान नहीं कह रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर की सूचना पहले मिल गई और हमने किसी मिसाइल को मार गिराया।  वह सकते में आ गया कि इतनी बड़ी कार्रवाई की भनक कैसे नहीं लगी? 

दूसरे , यह हवाई बमबारी नहीं थी कि हमारे किसी वायुयान या पायलट को पाकिस्तान नुकसान पहुंचता। अगर नेताओं को इतनी समझ नहीं है  तो उनके बारे में देश तय करें कि हमें कैसा व्यवहार करना है। अंतरराष्ट्रीय मानक है कि हम किसी देश की सीमा में घुसकर किसी अपराध या आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई करते हैं तो उसे सूचना देते हैं। इसका रिकॉर्ड भी रखा जाता है ताकि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने हमले का झूठ न फैला सके। 10 मई को सैन्य टकराव रुकने के बाद डोनाल्ड राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला शुरू कर दिया यह जानते हुए कि नरेंद्र मोदी सरकार स्वयं अनेक बार कर चुकी है कि जम्मू कश्मीर के मामले में मध्यस्थता नहीं होगी। 10 मई की चार पत्रकार वार्ताओं मे सेना की दो महिला प्रवक्ताओं कर्नल सोफिया कुरेशी और‌ विंग कमांडर व्योमिका सिंह तथा विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ कर दिया। यह भी स्पष्ट किया गया कि आतंकवादी कार्रवाई को युद्ध की तरह लिया जाएगा। उसके बाद दो दिन सेना के तीनों अंगों के डीजीएमओ की पत्रकार वार्ताओं,अगले दिन प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन और उसके बाद आदमपुर वायु सेना अड्डा भाषण में साफ कर दिया कि पाकिस्तान आतंकवाद रोकने और सैन्य दुस्साहह से बचने की गारंटी पर खरा नहीं उतरा तो ऑपरेशन सिंदूर चारी है। प्रधानमंत्री नेकहा कि यज्ञ अखंड प्रतिज्ञा है। यानी अगर आतंकवादी कार्रवाई हुई तो केवल आतंकवादियों के विरुद्ध नहीं, पाकिस्तान सरकार का काम मानकर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इससे स्पष्ट घोषणा और कुछ हो नहीं सकती। 

देश के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में विश्व के लिए नए मानक जैसे प्रतिमान को देश की उपलब्धि मानने की जगह संकुचित राजनीतिक स्वार्थ तथा रुग्ण वैचारिकता के आलोक में छोटा करने का आत्मघाती व्यवहार किया जा रहा है। जब पाकिस्तान को आईएफ यानी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कर्ज दे दिया तो जयराम रमेश ने पोस्ट कर दिया कि भारत ने मतदान में विरोध नहीं किया। वे आर्थिक विषयों के पत्रकार रहे हैं और केंद्रीय मंत्री। उन्हें पता है कि विरोध में वोट करने का कोई प्रावधान नहीं और बहिर्गमन करन विरोध होता है जो भारत ने किया। इसी तरह बार-बार अमेरिकी दबाव में युद्ध विराम की बात हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और उनको कुछ बोलने से हम रोक नहीं सकते।  विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि अमेरिका से कब-कब बात हुई लेकिन भारत पर कोई दबाव हो इसे न अमेरिका बोला न कहीं से कोई संकेत। बावजूद ऐसा साबित करने की कोशिश हुई कि ट्रंप और अमेरिका के डर से युद्ध विराम कर दिया। प्रधानमंत्री के संबोधन के बावजूद पाकिस्तान और चीन के नैरेटिव को प्रमुखता दी जा रही है। अब ट्रंप ने भी कह दिया कि उसने कोई मध्यस्थता नहीं की। तब भी ये मानने को तैयार नहीं। भारत में कभी सीजफायर या युद्ध विराम शब्द का प्रयोग नहीं किया। हमने सैन्य कार्रवाई और गोलाबारी रुकने पर सहमति की बात की। यह समाचार उड़ा कि युद्दविराम केवल 18 मई तक है। अब पाकिस्तान के डीजीएमियों की ओर से आ गया कि इसकी कोई समय सीमा नहीं है। प्रश्न है कि क्या इसके बावजूद हमारे नेता, एक्टिविस्ट, बुद्धिजीवी, पत्रकारों का एक समूह अपने देश को छोटा करने से बाज आएंगे? कांग्रेस कहती है कि वह सेना के साथ है। क्या सेना के साथ होना देश पर अहसान करना है? ऐसा कौन कहेगा हम सेना के साथ नहीं है। सेना पहले भी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?  सेना  राजनीतिक नेतृत्व के आदेश का ही पालन कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने साहस दिखाया तो श्रेय उसको जाएगा। विरोधी चटपटा कर आत्महत्या कर लें तब भी इसमें श्रेय नहीं मिलने वाला। ये लोग देश के स्तर पर एकजुटता दिखाई तो श्रेय पूरे देश का होता। क्या यह बार-बार पूछना देश हित का कार्य है कि हमको क्या क्षति हुई बताया जाए? युद्ध में क्षति एकपक्षीय नहीं होती। दोनों पक्षों की होती है, किसी का कम किसी की ज्यादा। किंतु जब अभी भारत स्वयं को युद्ध या ऑपरेशन सिंदूर की अवस्था में मानता है तो जिम्मेवार भारतीय का राष्ट्रीय कर्तव्य ऐसे प्रश्नों से दूर रहना है। जो लोग अपना राष्ट्रीय कर्तव्य इसमें नहीं समझते उनके बारे में हम क्या शब्द प्रयोग करें या देश कैसा व्यवहार करें यह आप तय करिए। 


रविवार, 18 मई 2025

अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश का भव्य 13वां स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न

संवाददाता

नई दिल्ली। रविवार, 18 मई 2025 को अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष श्री देशबन्धु गुप्ता जी की अध्यक्षता में संगठन का 13वां स्थापना दिवस समारोह शाह ऑडिटोरियम, दिल्ली में अत्यंत भव्य एवं गरिमामय ढंग से सम्पन्न हुआ जिसमें समाज के वरिष्ठजनों, महिलाओं, युवाओं व बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मौजा ही मौजा एंटरटेनमेंट ग्रुप द्वारा सायं 5:00 बजे से किया गया सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला ने दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के विशेष आकर्षण प्रस्तुतियों में चंद्रदेव क्यों हुए भगवान भोलेनाथ के मस्तक से अदृश्य, इस नाटिका ने पौराणिक भावनाओं को जीवंत कर दिया। माता अनुसूया द्वारा त्रिदेवों के समक्ष अपने पतिव्रत का प्रमाण, दर्शकों को भाव-विभोर कर गया। देशभक्ति की प्रस्तुति श्री राधाकृष्ण नृत्य ने सबका मन मोह लिया। भगवान शिव द्वारा बालकृष्ण के दर्शन इस भव्य नृत्य नाटिका ने मंच पर दिव्यता का आभास कराया। सायं 5 बजे से ही पूरा ऑडिटोरियम खचाखच भर गया।

कार्यक्रम के मुख्य उद्‌बोधनकर्ता अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुशील गुप्ता रहे जिन्होंने संगठन द्वारा किये गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश द्वारा सभी वर्गों के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है।

इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष श्री देशबन्धु गुप्ता जी ने सबका अभिनंदन करते हुए संगठन द्वारा किये जा रहे प्रत्येक कार्य की जानकारी दी। अध्यक्ष जी ने कहा कि सन् 2025 में 1000 बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा होने का लक्ष्य रखा है जिसमें योग शिक्षा, कंप्यूटर कोर्स, मेहंदी कोर्स, ब्यूटी पार्लर कोर्स कराया जाऐगा ताकि वे अपनी जीविका कमा सके और अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।

वीपी ग्रुप के चेयरमैन एवं संगठन के प्रेरणास्रोत श्री सत्यप्रकाश गुप्ता की भी विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्घाटन वीपी क्रिएशंस प्रा.लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री विपिन गुप्ता द्वारा किया गया, जबकि स्वागताध्यक्ष के रूप में बॉडीकेयर इंटरनेशनल लि. के चेयरमैन श्री सतीश गुप्ता उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि वर्ल्डफा ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रमोद गुप्ता, दीप प्रज्जवलन एसएस बिल्डटेक वेंचर के चेयरमैन श्री संजीव सिंगला ने गोल्डन स्पॉन्सर व अन्य अतिथियों के साथ मिलकर किया।

अतिविशिष्ट अतिथियों दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर श्री मनीष अग्रवाल, Sub Divisional Magistrates Delhi श्रीमती इति अग्रवाल, महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल पंजाबी बाग की अध्यक्षा श्रीमती मीना सुभाष गुप्ता, MAPSKO ग्रुप के चेयरमैन श्री कृष्ण सिंगला एवं क्राउन स्टील्स डेजिग्नैटिड के पार्टनर श्री सुशील सिंगला ने भी अपनी विशिष्ट उपस्थिति के साथ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम के सिल्वर स्पॉन्सर श्री जगदीश प्रसाद अग्रवाल चेयरमैन बंगाली स्वीट्स, श्री रविन्द्र मोहन गर्ग डायरेक्टर पार्कर बिल्डर, श्री रामकिशोर अग्रवाल मैनेजिंग पार्टनर आर. के. सीड फार्म्स, श्री सुशील कुमार ऐरन डायरेक्टर लक्ष्मी बर्तन भण्डार, डॉ. रामगोपाल गोयल चेयरमैन बृजगोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी, श्री ललित अग्रवाल सीइओ गोयल एंटरप्राइजेज, श्री सोहित जैन युवा समाजसेवी, श्री अनिल गुप्ता डायरेक्टर युवा रियलटेक एवं श्री बिहारी दास मंगला मैनेजिंग डायरेक्टर मयूर प्लास्टिक इंडस्ट्रीज ने महाराजा अग्रसेन के चित्र पर पुष्प अर्पित किये।

संगठन के मुख्य सलाहकार पवन सिंघल ने मंच संचालन करते हुए उपस्थित सभी गोल्डन स्पॉन्सर, सिल्वर स्पॉन्सर एवं अतिविशिष्ट अतिथियों का श्री देशबन्धु गुप्ता व कोरकमेटी द्वारा मंच पर स्मृति चिन्ह प्रदान कर पटका एवं मोतियों की माला पहनाकर सम्मानित किया गया।

दिल्ली प्रदेश की कोर कमेटी टीम में चेयरमैन श्री महावीर गोयल, अध्यक्ष श्री देशबन्धु गुप्ता, महामंत्री श्री सुभाषचंद गुप्ता, कोषाध्यक्ष श्री अशोक सातरोडिया, मुख्य सलाहकार श्री पवन सिंघल, सलाहकार सीए उमाशंकर गोयल, उपाध्यक्ष श्री अनिल टेकड़ीवाल, उपाध्यक्ष श्री विनय सिंघल, उपाध्यक्ष श्री अशोक बंसल, उपाध्यक्ष श्री ताराचंद तायल, महिला चेयरपर्सन श्रीमती मंजू सिंघल, युवा चेयरमैन श्री रविन्द्र गर्ग एवं महिला कार्यकारी महामंत्री श्रीमती आभा गुप्ता ने संगठन के समारोह में उल्लेखनीय योगदान दिया है साथ ही दिल्ली प्रदेश मेन टीम, महिला टीम, संरक्षक टीम व सभी वार्ड अध्यक्षों की उपस्थिति से कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा लक्की ड्रा, जिसमें श्री विपिन गुप्ता जी मैनेजिंग डायरेक्टर वीपी क्रिएशंस की ओर से 2100 रूपये के 10 लक्की विजेताओं को प्रदान किये गए। यह क्षण कार्यक्रम में उत्साह का संचार करने वाला रहा। साथ ही, कार्यक्रम में पहुंचने वाली पहली 100 महिलाओं को श्री प्रमोद गुप्ता जी मैनेजिंग डायरेक्टर वर्ल्डफा ग्रुप की ओर से स्टील के 6 गिलास का सेट उपहारस्वरूप प्रदान किया गया।

विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए विशेष सुविधा के अंतर्गत 4000 बायोडाटा वाली विवाह प्रस्ताव पुस्तक ने अभिभावकों को अत्यंत लाभान्वित किया।

कार्यक्रम से पूर्व जलपान व कार्यक्रम के अंत में सभी के लिए स्वादिष्ट भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई थी, जिसका सभी ने आनंद लिया।

संपूर्ण आयोजन सामाजिक एकता, पारस्परिक सहयोग और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा। आयोजन में पधारे सभी आगंतुकों ने संगठन के कार्यों की सराहना की और भविष्य में ऐसे आयोजनों की निरंतरता की कामना की।

अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश के महामंत्री श्री सुभाष गुप्ता ने इस सफल आयोजन के लिए सभी कार्यकर्ताओं, कलाकारों और सहयोगियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

शुक्रवार, 16 मई 2025

भारत पाक युद्ध के दौरान मीडिया का गैर-जिम्मेदाराना आचरण

बसंत कुमार

कुछ दिन पूर्व पाकिस्तान द्वारा समर्थित भारत में आतंकी हमले के कारण दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल रहा और कई दिनों चले अघोषित युद्ध के बाद सीजफायर की घोषणा हुई। इस बीच सोशल मीडिया पर एक्टिव लोगों और कुछ स्वयंभू चैनलों और पत्रकारों ने बिना सिर पैर की खबरें फैलाकर देश के वातावरण को इतना तनावपूर्ण बना दिया कि देश के सभी लोग डरे व सहमे हुए थे। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक सूचनाओं की बाढ़-सी आ गई थी। कुछ चैनलों और सोशल मीडिया वालों ने तो भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान पर कब्जा कर लेने की बात कह दी थी। वहीं कुछ ने आधा पाकिस्तान को तबाह होने की बात कर दी थी। कभी-कभी इनके द्वारा इतनी भ्रामक और झूठी खबरें फैला दी गई की कि देश के आम जन मानस के मन में इतना डर और खौफ फैल गया कि लोग देश में असुरक्षित महसूस करने लगे थे और इस बीच कुछ अनाड़ी लोग मीडिया चैनलों पर विशेषज्ञ के रूप में आकर बेतुकी राय देने लगते हैं जैसे भारतीय फौज अनाड़ियों से भरी है।

विदेश और रक्षा मामलों के जानकारों ने दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव की स्थिति में सोशल मीडिया और कुछ चैनलों पर इस तरह की सामग्री की बाढ़ आने पर चिंता जताते हुए कहा कि नागरिकों को सोशल मीडिया का उपयोग करते समय बहुत ही सावधानी बरतने चाहिए और साथ ही इस सामग्री को लोगों के बीच शेयर करने में भी संयम बरतना चाहिए क्योंकि इस तरह कि जानकारियां भ्रामक होती हैं और सत्य से परे होते हैं। सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं आज घर-घर चल रहे चैनलों की भूमिका भी इस विषय में बहुत विवादित रही है। कुछ चैनल तो सरकार या सत्ता में बैठे राजनीतिक दलों को खुश करने के लिए ऐसा प्रसारित कर देते हैं कि मानों एक पक्ष ने दूसरे पक्ष कि धरती पर कब्जा कर लिया हो। दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव पर कुछ चैनल समाचार देते रहे कि भारतीय सेना कराची तक पहुंची या फिर पाकिस्तानी सेना ने सरेंडर कर दिया है। आज कि वैश्विक राजनीति में किन्हीं दो देशों के बीच चल रहे युद्ध या तनाव सिर्फ दो देशों के बीच तनाव नहीं होते बल्कि उसका असर पूरे महाद्वीप या पूरे विश्व पर पड़ता है।

कुछ स्वयंभू रक्षा विशेषज्ञ भारत पाकिस्तान युद्ध और फिर सीज़फायर पर अपना ज्ञान बांट रहे हैं जबकि वाट्सअप यूनिवर्सिटी से प्राप्त किया हुआ उनका आधा-अधूरा ज्ञान इन गंभीर विषयों पर विचार व्यक्त करने के लिए काफी नहीं होता। इस विषय में सरकार के उच्च अधिकारियों, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री या फिर प्रधानमंत्री को ही पता होता है कि इस प्रकार की युद्ध की स्थिति के लंबा खींचने पर देश को कितना नुकसान हो सकता है। इसलिए जो लोग भारत पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर के लिए बगैर सोचे-समझे प्रधानमंत्री को कोस रहे हैं उन्हें मामले की गंभीरता को समझना चाहिए और सोशल मीडिया और चैनलों पर इस मामले में अपना विशेष राय देने से बचना चाहिए। उनकी अधकचरे जानकारी वाली कमेंट सैनिकों का मनोबल गिराती हैं।

इस विषय में कुछ लोग जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करते, एका एक उन्हें देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की याद आने लगी हैं जिन्हें सभी लोग आयरन लेडी कहते थे पर ये लोग शायद यह भूल गए है कि बांग्लादेश युद्ध के दौरान जब उन्हें नेता विपक्ष अटल बिहारी वाजपाई ने दुर्गा कहा था यानि 1971 में पूरा विश्व दो महाशक्तियों संयुक राष्ट्र अमेरिका और सोवियत यूनियनों (यूएसएसआर) में बंटा हुआ था और यदि अमेरिका पाकिस्तान के साथ खड़ा था तो सोवियत यूनियन भारत के साथ खड़ा था। इसी कारण श्रीमति इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति निक्की और उनके सातवें बेड़े की परवाह किए बिना अपनी राह में आगे बढ़ गई। इसके अतिरिक्त उनके सहयोगी के रूप में रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम और भारतीय सेना चट्टान की तरह साथ खड़ी थी और आज की तरह सोशल मीडिया और चैनल सरकार और सेना का मनोबल नहीं गिरा रहे थे जैसा आज के समय चल रहा है।

अपनी रक्षा संबंधी तैयारियां का राजनीतिक लाभ लेने की चेष्टा करना भी आत्मघाती होता है। हमने यह कभी नहीं सुना कि अमेरिका, फ्रांस, चीन, रूस जैसे देश अपनी ख़तरनाक मिसाइल या औजार किस शहर में बनाते हैं न के इन चीजों का प्रचार ही करते हैं क्या कोई बता सकता है इन विकसित देशों के औजार बनाने के कारखानों की लोकेशन क्या है। अटल जी की सरकार के समय परमाणु परीक्षण (बुड्ढा स्माइल) का पता दुनिया को तब पता लगा जब इसका परीक्षण सफल हो गया पर आज के भारत युग में यह नहीं हो पा रहा है, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में स्थित कारखाने में हो रहा है। इस बात का प्रचार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ऐसे जोर-शोर से किया जा रहा है जैसी भारतीय सेना के लिए यह मिसाइल उत्तर प्रदेश बना रही है। इससे दुश्मन देशों को इस बात पता नहीं लग जाएगा कि इस मिसाइल का निर्माण कहां हो रहा है और यह सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है ऐसी भी जानकारी आ रहीं है कि ब्रह्मोस मिसाइल की जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को भेजने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। अतः यही अपेक्षा की जानी चाहिए कि सुरक्षा संबंधी तैयारियों का राजनीतिक लाभ न लिया जाए।

भारत की यह परम्परा रही है कि जब भी देश दुश्मन के साथ युद्ध की स्थिति में रहा हो सरकार और विपक्ष ने एक साथ मिलाकर सेना और जनता का हौसला बढ़ाने का काम किया है। सबको याद है कि 1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपाई ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दुर्गा कहा था और युद्ध के समाप्ति के पश्चात यूएनओ में भारत का पक्ष रखने के लिए नेता विपक्ष अटल बिहारी वाजपाई जी को भेजा गया था। आज पांच दशक बाद भी पूरे विपक्ष ने सरकार के साथ खड़े रहकर भारत की एकता और अखंडता दिखाई पर मीडिया के लोगों ने भारत-पाक युद्ध के बारे में झूठी व भ्रामक खबरें फैलाकर देश की जनता के मन में झूठा भ्रम फैलाने का काम किया। अब समय आ गया है कि इन इलेक्ट्रोनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर शिकंजा कसा जाए।

(लेखक एक पहल एनजीओ के राष्ट्रीय महासचिव और भारत सरकार के पूर्व उपसचिव है।)

भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई का दुनिया के सामने प्रतिमान पेश किया

 प्रधानमंत्री का संदेश आतंकवाद के विरुद्ध मानक 

अवधेश कुमार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो टूक , प्रखर और समयानुकूल स्वाभाविक प्रखर आक्रामक तेवर और घोषणाओं के साथ भाव भंगिमाओं को देखने के बाद भारत के अंदर और पूरे विश्व में जिन्हें भी सीमा पार आतंकवाद, जम्मू कश्मीर और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर कोई भ्रम रहा होगा वह दूर हो जाना चाहिए। अगर दूर नहीं होता है तो देशों की अपनी कुटिल नीति हो सकती है और भारत के अंदर मानसिक ग्रंथि। वास्तव में 10 मई को टकराव रुकने की सेना की दोनों महिला अधिकारियों तथा विदेश सचिव के वक्तव्य के बाद कम से कम भारत के अंदर आश्वस्ति होनी चाहिए थी। उसके बाद लगातार दो दिनों तक सेना के तीनों अंगों के तीन शीर्ष अधिकारियों ने जिस तरह बिंदुवार सुस्पष्ट और मुखर भाषा में सैन्य रणनीति और स्टैंड को सामने रखा उनसे साफ हो गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के तात्कालिक लक्ष्य और उद्देश्य पूरे हो गए हैं किंतु पाकिस्तान के विरुद्ध केवल सैन्य कार्रवाई छोड़कर संपूर्ण रणनीति जारी है। प्रधानमंत्री अगर घोषणा कर रहे हैं कि टेरर के साथ टॉक, ट्रेड यानी आतंकवाद के साथ बातचीत और व्यापार नहीं चल सकता है, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकता है और उसके बाद अगर देश के अंदर कोई सोचता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या वहां के विदेश मंत्री के पोस्ट के आधार पर भारत की नीति चल रही है तो वैसे लोगों के लिए क्या शब्द प्रयोग किया जाए यह पाठक तय कर लें।

प्रधानमंत्री ने कहीं भी अपने संबोधन में सीजफायर यानी युद्धविराम शब्द का प्रयोग नहीं किया और इसके पूर्व सेना के प्रवक्ताओं ने भी नहीं किया। विदेश सचिव के वक्तव्य तब में भी यह शब्द नहीं था। प्रधानमंत्री के वक्तव्य से साफ है कि आतंकवाद और सैन्य दुस्साहस रोकने की पाकिस्तान द्वारा दी गई गारंटी के आधार पर ही ऑपरेशन सिंदूर और सेना का प्रतिप्रहार रुका तथा इस कसौटी पर उसके आचरण को देखकर ही भविष्य तय होगा। वास्तव में प्रधानमंत्री के वक्तव्य में मूल पांच बातें स्पष्ट थी। पहला, पहलगाम हमले के बाद सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान के संदर्भ में हमारा स्टैंड और पूरी सैन्य रणनीति कायम है। दूसरा,  पाकिस्तान के हमले के लगातार विफल होने और उनके सैन्य अड्डों के तवाह होने के बाद शांति की पहल उन्होंने की और भारत अपनी शर्तों पर इसे स्वीकार किया । यह देश के अंदर बनाए गए झूठे नैरेटिव का उत्तर था जो सेना के प्रवक्ताओं द्वारा पत्रकार वार्ताओं में पहले भी दिया जा चुका था। आत्महीनता की मानस वाले समूह इसे स्वीकारने की जगह अपनी ही  नीति को कटघरे में खड़ा करने लगे ।अगर आतंकवाद हुआ तो कार्रवाई केवल आतंकवादियों और उनके अड्डों के विरुद्ध ही नहीं होगी इसे पाकिस्तानी सत्ता की भूमिका मानकर होगी। कोई भी समझ सकता है कि यह सीधी सीधी चेतावनी है । तीसरा, अमेरिका सहित दूसरे देशों के लिए संदेश था कि यह संभव नहीं की आतंकवादी देश न्यूक्लियर ब्लैकमेल के आधार पर शांति की बात करें और हम स्वीकार कर लें। यानी मार पड़ने से डरा पाकिस्तान किसी देश के पास यह कहते हुए जाता है कि हम न्यूक्लियर अस्त्र का प्रयोग करेंगे और उसके आधार पर  कार्रवाई रोकने या समझौता करने को कहा जाएगा तो स्वीकार नहीं होगा। ध्यान रखिए, भारत ने जिन वायु सेना अड्डों पर पाकिस्तान में कार्रवाई की उनमें माना जाता है कि उसके तीन न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन के पास थे और वह घबरा गया कि अगर भारत यहां पहुंच सकता है तो आगे हमारे लिए इसका भी उपयोग करना संभव नहीं होगा। चौथा, अगर पाकिस्तान से कोई बातचीत होगी तो केवल पाक अधिकृत कश्मीर पर और आतंकवाद पर। यह भारत के अंदर विरोधियों और विशेषकर ट्रंप प्रशासन को उत्तर था जो जम्मू कश्मीर समस्या को सुलझाने और तटस्थ स्थान पर बातचीत करने का दंभ भर रहे थे। मोदी सरकार का यह स्टैंड पहले से क्लियर था। और पांचवां, हमारे स्वदेशी निर्मित विषयों और सैनिक उपकरणों ने जैसी सफलता प्राप्त की है उसके बाद कोई देश यह न सोचे कि युद्ध के दौरान हमको उनकी अपरिहार्यता रहेगी। 

गहराई से देखें अमेरिका सहित  पश्चिमी देशों को संदेश के साथ ही यह भारत की रक्षा सामग्रियों के अंतरराष्ट्रीय बाजार की एक बड़ी ब्रांडिंग थी। यानी हम भी प्रतिस्पर्धा में उतर गये हैं। आप भले किन्ही कारण से प्रधानमंत्री मोदी का सार्वजनिक विरोध करिए लेकिन किसी घटना को वे केवल तत्कालिकता में न देखकर उसके साथ दूरगामी और भविष्य के भारत के वैश्विक उद्देश्यों के आधार पर समग्र विचार कर सामने रखते हैं। देखा जाए तो भारत ने स्वयं को ऑपरेशन सिंदूर तथा उसके बाद प्रधानमंत्री के वक्तव्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नेतृत्वकारी भूमिका वाले देश के रूप में प्रस्तुत किया है। अमेरिका की परेशानी यह भी हो गई कि अगर भारत इस तरह साहसिक सैन्य कार्रवाई करता रहा तो दुनिया के नेता का उसका स्थान खतरे में होगा और बड़ी संख्या में देश उसके साथ खड़े हो जाएंगे। तभी डोनाल्ड ट्रंप की भाषा भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए समान थी। उन्होंने दोनों को महान देश बताया तथा दोनों के साथ सतत् व्यापार करने की भावना व्यक्त की। अचानक चीन के साथ व्यापार टकराव दूर करने के पीछे भी यही रणनीति हो सकती है।

प्रधानमंत्री को सारी बातें ध्यान में रही होगी और उसी अनुसार 22 अप्रैल के पहलगाम हमले के बाद पूरी तात्कालिक और दूरगामी सैन्य रणनीति , कूटनीति , अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति और राजनीति निश्चित हुई है। प्रधानमंत्री ने अमेरिका और यूरोप को भी यह कहते हुए आईना दिखा दिया कि आपके यहां भी 11 सितंबर, 2001 के और ब्रिटेन में ट्यूब के हमले के पीछे भी यही बहावलपुर के जैश ए मोहम्मद और मुरीदके के लश्कर ए तैयबा केंद्र की भूमिका थी। यह सच है कि तब वैश्विक आतंकवाद के केंद्र में ये स्थल थे। ओसामा बिन लादेन खुऋएआम इन स्थानों में तकरीरें - बैठकें करता था,  इनसे सीधे रिश्ते थे और अलकायदा एवं उसके द्वारा स्थापित इंटरनेशनल इस्लामिक फ्रंट के साथ सारे संगठन संबंद्ध हो गए थे। अगर प्रधानमंत्री कहते हैं कि उन्होंने हमारी माताओं - बहनों की मांगों के सिंदूर उजड़े तो हमने उनके अड्डों को ही उजाड़ दिया। साथ यह भी कि ऑपरेशन सिंदूर एक अखंड प्रतिज्ञा है। नहीं लगता कि इस समय विश्व का कोई भी नेता इतने खतरनाक पड़ोसी , जिसके पास न्यूक्लियर अस्त्रागार हो और मजहबी उन्माद के आधार पर देश के बड़े वर्ग को मरने- मारने पर उतारू करने की विचारधारा, इस प्रकार के विचार और तेवर सामने रख सकता है । अब न केवल आतंकवादियों बल्कि उनको प्रायोजित करने वाले पाकिस्तान की सेना और संपूर्ण सत्ता को इस चेतावनी को  गंभीरता से लेना होगा कि उन्हें आतंकवाद का इंफ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त करना ही होगा। नहीं करेंगे तो फिर ऑपरेशन सिंदूर की विस्तारित प्रचंड हमले के लिए तैयार रहें और वह निर्णायक होगा। 

वास्तव में ऑपरेशन सिंदूर सीमा पार ही नहीं वैश्विक आतंकवाद से संघर्ष के लिए भी विचारधारा और रणनीति दोनों स्तरों पर एक विशिष्ट मानक बना है। यह बताता है कि नेतृत्व के पास इसके पीछे की संपूर्ण सोच और योजनाओं की पूरी समझ हो, प्रतिकार के लिए दीर्घकालिक सोच और रणनीति तथा उसे क्रियान्वित करने की संकल्पबद्धता और दृढ़ता हो तो पाकिस्तान जैसे दुष्ट देश को भी सबक सिखाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद से पीड़ित विश्व शांति की बजाय इस रणनीति को अपनायें तथा भयभीत छोटे देश भारत के साथ आएं। कुल मिलाकर यहां से भारत की  दक्षिण एशिया सहित संपूर्ण विश्व के आतंकवाद तथा कश्मीर जैसे मुद्दों के संदर्भ में विजय और समाधान के आत्मविश्वास से भरी निर्भीक, दूरगामी और तथा कमजोर देशों के लिए नेतृत्वकारी भूमिका सामने आई है। इस तरह ऑपरेशन सिंदूर के साथ भारत एक ऐसे नए दौर में प्रवेश का संदेश दे चुका है जहां उसकी स्वयं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता तथा वैश्विक शांति की उसकी अपनी दृष्टि सर्वोपरि है और किसी देश का इसके परे सुझाव या साथ उसे स्वीकार नहीं। क्या देश में विरोधी भी इस युगांतरकारी सच को स्वीकार करेंगे?


मंगलवार, 13 मई 2025

सर्वोदय बाल विद्यालय बुलन्द मस्जिद स्कूल का 12वीं का 95.12% और 10वीं का 95.45% रहा रिजल्ट


  • 12वीं में मो. बिलाल (83.6%) प्रथम, फैजान (78.4%) द्वितीय, कृष्णा (73.8%) तृतीय स्थान पर रहे
  • 10वीं में मोहम्मद मोहित (73.4%) प्रथम, फरहान (65.8%) द्वितीय, मो. कसन अली (61.2%) तृतीय स्थान पर रहे
  • सभी विषयों में बच्चों ने अच्छे अंक प्राप्त कर स्कूल, अध्यापकों व मां-बाप का नाम रोशन किया

नई दिल्ली। सीबीएसई द्वारा घोषित 10वीं और 12वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम में सर्वोदय बाल विद्यालय, बुलन्द मस्जिद स्कूल के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस बार स्कूल का 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम 95.12% और 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम 95.45%  परीक्षा परिणाम प्रतिशत रहा। 

इस वर्ष 12वीं में मो. बिलाल (83.6%) प्रथम, फैजान (78.4%) द्वितीय, कृष्णा (73.8%) तृतीय स्थान पर रहे वहीं मोहम्मद मोहित (73.4%) प्रथम, फरहान (65.8%) द्वितीय, मो. कसन अली (61.2%) तृतीय स्थान पर रहे।

इस परीक्षा परिणाम का श्रेय यहां के प्रधानाचार्य बलराज सिंह, उनके स्टाफ (अध्यापकों) व स्कूल की एसएमसी को जाता है जिन्होंने कम सुविधा में भी स्कूल के रिजल्ट में काफी सुधार किया है, जो लगातार जारी है।

इस पर स्कूल के प्रधानाचार्य बलराज सिंह ने सफल विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, लगन और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विद्यालय निरंतर छात्रों को उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इसी तरह प्रयास करता रहेगा। प्रधानाचार्य ने सभी सफल विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह सफलता अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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