बुधवार, 23 अप्रैल 2025

मजहब के नाम पर बेगुनाहों का कत्ल करना एक ऐसा जुर्म है जो माफ करने लायक नहीं : सैयद अहमद बुखारी , शाही इमाम दिल्ली जामा मस्जिद

नई दिल्ली, (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. इस हमले को लेकर दिल्ली जामा मस्जिद के का बयान सामने आया है. उन्होंने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 'पहलगाम में बेगुनाह लोगों की हत्या ने हमारी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है. पूरा देश इस जघन्य वारदात की एक स्वर में निंदा करता है।'
शाही इमाम ने कहा, "मजहब के नाम पर बेगुनाहों का कत्ल करना एक ऐसा जुर्म है जो माफ करने लायक नहीं है। उन्होंने इसे ‘नाकाबिल-ए-माफी जुर्म’ करार देते हुए कहा कि ऐसे दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। इमाम बुखारी ने हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा, “मैं उनके गम में उनके साथ खड़ा हूं।"
अहमद बुखारी ने ये भी कहा कि आगे आने वाले जुमे को इस हवाले से जामा मस्जिद से ऐलान भी करूंगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मजहब के नाम पर की गई ऐसी हिंसा न केवल धर्म का अपमान है, बल्कि इंसानियत के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध है।

मजदूर का बेटा शकील बना आईपीएस, यूपीएससी में हासिल की 506वीं रैंक, परिवार में जश्न का माहौल

असलम अल्वी 

शाहजहांपुर। हौसले बुलंद हो तो सपने भी सच हो जाते हैं। ऐसी ही कहानी शाहजहांपुर के तिलहर कस्बा के इमली मोहल्ले निवासी शकील अहमद की है, जिनके पिता कभी अपने बच्चों को पालने के लिए मजदूरी करते थे। आज बेटे ने आईपीएस बनकर बुलंदी के शिखर को छुआ है। शकील ने यूपीएससी में 506 रैंक हासिल की है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मंगलवार को सिविल सेवा परीक्षा 2024 का अंतिम परिणाम घोषित किया तो शकील के परिवार में जश्न का माहौल हो गया। 

तिलहर के मोहल्ला इमली निवासी हाजी तसव्वुर हुसैन मंसूरी के बेटे शकील मंसूरी का यूपीएससी में चयन होने पर घर में खुशी का माहौल है। शकील की इस उपलब्धि ने परिवार और नगर को गौरवान्वित किया है। हाजी तसव्वुर हुसैन ने बताया कि उनके छह बेटों में शकील सबसे छोटे हैं। 

शकील की मेहनत रंग लाई है। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन का रिजल्ट आने पर जैसे ही परिवार में खबर आई कि उनके बेटे ने 506 रैंक हासिल की है। घर ही नहीं इमली मोहल्ले और मंसूरी समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। तमाम लोगों ने उनके घर जाकर बेटे शकील मंसूरी की इस उपलब्धि पर खुशी का इजहार किया। वहीं हाजी तसव्वुर हुसैन व उनके बेटे कदीर मंसूरी, सगीर मंसूरी आदि ने आने वालों का मुंह मीठा कराया।

हाजी तसब्बर हुसैन के छह बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ा परिवार होने के चलते तसब्बर कभी पोटरगंज मंडी में पल्लेदारी किया करते थे। धीरे-धीरे बेटे बड़े हुए और परिवार की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। परिवार बैटरी का कारोबार करता है। 

शकील के भाई सगीर ने बताया कि पूरे परिवार का सपना था कि उन लोगों में से कोई एक पढ़-लिखकर बड़ा मुकाम हासिल करे। सभी भाई-बहन ने पढ़ाई तो की लेकिन सबसे होशियार शकील ही था। इसी वजह से उसकी पढ़ाई कराने में सभी ने ताकत लगा दी। 

कक्षा आठ तक की पढ़ाई शकील ने तिलहर के कैंब्रिज स्कूल से की। इसके बाद नौंवी और दसवीं की पढ़ाई शाहजहांपुर के तक्षशिला पब्लिक स्कूल से की। अलीगढ़ में रहकर 12वीं की परीक्षा पास की। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई करने के बाद शकील दिल्ली चले गए। 

शकील ने जामिया कैंपस में रहकर यूपीएससी की तैयारी करने लगे। शकील को चौथे प्रयास में सफलता मिली है। दो बार मेंस और एक बार इंटरव्यू में फेल होने के बावजूद शकील ने हार नहीं मानी। चौथे प्रयास में उन्हें आईपीएस बनने में सफलता मिली है। 

शकील ने दिल्ली से जब फोन पर परिवार को बताया कि वह आईपीएस बन गए हैं तो परिजनों की आंखों में आंसू छलक आए। जैसे ही जानकारी लोगों को हुई तो परिवार को बधाई देने वालों को तांता लग गया। सगीर ने बताया कि शकील हमेशा से देश की सेवा करना चाहता था। आज उसका सपना सच हुआ है।

शकील अहमद, जो उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से हैं, ने इस साल 506वीं रैंक प्राप्त की वहीं  है. वह 2021 से जामिया के आरसीए में तैयारी कर रहे थे. शकील ने इस सफलता को साझा करते हुए कहा कि यह मेरी कड़ी मेहनत और जामिया की उत्कृष्ट कोचिंग का नतीजा है. मैं इस सफलता को अपने परिवार और संस्थान को समर्पित करता हूं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ और कुलसचिव प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी ने आरसीए के सभी चयनित छात्रों को बधाई दी। प्रो. आसिफ ने कहा कि यह सफलता हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि हम समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों को सशक्त बनाते हैं. विशेष रूप से हमारी महिला उम्मीदवारों ने असाधारण प्रदर्शन किया है।

दिल्ली के इमाम व उलेमा ने पहलगाम कश्मीर आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की

  • मदरसा बाबुल उलूम जफराबाद नार्थ ईस्ट दिल्ली में देश में अमन व शांति और आपसी सौहार्द बरकरार रखने के लिए एक बैठक का आयोजन किया गया 

असलम अल्वी

नई दिल्ली। मदरसा बाबुल उलूम जफराबाद में दिल्ली के इमाम व उलेमा और मुस्लिम समाज के लोग जमा हुए और सभी ने अपने हाथ उठाकर इस आतंकवादी व हैवानी हमलों की कड़ी निंदा की और सभी ने देश मे अमन व शांति बरकरार रखने के लिए दुआएं की. मौलाना दाऊद अमीनी सदर दीनी तालीमी बोर्ड जमीअत उलमा ए हिन्द दिल्ली स्टेट व मौलाना जावेद सिद्दीकी क़ासमी  सदभावना मंच जमीअत उलमा ए हिन्द व इमाम उलमाओं ने कहा कि हम पहलगाम कश्मीर की दुखद घटना में जान गँवाने वालों व घायल होने वालों के परिजनों के दुख मे बराबर के शरीक हैं. उन्होंने आगे कहा कि हिन्दू-मुस्लिम के बीच किसी भी तरह की दूरी और कोई बाधा ना पनपने पाएं. भारत देश की एकता व आपसी सौहार्द में कोई फ़र्क़ ना पड़ने पाए।

मुस्लिम समाज के कई अहम ज़िम्मेदारों ने इस मौके पर कहा की हम सभी हिन्दू-मुस्लिम साथ हैं और आगे भी साथ रहेंगे, हमारी न कोई धार्मिक लड़ाई है और न ही समाजी लड़ाई है. जो लोग हिन्दू-मुस्लिम करके दूरियां बढ़ाने के काम कर रहे हैं व देश के लिए कभी भी सही नहीं हो सकते हैं. इस लिए किसी भी तरह की अफवाह या कोई गलत फहमी फैलाने की कौशिश न करें. आतंकवाद को आतंकवाद हि समझना चाहिए किसी भी धर्म या जाती से नहीं जोड़ना चाहीए. समाज के ताने बाने को ख़राब करने वाले लोग अच्छे नहीं हो सकते हैं यह बात सभी को समझने की ज़रूरत है. इस बैठक में पहलगाम आतंकी हमले में जान गँवाने वालों की आत्मा की शांति और जो घायल हैं उन के जल्द स्वस्थ होने के लिए दुआएं की गईं. इस मौके पर सभी लौगों ने देश के सभी वर्गों से अमन व शांति बनाए रखने की अपील की।




थाना सोनिया विहार की टीम ने कुछ ही घंटों में झपटमारी की घटना को सुलझाया, तीन झपटमारों को किया गिरफ्तार

◆शिकायतकर्ता का छीना गया मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की गई

असलम अल्वी

नई दिल्ली। दिनांक 22.04.2025 को थाना सोनिया विहार में एक झपटमारी की घटना की सूचना प्राप्त हुई, जिसमें शिकायतकर्ता सुखराम पुत्र बरोनी, निवासी सभा पुर, सोनिया विहार, दिल्ली, उम्र - 33 वर्ष, ने बताया कि वह सभा पुर में एक गोदाम में काम करता है। दिनांक 21.04.25 को रात लगभग 10:00 बजे जब वह ड्यूटी पर जा रहा था, तभी 'टोल टैक्स बैरियर' की ओर से तीन लोग मोटरसाइकिल पर आए, शिकायतकर्ता को रास्ते में रोककर उसका मोबाइल फोन छीन लिया और मौके से फरार हो गए।
इस संबंध में थाना सोनिया विहार में धारा 304(2)/3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई।
जांच के दौरान निरीक्षक संजय प्रकाश भट्ट, थानाध्यक्ष सोनिया विहार  के नेतृत्व में HCs आदेश, कमल, Ct. मिलन और Ct.  विकास की एक पुलिस टीम का गठन किया गया। श्री विजयपाल सिंह तोमर, ACP/खजूरी खास के मार्गदर्शन में टीम ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय स्रोतों से सुराग इकट्ठा किए और एकत्रित सुरागों के आधार पर तीन संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान निम्नलिखित रूप में हुई:
  1. बॉबी पुत्र भीषम निवासी सूर्य विहार, वेस्ट करावल नगर, दिल्ली, उम्र - 27 वर्ष,
  2. दुर्गेश पुत्र निरंजन निवासी ब्रिज पुरी, गोकुल पुरी, दिल्ली, उम्र - 20 वर्ष,
  3. शुभम गुप्ता पुत्र विपिन गुप्ता निवासी सूर्य विहार, वेस्ट करावल नगर, दिल्ली, उम्र - 20 वर्ष।
जांच के दौरान उन्होंने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। शिकायतकर्ता का छीना गया मोबाइल फोन और अपराध में प्रयुक्त मोटरसाइकिल नंबर DL-5SDJ-2175 इनके कब्जे से बरामद की गई है। अन्य मामलों में भी इनकी संलिप्तता की जांच की जा रही है। प्रकरण में आगे की जांच जारी है।



मंगलवार, 22 अप्रैल 2025

कार्गो के रूप में लदा हुआ इंसानी जिस्म

लेखक: नदीम अब्बास क़ुरैशी, ज़िला लेया

आज आप फर्स्ट क्लास में उड़ान भरते हैं, और कल एक सामान की तरह जहाज़ में लाद दिए जाते हैं।
इसलिए हमेशा विनम्र रहिए।
हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा कीजिए।
लोगों से हमेशा मुहब्बत और अच्छे अख़्लाक से पेश आइए।

कभी-कभी मय्यत को कई दिनों तक फ्रीज़र में रखा जाता है।
ज़रा सोचिए! माइनस डिग्री वाले ठंडे कोल्ड स्टोरेज में एक लाश कितनी तकलीफ़ और बेबसी में पड़ी रहती होगी?
और यह तकलीफ़ कोई और नहीं, बल्के उनके अपने ही उन्हें देते हैं।

एक और तकलीफ़देह और शर्मनाक मामला यह होता है जब यूरोप या किसी दूसरे मुल्क से मय्यत को पाकिस्तान लाया जाता है।
क्या आप जानते हैं कि ऐसी मय्यत का पहले “एम्बाल्मिंग (Embalming)” किया जाता है?
यानी मय्यत के जिस्म से खून और बाकी तरल पदार्थ निकालकर उसमें ऐसे केमिकल डाले जाते हैं जो इन्फेक्शन वग़ैरह को रोक सकें।

इस प्रक्रिया के दौरान:

मय्यत को पूरी तरह बेपर्दा किया जाता है।

गर्दन के पास एक नस को बाहर निकालकर उसमें चीरा लगाया जाता है और उसमें कैनूला डाला जाता है।

फिर मशीन के ज़रिए केमिकल्स पूरे जिस्म में पहुंचाए जाते हैं।

खून निकालने के लिए टांग के पास एक और नस को काटा जाता है।

पेट और सीने में चीरे लगाकर अंदर के नाज़ुक अंगों को पंचर किया जाता है और फिर उन्हें केमिकल से भरकर सील कर दिया जाता है।

मुँह बंद करने के लिए या तो कोई चिपकाने वाला पदार्थ लगाया जाता है या फिर उसे सिल दिया जाता है।

मैंने यह सब विस्तार से इसलिए लिखा है ताकि हम सब अपनी भावनाओं को एक पल के लिए अलग रखकर सोचें —
क्या यह सब वाक़ई एक मय्यत के साथ ज़रूरी है?
क्या आख़िरी दीदार के लिए यह अज़ीयत देना जायज़ है?

क्या यह बहुत महँगा सौदा नहीं है?
हम अपने मरहूम अज़ीज़ को इस कदर कष्ट क्यों देते हैं?
सिर्फ़ इसलिए कि कोई दूर का रिश्तेदार आखिरी बार चेहरा देख सके?
या इसलिए कि लोग कहें, “बहुत बड़ा जनाज़ा था”?
या इसलिए कि अगर कम लोग आए तो समाज में हमारी “बेज़ती” न हो?

हक़ीक़त तो यह है कि जब किसी का इंतिक़ाल हो जाए,
तो जनाज़े में उतना ही वक़्त लगना चाहिए जितना कि क़ब्र खोदने और तजहीज़ व तक़्फ़ीन के लिए ज़रूरी हो।
अगर कोई अज़ीज़ दूर है तो वह सब्र करे, मय्यत के लिए दुआ और सदक़ा करे।
सिर्फ़ चेहरा देखने के लिए किसी मय्यत को अज़ीयत न दें।

जिसकी मौत जहाँ लिखी है, वहीं आनी है।
अगर किसी को परदेस में मौत आए तो वहीं दफ़न कर देना बेहतर है।
अगर किसी को भीड़ जुटाने का शौक है तो याद रखे —
अल्लाह के यहाँ तौलने का पैमाना दुनिया से बिल्कुल अलग है।

अल्लाह तआला हम सबका अंजाम ख़ैर से करे
और हमें मौत के बाद की बे-हुरमती और अज़ीयत से महफ़ूज़ रखे…
आमीन।
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