रविवार, 9 मार्च 2025

बदज़ुबान नेताओं का करें बहिष्कार?

तनवीर जाफ़री 

भारत को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है। लोकतंत्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें लोग अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को वोट देकर एक ऐसी सरकार चुनते हैं जिस में सभी को समान अधिकार होते हैं। लोकतंत्र समानता, भागीदारी, और मौलिक अधिकारों के सिद्धांतों पर आधारित होता है। संक्षेप में एक लोकतान्त्रिक सरकार जनता की सरकार होती है जो जनता द्वारा,जनता के लिये चुनी जाती है। परन्तु प्रायः यही देखा गया है कि जनता की सेवा के नाम पर चुनावी पोस्टर,बैनर्स व कटआउट में हाथ जोड़े हुये वोट मांगते दिखाई देता नेता चुनाव जीतने के बाद जनता का प्रतिनिधि नहीं बल्कि जनता का 'बॉस'  बना नज़र लगता है। सरकारी सुरक्षा, स्वागत, फूल-माला, जयजयकार, भाषणबाज़ी, अपने परिजनों व चेलों को फ़ायदा पहुँचाना, जमकर लूट खसोट करना, दबंगई व चौधर दिखाना मंत्री बनने की जुगत भिड़ाना,यदि मंत्री हैं तो मुख्यमंत्री पद के लिये लालायित रहना उज्जवल राजनैतिक भविष्य की ख़ातिर दल बदल की संभावनाओं को तलाशना आदि इसी तरह की  'समाजसेवा' में माननीय के 5 वर्ष बीत जाते हैं। और जनता 5 वर्षों बाद जब स्वयं को ठगा महसूस करती है तो ज़्यादा से ज़्यादा उसकी जगह किसी दूसरे का चुनाव कर लेती है। और वह भी अपने पूर्ववर्ती के नक़्शे क़दम पर चलने लगता है। 

माननीयों द्वारा जनता की ज़रूरतों से मुंह मोड़ने और सारा ध्यान 'अपनी ज़रूरतों ' को पूरा करने में लगाने का ही नतीजा है  देश में बढ़ती बेरोज़गारी,मंहगाई,विकास बाधित होना,बिजली पानी सड़क स्वास्थ व शिक्षा जैसी बुनियादी ज़रूरतें समुचित तौर से आम जनता तक न पहुँच पाना और अराजकता व क़ानून व्यवस्था जैसी समस्याओं का लगातार बढ़ते जाना। और जब यही स्थिति अनियंत्रित होने लगती है उस समय यही शातिर नेता जनता से वोट झटकने के लिये तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं। समाज को धर्म व जातियों के आधार पर विभाजित करते हैं। क्षेत्र व भाषा जैसे भावनात्मक मुद्दे उछाल कर सस्ती लोकप्रियता अर्जित करते हैं,मंदिर मस्जिद जैसे विवादों को पहले खड़ा करते हैं फिर इसे हवा देते हैं। वैज्ञानिक युग में अवैज्ञानिक तर्क देकर लोगों का ध्यान भटकते हैं। और इसी 'शातिर सियासत ' का ही एक पहलू यह भी है कि नेताओं द्वारा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिये तरह तरह की मुफ़्त योजनायें लागू की जाती हैं। जो सरकारें या पार्टियां इन योजनाओं को स्वयं चलाती हैं वे इन योजनाओं को बेहद ज़रूरी व जनहितकारी बताती हैं जबकि अन्य दलों के नेताओं को ऐसी योजनायें 'मुफ़्त की रेवड़ी ' नज़र आती हैं। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम आदमी पार्टी कांग्रेस पार्टी द्वारा चलाई जा रही ऐसी योजनाओं को 'मुफ़्त रेवड़ी कल्चर ' बता चुके हैं और इससे बचने की सलाह भी दे चुके हैं। 

परन्तु ऐसी योजनाएं जब केंद्र सरकार द्वारा या मध्यप्रदेश,हरियाणा,राजस्थान,छत्तीसगढ़ अथवा अन्य किसी भाजपा शासित राज्य द्वारा लागू की जाती है तो वह रेवड़ी न होकर 'ज़रुरत' बन जाती है। इतनी बड़ी ज़रुरत कि मोदी सरकार को अपनी इसी 'महान उपलब्धि' पर अपनी पीठ थपथपानी पड़ती है कि वह '80 करोड़ देशवासियों को मुफ़्त राशन बाँट रही है'। इसी वर्ग को वह मतदाताओं की 'लाभार्थी श्रेणी' भी समझती है। यदि इस तर्क को मान लिया जाये तो यही 'मुफ़्त राशन ग्रहण ' करने वाला वर्ग उन सत्ताधीशों को उस मुक़ाम पर पहुंचाता है जिसके लिये वे तरह तरह के छलकपट,प्रपंच,झूठ फ़रेब,ध्रुवीकरण आदि सभी हथकण्डों का सहारा लेते रहते हैं। इतना ही नहीं इन्हीं 'मुफ़्त ख़ोर ' मतदाताओं की कृपा से शीर्ष पदों पर पहुंचे ऐसे नेताओं में अहंकार भी इस क़द्र भर जाता है कि जिस जनता का वोट लेते समय यह अवसरवादी व स्वार्थी नेता इन्हें 'जनता जनार्दन' यानी जनता के रूप में ईश्वर कहकर सम्बोधित करते हैं इन्हीं नेताओं द्वारा इसी जनता को 'भिखारी' कहने में भी इन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होती। जबकि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी हर भारतवासी को 'ईश्वर का अंश' बता चुके हैं। परन्तु ईश्वर रुपी जनता जनार्दन का ऐसा ही अपमान पिछले दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री व वर्तमान में मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा करते सुना गया। उन्होंने एक सभा में कहा कि अब तो सरकार से भीख मांगने की आदत लोगों को पड़ गई है। नेता आते हैं तो उनको एक टोकरी काग़ज़ मिलते हैं। मंच पर माला पहनाएंगे और पत्र पकड़ा देंगे... यह अच्छी आदत नहीं है। लेने के बजाय देने की मानसिकता बनाइए। भिखारियों की फ़ौज इकट्ठा करने से यह समाज मज़बूत नहीं होगा। यह समाज को कमज़ोर करना है।

'भिखारी' शब्द के सन्दर्भ में यहाँ यह वर्णित करना भी ज़रूरी है कि हमारे देश के 'यशस्वी प्रधानमंत्री' स्वयं अपने कई साक्षात्कार में बता चुके हैं कि उन्होंने 35/40 वर्षों तक भीख मांगकर अपना जीवन गुज़ारा है। जिस भीख की बात मोदी जी करते हैं उस भीख का अर्थ तो है कि ख़ुद बिना मेहनत किये दूसरों की कमाई खाना । परन्तु यदि आप जनता के टैक्स के पैसों से जनता के लाभ के लिये कोई योजनाएं लाते हैं तो वह भीख कैसे हो गयी? और यदि यह भीख है तो जनता के इन्हीं पैसों से सत्ताधीशों व निर्वाचित सदस्यों का ऐश करना,इन्हीं पैसों से अपनी सुरक्षा पर ख़र्च करना,तमाम तरह की सब्सिडी लेना निर्वाचित होते ही फ़र्श से अर्श पर पहुँच जाना,क़र्ज़ मुक्त हो जाना,रातोंरात धन पति बन जाना यह सब क्या है? एक और बात, हमारे देश में एक विशेष समुदाय बल्कि 'अति विशेष व सम्मानित ' समुदाय ऐसा भी है जो बड़े गर्व से यह कहता है कि भिक्षा माँगना हमारे संस्कारों में शामिल है। इसके अलावा स्वयं को पुण्यार्थी समझने वाले दानदाताओं ने ही पूरे भारत में भिखारियों की लंबी फ़ौज बना दी है। हमारे धर्म प्रधान देश का शायद ही कोई ऐसा धर्म स्थान हो जहां भिखारी डेरा न जमाये रहते हों।

परन्तु यदि जनता अपने क्षेत्र की समस्याओं से संबंधित मांगपत्र अपने निर्वाचित प्रतिनिधि या राज्य के मंत्री को सौंपती है तो यह तो उसका अधिकार है? अपने या प्रदेश के 'जनसेवक' से अपनी समस्याएं सांझी नहीं करेगी तो किस से करेगी ? आपको विधायक मंत्री बनाया किस लिये गया है? आप आख़िर हैं किस मर्ज़ की दवा? क्या जनता के टैक्स के पैसों पर मुफ़्तख़ोरी करने का अधिकार केवल ऐसे माननीयों का ही है जो जनता को वोट मांगते समय 'भगवान' और मंत्री बनने के बाद 'भिखारी ' बताने लगे? जनता का अपमान करने वाले ऐसे बदज़ुबान, ख़ुदग़र्ज़, अहंकारी व सत्ताभोगी नेताओं से न केवल सचेत रहने बल्कि इनका बहिष्कार करने की भी सख़्त ज़रुरत है। 

                                                                       तनवीर जाफ़री

शनिवार, 8 मार्च 2025

प्रो. (डॉ.) पवन कुमार शर्मा ने अध्यक्ष एवं श्री सतीश कुमार ने किया उपाध्यक्ष के पद पर शिक्षा बोर्ड में कार्यग्रहण

संवाददाता

भिवानी।  भारत सरकार की नई शिक्षा नीति को पूर्ण गंभीरता से दृढ़तापूर्वक लागू किया जाएगा। देश को समग्र विकास में अग्रगामी बनाने की दिशा में यह शिक्षा नीति मील का पत्थर साबित होगी।
ये उद्गार प्रो0 (डॉ०) पवन कुमार शर्मा  ने आज यहाँ हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष का पदभार संभालने के पश्चात व्यक्त किए। इससे पूर्व उन्होंने बोर्ड की लॉबी में स्थापित माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की। बोर्ड के अधिकारियों ने अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का फुलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया। 
इस अवसर पर बोर्ड अध्यक्ष की माता श्रीमती मनपती देवी, पुत्री डॉ० नैन्सी शर्मा और परिवारजनों का बोर्ड अधिकारियों  तथा शहर के गणमान्य लोगों ने फूल मालाएं व गुलदस्ते भेंट कर स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि प्रो0 (डॉ०) पी.के. शर्मा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में संयुक्त सचिव के पद पर भी रह चुके हैं। वह वर्तमान में चरखी दादरी के गवर्नमेंट पी.जी. कॉलेज में प्राचार्य के पद पर कार्यरत थे। उन्हें शिक्षा क्षेत्र में करीब 35 साल लम्बा अनुभव है।  
प्रो0 (डॉ०) पी.के. शर्मा ने अपनी नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी व शिक्षामंत्री श्री महिपाल ढांडा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन पर जो विश्वास जताया है वह उसे सार्थक सिद्ध करेंगे तथा उपाध्यक्ष व सचिव के साथ मिलकर बोर्ड को उच्च मुकाम पर ले जाएंगे। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने को अपनी प्राथमिकता मानने वाले प्रो0 (डॉ०) पी.के. शर्मा का शिक्षा क्षेत्र से जुड़ाव कई दशकों का है। वे शिक्षा बोर्ड के उन सभी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के हिमायती व पैरोकार हैं, जिनसे शिक्षा जगत का बहुआयामी विकास हो। 
उन्होंने कहा कि शिक्षा-परीक्षा में गुणात्मक सुधार, परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने तथा शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को ओर अधिक उत्तरदायी, त्वरित, पारदर्शी व विद्याथियों/शिक्षकों के लिए संतुष्टिपूर्ण बनाने के लिए सत्त व सार्थक प्रयास किए जाएंगे। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को गुणवान, सुशील, ज्ञानवान, समाज व देश के प्रति समर्पित बनाया जा सकता है।
बोर्ड उपाध्यक्ष श्री सतीश कुमार ने भी अपनी नियुक्ति के लिए माननीय मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री का हृदय से आभार व्यक्त  किया और कहा कि शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावशाली व पारदर्शी बनाया जाएगा।
इस अवसर पर बोर्ड सचिव डॉ० मुनीश नागपाल ने भी पत्रकारों से प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि बोर्ड की परीक्षाएं सुचारू रूप से चल रही है और जो भी नकल से संबंधित मामले हमारे सामने आ रहे हैं उन पर बोर्ड तुरन्त प्रभाव से कड़ी कार्यवाही कर रहा है। वर्तमान में चल रही परीक्षाओंं में कुछ जगहों पर जहां भी नकल के मामले सामने आ रहे हैं, आरोपी लोगों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करवाई जा रही हैं, इसके अलावा संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए लिखा जा रहा है। शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं को पूर्णतया नकल रहित संचालित करवाना है







कार्यक्रम के 41वें दिन ग्राम इकनौरा में लोगो से मिलकर लखन प्रताप ने की पीडीए चर्चा


असलम अल्वी

शाहजहांपुर।  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी के निर्देश पर प्रदेश भर में चलाए जा रहे पीडीए चर्चा अभियान के अंतर्गत जनपद शाहजहांपुर के ददरौल विधानसभा क्षेत्र में भी लगातार अनवरत रूप से सपा नेता लखन प्रताप द्वारा पीडीए पर घर-घर पहुंचकर लोगों से पीडीएफ से जोड़ने के लिए अपील की व  क्षेत्र के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे है घर-घर पहुंचने का काम कर रहे हैं  आज 41वें दिन क्षेत्र के ग्राम~इकनौरा में घर घर जाकर की पीडीए चर्चा की  इस कारण उसके बाद क्षेत्रीय लोगों से मुलाकात करके पीडीए चर्चा के उद्देश्य बताए और लोगो से पीडीए परिवार का हिस्सा बनने को अपील की। 

इस दौरान उनके द्वारा बताया गया कि समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव के निर्देशानुसार उनके द्वारा ददरौल क्षेत्र की कमान संभालते हुए बाबा साहब का पीडीए पर्चा घर घर पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।





इस दौरान मेरे साथ मौजूद रहे  सत्येंद्र यादव (जिला उपाध्यक्ष) असलम खान (महानगर उपाध्यक्ष ) शाहजहांपुर समाजवादी पार्टी, नीरज मिश्रा, मुस्तकीम अली (जिला उपाध्यक्ष), आफताब मेंबरम शरूम खां अब्दुल्ला रहीम, साजिद अली, पुत्तन बेग, तैयब खा भाई, इमरान, राजा खां, सलमान अली, शाहरुख खान, अमर कुमार, राजकुमार, रामपाल, रामपाल, लियाकत अली, शरद शर्मा, हैदर खान मौजूद रहे।

शुक्रवार, 7 मार्च 2025

यूक्रेन, यूरोप एवं ट्रंप

अवधेश कुमार

यूक्रेन मोर्चे पर अंतिम समाचार यह है कि ब्रिटेन फ्रांस और यूक्रेन ने मिलकर एक युद्धविराम योजना बनाई है जिसे अमेरिका के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टोर्मर की बात मानें तो इस पर लगभग सहमति बन गई है । युद्ध समाप्त करने पर चर्चा के लिए यूरोपीय नेताओं के साथ 2 मार्च को शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस शिखर सम्मेलन में फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, स्पेन, कनाडा, फिनलैंड, स्वीडन, चेक गणराज और रोमानिया के नेता के अलावा तुर्किये के विदेश मंत्री, नाटो महासचिव तथा यूरोपीय आयोग और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष ने भाग लिया। विश्व की दृष्टि से यह यूरोप का  संपूर्ण सशक्त शिखर सम्मेलन था। विश्व ने देखा कि किस तरह यूरोपीय नेताओं ने वोलिदिमीर जेलेंस्की की आवभगत की तथा उन्हें महत्व दिया। ओवल ऑफिस यानी अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय से निकलने के बाद जेलेंस्की सीधे ब्रिटेन आए और प्रधानमंत्री स्टोर्मर ने उन्हें गले लगाया और कहा कि उन्हें उनके देश का अटूट समर्थन प्राप्त है तो इसके पीछे तत्काल ट्रंप एवं दुनिया को एक संदेश देने की रणनीति है। वास्तव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस ढंग से यूक्रेन पर अपने तेवर दिखाए और पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रो के साथ उनकी बहस हुई तथा  यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलिंस्की को व्हाइट हाउस  से बाहर किया गया वह दुनिया में सबसे बड़ी हलचल मचाने वाली घटना बन गई।  अमेरिकी इतिहास की यह पहली घटना थी जब व्हाइट हाउस में दो नेताओं के बीच इस तरह बहस हुई, दोनों उंगली उठाते दिखे तथा किसी विदेशी मेहमान को वहां से बाहर निकालना पड़ा। प्रश्न है की अभी आगे होगा क्या? 

ऐसा दिख रहा है कि यूरोप के ज्यादातर नेता इस समय जेलेंस्की के साथ है।। हालांकि वर्तमान यूरोपीय नेता अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उथल-पुथल के परिणाम से आशंकित हैं और वे संतुलित आचरण की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने सधे हुए वक्तव्य में कहा कि अब हम इस बात पर सहमत हो गए हैं कि ब्रिटेन, फ्रांस और संभवतः एक या दो अन्य देशों के साथ मिलकर यूक्रेन के साथ लड़ाई रोकने की योजना पर काम किया जाएगा और फिर उस पर अमेरिका के साथ चर्चा करेंगे। स्टार्मर ने कहा कि उन्हें व्लादिमीर पुतिन पर विश्वास नहीं है लेकिन डोनाल्ड ट्रंप पर विश्वास है और वह जब कहते हैं कि उन्हें शांति चाहिए तो हम मांग कर चलते हैं कि वह यही चाहते हैं। इसमें दो मत नहीं कि कोई समझौता स्थाई शांति की गारंटी होनी चाहिए। इसलिए स्टार्मर अगर कह रहे हैं कि हम अस्थाई युद्ध विराम का जोखिम नहीं ले सकते तो सामान्य तौर पर इसे असहमत होना कठिन है।उनका यह कहना कि युद्ध समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं आकर्षित तो करता है किंतु स्वयं इस समय की अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में देश की भूमिका ही इसके मार्ग की बड़ी बाधा है। एक बड़े समूह को डोनाल्ड ट्रंप का व्यवहार अटपटा और एकपक्षीय लग सकता है। धीरे-धीरे विश्व में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है जो मानते हैं कि उनका व्यवहार गलत नहीं है। एक समय यूक्रेन के प्रति विश्व की सहानुभूति थी और यह सच है कि अमेरिका और यूरोप की मदद के कारण पुतिन की युद्ध योजना पर तुषारापात हुआ। यूक्रेन जैसे छोटे देश को घुटनों पर लाना उनके लिए कठिन हो गया। किंतु पूरे काला सागर सहित क्रीमिया के क्षेत्र को देखें तो वहां लंबे समय से यूरोप की भूमिका के कारण ही स्थिति इतनी जटिल है कि उनका स्थाई निपटारा संभव नहीं। सोवियत संघ जिन राज्यों को मिलकर बना उनमें ज्यादातर आज स्वतंत्र हैं , पर उनकी भौगोलिक सीमाएं खासकर समुद्र में और आसपास इतनी स्पष्ट नहीं है।

न भूलिए कि प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय युद्ध विश्व युद्ध के पीछे उसे क्षेत्र की भौगोलिक जटिलताएं और राजनीतिक व्यवहार की बड़ी भूमिका थी। द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बावजूद अमेरिका के समक्ष सोवियत संघ के दूसरी महाशक्ति के रूप में खड़ा होने के कारण थोड़ा संतुलन रहा तथा यूरोप के प्रमुख देशों ने आपस में  भौगोलिक जटिलताएं खत्म कीं, राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाई। बावजूद न संपूर्ण यूरोप के लिए और न विश्व के लिए अस्थाई सुरक्षा और शांति सुनिश्चित हुई। सोवियत संघ के विघटन के बाद अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो और उसकी सेना कायम रही। अगर अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाने की ओर कदम आगे नहीं बढ़ते तथा उसे शास्त्रास्त्र नहीं देते तो पुतिन के लिए इस तरह आक्रमण करने का आधार नहीं बनता। इन देशों ने पोलैंड के साथ भी यही किया। शेष विषयों को छोड़ दें तो यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेस्की यह घोषणा कर देते कि वह नाटो का सदस्य नहीं बनेंगे तो भी शायद स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं।

सच यह है कि यूक्रेन रूस युद्ध विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार कर चुका है। नहीं रुका तो दुनिया कई प्रकार के संघर्षों में उलझ जाएगी। कई बार आपको शांति के लिए दबाव और अन्य बाध्यकारी दबावकारी कड़े भी कदम उठाने पड़ते हैं। ऐसा लग रहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए ढी ट्रंप ने इस स्तर कड़ा रुख अपनाया है। अगर ट्रंप तेवर करार नहीं किया होता तथा अपने चरित्र के अनुसार छोड़ना से खरी-खरी नहीं बोलते नहीं होते तो न यूरोपीय देश बैठते और न नए सिरे से विचार होता। जेलेंस्की को भी अमेरिका के महत्व का पता है और उन्होंने कहा है कि वह खनिज पर समझौते के लिए फिर से व्हाइट हाउस जाने को तैयार हैं। लेकिन उन्हें सुरक्षा की गारंटी चाहिए। जेलेंस्की विश्व इतिहास को ठीक से देखें। कोई देश किसी की सुरक्षा की स्थाई गारंटी नहीं दे सकता। इस समय उन्हें गारंटी दी जा सकती है। बस, वे स्वयं को भी बड़ी सैन्य शक्ति बनने या ऐसी अन्य महत्वाकांक्षाओं से अलग रखें। यूरोपीय देशों को भी समझना होगा कि पहले की तरह यूक्रेन की सैन्य और कूटनीतिक मदद जारी रखकर वे कुछ समय तक आर्थिक लाभ पा सकते हैं, रुस और उसे भी दबाव में रह सकता है लेकिन यह विश्व को बड़े संकट में फंसाने वाला भी साबित होगा। ट्रंप के रुख और रणनीति से ऐसा लगता नहीं कि वे आसानी से शांत होंगे। वैसे वर्तमान विश्व में अमेरिका का राष्ट्रपति युद्ध रोकने की बात करते हुए इसी तरह का कड़ा तेवर बनाए रखेगा तभी इसका कोई समाधान निकलेगा। इस दृष्टि से देखें तो ट्रंप का रवैया कम से कम तत्काल विश्व युद्ध रोकने वाला भी दिखेगा। 

वर्तमान विश्व में कोई एक देश आदर्शवादी या राष्ट्रीय स्वार्थ से परे होकर व्यवहार करने की स्थिति में है ही नहीं। तो हम अमेरिका से ही इसकी अपेक्षा क्यों रखें?  ऐसा नहीं है कि यूरोप को यह बात समझ में नहीं आ रही हों। स्वयं जेलेंस्की नए सिरे से अपनी नीति पर पुनर्विचार नहीं कर रहे हो यह भी नहीं माना जा सकता। कस्टमर का यह वक्तव्य कि हमारे पास यूक्रेन में न्यायपूर्ण और स्थाई शांति सुनिश्चित करने के लिए एक साथ आने का अवसर है जो उनकी संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करगा ट्रंप के रवैया के कारण ही आया है। स्थिति ऐसी है जिसमें कोई अचानक स्वयं को दोषी मानकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं होग। यूरोपीय देशों में तत्काल सबसे ज्यादा सक्रिय ब्रिटेन और फ्रांस को भी अपनी शक्ति की सीमाओं का आभास होगा। अमेरिका के साथ यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था इतनी आबद्ध है कि वह इससे बिल्कुल अलग हटकर एकाएक नई सशक्त सुरक्षा प्रणाली उत्पन्न नहीं कर सकते। ब्रिटेन का तो नाभिकीय ढांचों तक अमेरिका के साथ अविच्छिन्न जुड़ाव है। उनको पूरी तरह अलग कर अमेरिका के विरुद्ध जाना इस समय असंभव लगता है। इसलिए उनके अंदर भी नए सिरे से मंथन चल रहा है। यद्यपि मैक्रो ने ट्रंप की बातों को अपनी दृष्टि से काटा तथा कहा कि वे यूक्रेन को शस्त्र देकर कीमत नहीं ले रहे हैं जैसा वह कह रहे हैं किंतु वह भी एकपक्षीय बात ही थी। ट्रंप के नीति का एक पहलू शायद यही है कि एक बार सभी के समक्ष इतना कर आक्रामक व्यवहार करो तथा ऐसे तेवर दिखाओ जिसकी उन्हें कल्पना नहीं हो ताकि सभी दबाव में आकर युद्ध रोकने के लिए तैयार हो। ट्रंप अड़े रहते हैं तो भविष्य में एक सहमतिकारक समझौता संभव है। कम से कम तत्काल विश्व के हित में होगा और आगे इस पर शांति की कोशिश हो सकती है। 

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल-9811027208

सुव्यवस्थित संचालित हुई सीनियर सैकेण्डरी एवं डी.एल.एड. की परीक्षाएं

-  परीक्षा ड्यूटी में कौताही बरतने पर 06 पर्यवेक्षक कार्यभार मुक्त

-   31 अनुचित साधन प्रयोग के केस दर्ज

संवाददाता

भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ० मुनीश नागपाल, ह.प्र.से. ने बताया कि आज सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) एवं डी.एल.एड.(रि-अपीयर) की विषय की परीक्षा में प्रदेशभर में कुल 31 अनुचित साधन प्रयोग के केस दर्ज किए गए, जिसमें 06 प्रतिरूपण के मामले शामिल है। आज संचालित हुई सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) हिन्दी विषय की परीक्षा में 2,84,809 परीक्षार्थी तथा डी.एल.एड.(रि-अपीयर) की Pedagogy of Hindi Language विषय की परीक्षा में 442 छात्र-अध्यापक प्रविष्ट हुए।

बोर्ड सचिव ने बताया कि बोर्ड अध्यक्ष के उडऩदस्ते द्वारा जिला- अम्बाला के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया, जहां परीक्षा शान्तिपूर्वक संचालित हो रही थी।
उन्होंने आगे बताया कि उनके स्वयं के उडऩदस्ते द्वारा सोनीपत जिले के परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जहां परीक्षा केन्द्र रा.क.व.मा.वि., शामड़ी (गोहाना) के निरीक्षण के दौरान अनजान व्यक्ति की सूचना पर केन्द्र के नजदीक एक मकान पर पंहुचे और जांच के दौरान एक नोट बुक मिली, जिसके अन्तिम पृष्ठ पर कुछ बच्चों के नाम, अनुक्रमांक व सैट कोड पाए गए। केन्द्र अधीक्षक द्वारा सीटिंग प्लान की पुष्टि करते हुए कहा कि यह सैट कोड आज बच्चों का दिए गए प्रश्र-पत्रों के अनुसार ही हैं। मौके पर मौजूद सभी महिला/पुरूषों व उनके मोबाइल फोन व नोट बुक को पुलिस के हवाले करते हुए थाना सदर, गोहाना में दरखास्त दे दी गई है। इसके अतिरिक्त उडऩदस्तें द्वारा इसी केन्द्र से श्री जितेन्द्र, टीजीटी-सीपीयू गीता वि.म.व.मा.वि., गोहाना, सुश्री अनु रानी,टीजीटी-पीएचई, हैप्पी उच्च विद्यालय, जागसी, श्री कृष्ण कुमार, टीजीटी-एसएस, रा.उ.वि.,एसपी माजरा को परीक्षा ड्यूटी में लापरवाही के कारण कार्यभार मुक्त किया गया। उडऩदस्ते द्वारा परीक्षा केन्द्र रा.क.उ.वि.,बिचपड़ी से श्री मोनू, हिन्दी अध्यापक को केन्द्र अधीक्षक को जारी निर्देशों की उल्लंघना करने पर कार्यभार मुक्त किया गया।
उन्होंने बताया कि उप-मण्डल प्रश्र पत्र उडऩदस्ता, सफीदों(जीन्द) द्वारा परीक्षा केन्द्र विवेकानन्द.व.मा.वि., पिल्लुखेड़ा-3 में नियुक्त पर्यवेक्षक श्रीमती निशा, टीजीटी, अमर व.मा.वि., अमरावली खेड़ा एवं भिवानी से संचालित एसटीएफ-1 द्वारा परीक्षा केन्द्र रा.व.मा.वि., अकबरपुर बरौटा में नियुक्त श्री तिलकराज, टीजीटी, रा.व.मा.वि., गढ़ मिरकपुर से डयूटी में कोताही बरतने केे कारण ड्यूटी से कार्यभार मुक्त किया गया। परीक्षा ड्यूटी में कौताही बरतने वालों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही करने हेतु शिक्षा विभाग को लिखा जा रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि केन्द्र अधीक्षक नुंह-25,  रा.मि.वि.,सोंख द्वारा प्रतिरूपण के 04 तथा केन्द्र अधीक्षक नुंह-31,हाजी बक्शी मैमोरियल व.मा.वि., सतपुतियाका द्वारा 01 एवं केन्द्र अधीक्षक हिसार-50, गुरू जम्भेश्वर व.मा.वि., जवाहर नगर द्वारा प्रतिरूपण का 01 मामला दर्ज किया गया, जहां नकली परीक्षार्थी असली परीक्षार्थियों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे, जिनके विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज करवा दी गई है।
उन्होंने बताया कि 10 मार्च को संचालित होने वाली सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) की इतिहास एवं जीव विज्ञान विषय की परीक्षा में 1,10,612 परीक्षार्थी तथा डी.एल.एड. (रि-अपीयर) की Proficiency & Pedagogy of Mathematics Education विषय की परीक्षा में 1346 छात्र-अध्यापक प्रविष्ट होगें।
बोर्ड सचिव ने आगे बताया कि परीक्षा केन्द्र रा.क.व.मा.वि. चांग-1(भिवानी) पर उडऩदस्ते द्वारा निरीक्षण के दौरान वस्तुनिष्ठ प्रश्र हल पाए जाने एवं परीक्षा की पवित्रता भंग होने के कारण 05 मार्च, 2025 को संचालित हुई संस्कृत, शारीरिक शिक्षा, ड्रांईग व संगीत विषयों की परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। इस परीक्षा केन्द्र पर नियुक्त स्टाफ को तुरन्त प्रभाव से रिलीव करते हुए नया स्टाफ नियुक्त कर दिया गया है, जिसमें श्री गणेश दास,पीजीटी-भुगोल, पी.एम.श्री रा.क.व.मा.वि., भिवानी को केन्द्र अधीक्षक, श्री जितेन्द्र पीजीटी-भुगोल, रा.व.मा.वि., बजीना (तोशाम) व श्री सुरेन्द्र, पीजीटी-हिन्दी, रा.व.मा.वि., खरकड़ी (लोहारू) को उप-अधीक्षक तथा श्रीमती मोनिका, पीजीटी-जीव विज्ञान, रा.व.मा.वि., खरकड़ी(लोहारू) श्रीमती ममता शर्मा, पीजीटी-संस्कृत,पी.एम.श्री लोहारू, श्रीमती सुमन लता, पीजीटी-हिन्दी, रा.व.मा.वि., मंढ़ोली कंला(बहल), श्रीमती सुनिता देवी,पी.ई.ए., रा.उ.वि., दरियापुर(सिवानी), श्रीमती मीनु,पी.ई.ए., रा.मि.स्कूल मिठ्ठन, (लोहारू), श्री प्रवीन पी.ई.ए., रा.हाई.स्कूल झुंपा कंला (लोहारू), श्री राज कुमार,जेबीटी, रा.प्रा.पा.सोरडा जाडिड (बहल), श्री अमरजीत,जेबीटी, रा.प्रा.पा. शीमली (कैरू), श्रीमती अंजु देवी, जेबीटी, रा.प्रा.पा. निगाना खुर्द(तोशाम) व श्रीमती कविता,वी.टी., रा.व.मा.वि., ढिग़ावा(लोहारू) को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया हैं।  
उन्होंने बताया कि जिला-नुंह के परीक्षा केन्द्र रा.व.मा.वि.,टपकान-02(बी-02) तथा परीक्षा केन्द्र रा.व.मा.वि., आगरा चौक, पलवल-33(बी-03) पर 27 फरवरी, 2025 को संचालित हुई सीनियर सैकेण्डरी की अंग्रेजी कोर विषय तथा 28 फरवरी, 2025 को जिला झज्जर के परीक्षा केन्द्र रा.उ.वि. गंगटान, रा.व.मा.वि., डावला-01 व जिला नुंह के परीक्षा केन्द्र रा.व.मा.वि., पुन्हाना-03(बी-1) एवं जिला -पलवल के परीक्षा केन्द्र रा.क.व.मा.वि., होडल-09(बी-1) व होडल-10(बी-2) पर संचालित हुई सैकेण्डरी की गणित विषय की परीक्षा को परीक्षा की पवित्रता भंग होने के कारण रद्द कर दिया गया है।

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