सोमवार, 3 मार्च 2025

होली की भीड़ के मद्देनजर ध्यान में रखते हुए उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने अपने अधिकार क्षेत्र में 6 स्टेशनों पर मिनी कंट्रोल बनाया

उत्तर रेलवे द्वारा होली उत्सव की भीड़ का प्रबंधन

संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली मंडल ने अपने अधिकार क्षेत्र में 6 स्टेशनों पर मिनी कंट्रोल बनाया है। ये स्टेशन हैं नई दिल्ली, दिल्ली, निजामुद्दीन, आनंद विहार, गाजियाबाद और पानीपत।

ट्रेन संचालन और भीड़ नियंत्रण की निगरानी करने और मिनी कंट्रोल के साथ समन्वय करने के लिए मौजूदा उपकरणों के अलावा विशेष ड्यूटी अधिकारी (एसडीओ) तैनात किए गए हैं। नई दिल्ली और आनंद विहार में भीड़ बढ़ने पर सुरक्षा के लिए विशेष होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए होल्डिंग एरिया में टिकट बुकिंग काउंटर स्थानांतरित किए गए हैं। बिना टिकट यात्रियों को अब इन स्टेशनों के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। केवल उन्हीं यात्रियों को स्टेशन के अंदर जाने की अनुमति है जिनके पास वैध टिकट हैं। अधिक मांग को पूरा करने के लिए मोबाइल टिकटिंग और स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीनें पर्याप्त संख्या में तैनात की गई हैं।

वाणिज्यिक टिकट जाँच कर्मचारियों (टीटीई) को विशेष वर्दी प्रदान की गई है, ताकि उन्हें आसानी से पहचाना जा सके और निर्बाध टिकट जाँच में मदद मिल सके। मिनी कंट्रोल के साथ बेहतर समन्वय के लिए वाणिज्यिक और आरपीएफ कर्मचारियों को वॉकी टॉकी प्रदान की गई है। विशेष ट्रेनों में यात्रियों को चढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उदाहरण के लिए, होली स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए प्लेटफ़ॉर्म 16 को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा, अधिक व्यस्तता वाली कुछ ट्रेनों को एनडीएलएस के प्लेटफ़ॉर्म 16 पर स्थानांतरित कर दिया गया है। दिल्ली मंडल के सभी प्रमुख स्टेशनों से नियमित आरक्षित और अनारक्षित होली स्पेशल ट्रेनों की योजना बनाई गई है। 09.03.2025 तक, दिल्ली मंडल से कुल 14 होली स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं (नई दिल्ली से 5, आनंद विहार से 6, दिल्ली जं. से 2 और दिल्ली सराय रोहिल्ला से 1)। यात्रियों को ट्रेनों में निर्बाध रूप से चढ़ाने के लिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई अप्रिय घटना न हो, एक कतार विभाजक (सर्पेन्टाइन रूप) तैयार किया गया है।  यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं कि आरक्षित टिकट वाले यात्री आसानी से अपने कोच में चढ़ सकें और कोई भी वंचित या प्रतीक्षा सूची वाला यात्री आरक्षित कोच में प्रवेश न कर सके। इसके लिए नई दिल्ली और आनंद विहार स्टेशनों पर विशेष टिकट जांच दल तैनात किया गया है।

भीड़ के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए सभी एफओबी पर आरपीएफ की पर्याप्त तैनाती की गई है। होली की भीड़ को ध्यान में रखते हुए अजमेरी गेट साइड पर कुछ बदलाव किए गए हैं: प्लेटफॉर्म 1-15 पर प्रवेश एफओबी3 (गेट 8), एफओबी2 (गेट) और एफओबी1 के माध्यम से होता है। प्लेटफॉर्म 1-15 पर प्रवेश अब गेट 10 (प्लेटफॉर्म 16) के माध्यम से संभव नहीं है। प्लेटफॉर्म 16 के लिए जाने वाले आरक्षित यात्रियों को गेट 10 से प्रवेश करना होगा, जबकि पीएफ 16 के लिए जाने वाले अनारक्षित यात्रियों को गेट 12 से प्रवेश करना होगा।

बजट को लेकर दिल्ली सरकार की तैयारियों हुई तेज; दिल्ली सरकार 24 से 26 मार्च के बीच प्रस्तुत करेगी विकसित दिल्ली बजट: सीएम रेखा गुप्ता


बजट की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैबिनेट मंत्रियों के साथ दिल्ली विधानसभा में प्रेसवार्ता के दौरान सुझाव के लिए नंबर जारी करते हुए।

रविवार, 2 मार्च 2025

अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश के तत्वावधान में होली मंगल मिलन समारोह का भव्य आयोजन

संवाददाता

नई दिल्ली। अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश के तत्वावधान में होली मंगल मिलन समारोह का आयोजन 2 मार्च 2025 को शाह ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम सायं 5 बजे मौजा ही मौजा एंटरटेनमेंट ग्रुप द्वारा आरंभ किया गया। कार्यक्रम का शुभ आरंभ गणेश वंदना नृत्य नाटिका द्वारा किया गया। इसके उपरांत कैसे कटा ब्रह्म जी का पांचवां सिर, कालिया नाग मर्दन, कल्कि अवतार नाटिका, दुर्गा महिषासुर नृत्य नाटिका, देशभक्ति के गीत, फिल्मी चित्रहार, श्री राधाकृष्ण फूलों की होली का भव्य चित्रांकन किया गया।  शाम 5 बजे से ही पूरा स्टेडियम खचाखच भर गया था। हजारों अग्र बंधुओं ने होली मंगल मिलन कार्यक्रम में उपस्थित होकर इसका आनंद लिया। शाम 7 बजे अतिथि सम्मान किया गया। महाराजा अग्रसेन जी की प्रतिमा पर सभी सम्मानित अतिथियों ने पुष्प चढ़ाए और दीप प्रज्ज्वलन किया। 
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्षा एवं पूर्व राज्य सभा सांसद डॉ सुशील गुप्ता जी, प्रेरणा सूत्र श्री सत्प्रकाश गुप्ता जी, संगठन के दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष श्री देशबंधु गुप्ता जी, चेयरमैन महावीर गोयल जी, उदघाटन करता श्री विपिन गुप्ता जी, श्री सचिन गुप्ता जी (डायरेक्टर, बॉडीकेयर इंटरनेशनल), एडवोकेट भीमसेन मित्तल जी, श्री संजीव सिंहला जी, श्री हरिचंद अग्रवाल जी (अति विशिष्ट अतिथि), श्री नितिन अग्रवाल जी (अति विशिष्ट अतिथि), श्री गंगा बिशन गुप्ता जी (अति विशिष्ट अतिथि), श्रीमति अनिता मुकिम जी, श्री नवल किशोर जी, श्री नन्द किशोर अग्रवाल जी, श्री अमित गोयल जी, श्री बिहारी दास मंगला जी, श्री सतीश रामकुमार गोयल जी, श्री अनिल मित्तल जी (सत्मोला ग्रुप), श्री सुभाष जिंदल जी, श्री वासुदेव गोयल जी, श्री ललित अग्रवाल जी, श्री सोहित जैन जी, श्री नीरज कुमार अग्रवाल जी। 
इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रिय अध्यक्ष डॉ सुशील गुप्ता जी द्वारा अग्र ज्योति पुस्तिका का विमोचन किया गया। इस पुस्तिका में संगठन द्वारा 2024 में किए जा रहे कार्यक्रमों की पूरी जानकारी दी गई। अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन दिल्ली प्रदेश के मीडिया सहयोगी वैश्य पैनोरमा द्वारा 26 समाचार प्रकाशित किए गए, मेरी दिल्ली द्वारा 24 समाचार प्रकाशित किए गए, नायक भारती द्वारा 25 समाचार प्रकाशित किए गए, दिल्ली न्यूज 7 द्वारा 24 समाचार प्रकाशित किए गए, हिंद टुडे द्वारा 18 समाचार प्रकाशित किए गए। 
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्य सभा सांसद डॉ. सुशील गुप्ता जी ने कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि पूरी दुनिया में ही वैश्य समाज है ओर यह समाज जब क्षत्रिय से वैश्य बना था तब उसने संकल्प लिया था कि वह अपनी कमाई का दसवां हिस्सा समाज को समर्पित करेंगे। आज भी वैश्य समाज उसी संकल्प से जुड़ा है। वैश्य समाज बहुत परिश्रमी है। 
उन्होंने होली के उपलक्ष्य पर वैश्य समाज को बधाई देते हुए कहा कि जैसे-जैसे हम अपने रीति-रिवाजों को देखते हैं तो हमें पता चलता है कि उनका बहुत अधिक महत्व है। होली का रंग जब लगता है तो खून की हर बूंद बदल जाती है। पशु-पक्षी और वनस्पतियों में एक अलग ही संचार शुरू हो जाता है। इस पावन पर्व का किसी जाति या धर्म से कोई सम्बंध नहीं है। इसको सभी जातियां हर्षोल्लास से मनाती हैं। हमारा समाज समाज के हर कार्य को सहयोग से ही करता है और हर वर्ग के लिए जनहित के कार्य करता है।
संगठन के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देशबन्धु गुप्ता जी ने इस दौरान कहा कि इस वर्ष हमने 2025 में 1,000 बच्चो को अपने पैरों पर खड़ा होने का लक्ष्य रखा है ताकि वो अपनी जीविका कमा सके और परिवार का पालन पोषण कर सके। उन्होंने आह्वान किया कि किसी भी जरूरत मंद को कार्यालय का पता और फोन नम्बर दें ताकि हम उनकी यथोचित सहायता कर सकें। इस अवसर पर संगठन द्वारा किए जा रहे प्रत्येक कार्य की जानकारी भी दी। 
कार्यक्रम में वी.पी.क्रिएशन की ओर से 2100 रुपये के 10 लक्की ड्रा भी निकाले गये। वर्ल्डफा ग्रुप के तत्वावधान में कार्यक्रम में पहुंचने वाली पहली 100 महिलाओं को गिफ्ट के रूप में स्टील के 6 गिलास का एक सेट भी दिया गया।
इस अवसर पर दिल्ली प्रदेश की टीम पदाधिकारी महामंत्री सुभाष चंद गुप्ता जी, मुख्य सलाहकार पवन सिंहल जी, कोषाध्यक्ष अशोक सतरोदिया जी, उपाध्यक्ष अनिल टेकरीवाल जी, अशोक बंसल जी, जय प्रकाश सोमान जी, विनोद गुप्ता जी, मंत्री राजेश कुमार अग्रवाल जी, युवा चेयरमैन रविंद्र गर्ग जी, महिला चेयरमैन श्रीमति मंजू सिंहल जी, वरिष्ठ उपाध्यक श्रीमति सुदेश मित्तल जी, कार्यकारी महामंत्री श्रीमति आभा गुप्ता जी और अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे। संगठन के महामंत्री सुभाष चंद गुप्ता जी ने बताया कि संगठन समाज हित के अनेक कार्य कर रहा है । प्रति वर्ष धार्मिक और पारिवारिक यात्राओं का आयोजन भी किया जा रहा है।











शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से आज एक अधिकारी हुआ सेवानिवृत्त

संवाददाता

भिवानी।  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से श्री भुपेन्द्र सिंह, सहायक सचिव आज सेवानिवृत्त हुए। इन्हें एक गरिमापूर्ण समारोह में विदाई दी गई। इस अवसर पर सेवानिवृत हुए अधिकारी एवं शिक्षा बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के प्रवक्ता ने बताया कि श्री भुपेन्द्र सिंह, सहायक सचिव 35 वर्ष 08 महीने 17 दिन तक बोर्ड में अपनी सेवाएं देने उपरान्त सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंनेे सेवानिवृत्त हुए अधिकारी के कार्यों की सराहना की तथा उनके सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  

उन्होंने आगे कहा कि बोर्ड के अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रयासों के फलस्वरूप शिक्षा बोर्ड प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने सभी से अपील की कि बोर्ड कर्मी अपनी सक्रिय सहभागिता को बढ़ाते हुए पूर्ण कर्तव्‍यनि‍ष्ठ व लगन से कार्य करें। उन्होंने अधिकारी को भेंट स्वरूप स्मृति चिह्न व उपहार देकर शिक्षा बोर्ड से सेवानिवृत किया।

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

भारतीय चुनावों में विदेशी भूमिका का सच

अवधेश कुमार 

भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर यूएसएड या यूनाइटेड स्टेट एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के माध्यम से 21 मिलियन डॉलर यानी 182 करोड रुपए आने की सूचना ने पूरे देश में खलबली पैदा की है। ट्रंप प्रशासन के अंदर नवनिर्मित डिपार्मेंट आफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी डोजे यानी सरकारी दक्षता विभाग ने उसकी जानकारी देते हुए सूची जारी की। आरंभ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे रोकने की घोषणा की और कहा कि भारत के पास स्वयं काफी रुपया है तो हम क्यों दे। उस समय ऐसा लगा मानो भारत द्वारा अमेरिकी सामग्रियों पर लगने वाले आयत शुल्क के विरुद्ध कदम उठा रहे हैं। फिर उन्होंने मियामी और उसके बाद वाशिंगटन डीसी के आयोजनों में कहा कि हमें भारत में मतदान बढ़ाने पर 21 मिलियन खर्च करने की आवश्यकता क्यों है? मुझे लगता है कि वे किसी और को जिताने की कोशिश कर रहे थे। हमें भारत सरकार को बताना होगा। क्योंकि जब हम सुनते हैं कि रूस ने हमारे देश में 2 डॉलर का खर्च किया है तो यह हमारे लिए बड़ा मुद्दा बन जाता है। भारत सरकार की ओर से सूचना है कि जानकारियों के आधार पर जांच आरंभ हो गई है। हमारे देश की समस्या है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र व भाजपा की राज्य सरकारों के रहते जब भी ऐसी खबर आती है सोशल मीडिया और मीडिया पर प्रभाव रखने वाला बड़ा वर्ग इसे गलत साबित करने पर तुल जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसा कह रहे हैं तो उसे खारिज नहीं किया जा सकता।

हमारे पास भारतीय चुनाव में हस्तक्षेप को साबित करने के लिए सटीक प्रमाण नहीं हैं। कुछ तथ्यों के आधार पर इसकी विवेचना की जा सकती है। डोजे द्वारा यूएस एड की जारी सूची में 15 तरह के कार्यक्रम के लिए धन देने की बात है। इनमें एक दुनियाभर में 'चुनाव और राजनीतिक प्रक्रिया सुदृढ़ीकरण' के लिए 48.6 करोड़ डॉलर यानी 4200 करोड़ का अनुदान था। इसी में भारत की हिस्सेदारी 182 करोड़ रुपए की है। बांग्लादेश को मिलने वाली 251 करोड़ रुपए बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल को मजबूत करने के लिए दिया जा रहा था। विश्व में चुनाव और राजनीतिक प्रक्रिया के सुदृढ़िकरण की आवश्यकता अमेरिकी प्रशासन को क्यों महसूस हुई? बांग्लादेश में राजनीतिक सुधारों के लिए अमेरिकी सहायता राशि की जरूरत क्यों थी?  मोजांबिक में पुरुष खतना कराएं, कंबोडिया में स्वतंत्र आवाज मजबूत हो तो प्राग में नागरिक समाज अंदर सशक्त हो इनका केवल समाज सेवा या उस देश का हित उद्देश्य नहीं हो सकता। इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य हैं। सच है कि सन् 2012 में भारत के चुनाव आयोग ने इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स के साथ एमओयू यानी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया था। तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इन आरोपों और समाचारों को निराधार बताया है कि आईएफएससी से धन आयोग को स्थानांतरित हुआ था।  कहीं नहीं कहा गया है कि इसने सीधे चुनाव आयोग को पैसा दिया। इस एजेंसी को यूएसएड से धन मिलता था और यह जार्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के साथ संबद्ध है। ऐसी संस्थाएं किसी माध्यम से अपनी भूमिका को वैधानिकता का आवरण देने की दृष्टि से समझौते करती हैं और फिर अपने अनुसार कार्य करती है। 

ध्यान रखिए 2012 में महत्वपूर्ण गुजरात विधानसभा चुनाव था तथा उसके पहले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर का। 2013 में पहले कर्नाटक उसके बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का। भारतीय चुनावों और राजनीति में विदेशी भूमिका की बात पहली बार नहीं आई है। नरेंद्र मोदी सरकार गठित होने के बाद से इसका चरित्र और व्यवहार बदला है किंतु हमारे देश में यह बीमारी लंबे समय से है। जब देश के नेता नौकरशाही, बुद्धिजीवी, पत्रकार, एक्टिविस्ट आदि छोटे-छोटे लाभ के लिए खिलौना बनने को तैयार हो जाएं तो कुछ भी हो सकता है। शीतयुद्ध काल में सोवियत संघ और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धायें थीं। दोनों अपने प्रभाव के लिए हस्तक्षेप करते थे। भारत में 1967, 77, 80 के चुनाव में विदेशी भूमिका की सबसे ज्यादा चर्चा हुई। सोवियत संघ के विघटन के बाद मित्रोखिन पेपर नाम से ऐसी जानकारियां आईं जिनसे पढ़ने वाले भौचक रह गए थे। वासिली मित्रोखिन, जो सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी से संबद्ध थे, और क्रिस्टोफ़र एन्ड्र्यूज ने अपनी पुस्तकों में खुलासा किया कि केजीबी ने भारत के अनेक समाचार पत्रों एक्टिविस्टों ,पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, नेताओं पर उस समय अरबों खर्च किए। भारत में अमेरिका के राजदूत रह चुके डेनियल मोयनिहान ने पुस्तक ए डैंजरस प्लेस में लिखा है कि भारत में कम्युनिस्टों के विस्तार को रोकने के लिए अमेरिका ने भारतीय नेताओं को धन दिए।

सन् 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से अनेक ऐसी घटनाएं हुईं हैं जिनसे संदेह बढ़ा। 2019 में दोबारा उनके सत्ता में लौटने के बाद अलग तरह के स्वरुपों में आंदोलन हुए । इनमें नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध शाहीनबाग धरना और उसके समर्थन में देश और दुनिया में सोशल मीडिया से लेकर अन्य अभियान तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का सरकार के विरुद्ध सीधे बयान देना शामिल है। कृषि कानून के विरुद्ध हुए आंदोलन में भी हमने देखा कि देश के बाहर से टूलकिट बनाकर अभियान चलाए जा रहे थे। इस तरह के आंदोलन भारत ने कभी देखे नहीं जिसमें प्रत्यक्ष हिंसा नहीं हो, पर उग्रता और हठधर्मिता ऐसी कि मुख्य सड़क पर धरना दो, आवश्यकतानुसार निर्माण भी कर लो और बैठे रहो, किसी सूरत में हटो नहीं। यूएसएड द्वारा 2021 में भारतीय मिशन के प्रमुख के रूप में वीणा रेड्डी को भेजा गया था। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद उनका भारत का कार्यकाल समाप्त हो गया और वह वापस लौट गईं हैं। उस समय भी उनकी भूमिका को लेकर प्रश्न उठे थे। 

विदेशी हस्तक्षेप की बातें भारत के अलावा दूसरे देशों और नेताओं द्वारा भी कहा जा रहा है। विश्व के अनेक देशों की चुनावी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने में विदेशी शक्तियों और संस्थाओं की भूमिका सामने आती रही हैं। माइक्रोसाफ्ट ने डीपफेक और एआई के माध्यम से भारतीय चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशों पर चेतावनी दिया था। 2018 में अमेरिकी सीनेट ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि 2016 में डोनाल्ड ट्रंप को जितवाने के लिए रूसी खुफिया एजेंटों ने फेसबुक विज्ञापनों के साथ कई तरीके से चुनावों को प्रभावित किया था। कनाडा और आस्ट्रेलिया के चुनावों में चीनी फंडिंग से चलने वाले अभियानों की भूमिका सामने आई। आस्ट्रेलिया में राजनीतिक संप्रभुता पर विदेशी हस्तक्षेप के प्रभाव पर व्यापक चर्चा हो रही है और इसे ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किए गए हैं। 

सेबेस्टियन व्हाइटमैन की किताब 'द डिजिटल डिवाइड इन डेमोक्रेसी' में कहा गया है कि माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपनी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी थी कि चीनी सरकार के समर्थन से चीन की साइबर आर्मी आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों, दक्षिण कोरिया और भारत के चुनावों को प्रभावित कर सकती है। हांगकांग यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ पॉलिटिक्स एंड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में सहायक प्रोफेसर डोव एच लेविन ने 2020 में अपनी किताब किताब 'मेडलिंग इन द बैलेट बॉक्स: द कॉजेज एंड इफेक्ट्स ऑफ पार्टिजन इलेक्टोरल इंटरवेंशन' में लिखा है कि 1946 से वर्ष 2000 के दौरान 938 चुनावों का परीक्षण किया गया। इनमें से 81 चुनावों में अमेरिका, जबकि 36 चुनावों में रूस ने हस्तक्षेप किया। इस तरह 938 में से 117 यानी हर 9 चुनाव में से 1 चुनाव में दोनो की भूमिका रही है। वैराइटीज ऑफ डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट, स्वीडन द्वारा 2019 में प्रकाशित जर्मन राजनीति विज्ञानी अन्ना लुहरमैन के अध्ययन के अनुसार हर देश ने कहा है कि मुख्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर झूठ फैलाये गये और चीन और रूस सबसे ज्यादा झूठ फैलाने वाले देश थे।  संभव नहीं कि चीन और रूस ऐसा करें और अमेरिका इससे वंचित हो। 

भारत पर विस्तृत अध्ययन नहीं आया, किंतु 2019 के चुनाव में ज्यादातर देशों ने स्वीकार किया कि झूठ और अफवाह फैला कर चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।  2024 के चुनाव में हमने देखा कि संविधान खत्म हो जाएगा, आरक्षण खत्म हो जाएगा जैसे झूठ ने भूमिका अदा की। इसमें सोशल मीडिया, मुख्य मीडिया,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पूरी भूमिका थी। दलितों और जनजातियों के बीच लोगों का समूह जाकर का प्रचार करता था। इसलिए इन बातों की ठीक प्रकार से जांच हो। जांच रिपोर्ट में अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे राष्ट्रीय हित प्रभावित होते हों तो भले उन्हें सार्वजनिक न किया जाए किंतु भविष्य में ऐसी खतरनाक भूमिकाओं को रोकने के कदम उठाए जाने चाहिए।

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कम्पलेक्स, दिल्ली- 110092, मोबाइल 9811027208

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