शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2025

22, 23 व 26 फरवरी को अवकाश के दिनों में खुला रहेगा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड कार्यालय

संवाददाता

भिवानी हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की सैकेण्डरी/सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक व मुक्त विद्यालय) की वार्षिक परीक्षाएं 27 फरवरी, 2025 से आरम्भ हो रही हैं। सभी पात्र परीक्षार्थियों के अनुक्रमांक 18 फरवरी, 2025 से बोर्ड की वेबसाइट www.bseh.org.in पर जारी कर दिए गए हैं।

इस आशय की जानकारी देते हुए बोर्ड सचिव अजय चोपड़ा, ह.प्र.से. ने बताया कि जिन परीक्षार्थियों के प्रवेश-पत्र के विवरणों में शुद्धि करवाई जानी है तथा जिन विद्यालयों/परीक्षार्थियों के अनुक्रमांक किसी कारणवश रोके गये हैं, ऐसे परीक्षार्थी/विद्यालय मुखिया 22, 23 व 26 फरवरी, 2025 को अवकाश के दिनों में भी बोर्ड कार्यालय में सम्बन्धित शाखाओं में मूल रिकार्ड व सत्यापित प्रति सहित उपस्थित होकर निर्धारित शुल्क जमा करवाते हुए विवरणों में शुद्धि करवा सकते हैं।  

इसके अतिरिक्त सूचित किया जाता है कि परीक्षाएं आरम्भ होने उपरान्त फोटो व हस्ताक्षर सम्बन्धी शुद्धियां नहीं की जाएंगी। इन दिनों में बोर्ड कार्यालय की सैकेण्डरी/सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक व मुक्त विद्यालय) शाखाएं प्रात: 10:00 बजे से सांय 04:00 बजे तक खुली रहेंगी। ऐसे परीक्षार्थी एवं विद्यालय सम्बन्धित दस्तावेज लेकर बोर्ड कार्यालय में व्यक्तिगत तौर पर आ सकते हैं।

बुधवार, 19 फ़रवरी 2025

03 मार्च से आरम्भ होंगी डी.एल.एड.(रि-अपीयर/मर्सी चांस) परीक्षा

संवाददाता

भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित करवाई जाने वाली डी.एल.एड. रि-अपीयर/मर्सी चांस परीक्षा मार्च-2025 के प्रवेश-पत्र आज से लाईव कर दिए गए हैं। सभी संस्थान/कॉलेज के प्राचार्य/मुखिया संस्था की लॉग-इन आई0डी0 से तिथि-पत्र अनुसार पात्र छात्र-अध्यापकों के प्रवेश-पत्र डाउनलोड करना सुनिश्चित करें। डी.एल.एड. प्रवेश वर्ष 2020-2022, 2021-2023 के छात्र-अध्यापकों की मर्सी चांस एवं  प्रवेश-वर्ष 2022-2024 प्रथम व द्वितीय वर्ष (रि-अपीयर) व प्रवेश-वर्ष 2023-2025 प्रथम वर्ष (रि-अपीयर) पात्र छात्र-अध्यापकों की परीक्षाएं 03 मार्च, 2025 से आरम्भ हो रही हैं। इस परीक्षा में करीब 5070 छात्र-अध्यापक प्रविष्ट होंगे।

इस आशय की विस्तृत जानकारी देते हुए बोर्ड सचिव अजय चोपड़ा, ह.प्र.से. ने बताया कि सभी छात्र-अध्यापकों के प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट www.bseh.org.in पर दिए गए लिंक से सम्बन्धित संस्था अपना यूजर आई0डी0 पासवर्ड प्रयोग कर डाउनलोड कर सकते हैं। सम्बन्धित छात्र-अध्यापक अपने प्रवेश-पत्र बारे संस्था से सम्पर्क करें।

उन्होंने बताया कि छात्र-अध्यापक प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) पर दर्शाए गए महत्वपूर्ण निर्देशों को ध्यान से पढक़र/समझकर उनकी पालना करना सुनिश्चित करें। सभी छात्र-अध्यापक को अपने आधार कार्ड/फोटो आई.डी. में अपने विवरणों को अपडेट करना आवश्यक होगा। बिना अपडेशन परीक्षार्थी को परीक्षा केन्द्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

उन्होंने आगे बताया कि डी.एल.एड. शिक्षण संस्थान/कॉलेज के प्राचार्य/मुखिया इस बात के लिए पूर्ण रूप से उत्तरदायी होंगे कि ऐसे सभी छात्र-अध्यापक जो निर्धारित नियम/विनियम अनुसार परीक्षा हेतु योग्य/पात्र नहीं हैं, उनके अनुक्रमांक जारी न किए जाएं तथा उनके अनुक्रमांक रिपोर्ट सहित बोर्ड कार्यालय को परीक्षा आरम्भ होने से पूर्व बोर्ड कार्यालय को वापिस भेजे जाने हैं।

उन्होंने बताया कि डी.एल.एड. (रि-अपीयर/मर्सी चांस) परीक्षा फरवरी/मार्च-2025 से सम्बन्धित बाह्य प्रायोगिक परीक्षाएं सम्बन्धित जिले की डाइट एवं आन्तरिक प्रायोगिक परीक्षा सम्बन्धित शिक्षण संस्थानों में संचालित करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी शिक्षण संस्थाएं आंतरिक एवं बाह्य प्रायोगिक मूल्यांकन व SIP के अंक ऑनलाइन 27 मार्च से 04 अप्रैल, 2025 तक बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.bseh.org.in पर दिए गए लिंक से भर सकते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि अंतिम तिथि उपरांत आंतरिक प्रायोगिक मूल्यांकन की अंक सूचियां 500/-रूपये प्रति छात्र-अध्यापक या अधिकतम 5000/-रूपये प्रति शिक्षण संस्थान जुर्माने के साथ ही स्वीकार की जाएंगी। किसी शिक्षण संस्थान को निर्धारित तिथि तक आन्तरिक एवं बाह्य प्रायोगिक मूल्यांकन व एसआईपी के अंक भरने में तकनीकी कारणों से कठिनाई आती है तो इसके निवारण हेतु ई-मेल dledexam2017@gmail.com व दूरभाष नम्बर 01664-254300 पर सम्पर्क कर सकते है।

उन्होंने बताया कि ऐसे परीक्षार्थी जो Visually Impaired, Dyslexic and Spastic, Deaf & Dumb, Permanently Disabled for writing with their own hands श्रेणियों के अन्तर्गत आते हैं तथा जिनकी अशक्तता 40 प्रतिशत या इससे अधिक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (C.M.O.) द्वारा चिकित्सा प्रमाण-पत्र में प्रमाणित की गई है, व लिखने में असमर्थ है तथा लेखक की सुविधा लेना चाहते हैं, तो कॉलेज/शिक्षण संस्थान के प्राचार्य/प्रतिनिधि द्वारा दिव्यांग छात्र-अध्यापक के लिए लेखक के मूल एवं सत्यापित दस्तावेजों/प्रलेखों जैसे शैक्षणिक योग्यता, जन्म प्रमाण-पत्र, दो नवीनतम फोटो ( एक सत्यापित), फोटो आई०डी० जैसे-आधार कार्ड, पत्राचार व स्थाई पता सहित परीक्षा से 02 दिन पूर्व लेखक की स्वीकृति परीक्षा केन्द्र अधीक्षक से लेना अनिवार्य है। जिस व्यक्ति की लेखक के रूप में मांग की गई है, की आयु परीक्षा में प्रविष्ट होने वाले परीक्षार्थी से कम हो एवं शैक्षणिक योग्यता वरिष्ठ माध्यमिक से अधिक न हो।

कश्मीरी पंडितों को उनके घर वापसी के बगैर हिंदू राष्ट्र की बात करना बेमानी

बसंत कुमार

आज कल पूरे भारत में प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ की चर्चा जोरों पर है कहा जाता है कि अब तक 50 करोड़ से अधिक लोग संगम में स्नान कर चुके है और मौनी अमावस्या के स्नान के दिन भारी भीड़ के बीच अफरा-तफरी के बीच सैकड़ों लोगों की मौत और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 18 लोगों की मौत के बावजूद महाकुंभ में जाने वालों की भीड़ में कमी नहीं आ रही है। आम आदमी से लेकर नेता, अभिनेता, उद्योगपति सभी संगम में आस्था की डुबकी लगाना चाहते हैं पर इसी बीच में कुछ स्वयंभू सनातन के पोषक रह रहकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मंशा की घोषणा कर देते हैं। उनकी यह मांग अयोध्या में भगवान राम के भव्य मन्दिर के निर्माण के बाद से ही शुरू हो गई थी, यहां तक की प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान संतों की धार्मिक संसद में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया था।

महाकुंभ प्रारंभ होने पर विभिन्न अखाड़ों की जिद पर कुंभ परिसर में अन्य धर्म (विशेष रूप से मुसलमानों) के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी और रेहड़ी-पटरी सहित सभी दुकानों पर दुकानदारों को अपनी नाम की प्लेट लगाना अनिवार्य कर दिया था जिससे तीर्थ यात्री किसी मुसलमान या किसी छोटी जाति (अछूत) से खाने-पीने का सामान न खरीद सकें। इसी प्रकार के आदेश कुंभ से पूर्व हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के समय दिए गए थे और यह आदेश हिंदू राष्ट्र का समर्थन करनी वाली सरकारों ने दिया था। ये लोग ये कैसे भूल गए कि बाबा बर्फानी प्रसिद्ध अमरनाथ गुफा एक मुसलमान चरवाहे ने देखी थी और आज भी वहां के मुसलमान अमरनाथ यात्रियों की सेवा व सहायता करते हैं और उसी प्रकार मां वैष्णो देवी की यात्रा पर गए यात्रियों को पिट्ठू और समान ढोने का काम मुसलमान करते हैं पर इन नए पाखंडियों के कारण हिंदुओं और मुसलमानों का एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होना बंद हो गया है। मैंने अपने दो दशक के राजनैतिक और सामाजिक जीवन में अनेक राजनेताओं और सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों के यहां होली दिवाली और ईद मनाई है और सबसे अच्छी होली पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और सबसे अच्छी ईद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार जी के यहां मनाई जाती है। पर विगत कुछ वर्षो में ऐसी रुढिवादिता क्यों?

दो दिन पूर्व मुझे इंद्रेश कुमार जी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रम में सम्मिलित होने का अवसर मिला, उस कार्यक्रम में हिंदू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध धर्म मानने वाले तिब्बती भी मिले और सब ने बड़े उत्साह से इंद्रेश कुमार जी का जन्मदिन मनाया, वहां मुझे यह अनुभव हुआ कि यहां आने वाले न हिंदू हैं, न मुसलमान हैं, न सिक्ख हैं, न सवर्ण हैं और न दलित हैं बल्कि ये वे लोग हैं जो भारत से बेइंतहा मुहब्बत करते हैं। इनका धर्म और ईमान हिंदुस्तान से मुहब्बत है फिर वो कौन लोग हैं जो हिंदू राष्ट्र के नाम पर देश और समाज की बांट रहे हैं।

कुछ वर्ष पूर्व मैंने प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खां का एक इंटरव्यू देखा था जिसमें उन्होंने बनारस की संस्कृति और गंगा की भूरि-भूरि प्रसंशा की थी। उनके पूरे इंटरव्यू में कहीं हिंदू या मुसलमान होने की झलक नहीं दिखी बस दिखी तो हिंदुस्तनियत ही दिखी। जैसा हम सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की ओर से अजमेर शरीफ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर मुख्तार अब्बास नकवी चादर चढ़ाने जाया करते थे और संघ के वरिष्ठ प्रचारक कई बार हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर दिया जलाने जाया करते है और वे राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संरक्षक भी हैं फिर ऐसा क्या है कि हिंदुओं के धार्मिक त्योहारों पर मुसलमानो का क्यों? भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति में सभी धर्मों व जातियों का समावेसित किया जाता रहा है पर आज हम हिंदू राष्ट्र की आड़ में हिंदू-मुसलमान करके लड़ रहे है।

हिंदू राष्ट्र का राग अलापने वाले सनातनी संस्कृति के झंडा बरदारों को हिंदुओं के धार्मिक त्योहारों विशेषकर महाकुंभ और कांवड़ के दौरान मुसलमानों का प्रवेश रोकने के बजाय तिरस्कृत हिंदुओं को सनातन की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करना चाहिए और ये सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी को भी उसकी जाति के आधार पर मन्दिर में जाने से न रोका जाए और दलित दूल्हे को अपनी बारात में घोड़ी पर चढ़ने से न रोका जाए। इसके साथ ही हर सनातनी का कर्तव्य बनता है कि वर्ष 1990 में आतंकवादियों की धमकी से डर कर हजारों कश्मीरी पंडितों को घर छोड़कर भागना पड़ा था और आज भी विस्थापितों की तरह जिंदगी जी रहे हैं। वर्ष 2019 में संविधान में विवादित अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया गया और कश्मीर शेष भारत से जुड़ गया है पर आज भी इन कश्मीरी पंडितों को उनके घरों में नहीं बसाया जा सका और हिंदू राष्ट्र का राग अलापने वाले लोग इन कश्मीरी पंडितों को अपने घर वापस लाने के बजाय अन्य नकारात्मक कामों में लगे है।

जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ राजनेता व पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने यह बात स्वीकार की कि "भारत में मुसलमान नहीं थे, हिंदुओं के धर्म बदलकर मुसलमान बनाए गए। 600 साल पहले कश्मीर में मुसलमान नहीं थे यहां भी पंडितों का धर्म बदला गया" जब गुलाम नबी आजाद के स्तर का बड़ा नेता जो स्वयं मुसलमान है और यह स्वीकार करते हैं कि कश्मीर में मूल रूप से कश्मीरी पंडित और अन्य हिंदू रहते थे तो फिर यहां से पलायन करने के लिए मजबूर कश्मीरी पंडितों को वापस क्यों नहीं बसाया जा रहा जबकि पिछले एक दशक से केंद्र में राष्ट्रवादी विचारधारा वाली सरकार सत्ता में है। पर आज भी पाकिस्तानी कश्मीर के लोगों को आजाद कश्मीर का सपना नहीं दिखाते और इसी भय से कश्मीरी पंडित घर वापसी का साहस नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार को दोष दिया जाए पर असली नुकसान तो कश्मीरी पंडितों का है जो 35 वर्षों से निर्वासित जीवन जी रहे हैं।

यह सही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दृढ़ संकल्प से आजादी के सात दशक बाद संविधान के विवादित अनुच्छेद 370 और 35 समाप्त कर दिया गया है फिर भी कश्मीरी पंडितों की घर वापसी नहीं हो पा रही है फिर हम कैसे हिंदू राष्ट्र का सपना देख सकते हैं। इसलिए कुछ कट्टर हिंदुओं का ऐसे हालत में हिंदू राष्ट्र का राग अलापना बेमानी होगी।

(लेखक एक पहल एनजीओ के राष्ट्रीय महासचिव और भारत सरकार के पूर्व उपसचिव है।)

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2025

महाकुंभ : आयोजन का श्रेय बनाम कुप्रबंधन की ज़िम्मेदारी

निर्मल रानी

 भारतवर्ष में आयोजित होने वाले सबसे विशाल एवं विराट धार्मिक समागम को 'कुंभ मेला' के नाम से जाना जाता है। यह आयोजन प्रयाग व  हरिद्वार में पवित्र गंगा नदी के तट पर, उज्जैन में शिप्रा नदी तथा नासिक में गोदावरी नदी के किनारे किया जाता है। देश दुनिया से आने वाले लाखों श्रद्धालु इन पवित्र नदियों में पौष पूर्णिमा व मकर संक्रान्ति जैसे पावन अवसरों पर स्नान करते हैं। यदि हम आयोजन स्थल की बात करें तो वार्षिक माघ मेला हो या 6 वर्षों के अंतराल में पड़ने वाले अर्ध कुंभ या फिर 12 वर्षों के अंतराल में आयोजित होने वाले पूर्ण कुंभ,सभी आयोजनों के लिये सबसे उपयुक्त, खुला व विशाल स्थान प्रयागराज ही है। यहाँ गंगा-यमुना तथा संगम के दोनों किनारों पर कई किलोमीटर लंबे खुले स्थान हैं जहाँ लाखों श्रद्धालु एक ही समय में सुगमता पूर्वक रुक सकते हैं स्नान कर सकते हैं। परन्तु इस बार सरकार द्वारा इस आयोजन को 'महाकुंभ' के रूप में प्रचारित किया गया तथा यह भी बताया गया कि यह 144 वर्षों बाद आयोजित होने वाला 'महाकुंभ ' है। हालांकि इस दावे पर उँगलियाँ उठ रही हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जैसे संत 144 वर्ष बाद के दावे पर यह कहते हुये सवाल उठा रहे हैं कि इससे पहले 2013 व 2001 के कुंभ को भी 144 वर्ष बाद पड़ने वाला महाकुंभ बताया गया था।

इसके अतिरिक्त इस बार का आयोजन जहाँ श्रद्धालुओं का करोड़ों की संख्या में मेले में आवागमन, विदेशी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में शिरकत , विशिष्ट व्यक्तियों की उपस्थिति,आधुनिकता,उच्चस्तरीय हाई टेक ठहरने की व्यवस्था जैसी अनेक बातों को लेकर चर्चा में रहा वहीं पहली बार यह देखा गया कि स्वयं मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी द्वारा राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री सहित देश के तमाम विशिष्ट जनों को महाकुंभ में आने का न्योता दिया गया। हालाँकि मुख्यमंत्री द्वारा व्यक्तिगत तौर पर लोगों को निमंत्रण देने की कई जगह आलोचना भी हुई। कुछ लोगों का कहना था कि यह धार्मिक आयोजन है इस पर सभी का अधिकार है इसलिये आयोजक के रूप में न्योता देने का कोई अर्थ नहीं है। परन्तु राजनीति के वर्तमान दौर में जबकि बिना कुछ किये ही राजनेता श्रेय लेने को आतुर रहते हैं ऐसे में इतने बड़े आयोजन की भव्यता दिव्यता व सफलता का श्रेय डबल इंजन की सरकारें न लें यह आख़िर कैसे हो सकता है।

इस महाकुंभ के व्यापक प्रचार प्रसार की ग़रज़ से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' के 117वें एपिसोड में 'महाकुंभ-2025' की विस्तृत चर्चा की गयी। प्रधानमंत्री ने  'मन की बात' में बताया था कि किस तरह संगम तट पर मेले की ज़ोरदार तैयारियां चल रही हैं । साथ ही उन्होंने मेले से पूर्व हेलीकाप्टर से पूरा कुम्भ क्षेत्र देखने के अनुभव को साँझा करते हुये कहा कि- 'इतना विशाल, इतना सुन्दर, इतनी भव्यता'। मोदी ने कहा कि अगर कम शब्दों में कहें तो 'महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश' और दूसरे तरीक़े से कहूंगा 'गंगा की अविरल धारा, न बंटे समाज हमारा'। और इसी अपील के साथ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल अपने देश बल्कि पूरे विश्व के श्रद्धालुओं को भी  महाकुंभ में आमंत्रित किया। स्वयं मुख्यमंत्री योगी ने दिसंबर माह में 4 बार महाकुंभ का निरीक्षण किया। इसमें भी कोई संदेह नहीं कि 2019 में आयोजित हुये कुंभ मेले की तुलना  में इस बार पूरे महाकुंभ मेला क्षेत्र में लगभग प्रत्येक जनोपयोगी सुविधाओं में व्यापक विस्तार किया गया। ज़ाहिर है भारतीय मीडिया भी काफ़ी पहले से महाकुंभ आयोजन का दिन रात प्रचार कर रहा था। सरकार द्वारा टी वी,समाचारपत्र-पत्रकाओं सहित लगभग सभी प्रचार माध्यमों में सैकड़ों करोड़ के विज्ञापन दिए गये थे। हद तो यह है कि बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र शास्त्री सरीखे नाममात्र प्रवचन कर्ताओं द्वारा यह तक कह दिया गया था कि इस महाकुंभ में स्नान न करने वाला देशद्रोही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये सरकार द्वारा हज़ारों की संख्या में विशेष रेलगाड़ियां,बसें,विमान आदि भी चलाये गये। इस तरह के व्यापक प्रचार प्रसार तथा धार्मिक आस्था के घालमेल में करोड़ों लोगों का प्रयागराज में इकठ्ठा होना तो स्वभाविक था ही। 

परन्तु दुर्भाग्यवश इतना विशाल आयोजन प्रयागराज से लेकर दिल्ली तक कुप्रबंधन का शिकार रहा। मेला क्षेत्र में 30 दिन के अंदर अलग अलग क्षेत्रों में पांच बार तो आगज़नी की घटनायें घटीं। जबकि पूरे मेला क्षेत्र में 350 से ज़्यादा फ़ायर ब्रिगेड, 2000 से अधिक प्रशिक्षित अग्निशामक , 50 अग्निशमन केंद्र और 20 फ़ायर पोस्ट बनाए गए थे साथ ही अखाड़ों और टेंट में अग्नि सुरक्षा उपकरण भी लगाए गए थे। उसके बावजूद यह हादसे पेश आये ? इसी तरह कुंभ मेला क्षेत्र में अनेक बार भगदड़ मची। जिसमें दर्जनों लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। अभी भी कई लोगों को अपने खोये परिजनों की तलाश है। 

पूरा शहर कई दिनों तक जाम की चपेट में रहा। यहाँ तक कि वी आई पी पास निरस्त करने पड़े और प्रयागराज को 'नो वेहिकिल ज़ोन' तक घोषित करना पड़ा। और आख़िरकार श्रद्धालुओं के इस सैलाब ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी भगदड़ का रूप ले लिया। यहाँ भी 14 महिलाओं व 4 पुरुषों की मौत हो गयी। महाकुंभ में न आने वालों को देशद्रोही बताने वाले बागेश्वर के पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने भगदड़ में मरने वालों को लेकर यह विवादित बयान दे दिया कि -'जो कोई गंगा किनारे मरेगा वह मरेगा नहीं बल्कि मोक्ष प्राप्त करेगा'। इसतरह सरकार को ख़ुश करने के लिये अनेक साधु संतों द्वारा तरह तरह की भ्रामक बातें की गयीं जबकि इन हादसों के लिये सरकार के कुप्रबंधन को ज़िम्मेदार ठहराने वालों को सनातन विरोधी,हिन्दू विरोधी,कांग्रेसी,नकारात्मक सोच रखने वाला कहा जाने लगा। हद तो यह है कि भगदड़ पर सवाल उठाने वाले शंकराचार्य के विरोध में तो सारा संत समाज ही इकठ्ठा हो गया ? शंकराचार्य ने भगदड़ में मृतकों के प्रति हमदर्दी व सरकार की लापरवाही पर ऊँगली क्या उठा दी कि उनके पद को ही चुनौती दी जाने लगी ? 

ऐसे में यह सवाल उठना तो लाज़िमी है कि जब राज्य से लेकर केंद्र सरकार के मुखिया तक महाकुंभ के आयोजन की चर्चा कर रहे हों,लोगों को स्वयं व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित कर रहे हों। '144 वर्ष बाद हो रहे आयोजन का' अप्रमाणित हौव्वा खड़ा किया गया हो,अतिथियों के लिये प्रोटोकाल के अनुसार मंत्री स्तर के लोग उन्हें स्नान कराने के लिये तैनात हों,टी वी अख़बार महाकुंभ के गुणगान व प्रचार से पटे पड़े हों, ऐसे में भारत जैसे विशाल एवं धर्म प्रधान देश में करोड़ों लोगों का पहुंचना तो स्वभाविक ही था। इसमें भी कोई शक नहीं कि इसबार का आयोजन पिछले कुंभ आयोजन की तुलना में अधिक भव्य रहा। परन्तु सवाल यह भी है कि कि चाहे वह सरकार हो या राजनेता,जो भी इस महाआयोजन का श्रेय लेगा निश्चित रूप से इस मेले में हुये कुप्रबंधन तथा असामयिक मौतों की ज़िम्मेदारी भी उसी को लेनी पड़ेगी।

सैकेण्डरी/सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) के एडमिट कार्ड लाइव

संवाददाता

भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा सैकेण्डरी व सीनियर सैकेण्डरी  (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) नियमित/स्वयंपाठी वार्षिक परीक्षा फरवरी/मार्च-2025 के लिए प्रवेश-पत्र (एडमिट कार्ड) आज से बोर्ड वेबसाइट www.bseh.org.in पर जारी कर दिए गए हैं। सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) नियमित/स्वयंपाठी की वार्षिक परीक्षाएं 28 फरवरी से 19 मार्च तक तथा सीनियर सैकेण्डरी की परीक्षाएं 27 फरवरी से 29 मार्च, 2025 तक संचालित करवाई जाएगी। इन परीक्षाओं में प्रदेशभर में 1431 परीक्षा केन्द्रों पर करीब 516787 परीक्षार्थी प्रविष्ट होंगे। जिसमें 2,72,421 लडक़े व 2,44,366 लड़कियां शामिल हैं। परीक्षाओं का समय दोपहर 12:30 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा।

इस आशय की जानकारी देते हुए बोर्ड सचिव श्री अजय चोपड़ा, ह.प्र.से. ने आज यहां बताया कि सैकेण्डरी एवं सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक/मुक्त विद्यालय) की वार्षिक परीक्षा फरवरी/मार्च-2025 हेतु प्रवेश-पत्र (एडमिट कार्ड) आज से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर लाईव कर दिए गए हैं। सभी विद्यालय मुखिया बोर्ड वेबसाइट www.bseh.org.in पर अपने यूजर आई.डी. व पासवर्ड से लॉगिन करके आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए विद्यालय में अध्ययनरत परीक्षार्थियों के प्रवेश-पत्र का रंगीन प्रिंट आऊट ए-4 साईज पेपर पर डाउनलोड करना सुनिश्चित करें। यदि विवरणों में कोई त्रुटि है तो तुरंत बोर्ड कार्यालय में सम्पर्क करते हुए शुद्धि से सम्बन्धित मूल दस्तावेज एवं वांछित शुद्धि शुल्क सहित बोर्ड कार्यालय में उपस्थित होकर शुद्धि करवा सकते हैं। सभी परीक्षार्थी प्रवेश पत्र पर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त स्वयंपाठी परीक्षार्थी जिन द्वारा कम्पार्टमैंट(E.I.O.P.), अंक सुधार, अतिरिक्त विषय एवं पूर्ण विषय की परीक्षा दी जानी है वे अपना प्रवेश-पत्र बोर्ड वेबसाइट पर दिये गये लिंक से पिछला अनुक्रमांक/नाम, पिता का नाम, माता का नाम भरते हुए प्रवेश पत्र का रंगीन प्रिंट आऊट ए-4 साईज पेपर पर डाउनलोड कर सकते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि मुक्त विद्यालय परीक्षा (फै्रश, रि-अपीयर, सी.टी.पी., ओ.सी.टी.पी., मर्सी चांस, पूर्ण विषय अंक सुधार व आंशिक अंक सुधार श्रेणी) के लिए परीक्षार्थी अपना पिछला अनुक्रमांक/नाम, पिता का नाम, माता का नाम /रजिस्ट्रेशन नं0 भरते हुए प्रवेश पत्र का रंगीन प्रिंट आऊट ए-4 साईज पेपर डाउनलोड करें। यदि विवरणों में कोई अशुद्धि है तो शुद्धि हेतु परीक्षार्थी 24 फरवरी, 2025 तक मूल दस्तावेजों व शुद्धि शुल्क सहित बोर्ड कार्यालय में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर शुद्धि करवा सकते हैं। परीक्षा समाप्ति उपरांत फोटो व हस्ताक्षर में परिवर्तन की अनुमति किसी भी परीक्षार्थी को नहीं होगी। यदि किसी विद्यालय/स्वयंपाठी या मुक्त विद्यालय परीक्षार्थी का अनुक्रमांक किसी कारण से रोका गया है तो ऐसे विद्यालय/परीक्षार्थी बोर्ड कार्यालय में किसी भी कार्यदिवस में व्यक्तिगत तौर पर वांछित साक्ष्यों/दस्तावेज सहित उपस्थित होकर अपना प्रवेश-पत्र जारी करवा सकते है।

सैकेण्डरी/सीनियर सैकेण्डरी (शैक्षिक) छात्र संख्या - उन्होंने बताया कि फरवरी/मार्च-2025 में संचालित होने वाली परीक्षा में 475620 परीक्षार्थी प्रविष्ट होंगे। जिसमें सैकेण्डरी कक्षा के 277460 तथा सीनियर सैकेण्डरी के 198160 परीक्षार्थी शामिल हैं।

सैकेण्डरी/सीनियर सैकेण्डरी (मुक्त विद्यालय) छात्र संख्या - उन्होंने आगे बताया कि मुक्त विद्यालय परीक्षा में प्रदेशभर में करीब 41167 परीक्षार्थी प्रविष्ट होंगे। जिसमें सैकेण्डरी (मुक्त विद्यालय) कक्षा के 15935 परीक्षार्थी तथा सीनियर सैकेण्डरी (मुक्त विद्यालय) के 25232 परीक्षार्थी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की कठिनाई आने पर बोर्ड वेबसाइट पर जारी हैल्पलाइन नं० 01664-254309, सैकेण्डरी शाखा की ई-मेल assec@bseh.org.in सीनियर सैकेण्डरी शाखा की  ई-मेल assrs@bseh.org.in व adhos@bseh.org.in पर तुरन्त सम्पर्क करते हुए समाधान करवाना सुनिश्चित करें।

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