शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2025

परीक्षा में नकल रोकने के संबंध में गूगल मीट के माध्यम से सीधा संवाद किया

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा सत्र 2024-25 की परीक्षाओं को नकल रहित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर नकल उन्मूलन अभियान के दूसरे चरण में बोर्ड सचिव श्री अजय चोपड़ा प्रदेशभर के 1500 स्कूलों में प्राचार्यों, मुख्य अध्यापकों तथा छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, एस.एम.सी सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों से गूगल मीट के माध्यम से सीधा संवाद करते हुए।

संवाददाता

भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा सत्र 2024-25 की परीक्षाओं को नकल रहित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर नकल उन्मूलन अभियान के दूसरे चरण में आज बोर्ड सचिव श्री अजय चोपड़ा ने प्रदेशभर के 1500 स्कूलों में प्राचार्यों, मुख्य अध्यापकों तथा छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, एस.एम.सी सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों से गूगल मीट के माध्यम से सीधा संवाद किया। संवाद करने से पूर्व बोर्ड सचिव ने राजकीय उच्च विद्यालय ढाणा नरसान के कार्यवाहक मुख्य अध्यापक समाजशास्त्र प्रवक्ता सुरजीत शर्मा द्वारा नकल उन्मूलन के लिए छात्रों को प्रेरित करने वाली वीडियो का विमोचन किया और सभी स्कूल मुखिया से अपील करते हुए कहा कि वीडियो बहुत प्रेरक है और अपने-अपने माध्यम से इसका अधिक से अधिक प्रचार करें तथा सभी छात्र-छात्राओं को वीडियो दिखाया जाए। वीडियो को बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा तथा सभी बोर्ड से संबंधित सोशल मीडिया ग्रुप में डाला जाएगा। यह वीडियो प्रवक्ता श्री सुरजीत शर्मा द्वारा नकल उन्मूलन अभियान के तहत शिक्षा बोर्ड को भेंट किया है ताकि छात्र-छात्राएं इस वीडियो से प्रेरित होकर नकल जैसी बुराई से दूर रहे। सचिव ने संवाद के दौरान नकल के दुष्प्रभाव से सभी को अवगत करवाया और आह्वान किया कि आने वाली परीक्षाएं पूरी तरह से नकल रहित हों।


उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि वर्तमान समय में सरकार ने पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लिए कमर कस रखी है। पिछले 10 वर्षों के दौरान सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता आई है और केवल वही बच्चें सफलता प्राप्त कर रहे हैं जो अपने स्तर पर मेहनत करते हैं और नकल रहित परीक्षा देकर अच्छे अंक प्राप्त कर रहे हैं। हम सभी का पहला उद्देश्य नकल रहित परीक्षा होना चाहिए क्योंकि नकल मानसिक विकास को अवरूध कर देती हैं और विद्यार्थी आत्मनिर्भर होने की बजाय नकल पर निर्भर हो जाता है, पूरे शिक्षक समाज का यह कर्तव्य बनता है कि हम इस बुराई को जड़ से मिटाएं और छात्रों को नकल के दुष्प्रभाव के बारे में अवगत करवाएं इसके लिए सामाजिक संस्थाओं का सहयोग अति आवश्यक है। विद्यालय स्तर पर पंचायत, एसएमसी सदस्यों, अभिभावकों का पूर्ण सहयोग लेकर उन्हें नकल के प्रभाव से अवगत कराया जाए और परीक्षा के दौरान नकल उन्मूलन में उनकी पूरी सहायता ली जाए।

उन्होंने विद्यालय मुखियाओं को निर्देश दिए कि परीक्षा केन्द्रों पर सीसीटीवी कैमरों का प्रबंध किया जाए, साथ ही प्री-बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह नकल रहित बनाया जाए ताकि आने वाली परीक्षाओं के लिए विद्यार्थी पहले से ही तैयार हो पाएं। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने नकल रोकने के लिए पहले से ही कई प्रशासनिक सुधार किए हैं जिसमें हमें सफलता भी प्राप्त हुई है परंतु नकल एक ऐसी बुराई है जिसे विद्यार्थी में नैतिक मूल्यों का विकास कर आसानी से खत्म किया जा सकता है इसके लिए भी अध्यापक अपने स्तर पर प्रयास करें। बोर्ड सचिव ने नकल उन्मूलन के अलावा नशा मुक्त विद्यालय और नशा मुक्ति विद्यार्थी अभियान पर भी जोर दिया। उन्होंने अपने संवाद के दौरान अध्यापकों को इस बारे में दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा कि बोर्ड का उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है और सामाजिक बुराई के रूप में नशे जैसी बुराई को हम गंभीरता से ले रहे हैं। स्कूल मुखिया और अध्यापक इस बात का ध्यान रखें कि आपके आसपास धूम्रपान करने वाला कोई ना हो साथ ही समय-समय पर विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभाव से भी अवगत करवाते रहें। अभिभावक मीटिंगों के दौरान इस विषय को गंभीरता से लें और अध्यापक अपना अमूल्य योगदान नशे जैसी बुराई को मिटाने में दें।


फिर से आ रहा है करण… अखाड़ा सीजन 2

- सीजन वन की कामयाबी के बाद “अखाड़ा फिर से सज रहा है”…

- मौत को मात देकर जिंदगी के अखाड़े में फिर से उतरेगा “करण” 

- अपनी दमदार कहानी और मजबूत किरदारों के चलते लोगों को काफी पसंद आई थी अखाड़ा वेब सीरीज़

- ताकत, राजनीति, वफादारी और अस्तित्व को बचाने की जंग के साथ क्राइम थ्रिलर है अखाड़ा…  फिर से 

- अखाड़ा के पहले सीजन को मिली थी 8.7 रेटिंग, पुराने किरदारों के साथ कुछ नए किरदारों के संगम से इस बार और भी दमदार होगी सीरीज 

- पहले सीजन में अधूरे रहे जवाबों को पूरा करेगी अखाड़ा-2, संदीप गोयत और मेघना ने अपने किरदारों से सभी को किया है प्रभावित 

- 25 फरवरी से स्टेज ओटीटी पर हरियाणवी, राजस्थानी और भोजपुरी बोलियों में रिलीज़ होगी वेब सीरीज़ 

संवाददाता

पहले सीजन की शानदार कामयाबी के अखाड़ा फिर से सजने जा रहा है।पहले सीजन के अंत में जहां करण को गोली लग गई थी, वहीं अब मौत को मत देकर जिंदगी के अखाड़े में फिर से उतर रहा है करण। अखाड़ा का सीजन वन दो साल पहले स्टेज एप पर आया था और लोगों ने इसे काफी पसंद किया था। अब अखाड़ा फिर से… सीजन 2 स्टेज एप पर 25 फरवरी को रिलीज़ हो रहा है।ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब कोई हरियाणवी वेब सीरीज़ तीन अलग-अलग बोलियों - हरियाणवी, राजस्थानी और भोजपुरी में एक साथ रिलीज़ हो रही है। अखाड़ा का सीजन 2 ताकत, राजनीति, वफादारी और अस्तित्व को बचाने की जंग के साथ क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज़ है। पहले सीजन में अधूरे रहे सवालों के जवाब दूसरे सीजन में मिलेंगे। पहले सीजन में गरीब परिवार का एक लड़का करण जो पहलवान बनने के सपने देख रहा है वो अखाड़े के अंदर की राजनीति का शिकार हो जाता है। इसका खामियाजा उसके परिवार को भी उठाना पड़ता है, जिसके चलते करण का पहलवान बनने का सपना पीछे छूट जाता है और वह एक गैंगस्टर बनने की दिशा में चल पड़ता है। अब सीजन 2 में पता चलेगा कि करण जिंदा है या मर गया? अगर करण जिंदा है तो क्या वह अपने परिवार का बदला ले पाएगा? क्या करण दोबारा कभी पहलवानी कर पाएगा? क्या करण और मेघना का प्यार सिरे चढ़ पाएगा? 

पहले सीजन को मिली थी शानदार कामयाबी :  स्टेज एप पर 2 साल पहले आए अखाडा के सीजन वन को शानदार कामयाबी मिली थी। न केवल हरियाणा बल्कि आसपास के राज्यों में भी लोगों ने इसकी काफी सराहना की थी। आईएमडीबी पर पहले सीजन को 8.7 की रेटिंग मिली थी। अखाड़ा के लीड किरदार करण की भूमिका निभाने वाले संदीप गोयत को इसके लिए हरियणा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला था। इतना ही नहीं अखाड़ा के सीजन वन को स्टेज एप पर एक करोड़ से भी ज्यादा मिनट देखा गया था। यह वेब सीरीज़ न केवल हरियाणा बल्कि आसपास के राज्यों में भी लोगों को काफी पसंद आई थी। पहले सीजन की कामयाबी को आगे बढ़ाते हुए ही सीजन 2 आ रहा है। 

क्या है सीजन 2 की कहानी :  अखाड़ा के सीजन 2 की कहानी वहीं से शुरू होती है जहां पर पहला सीजन खत्म हुआ था। पहले सीजन के अंत में करण को गोली लग जाती है लेकिन दूसरे सीजन में दिखाया गया है कि जब करण को गोली लगी तो देसी कट्टा बदमाश के हाथ में ही फट गया था। करण गंभीर स्थिति में एक ऑटो ड्राइवर कृष्ण को मिलता है जो उसकी जान बचाता है। बाद में करण, उसकी मां और कृष्ण एक साथ परिवार की तरह रहते हैं। करण शुरू से ही अपने परिवार का बदला लेना चाहता है लेकिन साथ ही चाहता है कि गांव में अखाड़ा फिर से शुरू हो और नए बच्चे पहलवानी करें। करण अपना बदला लेने के लिए आखन का पीछा करता है और वे दोनों अखाड़े में आमने-सामने भी होते हैं। दूसरी तरफ, पूनम जो अब थाने में सब इंस्पेक्टर है वहां एक नया इंस्पेक्टर आ जाता है। करण बार-बार पूनम को कहता है कि उसकी जिंदगी काली हो गई है और उसे किसी दूसरे से शादी करने के लिए कहता है। जिसके बाद पूनम इंस्पेक्टर के साथ शादी करने के लिए तैयार हो जाती है। दूसरे सीजन की कहानी में एएसआई का सस्पेंस से भरा और दमदार किरदार है जो पुलिस को ही धोखा दे रहा होता है। नए सीजन में कुछ नए किरदार भी अपने अभिनय से लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करेंगे। कहानी में एक नेता गरीब परिवार और वहां रहने वाली महिलाओं करता है वह भी अलग और रोचक एंगल दिखाया गया है। कहानी के अंत में पता चलेगा कि बदले के लिए निकला करण बदला ले पाएगा या नहीं। पूनम, करण और इंस्पेक्टर के लव ट्रायंगल का क्या अंजाम रहेगा। 

अक्तूबर-2024 में संचालित हुई डी.एल.एड. परीक्षा का परिणाम कल होगा घोषित

- बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट www.bseh.org.in पर देख सकते हैं परिणाम

भिवानी।  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव श्री अजय चोपड़ा, ह.प्र.से. ने आज यहाँ बताया कि डी.एल.एड. परीक्षा प्रवेश वर्ष-2023-2025 प्रथम वर्ष (नियमित) का परिणाम 08 फरवरी, 2025 को घोषित होगा। सम्बन्धित छात्र-अध्यापक अपना परीक्षा परिणाम बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट www.bseh.org.in पर दिए गए लिंक से देख सकते हैं। इस परीक्षा का संचालन अगस्त/सितम्बर/अक्तूबर-2024 में करवाया गया था।

उन्होंने आगे बताया कि छात्र-अध्यापकों की Performance sheets शिक्षण संस्थाओं की लॉगिन आईडी पर भेजी जाएगी। इस परीक्षा में रि-अपीयर रहे छात्र-अध्यापकों के आगामी परीक्षा फरवरी/मार्च-2025 हेतु आवेदन-पत्र 09 फरवरी से 14 फरवरी, 2025 तक सम्बन्धित संस्था की लॉगिन आईडी के माध्यम से ऑनलाइन भरे जाएगें। सभी सम्बन्धित संस्थाएं निर्धारित तिथियों में ही ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूर्ण करना सुनिश्चित करें, इसके उपरान्त आवेदन का अवसर नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस परीक्षा परिणाम में रि-अपीयर रहे छात्र-अध्यापकों की परीक्षा फरवरी/मार्च-2025 में संचालित करवाई जानी है। रि-अपीयर परीक्षा के लिए शुल्क 800/- रूपये प्रति विषय है, एक से अधिक विषयों में रि-अपीयर है तो परीक्षा शुल्क प्रति विषय 200/- रूपये अतिरिक्त देय होगा व अधिकतम परीक्षा शुल्क 2000/- रूपये प्रति छात्र-अध्यापक होगा। सम्बन्धित शिक्षण संस्थान 09 फरवरी से 14 फरवरी, 2025 तक ऑनलाइन आवेदन करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने आगे बताया कि इस परीक्षा परिणाम के आधार पर जो छात्र-अध्यापक अपनी उत्तरपुस्तिकाओं की पुन: जाँच अथवा पुनर्मूल्यांकन करवाना चाहते हैं तो वे निर्धारित शुल्क सहित परिणाम घोषित होने की तिथि से 20 दिन तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 

गुरुवार, 6 फ़रवरी 2025

पीडीए चर्चा अभियान का उद्देश्य राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादवके संदेश को जन जन तक पहुंचाना है

असलम अल्वी

शाहजहांपुर। समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश में चलाए पीडीए चर्चा अभियान के अंतर्गत जनपद शाहजहांपुर में भी यह अभियान बहुत तेजी के साथ चलाया जा रहा इस दौरान हर जगह प्रतिदिन सैकडो लोग पीडीए परिवार से जुड़ रहे है। चलाए जा रहे अभियान के दसवें दिन आज सपा नेता व ददरौल विधान सभा क्षेत्र से भावी प्रत्याशी ठाकुर लखन प्रताप सिंह उर्फ लखपत द्वारा ददरौल विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत दिलावरपुर में पीडीए चर्चा का कार्यक्रम ग्राम प्रधान नरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में किया गया इस दौरान सपा नेता लखन प्रताप द्वारा पीडीए परिवार में शामिल होने वाले सदस्यों का फूलमालाएं पहना कर स्वागत किया गया।
पीडीए चर्चा के दौरान संबोधित करते हुए सपा नेता लखन प्रताप सिंह ने कहा कि पीडीए चर्चा अभियान का असल मतलब राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश पादव के संदेश को जन जन तक पहुंचाना है उन्होंने ने कहा कि बीजेपी ने लोगो अच्छे दिन के सपने दिखाकर उन्हें ठगने का काम किया है महंगाई भ्रष्टाचार पर न बोलकर इन मुद्दों से ध्यान भटका कर लोगों को हिंदू मुस्लिम मंदिर मस्जिद के मुद्दों में फांस कर उनका ध्यान भटकाने का काम किया जा रहा 15 लाख देने का वायदा सिर्फ जुमलेबाजी साबित हुआ यह सभी को पता है।
इसके अलावा बीजेपी ने सिर्फ लोगों को भ्रमित करने का काम किया आज संविधान खतरे में पड़ गया देश को तोड़ने का काम किया जा रहा महंगाई बेरोजगारी पर बात करने की हिम्मत भी बीजेपी नहीं जुटा पा रही है उन्होंने कहा अखिलेश यादव की नीति देश हित में है वह देश के गरीबों बेरोजगारों के विषय में बात करते और यह बेरोजगारी बढ़ाने का काम कर रहे है उन्होंने सभी से अधिक से अधिक संख्या में लोगों से पीडीए परिवार से जुड़ने की अपील की है।
इस मौके पर नगर उपाध्यक्ष असलम खां,ने अपने विचार रखते हुए कहा की देश में अमन और सुकून रहेगा तो देश तरक्की करेगा।
इस मौके पर नगर उपाध्यक्ष असलम खां, तरीका खां, मोहसिन खान, शरद शर्मा, दीपक दुवेदी, सर्वेश यादव, तहवार जबल किशोर रामसागर वर्मा शिवचरण लाल राजपूत नरेश कुमार प्रधान आकाश यादव, लालन सिंह, पिंकू सिंह, तनवीर सहित ग्रामीण क्षेत्र के कार्यकर्ता और सैकड़ों लोग मौजूद रहे।


शनिवार, 1 फ़रवरी 2025

यमुना में जहर डालने के आरोप की राजनीति डरावनी

अवधेश कुमार

जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि यमुना से हमको वोट नहीं मिलता यह मैं समझ गया हूं तब उन्हें इसका आभास नहीं रहा होगा कि यमुना का पानी भी दिल्ली विधानसभा चुनाव का बड़ा मुद्दा हो सकता है। स्वयं उन्हीं के अकल्पनीय वक्तव्य से दिल्ली में यमुना का पानी इस समय बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है। उन्हें अपने भयावह वक्तव्य के वर्तमान परिणतियों की भी आशंका नहीं रही होगी। भाजपा द्वारा शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने उनसे नोटिस जारी कर विस्तृत विवरण मांगा और उनके उत्तर से स्वाभाविक ही संतुष्ट होने का कोई कारण नहीं था तो फिर दोबारा नोटिस भेजा गया है। इनमें अनेक प्रश्नों का उत्तर उनके लिए देना कठिन है। चुनाव आयोग ने साफ-साफ कहा है कि गोलमोलल जवाब देने की बजाय सीधे-सीधे उत्तर दें अन्यथा उन्हें पता है कि उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई हो सकती है। इसी तरह हरियाणा में भीउनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है। केजरीवाल और उनकी पार्टी चुनाव आयोग भाजपा कांग्रेस को ही कह रही है कि वह अमोनिया वाला पानी पीकर दिखाएं मानो दिल्ली में यमुना पानी की उनकी नहीं , इन सबकी जिम्मेवारी है । निश्चित रूप से उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज हो सकता है। मुकदमे की परिणति जो भी हो उन्होंने जिस तरह की बातें कीं वैसा स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी भी नेता ने नहीं किया। इस आरोप से कि दिल्ली में आने वाले यमुना के पानी में हरियाणा सरकार ने जहर मिला दिया है पूरे देश में सनसनी फैल गई। उन्होंने डिजिटल पेनिट्रेशन और उनके पार्टी ने इसे बायोलॉजिकल वीपन या जैव हथियारों से तुलना करते हुए जल आतंकवाद तक कह दिया।

राजनीति में नेता और पार्टियां एक दूसरे के विरुद्ध आरोप लगाते हैं, नेताओं की आपसी दुश्मनी भी हुई किंतु कभी ऐसा आरोप नहीं लगा कि एक प्रदेश की सरकार दूसरे प्रदेश में चुनाव न जीतने के कारण पानी में जहर मिलाकर वहां के लोगों को मारना चाहती है। बाद में भले आम आदमी पार्टी और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतीशी ने पानी में अमोनिया की अधिकता की बात की, लेकर केजरीवाल के वक्तव्य में अमोनिया का नाम तक नहीं था। अगर वे कहते कि हरियाणा से दिल्ली आ रहे पानी में अमोनिया की मात्रा ज्यादा है और उनसे जानलेवा भयानक बीमारियां दिल्ली के लोगों को हो सकती है तो इसका उत्तर दूसरे तरीके से दिया जा सकता था। दिल्ली जल बोर्ड की ओर से इसका खंडन करते हुए बताया गया कि यमुना में इस मौसम में अमोनिया की मात्रा हमेशा ज्यादा रही है। चूंकि यहां उसके शोध की क्षमता नहीं है इसलिए पानी को दिल्ली आने से रोका जाता है। पहले आप की ओर से कहा गया कि जल बोर्ड ने राज्यपाल के दबाव में इस तरह खंडन किया है। अचानक उनकी रणनीति बदली और आप के नेता और प्रवक्ता जल बोर्ड के खंडन को ही अपने पक्ष में प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करने लगे। तर्क यह दिया गया कि देखो अरविंद केजरीवाल जी ने गलत तो कुछ कहा नहीं है जल बोर्ड भी वही कह रहा है जबकि जल बोर्ड ने इस समय हरियाणा द्वारा जहर डालने और उसके कारण पानी की कमी के आरोपों का खंडन किया था।

सच है कि केजरीवाल के आरोपों और दिल्ली के यमुना जल में अमोनिया की उपलब्धता की कोई तुलना नहीं है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसकी आलोचना करते हुए आपराधिक मानहानि के मुकदमे के कारण भी दांव उल्टा पड़ा है। वैसे इसे अच्छा ही मनाना चाहिए कि लोगों के बीच यमुना जल की स्वच्छता निर्मलता आदि पर इसके कारण बहस चल रही है और लोग उसमें भाग ले रहे हैं। नायब सिंह सैनी ने पहले चुनौती दी कि मैं यमुना का जल पी कर दिखाऊंगा, केजरीवाल दिल्ली के यमुना जल को पीकर दिखाएं। सैनी ने पिया। आम आदमी पार्टी ने आधा वीडियो निकाल कर बताना शुरू किया कि ये तो मुंह में डालकर फेंक रहे हैं। पूरा वीडियो देखने वाले बता सकते हैं कि पहले पानी को उन्होंने कुल्ला किया और उसके बाद पीकर शरीर पर छिड़का है। कोई भी नेता दिल्ली के यमुना जल को मुंह में भी डालने का साहस नहीं दिखा सकता।यह कहना गलत नहीं होगा कि अरविंद केजरीवाल जैसे चालाक और क्षण में हावभाव बदलकर हर विषय को अपने प्रति सहानुभूति में बदलने में माहिर केजरीवाल को इस समय लेने के देने पड़ते दिख रहे हैं।

 विधानसभा चुनाव में किसकी जीत या हार होगी यह अलग विषय है। पर क्या इस तरह के जघन्य और घृणित आरोपों की राजनीति होनी चाहिए? क्या कोई भी पार्टी या सरकार इस कारण किसी राज्य की जनता को मारना चाहेगी कि उनका बहुमत उसे वोट नहीं दे रहा? इसी दिल्ली की जनता ने लोकसभा चुनाव में सभी सातों सीट भाजपा को दिया है। अगर दिल्ली की जनता को जहर दिया जाएगा तो उसमें बीजेपी के सदस्य, नेता और कार्यकर्ता भी मरेंगे। दिल्ली में हरियाणा के लोग भी भारी संख्या में होंगे। केजरीवाल की शैली ऐसी है कि वह जो बोलेंगे तो कुछ ऐसे लोग हैं जो उनकी बातों पर विश्वास कर लेते हैं। दुखद सच है कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को काम करना नहीं आता। जब आपको काम करना नहीं आता तो आप अपने दायित्व से पल्ला झाड़ने के लिए दूसरों को दोषी ठहराते हैं। आरोप लगाते हैं कि उपराज्यपाल काम करने नहीं देता, केंद्र काम करने नहीं देता, हमारे पैसे नहीं देते, हमको झूठे मुकदनों में फंसा कर जेल में डालती है आदि -आदि। अभी कह रहे हैं कि चुनाव आयोग भी अब हमको जेल में डालने वाला है। समूची दिल्ली की सड़कें गड्ढों में बदल चुकी है। लूटियन दिल्ली को छोड़ दें तो शायद ही दिल्ली में कोई सड़क हो जहां आपकी गाड़ी या सवारी सरपट चल सके। इस कारण ट्रैफिक जाम से लेकर गाड़ी के मेंटेनेंस के खर्च पड़ रहा है एवं प्रदूषण वृद्धि में भी इसका योगदान है। पानी की हालत यह है कि बहुत बड़ा वर्ग पानी खरीद कर पी रहा है।  झोपड़ियां तक पानी के बड़े-बड़े कैन आ रहे हैं। 10 वर्ष के कार्यकाल में दिल्ली में किसी एक फ्लाईओवर और फुट ओवर ब्रिज की मरम्मत तो छोड़िए पेंटिंग भी नहीं हुई है। 

यह तो नहीं माना जा सकता हरियाणा या उत्तर प्रदेश या पंजाब की नदियां पूरी तरह स्वच्छ व निर्मल हैं । हरियाणा के यमुना जल में कारखाने से निकलने वाले कचरे नहीं गिरते हैं यह भी नहीं कह सकते, पर दिल्ली जैसी यमुना में सड़ांध कहीं नहीं है। दिल्ली में पूरी यमुना की लंबाई का 2% है लेकिन इसके प्रदूषण का 80% अंशदान इसी का होता है। इसके लिए हम किसी दूसरे सरकार को जिम्मेदार नहीं मान सकते। यमुना शुद्धिकरण की योजना पर तरीके से काम नहीं किया गया। यमुना स्वच्छता से लेकर नमामि गंगे आदि के तहत दिल्ली सरकार को पूरे पैसे और सहयोग मिले हैं।  यहां निर्धारित 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्मित होकर चालू नहीं हुए। इसके लिए किसे दोषी माना जाएगा? जहां के जल का मुख्य स्रोत यमुना नदी हो वहां किस तरह का पीने का पानी और वातावरण मिल रहा होगा इसकी कल्पना करिए। उन्होंने कुछ दिन पहले ही दिल्ली की सड़कों और यमुना के पानी को स्वच्छ करने के अपने वायदे को पूरा न करने के लिए लोगों से क्षमा याचना का बयान दिया था। उनको लगता था कि यह मुद्दा बन रहा है, इसलिए  माफी मांग कर मुद्दे को कमजोर करने की रणनीति अपनाई। किसी परिस्थिति में दूसरी पार्टी और सरकार को पूरे राज्य की जनता की हत्या की कोशिश करने बाला बता देना क्षमा योग्य राजनीति नहीं है। इससे हिंसा हो सकती है। आम लोग भाजपा के कार्यकर्ताओं के वृद्धि हिंसा कर सकते हैं, हरियाणा के लोगों पर हमले हो सकते हैं और हिंसक अराजकता का माहौल बन सकता है।

चुनाव आयोग निश्चित रूप से इस मामले को जांच के लिए देगा और हरियाणा में भी मुकदमा चलेगा। अगर आपने आरोप लगाया है तो आपको प्रमाण देना होगा किस स्थान पर कहां कितना जहर मिलाया गया और जहर मिलाने वाले कौन हैं? यमुना को पूरी तरह सड़ा देने की अपनी जिम्मेवारी को दूसरे के सिर डालकर वोट पाने की राजनीति किसी भी तरह स्वीकार नहीं हो सकती। इससे ऐसी घातक राजनीति के दौड़ की शुरुआत होगी जिसका अंत भयावह होगा। नदी के पानी में लोगों को मारने के साजिश के तहत जहर डालने जैसे आरोपों की राजनीति की हर स्तर से निंदा तथा इसके विरुद्ध सभी संभव कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए।

 अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092 , मोबाइल -98110 2720

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