गुरुवार, 16 जनवरी 2025
क्या बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार आप के पूर्व मुस्लिम विधायक ही दे रहे हैं दिल्ली सरकार मंत्री गोपाल राय को टक्कर
मंगलवार, 14 जनवरी 2025
दिल्ली चुनाव: कांग्रेस की तीसरी लिस्ट आई, ओखला से अरीबा खान, गांधी नगर से कमल अरोड़ा
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने उम्मीदवारों की अपनी तीसरी सूची जारी कर दी है. पार्टी ने अरीबा खान को ओखला विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है. वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ को पटेल नगर से टिकट दिया है. पार्टी ने गोकलपुर से अपना प्रत्याशी बदल दिया है. अब तक कांग्रेस 63 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है.
कांग्रेस की तीसरी सूची में 16 उम्मीदवारों के नाम हैं. पार्टी ने गोकलपुर-एससी सीट से प्रमोद कुमार जयंत की जगह अब ईश्वर बागड़ी को टिकट दिया है. वहीं घोंडा सीट से वरिष्ठ नेता भीष्म शर्मा पर भरोसा जताया गया है. इससे पहले कांग्रेस ने अपनी दूसरी लिस्ट में 26 नामों का ऐलान किया।
कांग्रेस ने जंगपुरा फरहाद सूरी को टिकट दिया है. ये आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सीट है. इसके अलावा सीमापुरी से राजेश लिलोठिया, उत्तम नगर से मुकेश शर्मा और बिजवासन से देवेंद्र सहरावत चुनाव लड़ेंगे।
इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 21 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया था. कांग्रेस ने नरेला से अरुणा कुमारी, बुराड़ी से मंगेश त्यागी, आदर्श नगर से शिवांक सिंघल, बादली से देवेंद्र यादव, सुल्तानपुर माजरा से जय किशन, नागलोई जाट से रोहित चौधरी, सलीमगढ़ से प्रवीन जैन को टिकट दिया है. वहीं, वजीरपुर से रागिनी नायक, सदर बाजार से अनिल भारद्वाज, चांदनी चौक से मुदित अग्रवाल, बल्लीमारान से हारून यूसुफ को टिकट दिया गया।
इनके अलावा तिलक नगर से पीएस बावा, द्वारका से आदर्श शास्त्री, नई दिल्ली से संदीप दीक्षित को टिकट दिया है. कस्तूरबा नगर से अभिषेक दत्त, छतरपुर से राजेंद्र तंवर, अंबेडकर नगर से जय प्रकाश, ग्रेटर कैलाश से गार्वित सिंघवी, पटपड़गंज से अनिल कुमार, सीलमपुर से अब्दुल रहमान और मुस्तफाबाद से अली मेहदी को टिकट दिया गया है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के 48 कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची
- नई दिल्ली सीट से संदीप दीक्षित
- बादली सीट से देवेंद्र यादव
- बल्लीमारान सीट से हारुन युसूफ
- पटपड़गंज सीट से चौ. अनिल कुमार
- मुस्तफाबाद सीट से अली मेहदी
- सदर सीट से अनिल भारद्वाज
- नांगलोई सीट से रोहित चौधरी
- कस्तुरबा नगर सीट से अभिषेक दत्त
- वजीरपुर सीट से रागिनी नायक
- सीलमपुर सीट से अब्दुल रहमान
- नरेला सीट से अरुणा कुमारी
- बुराड़ी सीट से मंगेश त्यागी
- आदर्श नगर सीट से शिवांश सिंघल
- सुल्तानपुर माजरा (एससी) सीट से जयकिशन
- शालीमार बाग सीट से प्रवीण जैन
- तिलकनगर सीट से पीएस बावा
- द्वारका सीट से आदर्श शास्त्री
- छतरपुर सीट से राजिंदर तंवर
- अंबेडकरनगर (एससी) सीट से जय प्रकाश
- ग्रेटर कैलाश सीट से गर्वित सिंघवी
- चांदनी चौक सीट से मुदित अग्रवाल
- रिठाला सीट से सुशांत मिश्रा
- मंगोलपुरी (अनुसूचित जाति) सीट से हनुमान चौहान
- शकूर बस्ती सीट से सतीश लूथरा
- त्रिनगर सीट से सतेंद्र शर्मा
- मतिया महल सीट से असिम अहमद खान
- मोती नगर सीट से राजेंद्र नामधारी
- मादीपुर (अनुसूचित जाति) सीट से जेपी पंवार
29 राजौरी गार्डन सीट से धर्मपाल चांडेल
30 उत्तम नगर सीट से मुकेश शर्मा
31 मतिआला सीट से रघुविंदर शोकीन
32 बिजवासन सीट से देवेंद्र सहरावत
33 दिल्ली कैंट सीट से प्रदीप कुमार उपमन्यु
34 राजेंद्र नगर सीट से विनीत यादव
35 जंगपुरा सीट से फरहद सूरी
36 मालवीय नगर सीट से जितेंद्र कुमार कोचर
37 महरोली सीट से पुष्पा सिंह
38 देओली (अनुसूचित जाति) सीट से राजेश चौहान
39 संगम विहार सीट से हर्ष चौधरी
40 त्रिलोकपुरी (अनुसूचित जाति) सीट से अमरदीप
41 कोंडली (अनुसूचित जाति) सीट से अक्षय कुमार
42 लक्ष्मी नगर सीट से सुमित शर्मा
43 कृष्ण नगर सीट से गुरचरण सिंह राजू
44 सीमापुरी (अनुसूचित जाति) सीट से राजेश लिलोठिया
45 बाबरपुर सीट से हाजी मोहम्मद इशराक खान
46 गोकलपुर (अनुसूचित जाति) सीट से प्रमोद कुमार जयंत
47 करावल नगर सीट से डॉ. पीके मिश्रा
48 कालकाजी सीट से अलका लांबा
गांधीनगर विधानसभा में आप को बड़ा झटका, कद्दावर नेता कमल अरोड़ा ने अपने समर्थकों के साथ थामा कांग्रेस का दामन
संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद भी कांग्रेस लगातार अपना कुनबा बढ़ा रही है। इसी क्रम में कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव, पूर्व मंत्री नरेंद्र नाथ, सीलमपुर के पूर्व विधायक व बाबरपुर से कांग्रेस प्रत्याशी हाजी इशराक खान, नियाज अहमद मंसूरी ब्लॉक प्रेसिडेंट शास्त्री पार्क वार्ड, कृष्णा नगर माइनॉरिटी जिला अध्यक्ष अलीम भाई, यूथ कांग्रेस से विधानसभा अध्यक्ष मोहम्मद वसीम, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव और दिल्ली प्रदेश प्रभारी काज़ी निजामुद्दीन ने आम आदमी पार्टी के गांधी नगर के पूर्व संगठन मंत्री कमल अरोड़ा उर्फ डब्बू व उनके साथी नौशाद मंसूरी व समर्थकों को पटका पहनाकर पार्टी ज्वाइन करवाई। आम आदमी पार्टी के गांधी नगर के पूर्व संगठन मंत्री कमल अरोड़ा उर्फ डब्बू ने अपने समर्थकों सहित आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया।
कमल अरोड़ा ने गांधीनगर
विधानसभा पूर्व संगठन मंत्री के पद व पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे
दिया है। इधर आप छोड़ने के तुरंत बाद कमल अरोड़ा अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में
शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे वो निभाएंगे।
उन्होंने आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। उन पर हमेशा जनता के मुद्दों
से भागकर अपनी राजनीति का आरोप लगाया है।
वहीं दिल्ली कांग्रेस के
अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आम आदमी पार्टी के गांधी
नगर के पूर्व संगठन मंत्री कमल अरोड़ा उर्फ डब्बू का पार्टी में स्वागत करते हुए उन्हें
कांग्रेस का पटका भेंट पहनाकर पार्टी ज्वाइन करवाई। देवेंद्र यादव ने कहा कि
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है तो इसके लिए
भाजपा और ‘AAP’ दोनों
सरकारें समान रूप से जिम्मेदार हैं।
देवेंद्र यादव ने दावा किया कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावी रूप से नियंत्रण में थी। लोगों को चौबीसों घंटे जलापूर्ति होती थी। जलभराव को रोकने के लिए हर मानसून से पहले नालियों और सीवरों की सफाई की जाती थी। यादव ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया था कि लोगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति हो और दिल्ली में बिजली देश में सबसे सस्ती दर पर मिले।
सोमवार, 13 जनवरी 2025
कांग्रेस प्रत्याशी हाजी इशराक़ खान के समर्थन में हिन्दू-मुस्लिम कार्यकर्ता हुए एक जुट, मतलूब अहमद ने दिया धमाकेदार भाषण
बुधवार, 8 जनवरी 2025
मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार और स्मारक की मांग
अवधेश कुमार
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के मृत्यु उपरांत अंतिम संस्कार और स्मारक पर हुई और हो रही राजनीति उचित नहीं। जो 10 वर्ष प्रधानमंत्री, 5 वर्ष वित्त मंत्री और इसके अलावा तीन दशक तक भारत के आर्थिक और वित्तीय नीति निर्माण से जुड़े रहे हों, उन्हें लेकर उनकी पार्टी और समर्थकों को संयमित वक्तव्य देना चाहिए। जब कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा करेगी तो उनके काल के निर्णयों ,घटित घटनाओं आदि उनकी भूमिका सहित पार्टी के वर्तमान और अतीत की वो भूमिकाएं सामने लाई जाएंगी जिनका उत्तर देना कठिन होगा। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने उनकी मृत्यु के तुरंत बाद प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अंतिम संस्कार ऐसी जगह करने की मांग कर दी जहां स्मारक बनाया जा सके। उसके बाद पार्टी ने सरकार को आरोपित करना आरंभ कर दिया। गृह मंत्री अमित शाह जी की ओर से स्पष्ट किया गया कि उनका स्मारक बनाया जाएगा और अंतिम संस्कार राजधानी दिल्ली के निगमबोध घाट पर किया गया। प्रश्न उठाया जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री का अंतिम संस्कार निगमबोध पर क्यों किया गया? देश में जब ऐसे विवाद उठते हैं तो ज्यादातर लोग तात्कालिक भावनाओं और वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं और राजनीति में जितना तीखा विभाजन है, पक्ष-विपक्ष में हमले - प्रतिहमले, आरोप-प्रत्यारोप आरंभ हो जाते हैं। ऐसे विषयों पर निष्पक्षता से सच्चाई और तथ्यों के साथ वर्तमान और संभाली परिदृश्यों को नहीं रखा जाए तो अनेक प्रकार की गलतफहमियां बनी रहतीं हैं।कांग्रेस द्वारा बड़ा मुद्दा बनाए जाने के बाद भाजपा ने अतीत के पन्ने पलटे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार समुचित सम्मान के साथ होना चाहिए और व्यक्तित्व प्रेरिक है तो स्मारक भी बनना चाहिए। पहले इस मामले में कांग्रेस के अतीत पर बात करते हैं। कांग्रेस और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाले संप्रग सरकार के दौरान चार पूर्व प्रधानमंत्रियों पीवी नरसिंह राव, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर और इंदर कुमार गुजराल की मृत्यु हुई। क्या इनमें से किसी के दिल्ली में स्मारक बनाने पर चर्चा भी हुई? पीवी नरसिंह राव कांग्रेस के थे और डॉ मनमोहन सिंह को उन्होंने ही वित्त मंत्री बनाया जहां से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। उनका परिवार राजधानी में अंतिम संस्कार चाहता था। वे कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके थे और पार्टी मुख्यालय में उनका शव अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि के लिए रखा जाना चाहिए था। उनका शव आया लेकिन मुख्यालय का द्वार नहीं खुला और बाहर ही तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित बाकी नेताओं और मंत्रियों ने पुष्पांजलि अर्पित की। यह किसके आदेश या इशारे पर हुआ होगा क्या यह बताने की आवश्यकता है? कांग्रेस का तर्क है कि नरसिंह राव ने स्वयं प्रदेश में अंतिम संस्कार की इच्छा जताई थी। ऐसा था तो उनके परिवार से बात किसी ने क्यों नहीं की? आज भी उनके परिवार के लोग बताते हैं कि उनकी किसी ने नहीं सुनी। पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणव मुखर्जी की बेटी समिष्ठा मुखर्जी ने कहा है कि हमारे पिताजी ने उनके शव को कांग्रेस कार्यालय के अंदर लाने के लिए कहा किंतु ऐसा नहीं किया गया। शायद भारत के राजनीतिक इतिहास में मृत्यु के बाद इस तरह का व्यवहार किसी के साथ नहीं हुआ होगा।
यह भी सही है की सरदार वल्लभ भाई पटेल की मुंबई में मृत्यु के पश्चात प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को कहा था कि आपको किसी कैबिनेट मंत्री के अंतिम संस्कार में भाग नहीं लेना चाहिए। नौकरशाहों से लेकर अनेक लोगों को यह संदेश दिया गया था। हालांकि पंडित नेहरू स्वयं गए थे और उनकी बात न मानकर डॉ राजेंद्र प्रसाद सहित अनेक लोगों ने पहले गृह मंत्री के अंतिम संस्कार में भाग लिया। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में नहीं हुआ लेकिन स्वतंत्रता संघर्ष से लेकर संविधान निर्माण और विभाजन की विभीषिका के पश्चात रियासतों का विलय कर देश की एकता-अखंडता सुरक्षित रखने की उनकी सर्वोपरि भूमिका का ध्यान रखते हुए स्मारक अवश्य बनना चाहिए था। डॉ राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष और पहले राष्ट्रपति थे। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर गांधी विचारों और भारतीय संस्कृति के अनुरूप त्यागमयी जीवन जीने वाले राजेंद्र बाबू का कोई स्मारक दिल्ली में नहीं बनाया। संविधान निर्माण के बाद संविधान सभा के भाषणों को पढ़िए तो राजेंद्र बाबू के योगदान को उस समय के नेताओं ने किन शब्दों में वर्णित किया है पता चल जाएगा। राजेंद्र बाबू को राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत होने के बाद पटना के सदाकत आश्रम में समय बिताना ना पड़ा और वही छोटी जगह में उन्होंने शरीर त्यागा। कोई वहां जाकर उनकी सादगी को देख सकता है।
इस पृष्ठभूमि में कांग्रेस की मांग को राजनीति के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता। राजधानी में महात्मा गांधी जी की समाधि राजघाट से आगे बढ़ते जाइए आपको अगले चौराहे सड़क तक राजीव गांधी, संजय गांधी ,इंदिरा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के स्मारक व समाधियां मिलेंगी। वहां जाने वालों की संख्या न के बराबर है तथा जंगल झाड़ इतने हैं कि कुछ ही क्षेत्र में कोई घूम सकता है। स्व. अटलबिहारी वाजपेयी के समाधि के लिए सड़क के आगे जगह बनानी पड़ी। यूपीए शासन में राजीव गांधी की समाधि पर बार-बार नई परियोजनाएं आईं और बिना किसी आदेश के गांधी जी की समाधि के जमीनों का उपयोग हुआ, काफी भाग उसमें समाहित हो चुका है। चौधरी चरण सिंह की मृत्यु के बाद जब दबाव बना तो गांधी जी की समाधि से ही काट कर जमीन दिया गया। नेहरू जी या अन्य की समाधि के कारण उस तरफ जगह नहीं मिली। सच यह है कि वर्तमान स्थिति के कायम रहते हुए भविष्य के प्रधानमंत्रियों के लिए उस क्षेत्र में जगह नहीं है। यह तभी हो सकता है जब इन्ही समाधियों के अंदर उनका अंतिम संस्कार हो और स्मारक बने। रास्ता प्रधानमंत्री संग्रहालय की तरह निकल सकता है। जवाहरलाल नेहरू स्मारक संग्रहालय आज प्रधानमंत्री संग्रहालय में बदल चुका है और उसकी बायलॉज ऐसे बने हैं कि अब किसी भी पार्टी के प्रधानमंत्री की मृत्यु के बाद उनकी स्मृतियां वहां रखी जाएगी। आने वाले समय में न जाने कितने प्रधानमंत्री होंगे इनका ध्यान रखते हुए संग्रहालय का यह परिवर्तन समयोचित और व्यावहारिक है। इसी तरह अंतिम संस्कार और स्मारकों की भी व्यवस्था हो सकती है। क्या कांग्रेस अपने प्रथम परिवार के लोगों के स्थान से दूसरे को जगह देने के लिए तैयार होगी?
क्या देश में केवल प्रधानमंत्री को लेकर ही स्मारक या सम्मानजनक अंतिम संस्कार की बात होनी चाहिए? देश में बगैर पद लिए हुए भी अनेक लोगों का अमूल्य योगदान होता है। 1942 की क्रांति के हीरो लोकनायक जयप्रकाश नारायण और डॉ राम मनोहर लोहिया कोई स्मारक दिल्ली में नहीं बनाया गया। जयप्रकाश जी ने 1950 के बाद पूरा जीवन गांधी जी के ग्राम स्वराज को समर्पित कर दिया था। विकट परिस्थितियों में उन्हें 1974 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का नेतृत्व संभालना पड़ा जिसके बाद आपातकाल लगा। विविध क्षेत्र में ऐसे अनेक लोगों का योगदान इस देश को यहां तक पहुंचाने या जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में है। इसलिए हमारे सोचने का तरीका बदलना चाहिए। बगैर जनता के बीच काम कर लोकप्रियता प्राप्त किए हुए भी कोई प्रधानमंत्री बन सकता है। इंदर कुमार गुजराल और डॉ मनमोहन सिंह इसके उदाहरण हैं। निश्चित रूप से देश को इस दृष्टि से विचार करना चाहिए। तो तात्कालिक भावुकता या क्षणिक उत्तेजना में निष्कर्ष नहीं निकलना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने डॉ मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार संपूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया, सात दिनों का राजकीय शोक घोषित हुआ। कई पूर्व प्रधानमंत्रियों के लिए कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों ने नहीं किया।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारतीय संस्कार अध्यात्म और संस्कृति दृष्टि है। यहां शरीर को नश्वर माना गया है और मृत्यु के पश्चात इसका कोई मूल्य नहीं। आत्मा मूल है, अजर-अमर है, पुनर्जन्म लेती है या मोक्ष मिलता है। भारतीय दृष्टि से सोचें तो जीवन अनंत यात्राओं का नाम है। शरीर के जीवन में हमारा नाम यहां दिया गया। अगले जन्म में कोई और रुप और नाम। इसी का ध्यान रखते हुए हमारे पूर्वजों ने मृत्यु के बाद मृतक से संबंधित सामग्रियां तक दान करने और तस्वीर तक न रखने की परंपरा बनी। समाधियां केवल उनकी होती थी जो दिव्यता प्राप्त कर समाधि लेते थे। कब्र के रुप में समाधियों की प्रवृत्ति इस्लाम, ईसाई या यहूदी आदि में रही है। किसी का स्मारक बने इसका जीवन सत्य से कोई लेना-देना नहीं।
पता, ई-30 गणेश नगर,पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल -98110 27208
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