शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024

महाकुंभ 2025 का आमंत्रण देने त्रिपुरा जाएंगे मंत्री आशीष पटेल और कपिल देव अग्रवाल

लखनऊ 21 दिसम्बर 2024। उत्तर प्रदेश सरकार के प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले मंत्री आशीष पटेल और व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल आगामी 22-23 दिसंबर को त्रिपुरा का दौरा करेंगे। इस विशेष दौरे का उद्देश्य प्रयागराज महाकुंभ 2025 के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करना और त्रिपुरा के राज्यपाल व मुख्यमंत्री को इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने का निमंत्रण देना है।

कार्यक्रम के तहत दोनों मंत्री 22 दिसंबर 2024 को अपराह्न में त्रिपुरा के अगरतला स्थित राज्य अतिथि गृह पहुंचेंगे। वहां वे त्रिपुरा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से शिष्टाचार मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे प्रयागराज महाकुंभ 2025 के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्हें औपचारिक रूप से इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में भाग लेने का निमंत्रण सौंपेंगे।

23 दिसंबर 2024 को महाकुंभ 2025 के प्रचार-प्रसार के तहत अगरतला में एक भव्य रोड शो का आयोजन किया जाएगा। इस रोड शो के माध्यम से स्थानीय जनता को महाकुंभ की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता से परिचित कराया जाएगा। साथ ही, उन्हें महाकुंभ में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

प्रयागराज महाकुंभ भारतीय सभ्यता और संस्कृति का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। इस महोत्सव में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। उत्तर प्रदेश सरकार इस आयोजन को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। महाकुंभ 2025 का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना भी है।

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024

देवेंद्र फाडणवीस के साथ पटरी पर महाराष्ट्र की राजनीति

अवधेश कुमार 

देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के साथ महाराष्ट्र की राजनीति के स्थिर आयाम तक पहुंचने का संकेत मिल रहा है‌। वर्तमान विधानसभा चुनाव परिणाम का स्वाभाविक राजनीतिक फलितार्थ यही हो सकता था। 2014 से देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र की राजनीति के जिस दौर की शुरुआत हुई उस पर 2019 में ग्रहण लगने का कोई स्वाभाविक कारण नहीं था। भाजपा और शिवसेना दोनों को मिलाकर जनता ने 161 सीटों का बहुमत दिया था लेकिन उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना ने मुख्यमंत्री के रूप में समर्थन देने से इनकार कर स्वयं अपनी दावेदारी पेश की। यहां से महाराष्ट्र की राजनीति अस्वाभाविक, अनैतिक और अस्थिरता के ऐसे दौर में उलझी जहां राजनीतिक विचारधारा का सबसे बड़ा संभ्रम कायम हुआ। शरद पवार के नेतृत्व में राकांपा और कांग्रेस तो राजनीतिक साझेदार थे ही लेकिन महाराष्ट्र में आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति वाले शिवसेना ने सत्ता के नेतृत्व के लिए जिस तरह रंग बदला उसे जनता की स्थायी स्वीकृति मिलनी 2014 से भारत में आरंभ हुई राजनीति के दौर के बीच असाधारण घटना होती।

सच कहें तो महाराष्ट्र की राजनीतिक सत्ता अब स्वाभाविक विचारधारा की पटरी पर आ गई है। वैसे तो जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के अंदर हुए विद्रोह ने ही संदेश दे दिया कि अस्वाभाविक वैचारिकता के घुटन को बड़ा वर्ग स्वीकार करने को तैयार नहीं। दूसरी ओर जब अजीत पवार के नेतृत्व में राकांपा भी इस ओर आ गई तो साफ हो गया कि महाराष्ट्र के सत्ता समीकरण में कांग्रेस को छोड़ किसी दल के अंदर सहजता नहीं थी। हालांकि लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ के प्रभावी प्रदर्शन ने फिर एक बार स्वाभाविक राजनीति पर ग्रहण लगाया लेकिन निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ विश्लेषक मान रहे थे कि यह भी एक अस्थाई परिघटना ही है। लोकसभा चुनाव में कई कारकों ने महाराष्ट्र के साथ उत्तर प्रदेश तथा इससे कम परिमाण में कुछ दूसरे राज्यों में अपनी भूमिका निभाई जिसे भाजपा नेतृत्व में राजग की सीटें कम हुईं। परिणाम के बाद स्वयं मतदाताओं को भी लगा उनसे गलती हो चुकी है। पहले हरियाणा और फिर महाराष्ट्र में मतदाताओं ने अनुकूल परिस्थितियों, सक्षम नेतृत्व एवं समीकरणों की सहजता को देखते हुए अपना जनादेश दे दिया।

किसी भी नेता के मुख्यमंत्री बनने के बाद गठबंधन विजयी हो और सरकार में होते हुए फिर उसे पद पर न लाया जाए तो समस्या होती है। चुनाव परिणाम के बाद सरकार गठन में लगभग दो सप्ताह का समय इसी कारण लगा क्योंकि देवेंद्र को नेता के रूप में स्वीकार करने के लिए एकनाथ शिंदे को तैयार करना था या उन्हें तैयार होना था। चुनाव परिणाम से इतना तो साफ है कि एकनाथ शिंदे के विद्रोह को शिव सैनिकों ने स्वीकार किया और उन्होंने इतने प्रभावी परिवार से पार्टी को अलग कर स्वाभाविक पटरी पर लाने की अकल्पनीय भूमिका निभाई। जून 2022 में भाजपा नेतृत्व के सामने सरकार की स्थिरता और सुदृढ़ता के लिए आवश्यक था कि शिंदे को नेतृत्व दिया जाए। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें स्थाई रूप से मुख्यमंत्री बनाने का कोई वचन दिया होता तो वह अवश्य इसकी चर्चा करते। पूरे चुनाव अभियान के दौरान कोई भी मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश नहीं किया गया। शिंदे के समर्थक और शिवसैनिकों का निश्चित रूप से एक बड़ा वर्ग फिर से उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहता होगा लेकिन ऐसा जारी रहना ही फिर महाराष्ट्र की राजनीति के अस्वाभाविक अस्थिर होने का कारण बन जाता। शिंदे को भी जन प्रतिक्रिया का आभास होगा एहसास हो गया होगा कि उद्धव ठाकरे के विरुद्ध विद्रोह से निर्मित  सशक्त नेता की उनकी छवि सरकार गठन में बाधा बनने से काफी कमजोर हो रही है। उनकी वर्तमान भूमिका भविष्य पर ग्रहण लग रहा था  । कह सकते हैं कि दूसरे साझेदार अजीत पवार के साथ भाजपा को बहुमत मिल गया था और इसमें शिंदे की अपरिहार्यता नहीं रह गई थी। यह सतह पर दिखने वाला एक पहलू है। भाजपा नेतृत्व को पता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में उनके लिए शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना का साथ विचारधारा के आधार पर दीर्घकालिक काम करने के लिए आज आवश्यक है।

वैसे गठबंधन में साझेदार होने के कारण अजीत पवार के मंतव्य का भी नेतृत्व के संदर्भ में महत्व था और उन्होंने भी परिपक्वता दिखाई। सच कहें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने दूरगामी सोच के साथ अपनी पार्टी और दोनों साझेदारों को किसी स्तर पर असंतुष्ट और नाराज होने का अवसर नहीं दिया। संघ की भी प्रभावी सक्रियता थी। यही कारण था कि सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन तक में थोड़ी बहुत हल्के फुल्के मतभेद होते हुए भी तीनों पार्टियों तथा प्रमुख नेता बिल्कुल एकजुट होकर चुनाव लड़ते रहे। किसी ने भी एक दूसरे के विरुद्ध भ्रम पैदा होने का एक बयान नहीं दिया। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है एकनाथ शिंदे जब उद्धव ठाकरे के विरुद्ध विद्रोह कर बाहर आए थे तो उन्हें भी भान नहीं था कि भाजपा उनके हाथों सरकार का नेतृत्व सौंप देगी।भाजपा के पास विधानसभा में 105 सीटें थीं। जब पत्रकार वार्ता में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम की घोषणा की तो उन्होंने बिल्कुल एक शत-प्रतिशत कृतज्ञ भरे भाव के साथ इसे देवेंद्र की महानता और विशेष कृपा करार दिया था। तो उनके अंदर भी यह भाव अवश्य रहा होगा कि देवेंद्र फडणवीस ही भाजपा और गठबंधन के स्वाभाविक नेता होंगे। वैसे देवेंद्र की शिंदे को गठबंधन से बाहर लाने में बहुत बड़ी भूमिका थी। उन्होंने उद्धव ठाकरे और शरद पवार दोनों के विरुद्ध राजनीतिक मोर्चा खोला और पवार को तो सीधी चुनौती दी।

अब प्रश्न है कि आगे सरकार की दिशा क्या होगी? पूरे चुनाव अभियान में देवेंद्र फडणवीस की छवि एक परिपक्व व आत्मविश्वास से भरे हिन्दुत्ववादी शुद्ध स्वयंसेवक भाजपा नेता की बनी। उन्होंने प्रदेश में कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं और उनका समर्थन देने वाले महाविकास आघाड़ी के विरुद्ध लगातार प्रखर आक्रमणों से अपनी छवि वर्तमान राजनीतिक धारा के अनुरूप बनाई। संघ और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से इसकी हरी झंडी थी इसलिए उन्हें खुलकर सामने आने में समस्या भी नहीं हुई। इस मंच से उनके द्वारा द्वारा गाए जा रहे जागो हिंदू गीत भी वायरल था और इसका असर हुआ। भाजपा में केंद्रीय नेतृत्व के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि पहले से प्रखर हिंदुत्ववादी नेता की है। देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक जीवन का यहां से नए दौर की शुरुआत हुई है और महाराष्ट्र में भी आने वाले समय में हमें देश व प्रदेश के लिए अति आवश्यक कट्टर इस्लामवाद के विरुद्ध प्रखर हिंदुत्व की नीति साफ दिखाई देगी। भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने अपने भाषण में हिंदवी स्वराज से लेकर अहिल्याबाई होल्कर का नाम लिया और फिर उसी श्रेणी में बाबा साहब से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अन्य भाजपा नेताओं तथा समर्थन देने वाले विधायकों तक का उल्लेख कर अपनी राजनीतिक धारा को बिल्कुल स्पष्ट किया।  एक है तो सेफ है और बंटेंगे तो कटेंगे नारे को लेकर महायुति में लगा कि मतभेद है। अजीत पवार ने योगी आदित्यनाथ के बटेंगे तो कटेंगे के विरुद्ध बयान दिया।

लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने अपने साक्षात्कार में स्पष्ट कह दिया कि योगी जी ने कुछ भी गलत नहीं बोला है। औरंगाबाद में उन्होंने वोट जिहाद को वोट के धर् युद्ध से पराजित करने की घोषणा की और इनका भी चमत्कारी कसर हुआ। अजीत पवार के बारे में भी उनकी टिप्पणी थी कि वह बहुत बाद गठबंधन में आए हैं और धीरे-धीरे उन्हें भी समझ में आ जाएगा। यह सरकार गठन के पूर्व  भावी नीतियों को लेकर घोषणा थी। यानी गठबंधन का कोई दबाव संघ तथा भाजपा के अपने हिंदुत्व एजेंडा के मार्ग में बाधा नहीं बनेगा। यही विचारधारा शिवसेना शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के भी भाजपा के साथ बने रहने की गारंटी होगी। धीरे-धीरे शिंदे का व्यवहार भी समान्य पटरी पर आएगा। जब 5 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद देवेंद्र फडणवीस दूरगामी राजनीतिक हित को देखते हुए उपमुख्यमंत्री के रूप में काम कर सकते हैं तो फिर एकनाथ शिंदे क्यों नहीं?

अवधेश कुमार, गणेश नगर , पांडव नगर कंपलेक्स , दिल्ली -110092 , मोबाइल-9811027208

शनिवार, 30 नवंबर 2024

लखनऊ के अभिनेता गगनदीप सिंह डिडयाला ने वेब सीरीज 'हार्टबीट्स' के साथ बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई

लखनऊ। भारत – लखनऊ के प्रतिभाशाली अभिनेता गगनदीप सिंह डिडयाला ने अमेज़ॅन एमएक्स प्लेयर पर हाल ही में रिलीज़ हुई वेब सीरीज 'हार्टबीट्स' में अपने शानदार प्रदर्शन से भारतीय मनोरंजन उद्योग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

'हार्टबीट्स' एक आकर्षक कहानी है जो नए नियुक्त इंटर्न डॉक्टरों के दैनिक जीवन और संघर्षों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें भावनाएं और खुशी के पल भी शामिल हैं। गगनदीप 'वरुण' की भूमिका निभाते हैं, जो एक कनाडा-रिटर्न बेटा है जो इस बात के लिए अपने आपको दोषी महसूस कर रहा है कि वह अपने पेशे के कारण अपने परिवार के साथ समय नहीं बिता पाया।

गगनदीप के 'वरुण' के सशक्त किरदार को दर्शकों और आलोचकों से समान रूप से सराहना मिली है। कला के प्रति उनका समर्पण और अभिनय के प्रति जुनून उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में अपनी अलग पहचान बनाने में मदद करेगा।

"'हार्टबीट्स' का हिस्सा बन के मैं रोमांचित हूं, ये एक सुंदर कहानी है जो सभी के साथ जुड़ती है," गगनदीप सिंह डिडयाला ने कहा। "लखनऊ के एक अभिनेता के रूप में, मैं अपने शहर का प्रतिनिधित्व करने और भारतीय सिनेमा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में योगदान देने के लिए गर्व महसूस करता हूं।"

'हार्टबीट्स' में हर्ष बेनीवाल और शिवांगी जोशी जैसे कलाकारों की टैलेंटेड कास्ट है। वेब श्रृंखला को दर्शकों द्वारा खूब सराहा जा रहा है और यह विशेष रूप से भारतीय सिनेमा के प्रशंसकों और चिकित्सा कर्मचारियों को एक बार ज़रूर देखनी चाहिए।

 











 

मंगलवार, 26 नवंबर 2024

डॉ. इब्राहिम अफ़सर की पुस्तक 'रशीद हसन खां की अदबी जिहात' को दिल्ली उर्दू अकादमी से मिला पुरस्कार

मो. रियाज़
नई दिल्ली। दिल्ली शिक्षा विभाग के सर्वोदय बाल विद्यालय, बुलन्द मस्जिद में टीजीटी उर्दू के पद पर कार्यरत इब्राहीम अफ़सर को उनकी शोधात्मक और आलोचनात्मक पुस्तक 'रशीद हसन खां की अदबी जिहात' को उर्दू अकादमी दिल्ली ने दिल्ली सचिवालय में आयोजित भव्य कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ भारद्वाज, श्री इमरान हुसैन, अकादमी के सेक्रेट्री डॉ आबिद अहसन और अकादमी के वाइस चेयरमैन प्रोफ़ेसर शहपर रसूल द्वारा वर्ष 2021 की दूसरी श्रेणी में पुरस्कृत किया गया।
डॉ. इब्राहिम अफ़सर की वर्तमान समय में अब तक एक दर्जन से ज्यादा शोधात्मक और आलोचनात्मक पुस्तकें, दो सौ से ज्यादा पुस्तक समीक्षाएं, सौ के करीब शोधात्मक और  आलोचनात्मक निबंध राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ. इब्राहिम अफ़सर ने मेरठ कॉलेज मेरठ से पीएचडी, एमफिल चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से किया है। 
अंजुमन तरक्की उर्दू (हिंद), नई दिल्ली से  भी इन की कई पुस्तके प्रकशित हो चुकी हैं। पश्चिमी बंगाल उर्दू अकादमी, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी और
मुजफ्फर हनफी मेमोरियल सोसाइटी नई दिल्ली भी डॉक्टर इब्राहीम अफ़सर की साहित्यिक सेवाओं पर पुरस्कृत कर चुकी हैं।
दिल्ली उर्दू अकादमी से डॉ. इब्राहिम अफ़सर की पुस्तक को पुरस्कार मिलने पर सर्वोदय बाल विद्यालय बुलंद मस्जिद स्कूल के प्रिंसिपल श्री बलराज जी, स्कूल के समस्त स्टाफ,  स्कूल की एसएमसी के सदस्यगण, श्री चांद बाबू (डीडीई नॉर्थ ईस्ट शाहदरा दिल्ली), नगर पंचायत सिवाल खास के गणमान्य नागरिकों, अध्यापकों तथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग प्रमुख प्रोफ़ेसर असलम जमशेद पुरी ने खुशी का इजहार किया है।

सोमवार, 4 नवंबर 2024

10 दिसम्बर तक अभ्यर्थी एचटेट-2024 के विवरणों में ऑफलाइन करवा सकेंगे सुधार

संवाददाता

भिवानी।   हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के प्रवक्ता ने बताया कि शिक्षा बोर्ड द्वारा हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा-2024 के लिए ऑनलाइन आवेदन करवाए गए थे, जिन अभ्यर्थियों द्वारा हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा-2024 हेतु पंजीकरण किया गया है तथा उनके आवेदन फार्म के विवरणों जैसे- नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्म तिथि, ई-मेल आई०डी०, जेंडर, फोटो/हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान/स्तर/जाति/श्रेणी/विषय व आधार नम्बर में त्रुटि रह गई है। ऐसे सभी अभ्यर्थी 10 दिसम्बर, 2024 तक केवल कार्य दिवसों में सुबह 9:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक बोर्ड कार्यालय में उपस्थित होकर निर्धारित शुल्क के साथ ऑफलाइन शुद्धि करवा सकते हैं।  

उन्होंने आगे बताया कि अभ्यर्थी नवीनतम जानकारी व महत्वपूर्ण सूचना के लिए बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.bseh.org.in पर नियमित विजिट करें।

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