मंगलवार, 2 जुलाई 2024
बिग मैच में विराट खेलकर बनते कोहली
विराट कोहली ने टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में शानदार पारी खेलकर एक बार फिर से सिद्ध किया कि वे बिग मैच प्लेयर हैं। वे कभी भी फॉर्म में वापसी करने की कुव्वत रखते हैं। वे इसलिए ही महान नहीं हैं, क्योंकि उनके आंकड़ें बेहद शानदार हैं। वे पेले और डिएगो माराडोना के कद के महान खिलाड़ी इसलिए बनते हैं,क्योंकि वे सेमी फाइनल और फाइनल जैसे अहम मैचों में छा जाते हैं। देखिए मेहनत बहुत सारे खिलाड़ी करते हैं। पर अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी सब महान नहीं कहलाए जाते। वे ही महान खिलाड़ी माने जाते हैं, जो विपरीत हालातों और उन मैचों में शानदार खेल दिखाते हैं जब उनसे उनकी टीम और उनक चाहने वाले अपेक्षा करते हैं। विराट कोहली का भी जलवा बड़े कांटे के मैचों में देखते ही बनता है। पेले, और माराडोना के करियर को देख लें। आप इस नतीजे पर पहुंचेंगे कि ये खास मैचों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते थे।
विराट कोहली शनिवार को जब साउथ अफ्रीका के खिलाफ बैटिंग कर रहे थे, तब राजधानी के पश्चिम विहार की एलआईसी कॉलोनी में रहने वाले दुआ कर रहे थे कि उनका विराट बेहतरीन पारी खेले। इस कॉलोनी वालों ने विराट कोहली को यहां सुबह-शाम खेलते हुए देखा है। इधर ही विराट कोहली का बचपन बीता। इधर अभी सामाजिकता बची हुई है। विराट कोहली 2011 की वर्ल्ड कप विजयी टीम इंडिया का सदस्य था। वर्ल्ड कप जीत कर वापस घर आया तो एलआईसी कॉलोनी के दोस्तों के साथ मस्ती करने लगा। उसके घर में ही यंग ब्रिगेड का जमावड़ा लगा रहता। विराट सुनाता और सुनते बाकी सब। अब उसके पास पैसा आ गया था। इसलिए खेल के बाद वो अपने दोस्तों को पश्चिम विहार की एच-9 की या फिर ज्वालाहेड़ी की मार्केट में लेकर जाने लगा। ये सब कभी-कभी राजौरी गार्डन भी जाने लगे। वहां पर जाकर खाई जाती आइसक्रीम। स्टारडम से कोसों दूर बसती थी उसकी दुनिया। वो यहां पर रहते हुए सुपर स्टाऱ बन गया था। पर वो एलआईसी कॉलोनी के किसी अंकल जी या आंटी जी के चरण स्पर्श करने से कभी पीछे नहीं हटा। शादी से पहले ही विराट कोहली ने अपनी मां के साथ गुरुग्राम में शिफ्ट कर लिया था। वहां पर बना लिया किले जैसा घर। पर उसका पश्चिम विहार से रिश्ता बना हुआ है। उसका बड़ा भाई विकास अब भी एलआईसी कॉलोनी में ही सपरिवार रहता है। उसे विराट ‘वीर जी’ कहता है। विराट कोहली कितनी ही बुलंदियों को छू ले पर एलआईसी कॉलोनी वालों के लिए वह अब भी चीकू ही है। वे उसे चीकू ही कहते हैं।
विराट कोहली सरीखे खिलाड़ी कमजोर प्रतिदंदियों के खिलाफ जल्दी आउट हो जाते हैं। लेकिन, जब चुनौती बड़ी होती है तब ये रंग में आ जाते हैं। विराट कोहली टी-20 वर्ल्ड कप में फाइनल से पहले कुछ खास नहीं कर पा रहे थे। हां, वे फाइनल में छा गए।विराट कोहली विश्व नागरिक बन चुके हैं। उन्हें उन सब देशों में पसंद किया जाता हैं, जहां पर क्रिकेट खेली जाती है।
विराट कोहली का क्रिकेट के मैदान में जुझारू तरीके से खेलने के अलावा एक दूसरा भी चेहरा है। वे जब क्रिकेट नहीं खेल रहे होते हैं या कहें कि फुर्सत में होते हैं तो वे सपरिवार वृंदावन जाना पसंद करते हैं। विराट कोहली वृंदावन में श्री परमानंद जी का आशीर्वाद लेने जाते हैं। वे ऋषिकेश में दयानंद गिरि आश्रम में भी जाते हैं। दयानंद गिरि आश्रम में विराट और उनकी पत्नी अनुष्का कई बार यात्रा कर चुकी है। वे कुछ समय पहले उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने सुबह चार बजे भस्म आरती की और भगवान का आशीर्वाद लिया। विराट कोहली ने आरती के बाद मंदिर के गर्भगृह में जाकर पंचामृत पूजन अभिषेक किया। विराट कोहली ने गले में रुद्राक्ष की माला भी धारण की।
विराट कोहली ने टी-20 क्रिकेट से सन्यास लेने की घोषणा कर दी है। उनकी इस घोषणा से उनके करोड़ों चाहने वाले उदास तो जरूर हुए होंगे। बस इतनी गनीमत है कि वे अभी एक दिवसीय क्रिकेट और टेस्ट मैच खेलते रहेंगे। विराट कोहली क्रिकेट और ब्रांड की दुनिया के बादशाह हैं। विराट कोहली स्मार्ट और हैंडसम हैं। उन्हें सुपर फिट रहने का जुनून है। उनसे एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी फिटनेस के बारे में पूछा। विराट कोहली का कहना था कि मुझे लगा कि अगर अपनी फिटनेस पर ध्यान नहीं दिया तो मेरा करियर खत्म हो जाएगा। वह बहुत नपा-तुला खाना खाते हैं। जिस व्यक्ति से प्रधानमंत्री फिटनेस के बारे में पूछे, उससे आप अंदाजा ला सकते हैं कि उसका कद क्या होगा। प्रधानमंत्री मोदी उनके विवाह में भी शामिल हुए थे।
अपनी तमाम उपलब्धियों के बावजूद विराट कोहली की विनम्रता अनुकरणीय है। वे बिशन सिंह बेदी के सार्वजनिक रूप से चरण स्पर्श करते थे। दिल्ली क्रिकेट के केन्द्र फिरोजशाह कोटला मैदान में होने वाले कार्यक्रमों में विराट कोहली कई बार बेदी के चरण स्पर्श करते हुए देखे गए। उन्होंने यह मुकाम परिश्रम, साधना और पक्के इरादे से पाया था। विराट कोहली का संबंध दिल्ली के एक सामान्य बिजनेस करने वाले परिवार से है। विराट के पापा प्रेम कोहली और मां सरोज ने उन्हें अभावों के बावजूद हरसंभव आगे बढ़ने के अवसर दिए। आजकल शांत दिखने वाले विराट कोहली कुछ साल पहले तक काफी अलग थे। वे बात-बात पर आवेश में आ जाया करते थे।
आपको याद होगा कि पिछले साल मार्च के महीने में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में टेस्ट शुरू होने से पहले जब भारत का राष्ट्रगान हुआ तो प्रधानमंत्री मोदी, विराट कोहली और भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा साथ-साथ खड़े थे।
विराट कोहली से बड़े बड़े ब्रांड जुड़ने के लिए बेकरार रहते हैं। विराट कोहली ने अपना पहला एड कैम्पेन 2010 में किया था। फास्ट्रैक का ये कैम्पेन उन्होंने अभिनेत्री जिनिलिया डिसूजा के साथ किया था। वो डील थी सिर्फ 25 लाख की और आज कोहली 7 करोड़ रुपये रोज के हिसाब से लेते हैं किसी ब्रांड के विज्ञापन के लिए। विराट कोहली पैसे कमाने के लिए ही किसी भी उत्पाद को प्रमोट नहीं करते हैं। विराट कोहली शीतल पेय पदार्थ पेप्सी और गोरा बनाने वाली एक उत्पाद के प्रचार करने से मना कर दिया था। विराट कोहली मानते हैं कि ये उत्पाद जंक फूड और नस्लवाद को बढ़ावा देते हैं। आप चाहें तो ऊपर वाले का धन्यवाद कर सकते हैं कि आप विराट कोहली को मैदान में खेलते हुए देख रहे हैं
सोमवार, 1 जुलाई 2024
अब आईपीसी की धाराओं की जगह, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) होगी लागू
शुक्रवार, 28 जून 2024
नीट सहित अहम प्रतियोगिताओं में पेपर लीक मामले दुर्भाग्यपूर्ण
बसंत कुमार
अभी आम चुनावों से कुछ माह पूर्व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक का मामला थमा ही नहीं था कि पूरे देश में मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा नीट में भारी गड़बड़ी और पेपर लीक के मामले ने पूरे देश में मेडिकल में प्रवेश के इच्छुक छात्रों के मन में निराशा और अशांति फैला दी है। पेपर लीक की समस्या सिर्फ उत्तर प्रदेश या बिहार जैसे पिछडा समझे जाने वाले राज्यो तक ही सीमित ही नहीं है। पेपर लीक की समस्या एक महामारी की तरह एक संगठित रूप से संचालित मशीनरी की तरह काम कर रही है, जिसमे छात्र माफिया, कोचिंग सेंटर, प्रिंसिपल और अधिकारी तक शामिल है। जम्मू से लेकर उत्तर प्रदेश, कर्नाटक से लेकर गुजरात और अरुणाचल प्रदेश तक पिछले 5 वर्षों में पेपर लीक के 41 मामलों की आधिकारिक मामलों में पुष्टि हुई है। महामारी की तरह फैली हुई इस बीमारी को रोकने में शिक्षा बोर्ड, कर्मचारी चयन आयोग और अन्य भर्ती एजेंसियां पूरी तरह से असफल हुई है।
पता चला है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अध्यादेश की जरिये इन मामलों को रोकने के लिए आजीवन कारावास् समेत एक करोड़ रुपए तक के फाइन का प्रावधान कर दिया है, अब देखना है कि इतनी सख्त सजा के प्रावधान के बावजूद परीक्षाओं के पेपर लीक के मामलों में कमी आयेगी या नहीं। अब यह समस्या एक सामाजिक समस्या बन गई है। चुनाव के समय हर राजनीतिक दल अपने अपने समर्थकों को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की घोषण करता है जिससे उन्हें वोट मिल सके। पर कोई भी दल युवाओं को इस तरह का आश्वासन देने की हिम्मत नहीं करता कि हम देश में युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्ष पारदर्शितापूर्ण परीक्षा दे पाएंगे। इस मामले में संघ लोक सेवा आयोग को छोड़कर सारे भर्ती बोर्ड या भर्ती एजेंसियां असफल रहे हैं। वर्ष 2022 में राजस्थान में धोखाधड़ी विरोधी कानून भी पारित किया गया और इसमे सजा के तौर पर आजीवन कारावास के प्रावधान को शामिल किया गया। भारतीय संसद द्वारा फरवरी 2024 में इसी तरह का कानून पारित करने के बावजूद आज भी इस अपराध में सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए गए है।
युवाओं के लिए पेपर लीक की घटनाएं पीड़ादायक और विनाशकारी है, यह जिंदगी में रुकावट, तनावपूर्ण परिवार और तार-तार हो जाने वाले को जन्म देती है और राज्य की निष्पक्ष रूप में भर्ती परीक्षा आयोजित करने में असमर्थता प्रदर्षित करती हैं और ये राज्य की सेवा में आयी अक्षमता भी दर्शाती है। जब केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सांसद के रूप में शपथ लेने जा रहे थे तो पूरे विपक्ष में नीट-नीट के नारे लगाकर उन्हें हूट किया, जो उचित नहीं है। यह सच है कि सिविल सर्विस और आईआईटी के पश्चात् नीट देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाती है और इसके पेपर लीक होना और कुछ सेलेक्टेड लोगों को ग्रेस मार्क देना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस समस्या के प्रति सभी दलों को पार्टी लाइन से हटकर संजीदगी से रोकने की आवश्यकता है क्योंकि एक दूसरे पर दोषारोपण से इस समस्या से छुटकारा नहीं मिलने वाला। विपक्षी गठबंधन इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि पिछले पांच वर्षों में राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस के कार्यकाल में सबसे अधिक पेपर लीक हुए और उसी कांग्रेस के सांसद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नीट-नीट करके हूट कर रहे थे, वहीं इंडिया गठबंधन के सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल के तीन वरिष्ठ नेता लालू यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पर लैंड फॉर जाब स्कैम में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। ऐसी घटनाओं से व शिक्षित युवा जिनके पास न पैसा है न जुगाड़ है, निराश और हताश होकर आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं।
एक समय लोकसभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण के लिए बहस चल रही थी और इस बिल के विरोध में बोलते हुए समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा कि यदि प्रमोशन में भी आरक्षण दिया गया तो हमे कुशल और दक्ष सचिव और कैबिनेट सचिव स्तर के अधिकारी नहीं मिलेंगे और मेरे विचार में श्री मुलायम सिंह यादव के विचारों पर बहस या चर्चा की जा सकती है और आरक्षण का विरोध करने वाले यह भी तर्क देते है कि यदि 30% अंक प्राप्त करने वाले डॉक्टर बनेंगे तो मरीजों का इलाज कैसे होगा। पर कोई माई का लाल इस बात पर प्रश्न खड़ा नहीं करता कि पैसे और रसूक के बल पर निकम्मे लोग पेपरलीक कराकर डॉक्टर, पुलिस कर्मी और रेल कर्मी बन जायेंगे तो मेरिट का रोना रोने वालों का क्या होगा और तब हमारे पुलिस और प्रशासन की दक्षता पर विपरीत असर नहीं पड़ेगा। यदि हमे पुलिस और प्रशासन को दक्ष बनाना है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और सोल्वर गैंग को जड़ से उखाड़ देना होगा, इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को अपने मतभेद भुलाकर इस समस्या का हल निकालना होगा। जहां आज हमने पूरे विश्व के समक्ष एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में सफलता पाई है पर वहीं हम सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षाओं में पूरी निष्पक्षता और पारदर्षिता स्थापित करने में पूरी तरह से असफल रहे है और यही हमारा दुर्भाग्य है।
देश में शिक्षित युवा सरकार द्वारा आउटसोर्सिंग के नाम पर संविदा के आधार पर भर्ती किए गए कर्मचारियों से काम चला रही प्रैक्टिस से हताश और निराश है और दूसरी ओर पेपर लीक और पेपर सोल्वर् गैंग के कारण वे बेहद निराशा जनक हाल में पहुँच गए हैं, आखिर विकास का ढोल पीटने वाली सरकार इन युवाओं के लिए कब सोचेगी।
गुरुवार, 27 जून 2024
पाक सेना कदम दर कदम अपना खोया वर्चस्व हासिल कर रही है
नीट सहित अहम प्रतियोगिताओं में पेपर लीक मामले दुर्भाग्यपूर्ण
![]() |
बसंत कुमार
अभी आम चुनावो से कुछ माह पूर्व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक का मामला थमा ही नहीं था कि पूरे देश में मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा नीट में भारी गड़बड़ी और पेपर लीक के मामले ने पूरे देश में मेडिकल में प्रवेश के इच्छुक छात्रों के मन में निराशा और अशांति फैला दी है। पेपर लीक की समस्या सिर्फ उत्तर प्रदेश या बिहार जैसे पिछड़ा समझे जाने वाले राज्यों तक ही सीमित ही नहीं है। पेपर लीक की समस्या एक महामारी की तरह एक संगठित रूप से संचालित मशीनरी की तरह काम कर रही है, जिसमे छात्र माफिया, कोचिंग सेंटर, प्रिंसिपल और अधिकारी तक शामिल है। जम्मू से लेकर उत्तर प्रदेश, कर्नाटक से लेकर गुजरात और अरुणाचल प्रदेश तक पिछले 5 वर्षो में पेपर लीक के 41 मामलो की आधिकारिक मामलो में पुष्टि हुई है। महामारी की तरह फैली हुई इस बीमारी को रोकने में शिक्षा बोर्ड, कर्मचारी चयन आयोग और अन्य भर्ती एजेंसिया पूरी तरह से असफल हुई है।
पता चला है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अध्यादेश की जरिये इन मामलों को रोकने के लिए आजीवन कारावास समेत एक करोड़ रुपए तक के फाइन का प्रावधान कर दिया है, अब देखना है कि इतनी सख्त सजा के प्रावधान के बावजूद परीक्षाओं के पेपर लीक के मामलो में कमी आयेगी या नहीं। अब यह समस्या एक सामाजिक समस्या बन गई है, चुनाव के समय हर राजनीतिक दल अपने अपने समर्थको को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की घोषण करता है जिससे उन्हें वोट मिल सके। पर कोई भी दल युवाओ को इस तरह का आश्वासन देने की हिम्मत नहीं करता कि हम देश में युवाओ को प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्ष पारदर्शिता पूर्ण परीक्षा दे पायेंगे। इस मामले में संघ लोक सेवा आयोग को छोड़कर सारे भर्ती बोर्ड या भर्ती एजेंसियां असफल रहे हैं। वर्ष 2022 में राजस्थान में धोखाधड़ी विरोधी कानून भी पारित किया गया और इसमे सजा के तौर पर आजीवन कारावास के प्रावधान को शामिल किया गया। भारतीय संसद द्वारा फरवरी 2024 में इसी तरह का कानून पारित करने के बावजूद आज भी इस अपराध में सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए गए है।
युवाओं के लिए पेपर लीक की घटनाएं पीड़ादायक और विनाशकारी है, यह जिंदगी में रुकावट, तनाव पूर्ण परिवार और तार तार हो जाने वाले को जन्म देती है और राज्य की निष्पक्ष रूप में भर्ती परीक्षा आयोजित करने में असमर्थता प्रदर्षित करती हैं और ये राज्य की सेवा में आयी अक्षमता भी दर्शाती है। जब केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सांसद के रूप में शपथ लेने जा रहे थे तो पूरे विपक्ष में नीट नीट के नारे लगाकर उन्हें हूट किया, जो उचित नहीं है। यह सच है कि सिविल सर्विस और आईआईटी के पश्चात् नीट देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाती है और इसके पेपर लीक होना और कुछ सेलेक्टेड लोगों को ग्रेस मार्क देना बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण है।
इस समस्या के प्रति सभी दलों को पार्टी लाइन से हटकर संजीदगी से रोकने की आवश्यकता है क्योंकि एक दूसरे पर दोषारोपण से इस समस्या से छुटकारा नहीं मिलने वाला। विपक्षी गठबंधन इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि पिछले पांच वर्षो में राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस के कार्य काल में सबसे अधिक पेपर लीक हुए और उसी कांग्रेस के सांसद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नीट नीट करके हूट कर रहे थे, वहीं इंडिया गठबंधन के सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल के तीन वरिष्ठ नेता लालू यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पर लैंड फॉर जाब स्कैम्प् में चार्ज शीट दाखिल हो चुकी है। ऐसी घटनाओ से व शिक्षित युवा जिनके पास न पैसा है न जुगाड़ है, निराश और हताश होकर आत्म हत्त्या जैसे कदम उठाते है।
एक समय लोकसभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियो के लिए पदोन्नति में आरक्षण के लिए बहस चल रही थी और इस बिल के विरोध में बोलते हुए समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा कि यदि प्रमोशन में भी आरक्षण दिया गया तो हमे कुशल और दक्ष सचिव और कैबिनेट सचिव स्तर के अधिकारी नहीं मिलेंगे और मेरे विचार में श्री मुलायम सिंह यादव के विचारों पर बहस या चर्चा की जा सकती है और आरक्षण का विरोध करने वाले यह भी तर्क देते है कि यदि 30% अंक प्राप्त करने वाले डॉक्टर बनेंगे तो मरीजो का इलाज कैसे होगा। पर कोई माई का लाल इस बात पर प्रश्न खड़ा नहीं करता कि पैसे और रसूक् के बल पर निकम्मे लोग पेपर लीक कराकर डॉक्टर, पुलिस कर्मी और रेल कर्मी बन जायेंगे तो मेरिट का रोना रोने वालो का क्या होगा और तब हमारे पुलिस और प्रशासन की दक्षता पर विपरीत असर नहीं पड़ेगा। यदि हमें पुलिस और प्रशासन को दक्ष बनाना है तो प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और सोल्वर गैंग को जड़ से उखाड़ देना होगा, इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को अपने मतभेद भुलाकर इस समस्या का हल निकालना होगा। जहां आज हमने पूरे विश्व के समक्ष एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में सफलता पाई है पर वहीं हम सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षाओं में पूरी निष्पक्षता और पारदर्षिता स्थापित करने में पूरी तरह से असफल रहे है और यही हमारा दुर्भाग्य है।
देश में शिक्षित युवा सरकार द्वारा आउट सोर्सिंग के नाम पर संविदा के आधार पर भर्ती किए गए कर्मचारियों से काम चला रही प्रैक्टिस से हताश और निराश है और दूसरी ओर पेपर लीक और पेपर सोल्वर् गैंग के कारण वे बेहद निराशा जनक हाल में पहुँच गए हैं, आखिर विकास का ढोल पीटने वाली सरकार इन युवाओ के लिए कब सोचेगी।
http://nilimapalm.blogspot.com/
musarrat-times.blogspot.com



