रविवार, 9 जून 2024

परिणामविहीन है कथित भविष्यवक्ताओं का शब्द दंगल

भविष्य की आहट 

डा. रवीन्द्र अरजरिया

लोकसभा चुनावों में मतदान थमते ही भविष्य वक्ताओं की बाढ सी आ गई है। सात चरणों में हुई रायसुमारी के परिणाम मशीनों में बंद हो गये हैं। कुछ ही  घंटों बाद वास्तविकता सामने आ जायेगी। राजनैतिक गठबंधन स्वत: सुखाय को लेकर जीत के नाहक दावे कर रहे हैं जबकि व्यवसायिक प्लेटफार्म एग्जिट पोल के नाम पर जबरजस्ती का शब्द दंगल आयोजित करके धनार्जन में जुटे हैं। देश की आवास के मन-मस्तिष्क में मनमाने आंकडों की फसलें बोई जा रहीं हैं। मृगमारीचिका के पीछे दौडाने की कोशिशों में लगे मुगेरी लाल अब भी अपने हसीन सपनों को कुछ घंटों और जीवित रखने के लिए माथ पच्ची कर रहे हैं। राष्ट्रवाद, विकासवाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद, भाषावाद, स्वार्थवाद, लालचवाद, सम्प्रदायवाद, आस्थावाद के साथ-साथ शून्यवाद भी इस बार के चुनावों में बडे मुद्दे बनाकर सामने आते रहे। अतीत के मनमाने आंकडों को सोशल मीडिया के अनगिनत देशी-विदेशी प्लेटफार्म से निरंतर प्रसारित किया जाता रहा। 
अमेरिकन रिपोर्ट को सही मानें तो इजराइल की एक फर्म ने तो योजनाबध्द ढंग से भारत के चुनावों को प्रभावित करने के लिए एआई यानी आर्टिफीशियल इंटेलिजेंसी जैसी तकनीक का भरपूर उपयोग किया। इस कारक को भविष्य की आहट में विदेशी षडयंत्रकारियों के व्दारा लोकसभा चुनावों में कूदने के रूप में पहले भी रेखांकित किया जा चुका है, जिसकी पुष्टि अब अमेरिकन रिपोर्ट ने अब हुई है। चैटजीपीटी बनाने वाली कम्पनी ओपन एआई ने अपनी रिपोर्ट में घोषित किया है कि भारत के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए उसके प्लेटफार्म को चीन, इजराइल, ईरान और रूस की धरती से भाजपा के विरुध्द उपयोग करने का प्रयास किया गया है। इन प्रयासों के अधिकांश भाग को उसने बहुत ही सजगता के साथ असफल कर दिया। इस षडयंत्र को एक अभियान के रूप में चलाया गया था। इसकी शुरूआत इजराइल स्थित एक नेटवर्क ने भारत की मौजूदा सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी की आलोचना तथा विपक्षी कांग्रेस पार्टी की प्रशंसा के रूप में वातावरण निर्मित करने हेतु किया। यह कुकृत्य मई माह में सामने आया और कम्पनी ने तत्काल इसे रोकने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये। योजना के अनुसार इजराइल से संचालित अकाउण्ट्स के एक समूह का उपयोग गुप्त अभियानों के लिए कन्टेन्ट बनाने, एडिटिंग करने तथा उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के लिए किया गया। इन कन्टेन्ट्स को एक्स, फेसबुक, इंस्ट्राग्राम, यूट्यूब सहित विभिन्न लोकप्रिय साइट्स पर शेयर किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नेटवर्क ने मनगढन्त नामों से अकाउण्ट बनाये तथा उनका उपयोग भारत के लोकसभा चुनावों को सत्ताधारी दल के विरोध में करके कांग्रेस को लाभ पहुंचाने की नियत से किया गया। इस रिपोर्ट के खुलासे के पहले ही रेखांकित किया जा चुका था कि किस तरह से चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की केन्द्रीय समिति के स्वामित्व वाले ग्लोबल टाइम्स व्दारा चुनाव काल में जहर उगला जा रहा है। ऐसे ही प्रयास अमेरिका के अनेक राजनायिकों, कनाडा की सरकार, आतंकवाद के संरक्षक देशों एवं शत्रुभावी भूभाग व्दारा होते रहे। यह सब पूर्व निर्धारत कार्ययोजना का अंग था, जिसे विदेशी दौरों के दौरान राष्ट्रविरोधियों ने सुनिश्चित किया गया था। इसी कडी में संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर अमेरिका सहित विभिन्न देशो में वहां के कथित पत्रकारों व्दारा भारत विरोधी मुद्दे उठवाये जाते रहे। विपक्षी दलों के अनेक चर्चित चेहरों ने विदेशी दौरों में राष्ट्रविरोधी एवं घातक प्रचार किया ताकि अन्तर्राष्ट्रीय दबाव दिखाकर देश के मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके। चुनावों में मतदान की समाप्ति के बाद अब जबरजस्ती की माथा पच्ची करने का सिलसिला शुरू हो गया है। कुछ घंटों बाद ही वास्तविक परिणाम सामने आने वाले हैं तब भी संभावनाओं की भंवर में देश की आम आवास को डुबोने की कोशिशें की जा रहीं हैं। 
जीत के आंकडे, सीटों की संख्या, मुद्दों का रेखांकन, भावी योजनायें, सत्ता पर काबिज होते ही कामों की सूची जैसे अनेक बिन्दुओं पर चल रही चल रही बहस कथित भविष्य वक्ताओं के शब्द दंगल से अधिक अस्तित्व नहीं रखता। कथित बुध्दिजीवियों के मनमाने वक्तव्यों को प्रवचन की तरह परोसने का क्रम साइबर जगत के साथ-साथ चौराहों से लेकर चौपालों तक चल निरंतर चल रहा है। अनेक स्थानों पर पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के मध्य वाक्य युध्द से लेकर हाथापाई तक की स्थितियां भी देखने को मिल रहीं हैं। चुनावी दौर मेें हिंसा का खुला खेला धीरे-धीरे नेपथ्य में चला गया। लोकतंत्र के हत्यारों की फाइलों पर धूल डालने की कोशिशें अभी से शुरू हो गई हैं। 
बंगाल तो देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां की सरकार आरोपी को बचाने के लिए उच्चतम न्यायालय तक के दरवाजे पर दस्तक देने में गर्व महसूस करती है। संवैधानिक व्यवस्था की कीमत पर मनमानियों को संरक्षण देने की दिशा में निरंतर बढोत्तरी देखी जा रही है। सब कुछ खुलेआम होने के बाद भी स्वत:संज्ञान जैसी स्थिति निर्मित न होने पर अनेक प्रश्न चिन्ह अंकित होना स्वाभाविक ही है। कभी एक गुमनाम पत्र पर उच्चतम न्यायालय संवेदनशील हो जाता है तो कभी लोकतांत्रिक संविधान की रीढ पर हो रही निरंतर चोट को भी अनदेखा किया जाता है। देश के संवैधानिक ढांचे के अनेक स्तम्भ निरंतर निरंकुशता की ओर बढते जा रहे हैं। अधिकारों के अतिक्रमण की बाढ सी आ गई है। तीनों कारक वर्चस्व की जंग में कूद पडे हैं। सामंजस्य, संतुलन और सहयोग को तो किस्तों में कत्ल किया जा चुका है। अब तो केवल उसकी लाश को वैन्टीलेटर पर रखकर जबरजस्ती आक्सीजन देने का ढोंग ही किया जा रहा है। ऐसे में राष्ट्र के सामने मुंह खोले खडी वास्तविक चुनौतियों को रेखांकित करने के स्थान पर कथित भविष्यवक्ताओं, बुध्दिजीवियों और विशेषज्ञों की चिरपरिचित जमात के मध्य शब्दों का दंगल आयोजित करना कदापि सुखद नहीं कहा जा सकता। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।
Dr. Ravindra Arjariya
Accredited Journalist
for cont. - 
+91 9425146253
+91 7017361649

शनिवार, 8 जून 2024

उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा का इतना बुरा प्रदर्शन क्यों

बसंत कुमार

वर्ष 2024 के आम चुनावो के परिणाम आ चुके है और एनडीए को तीसरी बार सरकार बनाने का जनादेश मिल चुका है पर जिस दल न लगातार दो टर्म तक शासन किया हो और सीएए, ट्रिपल तलाक़, अनुच्छेद 370 जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर महत्वपूर्ण फैसले लिए हों तथा देश को विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने में सफलता पाई हो वह इस चुनाव में 240 सीटों पर सिमट गई और 273 का जादुई आंकड़ा प्राप्त करने के लिए जनता दल (यू) और तेलगु देशम पार्टी जैसे सहयोगियों पर आश्रित होने को मजबूर है।

सबको आशा थी कि मोदी सरकार अपने तीसरे टर्म में कॉमन सिविल कोड, जनसंख्या नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला ले सकेगी, पर जिस तरह का जनादेश आया है उस पर राष्ट्रीय महत्व के इन मुद्दों पर फैसला लेना अब सरकार के लिए लेना मुश्किल हो जाएगा। चुनाव के समय जो विपक्षी दल सरकार पर संविधान नष्ट करने और आरक्षण समाप्त करने जैसे अनर्गल आरोप लगा रहे थे वे वास्तव में भाजपा के प्रगतिशील कदमों जैसे कामन सिविल कोड और जनसंख्या नियंत्रण को रोकना चाहते थे और इसी कारण देश की जनता के सामने इस प्रकार के झूठे प्रचार किये गए। परन्तु भाजपा के लिए आत्मचिंतन का विषय है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता बनाने वाले उत्तर प्रदेश में भाजपा 2019 के 66 सीटों के मुकाबले 33 सीटों पर ही क्यों सिमट गई और सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि भाजपा अयोध्या में 500 वर्षों से लंबित अयोध्या में भव्य राम मन्दिर के निर्माण के बावजूद फैजाबाद(अयोध्या) की सीट भी नहीं बचा पाई।

प्रदेश में मोदी और योगी की डबल इंजन सरकार की अनेका नेक उपलब्धियों के बावजूद प्रदेश में भाजपा की इतनी दुर्गति क्यों हुई। इस विषय में प्रदेश लोकसभा के लिए प्रत्याशियों के चुनाव के लिए बनाई गई हाई कोर कमेटी को दिल्ली प्रदेश भाजपा से सीख लेनी चाहिए थी जिन्होंने अपने गौतम गंभीर, डॉ. हर्ष वर्धन, मीनाक्षी लेखी जैसे बड़े नाम वाले 6 सांसदों के टिकट काटकर उन लोगों को टिकट दे दिये जिनके विरुद्ध जनता में नाराजगी न हो और ऐसा करके उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के गठबंधन होने के बावजूद 7 की सातों सीट पर कब्जा कर लिया। परंतु उत्तर प्रदेश भाजपा में टिकट वितरण का उत्तरदायित्व उन लोगों को दिया गया जो मूल रूप से भाजपाई होने के बजाय बसपा जैसी पार्टियों से आये थे और पहली बार भाजपा में टिकट बंटवारे में बसपा वाली पद्धति अपनाई गई और पार्टी द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्रोतों द्वारा कराए गए सर्वे रिपोर्टों को दरकिनार कर उन सांसदों को पुन: टिकट दे दिये गए जिनके खिलाफ क्षेत्र की जनता में आक्रोश था और पार्टी नेतृत्व इस बात को जानता था और कार्यकर्ता इस कृत्य से इतने नाराज थे कि पार्टी मीटिंगों में शक्ल दिखाने के बावजूद पार्टी प्रत्याशी को वोट दिलाने के लिए घर से बाहर नहीं निकले।

उत्तर प्रदेश भाजपा में मनमानी टिकट बटवारे के साथ साथ प्रदेश में अपेक्षित परिणाम न आने का कारण संगठन में लगे नेताओ और मंत्रियों का घमंड तथा कार्यकर्ताओं के प्रति उनका उदासीन रवैया रहा है जब भी कोई कार्यकर्ता अपनी कोई बात कहने की कोशिश करता तो उसे यह कहकर डांट दिया जाता कि तुम बस मोदी और कमल का निशान देखो बाकी कुछ मत सोचो। यह सही है कि श्री नरेंद्र मोदी जी पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा हैं तो क्या उनका नाम लेकर संगठन हाथ पर हाथ धरे बैठा रह जाए और इन दोयम दर्जे के नेताओं ने सब कुछ मोदी, योगी और भगवान् राम भरोसे छोड़ दिया और अबकी बार 400 के पार नारे लगाते रहे। किसी नेता या प्रत्याशी न सरकार की उपलब्धियों और अपने द्वारा क्षेत्र में किये गए काम की चर्चा करना जरूरी नहीं समझा और पार्टी के बड़े नेताओं के समक्ष सही बात कहने का साहस किया तो उसे छड़ दिया गया। किसी भी नेता ने विपक्ष द्वारा संविधान बदलने और आरक्षण समाप्त करने के दुष्प्रचार का जबाब देना जरूरी नहीं समझा। पर मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली की प्रदेश इकाइयों ने सब कार्यकर्ताओं को मिलाकर काम किया और वहां पर भाजपा के पक्ष में 100% परिणाम आए।

इस चुनाव में एक और बात सामने आई कि भारतीय जनता पार्टी 11 राज्यो में 11 अनुसूचित जाति की आरक्षित सीटों में से मात्र 30 सीटों पर विजय प्राप्त कर पाई जबकि वर्ष 2019 में पार्टी ने ऐसी 49 सीटों पर कब्जा किया था और इसमे अधिकांश सीटें उत्तर प्रदेश में जीती गई, वहां पर 17 आरक्षित सीटों में से 15 भाजपा के खाते में गई थी जबकि इस बार पूरे प्रदेश में मात्र 7 सीटे ही भाजपा के खाते में आई, परिणाम बताते है कि देश की 131 आरक्षित सीटों में से भाजपा की झोली में मात्र 55 ही भाजपा की झोली में आई और बाकी 71 सीटे विपक्षी दलों को मिली। सबसे अधिक ध्यान देने की बात यह है कि बहुजन समाज पार्टी का वोट शेयर 19% से गिरकर मात्र 9% ही रह गया है अर्थात संविधान की सुरक्षा के नाम पर मायावती की पार्टी के मुख्य वोटरों जाटवों ने बसपा के पक्ष में अपना वोट देकर खराब करने के बजाय अपना वोट उस दल या गठबंधन को देना चाहते थे जो भाजपा को हरा सके और इसी कारण उत्तर प्रदेश में उन्होंने सपा और कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशियों को वोट दिया।

उत्तर प्रदेश में जाटव वोटरों का भाजपा से नाराजगी का एक और कारण प्रदेश की सभी आरक्षित सीटों पर एकाध अपवाद को छोड़कर सभी जगह जाटव चमारों को टिकट न देकर सभी सीटों पर पासी और खटिक जाति के लोगों को टिकट दिया, भाजपा ने एक राष्ट्रीय महामंत्री को विशेष रूप से 2019 में हारी 18 सीटों को जीत में बदलने के लिए विशेष अधिकार के साथ भेजा पर वे जाटवों के प्रति अपने पूर्वगृह के कारण 18 हारी सीटों को तो जीत में नहीं बदल पाए अपितु जीती हुई सीटे भी हार गए। यदि जाटवों और अन्य दलितों को कांग्रेस की ओर पुन: जाने से रोकना है तो पार्टी को जाटवों के प्रति बसपा का वोट बैंक वाले पूर्वग्रह को छोड़ना होगा क्योंकि वे अब बसपा के अतिरिक्त किसी अन्य दल में अपना विकल्प तलाश रहे है और नगीना सीट से चंद्र शेखर रावण की विजय इस बात का प्रमाण है यदि पार्टी ने मछली शहर से कार्यकर्ताओं की नाराजगी को नजर अंदाज करके बीपी सरोज को टिकट न देकर वहां से किसी जाटव को टिकट दिया होता तो तो पूर्वांचल की दर्जनों भर सीटों पर स्थिति अलग होती और जाटव दलितों का वोट सपा और कांग्रेस की झोली में नहीं जाता।

यह निर्विवाद सत्य है कि आज भी नरेंद्र मोदीजी देश के सबसे लोकप्रिय नेता है और एनडीए की तीसरे टर्म की वापसी उनकी रात दिन की मेहनत का नतीजा है और भाजपा की सीटों में वर्ष 2019 के मुकाबले 60-65 सीटों का कम आने का मुख्य कारण गलत प्रत्याशियों का चयन और सांसदों एवं मंत्रियों द्वारा भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान न देना रहा है। यदि पार्टी को वर्ष 2014 और 2019 की तरह परिणाम पाना है तो पार्टी को विभिन्न सर्व रिपोर्ट को दरकिनार कर मनमाने ढंग से टिकट देने की प्रवृत्ति को बदलना होगा और संगठन में उन लोगों को शामिल करना होगा जो बड़े नेताओ की हां में हां मिलाने के बजाय उनके सामने सच्चाई से अपनी बाते कह सके।

शुक्रवार, 7 जून 2024

खुश रहने के लिए हमें भी एक दूसरे की कमियो के प्रति आंखे बंद कर लेनी चाहिए...

एक आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की। शादी के बाद दोनो की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी। वह उसे बहुत चाहता था और उसकी खूबसूरती की हमेशा तारीफ़ किया करता था। लेकिन कुछ महीनों के बाद लड़की चर्म रोग (skin Disease) से ग्रसित हो गई और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती जाने लगी। खुद को इस तरह देख उसके मन में डर समाने लगा कि यदि वह बदसूरत हो गई, तो उसका पति उससे नफ़रत करने लगेगा और वह उसकी नफ़रत बर्दाशत नहीं कर पाएगी।

 इस बीच एकदिन पति को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा। काम ख़त्म कर जब वह घर वापस लौट रहा था, उसका accident हो गया। Accident में उसने अपनी दोनो आँखें खो दी। लेकिन इसके बावजूद भी उन दोनो की जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही। समय गुजरता रहा और अपने चर्मरोग के कारण लड़की ने अपनी खूबसूरती पूरी तरह गंवा दी। वह बदसूरत हो गई, लेकिन अंधे पति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। इसलिए इसका उनके खुशहाल विवाहित जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

 वह उसे उसी तरह प्यार करता रहा। एकदिन उस लड़की की मौत हो गई। पति अब अकेला हो गया था। वह बहुत दु:खी था. वह उस शहर को छोड़कर जाना चाहता था।

 उसने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाविधि पूर्ण की और शहर छोड़कर जाने लगा. तभी एक आदमी ने पीछे से उसे पुकारा और पास आकर कहा, “अब तुम बिना सहारे के अकेले कैसे चल पाओगे? इतने साल तो तुम्हारी पत्नितुम्हारी मदद किया करती थी.” पति ने जवाब दिया, *“दोस्त! मैं अंधा नहीं हूँ। मैं बस अंधा होने का नाटक कर रहा था। क्योंकि यदि मेरी पत्नि को पता चल जाता कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूँ, तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता।*

 इसलिए मैंने इतने साल अंधे होने का दिखावा किया. वह बहुत अच्छी पत्नि थी. मैं बस उसे खुश रखना चाहता था.” .. ...

सीख-- *खुश रहने के लिए हमें भी एक दूसरे की कमियो के प्रति आखे बंद कर लेनी चाहिए.. और उन कमियो को नजरन्दाज कर देना चाहिए...*

गुरुवार, 6 जून 2024

गया लोकसभा सीट से भारी बहुमत से जीते जीतन राम माझी, संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी मोदी सरकार में

संवाददाता

नई दिल्ली। एनडीए के सहयोगी हम के सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने गया लोकसभा सीट से अपने प्रतिद्वंदी का एक लाख से अधिक के अंतर से हराकर 18वीं लोकसभा में सांसद के रूप में प्रवेश किया है। यह देश के बनबासी मुसहर समाज व महादलितों के लिए गौरव के पल है, जैसा की सर्व विदित की मोदी जी की सरकार मे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलनी तय है। मांझी जी के एनडीए के समर्थन का परिणाम था कि दिल्ली के बिहारी मतदाताओं जिनमे अधिकांश वंचित समाज के मजदूर तबके के लोग हैं भाजपा को भरपूर समर्थन दिया और भाजपा की सातों सीटों पर विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब जीतन राम माझी के राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश से मुसहर और महादलितों को समाज की मुख्य धारा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। यही डॉ. अम्बेडकर का सपना था जिसे मूर्त रूप देने के लिए प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी कृत संकल्प है और उनका माझी जी के लिए स्नेह यही दर्शता है।

बुधवार, 5 जून 2024

अमेठी चुनाव परिणाम : अहंकार के मुंह पर तमांचा

निर्मल रानी 

18वीं लोकसभा के लिये जनादेश 2024 आ चुका है। ताज़ा सूचनाओं के अनुसार नरेंद्र मोदी सरकार मंत्रिमंडल के जिन 52 केंद्रीय मंत्रियों ने लोकसभा चुनाव का चुनाव लड़ा था चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार उन 52 केंद्रीय मंत्रियों में से 20 मंत्री चुनाव हार गए हैं। पराजित मंत्रियों में एक नाम केंद्रीय महिला एवं बल विकास मंत्री एवं अमेठी से सांसद रही स्मृति ईरानी का भी है। पूरे देश की नज़र अमेठी संसदीय क्षेत्र पर थी क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट से  स्मृति ईरानी ने ही कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को लगभग 55 हज़ार मतों से पराजित कर अपना क़द ऊँचा किया था। और 2019 की इसी अमेठी विजय के साथ ही उनका बड़बोलापन व अहंकार चौथे आसमान पर पहुँच गया था। हालांकि बाद में राहुल वायनाड से सांसद बनकर पुनः संसद में पहुँच गये थे। परन्तु 2019 की अमेठी फ़तेह से उत्साहित स्मृति ईरानी स्वयं को राहुल गाँधी को न केवल बार बार चुनौती देते बल्कि कई बार उन्हें व उनके परिवार को भी अपने झूठ व अहंकार पूर्ण शब्दों से अपमानित करती सुनाई दीं। 

2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व सभी की नज़रें अमेठी सीट पर इसलिये भी टिकी थीं कि देखें इस बार कांग्रेस अमेठी से राहुल गाँधी को पुनः चुनाव मैदान में उतारकर 2019 जैसी चुनावी टक्कर को दोहराती है या नहीं। परन्तु इस बार राहुल गांधी ने जहां अमेठी के साथ लगती अपने परिवार की पुश्तैनी व पारंपरिक सीट रायबरेली से चुनाव लड़ा वहीँ अमेठी से स्मृति ईरानी के मुक़ाबले अपने 40 वर्षों के पारिवारिक विश्वासपात्र तथा अमेठी व रायबरेली में राजीव गाँधी से लेकर सोनिया गांधी तक के सहयोगी,कांग्रेस नेता किशोरी लाल शर्मा को चुनाव मैदान में उतारकर पूरे देश को हैरत में डाल दिया। चुनाव प्रचार के शुरूआती दौर में लोग यही समझ रहे थे कि कांग्रेस ने स्मृति ईरानी के सामने किशोरी लाल शर्मा को यही सोचकर मैदान में उतारा है कि यदि वे हार भी गये तो कम से कम कांग्रेस को वह अपमान नहीं सहना पड़ेगा जो राहुल को अमेठी से पुनः लड़वाने व संभवतः पुनः पराजित होने से सहना पड़ेगा। परन्तु अमेठी के मतदाताओं ने तो हर क़ीमत पर स्मृति ईरानी के ग़ुरूर व घमंड को चकनाचूर करने के साथ ही 2019 में राहुल गाँधी को यहाँ से हराने के लिये पश्चात्ताप करने के लिये कमर कस ली थी।       

यह स्मृति ईरानी ही थीं जिनकी सिफ़ारिश पर 18 सितंबर 2023 उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अमेठी के मुंशीगंज इलाक़े में स्थित संजय गांधी  मेमोरियल अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था और वहां की ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं बंद कर दी थीं। इस अस्पताल के लाइसेंस को निलंबित करने के लिये बहाना यह ढूँढा गया था कि यहाँ ऑपरेशन के बाद एक महिला मरीज़ की मौत हो गयी थी। पूरे देश के निजी व सरकारी अस्पतालों में ऐसी अनगिनत मौतें रोज़ होती रहती हैं। क्या किसी अस्पताल का लाइसेंस इस तरह के कारणों से निलंबित किया जाता है ? परन्तु चूँकि यह अस्पताल गाँधी परिवार द्वारा स्थापित व संचालित था और  कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाले संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता था इसलिये द्वेष वश इसे बंद करवा दिया गया। परिणामस्वरूप अमेठी क्षेत्र की जनता इतनी परेशान हुई कि अस्पताल के बाहर तमाम स्थानीय लोगों ने धरना दिया व हड़ताल की। आख़िरकार इलाहाबाद उच्च न्यायलय की लखनऊ पीठ द्वारा संजय गांधी अस्पताल के लाइसेंस को निलंबित करने के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर रोक लगायी गयी। तब क्षेत्र की जनता को राहत मिली। स्मृति ईरानी के कहने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अमेठी ज़िला इकाई ने उसी समय यह मांग भी की थी कि संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट का प्रबंधन मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी को सौंप दिया जाए जो उस समय क्रमशः सुल्तानपुर और पीलीभीत से भाजपा सांसद थे। इस मांग से भी यह स्पष्ट था कि स्मृति ईरानी को इस अस्पताल में सोनिया गांधी की दखलअंदाज़ी सहन नहीं थी। 

इसी तरह  ईरानी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी के अन्तर्गत जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र में दैनिक भास्कर के एक पत्रकार द्वारा एक सवाल किये जाने पर भड़क गयीं और उस ग़रीब स्ट्रिंगर पत्रकार को नौकरी से निकलवा दिया। पूरे देश में उनकी इस धमकी का वीडिओ भी वायरल हुआ था। जहाँ तक महिला बल विकास मंत्री होने का सवाल है तो संसद में मणिपुर में महिलाओं को नग्न घुमाने की चर्चा करने मात्र से वे इतनी आग बबूला हुईं थीं कि उसकी तुलना कांग्रेस शासित राज्यों की घटनाओं से करते हुये गला फाड़ कर चीख़ने लगीं। यह भी पूरे देश ने देखा। देश का गौरव, विश्वस्तरीय पदक विजेता महिला पहलवानों का एक भाजपा सांसद द्वारा शारीरिक रूप से अपमान किये जाने के विषय पर भी उनके मुंह में मट्ठा जमा रहा। इसी 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान वे मध्य प्रदेश की एक सभा में यह झूठ बोलती सुनाई दीं कि-'सोनिया मैडम (सोनिया गांधी) को नहीं पता कि राम भगवान कौन हैं। जब वह सत्ता में थीं तो कहती थीं कि राम का कोई अस्तित्व नहीं हैं। आज उनके बच्चे राहुल गांधी व प्रियंका गांधी राम भक्तों से वोट मांगने घूम रहे हैं।' जबकि सोनिया गांधी ने कभी भी ऐसे शब्द नहीं बोले।  

स्मृति ईरानी ने इसी चुनाव अभियान में मध्य चेन्नई के भाजपा उम्मीदवार विनोज पी सेल्वम के समर्थन में चुनाव प्रचार के दौरान साम्प्रदायिक विद्वेष फैलाते हुये कहा था कि  "देश में ऐसे कई राज्य हैं जहां जय श्री राम बोलने पर इंडी गठबंधन के सहयोगियों ने लोगों का क़त्ल किया है। ऐसा पश्चिम बंगाल और केरल में हुआ है। आज ये हमारा सबसे बड़ा सौभाग्य है कि हम प्रभु श्रीराम के चरणों में अपना शीश झुकाए खड़े हैं। मंदिर का निर्माण हुआ और प्रभु श्रीराम की महिमा देखिए कि जिन्होंने उनके अस्तित्व को नकार दिया था, उन्हें भी भगवान राम ने अपने दर पर बुलाया। उनका अहंकार स्पष्ट था क्योंकि उन्होंने राम के नेतृत्व को भी अस्वीकार कर दिया था।" इतनी नफ़रत फैलाने के बावजूद बीजेपी के विनोज पी सेल्वम को मात्र 1 लाख 69 हज़ार 159 वोट मिले जबकि डीएमके के उम्मीदवार ने 4 लाख 13 हज़ार 848 मत हासिल कर नफ़रत और झूठ की राजनीति करने वालों को पराजित किया।

यही स्मृति ईरानी ही हैं जिन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बड़े ही अहंकार पूर्ण लहजे में कहा था कि "अगर मेरी आवाज़ राहुल गांधी तक पहुंच रही है तो मैं उनको बताना चाहूंगी कि उनके जैसे बहुत आए हैं और गए हैं लेकिन हिंदुस्तान है, था और हमेशा रहेगा।" आख़िरकार अमेठी की जनता ने स्मृति ईरानी को इस बार कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों 1 लाख 67 हजार 196 मतों के भारी अंतर से हरा कर अमेठी की जनता ने यह जवाब दे ही दिया कि इस संसदीय क्षेत्र में भी उनके जैसे बहुत आए और गए हैं लेकिन इस क्षेत्र में गाँधी परिवार का वर्चस्व कल भी था और भविष्य में भी रहेगा। 

http://mohdriyaz9540.blogspot.com/

http://nilimapalm.blogspot.com/

musarrat-times.blogspot.com

http://naipeedhi-naisoch.blogspot.com/

http://azadsochfoundationtrust.blogspot.com/