गुरुवार, 6 जून 2024

गया लोकसभा सीट से भारी बहुमत से जीते जीतन राम माझी, संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी मोदी सरकार में

संवाददाता

नई दिल्ली। एनडीए के सहयोगी हम के सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने गया लोकसभा सीट से अपने प्रतिद्वंदी का एक लाख से अधिक के अंतर से हराकर 18वीं लोकसभा में सांसद के रूप में प्रवेश किया है। यह देश के बनबासी मुसहर समाज व महादलितों के लिए गौरव के पल है, जैसा की सर्व विदित की मोदी जी की सरकार मे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलनी तय है। मांझी जी के एनडीए के समर्थन का परिणाम था कि दिल्ली के बिहारी मतदाताओं जिनमे अधिकांश वंचित समाज के मजदूर तबके के लोग हैं भाजपा को भरपूर समर्थन दिया और भाजपा की सातों सीटों पर विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब जीतन राम माझी के राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश से मुसहर और महादलितों को समाज की मुख्य धारा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। यही डॉ. अम्बेडकर का सपना था जिसे मूर्त रूप देने के लिए प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी कृत संकल्प है और उनका माझी जी के लिए स्नेह यही दर्शता है।

बुधवार, 5 जून 2024

अमेठी चुनाव परिणाम : अहंकार के मुंह पर तमांचा

निर्मल रानी 

18वीं लोकसभा के लिये जनादेश 2024 आ चुका है। ताज़ा सूचनाओं के अनुसार नरेंद्र मोदी सरकार मंत्रिमंडल के जिन 52 केंद्रीय मंत्रियों ने लोकसभा चुनाव का चुनाव लड़ा था चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार उन 52 केंद्रीय मंत्रियों में से 20 मंत्री चुनाव हार गए हैं। पराजित मंत्रियों में एक नाम केंद्रीय महिला एवं बल विकास मंत्री एवं अमेठी से सांसद रही स्मृति ईरानी का भी है। पूरे देश की नज़र अमेठी संसदीय क्षेत्र पर थी क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट से  स्मृति ईरानी ने ही कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को लगभग 55 हज़ार मतों से पराजित कर अपना क़द ऊँचा किया था। और 2019 की इसी अमेठी विजय के साथ ही उनका बड़बोलापन व अहंकार चौथे आसमान पर पहुँच गया था। हालांकि बाद में राहुल वायनाड से सांसद बनकर पुनः संसद में पहुँच गये थे। परन्तु 2019 की अमेठी फ़तेह से उत्साहित स्मृति ईरानी स्वयं को राहुल गाँधी को न केवल बार बार चुनौती देते बल्कि कई बार उन्हें व उनके परिवार को भी अपने झूठ व अहंकार पूर्ण शब्दों से अपमानित करती सुनाई दीं। 

2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व सभी की नज़रें अमेठी सीट पर इसलिये भी टिकी थीं कि देखें इस बार कांग्रेस अमेठी से राहुल गाँधी को पुनः चुनाव मैदान में उतारकर 2019 जैसी चुनावी टक्कर को दोहराती है या नहीं। परन्तु इस बार राहुल गांधी ने जहां अमेठी के साथ लगती अपने परिवार की पुश्तैनी व पारंपरिक सीट रायबरेली से चुनाव लड़ा वहीँ अमेठी से स्मृति ईरानी के मुक़ाबले अपने 40 वर्षों के पारिवारिक विश्वासपात्र तथा अमेठी व रायबरेली में राजीव गाँधी से लेकर सोनिया गांधी तक के सहयोगी,कांग्रेस नेता किशोरी लाल शर्मा को चुनाव मैदान में उतारकर पूरे देश को हैरत में डाल दिया। चुनाव प्रचार के शुरूआती दौर में लोग यही समझ रहे थे कि कांग्रेस ने स्मृति ईरानी के सामने किशोरी लाल शर्मा को यही सोचकर मैदान में उतारा है कि यदि वे हार भी गये तो कम से कम कांग्रेस को वह अपमान नहीं सहना पड़ेगा जो राहुल को अमेठी से पुनः लड़वाने व संभवतः पुनः पराजित होने से सहना पड़ेगा। परन्तु अमेठी के मतदाताओं ने तो हर क़ीमत पर स्मृति ईरानी के ग़ुरूर व घमंड को चकनाचूर करने के साथ ही 2019 में राहुल गाँधी को यहाँ से हराने के लिये पश्चात्ताप करने के लिये कमर कस ली थी।       

यह स्मृति ईरानी ही थीं जिनकी सिफ़ारिश पर 18 सितंबर 2023 उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अमेठी के मुंशीगंज इलाक़े में स्थित संजय गांधी  मेमोरियल अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था और वहां की ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं बंद कर दी थीं। इस अस्पताल के लाइसेंस को निलंबित करने के लिये बहाना यह ढूँढा गया था कि यहाँ ऑपरेशन के बाद एक महिला मरीज़ की मौत हो गयी थी। पूरे देश के निजी व सरकारी अस्पतालों में ऐसी अनगिनत मौतें रोज़ होती रहती हैं। क्या किसी अस्पताल का लाइसेंस इस तरह के कारणों से निलंबित किया जाता है ? परन्तु चूँकि यह अस्पताल गाँधी परिवार द्वारा स्थापित व संचालित था और  कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाले संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता था इसलिये द्वेष वश इसे बंद करवा दिया गया। परिणामस्वरूप अमेठी क्षेत्र की जनता इतनी परेशान हुई कि अस्पताल के बाहर तमाम स्थानीय लोगों ने धरना दिया व हड़ताल की। आख़िरकार इलाहाबाद उच्च न्यायलय की लखनऊ पीठ द्वारा संजय गांधी अस्पताल के लाइसेंस को निलंबित करने के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर रोक लगायी गयी। तब क्षेत्र की जनता को राहत मिली। स्मृति ईरानी के कहने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अमेठी ज़िला इकाई ने उसी समय यह मांग भी की थी कि संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट का प्रबंधन मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी को सौंप दिया जाए जो उस समय क्रमशः सुल्तानपुर और पीलीभीत से भाजपा सांसद थे। इस मांग से भी यह स्पष्ट था कि स्मृति ईरानी को इस अस्पताल में सोनिया गांधी की दखलअंदाज़ी सहन नहीं थी। 

इसी तरह  ईरानी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी के अन्तर्गत जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र में दैनिक भास्कर के एक पत्रकार द्वारा एक सवाल किये जाने पर भड़क गयीं और उस ग़रीब स्ट्रिंगर पत्रकार को नौकरी से निकलवा दिया। पूरे देश में उनकी इस धमकी का वीडिओ भी वायरल हुआ था। जहाँ तक महिला बल विकास मंत्री होने का सवाल है तो संसद में मणिपुर में महिलाओं को नग्न घुमाने की चर्चा करने मात्र से वे इतनी आग बबूला हुईं थीं कि उसकी तुलना कांग्रेस शासित राज्यों की घटनाओं से करते हुये गला फाड़ कर चीख़ने लगीं। यह भी पूरे देश ने देखा। देश का गौरव, विश्वस्तरीय पदक विजेता महिला पहलवानों का एक भाजपा सांसद द्वारा शारीरिक रूप से अपमान किये जाने के विषय पर भी उनके मुंह में मट्ठा जमा रहा। इसी 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान वे मध्य प्रदेश की एक सभा में यह झूठ बोलती सुनाई दीं कि-'सोनिया मैडम (सोनिया गांधी) को नहीं पता कि राम भगवान कौन हैं। जब वह सत्ता में थीं तो कहती थीं कि राम का कोई अस्तित्व नहीं हैं। आज उनके बच्चे राहुल गांधी व प्रियंका गांधी राम भक्तों से वोट मांगने घूम रहे हैं।' जबकि सोनिया गांधी ने कभी भी ऐसे शब्द नहीं बोले।  

स्मृति ईरानी ने इसी चुनाव अभियान में मध्य चेन्नई के भाजपा उम्मीदवार विनोज पी सेल्वम के समर्थन में चुनाव प्रचार के दौरान साम्प्रदायिक विद्वेष फैलाते हुये कहा था कि  "देश में ऐसे कई राज्य हैं जहां जय श्री राम बोलने पर इंडी गठबंधन के सहयोगियों ने लोगों का क़त्ल किया है। ऐसा पश्चिम बंगाल और केरल में हुआ है। आज ये हमारा सबसे बड़ा सौभाग्य है कि हम प्रभु श्रीराम के चरणों में अपना शीश झुकाए खड़े हैं। मंदिर का निर्माण हुआ और प्रभु श्रीराम की महिमा देखिए कि जिन्होंने उनके अस्तित्व को नकार दिया था, उन्हें भी भगवान राम ने अपने दर पर बुलाया। उनका अहंकार स्पष्ट था क्योंकि उन्होंने राम के नेतृत्व को भी अस्वीकार कर दिया था।" इतनी नफ़रत फैलाने के बावजूद बीजेपी के विनोज पी सेल्वम को मात्र 1 लाख 69 हज़ार 159 वोट मिले जबकि डीएमके के उम्मीदवार ने 4 लाख 13 हज़ार 848 मत हासिल कर नफ़रत और झूठ की राजनीति करने वालों को पराजित किया।

यही स्मृति ईरानी ही हैं जिन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बड़े ही अहंकार पूर्ण लहजे में कहा था कि "अगर मेरी आवाज़ राहुल गांधी तक पहुंच रही है तो मैं उनको बताना चाहूंगी कि उनके जैसे बहुत आए हैं और गए हैं लेकिन हिंदुस्तान है, था और हमेशा रहेगा।" आख़िरकार अमेठी की जनता ने स्मृति ईरानी को इस बार कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों 1 लाख 67 हजार 196 मतों के भारी अंतर से हरा कर अमेठी की जनता ने यह जवाब दे ही दिया कि इस संसदीय क्षेत्र में भी उनके जैसे बहुत आए और गए हैं लेकिन इस क्षेत्र में गाँधी परिवार का वर्चस्व कल भी था और भविष्य में भी रहेगा। 

शुक्रवार, 31 मई 2024

FARQ SIRF ITNA SA THA

Urdu is one of the most absorbing and meaningful languages indeed !

NIKAAH  & JANAAZA........

The difference between a Wedding and a Funeral beautifully captured in a poem called :

FARQ  SIRF  ITNA SA THA

Teri doli uthi,
Meri mayyat uthi,
Phool tujh par bhi barse,
Phool mujh par bhi barse,
FARQ SIRF ITNA SA THA
Tu saj gayi,
Mujhe sajaya gaya..

Tu bhi ghar ko chali,
Main bi ghar ko chala,
FARQ SIRF ITNA SA THA
Tu uth ke gayi,
Mujhe uthaya gaya...

Mehfil wahan bhi thi,
Log yahan bhi the,
FARQ SIRF ITNA SA THA
Unka hasna wahan,
Inka rona yahan...

Qazi udhar bhi tha,
Moulvi idhar bhi tha,
Do bol tere padhe, 
Do bol mere padhe,
Tera NIKAAH padha, Mera JANAAZA padha,
FARQ SIRF ITNA SA THA...
Tujhe APNAYA gaya,
Mujhe DAFNAAYA gaya.....

भारत के समाचार पत्रों के महापंजीयक कार्यालयों की मनमानी नीतियों का कड़ा विरोध करने के लिए आंदोलन करने पर विचार

भारत के समाचार पत्रों के महापंजीयक द्वारा इस वर्ष से प्रकाशकों को विषम परिस्थितियों में डाल दिया गया है । प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से प्रकाशकों को अपने-अपने समाचार पत्र व पत्रिकाओं को बंद करने का कुचक्र रचा गया है । एक तरफ तो समाचार पत्र को व्यवसाय या उद्योग का दर्जा सरकार ने आज तक नहीं दिया है । वर्षों से समाचार पत्रों व पत्रिकाओं के पंजीयन प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए है । अनेकों मामले शीर्षक संबंधी मामले लम्बित है । पंजीयन प्रमाण पत्र में संशोधन के मामले लम्बित है । इन सब प्रकरणों को निस्तारित किए बिना प्रेस सेवा पोर्टल को लागू किया जाना न्याय संगत नहीं है । ज्ञातव्य हो कि प्रेस सेवा पोर्टल में अनेकों ऐसे प्राविधान रखे गए हैं जिन्हें छोटे व मझौले समाचार पत्रों व पत्रिकाओं के प्रकाशकों के द्वारा पूरा किया जाना असंभव है । प्रेस सेवा पोर्टल शुरू किए जाने से पूर्व सभी समाचार पत्रों के संगठनों से विचार विमर्श किया जाना चाहिए था । इस वर्ष वार्षिक विवरणी ऑनलाइन दाखिल करने के लिए पहले पंजीकरण करना होगा । फिर मालिक, प्रकाशक, मुद्रक, प्रिंटिंग प्रेस, चार्टर्ड एकाउंटेंट की प्रोफाइल बनाकर अपलोड करनी पड़ेगी । प्रोफाइल के बिना वार्षिक विवरण को दाखिल नहीं कर पाएंगे । साथ ही प्रिंटिंग प्रेस को जीएसटी में पंजीकृत होना चाहिए । अन्यथा प्रकाशक वार्षिक विवरण प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे । ऐसा लगता है कि सरकार ने प्रिंट मीडिया को समाप्त करने की योजना को मूर्त रूप देने के लिए प्रेस सेवा पोर्टल की योजना को लागू किया है । हम आव्हान करते कि इस प्रेस सेवा पोर्टल का सभी प्रकाशकों को बहिष्कार करना चाहिए । जब तक प्रेस सेवा पोर्टल में वार्षिक विवरण को दाखिल करने में सरलीकरण न कर दिया जाए तब तक किसी हालत में वार्षिक विवरण प्रस्तुत नहीं किया जाएं । वर्तमान परिदृश्य में सभी प्रकाशकों को एकता के साथ इस सरकारी कुचक्र का कड़ा विरोध करने की जरूरत है । अन्यथा छोटे व मझौले अखबारों को सरकार बंद करने की योजना में सफल हो जायेगी । लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद केंद्रीय संचार ब्यूरो, प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो व भारत के समाचार पत्रों के महापंजीयक कार्यालयों की मनमानी नीतियों का कड़ा विरोध करने के लिए आंदोलन करने पर विचार किया जाएगा । सरकार को दमनात्मक नीतियों को वापिस लेने के लिए मजबूर किया जाएगा ।

सरदार गुरिंदर सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष
सदस्य, भारतीय प्रेस परिषद

एल. सी. भारतीय
सदस्य, भारतीय प्रेस परिषद

अशोक कुमार नवरत्न, राष्ट्रीय महासचिव
पूर्व सदस्य, भारतीय प्रेस परिषद
All India Small & Medium Newspapers Federation, New Delhi.

यूपी में पान मसाला और तंबाकू बेचने वालों सावधान, 1 जून से लागू नियम तोड़े तो जुर्माना और जेल

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