गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद् की तीन दिवसीय कार्यशाला/प्रदर्शनी "उत्तर प्रदेश एग्रोटेक- 2024" का आज से शुभारंभ

लखनऊ। भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद अपनी सालाना कार्यशाला व प्रदर्शनी "एग्रोटेक 2024 डेवलपमेंट मीट ऑन उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर" का आयोजन एक मार्च से करने जा रहा है। प्रदर्शनी और कार्यशाला आयोजन भारतीय कृषि खाद्य परिषद, उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के सहयोग से आयोजित कर रहा है। कार्यक्रम के प्रायोजक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और सह प्रायोजक आईपीएल बायोलोजिकल्स लिमिटेड है।
उक्त प्रदर्शनी व कार्यशाला का शुभारंभ माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उद्यान श्री दिनेश प्रताप सिंह जी करेंगे। प्रदर्शनी शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान राज्य सभा के सांसद श्री अशोक बाजपेयी जी, वरिष्ठ आईएएस व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी कृषि विभाग डॉ देवेश चतुर्वेदी, नाबार्ड के सीजीएम श्री एस के डोरा, डॉ अनीस कुमार शर्मा डायरेक्टर टेक्निकल इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड भी प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रदर्शनी का शुभारंभ होने के साथ साथ विभिन्न सत्र का आयोजन भी होगा। जिसमे प्रदेश के आला अधिकारी सहित कृषि विशेषज्ञ शामिल रहेंगे और प्रतिभागियों से विषय सम्बंधित संवाद कर उनको कृषि नवाचार से अवगत कराएँगे। विभिन्न सत्रों में प्रमुख रूप से कृषि सम्बंधित विषयो पर सारगर्भित चर्चा और संवाद का आयोजन प्रस्तावित है। कार्यक्रम के अंत में प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन द्वारा "यूपी इनोवेटिव अवार्ड्स 2024 का वितरण तमाम कृषको को किया जायेगा। साथ ही साथ प्रदर्शनी के बेस्ट स्टाल अवार्ड भी वितरित किया जायेगा।

कार्यक्रम की रूपरेख

कार्यक्रम स्थल: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, तेलीबाग

कार्यक्रम तिथि: 1 मार्च से 3 मार्च 2024

समय : प्रातः 10:30 से सांय 5: 30 तक

बुधवार, 28 फ़रवरी 2024

मोदी चुनाव का नहीं विकास का बिगुल फूंकते हैं!

फिरोज़ बख़्त अहमद 
मोदी के प्रतिद्वंदी प्रायः यह कहते सुने जाते हैं कि वे मंदिरों को प्राथमिकता इस लिए देते हैं कि वे चुनाव जीतना चाहते हैं। बहुत छोटी बात बोलते हैं ये लोग और लगता है कि अक्ल के पीछे डंडा ले कर दौड़ रहे हैं क्योंकि मोदी जैसे इन्सान को चुनाव से कोई लेना देना नहीं, न ही राजनीति से मिलने वाले लाभों व शान-ओ-शौकत से कोई सरोकार और न ही अरबों-खरबों की संपत्ति एकत्र करने की इच्छा है, बल्कि ज़मीन से जुड़े इस प्रधानमंत्री के रूप में सेवक को भारत माता को विश्व गुरु बना, ऐसी ऊंचाइयों पर ले जाना है, जहां अमेरिका, ब्रिटेन, चीन आदि के मुक़ाबले में भारत कोसों आगे हो! रही बात राम मंदिर के नाम में चुनाव जीतने की, तो इस शुभ कार्य को इन विपाक्षी दलों ने क्यों नहीं कराया? अपने ही देश में हिंदू तबके को  अदालत से 500 वर्ष संघर्ष कर अपने सबसे बड़े आराध्य की प्राप्ति मोदी ने चुनाव जीतने हेतु नहीं बल्कि इस कार्य को पूर्ण करने के लिए किया कि जिन लोगों के निकम्मेपन के कारण यह रह गया था, क्योंकि वे तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को काल्पनिक मानते हैं और राम सेतु को भी नहीं मानते!
वैसे भी भारत माता इतना विशाल देश है कि हर समय कहीं न कहीं चुनाव चलते रहते हैं और जो लोग जनता की नजर में मोदी की भांति हर प्रकार से दमदार, दिलदार, जानदार, शानदार, वफादार, सेवादार, कामदार और ईमानदार नहीं होते, जानते हैं कि चुनाव जीतना आसान नहीं, अपनी असफलता का ठीकरा मोदी पर फोड़ देते हैं। बात यह नहीं कि मोदी विजयी हों अन्यथा नहीं, देश की बागडोर जिम्मेदार हाथों में रहनी चाहिए और यह पब्लिक है, सब जानती है!
भारत वर्ष को प्रगति व उन्नति के मार्ग पर दौड़ा दिया है, उससे उनके विपक्षी दलों में खलबाली मची हुई है कि यह बंदा किस मिट्टी का बना हुआ है कि न तो रुकता है, न थकता है और न ही झुकता है कि जिस तरक्की से इस व्यक्ति ने अपने दौर में भारत को रु बरु किया है, वह अति विलक्षण है व चमत्कारिक है, जिसे पिछले किसी प्रधानमंत्री के कार्य काल में पूर्ण नहीं किया गया! मोदी को नापसंद करने वाले, गलियां बकने वाले, कोसने वाले और झोलियां फैला कर बददुआ देने वाले भली भांति जानते हैं कि मोदी जो कहते हैं, करते हैं। उन्हों ने कभी नहीं कहा, " हम देख रहे हैं, है देखेंगे। वे देखने वालों में नहीं, करने वालों में हैं।यही बात उन्हें अन्य प्रधानमंत्रियों से भिन्न करती हैं। जनता सही जज है, न कि विपक्षी, वामपंथी दल आदि।
मोदी ही वह आदमी है जो आने वाले समय मे भारत को एक स्वस्थ, सुंदर (कूड़ा, गंदगी के ढेर विहीन) देश बना सकता है। यही वो व्यक्ति है जो पूरी तरह ईमानदार है और आगे भी ईमानदार रहेगा। यही वो आदमी है जो अपने परिवार के लोगों को हमारे सिर पर नही थोपेगा।
बतौर एक वोटर, मुझे मोदी पर 100 प्रतिशत विश्वास है कि यह व्यक्ति देश के लिए कितना भी कठिन निर्णय हो उसे लेने में कभी नहीं हिचकेगा व पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकता है।चुनाव जीतेगा तो सत्ता सुख भोगने के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र की सेवा के लिए 10 साल में, यह व्यक्ति एक दिन भी खाली नहीं बैठा, कुछ न कुछ करता ही रहा, चाहे वह वंदे भारत रेल हो या काश्मीर में सबसे ऊंचा पुल बनाना हो, या दुश्मन के घर में जा कर सर्जिकल स्ट्राइक करनी हो, जिस पर विपक्षियों ने सवाल उठाए! मोदी से पूर्व जीडीपी 1.8 ट्रिलियन थी और आज 3.7 ट्रिलियन है। 
मोदी से पूर्व प्रति व्यक्ति आय 78 हज़ार थी तो आज यह 1 लाख 15 हज़ार है। मोदी से पूर्व हम 10वें आर्थिक स्थान पर थे और आज 5वें आर्थिक स्थान पर हैं। मोदी से पूर्व हमारे देश ने 200 बिलियन का व्यपार किया था और आज यह संख्या 800 बिलियन के लग हग है। मोदी से पहले हमारे पास 5  मेट्रो शहर थे, आज 21 हैं। मोदी से पूर्व हमारे पास 74 एयर पोर्ट थे और आज 160 हैं। मोदी से पूर्व केवल 40 प्रतिशत गाँवों में बिजली थी, आज 95 प्रतिशत गाँवों में बिजली है। 
मोदी से पूर्व केवल 7 एम्स थे, आज 22 हैं। मोदी से पूर्व ई-वे की लंबाई  680 किलो मीटर थी, आज 4067 मीटर है। मोदी से पूर्व रेलवे ट्रैक 25,700 किलो मीटर था, आज, 5,7,700 किलो मीटर है। मोदी से पूर्व सड़क गुणवत्ता में हम 88वें स्थान ओर थे, आज 42 वें स्थान पर है।चूंकि लेखक अपनी इसलामी जड़ों से जुड़ा मुसलमान, एक संस्कारी व राष्ट्रवादी मुस्लिम है, सिवाय भारत माता से जुड़े होने के, किसी अन्य पार्टी या संगठन से नहीं जुड़ा है, अपने मुस्लिम दीन भाईयों से गुजारिश करता है कि भले ही वे मोदी को वोट दें या न दें, मोदी से अंध रंजिश और दुश्मनी का त्याग कर, इस वासुधैव कुटुम्बकम में विश्वास रखने वाले प्रधानमंत्री के बाजुओं को मज़बूत करें, क्योंकि यह वही मोदी है, जिसने कहा है कि वह हर मुस्लिम के एक हाथ में कुरान और दुसरे में कंप्यूटर देखना चाहता है और यह कि वह मुस्लिमों को अपनी संतान की भांति समझता है व उनके साथ बराबरी का सुलूक करना चाहता है। यह वही मोदी है, जिस ने विज्ञान भवन में विश्व की सबसे बड़ी सूफ़ी संगोष्ठी की थी। या वही मोदी है जिसे छः इस्लामी देशों ने अपने सर्वोच्च इनाम दिए थे और यह वही मोदी है, जिसके सम्मान में सऊदी अरब के बादशाह सलमान ने रामायण को अरबी में अनुवाद कर भेंट किया था! इस मोदी का ही दम था जिसने अबु धाबी में मंदिर की स्थापना करे दोनों देशों में हर प्रकार से प्रगाढ़ रिश्ते बनाए!
एक सामान्य भारतवासी और दिल्ली नागरिक होने के नाते, मेरा ये दृढ़ विश्वास है कि आज के समय में यही सबसे उपयुक्त व्यक्ति है जो भारत को विश्वगुरु बना सकता है।यही वह व्यक्ति है जो भारत को आर्थिक और सैन्य महाशक्ति बना सकता है, यही वो आदमी है जो हमको तीसरी दुनिया, विकासशील देश से एक विकसित देश बना सकता है। भारत माता की जय! जय हिंद!  
(लेखक पूर्व कुलाधिपति, भारत रत्न, मौलाना आज़ाद के वंशज और वरिष्ठ स्तंभकार हैं)

शनिवार, 24 फ़रवरी 2024

विश्वास के सिंहासनों से षड्यंत्रों का शंखनाद

डा. रवीन्द्र अरजरिया
देश को धर्म के नाम पर बांटकर स्वार्थ पूर्ति के प्रयास निरंतर तेज होते जा रहें। लोकसभा के चुनावों की बयार चलते ही विश्वास के सिंहासनों से षडयंत्रों का शंखनाद होने लगा है। कहीं कल्कि पीठ के पीठाधीश्वर कलयुग की काल गणना करके  परमात्मा के अवतरण की घोषणा कर रहे हैं तो कहीं कर्नाटक की कांग्रेस सरकार मंदिरों पर टैक्स लगाने के लिए कर्नाटक हिन्दू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती संशोधन विधेयक 2024 को विधान सभा में पास करती है। कहीं असम की भाजपा सरकार मुस्लिम मैरिज एण्ड डिवोर्स एक्ट 1935 को समाप्त करती है तो वहां के मुस्लिम नेता शरीयत कानून के अनुसार ही सामाजिक व्यवस्था मानने की घोषणा करते हैं। कहीं मुस्लिम लीग के फरमान जारी होते हैं तो कहीं खुलेआम गजवा-ए-हिन्द को इस्लाम का अभिन्न अंग मानने के फतवे जारी होते हैं। कहीं हिन्दू राष्ट्र की मंचीय घोषणा होती है तो कहीं मिशनरी के द्वारा लालच के सब्जबाग दिखाये जाते हैं। चौराहों से लेकर चौपालों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरु में बैठकर मुख्यमंत्री सिध्दारमैया ने कांग्रेस के आलाकमान के इशारे पर हिन्दू मंदिरों को मुगुलकालीन जरिया कर जैसे चाबुकों से लहूलुहान करने हेतु विधान सभा में विधेयक  पेश किया और संख्या बल के आधार पर पास भी कर लिया परन्तु विधान परिषद में भाजपा के पास अधिक सदस्य होने के कारण उसे अन्तिम रूप नहीं दिया जा सका। यह वही पार्टी है जिसके आलाकमान राहुल, सोनिया, प्रियंका गांधी चुनावी काल में दर-दर गली-गली मंदिरों में माथा टेककर हिन्दू मतदाताओं के वोट बटोने के लिए प्रयास कर रहे हैं। वहीं असम की राजधानी दिसपुर में आसन जमाये मुख्यमंत्री डा. हेमंत विस्वा ने अपनी पार्टी के मुखिया के संकेत पर मुसलमानों के विवाह और तलाक की परम्परागत व्यवस्था की कानूनी मान्यता समाप्त कर दी। इस हेतु वहां के मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने घोषणा करते हुए कहा कि अब मुस्लिम विवाह और डिवोर्स से जुडे सभी मामले स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत सुलझाये जायेंगे।
दूसरी ओर इसका विरोध करते हुए असम में आल इण्डिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के मुखिया बदरुद्दीन अजमल ने मोर्चा खोल दिया जिसे आगे बढाते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद एसटी हसन ने कहा कि मुस्लिम सिर्फ शरीयत कानून को ही मानेगा। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद शहर में स्थापित दारुल उलूम मदरसा ने गजवा-ए-हिन्द को डंके की चोट पर मान्यता देते हुए फतवा जारी किया है। फतवे में कहा गया है कि भारत पर आक्रमण करने के दौरान मरने वाले महान शहीद कहलाए जायेंगे और उन्हें जन्नत नसीब होगी। यह सब कुछ देश के अन्दर बैठकर दबंगी से सोशल मीडिया की साइट पर किया जा रहा है ताकि मुसलमानों के अन्दर धार्मिक उन्माद भडकाया जा सके। इस हेतु सुन्न-अल-नसा नामक पुस्तक का जिक्र करते हुए हजरत अबू हुरैरा की हदीस का हवाला दिया गया। उसमें कहा गया कि अल्लाह के संदशवाहक ने भारत पर हमले का वायदा किया था। उन्होंने कहा था कि अगर मैं जिन्दा रहा तो इसके लिए अपनी खुद की और अपनी संपत्ति की कुर्बानी दे दूंगा। मैं सबसे महान शहीद बनूंगा। वहीं अनेक स्वयं भू हिन्दू धर्मगुरुओं के व्दारा भी हिन्दू राष्ट्र की घोषणा खुले मंचों से की जा रही है। लोगों की निजिता को सार्वजनिक करके हाल ही में लोकप्रियता की ऊंचाइयों पर पहुंचने वाले ऐसे धर्मगुरु अक्सर अपने विवादास्पद कृत्यों, वक्तव्यों और संवादों  से विष पौध ही रोपते रहते हैं। हिन्दू राष्ट्र का प्रचार भी गजव-ए-हिन्द की तरह ही माना जा रहा है। अन्तर केवल सोच का है।
हिन्दुओं की आस्था केवल समस्या के समाधान तक ही सीमित होती है जिसे अस्थाई कहा जा सकता है परन्तु मुस्लिम आस्था को कट्टरता के रूप मे स्थापित करने के निरंतर प्रयास होते रहते हैं। नेटवर्किंग की चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था के कारण ही हल्व्दानी काण्ड के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को लम्बे समय तक हथकडी पहनाना सम्भव नहीं हुआ। वह सुरक्षित इस्लामिक नेटवर्क के कारण ही अनेक राज्यों में अपने लोगों के घरों में न केवल ठहरा बल्कि पैसे, वाहन और अन्य संसाधन प्राप्त करता रहा। ऐसा ही कृत्य एक हिन्दू गायक ने विवादास्पद बयान देने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए बुंदेलखण्ड में नव प्रचारित धार्मिक स्थान के समीप आश्रय लेकर किया था। देश के गरीब इलाकों में मिशनरी द्वारा लालच का सहारा लेकर निर्धन परिवारों को धर्म परिवर्तन की ओर बढाया जा रहा है। गोरों के शासनकाल के मनमाने आवंटन आज तक यथावत मालिकाना हक के रूप में स्थापित हैं जिन्हें स्वाधीनता के अनुबंध के आधार पर तत्कालीन कथित नेताओं ने मूर्त रूप देने का काम किया था। 
अनेक स्थानों पर तो चिकित्सालय, शिक्षालय जैसी संस्थायें आज भी आम लोगों पर लागू होने वाले कानून नहीं मानतीं हैं। विशेषाधिकारों की दुहाई पर काम करने वाले कभी मानवाधिकरों की ढाल खडी कर देते हैं तो कभी अभिव्यक्त की आजादी पर संसद में बाबरी मस्जिद जिन्दाबाद के नारे बुलंद करते हैं। यह कारक लोक सभा के चुनाव काल में सुनामी की तरह ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं ताकि अंध श्रध्दा को प्रचारित करके वोट बैंक पर डाका डाला जा सके। इन प्रयासों को असफल करने के लिए आम आवाम को स्वयं आगे आना पडेगा अन्यथा आस्था के मनगडन्त मायनों को सत्ता की परिभाषा बनाने वाले अपने षडयंत्र से भाई-भाई के बीच खूनी जंग छिडवाने का मंसूबा पूरा कर लेंगे। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2024

भर्ती परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार युवाओं के साथ घोर अत्याचार

 बंसत कुमार

17-18 फ़रवरी को उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में अनुचित संसाधनों का इस्तेमाल करने के आरोप में 244 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस खबर के खुलासे के बाद समाजवादी पार्टी समेत सभी विपक्षी दलों ने सरकार पर भर्ती परीक्षा में हो रही गड़बड़ी में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए इस परीक्षा को निरस्त करके दुबारा से भर्ती परीक्षा आयोजित करने की मांग की है। यह सिर्फ एक परीक्षा में धांधली का मामला नहीं है बल्कि विगत कुछ वर्षो में आयोजित होने वाली अधिकांश परीक्षाओं में इस तरह की धांधली सामने आ रही है। इसी कारण से दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान परीक्षाओं में सफल होने के लिए अभ्यर्थियों द्वारा की जा रही धांधली को अफ़सोसजनक बताया। न्यायालय ने आगे कहा कि इस धांधली का परिणाम यह है कि निर्दोष और ईमानदार छात्र अपने साथ के लोगों के अव्यस्थित और अमर्यादित आचरण का शिकार बन रहे हैं। ऐसी स्थिति में राज्य और उनकी एजेंसियों के पास परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है।

न्यायालय की पीठ ने आगे कहा कि यह देखा गया है कि ऐसी परीक्षाएं आयोजित करने वाली एजेंसियों के लिए यह निर्धारित करना और पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है कि कितने छात्र इस तरह के तरीको और अनियमितताओं में शामिल हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली कौशल उद्यमिता विश्वविद्यालय द्वारा अधिसूचित रिक्ति में जूनियर सहायक के पद के लिए कई उम्मीदवारों की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कानून का सुव्यवस्थित सिद्धांत यह है कि चयन प्रक्रिया को दागदार नहीं किया जा सकता। किसी भी प्रकार की परीक्षा आयोजित करते समय चयन प्रक्रिया की पवित्रता बनाये रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मजे की बात यह है कि इस तरह की गड़बड़ी के लिए देश में एक सॉल्वर गैंग काम कर रहा है जिससे असली अभ्यर्थी के स्थान पर किसी और को बैठाकर प्रश्न पत्र हल कराए जाते हैं। यद्यपि पुलिस एवं प्रशासन दावा कर रही है कि दो दिन चली उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में धांधली रोकने के कड़े इंतजाम किये गए थे।

पारंपरिक पुलिस के साथ-साथ सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे, जैमर और बायोमैट्रिक संसाधनों का इस्तेमाल कर फर्जी अभ्यर्थियों, पेपर लीक और साल्वर गैंग पर नजर रखी गई। कई जगहों पर छात्राओं के जूड़े तक चेक किये गए। इसके लिए पुलिस के साथ आरएएफ और पीएसी को भी लगाया गया, साथ ही एसटीएफ भी लगातार निगरानी करती रही थी। इसके बावजूद प्रदेश भर में तमाम सालवर और अनुचित संसाधनों का प्रयोग करने वाले अनेक अभ्यर्थी गिरफ्तार किए गए। कहने का अभिप्राय यह है की सरकार की ओर से इतने भारी भरकम इंतजाम के बावजूद फर्जीवाड़ा रोकने में सरकार कामयाब नहीं हो पाई। नकल की कोशिश में लगे लोगों के पास से भारी संख्या में नकल सामग्री, माइक्रोफोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, फर्जी एडमिट कार्ड, फर्जी आधार कार्ड आदि बरामद किए गए। अभ्यर्थियों को नकल कराने के एवज में लाखों रूपए की नगद राशि वसूली गई। कहीं-कही तो सालवर ब्ल्यूटूथ डिवाइस से नकल कराते हुए पकड़े गए।

इस परीक्षा में पेपर लीक का मुद्दा भी बहुत गरमाया हुआ है। सोशल मीडिया के साथ-साथ विपक्षी दलों ने भी इसे खूब उछाला। एक ओर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर इस परीक्षा को निरस्त कर दुबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग की। वहीं कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने कहा कि जो युवा रोजगार चाहते हैं वे इसके लिए परीक्षा की तैयारी करते हैं और पेपर देने जाते हैं पर इससे पहले ही पेपर लीक हो जाता है। पेपर लीक हो जाने से लाखों युवा निराश हैं और उनके मन में आक्रोश है। यह पहली बार नहीं हो रहा है, पेपर लीक होने की घटनाएं पूरे देश में वर्षों से हो रही हैं। उत्तर प्रदेश में ये घटनाएं तब भी हो रही थी जब प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव थे। लगभग एक दशक पहले जब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव जी मुख्यमंत्री थे तब सिपाहियों की भर्ती हुई जिसमें रिश्वत लेकर और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे फिर भी इस परीक्षा से चुने हुए अभ्यर्थी ड्यूटी भी जॉइन कर लिए गए पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद उन्हें घर बैठा दिया गया पर उसके बाद मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके न्यायालय के आदेश आने के बाद दुबारा ड्यूटी पर बुला लिया गया। इस प्रकार की घटनाओ से युवा जो रात-दिन एक करके परीक्षा की तैयारी करते हैं उनमें निराशा व्याप्त होती हैं।

यह हाल सिर्फ उत्तर प्रदेश पुलिस का ही नहीं है। देश के अधिकांश भर्ती बोर्डों का यही हाल है, दो वर्ष पूर्व रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती प्रक्रिया हुई और इसमें भारी पैमाने पर सालवर्स के इस्तेमाल होने की खबरे आई और रेल प्रशासन को युवाओ का विरोध झेलना पड़ा। कई जगह गाड़ियां रोकी गई, अगर इसी प्रकार सरकारी नौकरियों में धांधलियां चलती रही तो सरकार पर, न्यायालय और प्रशासन पर से लोगों का भरोसा उठ जायेगा। इस तरह की भर्ती भी हमारी सरकार की सेवाओ की दक्षता पर भी असर डालेंगी। आज हमारे गांवों में रहने वाले मध्यम वर्ग के युवाओं के मन में यह भ्रांति उठने लगी है कि रसूक और पैसे के बगैर सरकारी नौकरी मिलना मुश्किल है। युवाओं के मन से यह भ्रम निकालने के लिए हमें अपनी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शिता पूर्ण बनाना होगा और तभी हम अपने प्रशासनिक इकाइयों से बेहतर परिणाम की आशा कर सकेंगे। गलत रास्ते से चुनकर आए लोग धनवान बनने के लिए गलत ही करेंगे और हमें यह बात समझ लेना चाहिए। सरकार को भी भर्ती प्रक्रिया को निरंतर चलने वाली सामान्य प्रक्रिया के स्थान पर इवेंट के रूप में आयोजित करने से बचना चाहिए जितने बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया होगी उतना ही गड़बड़ी की आशंका रहेगी।

सभी राजनीतिक दल और विभिन्न सामाजिक संगठन जाति के आधार पर आरक्षण के लिए पक्ष-विपक्ष आपस में टकराते हैं पर सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रिया में चल रही धांधली पर कोई भी आवाज़ नहीं उठाता। यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि विगत कुछ वर्षों में चाहे कोई भी दल सत्ता में हो सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और संदेह से परे नहीं रही है। इन परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर साल्वरों का पकडा जाना इसका प्रमाण है यदि हम सरकारी नौकरी मिलने को पूर्व की भांति योग्यता और मेहनत का परिणाम स्थापित करना चाहते हैं तो हमें इस समस्या का समाधान करना होगा।

अबू धाबी में इतिहास के नए अध्याय का निर्माण

अवधेश कुमार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में अक्षरधाम मंदिर का उद्घाटन निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक घटना है। किसी इस्लामिक देश में संपूर्ण सनातन रीति-रिवाज से मंदिर का निर्माण, पूजन, प्राण प्रतिष्ठा , उद्घाटन और बिना किसी बाधा के सारे कर्मकांडों का पालन होना सामान्य घटना नहीं है। इस मंदिर के निर्माण की कहानी पढ़ने के बाद लगता है कि असंभव संभव हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी को इस मामले में सौभाग्यशाली मानना होगा कि उनके कार्यकाल में ही इसके लिए जमीन मिली, शिलान्यास हुआ और उन्हें ही इसके उद्घाटन का भी अवसर मिला। उद्घाटन के दौरान अपने भाषण में उन्होंने कहा भी कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अबू धाबी में अक्षरधाम मंदिर के उद्घाटन का साक्षी बना हूं। 20 अप्रैल, 2019 को महंत स्वामी महाराज और प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शिलान्यास किया था और लगभग 5 वर्ष बाद दोनों ने इसका उद्घाटन भी किया। 27 एकड़ में फैला यह मंदिर 108 फीट ऊंचा है जिसकी लंबाई 262 फिट एवं चौड़ाई 180 फिट है। इसमें 18 लाख पत्थर की ईंटें लगी है और 30 हजार मूर्तियां हैं। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नह्यान की उदारता का अभिनंदन करना होगा जिन्होंने न केवल इसकी अनुमति दी बल्कि कुल 27 एकड़ जमीन दी तथा हर तरह का आवश्यक सहयोग भी किया। किंतु यह भी सच है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहल नहीं की होती तो मंदिर का कितने भव्य रूप में सरकार होना संभव नहीं होता।

मंदिर का सपना 1997 में देखा गया था। सच यही है कि मोदी के आने के बाद ही काम आगे बढ़ा। अक्षरधाम मंदिर निर्माण समिति के लोग सरकार से संपर्क करते रहे किंतु ऐसी सफलता नहीं मिली। सन 2015 में प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की पहली संयुक्त अरब अमीरात यात्रा के दौरान उन्होंने सही तरीके से इस विषय को रखा और फिर रास्ता निकलने लगा। 

अक्षरधाम के दुनिया भर में 1200 मंदिर हैं और सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। किंतु अबू धाबी का मंदिर सबसे विशिष्ट और भविष्य की दृष्टि से विश्व में अलग-अलग संस्कृतियों , सभ्यताओं, मजहबों आदि के बीच संबंध तथा शांति की आशा पैदा करने वाला है। यदि संयुक्त अरब अमीरात जैसे पूर्ण इस्लामी शासन के अंदर वैदिक हिंदू रीति से मंदिर का निर्माण और कर्मकांड संभव है तो यह मानने का कोई कारण नहीं कि मजहबी कट्टरपंथ को समन्वयवादी परस्पर सहकार की दिशा में मोड़ा नहीं जा सकता। मुख्य बात है पहल करने और उसके अनुरूप भूमिका निभाने की। हिन्दू या सनातन संस्कृति की विशेषता ही समन्वयवादी है। इसी में वह क्षमता है जो सभी मजहबों, पंथों, संस्कृतियों-सभ्यताओं के अंदर एक ही भाव को महसूस कर सबके बीच समन्वय और सहयोग कायम करने का नेतृत्व कर सकता है। प्रधानमंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा भी कि एक ही ईश्वर को, एक ही सत्य को ज्ञानी अलग-अलग तरह से बताते हैं। यह भारत की मूल चेतना का हिस्सा है। हमें विविधता में बैर नहीं लगता, बल्कि विविधता ही विशेषता लगती है। जैसा प्रधानमंत्री ने बताया मंदिर में पग-पग पर विविधता में विश्वास की झलक दिखती है।  दीवारों पर इजिप्ट के धर्म और बाइबिल की कहानियां उकेरी गई हैं तो वॉल ऑफ हारमनी को बोहरा समाज ने बनवाया है तथा लंगर की जिम्मेदारी सिख भाइयों ने ली है। 

वास्तव में इस मंदिर में हर देवी देवता के मंदिर हैं और उनकी लीलाएं पत्थरों पर मूर्तियों से उतारी गई है। पर इसको इस तरह निर्मित किया गया है कि विश्व का कोई भी मजहब व पंथ इसे अपने से अलग न देखे। मंदिर के निर्माण में हर धर्म के व्यक्ति ने योगदान दिया है। इस मंदिर का निर्माणकर्ता बीएपीएस यानी बचासन वासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संस्था हिंदू संस्था है, जमीन इस्लामी सरकार ने दिया, मुख्य आर्किटेक्ट ईसाई, निदेशक जैन , प्रोजेक्ट मैनेजर सिख ,स्ट्रक्चर इंजीनियर बौद्ध तथा कंस्ट्रक्शन कांट्रैक्टर पारसी रहे। मंदिर की सात मीनारें संयुक्त अरब अमीरात की सात अमीरातों का प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति का उल्लेख करते हुए कहा कि सबके सम्मान का यही भाव हिज हाइनेस शेख जायेद के जीवन में दिखता है। उनका विजन है- वी आर ऑल ब्रदर्स।

संयुक्त अरब अमीरात सात अमीरातों के संग से बना है, इसलिए मंदिर के सात शिखर में सात भारतीय देवता विराजमान हैं, मंदिर में सात गर्भ गृह हैं। अगर भारतीय परंपरा के जानवर गाय, हाथी और मोर है तो अरब देश के ऊंट, रेगिस्तान के बकरी, बाज, फलों में अन्ननाश और खजूर को भी दीवारों में उकेरा गया है। 

इस तरह यह मूल रूप से हिंदू मंदिर होने और हिंदुत्व व सनातन की विश्व कल्याणकारी विचार और भूमिका को पूरी तरह प्रभावी तरीके से रखते हुए भी सभी धर्म के प्रति सम्मान की भावना को स्वीकारने व बल देने का स्थल बन सकता है।  आखिर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति ने सब कुछ समझने के बाद ही इसके लिए स्वीकृति दी होगी। ध्यान रखिए, स्वयं अक्षरधाम संस्था ने दो प्रकार के मॉडल बनाए थे। एक संपूर्ण वैदिक हिंदू रिति का था और दूसरा एक समान भवन की तरह दिखने वाला था जिसमें अंदर देवी- देवताओं की मूर्तियां और अन्य चीजें। दूसरे मॉडल में बाहर हिंदू चिह्न नहीं थे। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि जब यह प्रस्ताव शेख जायेद के पास गया तो उन्होंने कहा कि जो मंदिर बने वह सिर्फ मंदिर न बने, मंदिर जैसा दिखे भी। तो वह यूं ही नहीं हुआ होगा। जिस मजहब में बूतपरस्ती के विरुद्ध इतनी बातें हो वहां उन्हें समझा कर तैयार करना आसान नहीं रहा होगा। निश्चित रूप से हिंदुत्व की व्यापकता, जिसमें पूरे ब्रह्मांड के एक-एक कण के प्रति अपना दायित्व , सबमें एक ही तत्व देखने व सबको सम्मान देने के भाव को सही तरीके से समझाया गया होगा। एक बार अगर उन्हें समझ आ गया कि हिंदुत्व के अंदर किसी दूसरे से घृणा या किसी मजहब को छोटा करने का भाव नहीं है, बल्कि सम्मान का है तो फिर भविष्य में इसका असर केवल विपक्षीय नहीं वैश्विक भी हो सकता है।  प्रधानमंत्री ने आशा प्रकट की किक् मंदिर मानवता के लिए बेहतर भविष्य के लिए बसंत का स्वागत करेगा। वास्तव में अगर हिंदू धर्म का यह मंदिर अपने उद्देश्य के अनुसार पूरी दुनिया के लिए सांप्रदायिक सौहार्द्य और वैश्विक एकता का प्रतीक बनने लगा तो सभ्यताओं और मजहबों के बीच टकराव और संघर्ष की तस्वीर बदलने लगेगी।

तो अबू धाबी में मंदिर के उद्घाटन के साथ इतिहास का वह अध्याय आगे बढ़ा है जो हिंदुत्व और भारत राष्ट्र का मूल लक्ष्य रहा है। यानी सभी धर्मों के अंदर एक ही भाव है और जीव-अजीव सबके अंदर एक ही तत्व, इसलिए हमें सबके कल्याण के रास्ते पर चलना है। अब तक संयुक्त अरब अमीरात अपने बुर्ज खलीफा, शेख जायेद मस्जिद और हाईटेक गगनचुंबी भवनों, मौल और मार्केट के लिए जाना जाता था।  उसमें अब अबू धाबी का मंदिर भी जुड़ गया है। निश्चय ही न केवल संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी के अन्य देशों से बल्कि विश्व भर से लोग वहां आएंगे और हिंदू धर्म ,संस्कृति ,सभ्यता की व्यापकता को देखेंगे, समझेंगे।  विश्व के दूसरे प्रमुख मजहबों के पूजा स्थलों में इस तरह का व्यापक समन्वयवादी साकार स्वरूप नहीं दिखाई पड़ता। इससे भारतीय संस्कृति-सभ्यता के प्रति उनके मन में सम्मान बढ़ेगा। इससे लंबे समय से हर स्तर के विद्रोहियों द्वारा सनातन और हिंदुत्व के साथ भारत एवं यहां की सभ्यता संस्कृति के बारे में फैलाए गए दुष्प्रचारों का खंडन होगा। यही नहीं इस तरह के स्थलों और विचारों के प्रसार के साथ भारत को विश्व कल्याण की दृष्टि से सभ्यताओं , संस्कृतियों और धर्मौ के बीच समन्वय, सौहार्द्र व बंधुत्व का संस्कार कायम करने के लिए नेतृत्वकारी भूमिका स्वयमेव प्राप्त होगी।

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली- 110092, मोबाइल- 981027208

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