शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

आगामी लोक सभा चुनावों में मायावती की डगर

बसंत कुमार

अगले कुछ माह में देश में आम चुनाव होने वाले है और एनडीए एवं इंडिया गठबंधनों के लोग अपनी अपनी सियासी गणित बिठाने में लगे हैं पर एक ऐसा चेहरा है जिसके विषय में यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि वह किस ओर जायेगी वह है बहुजन समाज पार्टी कीसुप्रिमो सुश्री मायावती। अभी तक यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि वह वर्ष 2024 में होने वाले चुनावो में की वो एनडीए अलायंस के साथ जायेगी या विपक्ष के अलायंस इंडिया के साथ जायेगी, इसके कारण जानना इसलिए भी आवश्यक है कि एक समय में देश में 21% आवादी वाले दलित मतदाता इनकी पार्टी के वोट बैंक माने जाते थे जिस प्रकार मुलायम सिंह यादव के समय में यादव मतदाता समाजवादी पार्टी के मतदाता के रूप में जाने जाते थे। आलम यह था कि कांग्रेस और भाजपा सहित अन्य पार्टिया जाटव(चमार) व यादव बस्तियों में प्रचार करने में जाने में कतराती थी और वहा जाकर प्रचार को समय की बर्बादी समझते थे यहाँ तक की भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह ने एक बार खुले तौर पर गैर जाटव और गैर यादव रणनीति को स्वीकार किया था। यह अलग बात है कि मायावती जी ने कभी भी किसी जाटव जाति के नेता को प्रमोट नहीं किया उनके सिपह सलारो में नसिमुद्दी सिद्धिकी, स्वामी प्रसाद मौर्या और सतीश चंद मिश्र आदि रहे अर्थात  जाटव समाज का एक भी नेता उनके सिपह सलारो में कभी नहीं रहा और अंततोगत्वा उन्होंने अपने भतीजे प्रकाश आनंद को को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

फिर भी इंडिया गठबंधन के नेता मायावती को अपने पाले में लाने की भरपूर कोशिश कर रहे है और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल कई मौकों पर इस बात को दोहरा चुके है यद्यपि सपा अद्यक्ष अखिलेश यादव बसपा का इंडिया गठबंधन में विरोध कर रहे है वे वर्ष 2019 में मायावती के साथ गठबंधन का हवाला देते हुए कहते है कि हमारे परम्परा गत वोट तो बसपा उम्मीद वारो को मिल गए पर हमारे प्रत्यासियो को जाटव बिरादरी के लोगो ने वोट देने के बजाय भाजपा उम्मीदवारों को वोट देना बेहतर समझा।

बसपा के संस्थापक काशी राम जीवन भर ब्राह्मण बनिया और ठाकुर की राजनीति का विरोध करते रहे और दलित एवम अति पिछड़ी जातियों को एक साथ जोड़ने का प्रयास करते रहे परंतु उनकी मृत्यु के पश्चात मायावती ने सतीश चंद मिश्र के साथ मिलकर जाटव- ब्राह्मण अलाइंस के माध्यम से सोसल इंजीनियरिंग कार्ड खेला और वर्ष 2007 में भाजपा सपा और काग्रेस को पछाड़ते हुए सत्ता में आई पर मायावती अपने मुख्य मंत्रित्व काल में ऐसी कोई उपलब्धि न कर पायी जिससे उन्हे बाबा साहब अंबेडकर और काशी राम की लिगेसी का वारिश कहा जा सके। उप्र में जाटवो व चमारो के आर्थिक विकास के लिए कोई कदम नहीं उठाये, यही कारणों का प्रधानमन्त्री आवास योजना, उज्जवला योजना, घर घर शौचालय से प्रभावित होकर दलित ( जाटव) समाज को मतदाता आज भाजपा की और झुकता हुआ नजर आ रहा है, एक अनुमान के मुताबिक उ प में दलितो में 65 उप जातियाँ है, इनमें सबसे बड़ी आवादी जाटव समुदाय की है जो कुल दलित आवादी का 50% है। विशेषज्ञ यह भी मानते है कि मायावती दलितो के बीच अब वो दम नहीं रखती जो पहले हुआ करता था और दलितो का अच्छा खासा तबका अब भाजपा के साथ लगातार जुड़ रहा है जैसा वर्ष 2014 और वर्ष 2019 के लोक सभा चुनावो में देखा गया। दूसरा बसपा में टिकट के बदले धन उगाही के कारण मायावती से उनकी अपनी बिरादरी के शिक्षित व योग्य लोग बसपा का टिकट मांगने से कतरा रहे है जबकि काशी राम के समय पार्टी में व्यक्ति का पार्टी के सिद्धांतों के प्रति संकल्प को विशेष महत्व दिया जाता था पर अब ऐसा नहीं है,

यह जानते हुए इंडिया के अधिकांश घटक मायावती को अपने अलायंस में मिलाना चाहते हैं और ऐसी संभावना है कि अगला चुनाव एनडीए बनाम इंडिया हो सकता है ऐसे में मायावती जी किसी भी गठबंधन के साथ जाने में क्यो कतरा रही है। जबकि मायावती सदैव भाजपा को मनुवादियों की पार्टी कह कर अपना दुश्मन नंबर वन कहती रही है यह अलग बात है वे उसी भाजपा के समर्थन से उ प की मुख्य मंत्री बनती रही हैं पर जब से उनकी स्थिति कमजोर हो गयी है और उनका पारंपरिक वोट भाजपा की ओर खिसक रहा है ऐसे में आगामी लोक सभा चुनाव मायावती के घटते वोट शेयर और घटती घटती सीटें उनके लिए चुनौती है और वो यह तय नहीं कर पा रही है दोनों गठबंधनो में से किसके साथ जाँये या अपने दम पर चुनाव लड़े। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए के लिए यही फायदे मंद रहेगा कि वो अलग चुनाव लड़े जिससे कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का वोट बैंक काट कर भाजपा की जीत सुनिश्चित कर सके जैसा अभी हाल में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ में देखने को मिला है। ऐसी परिस्थितियों में भाजपा को भी बसपा के वोट बैंक जाने वाले जाटव वोट बैंक को साधने के लिए सकरात्मक कदम उठाना होगा और टिकट बटवारे में सुरक्षित सीटो पर जाटवो की जगह पासी, खटिक आदि को अधिक वरीयता देने की नीति को त्यागना होगा'

एक अनुमान के अनुसार देश में 21% आवादी दलितो की है और काशी राम जी के समय में इन दलित वोटरो पर बहुजन समाज पार्टी का वर्चस्व होता था, विशेषकर जाटवो को भाजपा का शत प्रतिशत वोट बैंक माना जाता था पर काशीराम के देहांत के बाद से जाटव मतदाता बसपा से बिखर कर नरेंद्र मोदीजी के कारण भाजपा को अपने विकल्प के रूप में देखने लगा है क्योकि मायावती की पैसे के लोभ और परिवार वाद की नीति के कारण वह बसपा से बिखर गया है अब बसपा की भी इन्हे अपनी ओर लाने का प्रयास करना होगा और इस वर्ग के योग्य और प्रतिभा शाली लोगो को को लोक सभा चुनावो और संगठन में अवसर प्रदान करे जो मायावती को एनडीए के साथ लाने के प्रयास से बेहतर होगा, वैसे भी वर्ष 2014 केबाद भाजपा अब ब्राह्मण और बनियों की पार्टी के बजाय दलितो और पिछड़ो में अपनी पैठ बना रही हैं।

गुरुवार, 11 जनवरी 2024

हिंडेनबर्ग पर शीर्ष न्यायालय के फैसले के मायने

अवधेश कुमार

अडानी हिंडेनबर्ग मामले में उच्चतम न्यायालय न्यायालय के फैसले का पहला विवेकशील निष्कर्ष यह है कि सरकार के विरुद्ध किसी मुद्दे को उठाने और उसे बड़ा बनाने के पहले उस पर पर्याप्त शोध और सोच-विचार किया जाना चाहिए। न्यायालय के फैसले को आधार बनाएं तो हिंडेनबर्ग रिपोर्ट को लेकर भारत और भारतीयों के संपर्क से पूरी दुनिया में जो बवंडर खड़ा हुआ, शेयर मार्केट से लेकर स्वयं गौतम अडानी की कंपनियों को जो नुकसान पहुंचा तथा नरेंद्र मोदी सरकार को लेकर पैदा हुआ संदेश सभी तत्काल निराधार साबित हुए हैं। न्यायालय यह कहते हुए याचिकाओं को निरस्त कर दिया कि हिंडेनबर्ग के आरोपों की जांच के लिए सीट या विशेष जांच दल गठित करने यानी किसी दूसरी एजेंसी को सौंपने की आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ताओं की ओर से बार-बार सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया यानी सेबी की जांच को प्रश्नों के घेरे में लाने को भी न्यायालय ने सही नहीं माना तथा उसकी जांच से संतुष्टि व्यक्त की। सेबी अब तक 24 में से 22 मामलों की जांच पूरी कर चुकी है।

 सही है कि शीर्ष न्यायालय ने सेबी और भारत सरकार से कहा है कि निवेशकों की रक्षा के लिए तत्काल उपाय करें, कानून को सख्त करें तथा जरूरत के मुताबिक सुधार भी।  यह भी कहा कि सुनिश्चित करें कि फिर निवेशक इस तरह की अस्थिरता का शिकार नहीं हो जैसा कि हिडेनबर्ग रिपोर्ट जारी होने के बाद देखा गया था। ध्यान रखिए कि न्यायालय द्वारा न्यायमूर्ति सप्रे की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट पर भी विचार किया गया। इस समिति ने भी शेयर निवेश की सुरक्षा से संबंधित सुझाव दिए हैं। न्यायालय ने उसे शामिल करने को कहा है। वास्तव में फैसले का यह पहलू स्वाभाविक है क्योंकि हिडेनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के शेयरों में जिस ढंग से गिरावट आई उससे पूरा भूचाल पैदा हो गया था। आगे ऐसा ना हो इसका सुरक्षा उपाय करना आवश्यक है और इसी ओर न्यायालय में ध्यान दिलाया है । इसमें कोई अगर किसी भी तरह हिंडेनबर्ग रिपोर्ट में थोड़ी सच्चाई देखता है वह उसकी समझ पर प्रश्न खड़ा होगा। न्यायालय के फैसले से साफ हो गया है कि गौतम अडानी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाए गए आरोप निराधार ही थे। किंतु भारत की राजनीति और एक्टिविज्म की दुनिया में शिकार करने का चरित्र। इसलिए पहले सेबी और फिर आप न्यायालय को भी कटघरे में खड़ा करने का अभियान चल रहा है।

यह स्थिति चिंताजनक है। अगर उच्चतम न्यायालय को हिडेनबर्ग रिपोर्ट में थोड़ी भी सच्चाई दिखती तो उसके आदेश में यही लिखा होता कि आगे कोई भी कंपनी किसी तरह अपने प्रभाव का लाभ न उठा पाए इसके लिए सुरक्षाउपाय करें। उसने ऐसा नहीं कहा है। उसका कहना इतना ही है कि अगर कहीं से फिर ऐसी रिपोर्ट आ गई तब शेयर मार्केट में निवेशकों को कैसे सुरक्षित रखा जाए इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार की जांच एजेंसी के रूप में सेबी जांच करें कि क्या हिंडनबर्ग रिसर्च और किसी अन्य संस्था की वजह से निवेशकों को हुए नुकसान में कानून का कोई उल्लंघन हुआ है? यदि हुआ है तो उचित कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ताओं ने कई नियमों में खामियों की बात उठाई थी जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि संशोधन से नियम सख्त हुए हैं। खोजी जर्नलिस्ट संगठन की रिपोर्ट को भी खारिज किया गया और कहा कि यह सेबी की जांच पर सवाल उठाने के लिए मजबूत आधार नहीं है, इन्हें इनपुट के रूप में नहीं माना जा सकता है। जरा पीछे लौटिये और याद करिए कि पिछले वर्ष 24 जनवरी को अडानी समूह पर हिंडेनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद क्या स्थिति पैदा हुई थी? तब समूह का मार्केट कैप 19.2 लाख करोड़ था। इस रिपोर्ट के बाद उसकी 9 कंपनियों का वैल्यूएशन 150 अरब डालर तक घट गया था। धीरे-धीरे उसकी भरपाई हो रही है किंतु अभी भी वह उसे समय से 31% नीचे है। यद्यपि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद तेजी से अडानी समूह के शेयर भाव उछले एवं उसी अनुसार सूचकांक भी। बावजूद उस क्षति की भरपाई एक बड़ी चुनौती है। प्रश्न है कि इसके लिए किसे जिम्मेदार माना जाए? करोड़ों निवेशकों के जो धन डुबाने के लिए कौन दोषी है? सबसे बड़ी बात कि इससे भारत की छवि पूरी दुनिया में बिगड़ी उसकी भरपाई कौन करेगा? हिंडेनबर्ग रिपोर्ट को आधार बनाकर दुष्प्रचार यही हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं और उनकी सरकार एक उद्योगपति कारोबारी के लिए किसी सीमा तक जाने को तैयार है। उन्हें सरकार का राजनीतिक संरक्षण और सहयोग प्राप्त है जिनकी बदौलत ही यह कंपनी आगे बढ़ी है अन्यथा इसकी अपनी क्षमता ऐसी नहीं है। यह सरकार और पूंजीपति के बीच शर्मनाक दुरभिसंधि का आरोप था। यह आरोप सच होता तो क्ऱनी केपीटलिइज्म का इससे बड़ा उदाहरण कुछ नहीं हो सकता। विश्व भर में निवेशकों और कारोबारियों के बीच यह छवि बन जाती कि वाकई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ही उद्योगपति और कारोबारी के हितों में नियम बनवाते हैं, उसे सत्ता का संरक्षण प्रदान करते हैं और इसी बदौलत समूह देश और दुनिया में अवैध तरीके से वित्तीय शक्ति का विस्तार कर रहा है तो फिर वे भारत से मुंह मोड़ लेते।‌ इसका संपूर्ण भारतीय अर्थव्यवस्था और आर्थिक रूप से महाशक्ति बनने के लक्ष्य पर क्या प्रभाव पड़ता इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है। वास्तव में हिंडेनबर्ग रिपोर्ट एक कंपनी पर अवश्य था किंतु इससे पूरे भारत सरकार और देश की नियति नत्थी हो गई थी। हिंडेनबर्ग ने में मुख्यत: यही कहा था कि अदानी समूह की वित्तीय हैसियत इतनी बड़ी है नहीं जितनी वह अंकेक्षण में दिखलाती  है, वह अपना मूल्यांकन जानबूझकर ज्यादा करवाती है जिससे उसके शेयर भाव बढ़े रहते हैं तथा टैक्स हैवन देशों में सेल कंपनियां बनाकर वह गलत निवेश करती है और इन सबमें उसे सत्ता का पूरा सहयोग और संरक्षण है। कोई कंपनी प्रधानमंत्री के वरदहस्त से काली कमाई करती हो इससे खतरनाक आरोप और क्या हो सकता है। साफ है कि जहां हिडेनबर्ग रिपोर्ट के पीछे केवल एक कंपनी की वित्तीय स्थिति को अपनी दृष्टि से सामने लाना नहीं था बल्कि निशाने पर नरेंद्र मोदी सरकार और उसके माध्यम से पूरा भारत था। जिस देश में इस ढंग से क्रॉनी केपीटलिइज्म हो उसकी दुनिया में साख और हैसियत कुछ हो ही नहीं सकती। प्रधानमंत्री  कह रहे हैं कि 2024 से 29 के बीच भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनेगा और 2047 तक विश्व की पहली श्रेणी का देश बनाना है तो निश्चय ही इससे अनेक देशों संगठनों, नेताओं, यहां तक की भारत के भी कुछ लोगों और समूहों के कलेजे पर सांप लोट रहा होगा। वो हर तरीके से इसमें बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करेंगे। उच्चतम न्यायालय ने हिंडेनबर्ग रिपोर्ट के पीछे के इरादों या कानूनों के उल्लंघन, निवेशकों को हुए नुकसान के पीछे कारकों के जांच के लिए हरी झंडी दी हैतो  उम्मीद रखिए की आने वाले समय में पूरा सच सामने आएगा। उच्चतम न्यायालय की सुनवाई से इतना स्पष्ट हुआ कि भारत के एक नामी वकील के एनजीओ ने कंपनी के संदर्भ में सूचनाएं पहुंचाने में भूमिका निभाई थी। कुछ बातें महुआ मोइत्रा के संसदीय जांच समिति की रिपोर्ट से भी पता चलता है। यह सामान्य बात नहीं है कि एक शॉर्ट सेलिंग वाली कंपनी जो ऐसा करके मुनाफा कमा रही हो उसे हमारे यहां शत -प्रतिशत सच मान लिया तथा अडानी समूह एवं तथ्यों पर बात करने वाले को गलत। दलीय राजनीति के बीच वैर भाव इस सीमा तक न हो कि आपसी संघर्ष में देश का हित ही दांव पर लग जाए।



बुधवार, 10 जनवरी 2024

श्रमिक विरोधी नीतियों के विरूध, एनएफआईआर के आह्वान पर यूआरएमयू का क्रमिक अनशन प्रारम्भ

नई दिल्ली। एनएफआईआर के आह्वान पर उत्तरीय रेलवे मजदूर युनियन के हैडक्वार्टर मण्डल के आह्वान पर कनॉट प्लेस स्थित केन्द्रीय चिकित्सालय के बाहर मण्डल मंत्री डीके चावला के नेतृत्व में सैकड़ो रेल कर्मचारीयों ने प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक कमिक अनशन का प्रारम्भ किया गया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए करते हुए यूआरएमयू के महामंत्री बी सी शर्मा ने कहा की केन्द्र सरकार को अब एनपीएस की मांग पर न्यायोचित आधार पर विचार करते हुए तुरन्त श्रमिक हित को सर्वोपरी रखकर तत्काल पुरानी पैशन से बदल देना चाहिये। पुरानी पेंशन से सम्पूर्ण श्रमिक परिवारो का हित जुड़ा हुआ है। मण्डल मंत्री डी के चावला ने कहा कि महगाई भत्ते की तीनों रूकी हुई किश्तें तत्काल प्रभाव से जारी करें और अपनी घोषणानुसार 2026 के लिये श्रम मण्डल सह मंत्री इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार के प्रत्येक लक्ष्य के लिये जान की बाजी लगाकर प्रण प्राण से रात दिन समर्पित भाव से कार्य करने वाले केन्द्रीय कर्मचारीयो को ओपीएस के दायरे में लाना पूर्णतः श्रमिक हितों पर कुठाराघात है। केन्द्रसरकार अपनी ही नीति के विरूध जाकर नियमित प्रकृति के कार्यों को भी ठेकेदारी प्रथा की आंधी चला दी है चंही ठेकेदार द्वारा प्रशासन की नाक के नीचे खुले आम ठेके श्रमिकों का आर्थिक शोषण व्यापक पैमाने पर हो रहा है श्रमिकों को लगाने के नाम पर मोटी रकम लेने के बाद भी, छुटटीयों के स्थान पर डबल डयूटी के साथ मासिक भुगतान भी कम किया जा रहा है जिस पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
धरने को केन्द्र सरकार को श्रमिक विरोधी नितियों को तत्काल वापस लेने का आहवान करते हुए रेणु त्यागी, मनोज मच्चल, रमणीक शर्मा, आशीष यादव, बलवान ग्रेवाल, ने सम्बोधित किया।

मंगलवार, 9 जनवरी 2024

उपराज्यपाल ने नए भर्ती किए गए 398 सरकारी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे

नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल, श्री वी के सक्सेना ने विज्ञान भवन, दिल्ली आयोजित एक समारोह में 398 नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। पिछले डेढ़ साल के दौरान दिल्ली सरकार के विभागों/सिविक एजेसियों में 22,000 स्थायी सरकारी भर्तियां की गई हैं। मृत सरकारी कर्मचारियों के 149 आश्रित को अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति पत्र सौंपे गये। चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और परेशानी रहित है। भर्ती की निष्पक्ष और पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों/स्वायत्त निकायों/स्थानीय निकायों में स्थायी आधार पर पदों को भरने का उद्देश्य रिक्त पदों पर संविदा और तदर्थ नियुक्तियों की प्रणाली को समाप्त करना है। उपराज्यपाल ने बताया कि डेढ़ साल के भीतर, दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में 22,000 और रिक्तियों को भरा जाएगा।

सेवा विभाग द्वारा आयोजित आज के समारोह में माननीय उपराज्यपाल ने नए भर्ती किए गाए 398 सरकारी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौपे, जिन्हें शिक्षा निदेशालय, सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग, दिल्ली परिवहन निगम, दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद, श्रम विभाग, दिल्ली कृषि विपणन बोर्ड, दिल्ली जल बोर्ड जैसे विभिन्न विभागों/स्थानीय निकायों/स्वायत्त निकायों में नियुक्त किया जा रहा है। सेवा विभाग और नई दिल्ली नगर निगम द्वारा अनुकंपा के आधार पर 149 नियुक्तियां की गई है। नई नियुक्तियों में महिला, दिव्यांग और अन्य आरक्षित श्रेणियों के लोग शामिल है।
आज का आयोजन 24.02.2023, 19.04.2023 और 30.06.2023 को आयोजित पिछले कार्यक्रमों के क्रम में अपनी तरह का चौथा समारोह था। इन अवसरों के दौरान, माननीय उपराज्यपाल ने लगभग 3400 नियुक्ति पत्र वितरित किए। दिल्ली के मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों, स्थानीय निकायों और स्वायत्त निकायों के प्रमुखों के साथ-साथ अन्य सम्मानित अतिथियों के साथ इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
श्री ए. के. सिंह, आईएएस, प्रमुख सचिव (सेवाएं) ने स्वागत भाषण दिया और नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने श्रोताओं को बताया कि सभी संबंधित विभागों के ठोस प्रयासों के कारण सेवा विभाग के लिए इन समारोहों को त्वरित रूप से आयोजित करना संभव हो पाया है। उन्होंने श्रोताओं को सूचित किया कि माननीय उपराज्यपाल के मार्गदर्शन और निर्देशन में दिल्ली सरकार में अनुकंपा नियुक्ति के लिए एक संशोधित योजना तैयार की गई है, जो न केवल निष्पक्ष और पारदर्शी है, बल्कि मृतक सरकारी कर्मचारी की वित्तीय स्थिति के संतुलित और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन की सुविधा भी प्रदान करती है। उन्होंने दर्शकों को आगे बताया कि भर्ती प्रक्रिया के अलावा, सेवा विभाग ने माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली द्वारा निर्धारित दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं के अनुसार भर्ती नियमों और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों को नियंत्रित करने वाले नियमों को फिर से तैयार करने/संशोधित करने के लिए सक्रिय उपाय किए हैं।
डीएसएसएसबी के अध्यक्ष ने आज के समारोह के दौरान प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में माननीय उपराज्यपाल दिल्ली के निर्देशन और निगरानी में हासिल किये गये डीएसएसएसबी की हाल के दिनों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में बताया कि पिछले डेढ़ वर्षों में बोर्ड की दक्षता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है और यह प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन के लिए एक कुशल और पारदर्शी तंत्र स्थापित करने में सक्षम रहा है, जो पेपरलेस, संपर्क रहित और परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच के साथ ऑनलाइन है। प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों के साथ, परिणामों की घोषणा में लगने वाला समय पहले के 12 महीनों की तुलना में 6 से 8 महीने तक हो गया है। 10,000 चयन पहले ही किया जा चुका है। 9000 रिक्तियों चयन भर्ती के विभिन्न चरणों में है और 13000 रिक्तियों की जांच की जा रही है। अगले डेढ़ साल की अवधि के भीतर लगभग 22,000 और रिक्तियां भरी जाएंगी।
नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे और आभार व्यक्त करते हुए बड़ी निष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।
मुख्य सचिव ने भी श्रोताओं को संबोधित किया। उन्होंने जीएनसीटीडी की सरकारी सेवा में प्रवेश करने पर नए भर्ती किए गए सरकारी कर्मचारियों को बधाई दी और उनसे आग्रह किया कि उन्हें पहले दिन से ही पूरे जुनून और उत्साह के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने उनसे अपनी सीखने की प्रक्रिया जारी रखने का भी आग्रह किया। मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के प्रयासों की भी सराहना की, जिसके कारण नई भर्तियां पहले से कहीं अधिक तेजी से करना संभव हो पाया है। उन्होंने दर्शकों को बताया कि पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान नई भर्तियों में भारी वृद्धि हुई है। ये सभी नियुक्तियां एक खुली, निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रणाली के माध्यम से स्थायी आधार पर की गई हैं और संविदा और तदर्थ नियुक्तियों की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है।

माननीय उपराज्यपाल ने दिल्ली के लोगों की ओर नवनियुक्त सरकारी कर्मचारियों को बधाई दी और सूचित किया कि जब से उन्होने दिल्ली के उपराज्यपाल का कार्यभार संभाला है, तब से वह तदर्थ और संविदा भर्ती के बजाय सरकारी रिक्तियों को स्थायी रूप से भरने पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि तदर्थ और संविदा भर्ती की प्रक्रिया में पक्षपात और भ्रष्टाचार की सम्भावना होती है जिसमे वैसे नागरिकों का शोषण होता है जो नौकरी के हकदार हैं। उन्होंने नियुक्तियों की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए कई बैठकों की अध्यक्षता की थी, जिसके कारण दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) द्वारा भर्ती प्रक्रियाओं को अभूतपूर्व गति मिली है। माननीय उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव को विशेष रूप से बधाई दी, जिनकी देखरेख में दिल्ली में स्थायी रोजगार का सृजन और उनकी भर्ती प्रक्रिया संस्थागत हो गई है।

उन्होंने आगे बताया कि अनुकंपा के आधार पर दिए गए 149 नियुक्ति पत्रों में से 103 आश्रितों को सेवा विभाग द्वारा नियुक्त किया गया है और 46 आश्रितों को एनडीएमसी द्वारा नियुक्त किया गया है। इसके अलावा मई 2022 और मई 2023 के बीच की अवधि के दौरान, मुख्य रूप से शिक्षा विभाग में डीएसएसएसबी के माध्यम से 15,367 पद भरे गए, एनडीएमसी ने केंद्र सरकार की मदद से लगभग 4,500 व्यक्तियों की भर्ती की, 376 पद यूपीएससी के माध्यम से भरे गए, जिनमें से 324 पद दिल्ली में खाली पड़े प्रिंसिपल/वाइस प्रिंसिपलों के थे। डीएसएसएसबी के माध्यम से दिल्ली अग्निशमन सेवा के 500 पदों के अलावा डीटीसी और श्रम विभाग के पदों को भी भरा गया था।

माननीय उपराज्यपाल ने विशेष रूप से जीएनसीटीडी में अनुकंपा नियुक्ति की एक निष्पक्ष और पारदर्शी योजना तैयार करने के लिए सेवा विभाग के प्रयासों की सराहना की, जिससे अनुकंपा नियुक्तियों के लिए आवेदकों के वित्तीय स्थिति का यथार्थवादी और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव हो सका है। माननीय उप- राज्यपाल ने श्रोताओं को सूचित किया कि अनुकंपा के आधार पर आश्रितों को जारी किए गए नियुक्ति पत्र पहली बार पूरी तरह से पारदर्शी प्रक्रिया से गुजरे हैं, जिसमें चयन किये गये आवेद्को की सूची को सार्वजनिक डोमेन में रखा गया था, ताकि कोई भी उसे देख सके और अपनी आपत्ति या शिकायत दर्ज करा सके। इस प्रक्रिया से सुनिश्चित किया गया है कि अनुकंपा आधार पर नौकरी प्रदान करने मे पक्षपात या भ्रष्टाचार न हो और आश्रितों को किसी तरह की परेशानी न हो।

नियुक्ति पत्रो के वितरण के तुरंत बाद विज्ञान भवन में नई भर्तियों को संबोधित करते हुए, माननीय उपराज्यपाल ने बताया कि दिल्ली सरकार/ स्थानीय निकायों के विभिन्न विभागों/एजेसियों की 22,000 रिक्तियों को अगले डेढ़ साल के अंदर स्थायी तौर पर भरा जाएगा।

माननीय उपराज्यपाल ने आगे कहा कि कोई भी नौकरी छोटी या बड़ी नहीं होती बल्कि काम के प्रति जिम्मेदारी मायने रखती है। जिसे भी जो काम मिला है, उसे उस काम को दृढ़ विश्वास के साथ प्रतिबद्धता, समर्पण और ईमानदारी से निभाना है। माननीय उपराज्यपाल ने आगे जोर देकर कहा कि सरकारी नौकरी आजीविका का एक माध्यम मात्र नहीं है, बल्कि देश की सेवा और देश की तरक्की में एक महत्वपूर्ण योगदान का अवसर है।

 

सोमवार, 8 जनवरी 2024

डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ मैं 'जय श्री राम' कर रहा हूँ: गगनदीप सिंह डिडयाला

हेरा-फेरी, भूल भुलैया, गरम मसाला, हलचल, हंगामा, बिल्लू बार्बर, आक्रोश, खट्टा मीठा, ढोल, भागम भाग जैसी अनेक ब्लॉकबस्टर फिल्में दे चुके निर्देशक प्रियदर्शन इन दोनों राम जन्मभूमि और अयोध्या मंदिर निर्माण पर वेब-सीरीज 'जय श्री राम' बना रहे हैं जो की काफी चर्चा में है खास बात यह है कि इसमें मुंबई ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश और लखनऊ के एक्टर्स भी काम कर रहे हैं जिनमें से एक प्रमुख भूमिका लखनऊ के गगनदीप सिंह डिडयाला निभा रहे हैं। जो की वेब सीरीज में दिलजीत सिंह का किरदार करते नज़र आएंगे।

दिसंबर में अयोध्या में रियल लोकेशन पर शूट करने के बाद अब फिल्म का बाकी शूट गगनदीप सिंह डिडयाला टीम के साथ केरल में करेंगे।  वर्तमान में फिल्म का शूट रामोजी फिल्म सिटी हैदराबाद में चल रहा है जहाँ पर बाबरी मस्जिद का सेट लगाया गया है। इसके बाद कुछ दिन नोएडा में भी शूट करेंगे। यूनिट दिसंबर में ही लखनऊ की कई लोकेशन जैसे कि लखनऊ यूनिवर्सिटी, केकेसी कॉलेज, कुड़िया घाट जैसी अन्य लोकेशन पर शूट कर चुकी हैं।
इम्तियाज अली, रंजन चंदेल, तरुण डुडेजा, सृष्ठा गुहा ठाकुर्ता जैसे इंडस्ट्री के नामचीन डायरेक्टर्स के साथ काम कर चुके गगनदीप सिंह डिडयाला बताते हैं कि प्रियदर्शन के साथ काम करना उनके लिए बहुत ही सौभाग्य और खुशनसीब की बात है।  गगनदीप बताते हैं कि प्रियदर्शन बहुत ही सौम्य और सरल स्वभाव के डायरेक्टर हैं वह सीन को बहुत अच्छे से समझते हैं और अपने नज़रिए को एक्टर के सामने बहुत ही स्पष्ट और सुलझे हुए तरीके से सामने रखते हैं जिससे कि कलाकार उस सीन को पर्दे पर बहुत ही नेचुरल तरीके से उतार देता है। गगनदीप कहते हैं कि हमें पूरा विश्वास है कि यह सीरीज सिर्फ नॉर्थ के लोगों को ही नहीं बल्कि पूरे देश और पूरा विश्व, जो लोग राम से प्यार करते हैं उनको बेहद पसंद आएगी। प्रमुख बाद यह है कि ये सीरीज किसी एक मजहब की तरफ झुकाव की सीरीज नहीं है। हमारे लेखक तुषार उपरीति ने इसे बहुत ही प्यारे ढंग से लिखा है और यह सीरीज मजहबी एकता का प्रतीक सिद्ध होगी जो की सभी धर्मों को एकजुट करेगी।

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