शुक्रवार, 8 दिसंबर 2023

आनलाइन सेटबाजी से बर्बाद होते युवा

बसंत कुमार

अभी हाल मे संपन्न हुए विधान सभा चुनावो मे छत्तीसगढ़ मे ऑन लाइन सट्टेबiजी को लेकर भाजपा और कांग्रेस मे इसे सह देने का एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा था और तत्कालीन मुख्यमन्त्री भूपेंद्र सिंह भगेल ने प्रधानमन्त्री जी को चिट्ठी लिखकर सभी प्लेट फॉर्मो पर सट्टेबजी ऐप पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया। अपनी चिट्ठी मे बघेल ने कहा कि हाल के दिनों मे आन लाइन सट्टेबiजी और गेमिंग के माध्यम से अवैध जुआ और सट्टबाजी का iरोबार पूरे देश मे फैल गया है। इसके संचालक और मालिक मिलकर उक्त अवैध iरोबार चला रहे है। अपने राज्य मे फैले इस अवैध iरोबार को रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा उठाये गए कदमो की जानकारी देते हुए प्रधानमन्त्री से इसे रोकने की अपील की। मैच फिक्सिंग और सट्टेबiजी की बढ़ती हुई घटनाओ ने देश की युवा पीढी को बर्बाद कर दिया है। iतोरात अमीर बनने के चक्कर मे आज के युवा इसके चक्रव्यूह मे फसते चले  रहे है और इस सट्टेबाजी के मास्टरमाइंड विदेशो मे बैठकर पूरी युवा पीढी को इस अवैध काम मे झोंक रहे है।

1998-99 मे जब दक्षिण अफ्रिका के कप्तान हंसी क्रोनिये का नाम मैच फिक्सिंग मे आया तो पूरे क्रिकेट जगत मे तूफान  गया, जो लोग क्रिकेट खिलाडियों को भगवान के रूप पूजते थे वे अब इन्हे खलनायक के रूप मे देखने लगे थे, इस घटना के कुछ दिन बाद बी सी सी आई के पूर्व अद्यक्ष आई एस बिंद्रा ने मैच फिक्सिंग मे देश के महान  आलराउंडर 1983 के विश्व कप विजेता टीम के कप्तान का नाम उछाला तो पूरा बवंडर मच गया, उसके बाद फिक्सिंग को लेकर मनोज प्रभाकर' की टेप सामने आई और मनोज प्रभाकर समेत, मौहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा आदि पर बैन लग गया तब क्रिकेट प्रेमियों का दिल बहुत दुखा था। परन्तु जब से आईपीएल का आयोजन शुरू हो गया है और टेस्ट क्रिकेट की जगह टी-20 क्रिकेट ने ले ली है तब से मैच फिक्सिंग और आन लाइन सट्टे बाजी आम बात हो गयी है और इसमें पड़कर युवा पीढ़ी बर्बाद हो गयी है।

आईपीएल शुरु होते ही सट्टेबाजी का गिरोह भी बढ़ने लगा है, सट्टेबाजी के कारण देश के युवा तबाह हो रहे है एक दिन मे देश मे हजारो करोड़ का सट्टा लग जाता है और ये सट्टेबाज गिरोह के लोग एक एक दिन मे लाखों करोड़ो के वारे न्यारे करते है। सट्टेबाजी के इस खेल में कुछ लोग एक झटके में कंगाल हो जाते है और सट्टा खिलाने वाले मालामाल हो जाते है। इस खेल में एक बड़ा सिंडिकेट होता है जो इस खेल की मॉनिटरिंग करता है और सट्टेबाजी मे हारे हुए लोगो से पैसा वसुलता है। सट्टा लगाने वाले शख़्स को लाइन कहा जाता है जी ऐजेंट (पंटर) के जरिये बुकि (डिब्बे) से बात करता है। एजेंट को एडवांस देकर एकाउंट खुलवाना पड़ता है यह एकाउंट 1000 से लेकर लाख रुपए तक खुलता है जैसे ही नया आदमी अपनी आई डी बनवाता है तो जितने रुपए की आई डी बनती है उसका 20% तुरन्त एजेंट को मिल जाता है। ये एजेंट नया आदमी बनवाने और सट्टे खेलने वालो से वसूली का काम करते है। कम राशि सीधे आन लाइन ट्रांसफर की जाती है और बड़ी रकम एजेंट के जरिये भिजवाया जाता है।

जानकारों का कहना है जब से दूरदर्शन पर "कौन बनेगा करोड़ पति" जैसे कार्यक्रम दिखाये जाने लगे है तभी से युवा पीढ़ी कम समय मे बिना परिश्रम के अधिक से अधिक पैसा लगाने मे जुटी है और इस चक्कर मे मेहनत से कमाई या मा बाप द्वारा अर्जित पूजी गवा रही है, पूरे देश मे यह ट्रेंड विकसित हो गया है युवा पीढी यह समझ नही पा रही है कि इस लत से उनका पूरा परिवार तबाह हो रहा है और उन्हे अगाह करने की lवश्यकता हैl आईपीएल का 16 वा सीजन 31 मार्च 2023 से प्रारंभ हो गया था और  टूर्नामेंट शुरु होते ही शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों मे सट्टेबाजो का गिरोह सक्रिय हो गया और प्रतिदिन हजारो करोड़ का सट्टा लगता था, क्रिकेट प्रेमियों के अलावा एक वर्ग ऐसा भी है जो मैच मे टॉस से लेकर हर बाल को चाव से देखता है और हर बाल पर सट्टा लगता हैं, सट्टेबाजी का आईपीएल शुरू होने के समय से ही चल रहा है पर इसे रोकने के लिए कोई कार्यवाही नही की जा रही है और हर साल सटोरिया गैंग की संख्या बढ़ रही है, अब तो इन सट्टेबाजो के साथ प्लेयर्स भी फिक्सिंग कर रहे है और इन सट्टे बाजो के इशारों पर नो बाल या वाइड बाल फेकी जाती है और चौके छक्के लगते है इसके कारण क्रिकेट मैच का सारा रोमांच समाप्त हो गया है।

इस बुराई को समाप्त करने के लिए आई सी सी और बी सी सी आई समेत अन्य क्रिकेट बोर्डो को प्रयास करना होगा जिससे पुराने युग के क्रिकेट जिसे हम जेंटलमैन गेम कहते थे कि वापसी हो सके और क्रिकेट प्रेमी हुल्लड़ बाजी, सट्टेबाजी से हटकर टेस्ट क्रिकेट के क्लासिकल शॉट्स और बेहतरीन गेदबाजी का आनंद ले सके। यह सही है कि आईपीएल की शुरुआत होने से बी सी सी आई विश्व का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बन गया है और आईपीएल खेलने वाले खिलाडी भी अमीर बन गए है पर वो क्रिकेट खिलाड़ी जो किसी कारण से देश के लिए या आईपीएल नही खेल पाए जल्दी अमीर बनने के लोभ में सट्टेबाजी जैसे गैर कानूनी कार्यो मे पड़कर अपना जीवन बर्बाद कर रहे है और उनकी इस लत के कारण उनके परिवार तबाही के कगार पे पहुँच गए है।

निश्चित तौर पर सट्टेबाजी आने वाले समय के लिए बहुत बड़ी चुनौती है अगर इसे रोकने के लिए समय से कदम नही उठाये गये तो हमारी युवा पीढी कम समय मे अधिक रुपए कमाने के लोभ मे बर्बाद हो जायेगी। इसकी रोक थाम के लिए सरकार को कानून बनाना होगा और अभिभावकों को भी को अपने बच्चो को बेहतर शिक्षा देने और रोजगार की दिशा मे प्रेरित करना चाहिए जिससे बच्चे बगैर मेहनत के पैसा कमाने के चक्कर मे  पड़े, युवा पीढ़ी को सलाह दी जानी चाहिए कि खेल को खेल के नजरिये से देखे और उससे कुछ सीखे। वैसे देश मे सट्टेबाजी अवैध है फिर भी क्रिकेट सीजन मे करोड़ों का सट्टा लगता है और अब आन लाइन सट्टेबाजी से इनके पकड़ा जाना मुश्किल हो गया है और देश की अर्थ व्यवस्था को नुक्सान हो रहा हूँ।

यह कितना दुर्भाग्य पूर्ण है कि भारत मे आई पी यल की शुरुआत के जनक माने जाने वाले ललित मोदी वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपो का मुकाबला करने के बजाय वर्षो से विदेश में शरण लिए हुए हैं और उनके द्वारा प्रारंभ की गयी आईपीएल और फटा फट क्रिकेट से उपजी सट्टेबाजी मे फसकर युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है, ये क्रिकेट का आनंद लेने के बजाय मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी जैसी चीजो मे लिप्त पाए जा रहे है और इस लत ने  जाने कितने उदीयमान क्रिकेटरों का कैरियर समय से पहले समाप्त कर दिया, सरकार और क्रिकेट बोर्ड को इस मामले मे शख्त कदम उठाने की अवश्यकता है।

बुधवार, 6 दिसंबर 2023

चुनाव परिणामों पर आश्चर्य कैसा

अवधेश कुमार

राज्य विधानसभाओं के चुनाव परिणाम उनके लिए किंचित भी आश्चर्य का विषय नहीं है जो भारत और इन राज्यों के बदले हुए राजनीतिक वातावरण को देख रहे थे। ये चुनाव परिणाम मतदाताओं के तात्कालिक संवेग की अभिव्यक्ति नहीं हैं। ये परिणाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और राज्य स्तर पर भाजपा के संदर्भ में बने संपूर्ण माहौल की परिणिति हैं। देश का माहौल बिल्कुल वैसा नहीं है जैसा भाजपा विरोधी प्रस्तुत कर रहे थे। अगर आप उनके पूर्व आकलनों को आधार बनाएं तो भाजपा को एक राज्य में भी विजय नहीं मिलनी चाहिए थी। मध्यप्रदेश में अगर बीच के 15 महीने के कमलनाथ सरकार को छोड़ दें तो करीब 19 वर्ष तक शासन करने के बावजूद भाजपा इतनी बड़ी विजय प्राप्त करती है तो फिर समान्य विश्लेषणों से परिणाम की सच्चाई नहीं समझी जा सकती। मध्यप्रदेश में भाजपा को करीब 49% और कांग्रेस को 40% मत मिला है। 9% बहुत बड़ा अंतर है। राजस्थान में भी लगभग दो प्रतिशत मतों का अंतर है जबकि पिछली बार कांग्रेस को बीजेपी से केवल करीब.25  प्रतिशत ज्यादा वोट मिले थे। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने पिछली बार करीब 33 प्रतिशत और कांग्रेस ने 43 प्रतिशत वोट पाया था जबकि इस बार भाजपा को 45% से अधिक तथा कांग्रेस का वोट लगभग 39% तक सिमटा है। यानी भाजपा ने 12% से ज्यादा मत हासिल किया, जबकि कांग्रेस का 4% वोट कट गया। तो इस तरह के परिणामों के कारण क्या हैं?

परंपरागत आधार पर विश्लेषण करने वाले मध्यप्रदेश में कमलनाथ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जाति कारक से लेकर लाडली योजना, राजस्थान में पेपर लीक से लेकर भ्रष्टाचार तथा इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी बघेल सरकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार आदि का उल्लेख कर रहे हैं। ये सब भी मुद्दे के रूप में थे। शिवराज सिंह भाजपा के मुख्यमंत्री के घोषित उम्मीदवार नहीं थे। चुनावों में शीर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम था। कांग्रेस की गारंटी घोषणाओं के समानांतर मोदी ने कहा कि मेरा नाम ही गारंटी है। परिणामों को आधार बनाएं तो स्वीकारना पड़ेगा कि फ्री बीज यानी मुफ्त घोषणाओं के समानांतर मतदाताओं ने मोदी को स्वीकार किया। कांग्रेस ने सभी राज्यों में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की थी। यह सरकारी कर्मचारियों की दृष्टि से सर्वाधिक आकर्षक घोषणा थी और इसे लेकर देशव्यापी आंदोलन का भी ऐलान हो चुका है। हिमाचल और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणामों का एक बड़ा कारण पुरानी पेंशन योजना लागू करने की घोषणा मानी गई थी। इन राज्यों में यह सफल क्यों हो गया? तेलंगाना में के चन्द्रशेखर राव भी इसके लिए तैयार थे। इस पहलू को आधार बनाकर विचार करें तो न केवल इन परिणामों की सच्चाई बल्कि 2024 लोकसभा चुनाव की भी झलक मिल जाएगी।

राजनीति में नेतृत्व मात्र चेहरा नहीं होता। वह विचारों और व्यवहार का समुच्चय होता है जिसके आधार पर मतदाता अपना मत तय करते हैं। नरेंद्र मोदी स्पष्ट विचारधारा को प्रतिबिंबित करते हैं जिसे केंद्र और भाजपा की राज्य सरकारें नीतियों और व्यवहारों में लागू कर रहीं हैं। इसके साथ वक्तव्यों और व्यवहारों से भावी कदमों की झलक भी दिया है। दरअसल, 2014 के बाद राजनीति, सत्ता और नेतृत्व को लेकर भारत के बदले हुए सामूहिक मनोविज्ञान और मतदाताओं के व्यवहार को न समझने के कारण ही ऐसे परिणाम आश्चर्य में डालते हैं। राजनीति में भाजपा और राजनीति से बाहर पूरे संगठन परिवार ने हिंदुत्व और उसके इर्द-गिर राष्ट्र भाव का धीरे-धीरे सशक्त माहौल बनाया है जिससे देश का सामूहिक मनोविज्ञान बदला है। कर्नाटक और हिमाचल में भी भाजपा के मत नहीं घटे, जबकि दोनों जगह कार्यकर्ताओं और समर्थकों के अंदर व्यापक असंतोष प्रकट हो रहा था। इन परिणामों को किसी ने भाजपा की विचारधारा, नीतियों और नरेंद्र मोदी की अस्वीकृति मान ली तो यह उनकी गलती है। इसके आधार पर मतदाता मत निर्धारित नहीं कर सकते। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश तीनों राज्यों में कांग्रेस ने हिंदुत्व संबंधी घोषणाओं में अपने बीच ही प्रतिस्पर्धा की। कुछ घोषणाएं ऐसी थीं जहां तक भाजपा भी नहीं जाती। अगर हिंदुत्व और उससे जुड़ा राष्ट्रबोध अंतर्धारा में नहीं होता तो अशोक गहलोत, कमलनाथ और भूपेश बघेल हिंदुत्व पर उस सीमा तक नहीं जाते। लेकिन मतदाताओं के सामने स्पष्ट था कि इस समय हिंदुत्व और हिंदुत्व अभिप्रेरित राष्ट्रबोध पर जितना भी कर सकती है वह भाजपा ही है। भाजपा नेताओं ने जब कांग्रेस को चुनावी हिंदू कहा तो इसकी प्रतिक्रिया जैसी भी दी गई, मतदाताओं ने स्वीकार किया। इसी बीच तमिलनाडु से सनातन विरोधी आक्रामक वक्तव्य के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार से आईएनडीआईए के नेताओं ने हिंदू धर्म पुस्तकों, देवी- देवताओं के विरुद्ध जहर उगला उसके विरुद्ध केवल भाजपा सामने आई। कांग्रेस ने चुप्पी साधे रखी। 

स्वाभाविक ही मतदाताओं के मन में प्रश्न उठा कि कांग्रेस हिंदुत्ववादी है तो उनके विरुद्ध खड़ा क्यों नहीं हो रही? नई संसद भवन की धार्मिक कर्मकांडीय तरीके से उद्घाटन और सिंगोल की पुनर्स्थापना के संदेश को भी कांग्रेस और विरोधी नहीं समझ सके तथा उसका बहिष्कार किया। भाजपा ने राम मंदिर से लेकर काशी, महाकाल, केदारनाथ, बद्रीनाथ ,समान नागरिक संहिता, मजहबी कट्टरवाद व आतंकवाद सबको मुख्य मुद्दा बनाया तथा कांग्रेस को रक्षात्मक होना पड़ा। क्या यह संभव है कि भारत में आजादी के बाद आतंकवादी संगठन आइसिस की शैली में उदयपुर में कन्हैयालाल को जिबह की घटना जनता भूल जाएगी? हिंदू धर्म संबंधी शोभा यात्राओं पर हमले की शुरुआत राजस्थान से हुई। शोभा यात्राओं पर हमले कई राज्यों में ज्यादा खतरनाक रूप में सामने आए इसलिए यह संपूर्ण देश के लिए मुद्दा है। कोई कहे कि भाजपा केवल हिंदू मुस्लिम की बात करती है इससे लोगों के अंदर पैठा भाव खत्म नहीं होता। राजस्थान में सन् 2008 में जयपुर आतंकवादी हमले के सारे आरोपियों के न्यायालय से रिहा होने की भी जनता में प्रतिक्रिया थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने अपनी सभाओं में इन्हें प्रमुखता से उठाया।

हिंदुत्व को नकारात्मक या सांप्रदायिक मुस्लिम विरोधी आदि विचार मानने वाले भारत के बदले हुए माहौल को नहीं समझ पाते। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने हिंदुत्व और राष्ट्रबोध को सकारात्मक और व्यावहारिक रूप में उतारने की पहल की है जिसमें गरीबों, किसानों, मजदूरों ,व्यापारियों सहित समाज के सभी तबके के लिए सरकारी नीतियों में जगह है। सामाजिक न्याय तथा दलित, पिछड़े और आदिवासियों के कल्याण संबंधी व्यवहारिक अवधारणा को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और भाजपा की राज्य सरकारों ने परिवर्तित किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर किसान सम्मान निधि, मुद्रा योजना, उज्ज्वला योजना, घर-घर बिजली, प्रधानमंत्री सड़क योजना आदि के माध्यम से केंद्र सरकार भी गांव-गांव तक दिखाई देती है। इसमें जातीय जनगणना पर भाजपा को घेरने की रणनीति सफल नहीं हो सकती क्योंकि धरातल पर पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को सरकार के काम दिखते हैं। पढ़े लिखे पिछड़े वर्ग को पता है कि पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मोदी सरकार ने दिया। निस्संदेह, संसद का विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण के लिए नारी सम्मान वंदन कानून बनाने का भी असर हुआ है।

विधानसभा चुनाव में भाजपा की पराजय का मुख्य कारण पार्टी एवं समर्थकों का असंतोष और विद्रोह रहा है। सच है कि भाजपा सरकारों में उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं की दर्दनाक अनदेखी हुई है। भाजपा ने मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को चुनाव का बागडोर कमाने की जगह केंद्रीय नेताओं को उतार कर पार्टी के अंदरूनी विरोधी रुझान को लगभग खत्म कर दिया। सत्ता में न रहते हुए भी छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भाजपा ने यही कदम उठाया और वहां के नेतृत्व के प्रति जो असंतोष था वह भी लगभग खत्म हो गया। नरेंद्र मोदी के नाम से भाजपा के अंदर मतभेद है नहीं। दूसरी ओर कांग्रेस ने चुनावों को एक हद तक अपनी फ्रीबीज घोषणाओं हिंदुत्व तथा नरेंद्र मोदी, संघ और भाजपा के विरुद्ध नकारात्मक अभियानों में सिमट दिया। जब कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री को पनौती तथा उनके साथ गृह मंत्री को पॉकेटमारों के गैंग का हिस्सा बताएंगे तो जनता में उसकी प्रतिक्रिया होगी। तेलंगाना में भी भाजपा अगर 2019 की विचारधारा और मुद्दों पर प्रखरता तथा सरकार के विरुद्ध आक्रामकता कायम रखती, ठाकुर राजा सिंह के निष्कासन की घोषणा नहीं करती और उसे दूसरे तरीके से संभालती तो परिणाम अलग आते। लोग बीआरएस की सत्ता बदलना चाहते थे, पर भाजपा हराने वाली सक्षम विकल्प नहीं थी। मतदाता कांग्रेस के साथ गए। बावजूद भाजपा को लगभग 14% मत आए हैं। इस तरह सारे चुनाव परिणाम नरेंद्र मोदी, भाजपा, हिंदुत्व और‌ उससे संबद्ध राष्ट्रबोध संबंधी विचारधारा तथा जमीन पर उसके व्यवहारिक रूप को प्रकट करने वाले हैं। स्थिति यही रही जिसकी संभावना है तो इसके आधार पर आप 2024 के चुनाव परिणाम का भी पूर्व आकलन कर सकते हैं।

वेदांतु देश भर में 30 से अधिक ऑफलाईन सेंटरों के साथ बढ़ा रहा है अपनी शैक्षणिक पहुंच

वेदांतु देश के विभिन्न शहरों में कोचिंग उपलब्ध कराने के लिए जेईई, नीट और फाउन्डेशन कोर्सेज़ के लिए 30 से अधिक ऑफलाईन सेंटर लॉन्च कर रहा है वेदांतु का मेगा वेदांतु स्कॉलरशिप एडमिशन टेस्ट अब ऑनलाईन एवं ऑफलनाईन दोनों फोर्मेट्स में उपलब्ध है, जिसके तहत छात्रों को आकर्षक रिवॉईस मिलेंगे

 

नई दिल्ली। जाने-माने ऑनलाईन ऐडटेक प्लेटफॉर्म वेदांतु ने देश के विभिन्न शहरों में जेईई, नीट एवं फाउन्डेशन कोर्सेज़ के लिए 30 से अधिक ऑफलाईन सेंटर खोलने की योजनाओं के साथ अपनी सेवाओं के विस्तार की घोषणा की है। ऑनलाईन एवं ऑफलाईन दोनों तरह के कोर्सेज़ के साथ वेदांतु गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रयासरत है और इस बातकी गारंटी देता है कि जेईई/नीट परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भारत के टॉप अध्यापकों से सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शन मिलेगा।
वेदांतु के संस्थापकों के पास शिक्षा के क्षेत्र में 18 साल का समृद्ध अनुभव है, जिन्होंने छात्रों को लर्निंग का व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करने के लिए उत्कृष्ट सिस्टम का निर्माण किया है। वेदांतु का जांचा-परखा गया लर्निंग सिस्टम सुनिश्चित करता है कि हर छात्र की ज़रूरतों को पूरा किया जाए और हर बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार पूरा सहयोग मिले।
अब वेदांतु ऑफलाईन कोचिंग में बदलाव लाने जा रहा है। इसके सभी ऑफलाईन सेंटरों में हाई-टेक क्लासरूम होंगे जो सभी छात्रों की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित कर उन्हें लर्निंग का इंटरैक्टिव वातावरण उपलब्ध कराएंगे।
वेदांतु का छात्रों के अनुकूल वातावरण उन्हें सवाल पूछने हर जानकारी पाने और 24/7 सीखने का मौका देता है।
इसके व्यापक लर्निंग टूलकिट में एक डाउट ऐप है, जिसके ज़रिए लाईव वन-टू-वन सैशन्स के द्वारा छात्रों के सवाल हल किए जाते हैं। इसी तरह पैडागॉजी ऐप में छात्रों को पुस्तकों की व्यापक लाइब्रेरी, ढेरों प्रेक्टिस सवालों, कस्टमाइज़्ड फ्लैशकाईस, अडैप्टिव प्रेक्टिस का एक्सेस मिलता है, जो छात्रों के व्यक्तिगत विकास को सुनिश्चित करते हैं। टेक-इनेबल्ड क्लासेज़ एवं वेदांतु का टेक इन्फ्रा, छात्रों की सभी गतिविधियों जैसे कक्षा में भागीदारी, टेस्ट, असाइनमेन्ट आदि का मूल्यांकन करते हैं, और अभिभावकों को उनके बच्चों की प्रगति के बारे में ज़रूरी जानकारी देते हैं। साथ वेदांतु छात्रों को आपसी सहयोग, लर्निंग एवं मार्गदर्शन पाकर सफलता के पथ पर बढ़ने के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है।
ऑफलाईन सेंटर इन शहरों में खोले जाएंगेः दिल्ली, पटियाला, पुणे, नागपुर, मुज़फ्फरपुर, बैंगलोर, चेन्नई, कोयम्बटूर, मदुराई, त्रिची, पुडुचैरी, हैदराबाद, विशाखापटनम और विजयवाड़ा।
आधुनिक बुनियादी सुविधाओं एवं विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के साथ ये नई ऑफलाईन सेंटर छात्रों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएंगे, और उन्हें लर्निंग का बेहतर अनुभव प्रदान करेंगे।
मेगा वेदांतु स्कॉलरशिप एडमिशन टेस्ट ऑनलाईन एवं ऑफलाईन वेदांतु ने मेगा वेदांतु स्कॉलरशिप एडमिशन टेस्ट के लॉन्च की घोषणा भी की है जो पहली बार ऑनलाईन एवं ऑफलाईन दोनों फोर्मेट्स में उपलब्ध होगा। इसके अलावा देश भर में ऑफलाईन सेंटरों का विस्तार भी किया जा रहा है। परीक्षा 9 और 10 दिसम्बर 2023 को होगी।
मेगा वेदांतु स्कॉलरशिप एडमिशन टेस्ट के तहत छात्रों का आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे
• कक्षा 9-12 के छात्रों के लिए नीट / जेईईटी के लिए वेदांतु के ऑफलाईन कोर्सेज के लिए 100 फीसदी तक की गारंटीड स्कॉलरशिप 5 दिनों के लिए फुली-फंडेड रीसर्च प्रोग्राम में एनरोलमेन्ट का मौका, जो सिर्फ ऑफलाईन टेस्ट टॉपर्स के लिए है।
• ड्रोन, स्मार्टवॉच, टेलीस्कोप और अन्य स्मार्ट डिवाइसेज़ जैसे पुरस्कार • वेदांतु डाउट एक्सपर्ट ऐप का 3 महीने का मुफ्त सब्सक्रिप्शन, इसके अलावा मेगा वेदांतु स्कॉलरशिप एडमिशन टेस्ट के द्वारा छात्रों को ऑल इंडिया रैंकिंग के आधार पर परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के साथ तुलना करने और अपनी नेशनल लैवल स्टैंडिंग जानने का मौका मिलेगा।
 
 
वेदांतु के संस्थापकों की ओर से संदेश
वेदांतु में हम छात्रों को न सिर्फ परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग देते हैं, बल्कि उन्हें जीवन की यात्रा के लिए तैयार भी करते हैं। हम हर कदम पर सहयोग देते हुए उनके साथ खड़े रहने और उन्हें उनकी क्षमता को उपयोग के लिए प्रेरित करने का वादा करते हैं। सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए ऑफलाईन सेंटरों के रूप में विस्तार वेदांतु के लिए स्वाभाविक कदम है। वेदांतु ने भविष्य में और अधिक विस्तार तथा देश के दूर-दराज के इलाकों के छात्रों को सहयोग प्रदान करने की योजनाएं बनाई हैं।'
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मंगलवार, 5 दिसंबर 2023

नेटफ्लिक्स पर लखनऊ के गगनदीप सिंह डिडयाला के साथ 'धक धक' करने को तैयार हर दिल

हमारे ही शहर लखनऊ का 'धक धक' बॉय गगनदीप सिंह  डिडयाला  8 दिसंबर 2023 को फिल्म धक धक में अपनी बड़ी भूमिका के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर धमाल मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
तरूण डुडेजा द्वारा निर्देशित, यह फ़िल्म महिला केंद्रित है जिसमें रतना पाठक शाह, दीया मिर्जा, फातिमा सना शेख और संजना सांघी जैसे बड़े नाम शामिल हैं जो कि अपने सपने, बाइकिंग की दिशा में काम कर रही हैं।
एक बेहद प्यारे पति की भूमिका निभाते हुए गगनदीप सिंह  डिडयाला  कहते हैं, "ऐसे निर्देशक के साथ काम करना एक कमाल की यात्रा थी।"
इसके अलावा, सिंह को याद है कि कैसे पहली ही मुलाकात में डुडेजा ने उनकी बहुत सराहना की थी।
निर्देशक नें पहली ही मुलाकात में उनसे कहा कि, "मैं आपको फिल्म में डायलॉग दूंगा क्योंकि मैं आपके मजबूत व्यक्तित्व और अनुग्रह से प्रभावित हूं।"
यह वास्तव में गर्व का क्षण है कि लखनऊ के गगनदीप सिंह  डिडयाला  धक धक में 'एक चेहरा' हैं।  रोमांच और गमभीर्ता से भरी इस फिल्म में गगनदीप का किरदार दर्शको को भावुक कर देगा।
गगनदीप सिंह डिडयाला पिछले १२ सालों से इलैक्ट्रौनिक मीडिया की फील्ड से जुड़े हुए हैं। गगनदीप सिंह डिडयाला के आगामी प्रोजेक्ट्स इमतेआज़ अली की चमकीला है जिसकी प्रमुख भूमिका में वो दिलजीत दोशांज और परिनीती चोपड़ा के साथ नज़र आएंगे। उनकी आपने वाली वेबसीरीज़ की बात करें तो Union: Making Of India है जिसमें वो आशुतोश राणा और केके मेनन के साथ दिखाई देंगे जिसमें आशुतोश सरदार पटेल का और के के मेनन वीपी मेनन का किरदार नभा रहे हैं वही गगनदीप ब्रीगेडियर गुरदयाल बने नज़र आएंगे।

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2023

गांवों मे भी शादी व्याह , तीज त्योहार को अधुनिकता ने बदल दिया

 बसन्त कुमार

 पिछले दिन मै अपने गाव अपनी भतीजी की शादी मे गया, कई दशकों के बाद घर मे लड़की की शादी के लिए मन में बड़ा उत्साह था की इस मौके पर पूर्व की भाति सारी रश्मे होगी भाभी, बुआ, बहन सब का अपना अपना काम होगा सब का नेग जोग मुझे या पत्नी जी को करना होगा क्योकि हम ही सबसे बड़े है , पर घर पहुँचते ही सारी कल्पना हवा हवाई हो गयी, दुल्हन को सजाने बजाने के लिए शहर की ब्यूटिशियन की बुकिंग हुई जिसकी फीस 50 हजार, बाकी सब कुछ टेंट वाले, कैटरर, वेटर, सजावट वाले को दे दिया गया, विभिन्न रश्मो तिलक, गोद भराई, हल्दी, भत्त्वiन आदि के अवसर पर बजने वाले बादय यंत्रों की जगह कन्फोडू डी जे ने ले ली जिसे शोर से दिल कापने लगे और दिल के मरीज को कहीं छिपाना पड़ जाये पर अब तो सब पैसे का दिखावा रह गया है।
सबेरे सबेरे बसियौर या भात खहि होता इसमें भी बारातियों को कवर उठाने के लिए मनाना पड़ता, पूरे समारोह के दौरान महिलाओ द्वारा गाली गयी जाती और इसके लिए वर पक्ष को पैसा देना पड़ता! फिर गिने चुने बुजुर्गो द्वारा माडौ हिलाने की प्रक्रिया होती!  फिर बिदाई से पूर्व अक्षत जाता एक एक बाराती का कन्या पक्ष के लोगो से परिचय कराया जाता सभी एक दूसरे के गले मिलते और वर एवम बधू पक्ष इसका आनंद उठाते, बच्चों को सबसे अधिक आनंद विवाह मंडप मे लगे सुग्गो को लूटने मे आता बिदाई के समय मिलन 10-5 की नोटो से होता, उस शादी समारोह मे जो स्वर्गिक अनुभूति होती वह अब नदारत है और आज की पीढ़ी उस वास्तविक आनंद से वंचित हो रही है जो उस पीढ़ी के लोगो ने महशुस किया है, लोग बदल रहे है परंपरा बदल रही है और शादी समारोह का मजा अब विलुप्त होता जा रहा है।
औरते मिलकर दुल्हन को तैयार कर दिया करती थी और हर रश्म का उपयुक्त गीत स्वयम गा लिया करती थी, गाँव के सभी युवा बच्चे दिन पर शादी से संबंधित काम करने के लिए हर समय तत्पर रहते थे, हंसी ठिठोली चलती रहती थी और समारोह का कामकाज भी समय पर पूरा होता रहता था और गाँव के लोग बारातियों से पहले नही खाते थे क्योकि यह बारातियों का सम्मान होता था, गाँव की महिलाएं गीत गाती जाती थी और काम करती जाती थी उस समय सही मायने मे सामाजिक समरसता होती थी, गाँव के युवा बारातियों के खाना खिलाने की जिम्मेदारी निभाते थे, बड़े घर' की शादी हुई तो कभी लाउड स्पीकर बज जाता था! दुल्हे राजा अपने आप को अपने आप को किसी युवराज से कम नही समझते थे! दुल्हे के पास नाई तैयार रहता कभी बाल झाड़ता, कभी क्रीम पाउडर पोत देता जिससे दुल्हा सुंदर दिखे फिर फेरे के लिए पंडित जी काम शुरु होता जो देर रात तक चलता उसके बाद कोहबर होता जहाँ दुल्हे राजा जेमस् बॉण्ड की तरह बन जाते कि हम नही खायेंगे और उन्हे मनाने के लिए कन्या पक्ष के विभिन्न लोग आते! उसके पश्चात् दुल्हे का सक्षात्कiर वधू पक्ष की महिलाओ से करवाया जाता और उस दौरान उसे विभिन्न उपहार प्राप्त होते इसे दूल्हा दिखाई या अपटाउनी कहा जाता।
अब सब कुछ बदल गया है दो तीन दशक पहले गाँव मे न टेंट हाउस ही होते थे और न ही कैटरिंग होती थी बस वहा समाजिकता होती थी! जब गाँव मे शादी व्यiह होते थे तो घर घर से चारपाई, कुर्सी, दरी, जजिम्, गैस बत्ती आ जाती थी और गाँव के स्कूल के हेड मास्टर की मेहर बानी से बेंचे आ जाती थी, चिंहित घरों से हनडा, जग, सडसी, कल्छुल, कढ़ाही, बाल्टी इकट्ठा हो जाती थी! इन सब की पहचान के लिए चाक या कोयले से नाम लिख दिये जाते थे जिससे यह पता चल सके कि किस घर से कौन सा समान आया है! बचे खुचे बरतन की आपूर्ति गाँव के कुम्हार के यहाँ से प्रदत्त नाद, हंडिया एवम कुल्हड़ से हो जाती थी, गाँव की महिलाएं इकत्र होकर रोटी बना देती थी और दाल सब्जी गाँव के मर्द बना देते थे और हलवाई की जरूरत बारातियों और अन्य अतिथियों के बूंदी, लड्डू या अन्य मिठाई बनाने के लिए होती थी।
हमारे पारंपरिक तरीके से मनाये जाने वाले शादी विवाह सामाजिक मेलमिलाप के साधन होते थे उसमे जाति और धर्म आड़े नही आते थे एक की बेटी पूरे गाँव की बेटी होती थी और उसके विवाह मे अपनी अपनी हैसियत के अनुसफ सहयोग देते थे और अमीर गरीब सबकी बेटियों का कन्या दान हो जाता था और पैसे के अभाव मे किसी की शादी रुकती नही थी पर शहरी करण और आधुनिकता ने सीधे सादे गाव के लोगो से परस्पर सहयोग और आपसी सम्भiव की भावना को समाप्त कर दिया है जबकि ये सांस्कृतिक परंपराएं हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा है और ये बनी रहनी चाहिए।
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