सोमवार, 1 मई 2023

गांधीनगर विधायक अनिल बाजपेई ने एमसीडी के मुख्य अभियंता अनिल त्यागी से गांधीनगर विधानसभा में विकास कार्यों को ले चर्चा की

आज गांधीनगर के विधायक श्री अनिल बाजपेई ने दिल्ली नगर निगम के मुख्य अभियंता श्री अनिल त्यागी जी से गांधीनगर विधानसभा में विकास कार्यों को लेकर चर्चा की।
1.गांधीनगर के विधायक श्री अनिल बाजपेई जी ने बताया कि मुख्य अभियंता जी ने कहा कि विधायक फंड से  शंकर नगर एक्सटेंशन की गली नंबर 1 में 1 करोड़ 35 लाख की लागत से कार्य का वर्क ऑर्डर हो गया है और शीघ्र ही इसका कार्य शुरू हो जायेगा।
2.चंद्रपुरी नाले की सफाई का भी टेंडर पास हो गया वहां पर भी जल्दी काम शुरू होगा।
3.अजीत नगर की जिन गलियों का विधायक फंड से काम होना था उसका भी वर्क ऑर्डर हो गया है जल्दी ही इन गलियों का काम शुरू हो जायेगा।
4.गांधीनगर विधानसभा के अन्तर्गत जितने MCD के पार्क आते हैं उन सभी का रखरखाव किया जाएगा।
 

'रत्ती' की वास्तविकता, यह आम बोलचाल में आया कैसे?

"रत्ती" यह शब्द लगभग हर जगह सुनने को मिलता है। जैसे - रत्ती भर भी परवाह नहीं, रत्ती भर भी शर्म नहीं, रत्ती भर भी अक्ल नहीं...!!
आपने भी इस शब्द को बोला होगा, बहुत लोगों से सुना भी होगा। आज जानते हैं 'रत्ती' की वास्तविकता, यह आम बोलचाल में आया कैसे?
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रत्ती एक प्रकार का पौधा होता है, जो प्रायः पहाड़ों पर पाया जाता है। इसके मटर जैसी फली में लाल-काले रंग के दाने (बीज) होते हैं, जिन्हें रत्ती कहा जाता है। प्राचीन काल में जब मापने का कोई सही पैमाना नहीं था तब सोना, जेवरात का वजन मापने के लिए इसी रत्ती के दाने का इस्तेमाल किया जाता था।
सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस फली की आयु कितनी भी क्यों न हो, लेकिन इसके अंदर स्थापित बीजों का वजन एक समान ही 121.5 मिलीग्राम (एक ग्राम का लगभग 8वां भाग) होता है।
तात्पर्य यह कि वजन में जरा सा एवं एक समान होने के विशिष्ट गुण की वजह से, कुछ मापने के लिए जैसे रत्ती प्रयोग में लाते हैं। उसी तरह किसी के जरा सा गुण, स्वभाव, कर्म मापने का एक स्थापित पैमाना बन गया यह "रत्ती" शब्द।

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर बिजली कर्मचारियों की समस्यायों को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया

मो. रियाज़

नई दिल्ली। पूरी दिल्ली में बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड व बीएसईएस राजधानी में आउटसोर्सिंग व एएमसी आधार पर जैसे मीटर रीडर/ बिल डिस्टिब्यूटर/रिकवरी विभाग/ ड्राइवर/ आईटीआई - लाईन मैन इत्यादि काम करने वाले कर्मचारी अपनी जान पर खेलकर कार्य करते हैं। कभी-कभी तो कर्मचारियों की कार्य करते समय जान तक चली जाती है पर बीएसईएस में ऐसे कर्मचारियों की कोई गिनती नहीं होती। ऐसे कर्मचारी को कोई अपना मानने को तैयार नहीं होता है। इनकी समस्याओं के लिए हमेशा डेसू मजदूर संघ कार्य करती आ रही है। कई कर्मचारियों को उनका हक भी दिलवा है और दिलवा रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर डेसू मजदूर संघ द्वारा बीआरपीएल बिजली कम्पनी के मुख्यालय नहेरू प्लेस नई दिल्ली में बिजली कर्मचारियों की समस्यायों को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डेसू मजदूर संघ अध्यक्ष किशन यादव ने की व इस कार्यक्रम में पूरी दिल्ली के अलग-अलग कर्मचारी शामिल हुए। इस कार्यक्रम में मजदूरों से संबंधित कई समस्याओं को रखा गया और कुछ मांग की गई जैसे (1) जिन बेकसूर कर्मचारियों को बिजली कंपनियों ने निकाला है उन्हें नौकरी पर वापस लिया जाए। (2) जिन कर्मचारियों को फोन का पैसा नहीं दिया जा रहा है उन्हें पैसा दिया जाए। (3) सरकारी अवकाश पर सरकारी कर्मचारियों की तरह ही आउटसोर्स कर्मचारियों को भी अवकाश दिया जाए या उनकी जगह पैसे दिए जाएं। ऐसे ही कई और समस्या को रखा गया जिसे जल्द से जल्द निपटने की बात कही गई।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंजी. डीसी कपिल,  राष्ट्रीय अध्यक्ष, ठेकेदारी हटाओ राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा का भव्य स्वागत किया गया। इसके उपरांत डीसी कपिल ने अपने कुशल नेतृत्व में बिजली कर्मचारियों की विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं अब पहले से भी अच्छा मार्गदर्शन करता हुआ और मैं सभी आउटसोर्स कर्मचारियों की आवाज बुलंद करता रहूंगा और जिन बिजली कम्पनियों ने आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों की आवाज को दबाने की कोशिश की वह अपने लिए मुसीबत खड़ी करेंगे।

इस मौके पर डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव ने कार्यक्रम में पहुंचने वाले सभी बिजली कर्मचारियों को 'अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ की शुभकामनाएं देते हुए सभी को इस कार्यक्रम का सफल बनाने के लिए भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतनी संख्या में आप लोग आएंगे क्योंकि जिस तरह से बारिश हो रही है लग रहा था कि कार्यक्रम ही रद्द न करना पड़ जाए मगर आप लोगों की हिम्मत को सलाम है। आप लोगों ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इसे सफल बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। इतना ही नहीं तीन घंटे लगातार भारी बारिश के बावजूद आप लोग मैदान में डटे हैं। जो एक संघर्ष और क्रांति की अच्छी शुरुआत का पोजिटिव संकेत है। हम इस तरह अपनी एकता को कायम रखेंगे और हमारी यूनियन भी आप लोगों के हक में हमेशा कार्य कर रही और ऐसे ही करती रहेगी। एक बार पुन: इस प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए सभी कर्मचारियों भाईयों का बहुत -बहुत धन्यवाद।

इस अवसर पर प्रोग्राम में भारतीय मजदूर संघ - दिल्ली प्रदेश के प्रधान दीपेन्द्र कुमार तिवारी, उपाध्यक्ष-ब्रिजेश कुमार, सगंठन  मंत्री-राना सिंह, मीडिया प्रभारी अरविंद कुमार, प्रदीप कुमार बरगोति – सचिव, इकबाल खान - जिला मंत्री, राजेश पाल - जिला मंत्री, पंकज शर्मा – चेयरमैन, मनीष कुमार सिंह - जिला मंत्री, रवि शंकर यादव - जिला चेयरमैन, राजन गुर्जर - जिला मंत्री, दीपक कुमार – चेयरमैन, चंदन कुमार - जिला मंत्री, ललित एस कुमार – चेयरमैन, इरफान खान - वाइस चेयरमैन, जितेन्द्र कुमार उर्फ जीतू सरिता विहार, मनोज विद्रोही - मीडिया प्रभारी, विनोद सिंह – NDPL, सुभम सिंह पंवार - जिला मंत्री, वरूण सिंह पंवार – चेयरमैन, राजेश कुमार - जिला मंत्री, अशोक कुमार –अध्यक्ष, ऋषि पाल – महामंत्री, सेन्तुल त्यागी - सगंघन मंत्री, विनोद कुमार उर्फ गोलू - सह सचिव, दिनेश कुमार – चेयरमैन, बाबू लाल - जिला मंत्री, अब्दुल रज्जाक - सगंठन मंत्री, मुकेश यादव - मुख्य सलाहकार, दिनेश यादव - मुख्य सलाहकार, रविन्द्र सिंह पंवार - मुख्य सलाहकार, राजवंत सिंह - मुख्य सलाहकार, संदीप कुमार - जिला मंत्री, प्रमोद कुमार- चेयरमैन, आदि मौजूद थे।

बेहटा हाजीपुर वार्ड से सभासद पद से आप के प्रत्याशी हैं अकील अहमद

मो. अनीस

बेहटा हाजीपुर। उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव अपने पूरे शबाब पर है और इसके पहले चरण की वोटिंग 4 मई को होगी वहीं दूसरे चरण की वोटिंग 11 मई को होगी। इस बार दिल्ली व पंजाब पर बढ़त बनाने, गुजरात व गोवा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतार 2024 की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसके लिए पार्टी ने थीम सॉन्ग लॉन्च किया है और इसके जरिए भी पीएम मोदी और सीएम योगी पर निशाना साधा है। इसके साथ ही भाजपा को धोखेबाज बताया है।
आप ने उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के लिए नया नारा भी गढ़ लिया है। इसके तहत कार्यकर्ता ‘यूपी निकाय में भी केजरीवाल’ का नारा लगा रहे हैं। थीम सॉन्ग में आप संयोजक और दिल्ली सीएम केजरीवाल की भी फोटो लगाई गई है।
वहीं जिला गाजियाबाद के तहसील लोनी के मौलाना आजाद कॉलोनी के बेहटा हाजीपुर वार्ड नंबर 8 से सभासद पद के लिए आम आदमी पार्टी की ओर से अकील अहमद को प्रत्याशी हैं। अकील अहमद भी पूरे जोर-शोर से अपना प्रचार कर रहे हैं। इनके समर्थन में भी काफी भीड़ नजर आ रही है। इनके मुख्य मुद्दे लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाना, 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने के लिए समय-समय पर बिजली के ट्रांसफार्मर ठीक करवाना या लगवाना, वृद्धों व विधवाओं को पेंशन दिलवाना, आरसीसी रोड बनवाना, जर्जर तारों को सही करवाना, डिस्पेंसरी बनवाना, वार्ड में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना आदि।

रविवार, 30 अप्रैल 2023

अपराधियों का महिमामण्डन - रुग्ण समाज की निशानी

तनवीर जाफ़री
गैंगस्टर एवं नेता ब्रदर्स अतीक़ व अशरफ़ अहमद की इलाहाबाद के एक अस्पताल परिसर में गत 15 अप्रैल की रात पुलिस हिरासत में मीडिया से बातचीत के दौरान तीन हमलावरों ने नज़दीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकाण्ड के बाद उनके महिमामण्डन की कई ख़बरें सामने आई हैं। अतीक़-अशरफ़ की हत्या जिन परिस्थितियों में की गयी उसकी आलोचना सर्वत्र की जा रही है। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ इस घटनाक्रम पर तुरंत सक्रिय हुये व पुलिस की लापरवाही पर उनकी नाराज़गी की ख़बरें भी आयीं। परन्तु उन दोनों भाइयों की हत्या तथा इससे दो दिन पहले ही अतीक़ के एक बेटे असद की पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ के बाद जिसतरह कुछ ख़बरें इन गैंगस्टर्स के महिमामण्डन को लेकर सुनाई दीं वह चौंकाने वाली थीं। ख़ासतौर पर  धर्म के आधार पर अपराधियों का महिमामण्डन किया जाना तो किसी भी क़ीमत पर मुनासिब नहीं कहा जा सकता। अतीक़ मुसलमानों का कितना बड़ा हितैषी था इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस पर पर दर्ज हुये 20 सबसे संगीन अपराधों में दायर 13 मामले पीड़ित मुसलमानों द्वारा ही दर्ज कराए गये थे। वैसे भी प्रायः गैंगस्टर्स का धर्म जाति से कोई वास्ता नहीं होता। इनके गैंग में सभी धर्मों और जातियों के लोग शामिल होते हैं और इनसे पीड़ित लोग भी किसी भी धर्म जाति के हो सकते हैं। 
इन वास्तविकताओं के बावजूद अतीक़-अशरफ़ की हत्या के बाद उनका महिमामण्डन करने,उन्हें मुसलमानों के हीरो के रूप में पेश करने यहाँ तक कि शहीद बताने तक की ख़बरें कई जगहों से प्राप्त हुईं। एक मौलवी तो बाक़ायदा नमाज़ के बाद दुआओं में अतीक़ ब्रदर्स को शहीद बताता नज़र आया और उसने उन्हें जन्नत भेजने की दुआएं भी दे डालीं।  प्राप्त समाचारों के अनुसार पटना में जामा मस्जिद के बाहर अलविदा की नमाज़ के बाद अतीक़ ब्रदर्स  के समर्थन में नारेबाज़ी की गई और 'अतीक़ अहमद अमर रहें' के नारे लगाए । देश में और भी कई जगह से अतीक़ के समर्थन व उसे महिमामंडित करने के समाचार प्राप्त हुए। विदेशी मीडिया ने तो अतीक़ को रोबिन हुड के रूप में पेश करने की कोशिश की। बेशक उनकी हत्या के तरीक़ों,पुलिस की लापरवाही,सुरक्षा में चूक पर ऊँगली उठना या इनकी आलोचना अपनी जगह पर सही है परन्तु उन्हें महिमामंडित करना क़तई उचित नहीं इसलिये कि किसी अपराधी को महिमामंडित करने का दूसरा अर्थ है उसके द्वारा किये गए अपराधों को नज़र अंदाज़ करना। 
अतीक़ को महिमामंडित करने के विरोध में कई पेशेवर अति उत्साही लेखकों ने तो कई आलेख लिख डाले। बिहार के भाजपा विधायक विधायक हरी भूषण ठाकुर को तो यहां तक कहने का अवसर मिल गया कि -'अतीक़ के समर्थन में नारेबाज़ी करने वालों का एनकाउंटर कर देना चाहिये।' साम्प्रदायिकता को हवा देकर तमाम लोग सरकार से 'रेवड़ी ' हासिल करने की फ़िराक़ में न जाने क्या क्या लिखते रहते हैं। परन्तु इनसे यह सवाल तो ज़रूर पूछा जाना चाहिये कि इन्होंने उस समय क्या प्रतिक्रिया दी थी जब शंभु रैगर नामक एक युवक द्वारा 6 दिसंबर 2017 को राजस्थान में एक बंगाली मज़दूर अफ़राज़ुल शेख़ की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गयी थी और उसे जला दिया गया था।  इतना ही नहीं बल्कि इस जघन्य हत्याकाण्ड का वीडियो भी स्वयं हत्यारे ही द्वारा फ़ेसबुक पर लाइव टेलीकास्ट किया गया था । वही हत्यारा जेल गया तो जेल से भी वीडियो बनाकर डालता रहा। और जब वह ज़मानत पर बाहर आया तो उसके समर्थन में हज़ारों लोगों ने  जुलूस निकाला था। उसके समर्थन में नारे लगाये गये। यहाँ तक कि उत्पाती साम्प्रदायिक भीड़ द्वारा अदालत की छत पर चढ़ कर भगवा झंडा लहरा दिया गया था ? और धार्मिक जुलूस में उसके नाम की चौकी सजा कर निकाली गयी थी । क्या किसी बेगुनाह व्यक्ति को कुल्हाड़ियों से काटकर उसे जलाये जाने जैसा घृणित अपराध करने वाले का महिमामण्डन करना सही है ?
जघन्य अपराधियों,बलात्कारियों,हत्यारों को महिमामंडित करने उन्हें हीरो बनाने जैसा घृणित कार्य तो गोया अब परंपरा का रूप लेता जा रहा है। किसी घटना को साम्प्रदायिक या जातिवादी मोड़ दे दिये जाने पर तो गोया अपराधियों का महिमामण्डन अनिवार्य सा हो गया है। देश में ऐसी दर्जनों मिसालें मौजूद हैं। हाथरस बलात्कार काण्ड में बलात्कारियों के पक्ष में पंचायत बुलाई गयी। 2018 में जम्मू के कठुवा में एक ग़रीब मज़दूर की 8 वर्षीय बेटी असिफ़ा का अपहरण कर उसके साथ गैंग रेप किया गया व उसकी निर्मम हत्या कर उसकी लाश जंगल में फेंकने जैसी वारदात अंजाम दी गयी। और उसके बाद बलात्कारियों व हत्यारों के पक्ष में राज्य के भाजपा मंत्रियों व विधायकों का खड़ा होना व उन्हें बचाने के लिये जुलूस प्रदर्शन धरना  करना क्या देश कभी भूल सकेगा ? बिल्क़ीस के बलात्कारियों,दंगाइयों की सुगम रिहाई और बाद में राजनैतिक मंच पर उस अपराधी का महिमामण्डन,क्या अपराधियों के हौसले नहीं बढ़ाता ? 2019 में शाहजहांपुर के स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय जिसे स्वामी चिन्मयानंद का ट्रस्ट चलाता है यहां पढ़ने वाली एलएलएम की एक छात्रा ने स्वामी चिन्मयानंद पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्हें एम पी एम एल ए अदालत बा इज़्ज़त बरी कर देती है। जामिया में धरने पर बैठे लोगों की तरफ़ जो अनजान युवक तमंचे से गोलियां चलाता है वह आज महिमामंडित होकर साम्प्रदायिकतावादियों का आइकॉन बन चुका है। भाजपा नेता जयंत सिन्हा झारखण्ड में मॉब लिंचिंग के हत्यारे दोषियों को जेल से छूटने के बाद माला पहनाते व उनके साथ फ़ोटो सेशन करते देखे जाते हैं। 2015 में नोएडा के निकट दादरी में अख़लाक़ नमक 50 वर्षीय व्यक्ति की भीड़ ने पीट पीट कर हत्या कर दी थी। अख़लाक़ का बेटा भारतीय वायुसेना में अधिकारी है। उस समय भी तत्कालीन सांसद योगी आदित्य नाथ सहित तमाम बड़े भाजपा नेता मंत्री सांसद व विधायक हत्यारों की हौसला अफ़ज़ाई करते उन्हें बचाते व उनके पक्ष में पंचायतें करते दिखाई दिए थे। 
लगभग वही सिलसिला अतीक़ व अशरफ़ की हत्या के बाद भी नज़र आया। हत्यारों,बलात्कारियों या किसी भी अपराध में संलिप्त लोगों को धर्म या जाति के आधार पर समर्थन देना एक ख़तरनाक सिलसिले को बढ़ावा देना है। कहना ग़लत नहीं होगा कि अपराधियों का महिमामण्डन न केवल न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश है बल्कि यह रुग्ण समाज की भी निशानी है।
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