मंगलवार, 6 दिसंबर 2022

दिल्ली नगर निगम में चुनाव जीते हुए प्रत्याशियों की सूची

 

वार्ड- 1 नरेला से श्वेता खत्री (आप)
वार्ड- 2 बांकेर से दिनेश कुमार (आप)
वार्ड- 3 होलंबी कला से नेहा (आप)
वार्ड- 4 अलीपुर से योगेश (बीजेपी)
वार्ड- 5 बख्तावरपुर से जनता देवी (बीजेपी)
वार्ड- 6 बुराड़ी से अनिल कुमार त्यागी (बीजेपी)
वार्ड- 7 कादीपुर से मुनेश देवी (आप)
वार्ड- 8 मुकुंदपुर से गुलाब सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 9 संतनगर से रूबी (आप)
वार्ड- 10 झड़ोदा से गगन चौधरी (आप)
वार्ड- 11 तिमारपुर से प्रोमिला गुप्ता (आप)
वार्ड- 12 मलकागंज से रेखा (बीजेपी)
वार्ड- 13 मुखर्जी नगर से राजा इकबाल सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 14 धीरपुर से नेहा अग्रवाल (आप)
वार्ड- 15 आदर्श नगर से मुकेश कुमार गोयल (आप)
वार्ड- 16 आजादपुर से सुमन कुमारी (बीजेपी)
वार्ड- 17 भलस्वा से अजीत सिंह यादव (आप)
वार्ड- 18 जहांगीरपुरी से टिम्सी शर्मा (आप)
वार्ड- 19 स्वरूप नगर से जोगिंदर सिंह (आप)
वार्ड- 20 समयपुर बादली से गायत्री देवी (बीजेपी)
वार्ड- 21 रोहिणी-ए से प्रदीप मित्तल (आप)
वार्ड- 22 रोहिणी-बी से सुमन सिंह राणा (आप)
वार्ड- 23 रिठाला से नरेंद्र कुमार सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 24 विजय विहार से पुष्पा (आप)
वार्ड- 25 बुद्ध विहार से अमृत जैन (आप)
वार्ड- 26 पूठ कलां से रितु मुकेश कुमार (आप)
वार्ड- 27 बेगमपुर से जयभगवान यादव (बीजेपी)
वार्ड- 28 शाहबाद डेयरी से राम चंदर (आप)
वार्ड -29 पूठ खुर्द से अंजु देवी (बीजेपी)
वार्ड- 30 बवाना से पवन कुमार (आप)
वार्ड- 31 नांगल ठाकरन से बबीता (बीजेपी)
वार्ड- 32 कंझावला से संदीप (आप)
वार्ड- 33 रानीखेड़ा से मनीषा कराला (आप)
वार्ड- 34 नांगलोई से हेमलता (आप)
वार्ड- 35 मुंडका से गजेंद्र सिंह दरल (स्वतंत्र)
वार्ड- 36 निलोठी से बबीना शौकीन (आप)
वार्ड- 37 किराड़ी से रमेश चंद (आप)
वार्ड- 38 प्रेम नगर से नीला कुमारी (बीजेपी)
वार्ड- 39 मुबारकपुर से राजेश कुमार गुप्ता (आप)
वार्ड- 40 निठारी से ममता गुप्ता (आप)
वार्ड- 41 अमन विहार से रविंद्र भारद्वाज (आप)
वार्ड- 42 मंगोलपुरी से राजेश कुमार (आप)
वार्ड- 43 सुल्तानपुरी-ए से बॉबी (आप)
वार्ड- 44 सुल्तानपुरी-बी से दौलत (आप)
वार्ड- 45 ज्वालापुरी से संतोष देवी (आप)
वार्ड- 46 नांगलोई जाट से पूनम सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 47 निहाल विहार से मंदीप सिंह (कांग्रेस)
वार्ड- 48 गुरु हरकिशन नगर से मोनिका गोयल (बीजेपी)
वार्ड- 49 मंगोलपुरी-ए से धर्म रक्षक (आप)
वार्ड- 50 मंगोलपुरी- बी से सुमन (आप)
वार्ड- 51 रोहिणी- सी से धर्मवीर शर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 52 रोहिणी- एफ से रितु गोयल (बीजेपी)
वार्ड- 53 रोहिणी- ई से प्रकाश वाही (बीजेपी)
वार्ड- 54 रोहिणी- डी से स्मिता (बीजेपी)
वार्ड- 55 शालीमार बाग-ए से जलज कुमार (आप)
वार्ड- 56 शालीमार बाग-बी से रेखा गुप्ता (बीजेपी)
वार्ड- 57 पीतमपुरा से अमित नागपाल (बीजेपी)
वार्ड- 58 सरस्वती विहार से शिखा भारद्वाज (बीजेपी)
वार्ड- 59 पश्चिम विहार से विनिता वोहरा (बीजेपी)
वार्ड- 60 रानी बाग से ज्योति अग्रवाल (बीजेपी)
वार्ड- 61 कोहाट एंक्लेव से अजय रवि हंस (बीजेपी)
वार्ड- 62 शकरपुर से किशन लाल (बीजेपी)
वार्ड- 63 त्रि-नगर से मीनू गोयल (बीजेपी)
वार्ड- 64 केशवपुरम से योगेश वर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 65 अशोक विहार से पूनम शर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 66 वजीरपुर से चित्रा विद्यार्थी (आप)
वार्ड- 67 संगम पार्क से सुशीला (बीजेपी)
वार्ड- 68 मॉडल टाउन से विकास सेठी (बीजेपी)
वार्ड- 69 कमला नगर से रेणु अग्रवाल (बीजेपी)
वार्ड- 70 शास्त्री नगर से मनोज कुमार जिंदल (बीजेपी)
वार्ड- 71 किशन गंज से पूजा (आप)
वार्ड- 72 सदर बाजार से उषा शर्मा (आप)
वार्ड- 73 सिविल लाइंस से विकास (आप)
वार्ड- 74 चांदनी चौक से पूरणीदीप सिंह (आप)
वार्ड- 75 जामा मस्जिद से सुल्ताना आबिद (आप)
वार्ड- 76 चांदनी महल से मोहम्मद इकबाल (आप)
वार्ड- 77 दिल्ली गेट से किरण बाला (आप)
वार्ड- 78 सीताराम बाजार से राफिया माहिर (आप)
वार्ड- 79 बल्लीमारन से मोहम्मद सादिक (आप)
वार्ड- 80 रामनगर से कमल बागड़ी (बीजेपी)
वार्ड- 81 कुरैश नगर से शमीम बानो (आप)
वार्ड- 82 पहाड़गंज से मनीष चड्ढा (बीजेपी)
वार्ड- 83 करोल बाग से उर्मिला देवी (आप)
वार्ड- 84 देव नगर से महेश कुमार (आप)
वार्ड- 85 वेस्ट पटेल नगर से कविता चौहान (आप)
वार्ड- 86 ईस्ट पटेल नगर से शैली ओबरॉय (आप)
वार्ड- 87 रंजीत नगर से अंकुश नारंग (आप)
वार्ड- 88 बलजीत नगर से रुणाक्षी शर्मा (आप)
वार्ड- 89 कर्मपुरा से राकेश जोशी (आप)
वार्ड- 90 मोती नगर से अलका ढींगरा (आप)
वार्ड- 91 रमेश नगर से पुनीत राय (आप)
वार्ड- 92 पंजाबी बाग से सुमन त्यागी (बीजेपी)
वार्ड- 93 मादीपुर से साहिल गंगवाल (आप)
वार्ड- 94 रघुवीर नगर से उर्मिला गंगवाल (बीजेपी)
वार्ड- 95 विष्‍णु गार्डन से मीनाक्षी चंदेला (आप)
वार्ड- 96 राजौरी गार्डन से शशि तलवार (बीजेपी)
वार्ड- 97 चौखंडी नगर से सुनील कुमार चंदा (आप)
वार्ड- 98 सुभाष नगर से मंजू सेतिया (आप)
वार्ड- 99 हरी नगर से राजेश कुमार लाडी (आप)
वार्ड- 100 फतेह नगर से रमिंदर कौर (आप)
वार्ड- 101 त‍िलक नगर से अशोक कुमार मन्नू (आप)
वार्ड- 102 ख्‍याला से शिल्पा कौर (आप)
वार्ड- 103 केशोपुर से हरीश ओबरॉय (बीजेपी)
वार्ड- 104 जनकपुरी साउथ से डिंपल आहूजा (आप)
वार्ड- 105 महावीर एंक्‍लेव से प्रवीण कुमार (आप)
वार्ड- 106 जनकपुरी वेस्‍ट से उर्मिला चावला (बीजेपी)
वार्ड- 107 विकासपुरी से साहिब कुमार (आप)
वार्ड- 108 हस्तसाल से राखी यादव (आप)
वार्ड- 109 विकास नगर से अशोक पांडेय (आप)
वार्ड- 110 कुंवर सिंह नगर से राज बाला (आप)
वार्ड- 111 बापरौला से रविंदर (आप)
वार्ड- 112 सैनिक एंक्‍लेव से निर्मला कुमारी (आप)
वार्ड- 113 मोहन गार्डन से सुरेंद्र कौशिक (आप)
वार्ड- 114 नवादा से निर्मला देवी (आप)
वार्ड- 115 उत्‍तम नगर से दीपक वोहरा (आप)
वार्ड- 116 बिंदापुर से कृष्ण कुमार राघव (आप)
वार्ड- 117 डाबरी से तिलोत्मा चौधरी (आप)
वार्ड- 118 सागरपुर से सिम्मी यादव (आप)
वार्ड- 119 मंगलापुरी से नरेंद्र कुमार (आप)
वार्ड- 120 द्वारका-बी से कमलजीत सहरावत (बीजेपी)
वार्ड- 121 द्वारका-ए से राम निवास (बीजेपी)
वार्ड- 122 मट‍ियाला से अनुराधा शर्मा
वार्ड- 123 ककरोला से सुदेश कुमार (आप)
वार्ड- 124 नंगली सकरावत से सविता (बीजेपी)
वार्ड- 125 छावला से शशि यादव (बीजेपी)
वार्ड- 126 ईसापुर से मीना देवी (स्वतंत्र)
वार्ड- 127 नजफगढ़ से अमित खड़खड़ी (बीजेपी)
वार्ड- 128 द‍िचाऊं कलां से नीलम (बीजेपी)
वार्ड- 129 रोशनपुरा से देवेंद्र (बीजेपी)
वार्ड- 130 द्वारका-सी से सुनीता (आप)
वार्ड- 131 ब‍िजवासन से जयवीर सिंह राणा (बीजेपी)
वार्ड- 132 कापसहेड़ा से आरती यादव (आप)
वार्ड- 133 मह‍िपालपुर से इंद्रजीत सहरावत (बीजेपी)
वार्ड- 134 राज नगर से पूनम भारद्वाज (आप)
वार्ड- 135 पालम से सीमा पंडित (बीजेपी)
वार्ड- 136 मधु व‍िहार से सुषमा राठी (बीजेपी)
वार्ड- 137 महावीर एन्‍क्‍लेव से अजय कुमार राय (आप)
वार्ड- 138 साध नगर से इंदर कौर (बीजेपी)
वार्ड- 139 नारायणा से उमंग बजाज (बीजेपी)
वार्ड- 140 इंद्रपुरी से ज्योति गौतम (आप)
वार्ड- 141 राज‍िन्‍दर नगर से आरती चावला (आप)
वार्ड- 142 दर‍ियागंज से सारिका चौधरी (आप)
वार्ड- 143 स‍िद्धार्थ नगर से सोनाली (बीजेपी)
वार्ड- 144 लाजपत नगर से अर्जुनपाल सिंह मारवाह (बीजेपी)
वार्ड- 145 एन्‍ड्रयूगंज से अनिता बसोया (आप)
वार्ड- 146 अमर कालोनी से शरद कपूर (बीजेपी)
वार्ड- 147 कोटला मुबारकपुर से कुसुम लता (बीजेपी)
वार्ड- 148 हौज खास से कमल भारद्वाज (आप)
वार्ड- 149 मालवीय नगर से लीना कुमार (आप)
वार्ड- 150 ग्रीन पार्क से सरिता फोगाट (आप)
वार्ड- 151 मुनीरका से राज बाला टोकस (आप)
वार्ड- 152 आरके पुरम से धर्मवीर सिंह (आप)
वार्ड नं.153 वसंत व‍िहार से हिमानी जैन (आप)
वार्ड- 154 लाडो सराय से राजीव सनसनवाल (आप)
वार्ड- 155 महरौली से रेखा महेंद्र चौधरी (आप)
वार्ड- 156 वसंत कुंज से जगमोहन अहलावत (बीजेपी)
वार्ड- 157 आया नगर से वेदपाल चौधरी (कांग्रेस)
वार्ड- 158 भाटी से सुंदर सिंह (आप)
वार्ड- 159 छतरपुर से पिंकी त्यागी (आप)
वार्ड- 160 सैदुलाजाब से उमेद सिंह (आप)
वार्ड- 161 देवली से अनीता (बीजेपी)
वार्ड- 162 तिगड़ी से ज्योति प्रकाश जरवाल (आप)
वार्ड- 163 संगम व‍िहार-ए से चंदन कुमार चौधरी (बीजेपी)
वार्ड- 164 दक्ष‍िण पुरी से प्रेम चौहान (आप)
वार्ड- 165 मदनगीर से गीता (आप)
वार्ड- 166 पुष्‍प व‍िहार से अरुण नवारिया (आप)
वार्ड- 167 खानपुर से ममता यादव (बीजेपी)
वार्ड- 168 संगम व‍िहार-सी से पंकज गुप्ता (आप)
वार्ड- 169 संगम व‍िहार-बी से काजल सिंह (आप)
वार्ड- 170 तुगलकाबाद व‍िस्‍तार से भागबीर (आप)
वार्ड- 171 च‍ितरंजन पार्क से आशु ठाकुर (आप)
वार्ड- 172 च‍िराग द‍िल्‍ली से कृष्ण जाखड़ (आप)
वार्ड- 173 ग्रेटर कैलाश से शिखा राय (बीजेपी)
वार्ड- 174 श्रीन‍िवासपुरी से राजपाल (बीजेपी)
वार्ड- 175 कालकाजी से योगिता सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 176 गोव‍िंदपुरी से चंद्र प्रकाश (बीजेपी)
वार्ड- 177 हरकेश नगर से ममता (आप)
वार्ड- 178 तुगलकाबाद से सुंगधा (आप)
वार्ड- 179 पुल प्रहलादपुर से राकेश लोहिया (आप)
वार्ड- 180 बदरपुर से मंजु देवी (आप)
वार्ड- 181 मोलड़बंद से हेमचंद गोयल (आप)
वार्ड- 182 मीठापुर से गुड्डी देवी (बीजेपी)
वार्ड- 183 हरी नगर व‍िस्‍तार से निखिल चपराना (आप)
वार्ड- 184 जेतपुर से हिमा (आप)
वार्ड- 185 मदनपुर खाद ईस्‍ट प्रवीण कुमार (आप)
वार्ड- 186 मदनपुर खाद वेस्‍ट से ब्रहम स‍िंह (बीजेपी)
वार्ड- 187 सरिता विहार से नीतू (बीजेपी)
वार्ड- 188 अबुल फजल एन्‍क्‍लेव से अरीबा खान (कांग्रेस)
वार्ड- 189 जाक‍िर नगर से नाजिया दानिश (कांग्रेस)
वार्ड- 190 न्‍यू अशोक नगर से संजीव कुमार सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 191 मयूर व‍िहार फेज-1 से बीना गौतम (आप)
वार्ड- 192 त्रिलोकपुरी से विजय कुमार (आप)
वार्ड- 193 कोंडली से मुनेश (बीजेपी)
वार्ड- 194 घरोली से प्रियंका गौतम (आप)
वार्ड- 195 कल्‍याणपुरी से धीरेंद्र कुमार बंटी गौतम (आप)
वार्ड- 196 मयूर व‍िहार फेज-2 से देवेंद्र कुमार (आप)
वार्ड- 197 पटपड़गंज से रेनू चौधरी (बीजेपी)
वार्ड- 198 विनोद नगर से रविंद्र सिंह नेगी (बीजेपी)
वार्ड- 199 मंडावली से शशि चांदना (बीजेपी)
वार्ड- 200 पांडव नगर से यशपाल सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 201 ललिता पार्क से श्‍वेता निगम जनमित्रा (आप)
वार्ड- 202 शकरपुर से रामकिशोर शर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 203 लक्ष्‍मी नगर से अलका राघव (बीजेपी)
वार्ड- 204 प्रीत विहार से रमेश कुमार गर्ग (बीजेपी)
वार्ड- 205 आई पी एक्‍सटेंशन से रचना (आप)
वार्ड- 206 आनंद विहार से मोनिका पंत (बीजेपी)
वार्ड- 207 व‍िश्‍वास नगर से ज्‍योति रानी (आप)
वार्ड- 208 अनारकली से मीनाक्षी शर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 209 जगतपुरी से राजू सचदेवा (बीजेपी)
वार्ड- 210 गीता कालोनी से नीमा भगत (बीजेपी)
वार्ड- 211 कृष्‍णा नगर से संदीप कपूर (बीजेपी)
वार्ड- 212 गांधी नगर से प्रिया कंबोज (बीजेपी)
वार्ड- 213 शास्‍त्री पार्क से समीर अहमद (कांग्रेस)
वार्ड- 214 आजाद नगर से नीलम (बीजेपी)
वार्ड- 215 शाहदरा से भारत गौतम (बीजेपी)
वार्ड- 216 झिलमिल से पंकज लूथरा (बीजेपी)
वार्ड- 217 द‍िलशाद कालोनी से प्रीति (आप)
वार्ड- 218 सुंदर नगरी से मोहिनी जीनवाल (आप)
वार्ड- 219 दिलशाद गार्डन से बीएस पंवार (बीजेपी
वार्ड- 220 नंद नगरी से रमेश कुमार ब‍िसाईयां (आप)
वार्ड- 221 अशोक नगर से रीना माहेश्‍वरी (बीजेपी)
वार्ड- 222 राम नगर ईस्‍ट से चंद्रप्रकाश शर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 223 रोहताश नगर से शिवांगी पांचाल (आप)
वार्ड- 224 वेलकम कालोनी से र‍ितेश सूजी (बीजेपी)
वार्ड- 225 सीलमपुर से शकीला बेगम (निर्दलीय)
वार्ड- 226 गौतमपुरी से सत्‍या शर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 227 चौहान बांगर से शगुफता चौधरी जुबेर (कांग्रेस)
वार्ड- 228 मौजपुरी से अनिल कुमार शर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 229 ब्रहमपुरी से छाया गौरव शर्मा (आप)
वार्ड- 230 भजनपुरा से रेखा रानी (आप)
वार्ड- 231 घोंडा से प्रीति गुप्‍ता (बीजेपी)
वार्ड- 232 यमुना विहार से प्रमोद गुप्‍ता (बीजेपी)
वार्ड- 233 सुभाष मोहल्‍ला से मनीषा सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 234 कबीर नगर से जरीफ (कांग्रेस)
वार्ड- 235 गोरखपार्क से प्रियंका सक्‍सेना (आप)
वार्ड- 236 कर्दमपुरी से मुकेश कुमार बंसल (बीजेपी)
वार्ड- 237 हर्ष विहार से पूनम निर्मल (आप)
वार्ड- 238 सबोली से जसवंत सिंह (आप)
वार्ड- 239 गोकलपुरी से सोमवती चौधरी (आप)
वार्ड- 240 जोहरीपुर से रोशन लाल (आप)
वार्ड- 241 करावल नगर ईस्‍ट से शिमला देवी (बीजेपी)
वार्ड- 242 दयालपुर से पुनीत शर्मा (बीजेपी)
वार्ड- 243 मुस्‍तफाबाद से सबीला बेगम (आप)
वार्ड- 244 नेहरू व‍िहार से अरुण सिंह भाटी (बीजेपी)
वार्ड- 245 बृजपुरी से नाजिया खातून (कांग्रेस)
वार्ड- 246 श्रीराम कालोनी से मोहम्‍मद आमिल मलिक (आप)
वार्ड- 247 सादतपुर से नीता बिष्‍ट (बीजेपी)
वार्ड- 248 करावल नगर वेस्‍ट से सत्‍यपाल सिंह (बीजेपी)
वार्ड- 249 सोनिया विहार से सोनी पांडेय (बीजेपी)
वार्ड- 250 सभापुर से बृजेश सिंह (बीजेपी)

सोमवार, 5 दिसंबर 2022

गुरुवार, 24 नवंबर 2022

राहुल गांधी ने सावरकर की आलोचना कर कांग्रेस के लिए ही समस्याएं खड़ी की

अवधेश कुमार
राहुल गांधी द्वारा भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के दो स्थानों पर वीर सावरकर के विरुद्ध दिए गए बयान पर खड़ा बवंडर स्वाभाविक है। राहुल ने पहले वाशिम जिले में आयोजित रैली में  सावरकर जी की निंदा की और जब इसका विरोध हुआ तो अकोला जिले के वाडेगांव में पत्रकार वार्ता में माफीनामे की एक प्रति दिखाते हुए उन्हें डरपोक तथा महात्मा गांधी और उस वक्त के नेताओं के साथ धोखा करने वाला बता दिया। राहुल  के बयान और उसके प्रभावों के दो भाग हैं। पहला है इसका राजनीतिक असर और दूसरा उनके दावों की सच्चाई। राजनीतिक असर देखिए । 

एक,राहुल के बयान से उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की राकांपा दोनों असहज हो गए। दोनों को खुलकर इससे अपने को अलग करना पड़ा।

दो, संजय राउत ने यहां तक कह दिया कि इसका असर महाविकास अघाडी पर पड़ सकता है। 

तीन,महाराष्ट्र में भारत जोड़ो यात्रा में जो लोग आ रहे थे उनमें उद्धव शिवसेना और राकांपा के साथ उन संगठनों और समूहों के थे जो भाजपा आरएसएस के विरुद्ध हैं।

चार, महाराष्ट्र में वीर सावरकर के प्रति श्रद्धा और सम्मान समाज के हर वर्ग में है। इनमें भाजपा और संघ के विरोधी भी शामिल हैं। इन सबके लिए राहुल गांधी ने समस्याएं पैदा कर दी।

 पाच,आम लोगों में भी इसके विरुद्ध प्रतिक्रिया है। भाजपा विरोधियों के लिए इस यात्रा का राजनीतिक लाभ उठाने की संभावनाएं धूमिल हो गई हैं। 

और छह, राहुल गांधी और उनके रणनीतिकारों की यह भूल कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र में महंगी साबित होगी।

राहुल जो बोल रहे हैं वह सच्चाई का एक पक्ष है। सावरकर जी और माफीनामे के संबंध में सच्चाई को देखें।

एक,सावरकर 11 जुलाई ,1911 को अंडमान जेल गए और  6 जनवरी, 1924 को रिहा हुए। उनको करीब साढे 12 वर्ष काला पानी में बिताना पड़ा।

दो, सावरकर जी ने 1911 से 1920 के बीच 6 बार रिहाई के लिए अर्जी दिया।

तीन,वे सभी अस्वीकृत हो गए।

चार,  राहुल गांधी कह रहे हैं कि महात्मा गांधी को उन्होंने धोखा दिया जबकि उनकी छठी याचिका महात्मा गांधी के कहने पर ही डाली गई । गांधी जी ने स्वयं उनकी पैरवी की और यंग इंडिया में रिहाई के समर्थन में लिखा ।  प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1919 में जॉर्ज  पंचम के आदेश पर भारतीय कैदियों की सजा माफ करने की घोषणा की गई। उनमें अंडमान के सेल्यूलर जेल से भी काफी कैदी छोड़े गए। इनमें सावरकर बंधुओं  विनायक दामोदर सावरकर और इनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर शामिल नहीं थे। उनके छोटे भाई नारायणराव सावरकर ने महात्मा गांधी को पत्र लिखकर सहयोग मांगा था। गांधी जी ने क्या किया इसे देखिए।

• 25 जनवरी, 1920 को गांधी जी ने उत्तर दिया, ‘प्रिय डॉ. सावरकर, ….मेरी राय है कि आप एक विस्तृत याचिका तैयार कराएं जिसमें मामले से जुड़े तथ्यों का जिक्र हो कि आपके भाइयों द्वारा किया गया अपराध पूरी तरह राजनीतिक था।…. मैं इस मामले को अपने स्तर पर भी उठा रहा हूं। 


•गांधी जी ने 26 मई, 1920 को यंग इंडिया में लिखा, …. कई कैदियों को शाही माफी का लाभ मिला है। लेकिन कई प्रमुख राजनीतिक अपराधी हैं जिन्‍हें अब तक रिहा नहीं किया गया है। मैं इनमें सावरकर बंधुओं को गिनता हूं। वे उसी तरह के राजनीतिक अपराधी हैं जैसे पंजाब में रिहा किए गए हैं और घोषणा के प्रकाशन के पांच महीने बाद भी इन दो भाइयों को अपनी आजादी नहीं मिली है।' 

• एक और पत्र (कलेक्‍टेड वर्क्‍स ऑफ गांधी, वॉल्‍यूम 38, पृष्ठ 138) में गांधी जी ने लिखा, 'मैं राजनीतिक बंदियों के लिए जो कर सकता हूं, वो करूंगा। … राजनीतिक बंदियों के संबंध में, जो हत्‍या के अपराध में जेल में हैं, उनके लिए कुछ भी करना मैं उचित नहीं समझूंगा। हां, मैं भाई विनायक सावरकर के लिए जो बन पड़ेगा, वो करूंगा।' 

•गांधी जी ने सावरकर बंधुओं की रिहाई के मुहिम में सारे तर्क दिए जो एक देशभक्त के पक्ष में दिया जा सकता है।  

•सावरकर जी की प्रशंसा में भी गांधीजी ने लिखा ।  इसके कुछ अंश देखिए- 

'अगर देश समय पर नहीं जागता है तो भारत के लिए अपने दो वफादार बेटों को खोने का खतरा है। दोनों भाइयों में से विनायक दामोदर सावरकर को मैं अच्छी तरह जानता हूं। मेरी उनसे लंदन में मुलाकात हुई थी। वो बहादुर हैं, चतुर हैं, देशभक्त हैं और स्पष्ट रूप से हुए क्रांतिकारी थे। उन्होंने सरकार की वर्तमान व्यवस्था में छिपी बुराई को मुझसे काफी पहले देख लिया था। भारत को बहुत प्यार करने के कारण वे काला पानी की सजा भुगत रहे हैं। '

राहुल गांधी के सलाहकारों ने उन्हें नहीं बताया कि गांधीजी सावरकर जी से 1906 एवं 1909 में लंदन में मिल चुके थे। तब सावरकर इंडिया हाउस में रहकर वहां बैरिस्टर की पढ़ाई करने के साथ भारत के स्वतंत्रता के लिए भी सक्रिय थे। उनका नाम रहा होगा तभी गांधीजी उनसे मिलने गए। माना जाता है कि गांधी जी ने अपनी पहली पुस्तक हिंद स्वराज लिखी जिसमें सावरकर से हुई बहस का बड़ा योगदान है। 

जब सावरकर जी का नाम हो चुका था उस समय महात्मा गांधी के राजनीतिक जीवन की ठीक से शुरुआत नहीं हुई थी।

 ठीक है कि सावरकर जी गांधी जी के अनेक विचारों से असहमत थे और कांग्रेस के आलोचक थे। यह बिलकुल स्वाभाविक है। किंतु,उन्हें माफी मांगने वाला कायर, अंग्रेजों का पिट्ठू और स्वतंत्रता आंदोलन का विरोधी कहना एक महान देशभक्त, क्रांतिकारी , त्यागी, समाज सुधारक, जिसने संपूर्ण जीवन केवल भारत के लिए समर्पित कर दिया उसके प्रति कृतघ्नता होगी। कुछ और तथ्य देखिए।

• ऐसा प्रस्तुत किया जाता है मानो दया अर्जी डालने वाले सावरकर अकेले थे । •स्वतंत्रता सेनानियों की लंबी संख्या है जो नियम के अनुसार माफीनामा आवेदन भरकर बाहर आए।

•महान क्रांतिकारी सचिंद्र नाथ सान्याल ने अपनी पुस्तक बंदी जीवन में लिखा कि सेल्यूलर जेल में सावरकर के कहने पर ही उन्होंने दया याचिका डाली और रिहा हुए। उन्होंने लिखा है कि सावरकर ने भी तो अपनी चिट्ठी में वैसी ही भावना प्रकट की थी जैसे कि मैंने की। तो फिर सावरकर को क्यों नहीं छोड़ा गया और मुझे क्यों छोड़ा गया?

महाराष्ट्र में उनका सम्मान इस कारण भी है कि कालापानी से आने के बाद उन्होंने छुआछूत और जातपात के विरुद्ध लंबा अभियान चलाया। अछूतों और दलितों के मंदिर प्रवेश के लिए आंदोलन किया और कराया। इस पर खुलकर लिखा। मुंबई की पतित पावनी मंदिर, जहां आज अनेक नेता जाते हैं उन्हीं की कृति है। इस कारण महाराष्ट्र के दलित नेताओं के अंदर उनके प्रति गहरा सम्मान है। इनमें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर भी शामिल थे। बाबा साहब और सावरकर जी के बीच हुए पत्र व्यवहार आज भी सुरक्षित हैं। बाबासाहेब ने सावरकर जी का नाम हमेशा सम्मान से लिया। कांग्रेस ने वर्षों तक उनकी देशभक्ति पर अधिकृत रूप से सवाल नहीं उठाया। राहुल गांधी की दादी स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते उन पर डाक टिकट जारी किया तथा फिल्म डिवीजन विभाग को उन पर अच्छी फिल्म बनाने का आदेश दिया और यह बना भी। दुर्भाग्य से सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ऐसे अतिवादी बुद्धिजीवियों और नेताओं के प्रभाव में आ गई जिनके लिए हिंदुत्व, उसकी विचारधारा के नेता और संगठन दुश्मन और नफरत के पात्र हैं। भारत जोड़ो यात्रा के मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार यही लोग हैं। राहुल गांधी कहते हैं कि एक ओर आरएसएस और सावरकर की विचारधारा है तो दूसरी ओर कांग्रेस की। यह भी कि भाजपा और आरएसएस के प्रतीक सावरकर हैं।

सच यह है कि वीर सावरकर संघ के प्रशंसक नहीं रहे। बावजूद संघ और भाजपा उनके बलिदान, त्याग, देश भक्ति, उनकी रचनाएं और हिंदू समाज की एकजुटता के लिए किए गए उनके कामों को लेकर सम्मान करती है। सावरकर जैसे महान व्यक्तित्वों के मानमर्दन के विरुद्ध पूरे भारत में प्रतिक्रिया है। इसी कारण लोग कांग्रेस और नेहरु जी से जुड़े उन अध्यायों को सामने ला रहे हैं जिनका जवाब देना राहुल और उनके सलाहकारों के लिए कठिन है। कुल मिलाकर राहुल गांधी ने बयान से कांग्रेस के लिए ही समस्याएं पैदा की है।  

अवधेश कुमार,ई- 30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल 98110 27208

शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

ऐसी क्रूरता आती कहां से है

अवधेश कुमार 

आफताब अमीन पूनावाला एक प्रशिक्षित बावर्ची (शेफ) है। एक शेफ को कई काम आते हैं। मछलियां, मुर्गों व अन्य मांस देने वाले पशुओं के अंग आदि को काटकर उसे बोटी - बोटी करने भी आता है। हालांकी कोई शेफ सामान्यतः उस तरह किसी मनुष्य शरीर के 35 टुकड़े काटने की कल्पना नहीं कर सकता। आफताब ने जिस तरह उसके साथ लिव इन में रह रही  श्रद्धा वाकर की हत्या कर टुकड़े - टुकड़े काट डाला वह अपराध की दुनिया में भी अकल्पनीय है। इस घटना से अनेक जघन्य अपराधियों के अंदर भी सिहरन पैदा हो गई होगी। आखिर कोई व्यक्ति इतना भयंकर अपराध कैसे कर सकता है? स्पष्ट है कि इसके पीछे की सोच और उसके अनुसार व्यक्ति के चरित्र को समझना होगा। अभी तक की सूचना इतनी ही है कि श्रद्धा ने जब उसे शादी करने का दबाव बनाया तो उसने उसे मार डाला। इस कहानी पर सहसा विश्वास करना जरा कठिन लगता है। लिव-इन में रह रही लड़की अपने साथी पर शादी के लिए दबाव डालती है और नहीं स्वीकारने पर कोर्ट में जाती है या फिर अलग हो जाती है। शादी करने के लिए कहने में ऐसी क्या परिस्थिति पैदा हो गई जिससे आफताब को उसकी हत्या करने की सीमा तक चला गया?

आप किसी भी दृष्टिकोण से विचार करिए इसका तार्किक और सर्वमान्य उत्तर नहीं मिल सकता। हत्या करने के बाद टुकड़े-टुकड़े काटना, उसे रखने के लिए 300 लीटर वाली फ्रिज लाना और फिर एक-एक टुकड़े को दिल्ली के महरौली के जंगलों में देर रात जाकर फेंकते रहना यह सब किसी सामान्य व्यक्ति की कारगुजारी नहीं हो सकती। आप उसे असंतुलित मस्तिष्क का व्यक्ति कह कर मामले को एक मोड़ दे सकते हैं। जब भी कोई असामान्य क्रूर अपराध होता है सामान्यतः अपराधी को असामान्य या मानसिक व्याधि से ग्रसित घोषित कर दिया जाता है। निश्चित रूप से असामान्य मानसिक व्याधियों को वर्तमान मनोविज्ञान में व्यापक आयाम दे दिए हैं और उसमें आज सभी प्रकार के व्यवहार और विचार समाहित हो जाते हैं। किंतु आम भाषा में हम इसे ऐसे स्वीकार नहीं कर सकते। विचार यह करना होगा कि आखिर और सामान्य मानसिक स्थिति क्या थी? जो थी वह क्यों पैदा हुई ? 


जरा इस घटना में अभी तक आई जानकारी के दूसरे पहलू को भी देखिए। 

यह भी कहा गया है कि टुकड़े टुकड़े काटकर जंगलों में फेंकने की प्रेरणा उसे अमेरिकी टीवी सीरीज डेक्सटर से मिली। जाहिर है, एक दिन में उसके अंदर यह विचार घर नहीं किया होगा। श्रद्धा की हत्या कर उसके अंगों को काटकर वह फ्रिज में रखे हुए हैं और दूसरी लड़कियों से डेटिंग कर रहा है, उन्हें घर में बुलाकर उनके साथ मौज मस्ती कर रहा है। जिसे किसी से प्रेम होगा वह पहले तो उसकी हत्या नहीं करेगा और अगर गुस्से में कुछ हो गया तो फिर वह उसके दुख से जल्दी बाहर नहीं निकल पाएगा। यहां तो वह आराम से उसके टुकड़े काटता है, घर में रखे हुए है और दूसरी लड़कियों के साथ संबंध बनाता है। उसके जाने का उसे बिल्कुल दुख नहीं है बल्कि उसके व्यवहार से लगता है जैसे वाह मानता हो कि उसने वही किया जो उसे करना चाहिए था। यानी उसने श्रद्धा की हत्या कर अपना कर्तव्य पूरा किया है। इसका मतलब है कि श्रद्धा वाकर के साथ उसका प्रेम केवल दिखावा ही रहा होगा। पूछताछ से यह भी स्पष्ट हो जाएगा। बिल्कुल संभव है कि उसने योजनापूर्वक श्रद्धा को फंसाया होगा। डेटिंग एप पर श्रद्धा से उसकी मुलाकात हुई और नजदीकियां इतनी बढी कि दोनों साथ रहने लगे। मुंबई से दिल्ली आए। सामान्यतः हमारे देश में पढ़े लिखे लोगों का एक बड़ा तबका लव जिहाद के दृष्टिकोण को ही खारिज करता है। आप इस शब्द को कुछ समय के लिए छोड़ दीजिए। किंतु ऐसी घटनाएं बड़ी संख्या में हो रहीं हैं जहां एक मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को फंसाता है और उनका धर्म परिवर्तन कर निकाह करता है। बाद में उनको तलाक देता है या फिर लड़की ही तंग आकर छोड़ देती है। अनेक मामले ऐसे हैं जहां मुस्लिम युवक ने हिंदू नाम रखकर लड़की को फंसाया, उससे शादी भी कर ली और जब लड़की घर आई तो पता चला वह मुसलमान है। उसे फिर से धर्म परिवर्तन कर निकाह करने के लिए मजबूर किया गया या करने की कोशिश हुई। ऐसी प्रमाणित और न्यायालय द्वारा पुष्ट घटनाओं की लंबी सूची है। ऐसी भी घटनायें पहले आई हैं कि किसी ने लड़की को फंसाया, उनके साथ रहा और बाद में छोड़ दिया। 

ऐसा नहीं है कि लड़कियों के साथ लिव-इन में रहने के बाद उसे छोड़ने वाले गैर मुस्लिम समुदाय के नहीं है। हैं, किंतु इस तरह की दरिंदगी करने वाली घटना पहले नहीं हुई। इससे सहसा संदेह की सुई घूमती है कि आफताब अमीन कहीं कट्टर इस्लामी विचारों की मानसिकता वाला तो नहीं था। ऐसे लोगों के सामने मनुष्यता, इंसानियत, संवेदनशीलता या वचनबद्धता के कोई मायने नहीं होते। वह केवल अपने दृष्टिकोण से दीन की समझ के अनुसार ही लड़कियों से संबंध बनाते हैं। हाल के वर्षों में ऐसी घटनाएं आई है जब मुस्लिम नवजवानों के भीतर इस्लाम के नाम पर इस तरह की बातें भरी गई हैं जिनसे उन्हें लगे कि  गैरमुस्लिम लड़की को फंसाकर निकाह करना या उसके साथ रिश्ते बनाना उनके लिए मजहबी फर्ज हो। उनका ब्रेनवाश इस तरह से किया जाता है कि वह ऐसा करने के लिए किसी सीमा तक चले जाते हैं। संभव है उसने श्रद्धा को धर्म परिवर्तन के लिए कहा हो और वह उसके लिए तैयार नहीं हुई हो। इसमें कुछ ऐसी बातें हुई है जिसे बाहर आने के बाद आफताब अमीन के लिए कठिनाइयां पैदा हो जाती। या फिर श्रद्धा ने दूसरी लड़कियों के साथ इसी विचार के अनुरूप उसे संपर्क संबंध बनाते देखा हो और उसे इसकी पूरी असलियत समझ आ गई हो। उसने इसकी असलियत दुनिया के सामने लाने की धमकी भी दी हो। श्रद्धा की दोस्त बता रही है की आफताब उसकी हत्या कर सकता था इसी आशंका थी और उसने उसके परिवार को आगाह सतर्क भी किया था। सब पुलिस के पास भी जाना चाहते थे लेकिन श्रद्धा में ही किसी कारण रोक दिया था। श्रद्धा की आफताब हत्या कर सकता था यह आशंका कैसे पैदा हुई इसका उत्तर मिलना चाहिए।

 यह तो सोचना ही पड़ेगा कि आखिर हत्या कर टुकड़े-टुकड़े काटने के बाद वह दूसरी लड़कियों के साथ किस मानसिकता में संबंध बना रहा था? पुलिस बता सकती है कि उन लड़कियों में भी सभी या ज्यादातर गैर मुस्लिम ही होंगी। आफताब अमीन पुलिस की पूछताछ में इस बात को स्वीकार करता है या नहीं इसका पता भी कुछ दिनों में चल जाएगा। किंतु इस दृष्टि से जांच होनी चाहिए और वह नहीं स्वीकार करता तो नारको टेस्ट कराया जाना चाहिए। नारको टेस्ट के लिए वह तैयार नहीं होता तो न्यायालय से उसकी अनुमति ली जा सकती है। वास्तव में यह ऐसी घटना है जिसका पूरा सच देश और दुनिया के सामने आना चाहिए। इस तरह के वारदात की पुनरावृत्ति न हो इसलिए इसकी पूरी जानकारी आवश्यक है। 

अगर आफताब का व्यवहार मजहबी कट्टर सोच से नहीं निकली और इसके कारण कुछ और है तो भी इस तरह की क्रूरता को केवल सामान्य परिभाषा के तहत मानसिक व्याधियों की परिणति नहीं कहा जा सकता। दूसरी ओर यह पूरी घटना हम सबको काफी कुछ सोचने को फिर से बात करती है। आखिर परवरिश में ऐसी गलती कहां हो रही है कि नई पीढ़ी वास्तविक या तथाकथित प्यार के चक्कर में अपने माता-पिता तक के रिश्ते को नकारने किस सीमा तक चली जाती है? हमने कैसा समाज बना दिया है जहां हर कोई आप केंद्रित हो गया है? हर व्यक्ति यहां स्वयं को अकेला पाता है और अनेक समस्याओं की जड़ यही है। दूसरी ओर यह घटना नई पीढ़ी को भी अपने रवैये पर पुनर्विचार के लिए बाध्य करती है। जब श्रद्धा के पिता ने  आफताब के साथ उसके संबंधों को स्वीकार नहीं किया तो उसने कहा कि मैं 25 वर्ष की हो गई हूं और अपना भला बुरा सोच सकती हूं। इसके बाद वह उसके साथ लिव-इन में रहने लगी। ऐसी लड़कियों की बड़ी संख्या है जो घोषित उम्र के साथ बालिग होने के बाद माता-पिता की सलाह मशविरा या सहमति के बिना इस तरह के कदम उठातीं हैं जिनकी परिणति भयावह होती है। अनेक लड़कियों की पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई। उनके परिवार वालों के सामने इससे जो सामाजिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं वह अलग। हमारे यहां सामाजिक व्यवस्था में परिवार द्वारा तलाशे गए लड़के से लड़की की शादी की परंपरा सर्वाधिक सफल है। किंतु, अगर कोई लड़की किसी लड़के के साथ प्रेम विवाह करना चाहती है तो उसे परिवार के विरोध के काल में भी जिन निकट के रिश्तेदारों के साथ संवाद हो उनसे ठीक प्रकार से उसके और परिवार का पता कराना चाहिए। यही नहीं शादी करने के बाद भी उन रिश्तेदारों का आना - जाना अपने यहां रखना ही चाहिए। इससे आप अकेले नहीं होते और कमजोर नहीं पड़ते। ऐसा नहीं करना आपके और आपके परिवार के लिए जीवन भर की ट्रेजडी साबित हो सकती है।

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली 1100 92 , मोबाइल 98110 27208 


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