शुक्रवार, 30 सितंबर 2022

शास्त्री पार्क वार्ड 213 के बुलंद मस्जिद कॉलोनी में 50 अधिक लोगों ने आम आदमी पार्टी जॉइन की

गांधी नगर विधानसभा के शास्त्री पार्क वार्ड 213 के बुलंद मस्जिद कॉलोनी में आम आदमी पार्टी के गांधी नगर विधानसभा के संगठन मंत्री कमल अरोड़ा की अध्यक्षता में एक पंचायत का आयोजन किया गया जिसमें 50 अधिक लोगों ने आम आदमी पार्टी जॉइन की।
इस मौके पर आम आदमी पार्टी के गांधी नगर विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी नवीन चौधरी उर्फ दीपू चौधरी, विधानसभा के वीसीआई करन पुंडीर, पूर्व निगम पार्षद प्रत्याशी राजेश शर्मा, पूर्व मनोनीत पार्षद हसीब उल हसन राजू, मदन मोहन, मिंटू चंद्र झा, राशिद अली, कृष्णा नगर के वीसीआई अनिल शर्मा, डाक्टर पासा, लियाकत खान, मोहम्मद अनीस, अब्दुल जब्बार आदि मौजूद थे।
सभी ने आगामी निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी को जीतने की अपील की और आप सरकार के कार्यों से अवगत करवाया।
गांधी नगर विधानसभा के संगठन मंत्री कमल अरोड़ा ने कहा आम आदमी पार्टी के संयोजक, कट्टर ईमानदार नेता व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नीतियों को आदर्श मान कर आज 50 से ज्यादा साथियों ने आज आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली जिससे हमारा परिवार और बड़ा हुआ है।



मंगलवार, 27 सितंबर 2022

क्षेत्र के विकास के लिए शमां एनजीओ व जाफराबाद आरडब्लूए ने शासन प्रशासन के साथ जनता-संवाद का आयोजन किया

पूर्वी दिल्ली। उत्तर पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र की शमां एजुकेशनल एंड पॉलिटेक्निक सोसाइटी व जाफराबाद आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने दिल्ली पुलिस, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली सरकार के जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, बीएसईएस, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य विभाग, चुनाव विभाग आदि के बीच अपनी समस्या व सुझावों को साझा करते हुए शासन प्रशासन के साथ जनता- संवाद शीर्षक से एक आयोजन किया। जनता संवाद में जाफराबाद क्षेत्र के आम नागरिकों ने विधायक, निगम उपायुक्त तथा अन्य अधिकारियों के समक्ष अपनी अपनी समस्याएं तथा सुझाव रखे। 
संस्था के महासचिव डॉ फहीम बेग ने अपनी बात रखते हुए का कि आज जाफराबाद क्षेत्र के ओर से सभी विभागों तथा विधायक महोदय और निगम उपायुक्त महोदय को बुलाकर हमने अपने क्षेत्र की समस्याओं तथा उनके सुझावों को उनके समक्ष रखा। मुख्य तौर से इस क्षेत्र में अपराध की ओर आकर्षित हो रहे 12 वर्ष से 16 वर्ष के युवाओं को किस प्रकार से रोका जाए तथा जल बोर्ड द्वारा किए जा रहे कामों को शीघ्र निपटाया जाए। दिल्ली नगर निगम द्वारा क्षेत्र में स्वच्छता व सुंदरता को लेकर जागरूकता फैलाई जाए तथा गली मोहल्ले सड़कों पर आम जनता गंदगी ना फैलाएं और उनको जागरूक किया जाए।
डॉक्टर बेग ने विधायक और पीडब्ल्यूडी विभाग के समक्ष एक प्रस्ताव रखा जिसमें जाफराबाद रोड नंबर 66 दिल्ली मेट्रो रेल के खंभों पर देश की आजादी तथा देश की रक्षा में अपने प्राणों का बलिदान करने वाले स्वतंत्रता सेनानी अशफाकुल्लाह खान, बरकत मियां अंसारी, भगत सिंह, हसरत मोहानी, मौलाना असद मदनी, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, वीर अब्दुल हमीद, ब्रिगेडियर उस्मान, कैप्टन हनीफुद्दीन, मौलाना अबू कलाम आज़ाद आदि स्वतंत्रता सेनानियों तथा देश के सिपाहियों की तस्वीरों को तथा उनके जीवन परिचय को नई नस्ल से परिचित कराने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल के खंभों पर उकेरा जाए तथा रोड नंबर 66 के नाले की दीवारों को भी सुंदर भारत की झांकियों से सजाया जाए। शाहदरा उत्तरी ज़ोन के निगम उपायुक्त अमित शर्मा ने आम जनता से आह्वान करते हुए कहा कि हमारा निगम पिछले कई महीनों से स्वच्छता, सुंदरता और जागरूकता के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है और हम आपकी हर समस्या को सुनने आए हैं तथा उनके समाधान के लिए प्रयास करते रहेंगे। निगम उपायुक्त ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि आप अपने घरों का कूड़ा निगम के वाहनों में ही डालें तथा गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग करके डालें और हम मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों के खिलाफ युद्ध स्तर पर कार्य कर रहे हैं जिसमें आप सब लोगों का योगदान बेहद ज़रूरी  है।
विधायक अब्दुल रहमान ने सभी की समस्या और सुझाव सुनने के बाद कहा कि हम जनता के ऋणी हैं जिसने हमें अपने सीलमपुर विधानसभा क्षेत्र की सेवा के लिए चुना और हम निरंतर रात-दिन जनता के विकास, तरक्की और खुशहाली के लिए काम कर रहे हैं जैसा कि आज शमां एनजीओ और जाफराबाद आरडब्ल्यू द्वारा आयोजित जनता संवाद में जो समस्या और सुझाव सामने आए हैं उन पर आज से ही कार्य शुरू करेंगे और दिल्ली मेट्रो रेल के खंभों पर हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें उकेरी जाएंगी जिसके लिए हम पीडब्ल्यूडी और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से संपर्क स्थापित करके कार्य शुरू कराएंगे। सीवर,पानी,बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है और हम इसके लिए वचनबद्ध हैं। जनता संवाद की अध्यक्षता सरवर सिद्दीकी और सादिक  अली ने की। कार्यक्रम में कारी युसूफ अंसारी, मोहम्मद मेहरबान, मैडम निशा, नसरीन बेगम, सैफ उर रहमान, मोहम्मद अनीस, मोहम्मद अदनान, फैज अहमद, साबिर अली, हाजी शफीक, जावेद अख्तर मोहम्मद अनीस, सलीम मलिक,अबरार सैफी, काशिफ अंसारी, यूनुस इदरीसी, अनीस मलिक, मोहम्मद फहीम, अख्तर सिद्दीकी, हाजी वहाब, आदिल कुरेशी, दानिश अली, आसिफ इदरीसी, मोहम्मद जफर, मोहम्मद नावेद, नौशाद खान, शाहनवाज कादरी, अबरार सैफी, मौहम्मद अबू कमर, मोहम्मद असलम, सलीम इदरीसी, मोहम्मद इकराम, नासिर हुसैन, आबिद अंसारी, मौहम्मद फुरकान, शरीफ कुरैशी, फिरोज़ खान, सरकारी विभागों से उपेंद्र यादव, रामकिशन, मोहम्मद, शकील, अतुल बंसल, नईमुद्दीन, राहुल कुमार, सौरभ कुमार आदि उपस्थित रहे।




सोमवार, 26 सितंबर 2022

शुक्रवार, 23 सितंबर 2022

ज्ञानवापी को सुनवाई के योग्य मानने का फैसला महत्वपूर्ण

अवधेश कुमार

वाराणसी जिला न्यायालय द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद मामले को सुनवाई के योग्य  माननीय को गलत बताने वाले न्यायालय को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है । वास्तव में यह महत्वपूर्ण फैसला है। सामान्य तौर पर देखें तो कहा जा सकता है कि इतने सघन विवाद का मामला न्यायालय में है तो उसको सुनवाई के योग्य करार देना बिलकुल स्वाभाविक है। किंतु मुस्लिम पक्ष की ओर से मुकदमा लड़ रहे अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने इसी बात पर पहली कानूनी लड़ाई लड़ी कि यह मामला सुनवाई के योग्य है ही नहीं। जिस तरह के तर्क न्यायालय में दिए गए उनसे एकबारगी लगने लगा था कि कहीं मामला उलझ न जाए। मुस्लिम पक्ष इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय जा रहा है, किंतु इससे जिला न्यायालय में मामले की सुनवाई नहीं रुक सकती। यहां मुख्य मामले की सुनवाई जारी रहेगी। इस फैसले के बाद वाराणसी के गंगा घाट पर जैसा उत्सव का दृश्य दिखा और पूरे देश में हिंदुओं ने जैसा उत्साह प्रदर्शित किया उससे समझा जा सकता है कि ज्ञानवापी मामले पर किस तरह की सामूहिक भावना देश में मौजूद है।

आइए पहले यह देखें कि न्यायालय में क्या-क्या तर्क दिए गए। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि पूजा स्थल कानून, 1991 के अनुसार धर्म स्थल का स्वरूप नहीं बदला जा सकता। जैसा हम जानते हैं यह कानून बताता है कि 15 अगस्त, 1947 से पहले जो धर्म स्थल जैसा था वैसा ही रहेगा। हालांकि इसी कानून में उसके अपवाद भी दिए गए हैं। उनका यह भी कहना था कि ज्ञानवापी में सैकड़ों सालों से नमाज हो रही है इसलिए इस कानून की धारा 4 के तहत इस मामले में मुकदमे की सुनवाई को रोका जाना चाहिए। इनका एक तर्क यह भी था कि ज्ञानवापी वक्फ की संपत्ति है। वक्फ कानून की धारा 85 के अनुसार वक्फ संबंधी मामलों की सुनवाई सिविल न्यायालय में हो ही नहीं सकती। तीसरा तर्क यह दिया था कि 1983 के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कानून के प्रावधानों के तहत न्यायालय सुनवाई नहीं कर सकती उन्हें। इसके विरुद्ध हिंदू पक्ष ने तर्क दिया कि ज्ञानवापी की नींव में विश्वेश्वर का मंदिर है। ऊपर का जो ढांचा बिल्कुल अलग है। दो, जब तक किसी स्थान का धार्मिक स्वरूप तय नहीं हो जाता तब तक पूजा स्थल कानून प्रभावी नहीं माना जा सकता। यानी इस स्थान का धार्मिक स्वरूप क्या है यह मंदिर है या मस्जिद है जब तक यह तय नहीं होता तब तक कैसे आप उस कानून को प्रभावी मानेंगे। तीन, वक्फ के संबंध में हिंदू पक्ष ने दलील दिया कि औरंगजेब ने मस्जिद निर्माण के लिए वक्फ नहीं बनाया था। उसने ज्ञानवापी पर हमला कर उसे कब्जा किया था।

साफ है कि न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय का फैसला 26 पन्नों का है। न्यायालय ने पूजास्थल कानून के संदर्भ में भी अपना मत स्पष्ट किया है। इसने लिखा है कि हिंदू पक्ष का कहना है कि वे 15 अगस्त, 1947 के पहले से साल 1993 तक ज्ञानवापी में प्रतिदिन श्रृंगार गौरी की पूजा कर रहे थे। ऐसे में इस कानून की धारा 4 के अनुसार मामले की सुनवाई नहीं रोकी जा सकती। हिंदू पक्ष को अपने दावों को साबित करने के लिए साक्ष्य पेश करने का पूरा मौका मिलना चाहिए। वक्फ के बारे में न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि याची गैर मुस्लिम है और वह कानून से अनजान है। ऐसे में धारा 85 इस मामले में लागू नहीं हो सकती। याचिका में सिर्फ पूजा की इजाजत मांगी गई है संपत्ति का स्वामित्व नहीं। काशी विश्वनाथ मंदिर कानून ,1983 के संदर्भ में भी न्यायालय की टिप्पणी महत्वपूर्ण है। इसने स्पष्ट कहा है कि पूजा के अधिकार के दावे सुनने के लिए कानून में निषेध नहीं है। मुस्लिम पक्ष साबित करने में विफल रहा कि यह मामला विश्वनाथ मंदिर कानून के तहत आता है। जिला न्यायाधीश ने अपने फैसले के निष्कर्ष में लिखा है कि दलीलों और विश्लेषण को देखने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि यह मामला पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम ,1991, वक्फ अधिनियम, 1995 और उत्तर प्रदेश श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम ,1983 तथा बचाव पक्ष संख्या चार (अंजुमन इंतजामिया ) द्वारा दाखिल याचिका 35 सी के तहत वर्जित नहीं है। लिहाजा इसे निरस्त किया जाता है।

न्यायालय की टिप्पणियों और फैसले से साफ है कि मुस्लिम पक्ष ने मामले को लटकाने के लिए सारे तर्क दिए थे। सच यही है कि अभी तक ज्ञानवापी से संबंधित मामलों में मुस्लिम पक्ष की ओर से ऐसा कोई प्रमाण नहीं दिया गया जिनसे यह साबित होता हो कि हिंदुओं द्वारा मूल काशी विश्वनाथ मंदिर का दावा ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार गलत है। जैसा हम जानते हैं जिला न्यायालय के समक्ष यह मामला मां श्रृंगार गौरी की पूजा के अधिकार से संबंधित है। पिछले वर्ष पांच महिलाओं राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक ने याचिका दायर कर प्रतिदिन पूजा करने का अधिकार मांगा था। हालांकि अब हिंदू पक्ष की ओर से मुकदमा लड़ने वालों के बीच व्यापक मतभेद हो गए हैं। इसकी मुख्य लड़ाई सनातन संस्था लड़ रही थी जिसने पांचों महिलाओं द्वारा याचिका डलवाया था। हरिशंकर जैन,विष्णु जैन तथा इनके साथ खड़े कुछ लोगों से मतभेद के कारण इस संस्था ने इन दोनों को मुकदमे से अलग कर दिया था। बाद में कुछ लोगों ने इनमें से चार महिलाओं को तोड़कर अपने साथ लिया तथा उनके वकालतनामा पर दोनों पिता-पुत्र मुकदमा लड़ रहे हैं। लेकिन इससे न्यायालय को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उसके सामने पांचों महिलाओं का केस है। जब न्यायालय ने मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे का आदेश दिया था तब भी मुस्लिम पक्ष ने इसे रोकने के लिए पूरा जोर लगाया था। उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। उच्चतम न्यायालय ने उनकी दलीलों को खारिज करके वीडियोग्राफी पर रोक लगाने से इनकार किया। बस केवल मामला सामान्य सिविल न्यायालय से जिला न्यायालय को भेज दिया। उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि कोई वरिष्ठ न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई करे। उसी में यह कहा गया था कि वही तय करेंगे कि हिंदू पक्ष की याचिका सुनवाई के योग्य है या नहीं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ज्ञानवापी मस्जिद के स्वामित्व को लेकर चल रहा है जिसकी सुनवाई 28 सितंबर को होगी। उसके फैसले से तय होगा कि मस्जिद का धार्मिक स्वरूप क्या है।

तो यहां से श्रृंगार गौरी के पूजन के अधिकार का मामला फिर आरंभ हुआ है। हालांकि पूजन के अधिकार पर बहस में यह भी तय होगा कि वह वाकई मस्जिद है या मंदिर। सच कहा जाए तो न्यायालय द्वारा वीडियोग्राफी कराने का उद्देश्य यही था कि देख लिया जाए वहां अंदर क्या है। जितने दृश्य सामने आए हैं उनसे बहुत साफ दिखता है कि अंदर के निर्माण को मस्जिद मानना कठिन है। हिंदुओं के शिवलिंग के दावे के विपरीत उसे फव्वारा बताने पर बहस अभी खत्म नहीं हुआ है। 20 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आ सकता है। उच्चतम न्यायालय ने जिला न्यायालय को मामले की सुनवाई का आदेश देते हुए यही तिथि तय की थी। हालांकि जिला न्यायालय ने जो टिप्पणियां की है उनको देखने के बाद यह मानना मुश्किल है कि उच्चतम न्यायालय सुनवाई के विरुद्ध फैसला दे सकता है।जैसा हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि अब हम मस्जिद के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सर्वे की मांग करेंगे। इसके साथ जो सामग्री मिली है खासकर शिवलिंग उसके कार्बन डेटिंग की मांग भी की जाएगी ताकि उसकी आयु सीमा का निर्धारण किया जा सके। कहने का तात्पर्य कि मामला मां श्रृंगार गौरी की पूजा का जरूर है लेकिन इसी में स्वयमेव निहित था कि वह मस्जिद है या मंदिर। जब यह स्पष्ट हो जाएगा तभी तय होगा कि मां श्रृंगार गौरी की पूजा स्थाई रूप से प्रतिदिन होनी चाहिए या नहीं। उच्च न्यायालय ने 30 अगस्त को 9 सितंबर, 2021 के अंतरिम आदेश को 30 सितंबर , 2022 तक के लिए बढ़ा दिया था, जिसमें ज्ञानवापी परिसर के एक समग्र भौतिक सर्वेक्षण कराने के वाराणसी के न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी गई थी।

तो यह देखना होगा कि उच्च न्यायालय 28 सितंबर को इस संदर्भ में क्या आदेश देता है।  जिला न्यायालय में सुनवाई 22 सितंबर से शुरू हो गई। हिंदू पक्ष ने समग्र सर्वेक्षण और कार्बन डेटिंग की मांग किया है। इस पर न्यायालय को फैसला देना है। कुल मिलाकर ज्ञानवापी का मामला अब महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। यह मामला जितना संवेदनशील है उसके ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों को संजय बरतने की आवश्यकता है। जब फैसला न्यायालय की हो को ही देना है तो अनावश्यक बयानबाजी या सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन से बिल्कुल बचना चाहिए। न्यायालय जो भी फैसला दे उसे दोनों पक्ष स्वीकार करें इसी में सबका हित है।

गुरुवार, 22 सितंबर 2022

दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों को रोकने के लिए दिल्ली नगर निगम और जाफराबाद आरडब्ल्यूए की विशेष बैठक हुई

दिल्ली नगर निगम शाहदरा उत्तरी जोन के अधिकारियों, कर्मचारियों, मेट्रो वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और जाफराबाद आरडब्लूए के सदस्यों की एक विशेष बैठक जाफराबाद गली नंबर 39/4 में अबरार सैफी के निवास पर हुई जिसकी अध्यक्षता सरवर सिद्दीकी ने  की। इस बैठक में मेट्रो वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शालू त्रिपाठी ने गीला कूड़ा और सूखा कूड़ा किस तरह से निपटाया जाए उसकी जानकारी दी।  उन्होंने बताया कि आज हमारी पूरी दिल्ली में कूड़े के तीन पहाड़ बन चुके हैं। यह कूड़े के पहाड़ भलस्वा डेरी, गाजीपुर और ओखला में हैं जो लगभग कुतुब मीनार के बराबर बन चुके हैं।

वर्ष 1984 से इन पहाड़ों को बनाने का सिलसिला शुरू हुआ जो आज अपनी सीमा पार कर चुके हैं। इन कूड़े के पहाड़ों के कारण पूरी दिल्ली में बीमारियां, बदबू और गंदगी  के अंबार लगे हुए हैं। इसलिए आज हम आपके पास आए हैं कि आप सभी लोग अपने ही घरों में कूड़े को अलग-अलग से रखना शुरू कर लें। गीला कूड़ा जैसे बचा हुआ खाना, सड़े हुए फल व सब्ज़ी, बासी फूल, पौधों के मुरझाए हुए पत्ते आदि को हरे डिब्बे में रखें। सूखा कूड़ा जैसे पुराना प्लास्टिक, लोहा, कागज़, बिस्कुट, नमकीन, दूध आदि की पन्नियां नीले डिब्बे में रखें और घरों व कारखानों से निकलने वाला  खतरनाक कूड़ा जैसे स्क्रैप, हॉस्पिटल का कचरा, खराब दवाइयां, ड्रेसिंग आदि काले डब्बे में ही रखें  ताकि यह कूड़े के पहाड़ जितनी तेजी से बढ़ रहे हैं उनको रोका जा सके।

नगर निगम के इंस्पेक्टर अतुल बंसल ने आम लोगों से निवेदन करते हुए कहा के इस बढ़ती हुई कूड़े की बीमारी को आप और हम सब मिलकर रोक सकते हैं इसलिए समय-समय पर हम आपसे बैठक करते हैं और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हैं। आरडब्लूए जाफराबाद के महासचिव डाक्टर फहीम बेग ने कहा कि मेरा कूड़ा मेरी जिम्मेदारी जब तक हम नहीं मानेंगे तब तक हम अपने भविष्य को खतरनाक तरीके से बर्बाद करते रहेंगे। आज जाफराबाद आरडब्ल्यूए ने विशेष तौर से शाहदरा जोन के उपायुक्त अमित शर्मा से निवेदन किया था कि हम अपने क्षेत्र में गंदगी को दूर करने के लिए सफाई अभियान हर घर पर दस्तक देकर चलाना चाहते हैं तो आज निगम की टीम और मेट्रो कंपनी की टीम हमारे बीच में आई है। इसलिए हम उनके समक्ष निम्न समस्याएं जैसे कूड़ा उठाने वाले टिप्पर कमी, टिप्पर का सायरन नहीं बजाया जाता, हेल्पर घरों से कूड़ा लेने से आना कानी करते हैं, समय से कूड़ा नहीं उठाया जाता, उद्यान विभाग और मेंटिनेंस विभाग का धरातल पर नगण्य होना आदि रख रहे हैं। 
आपसे आशा करते हैं कि इन समस्याओं का निवारण शीघ्र होगा बाकी जनता की भागीदारी को लेकर हम आश्वासन दिलाते हैं कि हम अपने क्षेत्र में गंदगी को दूर करने के लिए प्रयास करेंगे क्योंकि जिस प्रकार से दिल्ली में कूड़े के पहाड़ तेजी के साथ बढ़ रहे हैं यह हमारे आने वाली नस्लों के लिए नुकसानदेह हैं, गंदगी के पहाड़ों से  मच्छर फ़ैल रहे हैं, मिट्टी व वायु प्रदूषित हो रहे हैं और समाज में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही है आज हम यह निर्णय लेते हैं कि जाफराबाद की गली नंबर 39/4 को हम एक मॉडल गली बनाएंगे इसे स्वच्छ, सुंदर और सभी क्षेत्र के लिए एक मिसाल बनाएंगे जिसमें हमें उपायुक्त महोदय और निगम के सभी अधिकारियों कर्मचारी का साथ चाहिए ताकि हम यह मिशन पूरा कर सकें। इस मौके पर सादिक अली, हाजी शफीक सैफी, अबरार सैफी आदि ने भी अपनी अपनी बात रखें। श्रीमती निशा ने भी गंदगी से लड़ने के लिए अपने सुझाव रखे । इस बैठक में सादिक अली, हाजी शफीक सैफी,साबिर अली ,मोहम्मद नफीस, मोहम्मद अनीस,, असलम, काशिफ अंसारी, आफाक, नगर निगम के एएसआई अतुल बंसल, सुपरवाइजर नईमुद्दीन, मोहम्मद अयूब,विकास, राजकुमार मेट्रो कंपनी की शालू त्रिपाठी,जसविंदर कौर,शारदा चौहान, अमीनुद्दीन आदि उपस्थित रहे।

 




 

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